Home Blog Page 22

महिला टी20 विश्व कप: दक्षिण अफ्रीका की रिकॉर्ड जीत, क्या भारत को अब दूसरे नतीजों पर रहना होगा निर्भर?

0

महिला टी20 विश्व कप 2026 के 24वें बेहद महत्वपूर्ण मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका (प्रोटियाज टीम) ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए नीदरलैंड्स को धूल चटा दी है। काउंटी ग्राउंड पर खेले गए इस हाई-स्कोरिंग मैच में दक्षिण अफ्रीका से मिले 209 रनों के एवरेस्ट जैसे लक्ष्य का पीछा करने उतरी नीदरलैंड्स की टीम निर्धारित 20 ओवरों में 8 विकेट के नुकसान पर महज 120 रन ही बना सकी। इस 88 रनों की विशाल जीत के साथ दक्षिण अफ्रीका ने न सिर्फ सेमीफाइनल के लिए अपनी मजबूत दावेदारी पेश की है, बल्कि ग्रुप-ए के समीकरणों को उलझाकर भारतीय महिला टीम की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं।

क्यों बढ़ी भारतीय टीम की धड़कनें? समझें गणित

इस मैच के नतीजों के बाद सेमीफाइनल की जंग बेहद दिलचस्प हो गई है। ग्रुप-ए में इस समय भारत और दक्षिण अफ्रीका दोनों के ही चार-चार मैचों के बाद समान 6-6 अंक हैं। इस बड़ी जीत से दक्षिण अफ्रीका ने अपने नेट रन रेट (NRR) को काफी मजबूत कर लिया है। टीम इंडिया की असली चिंता यह है कि उसे अपना आखिरी और निर्णायक ग्रुप मैच डिफेंडिंग चैंपियन ऑस्ट्रेलिया जैसी घातक टीम के खिलाफ खेलना है, जबकि दक्षिण अफ्रीका का सामना अपेक्षाकृत कमजोर बांग्लादेश की टीम से होना है। सेमीफाइनल का टिकट कटाने के लिए भारत को हर हाल में कंगारू टीम को मात देनी होगी। इसके साथ ही दुआ करनी होगी कि या तो बांग्लादेश की टीम दक्षिण अफ्रीका को हरा दे, या फिर दक्षिण अफ्रीका का नेट रन रेट भारत से आगे न निकल पाए।

महिला टी20 विश्व कप 2026: ग्रुप A की ताजा अंक तालिका

टीममैचजीतहारअंकनेट रन रेट (NRR)
ऑस्ट्रेलिया4408+4.724
भारत4316+2.268
दक्षिण अफ्रीका4316+0.734
बांग्लादेश4224-0.849
पाकिस्तान (बाहर)4040-2.831
नीदरलैंड्स (बाहर)4040-3.640

ताजमिन ब्रिट्स का कत्लेआम, दक्षिण अफ्रीका ने बनाया विशाल स्कोर

इससे पहले, टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीकी टीम ने नीदरलैंड्स के गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए 20 ओवर में सिर्फ 1 विकेट खोकर 208 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया। कप्तान लौरा वोल्वार्ट (45 रन, 36 गेंद) और सलामी बल्लेबाज ताजमिन ब्रिट्स ने पहले विकेट के लिए 13.3 ओवर में 121 रनों की तूफानी साझेदारी की। ब्रिट्स ने मैदान के चारों तरफ शॉट लगाते हुए महज 69 गेंदों में 15 चौकों और 3 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 114 रनों की नाबाद शतकीय पारी खेली। आखिरी के ओवरों में एनेरी डेर्कसेन ने भी बहती गंगा में हाथ धोए और सिर्फ 16 गेंदों में 37 रनों की आतिशी पारी खेल डाली। नीदरलैंड्स की ओर से एकमात्र सफलता हन्ना लैंडहीर को मिली।

शुरुआती मजबूत शुरुआत के बाद ताश के पत्तों की तरह ढही नीदरलैंड्स की पारी

विशाल लक्ष्य के दबाव में उतरी नीदरलैंड्स की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक अच्छी रही थी। फेबे मोलकेनबोअर (41 रन) और सान्या खुराना (36 रन) ने पहले विकेट के लिए 58 रन जोड़कर टीम को संभाला था। नंबर तीन पर आईं स्टेरे कालिस ने भी 26 रनों का योगदान दिया, लेकिन इसके बाद पूरी टीम का मिडिल और लोअर ऑर्डर ताश के पत्तों की तरह बिखर गया। नीदरलैंड्स की छह बल्लेबाज तो दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू सकीं। दक्षिण अफ्रीका की ओर से घातक गेंदबाजी करते हुए अयाबोंगा खाका ने 19 रन देकर 3 विकेट झटके, जबकि अनुभवी स्पिनर क्लोई ट्रायोन ने बेहद किफायती गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में सिर्फ 16 रन देकर 2 बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया।

IND vs IRE: वैभव के डेब्यू पर सबकी नजर, श्रेयस अय्यर और गंभीर का फैसला करेगा इंतजार खत्म!

