- मेष राशि :- इष्ट-मित्र सुख वर्धक होंगे, मनोबल बनाये रखें तथा चिंता विचारों से बचें।
- वृष राशि :- भाग्य का सितारा बुलंद है, इष्ट-मित्र सहायक होगे, समय का ध्यान दें ।
- मिथुन राशि :- इष्ट-मित्रों से परेशानी होगी तथा अशांति से दैनिक कार्य में बाधा होगी।
- कर्क राशि :- मान-प्रतिष्ठा, प्रभुत्व वृद्धि के योग है, दैनिक कार्य उत्तम, कृषि के संसाधन बनेंगे।
- सिंह राशि :- कार्य गति अनुकूल हो, सामाजिक कार्यों में प्रभुत्व वृद्धि तथा प्रतिष्ठा बढ़ेगी।
- कन्या राशि :- कुटुम्ब की परेशानी, चिन्ता का कारण बनेगी, व्यवसाय गति उत्तम होगी।
- तुला राशि :- धन हानि, शरीर कष्ट तथा मानसिक वेदना से कष्ट, मन उद्धविघ्न रहेगा।
- वृश्चिक राशि :- इष्ट-मित्र सुखवर्धक हों, अधिकारियों का समर्थन फलप्रद उत्तम रहेगा।
- धनु राशि :- कार्य-कुशलता से संतोष, दैनिक समृद्धि के साधन जुटायें, कार्य बनेंगे।
- मकर राशि :- दैनिक कार्य गति में सुधार होगा, योजना फलीभूत अवश्य होगी।
- कुंभ राशि :- विशेष कार्य स्थगित रखें, मानसिक विभ्रम, उद्विघ्नता के योग बनेंगे।
- मीन राशि :- विरोधी कार्य-विफलता का प्रयास करने की चेष्टा करेंगे, सर्तकता से कार्य निपटा लें।
राशिफल 15 अप्रैल 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
Pradeep Agrawal बाबा से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे, तभी हुआ विवाद
भिंड|मध्य प्रदेश के भिंड जिले के बेरछा गांव में आशीर्वाद लेने पहुंचे बीजेपी विधायक की जमकर पिटाई हो गई. लेकिन विधायक को किसी और ने नहीं, बल्कि उसी बाबा ने पीट दिया, जिसका आशीर्वाद लेने वे गए थे. बीजेपी विधायक प्रदीप अग्रवाल बाबा सीताराम महाराज का आशीर्वाद लेने के लिए गए थे, तभी बाबा को अचानक गुस्सा आ गया और उन्होंने विधायक को कई मुक्के मारे और धक्का भी दे दिया. घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर आया है. जिस पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया आ रही है|
विधायक की लाई फूलों की माला भी फेंकी
पूरा मामला भिंड जिले के बेरछा गांव का है. यहां भगवत कथा का आयोजन किया गया था. इस दौरान सेवढ़ा से बीजेपी विधायक प्रदीप अग्रवाल बाबा सीताराम महाराज का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे. विधायक ने बाबा को सम्मानित करते हुए माला पहनाई. पहले तो बाबा कुछ नहीं बोले, लेकिन तभी अचानक बाबा को गुस्सा आ गया और उन्होंने विधायक की पीठ पर मुक्के मारने शुरू कर दिए. इसके विधायक को हटाते हुए बाबा ने धक्का भी दे दिया. इतना ही नहीं विधायक ने जो माला बाबा को पहनाई थी, उन्होंने वह माला भी फेंक दी|
सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रिया
संत सीताराम के बीजेपी विधायक प्रदीप अग्रवाल को मुक्के मारने का वीडियो 3-4 दिन पुराना बताया जा रहा है. वहीं वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद लोग अलग-अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि राजनेता भ्रष्टाचार करते हैं, इसलिए बाबा को गुस्सा आ गया. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ये बाबा का आशीर्वाद देने का तरीका है. घबराने की बात नहीं है|
माउजर लहराते दिखाई देते हैं बाबा
दरअसल भिंड जिले में श्रीराम-जानकी और हनुमान जी का मंदिर है. यह मंदिर रसनौल गांव में है, इस मंदिर को बाबा मस्तराम मंदिर भी कहा जाता है. पहले इस मंदिर जो सेवा करते थे, उनका नाम मस्तराम था. उन्हें मस्तराम कहने की कहना भी दिलचस्प है. वो कभी भी हंसने लगते थे, कभी भी गुस्सा हो जाते थे. बाबा मस्तराम के बाद उनके सेवक सीताराम महाराज मंदिर की देखरेख करने लगे. लोग बताते हैं कि सीताराम महाराज भी अपने गुरु की तरह ही हरकत करते हैं. एकदम से हंसने लगते हैं और कभी-कभी आशीर्वाद लेने आए भक्तों को पीटने लगते हैं|
