सिवानी-राजगढ़ रोड पर रविवार शाम करीब पांच बजे एक हादसे में गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय (जीजेयू) में तैनात रजिस्ट्रार अनिल पुंडीर, उनकी दो बहनों और कार चालक की मौत हो गई। हादसा तेज रफ्तार टैंकर के नीचे उनकी कार दबने की वजह से हुआ। इस दौरान उनसे थोड़ी ही दूरी पर चल रही एक अन्य कार कैंटर की चपेट में आ गई, जिससे कार सवार पांच लोगों को मामूली चोटें आईं।  हादसे की सूचना के बाद सिवानी के डीएसपी जयपाल सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवा कर जाम को खुलवाया।
उधर, चिकित्सकों की तरफ से चार लोगों को मृत घोषित किए जाने के बाद पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए अपने साथ भिवानी ले गई। अनिल पुंडीर अपनी दो बहनों ऊषा व सुशीला और चालक के साथ राजस्थान के सालासर धाम पर पूजा-अर्चना कर वापस हिसार की तरफ अपनी कार में आ रहे थे। करीब दस मीटर की दूरी पर ही उनके आगे-आगे एक अन्य कार चल रही थी। इसी बीच गैंडावास गांव के समीप पीछे से गैस से लदा एक टैंकर आया, जिसने रजिस्ट्रार से आगे चल रही कार को टक्कर मार दी।

टक्कर से टैंकर अनियंत्रित हो गया और पलट गया। इसी बीच पीछे से आ रही अनिल पुंडीर की कार भी टैंकर के नीचे दब गई। दोनों कारों में सवार लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे। हादसे का शोर व सवारियों के चिल्लाने की आवाज सुनकर वहां से गुजरने वाले लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और दोनों कारों में सवार लोगों को भारी मशक्कत के बाद बाहर निकाला।

दोनों कारों में सवार नौ लोगों को यहां के नागरिक अस्पताल में दाखिल करवाया गया, जहां सचिन बंसल व उनके अन्य साथियों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि जीजेयू में रजिस्ट्रार अनिल पुंडीर, उनकी बहन ऊषा, सुशीला व चालक को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। डीएसपी जयपाल सिंह ने बताया कि पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और फिलहाल दूसरी कार के चालक सचिन बंसल के बयान लिए जा रहे हैं।

मूलरूप से यूपी के सहारनपुर के रहने वाले थे पुंडीर
जीजेयू के रजिस्ट्रार डॉ अनिल कुमार पुंडीर ने विश्वविद्यालय में अप्रैल 2016 में कार्यभार संभाला था। उनसे पहले विश्विद्यालय के प्रो. एमएस तुरान ही रजिस्ट्रार का कार्यभार संभाल रहे थे। डॉ. पुंडीर का का करीब 30 वर्षों का अध्यापन का अनुभव था। कई नेशनल और इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस का आयोजन करवाने के साथ ही कई देशों की यात्रा कर चुके थे।

मूलरूप से उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के सोना अर्जुनपुर गांव के रहने वाले थे। डॉ. पुंडीर को अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में दो बार बेस्ट रिसर्च का अवार्ड मिला। वे कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय के कोर्ट मेंबर एवं एकेडमिक काउंसिल के मेंबर भी रहे। पीजीआई चंडीगढ़ के ब्लड ट्रांसफ्यूजन डिपार्टमेंट द्वारा भी सम्मानित किया गया था.

डा. पुंडीर ने 1987 में एसए जैन कॉलेज अंबाला में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर ज्वाइन किया था। 1996 तक उन्होंने यहां अपनी सेवाएं दी। इसके बाद मुकंदलाल पीजी कॉलेज यमुनानगर में इलेक्ट्रॉनिक्स के प्रोफेसर नियुक्त हुए और अप्रैल 2016 तक वहीं पर अपनी सेवाएं दी। अप्रैल 2016 में उन्हें जीजेयू का रजिस्ट्रार नियुक्त किया गया था। 31 अप्रैल 2019 में उनका कार्यकाल खत्म हो गया था। लेकिन इसके बाद अप्रैल माह में उन्हें दोबारा रजिस्ट्रार का अतिरिक्त कार्यभार  दिया गया।

यह रहा शैक्षणिक कैरियर
डा. पुंडीर ने चौ. चरण सिंह युनिवर्सिटी मेरठ से फिजिक्स में पीएचडी की थी। इसके अलावा वे एमएससी इन फिजिक्स, पीजी डिप्लोमा इन आईटी, सर्टीफिकेट कोर्स ऑफ डिजास्टर मैनेजमेंट कर चुके थे।

