पटना। देश में दो बच्चों की जनसंख्या नीति को लेकर एक बार फिर से सियासत गरमाने लगी है। असम के मुख्यमंत्री हेमंत विस्वसरमा चुनिंदा सरकारी योजनाओं का लाभ देने में दो बच्चों की नीति लागू करने की घोषणा कर चुके हैं। उतर प्रदेश में भी कुछ ऐसी तैयारियां जारी हैं। अब बिहार से भी इस तरह के कानून बनाने की मांग शुरू हो गई है। मामले में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने अपने फ़ेसबुक पेज पर लिखा है कि असम के मुख्यमंत्री ने जो बातें कही हैं, वो देश हित में हैं। बिहार भाजपा के विधायक संजीव चौरसिया भी कहते हैं कहते हैं कि बिहार में जनसंख्या नियंत्रण कानून बनना ही चाहिए। मामले में जेडीयू को लगता है की इससे एक खास धर्म विशेष के लोगों में प्रतिक्रिया हो सकती है। बिहार के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान कहते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण होना चाहिए लेकिन इसके लिए तमाम राजनीतिक पार्टियों की राय एक जैसी होनी चाहिए। 
  जेडीयू के ही वरिष्ठ नेता नीरज कुमार कहते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर कोई क्या कर रहा है ये मुझे नहीं पता लेकिन बिहार में बढ़ती हुई आबादी को रोकने के लिए नीतीश सरकार ने महिलाओं को साक्षर बनाने के साथ साथ महिलाओं का सशक्तिकरण किया है। उसका नतीजा ये रहा है कि जनसंख्या बढ़ोतरी का जो दर है वो नियंत्रित हो रहा है। राजद के वरिष्ठ विधायक भाई वीरेंद्र कहते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर जो चर्चा हो रही है उसे आप ऐसे ही नहीं ना लागू कर सकते हैं। बिहार में तमाम राजनीतिक पार्टियों और समाज के हर तबके की राय शामिल होनी चाहिए। कोई भी फ़ैसला जल्दबाज़ी में नही लेनी चाहिए। कहीं ऐसा तो नहीं है कि ये फैसला किसी एक धर्म विशेष को ध्यान में रखकर किया जा रहा हो। वहीं कांग्रेस नेता और एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा कहते हैं कि जनसंख्या नियंत्रण होना चाहिए लेकिन उसके लिए कोई क़ानून बनाने की ज़रूरत नही है।