बता दें कि संत सीताराम महाराज हथियार रखने के शौकीन हैं. बाबा के पास एक माउजर है. अक्सर संत सीताराम माउजर को लहराते हुए दिखाई देते हैं|
कार्यालय में महिला सहकर्मी को घूरना अनैतिक, लेकिन अपराध नहीं
जबलपुर। बॉम्बे हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर महिला सहकर्मी को घूरने के मामले में आरोपी व्यक्ति के विरुद्ध दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने का आदेश दिया है। अदालत ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि घूरना अनैतिक आचरण की श्रेणी में आ सकता है, परंतु इसे भारतीय दंड संहिता की धारा 354-सी के अंतर्गत दृश्यरतिकता का अपराध नहीं माना जा सकता। न्यायमूर्ति अमित बोरकर की एकल पीठ ने अभिजीत बसवंत निगुडकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्णय सुनाया और उनके खिलाफ बोरीवली पुलिस स्टेशन में दर्ज कानूनी प्रक्रिया को समाप्त कर दिया।
क्या है घटनाक्रम
यह प्रकरण वर्ष 2015 से संबंधित है जब एक निजी संस्थान में कार्यरत महिला ने अपने वरिष्ठ सहकर्मी अभिजीत बसवंत निगुडकर के विरुद्ध गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार आरोपी कार्यालय की बैठकों के दौरान महिला सहकर्मी के शरीर पर अनुचित दृष्टि डालता था और उन पर आपत्तिजनक टिप्पणियां करता था। महिला ने यह भी दावा किया था कि जब उन्होंने इस व्यवहार का विरोध किया, तो आरोपी ने उनके पेशेवर कार्य में बाधाएं उत्पन्न करना शुरू कर दिया और उन्हें अन्य सहकर्मियों के समक्ष अपमानित किया। इस विवाद के बाद महिला ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
कानूनी प्रावधान व निजी कृत्य की व्याख्या
उच्च न्यायालय ने इस मामले में धारा 354-सी के कानूनी मापदंडों का सूक्ष्म विश्लेषण किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि दृश्यरतिकता का अपराध केवल तभी लागू होता है जब कोई व्यक्ति किसी महिला को ऐसी परिस्थितियों में देखता है या उसकी तस्वीर लेता है जहां उसे गोपनीयता की उचित अपेक्षा हो। कानून के दायरे में निजी कृत्य का अर्थ व्यक्ति के निजी अंगों का प्रदर्शन, शौचालय का उपयोग या एकांत में की जाने वाली यौन क्रियाएं हैं। वर्तमान मामले में कथित घटना कार्यालय की औपचारिक बैठकों के दौरान हुई थी। न्यायालय ने माना कि सार्वजनिक कार्यस्थल पर बैठक के दौरान किसी महिला को घूरना उस कानूनी परिभाषा में नहीं आता जहां गोपनीयता की अपेक्षा की जाती है।
आंतरिक समिति की रिपोर्ट
न्यायमूर्ति बोरकर ने निर्णय में उल्लेख किया कि आपराधिक कानून का प्रयोग कार्यस्थल की हर शिकायत को दृश्यरतिकता जैसे गंभीर अपराध में बदलने के लिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि संबंधित संस्थान की आंतरिक शिकायत समिति पहले ही इस मामले की जांच कर चुकी थी और उसने आरोपी को क्लीन चिट दे दी थी। पीठ ने अंत में कहा कि भले ही आरोपी का व्यवहार नैतिक रूप से गलत या अपमानजनक प्रतीत हो, लेकिन वह धारा 354-सी के विशिष्ट विधिक दायरे में नहीं आता। अतः कानूनी प्रक्रिया को जारी रखना समय की बर्बादी और कानून का दुरुपयोग माना जाएगा। इन्ही आधारों पर अदालत ने बोरीवली पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर को पूरी तरह रद्द कर दिया।
“अगर नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं”
