Monday, April 22, 2024
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मक्का, दाल और कपास की MSP गारंटी के लिए किसानों से करार करेगी सरकार

MSP गारंटी : यदि वे चावल की जगह मक्का, कपास और दालों की खेती करते हैं, तो सरकार अगले पांच वर्षों तक इन किसानों की पूरी फसल खरीदने की गारंटी देगी। यह खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर की जाएगी। शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार इस खरीद के लिए पूरी तरह से तैयार है और अगले सीजन से यह योजना शुरू की जा रही है। यह योजना पूरे देश के लिए लागू होगी।

उन्होंने बताया कि चावल की खेती के कारण जल स्तर काफी नीचे जा रहा है, खासकर पंजाब और हरियाणा में भूजल स्तर काफी नीचे चला गया है। चावल की खेती में पानी की खपत भी बहुत अधिक होती है जबकि मक्का, दालों और कपास की खेती में पानी की खपत अपेक्षाकृत कम होती है। इन दिनों इथेनॉल बनाने के लिए मक्के की भारी मांग है और सरकार इथेनॉल बनाने के लिए चावल का इस्तेमाल बंद करना चाहती है।

दालों का घरेलू उत्पादन खपत से कम होने के कारण भारत ने वर्ष 2023 में लगभग 29 लाख टन विभिन्न दालों का आयात किया है। दालों का उत्पादन बढ़ने से किसानों को फायदा होगा और भारत इस मामले में आत्मनिर्भर बन सकेगा। दाल उत्पादन का मामला। मसूर, उड़द और अरहर दाल की खेती पर सरकार पांच साल तक पूरी फसल एमएसपी पर खरीदने की पूरी गारंटी देगी।

सरकार की इस योजना से जुड़ने वाले किसानों को शपथ पत्र देना होगा कि उन्होंने चावल की खेती छोड़कर मक्का, कपास और दालों की खेती शुरू कर दी है। सरकार चाहे तो किसानों के खेतों में जाकर उनके शपथ पत्र की जांच भी कर सकती है। फसल बीमा योजना के जरिए सरकार को इन किसानों का खेती का डेटा भी मिलता रहेगा। इस योजना से जुड़ने वाले किसानों को सरकारी पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा।उनकी पूरी फसल की खरीद के लिए सरकारी एजेंसियों राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) और भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ (नेफेड) के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। ये दोनों एजेंसियां किसानों की फसल खरीदेंगी।

गोयल ने कहा कि सरकार उपभोक्ताओं और किसानों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है। इसका मतलब यह है कि किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिले और उपभोक्ताओं को भी फसल महंगी न लगे।उन्होंने बताया कि तभी उन्होंने एक लाख टन प्याज निर्यात करने की अनुमति दे दी है। ताकि किसानों को प्याज की सही कीमत मिलती रहे और जरूरत पड़ने पर उन्हें अधिक निर्यात की इजाजत दी जा सके, लेकिन अगर घरेलू कीमत एक स्तर से ज्यादा बढ़ने लगी तो निर्यात छूट वापस ले ली जाएगी।

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