उन्नाव. उन्नाव गैंगरेप केस (Unnao Gangrape Case) में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर (MLA Kuldeep Singh Senger) दोषी (Convict) करार दिया गया है. दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट मामले में 19 दिसंबर को सजा का ऐलान करेगी. बता दें पीड़िता का इलाज दिल्ली के एम्स में चल रहा है. सियासी रसूख के बल पर दबंगई की इस कहानी में पुलिस से लेकर पूरा सिस्टम एक समय गैंगरेप पीड़िता और उसके परिवार के खिलाफ खड़ा नजर आया था. कहानी तब बदली, जब परेशान पीड़िता लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास पर आत्महत्या करने पहुंच गई.
दरअसल उन्नाव रेप मामला पिछले साल उस समय चर्चा में आया था जब, उस समय 16 साल की रही पीड़ित लड़की ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर न्याय के लिए प्रदर्शन किया था. पीड़ित लड़की ने आरोप लगाया था कि 2017 में नौकरी के लिए जब वह बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर के घर गई थी तो उसके साथ बलात्कार किया गया था. घटना के लगभग एक साल बाद अप्रैल 2018 में लड़की ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घर के बाहर खुद को आग लगाने की कोशिश की थी.
इसके बाद मामले ने तूल पकड़ा तो आरोपी विधायक को गिरफ्तार कर लिया गया. इस बीच लड़की के पिता की भी संदिग्ध हालातों में पुलिस हिरासत में मौत हो जाती है. यही नहीं रायबरेली जेल में बंद अपने चाचा से मिलकर लौट रही उन्नाव रेप पीड़िता की गाड़ी की ट्रक से टक्कर हो जाती है. इस हादसे में पीड़िता की मौसी, चाची और ड्राइवर की मौत हो गई, जबकि पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए.
दरअसल, पूरा मामला 4 जून 2017 का है. माखी थाना क्षेत्र के गांव से किशोरी को गांव के ही शुभम और उसका साथी कानपुर के चौबेपुर निवासी अवधेश तिवारी अगवा कर ले गए. पीड़िता की मां ने माखी थाने में तहरीर दी, जिसमें विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर पड़ोस की एक महिला के जरिए बहाने से घर बुलाकर रेप करने और इसके बाद उसके गुर्गों द्वारा गैंगरेप करने का आरोप लगाया. पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की.
11 जून 2017 को पीड़िता ने अदालत की शरण ली. कोर्ट के आदेश पर अवधेश तिवारी, शुभम तिवारी व अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. लेकिन इसमें विधायक कुलदीप सिंह और आरोपी महिला का नाम नहीं था.
3 अप्रैल 2018 को विधायक के भाई अतुल सिंह को पता चला कि पीड़िता का पिता दिल्ली से घर वापस आया है. अतुल सिंह अपने गुर्गों के साथ गांव पहुंचा और मुकदमा वापस लेने का दबाव बनाया. न मानने पर पर पीड़िता के पिता की बेरहमी से पिटाई की. सूचना पर पुलिस भी पहुंची. लेकिन पुलिस के सामने ही पीड़ित परिवार की पिटाई होती रही. इसके बाद विधायक पक्ष की तरफ से टिंकू सिंह ने मारपीट और आर्म्स एक्ट में मुकदमा लिखवाकर पीड़िता के पिता को ही जेल भिजवा दिया.4 अप्रैल 2018 को पीड़िता की मां ने तहरीर दी. पुलिस ने माखी गांव के ही विनीत, सोनू, बउवा और शैलू सहित अन्य लोगों के खिलाफ मारपीट का मुकदमा दर्ज किया. आरोप लगा कि इस मुक़दमे में पुलिस ने विधायक के भाई अतुल सिंह का नाम हटा दिया. उधर पिटाई से घायल पीड़िता के पिता का पुलिस ने दो दिन इलाज कराने के बाद शाम को जेल भेज दिया.
8 अप्रैल 2018 को पीड़िता ने परिवार समेत सीएम आवास के बाहर आत्मदाह की कोशिश की. गैंगरेप पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके साथ न्याय नहीं हो रहा है. विधायक कुलदीप सिंह सेंगर उसके पूरे परिवार की हत्या करवा देगा.
9 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की उन्नाव जेल में मौत हो गई. पीड़िता के पिता की जेल में मौत के बाद मामला तूल पकड़ने लगा. विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला किया. पुलिस भी हरकत में आई और लखनऊ क्राइम ब्रांच जांच करने उन्नाव पहुंची. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बयान जारी कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए. इस बीच सीएम ने विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को तलब किया. मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सेंगर ने खुद को निर्दोष बताया.
10 अप्रैल 2018 को पीड़िता के पिता की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई. इसमें उनकी मौत की वजह शॉक और ब्रेन हेमरेज बताई गई. एडीजी लॉ एंड आर्डर आनंद कुमार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी गठित कर दी. उन्होंने कहा कि उन्नाव मामले की नए सिरे से जांच होगी और बीजेपी विधायक पर भी कार्रवाई होगी. वहीं पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत मामले में विधायक के भाई अतुल सिंह सेंगर व 4 अन्य को क्राइम ब्रांच ने गिरफ्तार कर लिया.
11 अप्रैल 2018 को एडीजी लखनऊ राजीव कृष्ण से रेप पीड़िता ने मुलाकात की. बाद में पीड़िता के खिलाफ मामले और उसके पिता की हिरासत में मौत के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया गया. मामले में उन्नाव के माखी पुलिस थाने में तीन केस दर्ज किए गए. इसी दौरान यूपी सरकार ने मामले की जांच सीबीआई को ट्रांसफर कर दी.
7 जुलाई 2018 को सीबीआई ने पहली चार्जशीट दाखिल की. इसमें सीबीआई ने कुलदीप सेंगर के भाई अतुल सेंगर सहित 5 लोगों को गैंगरेप पीड़िता के पिता की हत्या में आरोपी बताया.
11 जुलाई 2018 को रेप केस मामले में सीबीआई ने कुलदीप सिंह सेंगर और शशि सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
13 जुलाई 2018 को तीसरे केस में सीबीआई ने कुलदीप सिंह सेंगर और 9 अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की. इसमें आरोप लगा कि इन लोगों ने साजिश रची और रेप पीड़िता के पिता को आर्म्स एक्ट के केस में फंसाया. इस चार्जशीट में माखी पुलिस स्टेशन में तैनाती तीन पुलिसकर्मी (तत्कालीन एसओ अशोक सिंह भदौरिया भी) शामिल किए गए.
4 जुलाई 2019 को पीड़िता के चाचा को 19 साल पुराने एक हत्या के प्रयास के केस में जिला अदालत ने 10 साल की सजा सुनाई. इस केस को कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह ने फाइल किया था.
28 जुलाई 2019 को रायबरेली के गुरुबख्शगंज में हुई एक दुर्घटना में रेप पीड़िता और उसके वकील बुरी तरह घायल हो गए, वहीं पीड़िता की चाची और मौसी की मौत हो गई. चाची रेप केस में गवाह थीं.
29 जुलाई 2019 को विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सहित 29 अन्य के खिलाफ इस कार दुर्घटना की साजिश रचने को लेकर एफआईआर दर्ज की गई.
16 दिसंबर 2019 को कुलदीप सिंह सेंगर को रेप के मामले में दोषी करार दिया गया.