नई दिल्ली|लोकसभा में 16 अप्रैल 2026, गुरुवार को केंद्र सरकार की ओर से तीन महत्वपूर्ण बिल ( महिला आरक्षण संशोधन विधेयक 2026, परिसीमन विधेयक 2026 और केंद्र शासित प्रदेश संशोधन विधेयक 2026) पेश किए गए हैं। इन प्रस्तावों के तहत वर्ष 2029 से लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था की जाएगी। सदन में परिसीमन बिल पर चर्चा के दौरान काफी हंगामा भी देखने को मिला। विपक्षी दलों ने सरकार पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि ये बिल चुनावी फायदे के लिए गलत तरीके से लाया जा रहा है। तो वहीं अखिलेश यादव ने भी भाजपा सरकार को जनगणना के मुद्दे पर घेरा और गंभीर आरोप लगाए।
हंगामे के बीच महिला आरक्षण बिल और परिसीमन विधेयक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने सदन में सभी राजनीतिक दलों से विधेयक का समर्थन करने की अपील की। पीएम मोदी ने सीधे तौर पर कहा कि परिसीमन में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं होगा। उन्होंंने कहा, इस सदन में हम सभी के पास इस विकास यात्रा में एक नया आयाम जोड़ने का शुभ अवसर है।
पीएम मोदी ने कहा, यह देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है और हम सभी खुद को भाग्यशाली मान सकते हैं कि इस परिवर्तन के दौर के साक्षी बन रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, हमें श्रेय नहीं चाहिए। जैसे ही यह पास हो जाएगा, मैं कल सबको धन्यवाद देते हुए श्रेय देने को तैयार हूं, सबकी फोटो छपवाने को तैयार हूं। श्रेय ले लो आप जो भी फोटो छपवाना चाहते हैं, मैं सरकारी खर्चे पर छपवाने को तैयार हूं।
परिसीमन पर स्थिति स्पष्ट, अनुपात में नहीं होगा बदलाव- पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि पिछली जो सरकार रही, जिनके काल में जो परिसीमन हुआ, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा, और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं। क्योंकि अगर नीयत साफ है तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा, हम सांसदों को यह ज़रूरी मौका हाथ से जाने नहीं देना चाहिए। हम सब मिलकर देश को एक नई दिशा देने जा रहे हैं। हम अपने शासन प्रणाली में संवेदनशीलता लाने की अच्छी कोशिश करने जा रहे हैं। इससे न सिर्फ़ देश की राजनीति बनेगी, बल्कि देश की दिशा और दशा भी तय होगी।
पीएम मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ पर दिया जोर
पीएम मोद ने कहा कि 21वीं सदी में भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। हम सभी आज दुनिया में भारत की पहचान महसूस कर रहे हैं। यह हम सभी के लिए गर्व का पल है। मेरा मानना है कि ‘विकसित भारत’ का मतलब सिर्फ़ रेलवे, सड़क, आधारभूत संरचना, या आर्थिक या तरक्की के आंकड़े नहीं हैं। हम ‘विकसित भारत’ के इतने सीमित नज़रिए वाले लोग नहीं हैं। हम एक ऐसा ‘विकसित भारत’ चाहते हैं, जहां नीति- निर्माण सही मायने में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को अपनाए। यह समय की मांग है कि देश की 50% आबादी नीति- निर्माण का हिस्सा बने।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, हमारी नीयत की खोट, देश की नारी शक्ति कभी माफ़ नहीं करेगी। मेरी आप सबसे अपील है कि इसको राजनीति के तराजू से मत तोलिए, ये राष्ट्रहित का निर्णय है। 2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना और उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगा, इसलिए ये राजनीतिक मुद्दा नहीं बना।
पीएम मोदी ने आगे कहा, समय की मांग है कि हमें और देर नहीं करनी चाहिए। इस बीच, राजनीतिक पार्टी के सदस्यों, जानकार लोगों और कार्यकर्ता के तौर पर काम करने वालों से बातचीत हुई है। कुछ लोगों ने तो अपने सुझाव भी दिए हैं। इसमें से कुछ कमियां दूर करनी होंगी। ताकि हम अपनी माताओं और बहनों की शक्ति को एक कर सकें।
क्या है परिसीमन बिल 2026?
