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बाल विवाह के खिलाफ असम सरकार का कड़ा रुख, पूरे 30 दिन चलेगा जागरूकता और कार्रवाई अभियान

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गुवाहाटी : असम में बाल विवाह जैसी कुप्रथा के खिलाफ अब तक की सबसे कठोर और निर्णायक कार्रवाई होने जा रही है। राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि आगामी 1 नवंबर से अगले 30 दिनों तक पूरे असम राज्य में बाल विवाह के खिलाफ एक व्यापक और सख्त अभियान चलाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने असम पुलिस को यह स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस सामाजिक अपराध में संलिप्त आरोपियों के खिलाफ बिना किसी नरमी या ढिलाई के सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।

गुवाहाटी में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के मुख्य समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान असम सरकार ने बाल विवाह की प्रथा को रोकने के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं, और अब इस अभियान को और अधिक आक्रामक गति दी जाएगी।

पिछले पांच वर्षों में हुई रिकॉर्ड गिरफ्तारियां

मुख्यमंत्री के आंकड़ों के अनुसार, असम में बीते पांच वर्षों के भीतर बाल विवाह से जुड़े कुल 12,196 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसके तहत अब तक 11,099 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरमा ने कहा कि राज्य में की गई इन सख्त कानूनी कार्रवाइयों का सकारात्मक असर अब साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। राज्य में बाल विवाह की घटनाओं में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिसके परिणामस्वरूप उच्च शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों में बेटियों (छात्राओं) के दाखिले में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

उन्होंने गर्व के साथ कहा, "बाल विवाह के खिलाफ चल रही इस जंग में असम की प्रतिबद्धता और सफलता पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुकी है।" मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि उन्होंने वर्ष 2021 में इसी तिरंगे ध्वज के नीचे खड़े होकर असम से बाल विवाह की इस कुरीति को पूरी तरह समाप्त करने का संकल्प लिया था।

आगामी अभियान की रूपरेखा

मुख्यमंत्री सरमा ने दोहराया कि उन्होंने असम पुलिस को आगामी 1 नवंबर से लगातार 30 दिनों तक बाल विवाह के खिलाफ बिना किसी रियायत के विशेष अभियान चलाने का फरमान जारी किया है। इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य बाल विवाह में शामिल आयोजकों, संरक्षकों और अन्य दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर उन्हें सजा दिलाना है।

बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 1.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश

समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य के चहुंमुखी विकास को लेकर कई महत्वाकांक्षी घोषणाएं भी कीं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 से 2031 के बीच असम के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) के विकास पर कुल 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। ‘विकसित असम 2047’ के विजन के तहत राज्य सरकार अपने आंतरिक संसाधनों से 50,000 करोड़ रुपये पूंजीगत कार्यों (कैपिटल वर्क्स) पर लगाएगी, जिसमें सड़कों का निर्माण, आधुनिक स्कूलों का विकास, शहरीकरण और ग्रामीण क्षेत्रों का उत्थान शामिल है। इसके अतिरिक्त, केंद्र सरकार से 1 लाख करोड़ रुपये के पूंजी निवेश का प्रस्ताव मांगा जाएगा, जिससे आगामी पांच वर्षों में कुल प्रस्तावित निवेश का यह बड़ा आंकड़ा हासिल होगा।

मुख्यमंत्री की घोषणाओं से जुड़ी पांच प्रमुख बातें

  • बाल विवाह के खिलाफ विशेष अभियान: 1 नवंबर से पूरे एक महीने तक पूरे असम राज्य में कठोर कार्रवाई की जाएगी।

  • बड़ी संख्या में मामले और गिरफ्तारियां: पिछले पांच वर्षों में 12,196 मामले दर्ज कर 11,099 आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है।

  • भारी-भरकम निवेश: वर्ष 2026 से 2031 के बीच बुनियादी ढांचे के विकास पर 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

  • युवाओं के लिए नया प्रशासनिक विभाग: राज्य के युवाओं के विकास और सशक्तीकरण के लिए एक अलग और समर्पित विभाग का गठन किया जाएगा।

  • कड़े प्रशासनिक कदम: बहुविवाह और अन्य सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ सरकार का शिकंजा लगातार कसता रहेगा।

