Saturday, December 10, 2022
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Pandit Pradeep Mishra : कैसे बने कथा वाचक पंडित प्रदीप मिश्रा..

Shiv Puran Pandit Pradeep Mishra : खचाखच भीड़ के बीच कथा में आने वाले हर व्यक्ति की एक ही आस होती है किसी तरह पं. प्रदीप मिश्रा की कथा पंडाल में बैठकर कथा सुन सकें। नजारा ऐसा होता है मानो कथा नहीं मेला लगा हो। हालांकि, यह संभव नहीं हो सकता क्योंकि कथा के दूसरे दिन यहां दोगुनी भीड़ उमड़ पड़ती है। इस डर में कि अगले दिन जगह नहीं मिली तो? सुबह होते भीड़ बढ़ने लगती है।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के गुढियारी के दही हांडी मैदान में पंडित प्रदीप मिश्रा की शिव पुराण कथा के दौरान जब पंडिज जी मीडिया से मिले तो उन्‍होंने अस्पताल में जन्म से लकर कथा वाचक तक की अपने जीवन के सफर से जुड़ी कई बातें बताईं। मध्यप्रदेश के सीहोर में जन्में पंडित प्रदीप मिश्रा ने शुरुआती जीवन के बारे में बताया की उनका जन्म घर के आंगन में तुलसी की क्यारी के पास हुआ था, क्योंकि अस्पताल में जन्म के बाद दाई को जो रुपए दिए जाते थे उतने भी हमारे पास नहीं थे। मेरे पिता स्व. रामेश्वर मिश्रा पढ़ नहीं पाए थे। वह चने का ठेला लगाते थे। बाद में चाय की दुकान चलाई, मैं भी दुकान में जाकर लोगों को चाय दिया करता था।

भरपेट खाना भी नहीं मिलता था

पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया- मेरा कोई लक्ष्य नहीं था, मैं दूसरों के कपड़े पहनकर स्कूल गया, दूसरों की किताबों से पढ़ा। बस यही चिंता रहती थी कि पेट भर जाए और परिवार को संभाल लें। भगवान शिव ने पेट भी भरा और जीवन भी संवारा। हमें याद है, बहन की शादी का जिम्मा था, मुझे याद है सीहोर के एक सेठ की बेटी की शादी हुई तो भवन में डेकोरेशन था। हम उस सेठ के पास हाथ जोड़कर कहने गए थे कि वो अपना डेकोरेशन रहनें दें ताकि इसी में हमारी बहन की शादी हो जाए।

कथा वाचक बनने की प्रेरणा, दीक्षा, आशीर्वाद और शुरुआत

पंडित प्रदीप मिश्रा ने बताया कि सीहोर में ही एक ब्राह्मण परिवार की गीता बाई पराशर नाम की महिला ने उन्हें कथा वाचक बनने प्रेरित किया। वो दूसरों के घरों में खाना बनाने का काम करती थीं। मैं उनके घर पर गया था, उन्होंने मुझे गुरुदीक्षा के लिए इंदौर भेजा। मेरे गुरु श्री विठलेश राय काका जी ने मुझे दीक्षा दी। पुराणों का ज्ञान दिया। पंडित मिश्रा बताते हैं कि उनके गुरु के मंदिर में सैंकड़ो पक्षी रहते हैं। गुरु पक्षियों से श्री कृष्ण बुलवाते थे। मंत्र बुलवाते थे। पक्षी भी हमारे गुरुधाम में हरे राम हरे कृष्ण, बाहर निकलो कोई आया है… बोलते हैं। मुझे याद है मैं जब उनके पास गया था तो मुझे देखते ही उन्होंने मेरी गुरुमाता अपनी पत्नी से कहा- बालक आया है भूखा है, इसे भोजन दो। इसके बाद उन्होंने मुझे आशीर्वाद देकर कहा था तुम्हारा पंडाल कभी खाली नहीं जाएगा। शुरुआत में मैंने शिव मंदिर में कथा भगवान शिव को ही सुनाना शुरू किया। मैं मंदिर की सफाई करता था। इसके बाद सीहोर में ही पहली बार मंच पर कथावाचक के रूप में शुरुआत की।

धर्मान्तरण को लेकर बोले पंडित प्रदीप मिश्रा

जो धर्मान्तरण करवा रहे हैं, पहले उनके माता पिता से पूछें कि वो कौन से धर्म से थे? उनके दादा – परदादा कौन से धर्म के थे। धर्मान्तरण कराने वालों को कहा ये उनकी विपरीत बुद्धि है उन्हें ऊपर से प्रेशर रहता है, उन्हें इतना माल दिया जाता है कि उन्हें धर्मान्तरण कराना पड़ता है।

एक लोटा जल समस्या का हल

अपने कथा के कार्यक्रमों में पंडित प्रदीप मिश्रा लोगों से कहते हैं एक लोटा जल समस्या का हल। इसके बारे में उन्होंने कहा- शिव बाबा की कृपा होती है जल चढ़ाने से। माता पार्वती भी उन्हें जल चढ़ाती थीं। भगवान गणेश जी भी। भगवान राम जब अयोध्या से निकले और जहां-जहां रुके शिवलिंग बनाए और जल चढ़ाया। जल का महत्व ये है कि हम अपने हृदय भाव भगवान को अर्पित कर रहे हैं। हृदय में शिव का ध्यान करके जल चढ़ाइए और अपनी समस्या भगवान से साझा करिए। हमारे यहां शिव पुराण में कमल गट्‌टे के जल का प्रयोग बताया गया है। इसे शुक्रवार के दिन भगवान शिव पर चढ़ाएं, इससे लक्ष्मी आती है और आरोग्यता रहती है।

कर्म करिए और विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना करें

पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा- भगवान शिव कर्म करने को कहते हैं। हम अपनी कथा में भी लोगों से यही कहते हैं कि कर्म करिए और विश्वास के साथ भगवान शिव की आराधना करें। भगवान शिव ने अपने पुत्रों को विष्णु की तरह बैकुंठ और रावण को दी गई सोने की लंका नहीं दी। उन्होंने उन्हें भी कर्म करने दिया।

भगवान शिव कोई नशा नहीं करते

विष पीते समय जो बूंदे गिरीं वो भांग धतूरा बनीं, वो सिर्फ शिव के पास रखी होती हैं। उनका सेवन शिव नहीं करते। आजकल युवा नशे की ओर जा रहे हैं। आज के पोस्टर्स भगवान शिव को गांजा पीते या चिलम के साथ दिखाया जाता है। स्वयं माता पार्वती ने शिव जी से पूछा था आप किस नशे में रहते हैं तो उन्होंने कहा – राम नाम का नशा है।

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