Wednesday, April 17, 2024
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सावन में शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये चीजें..

Sawan: इस साल 4 जुलाई 2023 से सावन माह की शुरुआत हो रही है और इसका समापन 31 अगस्त को होगा। ऐसे में इस साल शिव पूजा के लिए भक्तों के पास ज्यादा समय होगा। सावन माह का हर दिन को खास माना जाता है। इस माह में महादेव की कृपा पाने के लिए सोमवार का व्रत रखा जाता है। साथ ही शिवलिंग की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि सावन माह में शिव पूजा मनोरथ पूर्ण करने वाली होती है। इस पवित्र महीने में शिव भक्त अलग-अलग तरीकों से भगवान शिव की आराधना करते हैं, लेकिन धार्मिक शास्त्रों में कुछ ऐसी चीजें भी बताई गई हैं जिन्हें शिवलिंग पर नहीं चढ़ानी चाहिए। आइए जानते हैं कौन सी वो चीजें हैं…

तुलसी

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव ने तुलसी के पति असुर जालंधर का वध किया था। इसलिए तुलसी ने स्वयं भगवान शिव को अपने अलौकिक और दैवीय गुणों वाले पत्तों से वंचित कर दिया। यही वजह है कि शिव जी की पूजा में तुलसी दल का प्रयोग नहीं किया जाता है।

केतकी के फूल

शिवपुराण के अनुसार ब्रह्मा जी के एक झूठ में केतकी फूल ने उनका साथ दिया था, जिससे रुष्ट होकर शिव जी ने केतकी के फूल को श्राप दिया और कहा कि मेरी पूजा में कभी भी केतकी के फूल को अर्पित नहीं किया जाएगा। इसी श्राप के बाद से शिव पूजा में केतकी के फूल नहीं अर्पित किए जाते हैं।

हल्दी

शिव पूजा में कभी भी हल्दी का इस्तेमाल नहीं होता है, क्योंकि हल्दी को स्त्री से संबंधित माना गया है और शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है। ऐसे में शिव जी की पूजा में हल्दी का उपयोग करने से पूजा का फल नहीं मिलता है।

टूटे हुए चावल

टूटा हुआ चावल अपूर्ण और अशुद्ध माना गया है, इसलिए शिव पूजा में इसे नहीं चढ़ाना चाहिए। इससे पूजा का पूर्ण फल नहीं मिलता है।

कुमकुम या सिंदूर

सुहागिन महिलाएं पति की लंबे और स्वस्थ जीवन की कामना के लिए अपने मांग में सिंदूर लगाती हैं। पूजा में भी कुमकुम या सिंदूर का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन शिव जी को कुमकुम या सिंदूर नहीं चढ़ाना चाहिए, क्योंकि शिव विनाशक हैं और उनकी पूजा में इन चीजों का इस्तेमाल अशुभ माना जाता है।

तिल

शिवलिंग पर तिल को अर्पित करना वर्जित माना गया है। ऐसे में भूलकर भी भगवान शिव की पूजा में तिल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

शंखजल

पौराणिक कथा के अनुसार दैत्य शंखचूड़ के अत्याचारों से देवता परेशान थे। महादेव ने उसका वध किया था, जिसके बाद उसका शरीर भस्म हो गया और उस भस्म से शंख की उत्पत्ति हुई थी। शिव जी ने शंखचूड़ का वध किया इसलिए कभी भी शंख से शिव जी को जल अर्पित नहीं किया जाता है।

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