थायराइड की बीमारी तेजी से पांव पसार रही है। इस बीमारी में वजन बढ़ने के साथ ही हार्मोन भी गड़बड़ा जाते हैं। महिलाएं सबसे ज्यादा थायराइड की बीमारी की चपेट में आती हैं। यह बीमारी थायराइड ग्रंथि के बढ़ने की वजह से होती है। यह ग्रंथि तितली के आकार की होती है, जो कि शरीर की कई जरूरी गतिविधियों को नियंत्रित करती है। अगली स्लाइड में पढ़िए इस बीमारी के लक्षण..
थायराइड ग्रंथि टी3 और टी4 थायरॉक्सिन हार्मोंन का निर्माण करती है जो कि सांस, ह्रदय गति, पाचन तंत्र और शरीर के तापमान पर सीधा असर करती है। साथ ही ये हड्डियों, मांसपेशियों व कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित करते हैं। जब शरीर में ये हार्मोंस असंतुलित हो जाते हैं, तो वजन कम या ज्यादा होने लगता है, इसे ही थायराइड की समस्या कहते हैं। यह एक साइलेंट किलर बीमारी है क्योंकि इसके लक्षण फौरन सामने नहीं आते हैं।
 थायराइड ग्रंथि शरीर में थाइराक्सिन नामक जो हार्मोन बनाती है, उससे शरीर की एनर्जी, प्रोटीन उत्पादन और दूसरे हार्मोन्स के प्रति होने वाली संवेदनशीलता नियंत्रित होती है। थायराइड के लक्षण में सबसे आम वजन घटना ही है। इसके अलावा, अनिंद्रा की समस्या और ज्यादा प्यास लगना, अधिक पसीना आना, हाथ कांपना, दिल तेजी से धड़कना, कमजोरी और चिंता शामिल है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षण शुरुआती स्तर पर जल्द ही पहचान में नहीं आते हैं।
थायराइड की बीमारी में महिलाओं को सुस्ती, थकान, कब्ज और त्वचा के रुखेपन की समस्या होती है। इसके अलावा, इस बीमारी में पीरियड्स की अनियमितता भी रहती है। थायराइड के लक्षणों में मन का चंचलपन, याद्दाश्त कमजोर और मांसपेशियों एवं जोड़ों में दर्द की शिकायत भी होती है।
यह एक ऐसी बीमारी है जिसके लक्षणों को नजरअंदाज करने पर ये जानलेवा साबित हो सकती है। थायराइड के लक्षण दिखने पर फौरन डॉक्टर को दिखाना चाहिए, क्योंकि यह बीमारी बिगड़ने पर शरीर पर घातक असर करती है। यह बीमारी गर्दन के निचले हिस्से में स्थित इंडोक्राइन ग्रंथि में होती है। इस बीमारी से बचने के लिए आपको फाइबर युक्त भोजन लेना चाहिए और जरूरी तौर पर शारीरिक गतिविधियां करनी चाहिए।