इन्दौर । लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री तुलसीराम सिलावट ने आज होटल श्रीमाया में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि प्रदेश में मिलावटखोरों के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जा रही है। राज्य शासन द्वारा ऐसे लोगों के खिलाफ कलेक्टर्स एवं पुलिस अधीक्षकों को रासुका या जिलाबदर की कार्यवाही करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होने कहा कि मिलावटखोरी से उपभोक्ताओं का स्वास्थ्य चौपट हो रहा है। मिलावटी घी, दूध, दही, मावा और पनीर से किडनी, लीवर और हृदय रोग हो रहें है, जिससे प्रदेश में बीमारियां फैल रही हैं।
उन्होने कहा कि राज्य शासन मिलावटखोरी मिटाने के लिये कृतसंकल्पित है। राज्य शासन को जनता के स्वास्थ्य की चिंता है। मिलावटखोरी न केवल कानूनी अपराध है बल्कि एक अनैतिक काम है। मिलावटखोरी के खिलाफ पूरे प्रदेश में मुहिम जारी है। यह मुहिम आमागी वर्षों में भी जारी रहेगी। हमारा उद्देश्य मिलावटखोरी के खिलाफ जन-जागरण करना है। इस मुहिम में जनता और व्यापारियों को सहयोग अपेक्षित है। बिना जन-सहयोग के कोई भी अभियान सफल नहीं हो सकता। इसी तरह की मुहिम पूरे देश में चलनी चाहिए। मिलावटखोरों के  खिलाफ भारतीय दण्ड संहिता के प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जा रही है और जरूरत पड़ी तो राज्य शासन द्वारा सख्त से सख्त नया कानून बनाया जायेगा। राज्य शासन द्वारा प्रदेश में जगह-जगह खाद्य सामग्री के नमूनों की जांच के लिये माइक्रो-बायोलॉजी लैब बनाई जा रही है। इस संबंध में उनके द्वारा भोपाल और इन्दौर में पत्रकार वार्ता भी ली गई है और शीघ्र ही ग्वालियर और जबलपुर में पत्रकार वर्ता आयोजित की जायेगी। 
उन्होने कहा कि मुख्य सचिव द्वारा संभाग स्तर पर प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य एवं आयुक्त स्वास्थ्य, आईजी, डीआईजी, कलेक्टर, एसपी के साथ बैठक कर मिलावटखोरों के विरूद्ध सख्ती से कार्यवाही के निर्देश दिये। पारदर्शिता को दृष्टिगत रखते हुए राज्य के बाहर प्रयोगशाला में 468 सैम्पल बाहर भेजे गये। नवीन प्रयोगशाला स्थापित करने के लिये भूमि पूजन 19 अक्टूबर को इन्दौर में, 21 अक्टूबर को ग्वालियर में और 24 अक्टूबर को जबलपुर में रखा गया है। राज्य स्तर पर पहली बार खाद्य सुरक्षा अधिकारी के साथ मीटिंग कर सख्ती से कार्यवाही करने के निर्देश दिये। काफी मात्रा में मिलावट घी एवं अन्य पदार्थों का विनिष्टीकरण की कार्यवाही की जा रही है। प्रदेश में मिलावटखोरी के खिलाफ कार्यवाही करते हुए अभी तक 89 प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज हो चुकी है। प्रदेश में 31 मिलावटखोरों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्यवाही की गई।