Monday, June 24, 2024
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63 हजार शिक्षकों की सेवा सुरक्षा खतरे में, आदेश का पालन करने का निर्देश

प्रयागराज : उत्तर प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों की सेवा सुरक्षा पर फिलहाल खतरा मंडरा रहा है। इन स्कूलों के प्रधानाचार्यों एवं शिक्षकों का चयन उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड के माध्यम से होता है लेकिन नियोक्ता प्रबंधक होते हैं। चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की धारा-21 में यह प्रावधान है कि प्रधानाचार्य या शिक्षक पर कोई कार्रवाई करने या दंड देने से पहले प्रबंधक चयन बोर्ड से अनुमोदन लेते हैं।

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग विधेयक

उत्तर प्रदेश में नए विधेयक के अनुसार अब एडेड कॉलेज के शिक्षकों की सेवा शर्तें और सुरक्षा इंटर मीडिएट शिक्षा अधिनियम -1921 के विनियमों के अध्याय-3 के अनुसार संचालित होगी। प्रबंधकों के हाथों शिक्षकों का उत्पीड़न बढ़ेगा। चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की धारा-21 में यह प्रावधान है कि प्रधानाचार्य या शिक्षक पर कोई कार्रवाई करने या दंड देने से पहले प्रबंधक चयन बोर्ड से अनुमोदन लेते हैं। हालांकि नौ अगस्त को विधानसभा से पारित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग विधेयक में यह प्रावधान नहीं है। इस विधेयक की धारा-16 के अनुसार अब एडेड कॉलेज के शिक्षकों की सेवा शर्तें और सुरक्षा इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम -1921 के विनियमों के अध्याय-3 के अनुसार संचालित होगी। ऐसे में आशंका है कि अब प्रबंधकों के हाथों शिक्षकों का उत्पीड़न और भी बढ़ जाएगा।

चयन बोर्ड की धारा-18 को भी हटा दिया गया है

प्रधानाचार्य के पद पर तदर्थ पदोन्नति की व्यवस्था भी नहीं रहेगी प्रयागराज। नई व्यवस्था में प्रधानाचार्य के पद पर तदर्थपदोन्नति की व्यवस्था भी नहीं रहेगी। यानि भविष्य में नियमित प्रधानाचार्य के सेवा निवृत्त होने पर वरिष्ठतम शिक्षक प्रधानाचार्य का काम तो करेंगे पर उन्हें प्रधानाचार्य का वेतन नहीं मिलेगा। नए आयोग के विधेयक में चयन बोर्ड की धारा-18 को भी हटा दिया गया है। जिसके अंतर्गत प्रधानाचार्य के पद पर तदर्थ पदोन्नति की व्यवस्था थी। हमारा सरकार से अनुरोध है कि चयन बोर्ड अधिनियम की धारा-21 की व्यवस्था को नए आयोग अधिनियम में भी संशोधन करके लाया जाए। ऐसा न करने पर सभी शिक्षकों को पूरी क्षमता और एकता के साथ इसके लिए संघर्ष करना होगा।

प्रदेश महामंत्री माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुटगु लंबे संघर्ष के बाद चयन बोर्ड की नियमावली बनी थी। जिसमें बिना पूर्वानुमोदन प्रबंधक की कार्रवाई शून्य मानी जाती थी। अब मनमाने तरीके से शिक्षकों पर कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। नए विधेयक में सेवा सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है। संघर्ष की योजना बन रही है। इसको सम्मिलित कराया जाएगा।

सचिव को आदेश का पालन करने का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बेसिक शिक्षा परिषद प्रयागराज के सचिव प्रताप सिंह बघेल को कोर्ट के आदेश का पालन कर हलफनामा दाखिल करने या हाजिर होने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सचिव को आदेश का अनुपालन कर हलफनामा दाखिल करने के लिए एक माह का समय दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने चेतना साहनी की द्वितीय अवमानना याचिका पर अधिवक्ता एमए सिद्दीकी को सुनकर दिया है। कोर्ट ने सचिव को सहायक अध्यापक याची का स्थानान्तरण सीतापुर से लखनऊ करने पर विचार करने का आदेश दिया था। पालन न करने पर दाखिल अवमानना याचिका पर कोर्ट ने आदेश पालन करने का समय दिया था। इसके बावजूद आदेश पालन नहीं किया गया तो दोबारा यह अवमानना याचिका की गई है। कोर्ट ने कहा कि प्रथमदृष्टया सचिव ने न्यायालय के आदेश की अवहेलना की है।


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