केंद्र सरकार ने सदन में परिसीमन बिल 2026 पेश किया है। इसके तहत संविधान संशोधन के बाद लोकसभा सदस्यों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 की जाएगी। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए, 35 सीटें केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 81 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि सरकार ने तीनों बिल केवल लोकसभा में ही पेश किए हैं। राज्यसभा में पेश नहीं हुए हैं।
राज्यसभा में कब पेश होंगे तीनों बिल?
जानकारी अनुसार, जो तीनों बिल लोकसभा में पेश हुए हैं इसके लिए 17 अप्रैल को लोकसभा में चर्चा के बाद तीनों बिलों पर मतदान होगा तो वहीं अगर राज्यसभा की बात करें तो यह तीनों बिल 18 अप्रैल को पेश किए जाएंगे। इसके बाद 10 घंटे तक चर्चा के बाद उसी दिन तीनों बिल के लिए वोटिंग कराई जाएगी।
अब तेजी से होंगे निवेश के फैसले, भारत-ऑस्ट्रिया ने शुरू किया फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म
भारत और ऑस्ट्रिया ने अपने द्विपक्षीय संबंधों और रणनीतिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ऑस्ट्रिया के चांसलर क्रिश्चियन स्टॉकर की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, अंतरिक्ष और खाद्य सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कुल छह समझौतों, समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और सहमति पत्रों (एलओआई) का आदान-प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से ऑस्ट्रियाई चांसलर के सम्मान में आयोजित एक विशेष लंच के बाद इन समझौतों को अंतिम रूप दिया गया।
सरकार की ओर से क्या बताया गया?
विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने इस उच्च स्तरीय दौरे पर एक विशेष ब्रीफिंग में बताया कि हैदराबाद हाउस में दोनों देशों के नेताओं के बीच व्यापक बातचीत हुई। इस दौरान उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं को कवर किया और आपसी हित के क्षेत्रीय तथा वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विस्तार से विचारों का आदान-प्रदान किया।
भारत-ऑस्ट्रिया के बीच समझौतों का किस क्षेत्र पर क्या असर पड़ेगा?
व्यापारिक जगत के लिए इस वार्ता का सबसे बड़ा आकर्षण निवेश और उद्योग से जुड़े फैसले रहे:निवेश के लिए फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म: दोनों देशों की ओर से द्विपक्षीय निवेश को तेजी से बढ़ावा देने के लिए एक 'फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म' (त्वरित तंत्र) स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। इससे भारतीय और ऑस्ट्रियाई कंपनियों के लिए एक-दूसरे के देश में पूंजी प्रवाह और व्यापार करना ज्यादा आसान हो जाएगा।खाद्य सुरक्षा और मानक: दोनों देशों ने खाद्य सुरक्षा और मानकों पर एक अहम समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह कदम खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) और कृषि व्यापार से जुड़े क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है|
रक्षा, अंतरिक्ष और अन्य अहम समझौते
भारत और ऑस्ट्रिया ने अपनी रणनीतिक साझेदारी का दायरा बढ़ाते हुए कई अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग की रूपरेखा तैयार की है:
- रक्षा और तकनीक क्षेत्र: सैन्य मामलों, रक्षा उद्योग और प्रौद्योगिकी साझेदारी में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक लेटर ऑफ इंटेंट पर मुहर लगी है। यह समझौता इस साल जनवरी में हस्ताक्षरित 'भारत-ईयू रक्षा और सुरक्षा साझेदारी' के आधार पर आगे बढ़ेगा।
- ऑडियो-विजुअल और मीडिया: मीडिया और मनोरंजन उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से 'ऑडियो-विजुअल को-प्रोडक्शन' के क्षेत्र में भी एक महत्वपूर्ण समझौता किया गया है।
- अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग: अंतरिक्ष उद्योग को नई गति देने के लिए दोनों पक्ष वर्ष 2026 में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना में एक संयुक्त रूप से द्विपक्षीय अंतरिक्ष उद्योग सेमिनार आयोजित करने पर सहमत हुए हैं।
- रोजगार और शांति स्थापना: युवाओं और पेशेवरों की गतिशीलता के लिए 'वर्किंग हॉलिडे प्रोग्राम' को शुरू करने की घोषणा की गई है। इसके साथ ही 'इंडिया सेंटर फॉर यूएन पीसकीपिंग' (संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापना के लिए भारत केंद्र) और 'ऑस्ट्रियाई आर्म्ड फोर्सेज इंटरनेशनल सेंटर' के बीच एक नई साझेदारी का भी ऐलान किया गया है।
कुल मिलाकर, ऑस्ट्रियाई चांसलर की यह भारत यात्रा दोनों देशों के आर्थिक और सामरिक संबंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत है। विशेषकर निवेश के लिए स्थापित किया गया 'फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म' और रक्षा व अंतरिक्ष उद्योग में होने वाले संयुक्त प्रयास आने वाले समय में दोनों देशों के व्यापारिक समुदाय के लिए नए और मजबूत अवसर पैदा करेंगे।समझौतों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पीएम मोदी ने कहा, "चांसलर स्टॉकर, आपकी पहली भारत यात्रा पर मैं आपका हार्दिक स्वागत करता हूँ। हमे बहुत खुशी है कि आपने यूरोप के बाहर अपनी पहली यात्रा के लिए भारत को चुना। यह आपके विज़न और भारत-ऑस्ट्रीया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"पीएम मोदी ने कहा कि चार दशकों के बाद ऑस्ट्रिया के चांसलर की भारत यात्रा अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 2026 के ऐतिहासिक भारत -यूरोपियन यूनियन फ्री ट्रेड अग्रीमन्ट के बाद, भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच संबंधों में एक नए सुनहरे अध्याय की शुरुआत हुई है। चांसलर स्टॉकर की विज़िट से, हम भारत-ऑस्ट्रिया संबंधों को भी एक नए कालखंड में ले जा रहे हैं।
धरने पर बैठे विधायक भाटी, पुलिस से नोंकझोंक के बीच हंगामा
जयपुर। गुरुवार को ‘ओरण बचाओ’ पदयात्रा के दौरान उस समय माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की धक्का-मुक्की की घटना सामने आई। यह पदयात्रा बाड़मेर जिले के शिव से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी के नेतृत्व में निकाली जा रही थी। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य में ओरण (पारंपरिक चारागाह और संरक्षित वन क्षेत्र) भूमि के संरक्षण को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।
प्रदर्शनकारियों को सीएम हाउस से पहले रोका
सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन से शुरू हुई इस पदयात्रा में जैसलमेर सहित प्रदेश के अलग-अलग जिलों से सैकड़ों लोग शामिल हुए। यात्रा मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ रही थी, लेकिन पुलिस ने सुरक्षा कारणों से इसे भवानी निकेतन के पास ही रोक दिया। आगे बढ़ने की कोशिश के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प हो गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोग वहीं धरने पर बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी करने लगे।
भाटी बोले- सरकार नहीं कर रही प्रभावी कार्रवाई
