नरसिंहपुर. नरसिंहपुर जिले (Narsinghpur) में खरीदा जा रहा हजारों क्विंटल धान खुले आसमान के नीचे यूं ही पड़ा है. खरीदी शुरू हो गई पर परिवहन का ठेका न होने से ये धान का उठाव नहीं हो रहा है. ऐसे में आने वाले दिन इस उपज के लिए संकट भरे हो सकते हैं. दरअसल खरीदी तो शुरू हो गयी लेकिन परिवहन के इंतजाम नहीं किए गए और इसका खामियाज़ा ये कि सरकारी खरीद में लिया गया हज़ारों क्विंटल धान बर्बाद हो गया.
बदइंतज़ामी की भेंट चढ़ी अन्नदाता की मेहनत
गाडरवारा डिवीजन के सभी 10 केंद्रों की यही स्थिति है. धान पड़ा है लेकिन परिवहन नहीं हो पा रहा है. कुछ केंद्र ऐसे हैं जहां धान रखने के बेहतर इंतजाम भी नहीं है. खुले में धान रखा होने से उसका जो हाल हुआ है उसे देख सरकारी सिस्टम के रवैये पर हैरानी होती है. दरअसल नरसिंहपुर देश के अग्रणी कृषि प्रधान ज़िलों में हैं. जिस जिले के किसान सारे देश और प्रदेश की भूख मिटाने के लिए अनाज पैदावार करते हैं, उसी जिले के अन्नदाताओं की खून पसीने की महीनों की मेहनत किस तरह से सरकारी बदइंतजामी की भेंट चढ़ रही है.
पानी में भीग रहा धान
गाडरवारा के खैरुआ केंद्र का जहां हजारों क्विंटल धान बारिश से तर बतर हो रहा है. यहां शेड तो छोड़िए, किसानों की उपज को बचाने के लिए तिरपाल या पॉलीथिन भी इस केंद में नहीं है. इस केंद्र पर तालाब जैसी स्थिति बनी हुई है, जिसके बीच में पड़ी धान की बोरियां अपनी दुर्दशा की कहानी बयान कर रहीं हैं.
जिस देश में हम मंगल से लेकर चांद तक पहुंचने की बातें कर रहे हैं, कई अनुसंधान हो रहे हैं, बड़े-बड़े उपग्रह छोड़े जा रहे हैं, उस देश में अन्नदाता की मेहनत का इस तरह से बर्बाद होना शर्मनाक है.