भोपाल। राजधानी के श्यामला हिल्स थाना इलाके मे क्लीफिस्ट इंडिया कंपनी के मालिक द्वारा आरके दुबे ने रविवार सुबह करीब आठ बजे अपने नादिर कॉलोनी स्थित बंगले में खूद को सिर में गोली मारकर आत्महत्या किये जाने की सनसनीखेज घटना सामने आई है। जानकारी के अनुसार पुलिस को घटनास्थल से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें दवा कारोबारी ने बीमारियों और असहनीय पेट दर्द से तंग आकर जान देने की बात लिखते हुए मौत के लिए खुद को जिम्मेदार बताया है। सुसाईड नोट मे आगे लिखा है कि मौत के बाद किसी को परेशान न किया जाए। मामले में श्यामला हिल्स पुलिस ने मर्ग कायम कर घटना मे आगे की जांच शुरु कर दी है। थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसर इलाके मे स्थित नादिर कॉलोनी मे रहने वाले 80 वर्षीय आरके दुबे किलपेस्ट इंडिया दवा कंपनी के मालिक थे। उनके साथ उनके दोनों बेटे व उनके परिवार भी रहते हैं। उनकी दवा फैक्ट्री फिलहाल उनके दोनों बेटे संभाल रहे हैं। पुलिस ने बताया कि दुबे को पेट दर्द की गंभीर थी, जिसके कारण वो तीन पहले ही अस्पताल से घर आये थे, उनके पास एक कर्मचारी चौबीस घंटे रहता था। वही उनकी पूरी देखभाल भी करता था। घटना के वक्त वे कमरे में अकेले थे। परिजनों ने पुलिस को बताया कि गोली की आवाज सुनकर सब कमरे में पहुंचे थे। बीमारियों के चलते वो घर में ही रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि रविवार सुबह करीब आठ बजे उन्होंने अपने कमरे में बारह बोर की लायसेंसी बंदूक से एक कुर्सी पर बैठकर जमीन पर बंदूक को रखा ओर पांव के अंगूठे से ट्रिगर दबा दिया। जिससे गोली जबड़े से होती हुई सिर के आर पार हो गई। इससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि तत्काल उन्हें इलाज के लिये अस्पताल पहुंचाया गया जहां डाक्टरों ने चेक करने के बाद में उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम कर आगे की जांच शुरू कर दी है। घटनास्थल की छानबीन के दौरान पास में एक टेबल पर रखा सुसाइड नोट पुलिस ने बरामद किया है। नोट में उन्होंने लिखा की यह दर्द अब जानलेवा हो गया है। इसके कारण मानसिक तनाव बढ़ता जा रहा है। मेरे पास इस असहनीय दर्द से छुटकारा पाने का एक मात्र रास्ता खुदकुशी है। मैं अपनी मर्जी से जान दे रहा हूं। मेरी मौत के बाद बेटों तथा परिवार को परेशान न किया जाए। वहीं पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट की हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से जांच कराई जाएगी। घटना के समय मृतक के दोनों बेटे अपने-अपने कमरों में थे, वहीं बहुएं अन्य कामो में व्यस्त थीं।