• मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष न्यायमूर्ति श्री नरेन्द्र कुमार जैन ने मानव अधिकार हनन से जुड़े दो मामलों में संज्ञान लेकर संबंधितों से प्रतिवेदन मांगा है।
  • हमीदिया में इलाज के दौरान जेलबंदी की मौत

भोपाल शहर के हमीदिया अस्पताल में भर्ती एक जेलबंदी की इलाज के दौरान मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक लक्ष्मी नारायण केन्द्रीय जेल, भोपाल में बंद था। बीमारी के कारण उसे 31 अगस्त को हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 18 सितम्बर की सुबह उसने दम तोड़ दिया। मृतक अशोका गार्डन का रहने वाला था। इस मामले में आयोग ने पुलिस महानिदेशक, जेल विभाग, म.प्र. एवं केन्द्रीय जेल अधीक्षक, भोपाल एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से दो माह में घटना का प्रतिवेदन मांगा है।

बुजुर्ग के शव के नाक, कान और पैर कुतर गये चूहे
इन्दौर शहर में एमवायएच की मच्र्युरी में तीन शवों के साथ अमानवीयता के बाद अब निजी अस्पताल में दुर्दशा का मामला सामने आया है। बीते सोमवार को अन्नपूर्णा रोड स्थित यूनिक हाॅस्पिटल में स्व. श्री नवीनचंद जैन के शव के नाक, कान और पैरों की उंगलियां चूहे कुतर गये। इसे लेकर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही और संवेदनहीनता का आरोप लगाये। मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने एडीएम को मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिये हैं। लापरवाही और संवेदनहीनता के बाद भी अस्पताल ने अड़ियल रूख बनाये रखा। परिजन को शव तभी सौंपा, जब उन्होंने एक लाख रूपये का बिल चुकाया। स्व. श्री जैन की पोती प्रज्ञा ने बताया पिता प्रकाश जैन अस्पताल के डायरेक्टर डाॅ. प्रमोद नीमा से मिलने पहुंचे तो वे बार-बार हाथ जोड़कर यही कहते रहे कि इसमें कुछ नहीं कर सकता। मैं हाथ जोड़कर माफी मांगता हूं। हमसे गलती हुई है और मैं माफी मांगता हूं। आज तक हमारे यहां ऐसा नहीं हुआ।
  

 उल्लेखनीय है कि इतवारिया बाज़ार, इन्दौर निवासी नवीनचंद जैन को सांस लेने में तकलीफ और निमोनिया के चलते 17 सितम्बर को यूनिक हाॅस्पिटल में भर्ती कराया गया था। उनकी पोती प्रज्ञा ने बताया रविवार की रात डाॅ. रूपेश मोदी का फोन आया। उन्होंने कहा हालत गंभीर हो रही है। उन्होंने पापा से अंडरटेकिंग फार्म पर हस्ताक्षर करने को कहा। रात करीब तीन बजे हमें मौत की सूचना दी गई। अगले दिन सुबह 8ः30 बजे चार लोगों को पीपीई किट में शव लेने अस्पताल बुलाया। हम सुबह 7 बजे ही पहुंच गये, लेकिन हमें 4 से 6 घंटे तक इंतज़ार करवाया। अस्पताल के पास शव वाहन की व्यवस्था तक नहीं थी। प्रज्ञा ने बताया कि उसके दादाजी के शव की उंगलियां पूरी गायब थी। चूहे एक कान और नाक बुरी तरह से कुतर चुके थे। आंखे भी बुरी तरह खराब हो चुकीं थीं। इस गंभीर मामले में आयोग ने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी तथा अधीक्षक, एमवाय हाॅस्पिटल, इन्दौर से तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है।