संत अलवार ने अपनी जरूरतें बहुत ही कम कर ली थीं। उनकी झोंपड़ी भी इतनी ही थी कि उसमें केवल एक ही आदमी सो सकता था। एक बार रात में भारी वर्षा हो रही थी। अचानक किसी ने उनकी झोंपड़ी का दरवाजा खटखटाया। अलवार ने दरवाजा खोला। एक आदमी गीलों कपड़ों में थर-थर कांप रहा था, वह रास्ता भटक गया था। उसने झोंपड़ी में रात भर रुकने की प्रार्थना की।

संत ने कहा, ''अंदर आ जाओ, मेरी कुटिया में एक आदमी सो सकता है, लेकिन दो आदमी बैठ सकते हैं। हम दोनों बैठकर रात काट लेंगे।'' वह आदमी अंदर आ गया तो संत ने दरवाजा बंद कर लिया। थोड़ी देर बाद किसी ने फिर दरवाजा खटखटाया। एक आदमी पानी से तर-बतर सर्दी से कांप रहा था। उसने भी रात बिताने का निवेदन किया।

संत ने कहा, ''कुटिया तु हारी ही है, मजे से रात बिताओ परन्तु इस कुटिया में एक आदमी सो सकता है या दो आदमी बैठ सकते हैं या तीन आदमी खड़े हो सकते हैं। अंदर आ जाओ, हम तीनों खड़े-खड़े बातें करते हुए रात बिता सकते हैं।'' वह व्यक्ति भी अंदर आ गया। तीनों ने रात खड़े रहकर बिताई। सवेरे दोनों मेहमान संत अलवार को धन्यवाद देकर चले गए। हृदय में स्थान होना चाहिए, घर में स्थान अपने आप निकल आता है।