कानपुर |शहर में जीका वायरस दस्तक दे चुका है लेकिन अभी बचाव को लेकर सतर्कता पर स्वास्थ्य महकमा गंभीर नजर नहीं रहा है। इस वायरस का सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं को है क्योंकि इसका संक्रमण होने पर सीधा असर गर्भस्थ शिशु पर पड़ता है। गर्भ में शिशु के ब्रेन की हड्डियां गलनी शुरू हो जाती हैं और सिर का आकार छोटा होने के साथ विकृति जाती है।

कानपुर शहर में स्वास्थ्य महकमे का सर्विलांस सिस्टम अभी तक यह पता नहीं कर सका है कि आखिर एयरफोर्स कर्मचारी संक्रमित कैसे हुआ। इस वायरस का स्रोत पता नहीं चलने से खतरा बरकरार है। अधिकारियों का तर्क है कि स्वजन समेत सभी 22 की रिपोर्ट निगेटिव है। कंटेनमेंट जोन बनाकर घर-घर सर्वे कराया जा रहा है। हर संभव बचाव के उपाय करने से कोई दिक्कत नहीं है। जीका वायरस गर्भवती के लिए घातक है, जो गर्भस्थ शिशु के ब्रेन पर अटैक करता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिले में अभी तक वायरस का सोर्स अज्ञात है। ऐसे में जीका का संक्रमण गर्भवती महिलाओं में हो जाए तो घातक साबित होगा, खासकर पहले से तीसरे माह के गर्भ के लिए।

वायरस गर्भस्थ शिशु के ब्रेन पर सीधे अटैक करता है, ब्रेन की हड्डियों को ठीक से बनने नहीं देता है। वायरस की वजह से शिशु के ब्रेन की हड्डियां गर्भ में गलने लगती हैं। इस वजह से ब्रेन पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता। ऐसे बच्चे बहुत छोटे सिर के साथ जन्म लेते हैं। छोटे सिर के साथ विकृति लिए पैदा होने की इस समस्या को माइक्रो सिफैली कहते हैं।