वैसे तो हर माता-पिता  की चाहत होती है कि वे अपने बच्चों को बेहतरीन परवरिश दें और हर माता-पिता ये कोशिश भी करते हैं फिर भी ज्यादातर माता-पिता बच्चों के व्यवहार और प्रदर्शन से खुश नहीं होते है उन्हें अक्सर शिकायत करते सुना जा सकता है कि बच्चे ने ऐसा कर दिया बच्चे ने वैसा कर दिया लेकिन इसके लिए काफी हद तक अभिभावक ही जिम्मेदार होते हैं क्योंकि अक्सर किस हालात में क्या कदम उठाना है यह वे स्वयं तय ही नहीं कर पाते है कि किस स्थिति में उन्हें क्या करना चाहिये।
जब भी आपका बच्चा स्कूल जाने या पढ़ाई करने से बचे तो आप क्या करते हैं अधिकतर माता-पिता अपने बच्चे पर गुस्सा ही करते हैं। यह सही नहीं है। इसके साथ ही बच्चों की तुलना भी नहीं करना चाहिये न ही उन्हें अपमानित करना चाहिये।
किस प्रकार का व्यवहार करें
सबसे पहले हम वजह जानने की कोशिश करें कि आपका बच्चा पढ़ने से क्यों बच रहा है इसकी कई वजहें हो सकती हैं जैसे कि हो सकता है उसका आईक्यू लेवल कम हो सकता है या फिर कोई टीचर नापसंद हो सकता है वह उस वक्त नहीं बाद में पढ़ना चाहता हो आदि कई कारण हो सकते हैं।
बच्चा स्कूल जाने लगे तो उसके साथ बैठकर आप बात करें कि कितने दिन स्कूल जाना है और कितनी देर पढ़ना है। आदि-इससे बच्चे को पता रहेगा कि उसे स्कूल जाना है कोई बहाना नहीं चलेगा और उसे यह भी बताएं कि स्कूल में दोस्त मिलेंगे जो उनके साथ खेलेंगे।
अगर बच्चा स्कूल से उदास लौटता है तो प्यार से पूछें कि क्या बात है। क्या टीचर ने डांटा या साथियों से लड़ाई हुई है अगर बच्चा बताए कि कोई टीचर या बच्चा परेशान करता है। तो उससे कहें कि हम स्कूल जाकर बात करेंगे इसके साथ ही निवेदन करें कि बच्चे का ध्यान रखें।
आप क्या करें।
जिस समय बच्चा नहीं पढ़ना चाहता है उस वक्त आप बच्चे को बिलकुल भी मजबूर न करें वरना वह बच्चा जिद्दी हो जाएगा और पढ़ाई से बचने लगेगा कुछ देर रुक कर फिर थोड़ी देर बाद पढ़ने को कहें।
आप उसके पास बैठें और उसकी पढ़ाई में खुद अपने आप को शामिल करें और उससे पूछें कि आज क्लास में क्या-क्या हुआ है बच्चा थोड़ा बड़ा है तो आप उससे कह सकते हैं कि तुम मुझे यह चीज सिखाओ क्योंकि यह तुम्हें अच्छी तरह आता है इससे वह खुश होकर सिखाएगा और साथ ही साथ खुद भी सीखेगा।
छोटे बच्चों को किस्से-कहानियों के रूप में काफी कुछ सिखा सकते हैं और उसे बातों-बातों और खेल-खेल में सिखाएं जैसे किचन में आलू गिनवाएं,बिंदी से डिजाइन बनवाएं आदि-आदि पढ़ाई को थोड़ा दिलचस्प तरीके से आप पेश करें।
हर बच्चे की पसंद और नापसंद होती है। उसकी पसंद के विषय पर ज्यादा ध्यान दें और कभी-कभी उसके दोस्तों को घर बुलाकर उनको साथ पढ़ने बैठाएं-इससे पढ़ाई में उसका मन ज्यादा लगेगा।
क्या न करें।
यदि बच्चा आप पर चीखे-चिल्लाए तो भी आप उस पर चिल्लाएं नहीं आप उस वक्त छोड़ दें लेकिन खुद को पूरी तरह नॉर्मल भी न दिखाएं-वरना वह सोचेगा कि वह कुछ भी करेगा तो आप पर कोई फर्क नहीं पड़ता है आप बाद में जब उसका गुस्सा शांत हो जाए तो बैठकर बात करें कि इस तरह बात करना आपको बुरा लगा और इससे उसके दोस्त, टीचर सभी उसे बुरा बच्चा मानेंगे