दीपक बिड़ला, भोपाल
कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते इधर-उधर फंसे मजदूरों की वापसी का निर्णय सरकारों द्वारा लिया गया है। यह निर्णय निश्चित रूप से वक्त की नजाकत थी और लेना भी चाहिए था, लेकिन सरकारों ने यह निर्णय लेने में देरी कर दी। अब मध्यप्रदेश सरकार सहित अन्य राज्यों की सरकारें अपने-अपने राज्यों के मजदूरों को उन राज्यों से वापस ला रही है, जहां पर वे काम-धंधे की तलाश में गए थे। अचानक देश में आए कोरोना वायरस के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन की घोषणा कर दी और जो जहां था, वहीं पर फंस गया। लॉकडाउन के करीब 45 दिनों के बाद भी कई मजदूर अब भी दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं या फिर वे पैदल ही अपने घरों की ओर निकल पड़े हैं। सरकार ने करीब 300 श्रमिक स्पेशल रेलगाड़ियां चलाई हैं, जो इन मजदूरों को अपने-अपने राज्यों में भेजने का काम कर रही है। मध्यप्रदेश में अब तक दूसरे राज्यों में फंसे कितने मजदूर वापस आ चुके हैं, यह आंकड़ा तो सरकार के पास भी नहीं है, लेकिन सरकार दावा कर रही है कि अब तक लाखों मजदूरों को मध्यप्रदेश लाया जा चुका है।
मजदूरों को लेकर सरकार ने इतनी देरी से निर्णय क्यों लिया? यह सवाल मन में उठना लाजिमी है। दरअसल मन में यह भाव भी आता है कि कहीं यह निर्णय भी तो राजनीति से प्रेरित नहीं है। हो सकता है कि सरकार इस मामले में भी वाहवाही लूटना चाहती है कि हम सभी मजदूरों को सकुशल वापस ले आए हैं। देश में यह समय ऐसा है, जहां हर कोई चाहता है कि वह अपने घर में ही रहे। ऐसे में बाहर फंसे लोगों की भी अपने घर वापसी की लालसा बढ़ती जा रही है। यही कारण है कि वे अपने परिवारों के साथ पैदल ही घर की ओर निकल पड़े हैं। दरअसल सरकारों का निर्णय तो सही है, लेकिन यह निर्णय लेने में बहुत देर की गई है। इस समय कोरोना वायरस का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। लगातार इसके पॉजिटिव मरीज सामने आ रहे हैं और लग•ाग हर जगह इसके मरीजों की संख्या बढ़ रही है। महाराष्ट्र सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। ऐसे में ही सरकारों ने ट्रेन के जरिए इन मजदूरों को वापस लाने की कवायद शुरू की है, लेकिन इसके कारण अब कोरोना वायरस का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। अब इसकी चपेट में वे क्षेत्र भी आ जाएंगे, जहां पर अब तक लोग अपने को बेहद सकुशल समझ रहे हैं। जब से सरकार ने ग्रीन जोन वाले क्षेत्रों में लॉकडाउन में छूट दी है, तब से वे जिले भी अब आॅरेंज जोन में आ गए हैं। यहां भी कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज सामने आ रहे हैं। यदि सरकार को यह निर्णय लेना ही था तो पहले लिया जाने चाहिए था। या फिर अभी इस निर्णय को कुछ समय के लिए टाल देना चाहिए था। अब केंद्र सरकार ने ट्रेनों को चलाने का फैसला किया है। एक-दो दिनों में कुछ गाड़ियों पटरी पर दौड़ने लगेंगी, लेकिन क्या यह निर्णय कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए कारगर साबित होंगे?
केंद्र सरकार ने लॉकडाउन का निर्णय लेकर कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए उचित कदम उठाया था। इसके बाद तीन बार लॉकडाउन बढ़ाया गया। तीसरे लॉकडाउन के साथ ही कई तरह की छूट भी दे दी गई। वह भी सही है, लेकिन कुछ गलतियों को दोहराने में भी सरकार पीछे नहीं रही। जिसके कारण देश में कोरोना वायरस की एंट्री हुई वे देश के बाहर से आने वाले लोग ही थे। उस समय सरकार ने इन लोगों की जांच एयरपोर्ट पर ही की थी और इन्हें स्वस्थ बताकर घर जाने दिया था, लेकिन बाद में ये ही लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। यदि उसी समय इन बाहर से आने वाले लोगों को एयरपोर्ट के आसपास ही कोरोंनटाइन कर दिया गया होता तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती, जो वर्तमान में देश में बनी हुई है। अब सरकार ने फिर से स्पेशल विमानों के जरिए विदेश में रहने वाले भारतीयों को लाने की शुरुआत की है, लेकिन क्या यह निर्णय सही है? ऐसा लगता है कि सरकार ने यह निर्णय भी गलत लिया है। जो लोग अभी विदेशों में रह रहे हैं, उन्हें अभी वहीं रहने दिया जाता तो ज्यादा बेहतर होता, क्योंकि हो सकता है कि अब ये लोग यहां आकर इस संक्रमण को और ज्यादा फैला दें। यह भी हो सकता है कि ये लोग अपने परिवारों के लिए ही घातक सिद्ध न हो जाएं। लॉकडाउन के दौरान सरकार द्वारा लिए जा रहे कुछ निर्णय तो अभी समझ से परे ही लग रहे हैं। यदि सरकार ऐसे निर्णयों को लेने में जल्दबाजी न करें तो बेहतर होगा। कहीं सरकार के ये निर्णय इस महामारी को बढ़ाने की दिशा में ही कारगर न सिद्ध हो जाएं।