2 अक्टूबर से 'मिशन सद्भावना-2' की शुरुआत

मुख्यमंत्री सरमा ने आगामी 2 अक्टूबर को 'मिशन सद्भावना-2' का शुभारंभ करने की भी घोषणा की। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में लम्बित पड़ी फाइलों और आवेदनों का त्वरित निस्तारण करना है। उन्होंने कहा कि इससे प्रशासनिक व्यवस्था और अधिक पारदर्शी तथा जवाबदेह बनेगी, जिससे आम नागरिकों की शिकायतों और जरूरतों का समय पर समाधान हो सकेगा।

इसके साथ ही, उन्होंने युवाओं के विकास और उनके सशक्त भविष्य के लिए एक अलग 'युवा विकास और सशक्तीकरण विभाग' बनाने का भी ऐलान किया। सरमा ने कहा कि वह आज की युवा पीढ़ी को 'जेन जी' या 'जेन अल्फा' जैसी कृत्रिम श्रेणियों में नहीं बांटते हैं, बल्कि उनके लिए राज्य का प्रत्येक युवा यहां का बेटा और बेटी है, जो असम के उज्ज्वल भविष्य का आधार हैं।

दिसंबर में आएगा 'मिशन बसुंधरा 4.0' और भूमि खरीद पर नई शर्तें

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि भूमि प्रबंधन को और सुगम बनाने के लिए 'मिशन बसुंधरा 4.0' इसी वर्ष दिसंबर माह में शुरू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चिन्हित 40 राजस्व मंडलों में जमीन की खरीद-फरोख्त केवल उन्हीं लोगों को करने की अनुमति दी जाएगी, जो वहां कम से कम तीन पीढ़ियों से निवास कर रहे हैं। इसके अलावा, ऐतिहासिक कॉटन कॉलेज के 125 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में उन्होंने संस्थान के विकास के लिए 100 करोड़ रुपये की विशेष आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया।

बहुविवाह करने वाले सरकारी कर्मचारियों पर आर्थिक कार्रवाई

मुख्यमंत्री सरमा ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई भी सरकारी कर्मचारी बहुविवाह (एक से अधिक विवाह) जैसी प्रथा में संलिप्त पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कड़ी आर्थिक कार्रवाई की जाएगी। ऐसे दोषी कर्मचारी के कुल मासिक वेतन का 20 प्रतिशत हिस्सा काटकर सीधे उसकी कानूनी पत्नी को भत्ते के रूप में दिया जाएगा, बशर्ते पीड़ित पत्नी द्वारा इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जाए।

RSS पर प्रियांक खड़गे का बड़ा बयान, ‘इसे बैन नहीं किया जा सकता क्योंकि रजिस्ट्रेशन नहीं’

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बेंगलुरु: दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में कांग्रेस सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच राजनीतिक तनातनी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने आरएसएस के संगठनात्मक ढांचे और कानूनी दर्जे पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि आरएसएस पर औपचारिक प्रतिबंध की बात करना इसलिए भी संभव नहीं है, क्योंकि यह संगठन कानूनी रूप से रजिस्टर्ड ही नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने संघ को चुनौती देते हुए यह भी पूछा है कि देश के स्वतंत्रता आंदोलन और आजादी के बाद के सांप्रदायिक दंगों के दौरान संघ की असल भूमिका क्या रही थी।

क्या है पूरा राजनीतिक विवाद?

गृह मंत्री खड़गे की यह तीखी टिप्पणी ऐसे वक्त में सामने आई है जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार राज्य के सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्तियों के इस्तेमाल को विनियमित और नियंत्रित करने के लिए एक नया कानून लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल ने 'द कर्नाटक रेगुलेशन ऑफ यूज ऑफ गवर्नमेंट प्रिमाइसेज एंड पब्लिक प्रॉपर्टी बिल, 2026' के मसौदे पर विचार-विमर्श किया है। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस नए विधायी प्रस्ताव को सीधे तौर पर आरएसएस की गतिविधियों पर लगाम कसने और उन्हें प्रतिबंधित करने की एक सुनियोजित कोशिश बता रही है, जबकि राज्य सरकार का यह स्पष्ट तर्क है कि यह नया कानून किसी एक विशिष्ट संगठन को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि सभी सार्वजनिक संपत्तियों के व्यवस्थित उपयोग के लिए लाया जा रहा है।

'आरएसएस से मेरा सवाल… आजादी की लड़ाई में उनकी क्या भूमिका थी?'