0

टी20 विश्व कप का खिताब अपने नाम करने के बाद भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम शुक्रवार से आयरलैंड के खिलाफ शुरू होने जा रही दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के साथ अपने नए मिशन की शुरुआत करेगी। इस मुकाबले से पहले क्रिकेट गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह तैर रहा है कि क्या 15 वर्षीय युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी इस मैच से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करेंगे या उन्हें अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। मैच से पूर्व भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने स्पष्ट किया है कि वैभव निसंदेह एक असाधारण और विलक्षण प्रतिभा हैं, लेकिन सिर्फ उन्हें आजमाने के लिए टीम उन खिलाड़ियों को बाहर नहीं बैठा सकती जो लगातार शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

'प्रतिभा लाजवाब, पर इन-फॉर्म खिलाड़ियों का सम्मान सर्वोपरि'

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बल्लेबाजी कोच कोटक ने वैभव की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने आईपीएल में दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों का बिना किसी डर के सामना कर अपनी काबिलियत साबित की है। उन्होंने कहा, "वैभव एक बेहद टैलेंटेड क्रिकेटर हैं, लेकिन सिर्फ उन्हें प्लेइंग-11 में जगह देने के लिए किसी ऐसे बल्लेबाज को ड्रॉप करना सही नहीं होगा जो लगातार रन बना रहा है। किसी युवा को अवसर देने और अच्छा प्रदर्शन कर रहे खिलाड़ी के साथ नाइंसाफी करने के बीच बहुत बारीक अंतर होता है। अंतिम एकादश का चयन कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर की रणनीतियों के आधार पर होगा। अगर वैभव को इस मैच में मौका नहीं भी मिलता है, तो उनका भविष्य बेहद उज्ज्वल है और आगे उन्हें कई अवसर मिलेंगे।"

बीसीसीआई की मजबूत व्यवस्था और कप्तानी की नई पारी

कोटक ने माना कि मौजूदा समय में भारतीय क्रिकेट में टैलेंट की कोई कमी नहीं है, जिसके कारण टीम का चयन करना चयनकर्ताओं और प्रबंधन के लिए एक सुखद चुनौती बन गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अंडर-19 और इंडिया-ए के सेटअप से आने के कारण नए खिलाड़ियों को सीनियर टीम की संस्कृति को समझने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती है। मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी वैभव को बिना किसी मानसिक दबाव के अपना स्वाभाविक खेल खेलने की सलाह दी है। इस सीरीज से श्रेयस अय्यर टी20 टीम के कप्तान के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं, जिनके पास घरेलू और आईपीएल क्रिकेट में कप्तानी का लंबा व सफल अनुभव है।

क्या टूटेगी विश्व कप की स्टार ओपनिंग जोड़ी?

वैभव सूर्यवंशी को बतौर ओपनर टीम में शामिल करने के लिए प्रबंधन को अपनी सबसे सफल सलामी जोड़ी में बदलाव करना होगा, जो कि एक बेहद कठिन फैसला है। संजू सैमसन हाल ही में समाप्त हुए टी20 विश्व कप में 'प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट' रहे थे, जबकि अभिषेक शर्मा और ईशान किशन भी इस समय प्रचंड फॉर्म में चल रहे हैं। ऐसे में वैभव को टीम में फिट करने के लिए किसी बड़े खिलाड़ी को बाहर बैठना होगा। अगर वैभव को मौका मिलता है, तो वह भारत के लिए टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले सबसे युवा पुरुष खिलाड़ी बनकर इतिहास रच देंगे।

दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग-11 (Probable XI)

  • भारत: संजू सैमसन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा / वैभव सूर्यवंशी, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, वॉशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, रवि बिश्नोई / प्रसिद्ध कृष्णा।

  • आयरलैंड: टिम टेक्टर, रॉस अडेयर, हैरी टेक्टर, लॉर्कन टकर (कप्तान और विकेटकीपर), बेन कैलिट्ज, गैरेथ डेलानी, जॉर्ज डॉकरेल, मैथ्यू हम्फ्रीज, मैट होलार्ड, रूबेन विलियम्स, जय मूंद्रा।

मैच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां (Schedule & Timings)

  • पहला टी20 मुकाबला कब होगा?: भारत और आयरलैंड के बीच सीरीज का पहला टी20 मैच शुक्रवार, 27 जून को खेला जाएगा।

  • मुकाबला किस मैदान पर खेला जाएगा?: यह मैच बेलफास्ट के सिविल सर्विस क्रिकेट क्लब मैदान पर आयोजित होगा।

  • मैच का समय क्या रहेगा?: यह अंतरराष्ट्रीय मुकाबला भारतीय समयानुसार शाम 6:00 बजे से शुरू होगा।

  • प्रसारण की जानकारी: खेल प्रेमी इस मुकाबले का सीधा प्रसारण खेल चैनलों और डिजिटल ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर लाइव देख सकेंगे।

CM योगी बोले- रामभक्तों पर बेबुनियाद आरोप न लगाएं, सबूत SIT को सौंपें

0

देवरिया / लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। देवरिया में 456 करोड़ रुपये से अधिक लागत की विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण एवं शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने साफ किया कि जन आस्था के साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मामले में विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट आते ही त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गई है और बहुत जल्द 'दूध का दूध और पानी का पानी' हो जाएगा।

