जगाधरी प्रदूषण रोकने के लिए एनजीटी के आदेश पर गठित स्पेशल एनवायरमेंट सर्विलेंस टास्क फोर्स को बड़ी सफलता हाथ लगी है। जिसके बाद फैक्टरी संचालकों में हडक़ंप मचा हुआ है। फोर्स ने जहां बिना अनुमति के चल रही दो मैटल फैक्टरियों को पकड़ा है। वहीं टीम को अन्य दो फैक्टरियों में निरीक्षण के दौरान भारी अनिमितताएं मिली हैं। फिलहाल बोर्ड के अधिकारियों ने सभी फैक्टरी संचालकों को क्लोजर नोटिस जारी कर दिया है। साथ ही मामले की सूचना आला अधिकारियों को भेज दी है। जहां से अनुमति मिलते ही इन फैक्ट्ररियों को बंद कर दिया जाएगा। 

जिले में एनजीटी के निर्देशानुसार स्पेशल एनवायरमेंट सर्विलेंस टास्क फोर्स गठित की गई हैं। जिसमें चीफ ज्यूडिशियल मैजिस्ट्रेट गुनीत अरोड़ा, डीएसपी जगाधरी आशीष चौधरी, पब्लिक हेल्थ के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर सुमित गर्ग प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एसडीओ अजय सिंह को शामिल किया गया है। टीम सदस्यों को सूचना मिली थी कि शहर में बिना अनुमति के धड़ल्ले से फैक्टरियों को चलाया जा रहा है। 

टीम सदस्यों ने देवी भवन बाजार प्रकाश चौक के नजदीक मैटल फैक्टरी एम/एस अग्रवाल एलोय गौरी शंकर लिंक रोड जगाधरी स्थित एम/एस जैन मैटल इंडस्ट्रीज को बिना अनुमति के चलते पकड़ा है। प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक दोनों  फैक्टरी अवैध रूप से संचालित की जा रही थी। इन फैक्टरी संचालकों ने अपनी यूनिट को चलाने के लिए बोर्ड से किसी भी प्रकार की अनुमति नहीं ली हुई थी। यह यूनिट सरेआम पर्यावरण नियमों की धज्जियां उड़ा रही थी। 

इन फैक्टरियों में मिली भारी अनिमितताएं

टास्क फोर्स को जांच के दौरान हनुमान गेट जगाधरी स्थित पीडी मैटल पुराना छछरौली रोड शांति कालोनी स्थित एम/एस मामचंद उद्योग में भारी अनिमितताएं मिली है। निरीक्षण के दौरान इन दोनों यूनिट में ईटीपी बंद पाए गए। इसके अलावा लॉगबुक भी सही प्रकार से मेंटेन नहीं मिली। इसके अलवा अन्य कमियां भी पाई गई हैं। 

धूएं से यह होती है दिक्कत

फैक्टरियों से निकलने वाले धूएं से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बोर्ड के अधिकारियों के मुताबिक फैक्ट्ररियों वाहनों के निकलने वाले धूएं में अधजले कण, सल्फर डाइ आक्साइड, कार्बनडाइ ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड अन्य जहरीली गैसिज होती है। इनसे पर्यावरण को तो भारी नुकसान होता ही है। साथ ही दमा करोना के मरीजों को दिक्कतों का समाना करना पड़ता है। 

सीएमओ डा. विजय दहिया का कहना है कि प्रदूषण के कण बच्चों के नाक और मुंह से होते हुए उनके फेफड़ों में पहुंच जाते हैं। जो बच्चे के फेफड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। आने वाले दिनों में उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि बच्चे की उम्र जितनी कम होती है, उसे जोखिम भी उतना ज्यादा होता है। बच्चे लंबे समय कर प्रदूषित वातावरण में रहेंगे, उन्हें अस्थमा और निमोनिया जैसी गंभीर बीमारी भी हो जाती है। उन्होंने माना कि लंबे समय तक दूषित हवा में सांस लेने से बच्चों को मानसिक समस्याओं का भी सामना करना पड़ सकता है। 

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी निर्मल कश्यप का कहना है कि स्पेशल एनवायरमेंट सर्विलेंस टास्क फोर्स ने दो अवैध मैटल फैक्टरियों को बिना अनुमति के चलते पकड़ा है। जबकि में भारी अनियमितताएं पकड़ी है। सभी को क्लोजर नोटिस जारी कर दिए गए हैं। आला अधिकारियों से आदेश मिलते ही उन्हें सील कर दिया जाएगा।