दीपक बिड़ला, भोपाल
कोरोना वायरस की आग देश में इस तरह से फैली है कि पता नहीं इसकी आंच में कब तक तपना पड़े। यह वायरस पूरे देश सहित मध्यप्रदेश के लिए एक दंश बन गया है। खासकर राजधानी भोपाल और आर्थिक राजधानी इंदौर के लिए तो यह वायरस एक ऐसा नासूर बनकर सामने आया है, जिससे निपटने के लिए सरकार की तैयारियां भी बेहद कमजोर है। देखा जाए तो यह वायरस सरकार की लापरवाही का ही परिणाम है, जो आज पूरा प्रदेश भोग रहा है। लापरवाही से भी सबक नहीं लेते हुए सरकार इस लापरवाही को फिर से दोहराने की तैयारी कर रही है। कोरोना वायरस की चपेट में सबसे पहले चीन आया था। चीन से ही यह वायरस निकला है, लेकिन चीन ने इस वायरस पर तेजी से काबू भी पा लिया और अब वह तो बेहतर स्थिति में है, लेकिन दुनिया के कई देशों सहित भारत इस वायरस से अब भी लड़ रहा है। शुरुआती लापरवाही हमारे सिस्टम की है। जिस समय कोरोना पैर पसार रहा था, उस समय चीन, अमेरिका सहित अन्य देशों से भारत में कई लोग आए, लेकिन इन लोगों की सरकार ने स्क्रीनिंग करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर ली और फिर इस वायरस ने देश में अपने पैर जमा लिए। यदि सरकार के सलाहकार उस समय हवाई अड्डों पर ही इन लोगों को रोक लेने की सलाह दे देते तो शायद यह भयावह स्थिति नहीं बनती।

खैर... अब मध्यप्रदेश की बात करते हैं। मध्यप्रदेश में जिस समय कोरोना अपने पैर पसार रहा था उस समय भाजपा-कांग्रेस में कुर्सी की जंग चल रही थी। इस कुर्सी की लड़ाई के चक्कर में न तो सरकार इस पर ध्यान दे पाई और न ही सरकार को चलाने वाले अधिकारी इस तरफ अपना ध्यान केंद्रित कर पाए। जब ध्यान केंद्रित किया तो स्थिति ज्यादा बिगड़ने लगी। थोड़ी कसर थी तो वह स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने पूरी कर दी। शेष कमी को जमातियोें ने पूरा कर दिया। अब मध्यप्रदेश में कोरोना का कहर हर तरफ से बढ़ने लगा। इसके बाद कमान संभालने के लिए शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री की कमान सौंपी और फिर शुरू हुआ कोरोना से लड़ने और प्रदेश की जनता को इससे बचाने की कवायद का सिलसिला, लेकिन फिर भी इस पर काबू नहीं पाया जा सका है। कुछ जिलों में कोरोना को लेकर सख्ती की गई तो इसका ही परिणाम रहा कि वे जिले अब तक तो ग्रीन जोन में हैं, लेकिन केंद्रीय गृह मंत्रालय के आदेश के बाद अब इन ग्रीन जिलों में कामकाज शुरू हो गया है, लेकिन कहीं यह जल्दबाजी फिर से वही स्थिति निर्मित न कर दे, जो पहले बनी हुई थी। कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए उत्तरप्रदेश सहित अन्य राज्यों ने तो कई अहम कदम उठाए, कई तरह की मदद शुरू की, बाहर फंसे हुए लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए, लेकिन इस काम में भी मध्यप्रदेश काफी देर बाद जागा। कोरोना वायरस को लेकर जो गलती प्रदेश की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने की, उसी गलती को वर्तमान की भाजपा सरकार भी दोहराने जा रही है। ग्रीन जोन वाले जिलों में छूट देकर कहीं ये जिले भी संकट में न फंस जाए। भोपाल, इंदौर, खंडवा, खरगौन, होशंगाबाद सहित अन्य जिले इस समय रेड जोन में है। यहां पर लगातार कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन सरकार ने भोपाल से सटे हुए जिले सीहोर, राजगढ़ को कई तरह की छूट दे दी है। इसी तरह अन्य जिलों में भी कई तरह की गतिविधियां शुरू की गई हैं, लेकिन सरकार का यह निर्णय कहीं प्रदेश की जनता पर भारी न पड़ जाए।

प्रदेश की राजधानी भोपाल अब तक गैसकांड के दंश से बाहर नहीं आ पाई है और अब कोरोना वायरस की चपेट में आ गई है।  2-3 दिसंबर 1984 की दरमियानी रात को जब गैसकांड हुआ था उस समय भी किसी ने नहीं सोचा था कि यह रात उनके लिए इतनी भयावह रात होगी। अब कोरोना वायरस ने फिर से राजधानीवासियों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं। हालांकि यह चिंता की लकीरें पूरे प्रदेश सहित देशभर में साफ-साफ देखी जा रही है। सरकार को अपने निर्णय पर फिर से विचार करना चाहिए, ताकि पहले की गई लापरवाही फिर से न हो सके।