प्रयागराज. उत्तरा पूर्णिमा से शुरू होकर महाशिवरात्रि तक चलने वाले प्रयागराज माघ मेले और माघ स्नान पर्व की शुरुआत इस बार 10 जनवरी 2020 से हो रही है. माघ मेले को लेकर लगभग सभी तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं. संगम की रेती पर बने तम्बुओं में जहां हजारों साधु संत पूरे माघ के महीने में कठिन तप और साधना करते हैं. वहीं लाखों कल्पवासी भी पौषपूर्णिमा के पहले स्नान पर्व पर कल्पवास का संकल्प लेकर कल्पवास शुरु करेंगे.

माघ मास का है विशेष महत्व

सनातन परंपरा में माघ मास का विशेष महत्व है. ऐसी मान्यता है कि माघ मास में सभी देवी देवता प्रयागराज में ही निवास करते हैं. इसके साथ माघ मास में पड़ने वाले मकर सक्रान्ति से ही सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते हैं. सूर्य के उत्तरायण होने से शुभ दिन की शुरुआत होती है. मकर संक्रान्ति के मौके पर संगम में स्नान और दान का विशेष महत्व भी है. यही वजह है कि माघ मेले में बड़ी संख्या में साधु संत भी आते हैं और ठंड के वावजूद एक माह तक संगम की रेती पर कठिन तप और साधना करते हैं.


मोक्ष की प्राप्ति

माघ मेला पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व से शुरु होकर महाशिवरात्रि के स्नान पर्व तक चलता है. अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी के मुताबिक माघ मास की महिमा का वर्णन गोस्वामी तुलसीदास ने भी राम चरित मानस में किया है. ऐसी मान्यता है कि माघ मास में एक माह तक संगम में रहकर पूजा-अर्चना और तप -जप करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. माघ मास में पौष पूर्णिमा से माघी पूर्णिमा तक होता है कल्पवास, कायाकल्प और मोक्ष की कामना को लेकर गृहस्थ कठिन साधना करते हैं.

ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान

वहीं संगम की रेती पर हर साल लाखों श्रद्धालु भी यहां आकर कल्पवास करते हैं. कल्पवासी एक माह तक संगम की रेती पर बने तम्बुओं में रहते हैं. इस दौरान उनकी दिनचर्या नियमित और संयमित होती है. कल्पवासी प्रति दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर गंगा स्नान करते हैं. कल्पवासी अपने तम्बुओं में आकर पूजा-अर्चना और भजन कीर्तन भी करते हैं.

32 प्रकार के नियमों का पालन

इसी के साथ माघ मेले में संतों का प्रवचन सुनने के साथ ही आध्यात्मिक और धार्मिक कार्यक्रमों में भी शामिल होते हैं. कल्पवासी एक माह तक जमीन पर सोने के साथ चूल्हे पर बना भोजन ग्रहण कर पूरी तरह से सात्विक जीवन व्यतीत करते हैं. तीर्थ पुरोहित दीपू मिश्रा के मुताबिक संगम की रेती कोई भी सनातनी कल्पवास का संकल्प लेकर कल्पवास कर सकता है. उनके मुताबिक कल्पवास करने के लिए कल्पवासियों को 32 प्रकार के नियमों का पालन करना होता है. लेकिन चार ऐसे सख्त नियम भी हैं जिसका पालन हर कल्पवासी को करना अनिवार्य है.

स्नान करके ही गंगा में स्नान करें. दिन में एक बार आहार करें. ब्रह्मचर्य का पालन करें और जमीन पर सोने के साथ ही रात्रि जागरण कर प्रभु की आराधना करें. ऐसी मान्यता है कि कल्पवास करने से कायाकल्प हो जाता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है.