रायपुर |रायपुर नगर निगम ने 20 करोड़ रुपये की लागत से बने सुभाष स्टेडियम में चार करोड़ कीमत की दुकानों का निर्माण कराया था ताकि इन्हें बेचकर राजस्व कमा कर सके, लेकिन स्टेडियम के ठीक बाजू में 26 फीट की सड़क पर अवैध चौपाटी खुल जाने से 35 से 40 लाख रुपये की कीमत की दुकानें लेने कोई सामने नहीं आ रहा है। इसके कारण दुकानें जर्जर होने लगी हैं। निगम के अधिकारी और कुछ जनप्रतिनिधियों की शह पर अवैध चौपाटी संचालित होने के आरोप भी लग रहे हैं। निगम में विपक्ष की भूमिका निभा रहे भाजपा के पार्षदों ने पहले ही शहर के बाग-बगीचे और पार्कों में निजी कंपनी को चौपाटी खोलने का ठेका देने का विरोध किया था, बावजूद इसके ठेका देने का सिलसिला जारी है। चौपाटी के नाम पर यहां चिकन और बिरयानी सेंटर खोलने को लेकर लोगों में भी आक्रोश है।पंजाब में कैप्टन की विदाई के बाद से छत्तीसगढ़ में उलटफेर की हवा तेज हो गई है। इसे लेकर लगातार सियासत गर्म है। विधायकों की दिल्ली दौड़ जारी है। इन सब कवायद के बीच एक कारोबारी नेताजी को अपने परिवार की चिंता सता रही है। ये वही नेताजी हैं, जिन्होंने अपनी तख्त बचाने दाऊजी के समर्थन में पंद्रह से अधिक जनप्रतिनिधियों और नेताओं को हवाई जहाज से दिल्ली ले जाने, वापस लाने से लेकर होटल में रुकवाने तक का सारा खर्च उठाया था। नाम सार्वजनिक हो जाने पर सियासी हवा के रुख को भांपकर नेताजी अब पाला बदलने के मूड में आ गए हैं। इसके लिए पिछले दिनों सिंहदेव के खास समर्थक के साथ बैठक भी की थी। चर्चा है कि भाई के फैले-फैलाए कारोबार पर किसी तरह की आंच न आए इसलिए दूसरे खेमे से जुड़ने पूरी ताकत लगा रहे हैं।