विपक्ष पर साधा निशाना, याद दिलाए पुराने दिन

मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो लोग आज आस्था की दुहाई दे रहे हैं, उनका इतिहास सब जानते हैं। उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा:

  • राम के अस्तित्व पर सवाल: एक पक्ष ऐसा था जो लगातार न्यायालयों में वकीलों की फौज खड़ी करके राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का विरोध करता था और कहता था कि राम हैं ही नहीं।

  • भक्तों पर लाठी-गोली: दूसरा पक्ष वह है जिसने जय श्री राम बोलने वाले निर्दोष राम भक्तों पर लाठियां और गोलियां चलवाई थीं।

  • धार्मिक आयोजनों पर रोक: उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष के शासनकाल में रामनवमी पर दंगे होते थे, श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर प्रतिबंध लगाए जाते थे, कांवड़ यात्रा निकालने की अनुमति नहीं थी और दुर्गा पूजा के दौरान अशांति फैलाई जाती थी।

"कांग्रेस ने देश को लूटा ही नहीं, नोंचा था"

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बोलते हुए सीएम योगी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में देश को सिर्फ लूटा ही नहीं, बल्कि नोंचा था और बेईमानी व भ्रष्टाचार के नए कीर्तिमान स्थापित किए थे। उन्होंने कहा कि ऐसे दागदार इतिहास वाले लोग आज अयोध्या और राम मंदिर पर आक्षेप लगा रहे हैं, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

राम भक्तों की अग्नि परीक्षा न लेने की चेतावनी

मुख्यमंत्री ने विरोधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार की मंशा पहले दिन से साफ है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने अपील की:

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मुख्य बयान: "मैं विपक्ष से अपील करूंगा कि राम भक्तों की अग्नि परीक्षा मत लो और उनकी आस्था के साथ खिलवाड़ करना बंद करो। अगर आपके पास कोई तथ्य या प्रमाण नहीं हैं, तो अनर्गल आरोप-प्रत्यारोप बंद कीजिए। और यदि कोई वास्तविक प्रमाण है, तो उसे राजनीति करने के बजाय सीधे एसआईटी (SIT) के सामने पेश करें।"

पासपोर्ट के नए शुल्क लागू: 36 पेज वाले पासपोर्ट के लिए अब देने होंगे ₹2,500

0

नई दिल्ली: जो लोग वेकेशन मनाने, हायर एजुकेशन (उच्च शिक्षा) या नौकरी के सिलसिले में विदेश जाने की तैयारी कर रहे हैं, उन्हें अब अपनी जेब थोड़ी और ढीली करनी होगी। केंद्र सरकार ने नया पासपोर्ट जारी करने और पुराने पासपोर्ट के नवीनीकरण (रिन्यूअल) की सरकारी फीस में बड़ा इजाफा कर दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा अधिसूचित 'पासपोर्ट (संशोधन) नियम, 2026' के अनुसार, ये बढ़ी हुई दरें 1 जुलाई, 2026 से पूरे भारत में प्रभावी हो जाएंगी।

वयस्कों (18+ वर्ष) के लिए 36 और 60 पेज के नए दाम

18 साल या उससे अधिक उम्र के आवेदकों के लिए रेगुलर और जंबो दोनों ही पासपोर्ट की फीस बदल गई है:

  • 36-पेज की पासपोर्ट बुकलेट: सामान्य (नॉर्मल) प्रक्रिया के तहत अब इसके लिए ₹1,500 के बदले ₹2,500 देने होंगे। वहीं, आपातकालीन स्थिति में 'तत्काल' सेवा का उपयोग करने पर यह खर्च ₹5,000 हो जाएगा।

  • 60-पेज की जंबो बुकलेट: बार-बार यात्रा करने वालों के लिए बनने वाले इस जंबो पासपोर्ट की सामान्य फीस ₹2,000 से बढ़ाकर ₹3,500 कर दी गई है। तत्काल कोटे में इसके लिए ₹6,000 चुकाने होंगे।

नाबालिगों (18 साल से कम) के आवेदन पर भी बढ़ी दरें

बच्चों के पासपोर्ट शुल्क में भी बढ़ोतरी की गई है। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों का 36 पन्नों का पासपोर्ट बनवाने के लिए अब ₹1,000 की जगह ₹1,750 देने होंगे, जबकि तत्काल श्रेणी में यह रकम ₹4,250 निर्धारित की गई है। मालूम हो कि नाबालिगों का पासपोर्ट केवल 5 साल या उनके 18 वर्ष के होने तक (जो भी पहले आए) के लिए ही मान्य होता है।

पासपोर्ट गुम या खराब होने पर लगेगा भारी जुर्माना

यदि आपका चालू पासपोर्ट कहीं खो जाता है या फट/डैमेज हो जाता है, तो दूसरा (डुप्लीकेट) पासपोर्ट हासिल करना अब काफी खर्चीला होगा:

  • 36-पेज का रिप्लेसमेंट: सामान्य तौर पर ₹5,000 और तत्काल मोड में ₹7,500 की फीस लगेगी।

  • 60-पेज का रिप्लेसमेंट: नॉर्मल मोड में ₹6,000 और तत्काल में ₹8,500 का भुगतान करना होगा।

