Friday, June 21, 2024
Homeधर्मनागपंचमी में बन रहा है शुभ संयोग, कालसर्प दोष है तो इस...

नागपंचमी में बन रहा है शुभ संयोग, कालसर्प दोष है तो इस तरह करें नाग पंचमी में पूजा…

Nag Panchami 2023: नागपंचमी का दिन नाग देवता की पूजा जाती है। धर्म-शास्त्रों में अष्ट नाग देवता बताए गए हैं। इनमें वासुकी, तक्षक, कालिया, मणिभद्रक, ऐरावत, धृतराष्ट्र, कार्कोटक और धनंजय नामक अष्टनाग की पूजा करना काफी फलदायी होता है। इनमें से कुछ नाग भगवान शिव को बेहद प्रिय हैं। हिंदू धर्म में नागों को पूजनीय माना गया है। इस दिन रुद्राभिषेक करना फलदायी माना गया है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा में फल, फूल, मिठाई और दूध अवश्य ही अर्पित करना चाहिए। इसके अलावा जिन जातकों की कुंडली में कालसर्प दोष या फिर राहु-केतु से संबंधित कोई दोष हो तो नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा जरूर करनी चाहिए।

हर साल नाग पंचमी सावन के शुक्ल की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। शास्त्रों में 12 प्रकार के नाग बताए गए हैं। भगवान शिव ने अपने गले में नाग को धारण किया है। वहीं भगवान विष्णु शेषनाग की शैय्या पर आराम करते हैं। वहीं माना जाता है कि पृथ्वी को नाग ने अपने फन पर संभाला हुआ है। सावन महीना भगवान शिव को बेहद प्रिय है। सावन में ही नाग देवता की पूजा का दिन नागपंचमी पड़ती है।

नागपंचमी पर शुभ संयोग

इस साल 21 अगस्त 2023, सोमवार को नागपंचमी पड़ रही है। सोमवार का दिन भी भगवान शिव को समर्पित है। ऐसे में नागपंचमी का सोमवार के दिन पड़ना बेहद शुभ है। नागपंचमी के दिन अष्ट नाग देवताओं की पूजा की जाती है। हिंदू धर्म में 8 नाग देवता माने गए हैं। इन नाग देवताओं की पूजा करने से सर्पदंश, अकाल मृत्यु, भय, धन हानि, कष्टों से निजात मिलती है। नाग देवता की पूजा करने से अपार सुख, समृद्धि, धन-दौलत मिलती है।

हिंदू धर्म में 8 नाग देवता बताए गए हैं

वासुकी नागः वासुकी नाग को भोलेनाथ के गले का श्रृंगार माना जाता है। इसे शेषनाग का भाई माना गया है। माना जाता है कि जब देवतओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया था तब रस्सी की जगह वासुकी नाग का ही इस्तेमाल किया गया था। वासुकी नाग वही नाग है जिसने बचपन में वासुदेव द्वारा नदी पार करते समय भगवान कृष्ण की रक्षा की थी।

अनन्त नागः अनन्त नाग को भगवान श्रीहरि का सेवक माना गया है। अनन्त नाग को शेषनाग भी कहा जाता है। माना जाता है कि अनंत नाग के फन पर ही धरती टिकी हुई है।

पद्म नागः पद्म नाग को महासर्प कहा गया है। माना जाता है कि पद्म नाग गोमती नदी के पास शासन करते थे। बाद में ये नाग मणिपुर में जाकर बस गए थे। इसलिए उन्हें नागवंशी कहा जाता है।
महापद्म नागः महापद्म नाग का नाम शंखपद्म भी है। महापद्म नाग के फन पर त्रिशूल का निशान बना होता है। महापद्म नाग का वर्णन विष्णु पुराण में भी मिलता है।

तक्षक नागः तक्षक नाग को क्रोधी नाग रूप माना गया है। माना जाता है कि तक्षक नाग पाताल में रहते है। तक्षक नाग का वर्णन महाभारत में भी किया गया है।

कुलीर नागः कुलीर नाग को ब्राह्मण कुल का माना गया है और उनका संबंध जगतपिता ब्रह्मा जी से बताया गया है।

कर्कट नागः कर्कट नाग को भगवान महादेव का एक गण माना गया है। कर्कट नाग बेहद भयानक होते हैं और इनकी पूजा करने से काली के श्राप से मुक्ति मिलती है।

शंख नागः शंख नागों को नागों में सबसे ज्यादा बुद्धिमान माना गया है।

नाग पंचमी पूजा महत्व

नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा करने से जीवन के संकटों का नाश होता है। साथ ही मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। कहा जाता है कि यदि इस दिन किसी व्यक्ति को नागों के दर्शन होते हैं तो उसे बेहद शुभ माना जाता है।

RELATED ARTICLES

Most Popular

Recent Comments