कृषि‍ विधेयक के विरोध में सियासी सरगर्मी थमने का नाम नहीं ले रही है। इन विधेयकों के विरोध में विपक्षी दल बुधवार शाम को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद (Ram Nath Kovind) से मुलाकात करेंगे। समाचार एजेंसी पीटीआइ की रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद कृषि विधेयकों और राज्‍यसभा के आठ सदस्‍यों के निलंबन के मसले पर बुधवार को शाम को पांच बजे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करेंगे।

विपक्ष के एक वरिष्‍ठ नेता ने बताया कि राष्ट्रपति ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय दिया है। विपक्ष की करीब 16 पार्टियों ने इस मसले पर लेकर राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है। इससे पहले यह निर्णय लिया गया था कि कोरोना संकट को देखते हुए सदन में सदस्यों की संख्या के आधार पर पांच प्रमुख विपक्षी दलों के पांच प्रतिनिधि राष्ट्रपति से मुलाकात करेंगे। इन दलों में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, तेलंगाना राष्ट्र समिति और द्रमुक शामिल हैं। मंगलवार को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाम नबी आजाद ने कहा था कि कृषि विधेयक के विरोध में उन्‍होंने राष्‍ट्रपति को चिट्ठी लगी है।

उल्‍लेखनीय है कि कृषि बिल के खिलाफ विपक्षी पार्टियों के नेता लगातार हमलावर हैं। कृषि विधेयकों के खिलाफ विपक्षी दलों के सांसदों ने बुधवार को संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। इस विरोध मार्च में कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद और डेरेक ओ ब्रायन और समाजवादी पार्टी की जया बच्चन समेत कई अन्य विपक्षी पार्टियों के सांसदों ने 'किसान बचाओ, मजदूर बचाओ, लोकतंत्र बचाओ' जैसे नारे लगाए। विपक्षी नेताओं ने संसद परिसर में गांधी प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद संसद परिसर में ही एक मार्च भी निकाला।  

बीते दिनों शिरोमणि अकाली दल के अध्‍यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने बताया था कि प्रतिनिधि मंडल ने राष्‍ट्रपति से गुजारिश की कि 'किसानों के खिलाफ' जो विधेयक जबरदस्ती राज्यसभा में पास किए गए हैं वह उन पर हस्ताक्षर नहीं करें। यही नहीं कांग्रेस, वाम दलों, राकांपा, द्रमुक, सपा, तृणमूल कांग्रेस और राजद समेत विभिन्न दलों के नेताओं ने राष्ट्रपति से अपील की है कि वह इन दोनों विधेयकों पर हस्ताक्षर नहीं करें। विपक्षी दलों के नेताओं का आरोप है कि सरकार ने जिस तरीके से अपने एजेंडा को आगे बढ़ाया है वह उचित नहीं है।