  • बच्चों का रिप्लेसमेंट (36-पेज): इसके लिए सामान्य फीस ₹4,250 और तत्काल फीस ₹6,750 तय की गई है।

पीसीसी (PCC) और अन्य जरूरी प्रमाणपत्रों का नया शुल्क

पासपोर्ट के अलावा अन्य महत्वपूर्ण कागजी कार्रवाइयों के रेट भी रिवाइज किए गए हैं। अब पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (PCC), सरेंडर सर्टिफिकेट और ग्लोबल एंट्री प्रोग्राम वेरिफिकेशन (GEP) जैसी विविध सेवाओं के लिए ₹750 का फिक्स चार्ज देना होगा। इसके अतिरिक्त, 'सर्टिफिकेट ऑफ आइडेंटिटी' के लिए ₹1,000 की राशि देय होगी।

बुजुर्गों और छोटे बच्चों को मिलती रहेगी 10% की राहत

इस बढ़ी हुई महंगाई के बीच सरकार ने कुछ चुनिंदा वर्गों को राहत दी है। 8 वर्ष तक की आयु के छोटे बच्चों और 60 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों (सीनियर सिटीजंस) को नए आवेदन पर मिलने वाली 10 फीसदी की विशेष छूट आगे भी जारी रहेगी।

नोट: वयस्कों के पासपोर्ट की वैधता (वैलिटिडी) में कोई बदलाव नहीं किया गया है, यह पहले की तरह ही पूरे 10 वर्षों के लिए वैध रहेगा। हालांकि 1 जुलाई 2026 के बाद ऑनलाइन स्लॉट बुक करने वाले सभी आवेदकों को इसी नए स्ट्रक्चर के अनुसार पेमेंट करना होगा।

IND vs IRE: वैभव सूर्यवंशी ने जीता विरोधी कप्तान का दिल, आयरलैंड कप्तान के बयान ने बटोरी सुर्खियां

0

भारत और आयरलैंड के बीच खेली जाने वाली दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला का पहला रोमांचक मुकाबला शुक्रवार को खेला जाएगा। इस मैच को लेकर पूरी दुनिया के क्रिकेट प्रेमियों की नजरें भारत के 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी पर टिकी हैं, जो इस मुकाबले से अपने अंतरराष्ट्रीय करियर का आगाज कर सकते हैं। मैदान पर उतरते ही वैभव महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का बरसों पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर देंगे और भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम की तरफ से डेब्यू करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी बन जाएंगे। वैभव को लेकर यह दीवानगी सिर्फ भारतीय प्रशंसकों तक सीमित नहीं है, बल्कि मेजबान आयरलैंड की टीम और वहां के स्थानीय फैंस भी इस युवा खब्बू बल्लेबाज का जलवा देखने के लिए बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

आधुनिक और पेशेवर क्रिकेट में ऐसा होना अविश्वसनीय: लोर्कन टकर

मैच की पूर्व संध्या पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में आयरलैंड के कप्तान लोर्कन टकर ने वैभव सूर्यवंशी को लेकर अपनी उत्सुकता और हैरानी दोनों जाहिर की। उन्होंने कहा, "भारतीय सीनियर टीम में एक 15 साल के लड़के का शामिल होना वाकई अविश्वसनीय और हैरतअंगेज है। वैभव को लेकर इस समय हर तरफ जबरदस्त चर्चा है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि आज के इस दौर में, जहां क्रिकेट का स्तर इतना ऊंचा है और प्रतिस्पर्धा इतनी कठिन है, वहां इतनी कम उम्र में कोई खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंच सकता है। इसके लिए वैभव की जितनी तारीफ की जाए कम है, वह सच में एक बेहद खास खिलाड़ी है। यह उसके जीवन का सबसे बड़ा पल होगा, हालांकि एक विरोधी टीम के नाते हमारी कोशिश यही रहेगी कि हम इस मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर मैच पर अपना असर छोड़ें।"

आयरलैंड में भी वैभव को देखने के लिए मची है होड़

आयरिश कप्तान ने आगे बताया कि उनके देश में रहने वाले प्रवासी भारतीयों के बीच भी इस मैच को लेकर जबरदस्त क्रेज है। टकर के अनुसार, "आयरलैंड में भारतीय समुदाय काफी बड़ा है और मुझे पूरा भरोसा है कि वे सभी इस ऐतिहासिक मैच को देखने के लिए स्टेडियम पहुंचेंगे। हर जगह सिर्फ वैभव के डेब्यू को लेकर ही हाइप बनी हुई है। वह एक अद्भुत प्रतिभा का धनी है और हमने उनके खिलाफ रणनीति बनाने के लिए काफी रिसर्च की है। आईपीएल 2026 में उन्होंने जिस तरह गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाईं और सीजन में 75 छक्के जड़े, वह उनकी असाधारण क्षमता को दर्शाता है। क्रिकेट में इस तरह की नई ऊर्जा का आना न सिर्फ दोनों टीमों के लिए, बल्कि स्टेडियम और टीवी पर मैच देख रहे बच्चों के लिए भी प्रेरणादायक है।"

