मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने राज्य शासन से पुलिस अभिरक्षा में बंदी की मौत पर उसके वैध वारिसों को तीन लाख रूपये दो माह में देने की अनुशंसा की है। आयोग ने प्रकरण क्र. 1644/रतलाम /2020 में पुलिस अभिरक्षा में बंदी अवतार सिंह द्वारा फांसी लगाकर आत्महत्या कर लेने के मामले में यह अनुशंसा की है। शासन चाहे, तो इस राशि की वसूली दोषी जेल अधिकारियों/कर्मचारियों से कर सकता है। मामले में आयोग ने पाया कि पुलिसकर्मियों की लापरवाही के कारण मृतक के मानव अधिकारों की घोर उपेक्षा हुई। अनुशंसा में आयोग ने यह भी कहा है कि शासन पुलिस अभिरक्षा में स्थित बंदियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा की देखभाल के वैधानिक और आदेशात्मक प्रावधान के पालन हेतु अभिरक्षा प्रबंधन से जुड़े बिन्दुओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करें, जिससे पुलिस अभिरक्षा के दौरान बंदियों पर नजर रखी जा सके और उन्हें आत्महत्या करने का अवसर प्राप्त न हो। शासन थानों के अभिरक्षा प्रबंधन के लिए दिशा-निर्देशों के साथ ही सीसीटीवी कैमरे स्थापित कराते हुए कम्प्यूटराईज्ड डिजिटल सर्विलान्स प्रणाली की व्यवस्था करे, जिससे इस प्रकार की घटनाओं को रोका जा सके। शासन अभिरक्षा के दौरान बंदियों द्वारा आत्महत्या के कारण मृत्यु के मामलों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय और अभिरक्षा प्रबंधन के लिए विषम परिस्थितियों में मृत्यु के लिये दोषी लोकसेवकों के विरूद्ध विभागीय कार्यवाही के साथ ही मृतकों के परिजनों को यथाशीघ्र मुआवजा राशि दिलाने के लिये विचार हेतु एक उच्चस्तरीय तथ्यान्वेषी समिति का गठन करे, जिससे ऐसे मामलों में लोकसेवकों की भूमिका तय हो सके एवं मृतक के परिजनों को तत्परतापूर्वक सहायता मिल सके। अप्राकृतिक मृत्यु के मामलों में आयोग में प्रस्तुत होने वाले ऐसे प्रकरणों की जाँच और अंततः उनके निराकरण के कारण पीड़ितों को प्राप्त होने वाले मुआवजे में विलम्ब न हो।