रायपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उपस्थिति में मंगलवार को राष्ट्रीय जैविक दबाव (स्ट्रेस) प्रबंधन संस्थान के नवनिर्मित परिसर का उद्घाटन करते हुए राज्य में कृषि के क्षेत्र में बेहतर भविष्य की संभावनाओं का द्वार खोला है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आइसीएआर) से संबद्घ यह संस्थान मौलिक और रणनीतिक अनुसंधान के साथ-साथ किसानों के प्रशिक्षण का महत्वपूर्ण केंद्र होगा। शोधार्थी भविष्य की खेती की दिशा तय करेंगे।
प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर राज्य के लिए यह उपहार इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यहां की 70 फीसद से अधिक आबादी आज भी कृषि पर निर्भर है। इस संसाधन में फसलों के स्वास्थ्य के जैविक अनुसंधान के साथ-साथ प्रबंधन पर भी अनुसंधान होना है। यहां के विशेषज्ञ राष्ट्रीय स्तर पर कृषि विकास में अपना महत्वपूर्ण योगदान तो देंगे ही, स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के लिए भी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करेंगे, जो उनकी आय में वृद्घि का आधार बनेगा।
प्रदेश सरकार पहले ही मौसम के अनुरूप फसल उत्पादान को बढ़ावा देने के प्रयास में जुटी है तथा मिशन मिलेट के जरिए ज्वार-बाजरे की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनकी मांग बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में प्रदेश की गोधन न्याय योजना की तारीफ करते हुए गोबर से जैविक खाद और बिजली उत्पादन के किए जा रहे प्रयासों की सराहना की है। साथ ही फसलों के मूल्य संवर्धन पर भी जोर दिया है।
रायपुर का राष्ट्रीय जैविक दबाव प्रबंधन संस्थान का इसी मामले में अहम योगदान होगा। जलवायु सहिष्णुता तकनीकी और पद्घतियों के विकास एवं जमीनी स्तर तक इसके प्रचार-प्रसार के साथ भागीदारी और जागरूकता पर केंद्र और राज्य सरकार का जोर है। इन बातों के साथ यह भी जरूरी है कि वर्ष 2012 से संचालित इस संस्थान में तय संख्या में विज्ञानियों की यथाशीघ्र नियुक्ति हो। वर्तमान में यहां एक चौथाई विज्ञानियों से ही काम चलाया जा रहा है।