प्रदर्शन को संबोधित करते हुए विधायक भाटी ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बुजुर्ग और ग्रामीण जयपुर पहुंचे हैं, जिन्होंने देश की रक्षा में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन आज उन्हें अपनी मांगों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने इसे सरकार की संवेदनशीलता की कमी बताया। भाटी ने यह भी कहा कि प्रदेश में बड़ी मात्रा में ओरण भूमि अब तक राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो पाई है, जिसके कारण अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ रही हैं। इसका असर पर्यावरण के साथ-साथ किसानों और पशुपालकों की आजीविका पर भी पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई जगहों पर बड़े उद्योगों और कंपनियों द्वारा अतिक्रमण के मामलों में सरकार प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रही है।
जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने खेजड़ी पेड़ों के संरक्षण और गोचर भूमि को सुरक्षित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि सरकार ने पहले इन मुद्दों पर कानून बनाने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। आंदोलनकारियों के अनुसार यह पदयात्रा 21 जनवरी को तनोट माता मंदिर से शुरू हुई थी और इसमें शामिल लोग नंगे पैर लंबी दूरी तय कर रहे हैं। वे ओरण भूमि, जल स्रोतों और पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार आवाज उठा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
लोन चुकाने के लिए बना तांत्रिक, फर्जी बाबा गिरफ्तार
बेमेतरा|पारिवारिक समस्याएं सुलझाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी करने वाले ढोंगी बाबा को बेमेतरा पुलिस ने गिरफ्तार किया है. आरोपी का नाम ‘गोरखनाथ शक्ति बाबा’ बताया जा रहा है. बाबा के पास से पुलिस ने लगभग 5 लाख रुपये कीमत के गहने बरामद किए हैं. इस मामले में जांच जारी है|
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, मामला साजा थाना क्षेत्र के ग्राम पिपरिया का है. शिकायतकर्ता भागवत साहू अपनी बेटी के ससुराल में हो रहे विवाद और कलह से परेशान रहते थे. मोहतरा गांव में रहने वाले जालम दास कोशले ने उनकी मुलाकात बिहार में रहने वाले रविंद्र कुमार देव उर्फ गोरखनाथ शक्ति बाबा से कराई. उसने भागवत साहू को बताया कि घर का पाती (दोष) उखड़ गया है, जिस वजह से विवाद हो रहा है|
पुलिस के अनुसार आरोपी ने दावा किया कि वह अपनी शक्तियों से ठीक कर देगा. इसके बाद ठगी का सिलसिला 10 फरवरी 2026 से शुरू हुआ. आरोपी ने शिकायतकर्ता से 6.63 लाख रुपये कीमत के सोना-चांदी के जेवर और नकदी ऐंठ ली|
33.9 ग्राम सोना भी ठगा
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये है कि ढोंगी बाबा ने प्रार्थी की गैर मौजूदगी में पत्नी और बेटी को अपनी बातों में फंसा लिया. शुद्धिकरण के नाम पर उसने 33.9 ग्राम (मंगलसूत्र, लॉकेट आदि) और 130 ग्राम चांदी के गहने लेकर फरार हो गया|
ठगी की रकम से लोन चुकाया
शिकायत के बाद पुलिस ने बिहार के दरभंगा जिले के माधोपुर गांव से आरोपी बाबा को गिरफ्तार किया है. आरोपी ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि उसने ठगी से मिली रकम से उसने लोन चुका दिया. फर्जी बाबा को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है|
राजस्थान में ‘अटपटे’ नामों पर बवाल, शिक्षा विभाग विवादों में
जयपुर। राजस्थान में शिक्षा विभाग का 'सार्थक नाम अभियान' लागू होने से पहले ही विवादों में आ गया है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के उस निर्देश ने प्रदेशभर में बहस छेड़ दी है, जिसमें कक्षा 1 से 9 तक के विद्यार्थियों के 'अटपटे' या 'अनुपयुक्त' नामों को अभिभावकों की सहमति से बदलने की बात कही गई थी।
नए नामों की लिस्ट 65 हजार स्कूलों में भेजी गई
आदेश के बाद विभाग की ओर से लगभग तीन हजार संभावित नए नामों की सूची राज्य के करीब 65 हजार स्कूलों में भेजी गई, लेकिन सूची सामने आते ही इसे लेकर सवाल उठने लगे। कई नामों को अर्थहीन या आपत्तिजनक बताया जा रहा है, वहीं कुछ नामों में व्याकरणिक त्रुटियां भी पाई गई हैं। इतना ही नहीं, लड़कों और लड़कियों की सूची में नामों की अदला-बदली होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।
