इस समय पूरे देश में उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनाव की चर्चा है, राजनीति में रुचि रखने वालों की सबसे ज्यादा रुचि उत्तरप्रदेश चुनाव में है। भाजपा अपनी रणनीति के तहत उप्र चुनाव को 'हिंदू-मुस्लिम' करने की  पुरजोर कोशिश कर रही है। वह इसमें कितनी सफल हो पाएगी, यह आने वाले वक्त में पता चलेगा। मध्यप्रदेश की बात करें, तो यहां सामान्यत: चुनाव जाति, धर्म का फैक्टर काम नहीं करता, लेकिन लगता है कि मप्र के आगामी विधानसभा चुनाव में धर्म को मुद्दा बना सकती है। सरकार के कुछ फैसलों और भाजपा नेताओं के बयानों से इस बात को भली-भांति समझा जा सकता है। कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त कर 'बैक डोर' के जरिए सत्ता में आई भाजपा का यह कार्यकाल अब तक नीरस रहा है। या यूं कहें कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने चौथे कार्यकाल में निष्प्रभावी होते नजर आ रहे हैं। इस कार्यकाल में वे बड़ी-बड़ी बातों के अलावा एक भी ऐसा काम नहीं कर पाए, जिसे वे प्रदेश की जनता के समक्ष उपलब्धि के रूप में पेश कर सकें। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उनका आधा समय और आधी ऊर्जा कोरोना से निपटने में लग गई है।

यह भी पढ़ें..... किसानों का दर्द बांटने खेतों तक नहीं पहुंची 'सरकार'

'स्वर्णिम मध्यप्रदेश' से 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश'

सरकार की नाकामी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वह अपने सबसे बड़े किसान वोट बैंक को पर्याप्त खाद तक उपलब्ध नहीं करा पाई है। आज भी किसान यूरिया के लिए परेशान हैं। सत्ता में आने के बाद शिवराज 'आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश' बनाने की बातें कर रहे हैं, अफसरों पर दबाव बना रहे हैं, लेकित अब तक इस दिशा में सरकार कोई खास कार्य नहीं कर पाई है। अपने पिछले कार्यकाल में  शिवराज प्रदेश को 'स्वर्णिम मध्यप्रदेश' बनाने की जिद ठाने हुए थे, लेकिन जनता ने उन्हें सत्ता से बाहर कर दिया था और उनका प्रदेश को स्वर्णिम बनाने का सपना पूरा नहीं हो पाया। अपने इसी सपने को उन्होंने चौथे कार्यकाल में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश का नाम दिया है।

यह भी पढ़ें..... सीएम की समीक्षा बैठकें, क्या 21 महीने में आत्मनिर्भर बन पाएगा मध्यप्रदेश?

बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और रिश्वत

बेरोजगारी की वजह से युवा सरकार से बेहद खफा हैं। प्रदेश में पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या 35 लाख हो गई है। कोरोनाकाल में देश और प्रदेश के व्यापारियों की क्या हालत है, यह सभी जानते हैं। मुख्यमंत्री आए दिन भ्रष्ट अधिकारियों को चेतावनी दे रहे हैं, भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं करेंगे। भ्रष्टाचार करने वालों को मैं नौकरी करने लायक नहीं छोड़ूगा। इसके बाद भी आए दिन लोकायुक्त संगठन और आर्थिक अपराध ब्यूरो की छापे की कार्रवाई में अधिकारी-कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े जा रहे हैं और उनकी काली कमाई करोड़ों में है।

यह भी पढ़ें..... बेरोजगार युवाओं की फौज हो रही तैयार, कहां है सरकार

क्‍या करें.... क्‍या न करें....

चूंकि इस कार्यकाल में  मुख्यमंत्री की चमक फीकी पड़ रही है, इसलिए भाजपा अगले चुनाव को जाति और धर्म की ओर मोडऩे की तैयारी में जुट गई है। इसी कड़ी में उत्तरप्रदेश की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी उन शहरों, स्थानों के नाम बदले जा रहे हैं, जो मुस्लिमों के नाम पर हैं। भोपाल के हबीबगंज रेलवे स्टेशन और मिंटो हॉल का नाम बदलने के बाद अब होशंगाबाद और बाबई का नाम बदल दिया गया है। आने वाले दिनों में कुछ और शहरों के नाम बदले जाने के आसार हैं। उत्तरप्रदेश के काशी विश्वनाथ कॉरीडोर की तर्ज पर उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर को विकसित करने की तैयारी मप्र सरकार ने शुरू कर दी है। ऐसे ही मुख्यमंत्री से लेकर अन्य भाजपा नेता महात्मा गांधी से लेकर अन्य पुराने कांग्रेस नेताओं पर निशाना बनाया जा रहा है।

गणतंत्र दिवस पर दिए गए संदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि हमें कहते हुए कभी-कभी तकलीफ होती है कि स्वतंत्रता के बाद हमें आजादी का इतिहास तक गलत पढ़ाया गया। देश को बताया गया कि हिंदुस्तान को आजादी महात्मा गांधी, नेहरूजी, इंदिराजी ने दिलाई। आजादी की क्रांतिकारी धारा को भुला दिया गया, एक नहीं कई अमर शहीद क्रांतिकारियों की स्मृति को संजोकर नहीं रखा गया। ऐसे ही सरकार आगामी चुनाव में आदिवासी, दलित और अन्य पिछड़ा वर्ग को साधने के लिए अभी से तैयारियां कर रही है। कुल मिलाकर आगामी विधानसभा चुनाव में सरकार अपनी नाकामियां छुपाने के लिए जाति-धर्म को हथियार बनाकर मैदान में उतरेगी।

यह भी पढ़ें..... किसानों का दर्द बांटने खेतों तक नहीं पहुंची 'सरकार'

यह भी पढ़ें..... सीएम की समीक्षा बैठकें, क्या 21 महीने में आत्मनिर्भर बन पाएगा मध्यप्रदेश?

यह भी पढ़ें..... बेरोजगार युवाओं की फौज हो रही तैयार, कहां है सरकार