इंदौर।मप्र में अगले कुछ महीनों में स्थानीय निकाय और पंचायतों के चुनाव की सुगबुगाहट शुरु होना है। ऐसे में सहकारिता क्षेत्र के पहले बड़े इंदौर दुग्ध संघ अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस को एकतरफा सफलता मिली है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने गौतमपुरा (देपालपुर) के अपने समर्थक मोती सिंह पटेल को इस चुनाव में कांग्रेस का अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर एक साल पहले उनसे किए वादे को भी पूरा किया है।तब देपालपुर विधानसभा से चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने फार्म भरा था जबकि दिग्विजय सिंह यहां से विशाल पटेल को वादा कर चुके थे।नाथ और सिंह की समझाइश पर मोती सिंह ने नाम वापस ले लिया था।
मांगल्या स्थित इंदौर दुग्ध संघ को 9 जिलों-इंदौर, खरगोन, धार, बड़वानी, झाबुआ, आलीराजपुर, खंडवा, बुरहानपुर और देवास (उज्जैन संभाग)-के दुग्ध उत्पादक किसानों से हर रोज करीब 2.80लाख लीटर दूध प्राप्त होता है।बीते 15 साल से दुग्ध संघ पर भाजपा का कब्जा था और देपालपुर क्षेत्र के ही उमराव सिंह मौर्य अध्यक्ष थे।चुनाव प्रक्रिया शुरु होने पर मौर्य ने 12 ग्रुपों के परिसीमन को चुनौती देने वाली अपील भी की थी लेकिन सहकारिता विभाग ने खारिज कर दिया।
दुग्ध संघ अध्यक्ष चुनाव में प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सीपी शेखर ने मोती सिंह पटेल को अधिकृत प्रत्याशी घोषित किए जाने का पत्र भी भेज दिया था लेकिन दिग्विजय सिंह से जुड़े  सहकारिता मंत्री गोविंद सिंह के समर्थक तंवर सिंह चौहान के बागी तेवर का अंदाज लग जाने से शहर कांग्रेस कार्यकारी अध्यक्ष विनय बाकलीवाल (कमलनाथ के प्रतिनिधि) और प्रदेश कांग्रेस सचिव राजेश चौकसे (सज्जन वर्मा प्रतिनिधि) न सिर्फ गतिविधियों पर नजर रखे हुए थे बल्कि तंवर सिंह को बता भी चुके थे कि अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ लड़े तो निष्कासन तय है और भविष्य की संभावनाएं भी समाप्त हो जाएंगी।यही नहीं तंवर सिंह के साथ गए 5 संचालकों में से विधायक राज्यवर्द्धन सिंह दत्तीगांव, मांधाता विधायक नारायण पटेल और जिला सहकारी बैंक अध्यक्ष कुलदीप बुंदेला अपने समर्थक संचालकों को चेतावनी दे चुके थे कि पार्टी आदेश के विरुद्ध काम किया तो ठीक नहीं होगा।सारे मतभेद भुलाकर जब विधायक विशाल पटेल भी मोती सिंह के पक्ष में सक्रिय हो गए तो तंवर सिंह के लिए नामांकन पत्र वापस लेना मजबूरी हो गई। यही कारण रहा कि सभी संचालकों में बनी सर्वानुमति से मोती सिंह अध्यक्ष घोषित कर दिए गए। यदि चुनाव की नौबत बनती भी तो 5 संचालक मोती सिंह के साथ थे और उक्त 3 संचालक भी उन्हें वोट देते।संचालक चुनाव में सभी मत अपने पक्ष में करवाने के साथ ही मोती सिंह अपने साथ 7 संचालकों को मुख्यमंत्री से भी मिलवा चुके थे।मंत्री सज्जन वर्मा और जीतू पटवारी भी उनके नाम पर राजी हो गए थे, यही सारे कारण रहे कि  जीतने की विधिवत घोषणा के पहले सेही उन्हें बधाइयां मिलने लगी थीं।