सरकार ने विपक्ष को घेरा
इस मुद्दे पर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस विधायक अमीन कागजी ने कहा कि सरकार का काम बच्चों के नाम तय करना नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाना होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री की प्राथमिकताएं वास्तविक समस्याओं से अलग दिखाई दे रही हैं। अभिभावक संगठनों ने भी इस फैसले पर नाराजगी जताई है। अभिभावक संघ के प्रतिनिधियों का कहना है कि नाम बदलने की सलाह और सूची दोनों ही व्यवहारिक नहीं हैं और इससे अभिभावकों के अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप होता है।
अभियान को लेकर बहस तेज
कुछ अभिभावकों ने सूची में विविधता की कमी का मुद्दा भी उठाया है। उनका कहना है कि विभिन्न समुदायों के नामों को पर्याप्त स्थान नहीं दिया गया, जिससे पक्षपात की आशंका पैदा हो रही है। जब शिक्षा मंत्री से सूची तैयार करने के मापदंड के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि इसके लिए कोई निश्चित मानक तय नहीं किया गया था। इस बयान के बाद विवाद और गहरा गया है। प्रदेश में पहले से ही सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं। कई स्कूलों में शिक्षकों के पद खाली हैं, भवन जर्जर हैं और विद्यार्थियों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है। ऐसे में इस अभियान को लेकर बहस तेज हो गई है कि क्या इससे शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार संभव हो पाएगा।
नकली घी फैक्टरी का भंडाफोड़, ब्रांडेड नाम से बिक रहा था मिलावटी माल
पाली। जिले के सुमेरपुर कस्बे के संजय नगर क्षेत्र में मिलावटी घी बनाने और नामी ब्रांड के नाम से बाजार में बेचने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात कार्रवाई करते हुए करीब 8 घंटे की सघन जांच के बाद भारी मात्रा में नकली घी, पैकिंग सामग्री और मशीनरी जब्त की।
हानिकारक रसायनों मिलाकर तैयार हो रहा था घी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. विकास मारवाल ने बताया कि विभाग को सूचना मिली थी कि संजय नगर स्थित एक गोदाम में पाम ऑयल और अन्य हानिकारक रसायनों को मिलाकर नकली घी तैयार किया जा रहा है। इसके बाद इसे सरस, अमूल, नोवा, कृष्णा और बनास जैसे प्रसिद्ध ब्रांडों के नाम से पैक कर बाजार में सप्लाई किया जा रहा था। सूचना के आधार पर खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की टीम ने संयुक्त रूप से गोदाम पर दबिश दी। जांच के दौरान वहां से 15 किलोग्राम क्षमता के करीब 150 टीन नकली घी बरामद किए गए। इसके अलावा विभिन्न ब्रांडों के नाम से तैयार किए गए टेट्रा पैक में लगभग 260 किलोग्राम घी भी मौके से जब्त किया गया।
ब्रांडेड कंपनियों के लेबल मिले
कार्रवाई के दौरान टीम को बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री और ब्रांडेड कंपनियों के लेबल भी मिले। साथ ही एक पैकिंग मशीन भी बरामद की गई, जिसका उपयोग नकली घी को पैक करने में किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के तहत टीम ने घी के छह नमूने जांच के लिए लिए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पाम ऑयल में अन्य रसायन मिलाकर नकली घी तैयार किया जा रहा था। पुलिस की पूछताछ में इस अवैध कारोबार से जुड़े रूपसिंह जाखोड़ा का नाम सामने आया है।
पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार किया
