Wednesday, April 17, 2024
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भाजपा की राह चली कांग्रेस…

मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव  भले ही 18 महीने दूर हों, लेकिन भाजपा और कांग्रेस ने जमीन पर इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। भाजपा संगठन तो हालांकि साल भर कोई न कोई कार्यक्रम आयोजित कर पार्टी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सांस लेने का मौका नहीं देती, लेकिन आमतौर पर कांग्रेस चुनाव के चंद महीने पहले ही सक्रिय होती है। हालांकि कांग्रेस में इस बार हालात बदले बदले नजर आ रहे हैं। भाजपा गत 20 जनवरी से बूथ विस्तारक अभियान के जरिए हर बूथ पर जाकर मतदाताओं से संपर्क कर रही है, वहीं कांग्रेस भी इसके जबाव में 1 फरवरी से घर चलो, घर-घर चलो अभियान शुरू कर रही है। इस अभियान की रूपरेखा खुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की देखरेख में तैयार हुई है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर कांग्रेस के इस अभियान बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें sampadkiy 1कोई संदेह नहीं की संगठनात्मक रूप से भाजपा प्रदेश में कांग्रेस से ज्यादा सक्रिय रहती है। इसका बड़ा कारण उनका कैडर भी है, जो निरंतर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के फीडबैक पर संगठन विस्तार के लिए अभियान चलाता रहता है। कांग्रेस ने भी पिछले कुछ वर्षों से भाजपा की तर्ज पर संगठन को मजबूत करने का अभियान शुरू किया है। कमलनाथ ने पिछले विधानसभा चुनाव के पहले इसकी शुरुआत की थी। लीडरबेस कांग्रेस में जिस तरह संगठन की बारीकियों पर अब ध्यान दिया जा रहा है, इससे पहले शायद कभी नहीं दिया गया। मंडलम्, सेक्टर का गठन इसका बड़ा उदाहरण है।

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बूथ विस्तारक के जवाब में घर-घर चलो

घर चलो घर-घर चलो अभियान के तहत पांच से सात लोगों की टोली बनाई जा रही हैं। ये टोलियां अपने साथ मतदाता सूची लेकर चलेंगी। जिस घर में यह टोली जाएगी, वहां उस घर के व्यक्तियों का नाम मतदाता सूचियों से मिलाया जाएगा, अगर किसी का नाम नहीं है, तो उससे मतदाता सूची में नाम जुड़वाने का निवेदन किया जाएगा। इसके अलावा पार्टी कार्यकर्ता एक और पेपर अपने हाथ में रखेंगे। इसमें केन्द्र और राज्य सरकार की विफलताओं का लेखा-जोखा होगा। कांग्रेस कार्यकर्ता लोगों को बताएंगे कि पिछले कुछ सालों में देश और प्रदेश में महंगाई किस तेजी से बढ़ी है। इसके अलावा वे प्रदेश सरकार की अन्य विफलताओं को भी लोगों के बीच रखेंगे। कांग्रेस इस अभियान के महत्व को समझते हुए इसकी सतत् निगरानी करेगी, इसके लिए छह सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी देखेगी की किस जिले में, ब्लॉक में, मंडलम् में, सेक्टर में अभियान कितनी गंभीरता से चलाया जा रहा है या खानापूर्ति की जा रही है। अभियान औपचारिक बनकर न रह जाए, इसलिए पार्टी ने एक मॉनीटरिंग कमेटी का गठन किया है। यह कमेटी पूरे समय अभियान की निगरानी करेगी। अभियान के दौरान सदस्यता पर भी फोकस रहेगा। आगामी विधानसभा चुनाव में संगठन के स्तर पर कांग्रेस भाजपा का कितना मुकाबला कर पाएगी, यह आने वाला वक्त बताएगा, लेकिन कांग्रेस ने कम से कम कोशिश तो शुरू की है, कई बार कोशिशें कामयाब हो जाती हैं।

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