मप्र के छह दुग्ध संघों में नंबर वन इंदौर दुग्ध संघ अध्यक्ष का पद भी है मलाईदार
मध्य प्रदेश के छह दुग्ध संघों में इंदौर दुग्ध संघ टर्न ओवर के मामले में नंबर वन है।इसका वार्षिक टर्न ओवर करीब 700 करोड़ रुपए है।9 जिलों की करीब 45 विधानसभा क्षेत्रों के लाखो दूध उत्पादक परिवार इससे सीधे जुड़े हैं।यही वजह है कि
इदौर दुग्ध संघ अध्यक्ष का पद राजनीतिक रूप से जितना महत्वपूर्ण है उतना ही मलाईदार भी है।अन्य पांच दुग्ध संघों में भोपाल दुग्ध संघ दूसरे नंबर पर है। फिर उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर और बुंदेलखंड दुग्ध संघ हैं।
दूध उत्पादक किसानों ने कांग्रेस समर्थक संचालकों के पक्ष में मतदान किया तो उसकी एक बड़ी वजह यह भी कि कमलनाथ ने वचन पत्र के इस वादे को पूरा कर दिया कि दूध के प्रति फेट में 50 पैसे की वृद्धि करेंगे। यह वृद्धि अब 70पैसे प्रति फेट पहुंच जाने से दूध उत्पादकों को 10फेट पर 7 रु तक मिलने लगे हैं।अध्यक्ष पद के लिए दो दावेदारों में मोती सिंह पटेल यदि तंवर सिंह के मुकाबले आगे रहे तो कलोता समाज के संचालकों की एकजुटता भी काम आई है।उनकी जीत आसान बनाने वाले तंवर सिंह चौहान को हाथोंहाथ मप्र दुग्ध संघ का प्रतिनिधि बनाकर उनके त्याग का सम्मान कर दिया गया है।
सहायक आयुक्त-चुनाव अधिकारी सुरेश सांगले ने निर्वाचित संचालक मंडल की घोषणा करते हुए मोती सिंह पिता छीतर सिंह पटेल को अध्यक्ष तथा तंवर सिंह हरक सिंह चौहान को मप्र दुग्ध संघ प्रतिनिधि, विक्रम हीरालाल मुकाती मप्र राज्य सहकारी संघ और जितेंद्र रामलाल सोनी इंदौर प्रीमियर बैंक प्रतिनिधि बनाए गए हैं। बाकी संचालक हैं रामेश्वर दयाराम गुर्जर, कृपाल सिंह उमराव सिंह, प्रह्लाद अनोप सिंह पटेल, रामेश्वर दुलाजी रघुवंशी, राजेंद्र सिंह दरबार सिंह, जगदीश मोतीलाल जाट, सुरेश शंकर सिंह पटेल, किशोर रूपाजी परिहार और महेंद्र रामदास चौधरी।
कहने को तो 12 संचालकों में से अध्यक्ष का चुनाव हुआ लेकिन एक एक संचालक के कम से कम दो सौ समर्थकों के साथ ही विधायक विशाल पटेल, दत्तीगांव, नारायण पटेल, विधायक शेरा भैया के साथ ही जिला अध्यक्ष सदाशिव यादव, विनय बाकलीवाल,राजेश चौकसे, अनिल यादव, अमन बजाज, अफसर पटेल, अमित चौरसिया, शेखर पटेल, बंते यादव के साथ भी ढेरों समर्थक थे।अचानक किसी तरह के तनाव की स्थिति न बन जाए इसे देखते हुए भारी मात्रा में पुलिस बल भी शाम तक लगा रहा।
घी गिरा भी तो खिचड़ी में, गौतमपुरा से फिर अध्यक्ष
भाजपा शासन के वक्त सर्वाधिक 13 साल अध्यक्ष रहे उमराव सिंह मौर्य के छोटे भाई सरदार सिंह (सरपंच बछोड़ा पंचायत) के मोती सिंह साढू भाई हैं।मौर्य ने जब पद संभाला तब 76 करोड़ टर्न ओवर वाले दुग्ध संघ को मौर्य 700 करोड़ तक ले गए थे। दुग्ध उत्पादक परिवारों, कर्मचारियों के हित की योजनाएं भी लागू की थीं।मौर्य से रिश्तेदारी के साथ ही पटेल भी गौतमपुरा से ही हैं।