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ऐतिहासिक गणेश प्रतिमा से छेड़छाड़…

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छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में करीब 3 हजार फीट की ऊंचाई पर ढोलकल शिखर पर स्थापित गणेश भगवान की मूर्ति के साथ असामाजिक तत्वों ने छेड़छाड़ की है।  मूर्ति के साथ छेड़छाड़ करने वाले बदमाशों की पहचान नहीं हो पाई है। इधर, करीब 11वीं-12वीं शताब्दी से स्थापित इस ऐतिहासिक मूर्ति से छेड़छाड़ करने के बाद लोगों में भी काफी नाराजगी देखने को मिल रही है। अब काले ग्रेनाइट से निर्मित इस प्रतिमा की सूंड पर खुरचकर किसी ने अपना नाम अंकित कर दिया है। पर्यटन, पुरातत्व विभाग की लापरवाही के चलते मनचलों का दुस्साहस बढ़ता ही जा रहा है।

दरअसल, ढोलकल शिखर पर विराजे गणपति के दर्शन करने लोगों की भीड़ दिन ब दिन बढ़ती जा रही है। घने जंगल और पहाड़ी रास्तों पर ट्रैकिंग कर यहां पहुंचा जाता है। इसलिए पर्यटन के लिहाज से यह क्षेत्र पर्यटकों के लिए बेहद पसंदीदा हो गया है। यहां ट्रैकिंग के साथ ही भगवान के दर्शन करते हैं। ऐसे में इस सदियों पुरानी गणेश भगवान की मूर्ति के साथ दूसरी बार छेड़छाड़ की गई है। मूर्ति के सूंड में पत्थर से खरोंचकर अपना नाम लिखा है।

पहले भी फेंक द‍िया था खाई में

यह पहली बार नहीं है कि मूर्ति के साथ छोड़छाड़ हुई हो। साल 2017 में भी असामाजिक तत्वों ने गणेश प्रतिमा को पहाड़ी से नीचे फेंक दिया था। हालांकि, मूर्ति को ढूंढने पूरा प्रशासन लगा था। पुलिस जवानों, ड्रोन कैमरे की मदद से मूर्ति के टुकड़ों को ढूंढा गया था। फिर, एक-एक कर मूर्ति को फिर से जोड़ा गया था। हालांकि, उस समय भी सूंड का अंतिम हिस्सा नहीं मिल पाया था। प्रशासन ने इस ऐतिहासिक मूर्ति को फिर से वहीं स्थापित किया था। उसके बाद इस इलाके को संजोने के लिए कई तरह की योजना बनाई गई थी। प्रशासन ने ट्रैकिंग वाले रास्तों समेत मूर्ति पर फोकस कर खुफिया CCTV कैमरे लगाने की योजना बनाई थी। लेकिन आज तक इस पर किसी तरह की कोई पहल नहीं हुई। यही वजह है कि दूसरी बार असामाजिक तत्वों ने मूर्ति के साथ छेड़छाड़ की है।

ये हो सकते हैं सही उपाय

इस जगह पर खुफिया सीसी टीवी कैमरों की व्यवस्था कर निरंतर निगरानी करना.

ढोलकल प्रतिमा वाली चट्टान पर चढ़ने को प्रतिबंधित करना.

लोहे की जाली नुमा संरचना बनाकर प्रतिमा को संरक्षित करना.

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