इतनी कम उम्र में ही दुनिया भर के बच्चों के रोल मॉडल बने वैभव

लोर्कन टकर ने वैभव की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि जिस तरह हम सीनियर खिलाड़ी अपने देश के बच्चों के लिए रोल मॉडल बनने की कोशिश करते हैं, ठीक उसी तरह वैभव ने इतनी छोटी उम्र में यह मुकाम हासिल कर लिया है। वे अब दुनिया भर के युवा क्रिकेटरों और आने वाली पीढ़ी के लिए एक आदर्श (रोल मॉडल) बन चुके हैं।

गौरतलब है कि वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में विश्वस्तरीय गेंदबाजों के खिलाफ निडर बल्लेबाजी करते हुए पूरे सीजन में कुल 776 रन बटोरे थे और 'ऑरेंज कैप' पर अपना कब्जा जमाया था। अब भारतीय और अंतरराष्ट्रीय फैंस यही उम्मीद कर रहे हैं कि वैभव अपने इस सुनहरे फॉर्म को अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी जारी रखेंगे।

IND vs IRE: रिकॉर्ड तोड़ने का सपना अभी अधूरा! वैभव को करना पड़ सकता है और इंतजार

0

भारत और आयरलैंड के बीच शुरू होने जा रही आगामी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज से पहले क्रिकेट जगत में इस वक्त सबसे बड़ी चर्चा 15 साल के युवा खब्बू बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय डेब्यू को लेकर हो रही है। आईपीएल 2026 में अपने बल्ले से तबाही मचाते हुए 776 रन ठोकने वाले और 'ऑरेंज कैप' पर कब्जा जमाने वाले वैभव को लेकर फैंस के बीच गजब का उत्साह है। अगर वे इस सीरीज में मैदान पर उतरते हैं, तो भारत के लिए सबसे कम उम्र में टी20 खेलने वाले क्रिकेटर बन जाएंगे। हालांकि, उनके इस ऐतिहासिक डेब्यू की राह में टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर का कड़ा और निष्पक्ष नजरिया एक बड़ा फैक्टर साबित होने वाला है।

रिकॉर्ड्स के चक्कर में किसी खिलाड़ी के साथ अन्याय नहीं: सितांशु कोटक

आयरलैंड के खिलाफ होने वाले पहले टी20 मैच से पूर्व भारतीय टीम के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने प्लेइंग इलेवन (अंतिम एकादश) को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उन्होंने संकेत दिए कि अंतिम फैसला कप्तान और मुख्य कोच का होगा, लेकिन किसी युवा खिलाड़ी को सिर्फ रिकॉर्ड बनाने के लिए टीम में शामिल नहीं किया जाएगा, जिससे किसी अन्य इन-फॉर्म खिलाड़ी का हक मरे।

कोटक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "26 जून की शाम को कप्तान और मुख्य कोच बैठक कर अंतिम ग्यारह का चयन करेंगे। वैभव अगर खेलते हैं तो यह बेहद सुखद होगा, और अगर नहीं भी खेलते हैं तो भी वे भारतीय टीम के सेटअप का हिस्सा हैं, जो उनके लिए बड़ी बात है। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके हुनर को सही समय पर सही मौका जरूर मिलेगा। लेकिन सिर्फ उन्हें आजमाने के लिए किसी ऐसे बल्लेबाज को ड्रॉप करना सही नहीं होगा जो लंबे समय से लगातार रन बना रहा है। किसी को मौका देने और किसी के साथ नाइंसाफी करने के बीच बेहद बारीक रेखा होती है।"

गौतम गंभीर का फॉर्मूला: व्यक्तिगत स्टारडम से ऊपर टीम का संतुलन

जब से गौतम गंभीर ने भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच का पद संभाला है, तब से टीम में व्यक्तिगत उपलब्धियों के बजाय 'टीम बैलेंस' और प्रदर्शन को प्राथमिकता दी जा रही है। यही वजह है कि यदि संजू सैमसन या अभिषेक शर्मा जैसे बल्लेबाज लगातार रन बना रहे हैं, तो केवल वैभव सूर्यवंशी को सबसे कम उम्र में डेब्यू कराने का रिकॉर्ड बनाने के लिए उन्हें टीम से बाहर नहीं बिठाया जाएगा। टीम प्रबंधन का मानना है कि ड्रेसिंग रूम में यह स्पष्ट संदेश जाना चाहिए कि जो परफॉर्म करेगा, वही खेलेगा। सिर्फ सुर्खियों या रिकॉर्ड्स के आधार पर चयन करने से टीम का माहौल प्रभावित हो सकता है।

15 साल की उम्र में जल्दबाजी क्यों नहीं?

वैभव सूर्यवंशी को निसंदेह भारतीय क्रिकेट का अगला सुपरस्टार माना जा रहा है। इतनी छोटी उम्र में आईपीएल के मंच पर दुनिया के सबसे तेज गेंदबाजों के परखच्चे उड़ाकर उन्होंने अपनी काबिलियत साबित की है। इसके बावजूद टीम मैनेजमेंट का मानना है कि उनके पास आगे 15-20 साल का लंबा करियर पड़ा है। फिलहाल सीनियर टीम के साथ ट्रैवल करना, ड्रेसिंग रूम का माहौल समझना और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के दबाव को करीब से महसूस करना भी उनके विकास (ग्रूमिंग) के लिए बेहद जरूरी है।

सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड तोड़ने के लिए क्या करना होगा इंतजार?

