भोपाल । खेती-किसानी को अब तक पुरुषों का ही क्षेत्र मामना जाता है, लेकिन अब बेटियों के कदम इस क्षेत्र में बढ़ते रहे हैं। खासकर कृषि से जुड़े अध्ययन के क्षेत्र में। राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय से बैचलर इन साइंस-एग्रीकल्चर करने वाले के पांच विद्यार्थियों को कनाडा जाकर कृषि और उद्यानिकी की एडवांस तकनीक सीखने का मौका मिला है। इनमें से चार छात्राएं हैं, जो प्रदेश के ग्वालियर के गोहद, भोपाल, छिंदवाड़ा और सतना की रहने वाली हैं। इन विद्यार्थियों का स्नातक चार की बजाय पांच वर्षो में पूरा होगा। पहले तीन साल छात्र विश्वविद्यालय में पढ़ेंगे। अगले दो साल कनाडा जाने का मौका मिलेगा। इन दो सालों में एक साल का खर्च वल्र्ड बैंक उठाएगी और एक साल का खर्च छात्र को स्वयं वहन करना होगा। कृषि विश्वविद्यालय ने नवंबर 2020 में कनाडा की डलहौजी यूनिवर्सिटी के साथ एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) साइन किया था। इसके तहत 2021 बैच के पांच विद्यार्थियों का चयन पिछले पांच सेमेस्टर में 7.5 सीजीपीए अंक हासिल करने पर हुआ है। इसके बाद इन छात्रों का साक्षात्कार हुआ। जिसे क्लियर करने के बाद यह सभी जनवरी के दूसरे सप्ताह में कनाडा की डलहौजी यूनिवर्सिटी में अध्ययन के लिए रवाना होंगे। विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के प्रो. डा अखिलेश सिंह का कहना है कि नेशनल एग्रीकल्चर हायर एजुकेशन प्रोग्राम (नाहेप) वल्र्ड बैंक और भारत सरकार के माध्यम से यह अध्ययन शुरू हुआ है। यह आइसीएआर के माध्यम से प्रोजेक्ट मिला है। जिसमें छात्रों को स्किल डेवलमेंट कराने का उद्देश्य है। इसमें एक साथ दो देश की ड्यूल डिग्री एग्रीकल्चर और क्रॉप साइंस की पांच साल की दी जाएगी। इसके अलावा कृषि विश्वविद्यालय की फैकल्टी को भी स्किल डेवलपमेंट के लिए भेजा जाएगा।

इनका कहना है
पहली बार कृषि छात्रों को विदेश में पढ़ाई करने का मौका आइसीएआर की पहल से मिल रहा है। वह कनाडा में उन्नत खेती व कृषि के क्षेत्र में नई तकनीक सीखेंगे। जिसका लाभ उनके लौटने पर किसानों को मिलेगा। एक साल का खर्च वल्र्ड बैंक उठा रहा है और एक साल का खर्च छात्र को उठाना होगा।
डा.एसके राव, कुलपति, राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विवि ग्वालियर