अहमदाबाद | मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने कहा कि राज्य की आठ महानगर पालिकाओं में 60 फीसदी से अधिक कोरोना के मामले हैं। यदि महानगर पालिका के पदाधिकारी कोरोना नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तो गुजरात में कोरोना को नियंत्रित किया जा सकता है। गुजरात में कोरोना की स्थिति को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार लगातार जनता के हित में कई उपाय और निर्णय कर रही है। कोरोना को लेकर हुए कार्यों की समीक्षा के लिए मंगलवार को गांधीनगर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बुलाई गई बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कोरोना की टेस्टिंग से लेकर ट्रीटमेंट तक की व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए महानगर पालिकाओं के चुने हुए पदाधिकारियों और अधिकारियों से अनुरोध करते हुए यह बात कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी गुजरात तथा भारत सहित पूरी दुनिया में कहर बरपा रही है। भारत में कल यानी सोमवार को एक ही दिन में 160000 कोरोना के नए मामले दर्ज किए गए हैं। गुजरात में पहले दैनिक 300 मामलों के मुकाबले आज 6000 से अधिक मामले दर्ज हो रहे हैं अर्थात बहुत कम समय में ही कोरोना मामलों की संख्या में तेज उछाल आया है।  उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर में लॉकडाउन के दौरान अस्पताल, उपचार व्यवस्था, दवाई, डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ के अलावा श्रमिकों के पलायन जैसी कई समस्याएं हमारे समक्ष थीं। जबकि आज कोरोना की दूसरी लहर में लॉकडाउन नहीं है, लेकिन मामलों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। ऐसे में परिस्थिति पर नियंत्रण के लिए मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, टेस्टिंग और ट्रेसिंग में इजाफा, अस्पतालों में नए बेड, ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की व्यवस्था और रेमडेसिविर इंजेक्शन सहित हर तरह के इंतजाम उपलब्ध है, तब अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए हमें साथ मिलकर संक्रमण को फैलने से रोकना होगा। रूपाणी ने कहा कि नए चुने हुए पदाधिकारियों के लिए कोरोना काल में सेवा करने का यह अवसर है और उस जिम्मेदारी को हमें निभाना है। गत 15 दिनों में गुजरात में सरकार ने दिन-रात एक कर कोरोना नियंत्रण और  कोई संक्रमित उपचार से वंचित न रहे उसके लिए 18000 नए कोरोना बेड की व्यवस्था की है। राज्य सरकार ने कोरोना के उपचार के लिए विभिन्न अस्पतालों को मंजूरी, रेमडेसिविर इंजेक्शन, वैक्सीनेशन तथा मेडिकल स्टाफ सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं पर्याप्त मात्रा में की हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के खिलाफ जंग करने के लिए कड़ा परिश्रम करते हुए विभिन्न संस्थाओं, समाज, संतों और सेवाभावी लोगों को शामिल करना होगा। हम चुने हुए प्रतिनिधि हैं इसलिए शिकायतकर्ता नहीं बल्कि जवाबदार बनें। समस्याएं तो आएंगी, उससे घबराने की जरूरत नहीं बल्कि साथ मिलकर उसका सकारात्मक उपाय ढूंढना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात में रेमडेसिविर इंजेक्शन का उत्पादन सीमित कंपनियां करती हैं। इसके बावजूद हम आसाम और मुंबई जैसे अन्य राज्यों व शहरों से प्रतिदिन 20000 इंजेक्शन उपलब्ध करवा रहे हैं। अभी हमें रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए प्राथमिकता तय करनी होगी, सरकारी अस्पतालों में पहले और उसके बाद निजी अस्पतालों को इंजेक्शन प्रदान किया जाएगा। जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो ऐसे लोगों को ही रेमडेसिविर इंजेक्शन की आवश्यकता पडती है इसलिए यह जरूरी है कि अनावश्यक तरीके से रेमडेसिविर इंजेक्शन का उपयोग न करें। उन्होंने कहा कि यदि मरीज में ऑक्सीजन का स्तर 94 फीसदी से अधिक हो तो होम आइसोलेशन में रहना चाहिए। पहले गुजरात में ऑक्सीजन की जरूरत 250 टन थी, जो अब बढ़कर 600 टन तक पहुंच गई है। अतः स्वाभाविक रूप से ऑक्सीजन की मांग में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले गुजरात में दैनिक 50000 कोरोना टेस्ट किए जाते थे, जो आज बढ़कर 130000 तक पहुंच गए हैं। गुजरात के बड़े शहरों में संजीवनी रथ, धन्वंतरि रथ और 104 हेल्पलाइन की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई है। जिन इलाकों में 5 से अधिक कोरोना के मामले सामने आए हैं, उन इलाकों को माइक्रो कंटेन्मेंट घोषित किया जा रहा है ताकि संक्रमण की रोकथाम की जा सके। उन्होंने कहा कि गुजरात में कोरोना संक्रमण के नियंत्रण के लिए 24 में से 11 घंटे कोरोना कर्फ्यू का सख्ती से अमल किया जा रहा है। इसलिए यह जरूरी है कि लोग बिना आवश्यक कार्य के घर से बाहर न निकलें। रूपाणी ने मनपा आयुक्तों को निर्देश दिए कि पदाधिकारियों के साथ समय-समय पर बैठक कर परिस्थिति की समीक्षा अवश्य करनी चाहिए। जनभागीदारी तथा एक-दूसरे के सहयोग से ही समस्या का समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिन शहरों में कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं, उन शहरों में बेड की सुविधा, ऑक्सीजन, वेंटिलेटर और रेमडेसिविर इंजेक्शन जैसी आवश्यक सेवाएं बढ़ाई जा रही हैं। महानगरों में 45 वर्ष से अधिक उम्र के अधिकतम लोगों का टीकाकरण सुनिश्चित करने का जिक्र करते हुए उन्होंने विश्वास जताया कि कोरोना से भयभीत हुए बिना मास्क पहनकर, सामाजिक दूरी बनाए रख ऐहतियात के साथ आगे बढ़ेंगे तो हम निश्चित रूप से गुजरात में कोरोना को पराजित कर सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात सरकार ने सोमवार को कोरोना नियंत्रण के लिए कई नए निर्णय किए हैं, उसका संपूर्ण पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी हमारी यानी कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों की है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से कोरोना के इस संकट काल में जनता के बीच रहकर सेवा करने का भी अनुरोध किया।