Saturday, June 22, 2024
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टीनएजर में हो रहे मानसिक अवसाद या डिप्रेशन के लक्षण, जानें कैसे करें इलाज

Mental Health Day: टीनएजर एक ऐसी उम्र है जिसमें बच्‍चे खुद अपनी इच्‍छाओं, जरूरतों और व्‍यवहार को ठीक तरह से समझ नहीं पाते हैं। यह उम्र जिंदगी का एक नया पड़ाव होता है, जो कई मुश्‍किलों और चुनौतियों से भरा होता है। बदलते हार्मोन्स के कारण वे पहले ही कई बदलावों से गुजर रहे होते हैं, उस पर मेंटल हेल्थ की समस्या उनके जीवन को और कठिन बना सकती है। इन मेंटल हेल्थ की परेशानियों में डिप्रेशन की समस्या होने की संभावना काफी अधिक हो सकती है। ऐसे में कुछ लक्षणों की सहायता से आप अपने टीनएज बच्चे की वक्त रहते सहायता कर सकते हैं।
14 साल के बाद से बच्‍चों में डिप्रेशन हो सकता है और टीनएज उम्र खत्‍म होने तक 20 पर्सेंट बच्‍चों में क्‍लीनिकल डिप्रेशन होता है। चूंकि, इमोशनली लड़कियां जल्‍दी मैच्‍योर हो जाती हैं और लड़कों की तुलना में इनमें डिप्रेशन होने का खतरा ज्‍यादा रहता है। किशोरावस्‍था के मध्‍य तक इनमें डिप्रेशन के साथ कोई मूड विकार हो जाता है। हर साल 10 अक्टूबर को मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है। मेंटल हेल्थ का ख्याल रखना कितना जरूरी है, इस बारे में जागरूकता फैलाने के लिए यह दिन मनाया जाता है। अपनी जीवनशैली के कारण हम कई तरह के मानसिक तनाव से गुजरते हैं, लेकिन फिर भी अक्सर हम अपनी मेंटल हेल्थ पर ध्यान नहीं देते। इस कारण से यह समस्या और गंभीर हो सकती है। आइए जानते हैं कि किन लक्षणों से कर सकते हैं डिप्रेशन की पहचान और कैसे कर सकते हैं अपने टीनएज बच्चे की मदद।

कैसे करें डिप्रेशन की पहचान

  • बिना किसी कारण के रोना या दुखी होना।
  • छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना।
  • आत्म विश्वास की कमी।
  • चीजों को या बातों को याद न रख पाना।
  • सोचने में तकलीफ होना या फोकस न कर पाना।
  • असफलता को लेकर सेंसिटिव होना।
  • थकावट।
  • ड्रग्स या शराब का सेवन।
  • नींद न आना या बहुत अधिक नींद आना।
  • भूख न लगना।
  • आत्महत्या के विचार
  • स्कूल में खराब परफॉर्मेंस
  • अकेलापन
  • हालांकि, टीनेजर्स में डिप्रेशन का पता लगाना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि बदलते हार्मोन्स के कारण इनमें होने वाले कुछ बदलाव इन लक्षणों से मेल खा सकते हैं।

कैसे करें मदद

प्रोफेशनल मदद: डिप्रेशन के लक्षण दिखने पर अपने बच्चे को प्रोफेशनल मदद यानी डॉक्टर से मिलवाएं। डॉक्टर इनके लक्षणों को बेहतर तरीके से पहचान सकते हैं और उस हिसाब से उसका इलाज किया जा सकेगा।

उनकी बात सुनें: अक्सर हम अपने बच्चों की बात को सुनने के बजाय, उन्हें सलाह देने लगते हैं। इस कारण से आपके बच्चे को यह लग सकता है कि आप उन्हें समझ नहीं पा रहे हैं। इसलिए वे आपसे बात शेयर करना बंद करने लगते हैं। कोशिश करें कि ध्यान से उनकी बात सुनें। इससे उन्हें यह लगेगा कि उनके साथ कोई है, जिससे वे खुल कर बात कर सकते हैं। कई बार बात करने से समस्या का हल मिल सकता है।

सवाल करें: उनसे शांति से सवाल पूछें कि क्यों वे अपने दोस्तों के साथ वक्त नहीं बिता रहे या स्कूल में कोई परेशानी है क्या। इस तरह के सवालों से उनके मन में चल रही बातों को जानने की कोशिश करें। इस तरह आप उनके बदले बर्ताव के पीछे के कारण को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे।

उन्हें आराम दें: डिप्रेशन के कारण आपके बच्चे में थकावट या एनर्जी की कमी हो सकती है, जिस कारण से हो सकता है कि वे ज्यादा कामों में शामिल न हों। इस बात पर उन्हें डांटे नहीं, बल्कि उनकी परेशानी को समझें और जैसे अन्य बीमारियों में उन्हें आराम देते हैं, वैसे ही डिप्रेशन भी एक बीमारी है, जिसमें उन्हें आराम की जरूरत होती है।

लाइफस्टाइल में बदलाव: जीवनशैली का हमारे मेंटल हेल्थ पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए अपने बच्चे के साथ-साथ पूरे परिवार की लाइफस्टाइल पर ध्यान दें। इससे आपके बच्चे को यह नहीं लगेगा कि सिर्फ उसके साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है। हेल्दी खाना खाएं, एक्सरसाइज करें, सोने का समय निर्धारित करें, स्क्रीन टाइम कम करें, एक-दूसरे के साथ समय बिताएं।

मेंटल हेल्थ डे पर एक सीनियर मनोवैज्ञानिक ने बताया कि, मेंटल हेल्थ हमारा एक बेसिक राइट है। यह उतना ही महत्वपूर्ण है, जितने हमारे अन्य अधिकार। मेंटल हेल्थ का अधिकार हमारी समानता और खुशी से जुड़ा है। इसके लिए हमारे समाज में यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि हर व्यक्ति को बेहतर मेंटल हेल्थ के लिए सभी जरूरी सुविधाएं और अवसर प्राप्त हो सके।

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