Saturday, November 26, 2022
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गुरुनानक जयंती प्रकाश पर्व आज, रात 1.22 बजे होगी फूलों की वर्षा

इंदौर ।   सिख पंथ के संस्थापक गुरु नानकदेव महाराज का 554वां प्रकाश पर्व कार्तिक पूर्णिमा पर मंगलवार को हर्षोल्लास से मनाया जाएगा। इस अवसर पर दीवान खालसा कालेज राज मोहल्ला में सुबह 5.15 से दोपहर 2.45 बजे और शाम 6.30 से रात 1.45 बजे तक होगा। इसमें सुबह 11 बजे अमृत संचार और ठीक रात 1.22 पर फूलों की वर्षा की जाएगी। गुरु का अटुट लंगर दो दीवान के दौरान में बरतेगा। श्रीगुरु सिंघ सभा के कार्यवाहक अध्यक्ष दानवीर सिंह छाबड़ा और महासचिव जसबीर सिंह गांधी ने बताया कि इसमें शामिल होने वाली साध संगत के लिए 15 हजार वर्गफीट का जर्मन डोम बनाया गया है। इसकी ऊंचाई 17 फीट रखी गई है। दीवान में एक हजार से ज्यादा सेवादार लंगर, पार्किंग, जोड़ा, शरबत और अन्य सेवा में सहयोग देंगे। साथ ही कीर्तनकार भाई मनप्रीत सिंह और गुरमति विचारक ज्ञानी सरबजीत सिंह कोटिया अमृतसर वाले सहित विभिन्ना कीर्तनकार गुरु महिमा का गुणगान करेंगे। कीर्तन में इंदौर के 34 गुरुद्वारों के अतिरिक्त पीथमपुर, बेटमा, उज्जैन, धार की संगत भी आएंगी। लंगर के लिए भोजन सेवा की शुरुआत सोमवार रात से शुरू हो गई थी। दीवान के लिए विशेष पंडाल बनाया गया।

कीर्तनकारों ने इंदौर की नानक यात्रा का उल्लेख

सोमवार को सुबह का दीवान गुरुद्वारा इमली साहिब यशवंत निवास रोड और शाम का दीवान खालसा कालेज राजमोहल्ला में सजा। इसमें भाई राजिंदर सिंह व भाई किरनदीप सिंह जालंधर वालों ने शबद कीर्तन किया। इस अवसर पर गुरमति विचारक ज्ञानी सरबजीत सिंह कोटिया ने गुरु नानक देव महाराज के जन्म समय की स्थिति का वर्णन विस्तार पूर्वक किया। उन्होंने कहा कि गुरु नानक देव महाराज जगत कल्याण के लिए 4 (उदासी) जन कल्याण यात्रा की। उन्होंने सभी जगह जाकर सत्य का उपदेश दिया। शबद का प्रचार किया, जिससे भूले भटके मनुष्य सत्य के मार्ग पर प्रेरित हुए। इंदौर की धरती पर भी बहुत भाग्यशाली है। यहां की निवासी संगत के भी बहुत उच्च भाग है, जहां गुुरु नानक देव महाराज के चरण पड़े। जिस इमली के पेड़ के नीचे 505 वर्ष पूर्व गुरु नानक देव महाराज ने गुरवाणी में धुर की वाणी का उच्चारण कर संगतों को निहाल-निहाल किया व व्यर्थ कर्मकांडों से बचने का उपदेश दिया था, उस स्थान पर गुरु नानक चौक स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारा इमली साहिब सुशोभित है। कीर्तनकार भाई मनप्रीत सिंह कानपुरी ने गुरवाणी शबद का गायन किया।

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