क्रिकेट प्रेमियों के बीच सबसे बड़ा कौतूहल यही है कि क्या वैभव इतनी कम उम्र में नीली जर्सी पहनकर महान सचिन तेंदुलकर के सबसे कम उम्र में भारत के लिए डेब्यू करने के ऐतिहासिक रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे? लेकिन मौजूदा परिस्थितियों को देखकर साफ है कि टीम इंडिया का थिंक-टैंक किसी भी तरह की जल्दबाजी में नहीं है। अगर पहले से स्थापित और शानदार फॉर्म में चल रहे बल्लेबाजों को तरजीह मिलती है, तो वैभव को अपनी बारी के लिए थोड़ा धैर्य रखना होगा। हालांकि, उनके आईपीएल के प्रचंड फॉर्म को देखते हुए उनका भारत के लिए खेलना तय है, बस टीम चाहती है कि उनका पदार्पण किसी हेडलाइन के लिए नहीं बल्कि पूरी तरह उनकी योग्यता के आधार पर हो।

रिम्स को अलविदा कह अपने गृह राज्य रवाना हुए डॉ. राजकुमार

0

रांची: झारखंड की राजधानी रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल देखने को मिला है। संस्थान के निदेशक डॉ. राजकुमार ने अपने पद से अचानक इस्तीफा दे दिया है। पद छोड़ने के ठीक अगले ही दिन, यानी शुक्रवार को डॉ. राजकुमार रांची से अपने गृह प्रदेश के लिए रवाना भी हो गए हैं। उनके इस अचानक उठाए गए कदम के बाद से रिम्स और स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज है।

प्रभारी निदेशक को दिया प्रभार, बंगले की चाभी सौंपकर कराई वीडियोग्राफी

शुक्रवार सुबह डॉ. राजकुमार सीधे रिम्स स्थित निदेशक कार्यालय पहुँचे। वहाँ उन्होंने रिम्स के नवनियुक्त प्रभारी निदेशक डॉ. डी. के. सिन्हा को संस्थान से जुड़ी सभी प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियां विधिवत रूप से सौंप दीं। इसके बाद उन्होंने रिम्स परिसर में स्थित सरकारी निदेशक बंगले को भी पूरी तरह खाली कर दिया। मकान खाली करने के बाद उन्होंने बिल्डिंग की चाभियां संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के हवाले कीं। किसी भी तरह के भावी विवाद से बचने के लिए उन्होंने इस पूरी चाभी सौंपने की प्रक्रिया की वीडियोग्राफी भी करवाई और फिर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लिए प्रस्थान कर गए।

विवादों के बीच बेटे को भी ले गए साथ

डॉ. राजकुमार अपने साथ अपने बेटे को भी रांची से ले गए हैं। गौरतलब है कि रिम्स में उनके बेटे की ट्यूटर के पद पर हुई नियुक्ति पिछले कुछ समय से लगातार विवादों के घेरे में बनी हुई थी, जिसे लेकर कई सवाल खड़े हो रहे थे। गलियारों में यह चर्चा बेहद आम है कि डॉ. राजकुमार अपने गृह प्रदेश पहुँचने के बाद जल्द ही अपने बेटे का भी रिम्स के ट्यूटर पद से इस्तीफा दिलवा सकते हैं।

स्वास्थ्य मंत्री को सौंपा था इस्तीफा, डॉ. सिन्हा बने नए कार्यवाहक निदेशक

इससे पहले गुरुवार को डॉ. राजकुमार ने सुबह-सुबह राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी के सरकारी आवास पहुँचकर उन्हें अपना त्यागपत्र सौंपा था। स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने तत्परता दिखाते हुए एक तरफ जहाँ डॉ. राजकुमार का इस्तीफा तुरंत स्वीकार कर लिया, वहीं दूसरी तरफ बिना वक्त गंवाए एक नई अधिसूचना भी जारी कर दी। विभाग ने रिम्स के सर्जरी डिपार्टमेंट के प्राध्यापक (प्रोफेसर) डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को कार्यकारी व्यवस्था के तहत तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक संस्थान का नया कार्यवाहक निदेशक नियुक्त कर दिया है।

एयर इंडिया बम विस्फोट मामले में कनाडा ने पहली बार मानी बड़ी बात

0

टोरंटो: 23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (सम्राट कनिष्क) में हुए आत्मघाती और घातक बम विस्फोट के 41 वर्ष बाद, कनाडाई सुरक्षा खुफिया सेवा (CSIS) ने आखिरकार आधिकारिक तौर पर कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों को इस भीषण आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार ठहराया है। कनाडा की खुफिया एजेंसी की यह खुली स्वीकारोक्ति भारत के उस लंबे समय से चले आ रहे रुख की पुष्टि करती है, जिसे कनाडाई सरकारें दशकों तक राजनीतिक कारणों से नजरअंदाज करती आई थीं।

