Wednesday, November 30, 2022
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विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला 26 अक्टूबर से 10 नवंबर तक

अजमेर , अजमेर जिले के तीर्थराज पुष्कर में कार्तिक महीने के अन्तरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त मेले को लेकर बैठक की गई. मेला प्राधिकरण उपाध्यक्ष रमेश बोराणा ने आज अजमेर कलेक्ट्रेट में विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेले को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक की और मेले में व्यापक व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए. जिला कलेक्टर अंशदीप ने बताया कि पशुपालन विभाग की ओर से जारी आदेशानुसार राज्य स्तरीय कार्तिक पशु मेला पुष्कर साल 2022 का आयोजन 26 अक्टूबर से 10 नवंबर तक किया जाएगा.

मेले को लेकर अधिकारियों के साथ बैठक

इस मौके पर बैठक के पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए बोराणा ने बताया कि राजस्थान में कई ऐतिहासिक मेले आयोजित होते हैं, जिनकी तमाम व्यवस्थाओं को लेकर सरकार की ओर से व्यापक व्यवस्थाएं भी की जाती है. पिछले साल कोरोना गाइडलाइन के बीच मेले का आयोजन हुआ था. साल 2020 में कोरोना के कारण मेले का आयोजन नहीं हुआ था. ऐसे में दोनों ही साल कोई खास रौनक नहीं रही. इस बार विदेशी भी अच्छी संख्या में आने की उम्मीद है साथ ही धार्मिक सांस्कृतिक कार्यक्रम ही आकर्षण का केन्द्र रहेंगे. ऐसे में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को किसी तरह की परेशानी ना हो इस बात को ध्यान में रखते हुए अजमेर कलेक्टर एसपी और अन्य अधिकारियों से बातचीत की गई है और उनसे फीडबैक लिया गया है.बोराणा ने बताया कि इस बार लपी स्किन डिजीज के साथ ही अन्य जानवरों में बीमारी होने की जानकारियां मिल रही थी जिसके चलते पशु मेले पर रोक लगा दी गई है. सरकार मेले पर रोक लगाना नहीं चाहती थी लेकिन मजबूरन यह किया गया है जिससे कि सभी सुरक्षित रह सके. वहीं धार्मिक मेला हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी आयोजित होगा और इस वर्ष इसे बेहद विशाल स्तर पर आयोजित किया जाएगा. विगत 2 सालों से कोविड-19 महामारी के कारण श्रद्धालु और पर्यटक यहां नहीं आ पा रहे थे. ऐसे में इस वर्ष इस मेले में डबल या उससे अधिक श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचने की उम्मीद . ऐसे में व्यवस्थाओं को सुचारू करने के लिए इंतजाम किए गए हैं. इस मेले में सुरक्षा के साथ ही विभिन्न धार्मिक आयोजनों को लेकर व्यवस्था की जानी है. यह सभी व्यवस्थाएं बेहतर हो इस के निर्देश दिए गए हैं. उन्होंने कहा कि विगत दिनों मेले में अप्रिय घटना सामने आई थी ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति ना हो इस पर विशेष ध्यान रखा जाएगा .

पुष्कर में आते हैं हजारों पशु एवं लाखों श्रद्धालु

पुष्कर पशु मेले में जहां हजारों ऊंट, घोड़े समेत विभिन्न प्रजाति के पशु आते हैं तथा पशुपालकों के बीच करोड़ों रुपयों का लेनदेन होता है. वहीं लाखों श्रद्धालु सरोवर में स्नान और मंदिरों के दर्शन के लिए आते हैं. साथ ही प्रशासन की ओर से मेलार्थियों के मनोरंजन के लिए अनेक रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं, जिसमें राजस्थानी लोक कलाकारों के साथ-साथ कई अंतराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकारों को भी आमंत्रित किया जाता है. मेले के दौरान अनेक पशु प्रतियोगिताएं व देशी-विदेशी पर्यटकों के बीच ग्रामीण खेलकूद प्रतियोगिता आयोजित की जाती है.

26 अक्टूबर से 10 नवंबर तक मेला

पुष्कर दो कारणों से बेहद प्रसिद्ध है. पहला ब्रह्मा जी का मंदिर और दूसरा यहां का मेला. यूं तो मेले पूरे देश में कहीं ना कहीं रोज लगते हैं. पशुओं के मेले भी लगते हैं, लेकिन पुष्कर में जो मेला लगता है उसकी बात ही अलग है. यहां ऊंटों का मेला दुनिया भर में प्रसिद्ध है और ये मेला इतना मजेदार होता है कि लोग इस पल को कैद किए बिना नहीं रहते है. मेले की शुरूआत कार्तिक पूर्णिमा के दिन होती है. इस बार ये मेला 26 अक्टूबर से 10 नवंबर तक किया जाएगा. पुष्कर मेला कई सालों से लगता आ रहा है और राजस्थान सरकार इसके लिये विशेष अनुदान भी देती है. ये मेला रेत पर कई किलोमीटर तक लगता है.  पुष्कर मेले में हजारों की संख्या में विदेशी सैलानी भी पहुंचते हैं. अधिकतर सैलानी राजस्थान सिर्फ इस मेले को देखने ही आते हैं. सबसे अच्छा नजारा तब दिखता है जब मेले के ऊपर से गर्म हवा के रंग बिरंगे गुब्बारे उड़ते हैं. इन गुब्बारों में बैठकर ऊपर से मेला और भी भव्य दिखता है.

पुष्कर नाम के पीछे की पौराणिक कहानी

पुष्कर नाम कैसे आया, इसके पीछे एक पौराणिक कहानी है। एक बार भगवान ब्रह्मा ने अन्य देवताओं की तरह पृथ्वी पर प्रार्थना नहीं किए जाने की बात पर चिंता की। उसे पृथ्वी पर अपने नाम पर एक स्थान रखने की इच्छा थी। इसलिए उसने एक कमल का फूल फेंका, जो तीन स्थानों पर गिरा, और वहां से पानी चमत्कारिक रूप से बाहर निकला। पहला स्थान जहां फूल गिरे, उन्हें ज्येष्ठ पुष्कर के रूप में जाना जाता है, दूसरा स्थान मध्य पुष्कर है, और तीसरा स्थान क्रमशः कनिष्ठ पुष्कर या वरिष्ठ, मध्य और कनिष्ठ है। ब्रह्मा ने फूल को अपने हाथों से ‘पुष्पा’ यानी ‘कर’ को फेंक दिया; इसलिए, इस जगह का नाम पुष्कर हो गया।

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