कनाडा से आई थी डॉ. पुंडीर की बहन, अगले सप्ताह जाना था वापस
गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार पुंडीर के साथ सालासर गईं दोनों बहनों में से एक बहन सुशीला कनाडा में रहती थी। पिछले सप्ताह ही बहन सुशीला कनाडा से आई थी। इसके बाद अगले सप्ताह बहन को वापस कनाडा जाना था। मगर इससे पहले ही यह हादसा हो गया। डॉ. पुंडीर के परिवार में चार बहनें और दो भाई हैं। उनके भाई अमेरिका में रहते हैं। इसके अलावा दो बच्चे हैं। इनमें बेटी गरिमा शादीशुदा है, जो पुणे में रहती है। वहीं इकलौता बेटा यमुनानगर में ही बिजनेस करता है। उनकी पत्नी गीता पुंडीर भी अपने बेटे पार्थ पुंडीर के पास यमुनानगर में ही रह रही हैं।

80 साल से ज्यादा है माता-पिता की उम्र, सूचना देने से कतराता रहा हर कोई
डॉ. पुंडीर के माता-पिता की उम्र 80 साल से ज्यादा है। इसलिए उन्हें इस हादसे की एकदम से भनक न लगे, इसलिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने रजिस्ट्रार के घर की केबल भी कटवा दी। देर रात तक माता-पिता को किसी ने भी हादसे की सूचना नहीं दी। यूनिवर्सिटी के अधिकारी और प्रोफेसर भी उन्हें सूचना देने से झिझकते रहे। बाद में फैसला लिया गया कि दोनों को सुबह ही जानकारी दी जाएगी।

डॉक्टर को भेजा रजिस्ट्रार आवास पर
यूनिवर्सिटी प्रशासन ने एहतियात के तौर पर शाम को यूनिवर्सिटी कैंपस के ही अस्पताल के डॉक्टर को रजिस्ट्रार आवास पर भी भेजा। अधिकारियों का मानना था कि अगर किसी तरह माता-पिता को जानकारी मिल जाए तो उसके बाद उनकी हालत न बिगड़ने पाए।

यूनिवर्सिटी के अधिकारी व प्रोफेसर लेते रहे जानकारी
जैसे ही इस हादसे की सूचना यूनिवर्सिटी के अधिकारियों और प्रोफेसरों को मिली तो वह मामले की जानकारी लेने में जुटे रहे। कई प्रोफेसर व अधिकारी रजिस्ट्रार आवास के आसपास भी घूमते रहे।
तीन दिन पहले ही कार्यशाला का किया था उद्घाटन
आखिरी बार रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार पुंडीर यूनिवर्सिटी में कार्यशाला के उद्घाटन अवसर पर सार्वजनिक रूप से दिखे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय के हरियाणा स्कूल ऑफ बिजनेस द्वारा रिसर्च मैथोलॉजी ऐंड डाटा एनालिसिस विषय पर शुरू हुई सात दिवसीय कार्यशाला का वीरवार को ही उद्घाटन किया था। अब शोकस्वरूप सोमवार को यह कार्यशाला रद्द रहेगी। इस कार्यशाला के लिए बाहर से भी विशेषज्ञ अतिथि आए हुए हैं।

आरएसएस की संस्था विज्ञान भारती के जिला संयोजक थे पुंडीर
डॉ. पुंडीर लंबे समय से आरएसएस के करीब रहे हैं। जिले में आरएसएस की संस्था विज्ञान भारती की स्थापना में पुंडीर का महत्वपूर्ण योगदान रहा था। उन्हें इस संस्था का जिला संयोजक भी बनाया गया था।  

मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे डॉ. पुंडीर
यूनिवर्सिटी के अधिकांश अधिकारियों का कहना है कि डॉ. अनिल पुंडीर मिलनसार व्यक्तित्व के धनी थे। वह हमेशा सामाजिक कार्यों में भी सक्रिय रहते थे। वह सादगी पसंद इंसान थे। हमेशा हर गतिविधि में सक्रिय भूमिका निभाते हुए दूसरों को भी निष्ठापूर्वक दायित्व निभाने की प्रेरणा देते थे।

रजिस्ट्रार डॉ. अनिल कुमार पुंडीर बेहद ही मिलनसार और मेहनती अधिकारी थे। उनके साथ तीन साल से अधिक का यादगार समय गुजारा है। उनके अनेक संस्मरण हैं, जिनकी हमेशा याद आएंगी। निश्चित रूप से यूनिवर्सिटी ने एक बेहतरीन व्यक्ति खो दिया है। मैं पुंडीर परिवार के प्रति संवेदनाएं प्रकट करता हूं।