सीएसआईएस ने सोशल मीडिया पर इस हमले की बरसी पर जारी एक पोस्ट में स्पष्ट लिखा कि 23 जून 1985 को कनाडा स्थित खालिस्तानी चरमपंथियों द्वारा लगाए गए बम ने विमान को नष्ट कर दिया था, जिसमें सवार सभी 329 लोग मारे गए थे। खुफिया एजेंसी ने इसे कनाडाई इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला और अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक निर्णायक क्षण बताया है।

हवा में ही टुकड़े-टुकड़े हो गया था 'सम्राट कनिष्क'

टोरंटो से वैंकूवर और लंदन होते हुए मुंबई जा रही एयर इंडिया की फ्लाइट 182 (बोइंग 747-200बी विमान) आयरलैंड के दक्षिण-पश्चिमी तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर उड़ रही थी, तभी उसमें जोरदार धमाका हुआ। प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन 'बब्बर खालसा' के आतंकवादियों ने चेक-इन किए गए सामान (लगैज) के डिब्बे में यह बम छिपाकर रखा था। विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि विमान हवा में ही बिखर गया।

इस हमले में 268 कनाडाई नागरिक, 27 ब्रिटिश और बाकी भारतीय मूल के यात्रियों व चालक दल के सदस्यों सहित कुल 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी। साल 2001 में अमेरिका में हुए 9/11 के हमलों से पहले तक, इसे विमानन इतिहास का सबसे बड़ा और भयावह आतंकी हमला माना जाता था।

दोषियों का नाम लेने में क्यों लगे 41 साल?

अब वैश्विक स्तर पर यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि कनाडा को इस हमले के असली मास्टरमाइंड और विचारधारा का नाम सार्वजनिक करने में चार दशक (41 वर्ष) का समय क्यों लग गया। इसके पीछे कई बड़ी वजहें और कनाडाई सिस्टम की नाकामियां सामने आई हैं:

  • एजेंसियों की आपसी लड़ाई और सबूत नष्ट होना: साल 2010 में पूर्व सुप्रीम कोर्ट जस्टिस जॉन मेजर की अध्यक्षता वाली आधिकारिक सार्वजनिक जांच रिपोर्ट में इसे 'गलतियों की एक श्रृंखला' कहा गया था। कनाडाई खुफिया एजेंसी (CSIS) और रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) के बीच वर्चस्व की लड़ाई के चलते तालमेल की भारी कमी थी। सीएसआईएस ने बब्बर खालसा के नेता और मुख्य साजिशकर्ता तलविंदर सिंह परमार पर निगरानी तो रखी थी, लेकिन एजेंसी ने सैकड़ों घंटों की महत्वपूर्ण जासूसी वॉयस रिकॉर्डिंग्स को खुद ही नष्ट कर दिया, जो अपराधियों को सजा दिलाने के लिए सबसे अचूक सबूत साबित हो सकते थे।

  • संस्थागत उदासीनता: हालांकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडाई नागरिक थे, लेकिन कनाडाई राजनेताओं और वहां के मीडिया ने इसे लंबे समय तक "दूर देश (भारत) की एक आंतरिक समस्या" मानकर ठंडे बस्ते में डाले रखा। साल 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि पीड़ितों के परिवारों के साथ सरकारी स्तर पर घोर उदासीनता बरती गई थी।

  • गवाहों की हत्या और कानूनी अड़चनें: इस मामले से जुड़े अहम गवाहों को लगातार डराया-धमकाया गया और कई प्रमुख गवाहों की रहस्यमयी तरीके से हत्या कर दी गई। इसके परिणामस्वरूप, साल 2005 में चले एक हाई-प्रोफाइल मुकदमे में सबूतों के अभाव में मुख्य आरोपी बरी हो गए। बाद में जनता के भारी दबाव के बाद ही इस पर पूर्ण सार्वजनिक जांच बैठाई गई थी।

खालिस्तानी चरमपंथ को पहले ही बताया था गंभीर खतरा

हवाई हमले के लिए सीधे तौर पर नाम लेने से पहले, मार्च 2025 में जारी अपनी वार्षिक सार्वजनिक रिपोर्ट में भी सीएसआईएस ने पहली बार कड़ा रुख अपनाया था। उस रिपोर्ट में एजेंसी ने माना था कि कनाडा की धरती पर सक्रिय खालिस्तानी चरमपंथी समूह कनाडाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन चुके हैं। खुफिया एजेंसी ने आगाह किया था कि ये संगठन भोले-भाले सिख समुदाय का फायदा उठाकर हिंसक एजेंडे के नाम पर भारी फंड जुटाते हैं, जिसका इस्तेमाल बाद में हिंसक गतिविधियों और आतंकवाद को बढ़ावा देने के लिए किया जाता है।

छोटी ताजिया जुलूस में युवाओं का दमखम, हैरतअंगेज लाठी-डंडा प्रदर्शन बना आकर्षण

0

रामगढ़: जिले में मुहर्रम के पवित्र अवसर पर शुक्रवार को विभिन्न ग्रामीण अंचलों में भारी उत्साह और धार्मिक आस्था का माहौल देखा गया। सोलिया, उच्चारिंगा, पलानी, जयनगर और पतरातू बस्ती समेत कई गांवों के मुस्लिम समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार छोटी ताजिया के साथ भव्य जुलूस निकाला। इस मातमी जुलूस में बड़ी तादाद में ग्रामीण शामिल हुए, जो हाथों में मजहबी परचम (धार्मिक ध्वज) थामे शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ रहे थे। रास्ते भर लोगों ने आपसी भाईचारे, अमन-चैन और सांप्रदायिक सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश की।

