लखनऊ । इन दिनों यूपी की सियासत में भगवा रंग सिर चढ़कर बोल रहा है।इस क्रम में सिर्फ सचिवालय ही नहीं मुख्यमंत्री आवास का रंग भी बदल चुका है। कुर्सियां, तौलिया, पर्दे और सोफा तक सभी भगवा हो गए हैं। इसी क्रम में अब लखनऊ के बाजार में केसरिया रंग की कैरी बैग की डिमांड बढ़ गई। राजधानी लखनऊ के थोक व्यापारियों के अनुसार अब दुकान से लेकर ठेला लगाने वाले सभी लोग केसरिया रंग की कैरी बैग की डिमांड कर रहे है।  विकास नगर में खस्ता और छोला का ठेला लगाने वाले राजेश यादव ने बताया कि जब से प्रदेश में योगी जी की सरकार आई हैं, तब से गुंडागर्दी कम हुई है। पहले इलाके के दबंग लोग से लेकर पुलिस भी हम लोगों का आर्थिक शोषण करते थे। राजेश ने बताया कि सीएम योगी आदित्यनाथ हमारे आदर्श हैं, क्योकि उनकी पहली पसंद केसरिया रंग हैं। ऐेसे में अब हम भी ग्राहकों को केसरिया रंग के बैग में समान दे रहे है।
हालांकि योगी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मोहसिन रजा ने नवंबर 2017 में सीतापुर के एक कार्यक्रम में बीजेपी के झंडे में शामिल रंगों का वर्णन करते हुए कहा कि "बीजेपी किसी से भेदभाव नहीं करती। हमारे झंडे में लगा हरा रंग मुस्लिम समाज की पहचान है, तो केसरिया हिंदू समाज की। जून 1995 में जब पहली बार यूपी में मायावती के रूप में एक दलित महिला ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब हर तरफ गहरा नीला रंग दिखाई दे रहा था। मायावती जहां भी रैली करतीं, वह जगह नीले रंग में रंगी नजर आती। उन्होंने अपने शासनकाल में बसें, बोर्ड, फुटपाथ की ग्रिलें, डायरी, कैलेंडर सहित जितनी चीजें हो सकती हैं, सबको नीले रंग में रंग दिया था।