मौके पर नकली घी की पैकिंग करते हुए पर्वतसिंह और खुशाल सुथार सहित एक अन्य आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। वहीं संबंधित विभाग की ओर से ट्रेडमार्क के दुरुपयोग के मामले में सुमेरपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई गई है। पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने संयुक्त रूप से करीब 8 घंटे तक लगातार कार्रवाई कर इस अवैध कारोबार का खुलासा किया। जब्त किए गए नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सीएमएचओ ने आमजन से अपील की है कि वे बिना बिल या संदिग्ध खाद्य सामग्री खरीदने से बचें और किसी भी प्रकार की मिलावट की जानकारी तुरंत संबंधित विभाग को दें।
झुग्गी बस्ती में रहने वाली चांदनी बनी MP बोर्ड की टॉपर
भोपाल|एमपी बोर्ड की 12वीं क्लास का रिजल्ट आ चुका है. बोर्ड रिजल्ट में इस बार भी लड़कियों ने बाजी मारी है. 18 साल की चांदनी विश्वकर्मा ने एग्जाम में टॉप किया है. लेकिन चांदनी के लिए ये राह आसान नहीं थी. राजधानी भोपाल में झुग्गी बस्ती में रहने वाली चांदनी विश्वकर्मा के पिता बढ़ई हैं. घर में आर्थिक तंगी है. पैसों की इतनी परेशानी कि चांदनी को फुटपाथ की ट्यूबलाइट में पढ़ाई करनी पड़ी, लेकिन हार नहीं मानी और बोर्ड परीक्षा में टॉप किया है|
7 लाख स्टूडेंट्स को पीछे छोड़ा
रोशनी ने कॉमर्स स्ट्रीम से एमपी बोर्ड की 12वीं परीक्षा दी थी. इस परीक्षा में लगभग 7 लाख स्टूडेंट्स ने एग्जाम दिया था. लेकिन रोशनी ने परीक्षा में 500 में से 494 अंक यानी 98.8 प्रतिशत अंक हासिल किए और बोर्ड परीक्षा में टॉप किया. रोशनी ने बताया कि वो उनका सपना है कि वे आगे चलकर सीए बनें|
पिता दिहाड़ी मजदूर, फुटपाथ पर बैठकर की पढ़ाई
चांदनी विश्वकर्मा भोपाल की भीम नगर झुग्गी बस्ती की रहने वाली हैं. जहां दूसरे स्टूडेंट्स कोचिंग में अच्छे नंबर लाने के लिए बड़ी-बड़ी नामी कोचिंग का सहारा ले रहे थे, वहीं चांदनी ने कोचिंग तो बहुत दूर की बात है, बेहद विषम परिस्थितियों में स्टेट टॉप किया है. चांदनी के पिता दिहाड़ी मजदूरी और बढ़ई का काम करते हैं. ऐसे में घर की माली हालत ठीक नहीं हैं. पिता घर वालों का पेट भरने के लिए कमा लें, उतना ही बहुत है. चांदनी सोशल वेलफेयर सोसाइटी द्वारा चलाए जा रहे एक मुफ्त में पढ़ती थीं. घर में बिजली की दिक्कत थी. इसलिए चांदनी फुटपाथ की लाइट में मच्छरों के बीच पढ़ाई करती थीं. चांदनी का यही हौसला उनकी ताकत बना और चांदनी आज पूरे मध्य प्रदेश में चमक रही हैं|
गरीबी कमजोरी नहीं ताकत बनी
चांदनी ने बताया कि ये सच है कि उनका परिवार गरीब है. संसाधनों की काफी कमी भी थी. लेकिन इस गरीबी को कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि इस गरीबी के कारण ही कुछ बड़ा करने की प्रेरणा मिली. चांदनी ने कहा कि वे जब भी पढ़ाई करने बैठती थीं, उनके सामने पिता चेहरा आता था. जो चांदनी को यह एहसास दिलाता था कि अगर उन्होंने पढ़ाई नहीं की तो वह भी गरीबी के दलदल में फंस जाएंगी. पिता ने जो उनके लिए सपना देखा है, वो टूट जाएगा. इसलिए गरीबी और संसधानों की कमी ने उन्हें कमजोर नहीं पड़ने दिया, बल्कि उन्हें हौसला दिया कि उन्हें खुद के लिए और अपने परिवार के लिए कुछ अलग करना है|
मुख्यमंत्री ने चांदनी को प्रेरणास्त्रोत बताया
होनहार छात्रा से खुद सूबे के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव बेहद प्रभावित हैं. इसलिए उन्होंने चांदनी को अपने आवास पर बुलाकर उसे सम्मानित किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि चांदनी समाज के वंचित वर्ग के युवाओं के लिए प्रेरणस्त्रोत है. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया है कि आगे चांदनी के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव मदद की जाएगी|
चांदनी विश्वकर्मा ने ये साबित कर दिया कि अगर आपके हौसले मजबूत हैं तो आप बड़ी से बड़ी विषम परस्थितियों को मात दे सकते हैं. सिर्फ आपको अपने सपनों पर भरोसा रखना जरूरी है|