प्रियांक खड़गे ने आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा कि संगठन को जनता के सामने यह स्पष्ट करना चाहिए कि उसने देश के स्वतंत्रता संग्राम की किस लड़ाई में प्रत्यक्ष रूप से हिस्सा लिया था। उन्होंने दावा किया कि देश की आजादी के लिए विभिन्न विचारधाराओं और राजनीतिक दलों के अनगिनत लोगों ने संघर्ष किया और सर्वोच्च बलिदान दिए।

खड़गे ने देश के विभाजन के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों का हवाला देते हुए आरएसएस से सवाल किया कि उस संवेदनशील दौर में संगठन ने किस दंगे के दौरान पीड़ितों की रक्षा करने का कार्य किया था। इसके साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आरएसएस की नीतियों और कार्यशैली के कारण समाज में सांप्रदायिक तनाव और दंगे बढ़े हैं।

'जब आरएसएस रजिस्टर्ड नहीं, तो अपनी गतिविधियां कैसे चला रहा है?'

आरएसएस की कानूनी स्थिति को लेकर प्रियांक खड़गे इससे पहले भी कई बार सवाल उठा चुके हैं। इसी वर्ष जून 2026 में उन्होंने संघ प्रमुख मोहन भागवत को एक पत्र लिखकर संगठन के वैधानिक स्वरूप, पदाधिकारियों के विवरण, वित्तीय फंडिंग और टैक्स अनुपालन से जुड़े कई दस्तावेज और जानकारियां मांगी थीं।

खड़गे का तर्क था कि किसी संगठन पर प्रतिबंध लगाने या उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई करने से पहले यह कानूनी रूप से स्पष्ट होना चाहिए कि वह किस अधिनियम के तहत रजिस्टर्ड है। दूसरी ओर, आरएसएस का पारंपरिक रुख यह रहा है कि देश के कानूनों के तहत हर संगठन के लिए सोसायटी या अन्य किसी रूप में औपचारिक पंजीकरण कराना अनिवार्य नहीं होता है। वहीं, संघ प्रमुख मोहन भागवत पहले भी खड़गे की ऐसी मांगों को केवल राजनीतिक स्टंट और चुनावी मुद्दा करार दे चुके हैं।

क्या है कर्नाटक का नया सार्वजनिक संपत्ति विधेयक?

कर्नाटक सरकार द्वारा लाए जा रहे इस नए प्रस्तावित कानून का मुख्य उद्देश्य सरकारी परिसरों और सार्वजनिक संपत्तियों के उपयोग के नियमों को बेहद पारदर्शी और स्पष्ट बनाना है। इस प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद सरकारी स्कूलों, कॉलेजों के परिसरों, खेल के मैदानों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी प्रकार के सांस्कृतिक, सामाजिक या राजनीतिक कार्यक्रम अथवा गतिविधि के आयोजन से पहले संबंधित स्थानीय प्राधिकरण से अनिवार्य रूप से अनुमति लेनी होगी।

राज्य सरकार का दावा है कि इस विधेयक का एकमात्र उद्देश्य सरकारी संपत्तियों के वाणिज्यिक या राजनीतिक दुरुपयोग को रोकना और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इस नए कानून में अनुमति प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त प्रावधान किए जाने की बात कही गई है।

मंत्री जमीर अहमद पर यत्नाल ने साधा निशाना, स्वतंत्रता दिवस समारोह को लेकर लगाया गंभीर आरोप

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विजयपुरा: निष्कासित भारतीय जनता पार्टी (BJP) के विधायक बसनगौड़ा पाटिल यत्नाल ने शनिवार को कर्नाटक के मंत्री जमीर अहमद खान के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज और स्वतंत्रता दिवस के ध्वजारोहण समारोह का अनादर कर देश का अपमान किया है।

