Thursday, February 29, 2024
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वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के रंग को लेकर सरकार ने किया बड़ा खुलासा

Vande Bharat Latest News: रेलगाड़ी के पारंपरिक रूप को पीछे छोड़कर रंगीन अवतार में दौड़ रहीं वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों के रंग को लेकर सरकार ने बड़ा खुलासा किया है। देश की पहली सेमी हाई स्पीड सबसे पहले 16 कोच के साथ अपने ट्रेडिशिनल नीले और सफेद रंग के साथ लॉन्च हुई थी। देखते-देखते ही इस ट्रेन की लोकप्रियता पूरे भारत में बढ़ गई है। देश के अलग-अलग हिस्सों में इस वक्त 34 जोड़ी वंदे भारत एक्सप्रेस चल रही है, जिसमें से कासरगोड-तिरुवनंतपुरम के बीच एक ऑरेंज कलर की वंदे भारत ट्रेन भी चलती है। रेलवे द्वारा नीली-सफेद वंदे भारत ट्रेन के बाद नए एडवांस फीचर्स के साथ ऑरेंज या केसरिया रंग में वंदे भारत ट्रेन को लाने को लेकर रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इसके पीछे कोई राजनीतिक नहीं पूरी तरह से साइंटिफिक कारण हैं। साथ ही उन्होंने हाल ही में वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन की भी झलक सोशल मीडिया पर दिखाई है। रेल यात्रियों के सफर को और सुखद बनाने के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें अब स्लीपर कोच के साथ आने के लिए तैयार है और 2024 के मध्य तक दुनिया के सामने आ सकती है।

वैष्णव ने कहा,

वैष्णव ने कहा, ‘मानव आंखों के लिए, दो रंग सबसे आसानी से दिखने वाले माने जाते हैं – पीला और नारंगी। यूरोप में, लगभग 80 प्रतिशत ट्रेन या तो नारंगी होती हैंया उनमें पीले और नारंगी का संयोजन होता है।’ उन्होंने कहा, ‘सिल्वर रंग जैसे और भी कई रंग हैं, जो पीले और नारंगी जैसे चमकीले होते हैं लेकिन अगर हम मानव आंखों की दृश्यता की दृष्टि से बात करें तो ये दो (नारंगी और पीले) रंग सबसे अच्छे माने जाते हैं।’

उन्होंने कहा कि इन्हीं कारणों से विमानों और जहाजों में ब्लैक बॉक्स नारंगी रंग के होते हैं। मंत्री नेकहा, ‘यहां तक कि बचाव नौकाएं और जीवन रक्षक जैकेट भी नारंगी रंग की होती हैं जिनका इस्तेमाल राष्ट्रीय आपदा मोचन बल करता है’।

देश में पहली नारंगी रंग की वंदे भारत ट्रेन को पीएम नरेंद्र मोदी ने 24 सितंबर का कासरगोड और तिरुवनंतपुरम के लिए हरी झंडी दिखाई थी। इस दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक साथ 9 जोड़ी वंदे भारत ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई थी। कासरगोड-तिरुवनंतपुरम 31वीं वंदे भारत ट्रेन थी, जो 19 अगस्त को तमिलनाडु के चेन्नई के पेरंबूर में रेल कोच निर्माता इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में ट्रायल रन के लिए ट्रैक पर उतरी थी।

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