कृषि कानूनों को लेकर प्रदेश में 51 जगहों पर चल रहे किसानों के धरने प्रदर्शनों को देखते हुए पंजाब सरकार ने सभी जिलों में मजिस्ट्रेट की तैनाती का फैसला किया है। इनकी इजाजत के बिना वहां का पुलिस प्रशासन धरने प्रदर्शनों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर सकेगा।

चूंकि यहां बड़ी संख्या में लोग एकत्रित हैं, और भीड़ अधिक है। इसे नियंत्रित करने के लिए जो भी कदम उठाने होंगे, उसके आदेश मजिस्ट्रेट द्वारा ही जारी किए जाएंगे। उधर, हर धरने पर कम से कम डीएसपी रैंक के अधिकारी को तैनात होंगे।

तत्कालीन अकाली-भाजपा सरकार द्वारा बेअदबी के आरोपियों की गिरफ्तारी को लेकर धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने फायरिंग कर दी थी, जिसमें दो लोग मारे गए थे। यह मामला आज तक जांच में फंसा हुआ है और सरकार के गले की फांस बना हुआ है।

इस में मामले में तत्कालीन मुख्यमंत्री बादल, सुखबीर समेत कई नेताओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी गंभीर मामले से सबक सीखते हुए कैप्टन सरकार ने किसानों के लिए यह फैसला किया है।

18 को किसान जत्थेबंदियों से तीन कैबिनेट मंत्रियों की कमेटी मीटिंग करेगी। इसमें किसानों से संबंधित तमाम मुद्दों पर विचार विमर्श होगा। सहकारिता मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा का कहना है कि केंद्र ने किसानों के लिए नया कानून लाने से पहले एक बार भी किसानों के साथ विचार विमर्श तक नही किया गया है। जो कि बेइंसाफी है।