तीन महीने हो चुके कमलनाथ सरकार का पतन हुए.इसके बावजूद उनके मंत्रिमंडल सहयोगी सरकारी बंगला खाली करने में आनाकानी कर रहे हैं.इसके लिए वे कोरोना और बारिश की  हास्यास्पद दलीलें दे रहे हैं.और तो और ये असरदार जनप्रतिनिधि,इस मौसम में सामान कहाँ ले जाएँ,जैसी दीनहीन बयानबाजी कर रहे हैं जबकि इनके एक इशारे पर सब उपलब्ध हो जाएगा. पूर्व मंत्री और भोपाल के विधायक आरिफ अकील और पीसी शर्मा की बहानेबाजी बेहद आपत्तिजनक है क्योंकि उनके तो भोपाल में अपने आशियाने होंगे ही..? इनसे पूछा जाना चाहिए की जब उनकी या इनकी सरकार अफसरों के भरी बरसात में तबादले करती है तब उनकी इस प्रकार की मुसीबतों पर दया क्यों नहीं की जाती.?

लाख टके का सवाल है की ये पूर्व मंत्री दूसरा बंगला किस हैसियत से मांग रहे हैं.?वे ऍमएलए रेस्ट हाउस में शिफ्ट क्यों नहीं हो जाते.? इस विधायक बस्ती में 300 से ज्यादा विधायकों के रहने का बंदोबस्त है क्योंकि यह छत्तीसगढ़ बनने से पहले की है.वरिष्ठ और बुजुर्ग विधायकों के लिए बड़े फेमिली फ़्लैट हैं.एक दौर था जब द्वारका प्रसाद मिश्र जैसे कद्दावर नेता मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद नेता प्रतिपक्ष होते हुए भी पारिवारिक खंड के फ़्लैट में रहा करते थे..! आज के सांसद, विधायक और मंत्री चुनाव हार जाने पर भी बेशर्मी के साथ इन बंगलों पर कब्जा जमाए रहते हैं, जब तक जबर्दस्ती धकियाये नहीं जाते । 
इस अराजकता के बावजूद बंगलाखोरी पर रोक के आसार दूर तक दिखाई नहीं देते. कारण यह की ऐसा करने पर मुख्यमंत्री शिवराज को शुरुआत खुद से करना पड़ेगी क्योंकि वे खुद पिछले कार्यकाल में तेरह बरस तक .विशाल मुख्यमंत्री निवास के अलावा बतौर सांसद मिले बंगले पर काबिज रहे थे. विधानसभा चुनाव से पहले यह बंगला फिर चर्चा में आया जब यहाँ मुख्यमंत्री की किरार जाति का राष्ट्रीय कार्यालय खुला जिसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष उनकी पत्नी साधना सिंह हैं...।

डॉ. नवीन जोशी