नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच सोमवार को होने वाली शिखर वार्ता में रक्षा, व्यापार और निवेश, ऊर्जा और तकनीक के अहम क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए जाने की संभावना है। शिखर वार्ता के साथ ही पहली ‘टू प्लस टू’ रक्षा और विदेश मंत्री स्तरीय वार्ता में दोनों पक्षों के अफगानिस्तान में स्थिति और लश्कर-ए-तैयबा तथा जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों समेत आतंकवाद के बढ़ते खतरे पर भी बातचीत होने की संभावना है। बताया जाता है कि शिखर वार्ता के बाद जारी होने वाले संयुक्त बयान में सीमा पार आतंकवाद और अफगान संकट के कारण सुरक्षा पर पड़ने वाले असर को लेकर भारत की चिंताओं को व्यक्त किया जा सकता है। ब्लादिमिर पुतिन सोमवार को दिल्ली पहुंचेंगे, जबकि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और रक्षा मंत्री सर्गेई शोयगू रविवार रात पहुंच रहे हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन शाम साढ़े पांच बजे शिखर वार्ता शुरू करेंगे और रूसी नेता रात साढ़े नौ बजे दिल्ली से उड़ान भरेंगे।
शिखर वार्ता के मद्देनजर भारत ने अमेठी के कोरवा में पांच लाख से अधिक एके-203 असॉल्ट राइफल्स के विनिर्माण के लिए करीब 5,000 करोड़ रुपये के लंबित एके 203 कलाश्निकोव राइफल्स समझौते को मंजूरी दे दी है। दोनों पक्षों के साजोसामान सहयोग समझौते के लिए बातचीत के अंतिम चरण को भी पूरा करने की संभावना है। इस समझौते पर शिखर वार्ता या ‘टू प्लस टू’ वार्ता में हस्ताक्षर हो सकते हैं। भारत और रूस के प्रौद्योगिक और विज्ञान पर संयुक्त आयोग की घोषणा करने के अलाव शिखर वार्ता में सैन्य-तकनीकी सहयोग के लिए अगले दशक की रूपरेखा तय करने की भी संभावना है।
दोनों पक्ष भारतीय सशस्त्र सेनाओं के लिए 200 दोहरे इंजन वाले कामोव-226टी हल्के हेलीकॉप्टर के संयुक्त उत्पादन के लिए लंबित परियोजना पर विचार विमर्श करने के अलावा कई रक्षा खरीद प्रस्तावों पर भी बातचीत कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार भारत, रूस को विभिन्न क्षेत्रीय घटनाक्रम पर अपनी चिंताओं के साथ ही पूर्वी लद्दाख सीमा विवाद पर अपना रुख भी बता सकता है।
विवाद हल करने में रूस की संभावित भूमिका के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने बताया कि भारत का हमेशा से मानना है कि मुद्दों को द्विपक्षीय रूप से हल करना चाहिए। उन्होंने बताया कि रूस में कोरोना के मौजूदा हालात के बावजूद राष्ट्रपति पुतिन का भारत की यात्रा करने का फैसला दिखाता है कि वह भारत के साथ संबंध को कितनी महत्ता देते हैं। एक के बाद एक महत्वपूर्ण बैठकों का हवाला देते हुए एक सूत्र ने बताया छह दिसंबर पूरी तरह से रूसी दिवस होगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह अपने रूसी समकक्ष शोयगू के साथ बातचीत करेंगे। जबकि विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस के विदेश मंत्री लावरोव के साथ बातचीत करेंगे। इसके बाद दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्री रात साढ़े 11 बजे ‘टू प्लस टू’ वार्ता करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन 21वीं भारत-रूस शिखर वार्ता से पहले बैठक करेंगे। रूसी नेता के लिए रात्रि भोज का आयोजन किया जाएगा। निवेश संबंधों का हवाला देते हुए सूत्रों ने बताया कि 2018 में 30 अरब डॉलर का लक्ष्य पहले ही पूरा कर लिया गया है और अब 2025 तक 50 अरब डॉलर का लक्ष्य है। भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया वाले क्वाड पर रूस की कड़ी आपत्ति के बारे में पूछे जाने पर सूत्रों ने कहा कि नई दिल्ली किसी भी गुट के साथ नहीं है और वह हिंद-प्रशांत में पैदा हो रही, स्थिति के आधार पर मुद्दे पर आधारित सहयोग दे रहा है।
उन्होंने कहा रूस हिंद-प्रशांत के लिए भारत की दूरदृष्टि की सराहना करता है। सूत्रों ने बताया कि भारत रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र के साथ व्यापार संबंध बढ़ाने का भी इच्छुक है और इस क्षेत्र के 11 गवर्नर्स को आगामी वाइब्रेंट गुजरात सम्मेलन के लिए आमंत्रित किया गया है। आखिरी भारत-रूस वार्षिक शिखर वार्ता सितंबर 2019 में हुई थी जब मोदी व्लादिवोस्तोक गए थे। पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण शिखर वार्ता नहीं हो सकी।