हिमाचल भाजपा मंत्रियों विधायकों के टिकट काट नये चेहरों को मैदान में उतार लड़ेगी चुनाव

धर्मशाला । हिमाचल भाजपा के मौजूदा तीन मंत्रियों और कुछ विधायकों के टिकट कटने की खबर से हड़कंप मच गया है। भाजपा के कई नेता अपनी अपनी टिकट बचाने के लिये जोड तोड  करने लगे हैं।  जिससे हिमाचल भाजपा की सियासत गरमा गई है।
दरअसल , उत्तर प्रदेश में भी भाजपा ने कई सिटिंग विधायकों के टिकट काट कर चौंका दिया था। कुछ ऐसा ही फार्मूला प्रदेश में भी तैयार किया जा रहा है। सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिये तैयार किये गये फार्मूले में कई नेता जद में आ सकते हैं।
कुछ दिन पहले जब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने अपने हिमाचल प्रवास के दौरान कांगड़ा में भाजपा की बैठक को संबोधित करते हुये प्रदेश के नेताओं को अगले चुनावों में मौजूदा विधायकों के टिकट काटे जाने की बात कही थी, तो भाजपा नेताओं ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया था। लेकिन बदले घटनाक्रम में अब बाकायदा जिन लोगों के टिकट कटने के आसार हैं, उनके नाम सार्वजनिक होने से चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटे नेता हैरान हैं।  चूंकि पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया है कि मौजूदा विधायकों में से 15 फीसदी विधायकों के टिकट उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड की तर्ज पर कट सकते हैं।
बताया जा रहा है कि नड्डा के हिमाचल दौरे के बाद भाजपा ने दो चरणों में आंतरिक सर्वे कराया गया है। जिसमें स्थानीय स्तर पर कुछ विधायकों और जय राम सरकार के काबीना मंत्रियों के खिलाफ जनता में असंतोष होने  की बात कही गई है।  इस रिपोर्ट के आने के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने सीएम जय राम ठाकुर से बात की है। व टिकट काटे जाने की सूरत में प्रभावित होने वाले इलाकों में नये चेहरे तलाशने को कहा गया है। इसी के चलते पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सौदान सिंह , पार्टी के हिमाचल प्रभारी अविनाश राय खन्ना और सह प्रभारी प्रदेश के विभिन्न चुनाव क्षेत्रों का लगातार दौरा कर पार्टी की स्थिति का जायजा ले रहे हैं।
बताया जा रहा है कि भाजपा के सर्वेक्षण में मंत्रियों के खिलाफ लोगों में गहरी नाराजगी की बात सामने आई है। बीते दिनों चंबा में शिक्षा मंत्री गोविंद के खिलाफ तो मुर्दाबाद के नारे लगे कि कई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं कर पाए हैं। जल शक्ति मंत्री महेंद्र सिंह को कुल्लू और ठियोग में विभिन्न मसलों से नाराजगी व्यक्त कर रोका गया और उनके खिलाफ नारेबाजी हुई। जनमंच के लिए जाते हुए ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी और सामाजिक न्याय अधिकारिता मंत्री सरवीण चौधरी को सवर्ण आयोग ने काले झंडे दिखाए।
पवन राणा के खिलाफ की गई बयानबाजी पार्टी को नागवार गुजरी है। धर्मशाला के विधायक विशाल नैहरिया का अपनी पत्नी के बीच चल रहा विवाद उनके राजनीतिक भविष्य के लिये खतरा पैदा कर रहा है।  नगरोटा बगवां के विधायक के प्रति भी लोगों में नाराजगी है।  ज्वाली के विधायक अर्जुन सिंह और बैजनाथ से मुल्ख राज प्रेमी की परफॉर्मेंस से पार्टी नाखुश बताई जा रही है। इसी तरह पिछला चुनाव हार चुके 23 भाजपा नेताओं के दोबारा चुनाव मैदान में उतरने को लेकर भी संशय बना हुआ है।
पार्टी जल्द ही पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को राज्यपाल बनाने जा रही है। लिहाजा धूमल के भी बार चुनाव लड़ने की संभावना नहीं है। इसी तरह बार बार चुनाव हारने की वजह से पार्टी इस बार पूर्व भाजपा अध्यक्ष सतपाल सत्ती को चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है।  इस साल के अंत में होने वाले चुनावों के लिये भाजपा पहले ही चुनावी मोड में आ चुकी है। भाजपा नेताओं के दौरों के चलते अब टिकट कटने के दायरे में आने वाले नेता परेशान हैं, तो दूसरी ओर टिकट के चाहवान अपनी गोटियां बिठाने में मशगूल हैं।  

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