विजयपुरा शहर में 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर एक कार्यक्रम के दौरान बोलते हुए यत्नाल ने कहा कि देश के प्रत्येक नागरिक और जनप्रतिनिधि का यह परम कर्तव्य है कि वे राष्ट्रगान तथा राष्ट्रीय ध्वज का पूर्ण सम्मान करें। उन्होंने तीखा आरोप लगाते हुए कहा, "हम सभी का यह दायित्व है कि हम राष्ट्रीय प्रतीकों का आदर करें, लेकिन मंत्री जमीर अहमद ने स्वतंत्रता दिवस समारोह से दूरी बनाकर इनका अपमान किया है।"

कर्नाटक के मंत्री पर लगाए गए प्रमुख आरोप

यत्नाल ने दावा किया कि कर्नाटक सरकार द्वारा विजयनगर जिले में स्वतंत्रता दिवस का आधिकारिक ध्वजारोहण समारोह आयोजित करने का निर्देश दिया गया था, और यह अपेक्षा थी कि मंत्री जमीर अहमद इस समारोह में शामिल होकर ध्वजारोहण करेंगे। हालांकि, यत्नाल के अनुसार, मंत्री ने बाद में एक पत्र लिखकर यह कह दिया कि वे इस कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो पाएंगे।

पूर्व भाजपा विधायक ने इस घटनाक्रम को सीधे तौर पर राष्ट्र और स्वतंत्रता दिवस जैसे महापर्व का अपमान करार दिया। उन्होंने मांग की कि जो भी व्यक्ति राष्ट्रीय ध्वज या राष्ट्रगान का अनादर करता है, उसके विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। यत्नाल ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लेना हर जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस ऐतिहासिक दिन पूरा देश अपने अमर स्वतंत्रता सेनानियों के सर्वोच्च बलिदान को याद करता है और भारत की आजादी से जुड़े लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव मनाता है।

मंत्री प्रियांक खरगे पर भी साधा निशाना

अपने संबोधन को आगे बढ़ाते हुए यत्नाल ने कर्नाटक के एक अन्य मंत्री प्रियांक खरगे पर भी जोरदार राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने राज्य में कथित आतंकवाद से जुड़े मामलों में हाल ही में हुई कुछ गिरफ्तारियों का मुद्दा उठाया और दावा किया कि राज्य के गृह मंत्री के अपने गृह जिले से दो संदिग्ध आतंकवादियों को गिरफ्तार किया गया है, जिस पर सरकार की प्रतिक्रिया बेहद ढीली रही है।

यत्नाल ने आरोप लगाया कि ऐसे गंभीर और संवेदनशील मामलों में कड़ी कार्रवाई करने के बजाय मंत्री प्रियांक खरगे इस प्रक्रिया में बेवजह देरी कर रहे हैं। पूर्व भाजपा विधायक ने खरगे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय केवल राजनीतिक बयानबाजी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के खिलाफ अभियान चलाने में व्यस्त हैं।

राज्यभर में आयोजित हुए स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम

स्वतंत्रता दिवस के इस राष्ट्रीय पर्व के अवसर पर कर्नाटक की राजनीतिक फिजा काफी गर्म नजर आई और विभिन्न नेताओं ने ध्वजारोहण कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए शासन, आंतरिक सुरक्षा और जनकल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए। हालांकि, जमीर अहमद खान और प्रियांक खरगे के खिलाफ यत्नाल द्वारा लगाए गए ये तमाम आरोप उनके अपने राजनीतिक दावे हैं, और उपलब्ध बयानों के आधार पर इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है।

अन्य भारतीय राज्यों की भांति कर्नाटक में भी भारत की स्वतंत्रता की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष್ಯ में विभिन्न स्थानों पर भव्य आधिकारिक समारोह आयोजित किए गए, जहां तिरंगा फहराकर वीर स्वतंत्रता सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।

भाजपा नेता की हत्या के बाद श्रीभूमि में बवाल, शव मिलने पर बढ़ा तनाव; 6 लोग हिरासत में

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श्रीभूमि: असम के श्रीभूमि जिले से एक बेहद सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां लगभग दो दिनों से लापता चल रहे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 52 वर्षीय बूथ अध्यक्ष का शव असम-त्रिपुरा सीमा के नजदीक से बरामद किया गया है। इस घटना के सामने आने के बाद से पूरे क्षेत्र में भारी तनाव का माहौल बन गया है। स्थानीय पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक की पहचान छगलमावा गांव के निवासी विकास रंजन धर के रूप में हुई है। वे बीते 12 अगस्त को अपनी मोटरसाइकिल से घर से निकले थे, जिसके बाद से उनका कोई अता-पता नहीं था। परिजनों द्वारा लगातार संपर्क न हो पाने पर स्थानीय थाने में उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।

