गुजरात के सूरत में तेल और प्राकृतिक गैस निगम के प्लांट में गुरुवार तड़के सुबह करीब 3 बजे भीषण आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि प्लांट में देर तक धमाके की आवाज सुनाई देती रही। करीब चार घंटों की मशक्कत के बाद फायर ब्रिगेड ने आग पर काबू पा लिया। आग बुझाने में फायर ब्रिगेड की 15 गाड़ियां लगीं। वहीं, इस आग के चलते प्लांट का पास के करीब 2-3 किमी एरिया में टेंपरेचर 50 डिग्री तक पहुंच गया था, जो आम दिनों में सुबह 20 से 25 के बीच रहता है।

प्लांट के आसपास रहने वाले गांववालों ने बताया कि उन्होंने तेज धमाके सुने और डर गए। उन्होंने आसमान में आग के गोले साफ-साफ देखे। लोगों ने बताया कि धमाके से पूरा इलाका थर्रा उठा था। आसमान में आग की लपटें 25-30 फीट तक उठती दिखाईं दे रही थीं, जिन्हें 15-20 किमी दूर से भी देखा जा सकता था। हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए मगदल्ला चौक से इच्छापुर तक का पूरा यातायात दोपहर तक के लिए रोक दिया गया था।

आग मुंबई से सूरत तक आने वाली गैस पाइप के टर्मिनल में लगी थी। हालांकि, आग लगते ही बॉल्व बंद कर दिया गया था, जिससे गैस की सप्लाई रुक गई और एक भीषण हादसा टल गया। जहां आग लगी थी, वहां प्रेशर से गैस चिमनी द्वारा निकाल दी गई और इसी के चलते आग की लपटें 25-30 फीट ऊंचाई तक दिखाईं दीं। इसी तकनीक के उपयोग से आग बढ़ने से रोक ली गई।

प्लांट के मेन गेट के पास ही यह चिमनी बनाई गई है। यह प्लांट के मुख्य टर्मिनल से करीब 3 किमी दूर है। इसका उपयोग इमरजेंसी में गैस निकालकर हवा में ही गैस को जलाकर नष्ट करने के लिए किया जाता है। इससे प्लांट में भरी गैस बाहर निकाल दी जाती है, जिससे प्लांट में आग नहीं फैल पाती। वहीं, गैस निकालने के बाद उसे हवा में ही जला दिया जाता है, जिससे गैस वातावरण में न फैल सके।

तेल और प्राकृतिक गैस निगम का यह प्लांट सूरत के पास स्थित हजीरा इंडस्ट्रियल एरिया में करीब 19 किमी में फैला है। बता दें, ओनजीसी कंपनी द्वारा एलपीजी, नेप्था, एसकेओ, एटीएफ और एचएसडीएन प्रोपेन गैसें बनाई जाती हैं।

हजीरा इंडस्ट्रियल एरिया में गैस के अलावा अन्य कई प्लांट भी हैं, जिनमें सूरत जिले के अलावा डुमस, भीमपोर, गवीयर, भाटपोर जैसे गांव के लोग भी हजारों की संख्या में फिक्स और कॉन्ट्रेक्ट पर काम करते हैं। हादसे के बाद यहां के 50 फीसदी से ज्यादा प्लांट आगामी आदेश तक के लिए बंद कर दिए गए हैं।