चित्तौड़गढ़. आज देश में दशहरे (Dussehra) का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा. इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. रावण (Rawan) को बुराई का प्रतीक मानकर उसका पुतला जलाया जाता है, लेकिन चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) शहर में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए रावण अच्छाई का प्रतीक है. रावण की भक्ति, ज्ञान और चारित्रिक अच्छाई उनके लिए प्रेरणा का स्त्रोत है.
चित्तौड़गढ़ में रावण के भक्तों ने अपने घर और प्रतिष्ठानों पर भी रावण के चित्र लगाए हैं. हर वर्ष दशहरे पर रावण का विशेष पूजन भी करते हैं. साथ ही नियमित रूप से भी रावण की पूजा करते हैं. रावण को सतयुग से ही बुराई का प्रतीक माना जाता है. हर वर्ष दशहरे पर देश एवं विदेश में रावण के पुतलों का दहन होता है और इसके साथ ही बुराई को छोड़ने का प्रण लिया जाता है. सतयुग से ही रावण को बुराइयों के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रकांड पंडित और शिव भक्त के रूप में भी रावण की पहचान रही है.
चित्तौड़गढ़. आज देश में दशहरे (Dussehra) का पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा. इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है. रावण (Rawan) को बुराई का प्रतीक मानकर उसका पुतला जलाया जाता है, लेकिन चित्तौड़गढ़ (Chittorgarh) शहर में कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिनके लिए रावण अच्छाई का प्रतीक है. रावण की भक्ति, ज्ञान और चारित्रिक अच्छाई उनके लिए प्रेरणा का स्त्रोत है.
चित्तौड़गढ़ में रावण के भक्तों ने अपने घर और प्रतिष्ठानों पर भी रावण के चित्र लगाए हैं. हर वर्ष दशहरे पर रावण का विशेष पूजन भी करते हैं. साथ ही नियमित रूप से भी रावण की पूजा करते हैं. रावण को सतयुग से ही बुराई का प्रतीक माना जाता है. हर वर्ष दशहरे पर देश एवं विदेश में रावण के पुतलों का दहन होता है और इसके साथ ही बुराई को छोड़ने का प्रण लिया जाता है. सतयुग से ही रावण को बुराइयों के लिए जाना जाता है, लेकिन प्रकांड पंडित और शिव भक्त के रूप में भी रावण की पहचान रही है.