Wednesday, April 17, 2024
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ममता से मिले केजरीवाल, अध्यादेश को लेकर मांगा समर्थन

कोलकाता । केंद्र के अध्यादेश को लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से 23 मई को मुलाकात की। इस दौरान पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, दिल्ली सरकार में कैबिनेट मंत्री आतिशी, सांसद संजय सिंह और राघव चड्ढा भी मौजूद रहे।  
बैठक के बाद आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जहां इनकी (बीजेपी) सरकार नहीं होती है, वहां राज्यपाल के जरिए शासन चलाया जाता है। केजरीवाल ने दावा किया कि हमारी सरकार को काम नहीं करने दिया जा रहा है। इसके बाद इस अहंकारी सरकार (केंद्र सरकार) को हटाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने हमारी सारी शक्तियां छीन ली है। ये लोग (केंद्र) सीबीआई का गलत इस्तेमाल करके पूरे देश भर में विपक्ष की सरकारों को परेशान करने का काम कर रहे हैं। 
वहीं टीएमसी की अध्यक्ष और सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि दिल्ली सरकार के खिलाफ केंद्र के लाए गए अध्यादेश का पार्टी विरोध करेगी। हम इस मुद्दे पर सभी दलों से साथ आने की अपील करते हैं। बनर्जी ने कहा कि सभी पार्टी राज्यसभा में इसके खिलाफ वोट करें। 
केजरीवाल ने कहा कि हमने पंजाब, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू में देखा कि राज्यपाल कैसे सरकार को तंग कर रहे हैं। दिल्ली में इन्होंने जो किया वह जनतंत्र के खिलाफ है। मैं दीदी का धन्यवाद करूंगा कि राज्यसभा में इन्होंने कहा कि वे हमारा समर्थन करेंगी। राज्यसभा में अगर यह बिल गिर जाता है, तब यह 2024 से पहले सेमीफाइनल होगा। 
केजरीवाल ने कहा कि ये लड़ाई केवल दिल्ली वालों की लड़ाई नहीं है। ये लड़ाई भारतीय जनतंत्र को बचाने की लड़ाई है, बाबा साहेब के दिए संविधान को बचाने की लड़ाई है, न्यायपालिका को बचाने की लड़ाई है। ये लड़ाई देश बचाने की लड़ाई है। इसमें सबके साथ की अपेक्षा करता हूँ। 
मामला क्या है? 
हाल ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में काम कर रहे अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग करने का अधिकार केजरीवाल सरकार के पास है, इस लेकर केंद्र सरकार भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और दानिक्स कैडर के अधिकारियों के तबादले और उनके खिलाफ प्रशासनिक कार्यवाही के लिए राष्ट्रीय राजधानी लोक सेवा प्राधिकरण गठित करने के वास्ते 19 मई को अध्यादेश लेकर आई थी। बता दें किसी अध्यादेश को छह महीने के भीतर संसद की मंजूरी मिलना आवश्यक होता है। माना जा रहा है कि केंद्र सरकार संसद के मॉनसून सत्र में इस अध्यादेश से संबंधित विधेयक पेश कर सकती है। 

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