परमात्मा के साथ मित्रता से जीवन बनता है सुंदर
 

इंदौर। जो व्यक्ति केवल इंद्रियों के सुख के लिए जीता है, उसका जीवन मरण के समान ही है।परिवार का पोषण करने के लिए नहीं वरन परोपकार के लिए जीना ही जीवन है। केवल अपने लिए जीना जीवन नहीं है। अपने और परिवार के लिए तो पशु भी जी लेते हैं। कुटुंब का पोषण करना तो कौओं को भी आता है। पंगत देखकर कौआ अपनों को बुला लेता है। अधिकांशत: ऐसा देखा गया है कि इस जगत में कोई धन के लिए जीता है, कोई स्त्री के लिए तो कोई सांसारिक सुख के लिए जीता है।

एरोड्रम क्षेत्र स्थित शंकराचार्य मठ में पुरुषोत्तम मास के तहत रामचरितमानस पर आधारित प्रवचन में मठ प्रभारी डॉक्टर गिरीशानंदजी महाराज ने बुधवार को यह बात कही। व्यासपीठ का पूजन अभय सिंह राठौर ने किया। महाराजश्री ने कहा परोपकार और परमात्मा के लिए बहुत कम लोग जीते हैं। परमात्मा और परोपकार के लिए जीने वाले का जीवन ही सुंदर होता है। परमात्मा के साथ मित्रता करने से जीवन सुंदर बनता है। भागवत में जिस प्रकार दशम स्कंध हैं, उसी प्रकार रामायण में सुंदरकांड है। सुंदरकांड अति सुंदर है। सुग्रीव काम को छोड़कर ब्रह्मचर्य व्रत का सहारा लेता है तो उसकी परमात्मा से प्रीति होती है। 
रामायण में सात सोपान हैं। सोपान का मतलब होता है सीढ़ी। जो इन सोपानों को पार करता है उसके हृदय में ही परमात्मा विराजते हैं। पहले सोपान का नाम बालकांड है जो भगवान के चरण है। बालक जैसी बुद्धि रखोगे तो तुम्हारा हृदय अयोध्या बनेगा। अयोध्या भगवान का कटि भाग है। जहां युद्ध नहीं होता वही अयोध्या है। अरण्यकांड भगवान का उदर है, जो वन में जाकर इंद्रियों पर नियंत्रण करता है वही इन्द्रियों में छुपे काम रूपी रावण को मारता है। किष्किंधा कांड भगवान का हृदय है, जिसका कंठ (ग्रीव) सुंदर होता है, वही सुग्रीव है। सुग्रीव की ब्रह्मचारी हनुमानजी माध्यम से परमात्मा से मित्रता होती है, तब सुंदरकांड आता है। सुंदरकांड भगवान का कंठ है। हनुमानजी पराशक्ति का दर्शन करके लंका को जला देते हैं, लंका को उल्टा करने पर हो जाता है काल। यहां पर युद्ध होता है। युद्ध में राक्षस रूपी काम, क्रोध, मद, लोभ का विनाश हो जाता है, तब उत्तरकांड आता है, जहां भगवान का राजतिलक होता है। उत्तरकांड भगवान का मस्तक है अर्थात इन सातों सोपान को पार करने के बाद व्यक्ति के हृदय में भगवान विराज जाते हैं। इसके बाद उसके दैहिक, देविक, भौतिक पापों का नाश हो जाता है।