इकनॉमिक्स स्कूल मैदान में युवाओं की युद्ध कला का प्रदर्शन

निर्धारित रास्तों और चौराहों से गुजरते हुए यह जुलूस बिरसा मार्केट स्थित इकनॉमिक्स स्कूल के खेल मैदान में पहुँचा। यहाँ अखाड़ा दल से जुड़े युवाओं और खिलाड़ियों ने अपनी पारंपरिक युद्ध कला का हैरतअंगेज प्रदर्शन किया। अखाड़े में लाठी-डंडे और पारंपरिक हथियारों के साथ किए गए हैरतअंगेज करतबों को देखकर वहां मौजूद दर्शकों ने दांतों तले उंगलियां दबा लीं और खिलाड़ियों की खूब हौसलाअफजाई की। इस मनमोहक प्रदर्शन को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी हजारों की भीड़ जुटी थी, जिससे पूरा मैदान काफी समय तक गुलजार बना रहा।

कड़े सुरक्षा घेरे में व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ आयोजन

मुहर्रम के इस आयोजन को लेकर जिला व पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। संवेदनशील मोड़ों और जुलूस के रास्तों पर भारी संख्या में पुलिस बल के जवानों को तैनात किया गया था। प्रशासनिक सतर्कता, पूजा कमेटियों के समन्वय और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों के सक्रिय सहयोग के चलते पूरा कार्यक्रम बेहद अनुशासित, व्यवस्थित और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ।

सामाजिक एकता और आपसी तालमेल की दिखी मिसाल

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि रामगढ़ क्षेत्र में मुहर्रम का त्योहार हमेशा से ही आपसी एकता का प्रतीक रहा है। हर साल की तरह इस बार भी सभी समुदायों के लोगों ने बढ़-चढ़कर जुलूस का स्वागत किया और व्यवस्था बनाने में अपना अमूल्य सहयोग दिया। पूरे आयोजन के दौरान न सिर्फ धार्मिक निष्ठा देखने को मिली, बल्कि विभिन्न वर्गों के बीच की सामाजिक एकजुटता भी साफ तौर पर उजागर हुई।

शहादत-ए-इमाम हुसैन की याद में निकले ताजिए, शहर में दिखी आस्था की मिसाल

0

जबलपुर: संस्कारधानी जबलपुर में मुहर्रम की नौवीं तारीख के पवित्र अवसर पर मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों में गहरी अकीदत, श्रद्धा और रूहानी माहौल देखने को मिला। कर्बला के महान शहीदों और इमाम हुसैन की लासाpayload शहादत को याद करते हुए समाज के लोगों ने मस्जिदों और इमामबाड़ों में विशेष नमाज व इबादत की। इस दौरान देश में अमन-चैन, भाईचारे और तरक्की के लिए सामूहिक रूप से विशेष दुआएं मांगी गईं।

इंसानियत की मिसाल: राहगीरों के लिए सबीलें और लंगर का आयोजन

मुहर्रम के इस मौके पर शहर में इंसानियत और खिदमत (सेवा) की कई खूबसूरत तस्वीरें भी सामने आईं। भीषण गर्मी और उमस को देखते हुए जगह-जगह स्वयंसेवकों द्वारा सबीलें (पियाऊ) स्थापित की गई थीं। इन सबीलों के माध्यम से वहां से गुजरने वाले राहगीरों और जायरीनों को ठंडा पानी, रूहअफजा और विभिन्न प्रकार के शरबत पिलाकर राहत पहुंचाई गई। इसके साथ ही कई प्रमुख चौराहों और इलाकों में 'लंगर-ए-हुसैनी' (भंडारे) के बड़े आयोजन किए गए, जहां हर वर्ग और सभी धर्मों के आम नागरिकों ने आदरपूर्वक शिरकत की, जो शहर की सामाजिक समरसता को और मजबूत करता है।

आकर्षण का केंद्र बने ताजिए, रोशनी से नहाई मशीन वाले बाबा की दरगाह

इस वर्ष भी जबलपुर शहर के अलग-अलग मोहल्लों में बेहद नक्काशीदार, ऊंचे और कलात्मक ताजिए तैयार किए गए हैं। इन खूबसूरत ताजियों की एक झलक पाने और जियारत करने के लिए दूर-दराज के इलाकों से भी अकीदतमंदों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है। इस विशेष दिन के मद्देनजर ऐतिहासिक ओमती मस्जिद और आस्था के बड़े केंद्र 'मशीन वाले बाबा सरकार दरगाह' को बेहद आकर्षक और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया है। रात के समय रोशनी से नहाए ये पवित्र धार्मिक स्थल पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार कर रहे हैं और लोगों के कौतूहल व श्रद्धा का मुख्य केंद्र बने हुए हैं। मुहर्रम पर आस्था, सेवा और समर्पण का यह मिला-जुला रूप जबलपुर की ऐतिहासिक गंगा-जमुनी तहजीब को पूरी दुनिया के सामने पेश करता है।

Join Whatsapp Group
Join Our Whatsapp Group