Tuesday, April 23, 2024
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डर्मेटोमायोसाइटिस: 19 साल की सुहानी जिंदगी का ‘दंगल’ में हारी…

आमिर खान की हिट फिल्म दंगल में आमिर खान की बेटी बनी मासूम से चेहरे वाली सुहानी की उम्र मात्र 19 साल की थी, अब वह इस दुनिया नहीं हैैं। उनकी इस छोटी सी उम्र में हुई मौत को लेकर हर कोई हैरान है। आखिर क्यों त्वचा पर होने वाली एक बीमारी ने सुहानी को इस दुनिया से अलविदा कहने को मजबूर कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स और अन्य सूत्रों से मिली जानकारी की बात को माना जाए तो सुहानी भटनागर को डर्मेटोमायोसाइटिस की बीमारी थी। यह बीमारी लक्षण से बहुत सामान्य लगती है लेकिन कब यह खतरनाक हो जाए यह कहा नहीं जा सकता। अभी 11 दिन पहले ही सुहानी भटनागर को दिल्ली के एम्स में भर्ती किया गया था। बीमारी की जांच की गई और टेस्ट करने पर पता चला कि उन्हें डर्मेटोमायसिस की बीमारी।

स्किन डिजीज डर्मेटोमायोसाइटिस क्या है बीमारी

डर्मेटोमायोसाइटिस एक रेयर अनकॉमन डिजीज है जो महिलाओं को ज्यादा होती है। इस बीमारी के होने पर पीडि़त व्यक्ति की इम्यूनिटी बहुत कमजोर हो जाती है इसे सामान्य भाषा में ऐसा कहा जा सकता है कि इंसान की बीमारियों से लडऩे की क्षमता अत्यधिक कम हो जाती है और इसके इलाज की बात की जाय तो एकमात्र इलाज स्टेरॉयड है लेकिन इससे इम्यून सिस्टम के और अधिक प्रभावित होने का खतरा रहता है। इस बीमारी में सेल्स में इंफ्लामेशन हो जाती है जिसके मांसपेशियां तेजी से कमजोर होने लगती है और स्किन पर रैशेज होने लगते हैं।

क्या हैैं डर्मेटोमायोसाइटिस लक्षण

डर्मेटोमायोसाइटिस के लक्षण या तो बहुत देर से दिखते हैं या अचानक भी दिख सकते हैं। आमतौर पर इसका पहले संकेत स्किन में बदलाव से शुरू होता है। स्किन सबसे पहले वॉयलेट या डस्की कलर की होने लगती है। इससे स्किन पर रैशज होने लगते हैं। यह रैशेज सामान्य तौर पर चेहरा और आंखों के आसपास दिखते हैं। रैशज से खुजली भी होती है और दर्द भी होता है। डर्मेटोमायोसाइटिस में इम्यून सिस्टम कमजोर होने के कारण मसल्स काफी कमजोर होने लगते हैं। हिप्स, थाय, शोल्डर, हाथ का उपरी हिस्सा और गर्दन के मसल्स काफी तेजी से कमजोर होने लगते हैं। यह कमजोरी बाई और दाई दोनों तरफ हो सकती है जो धीरे-धीरे बहुत खराब स्थिति में ले जाती है।

क्यों हो जाती है डर्मेटोमायोसाइटिस

मायो क्लिनिक के मुताबिक डर्मेटोमायोसाइटिस के कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन यह ऑटोइम्यून डिसॉर्डर की तरह ही होती है, इसमें इम्यून सिस्टम गलती से अपने हेल्दी टिशू पर हमला करने लगता है, इसमें जेनेटिक और पर्यावरणीय कारण भी भूमिका निभाते हैं, पर्यावरणीय कारणों में वायरस इंफेक्शन, सूर्य की तेज रोशनी, कुछ दवाइयां और स्मोकिंग भी इसकी वजह हो सकती है।

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