पुलिस द्वारा की गई तकनीकी जांच और कॉल रिकॉर्ड (CDR) की गहन छानबीन के आधार पर शुक्रवार को विकास रंजन धर का शव जोगीछरा क्षेत्र में एक तालाब के समीप से बरामद कर लिया गया। इस बहुचर्चित मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कुल छह संदिग्धों को अपनी हिरासत में लिया है, जिनमें 24 और 30 वर्ष की आयु के दो कथित मुख्य आरोपी भी शामिल हैं।

व्यक्तिगत दुश्मनी के चलते की गई थी निर्मम हत्या

पुलिस ने इस हत्याकांड के कारणों का खुलासा करते हुए बताया कि हिरासत में लिए गए आरोपियों में से एक ने पूछताछ के दौरान यह स्वीकार किया है कि विकास रंजन धर की हत्या एक धारदार हथियार से गोदकर की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (अपराध) त्रिनयन भुइयां ने जानकारी दी कि शुरुआती तफ्तीश में इस पूरी वारदात के पीछे आपसी व्यक्तिगत रंजिश और दुश्मनी की बात सामने आ रही है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "परिजनों द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर हमने तुरंत तलाश अभियान शुरू किया और उनके मोबाइल कॉल रिकॉर्ड खंगाले, जिससे जांच टीम को सीधे आरोपियों तक पहुंचने में बड़ी सफलता मिली। अब तक की प्राथमिक जांच से यही स्पष्ट होता है कि यह हत्या व्यक्तिगत वैमनस्य का परिणाम है।"

पुलिस हिरासत से भागने की कोशिश में आरोपी घायल

इस हाई-प्रोफाइल मामले में उस समय एक नया और नाटकीय मोड़ आया जब हिरासत में लिए गए आरोपियों में से एक ने पुलिस हिरासत से फरार होने की फिराक में एक कांस्टेबल पर धारदार वस्तु से अचानक हमला कर दिया। स्थिति को संभालते हुए पुलिस दल ने जवाबी कार्रवाई की, जिसमें गोली लगने से आरोपी के बाएं पैर में चोट आ गई। इसके तुरंत बाद पुलिस ने उसे दोबारा दबोच लिया और इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।

शव मिलने के बाद भड़की हिंसा और धारा 163 लागू

विकास रंजन धर का शव मिलने की खबर फैलते ही छगलमावा, बाजारिछरा और आसपास के कई अन्य इलाकों में तीव्र विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। इस दौरान उग्र भीड़ द्वारा कुछ जगहों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं, जिसमें उपद्रवियों ने कुछ दुकानों को भी आग के हवाले कर दिया।

स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण से बाहर होने और सांप्रदायिक या आपसी सौहार्द बिगड़ने से रोकने के लिए जिला प्रशासन ने तुरंत कड़े कदम उठाते हुए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत सख्त निषेधाज्ञा (कर्फ्यू जैसे हालात) लागू कर दी है।

पुलिस प्रशासन कर रहा है मामले की हर पहलू से जांच

प्रशासनिक अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह पुलिस के नियंत्रण में है और इलाके में शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। हत्या की इस खौफनाक वारदात और उसके बाद भड़की हिंसा की परिस्थितियों की व्यापक स्तर पर जांच की जा रही है। हालांकि, पुलिस ने फिलहाल हिरासत में लिए गए लोगों के आधिकारिक नाम सार्वजनिक नहीं किए हैं। जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ेगी, इसमें और भी बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।

स्वतंत्रता दिवस पर राजस्थान में शर्मसार करने वाली घटनाएं, झंडारोहण के दौरान गिरी तिरंगे की शान

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माधोपुर: देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन राष्ट्रीय पर्व पर जहां एक ओर पूरा राजस्थान हर्षोल्लास और आजादी के जश्न में डूबा हुआ था, वहीं दूसरी ओर करौली और सवाई माधोपुर जिलों से प्रशासनिक लापरवाही और लचर व्यवस्थाओं की दो बेहद चौंकाने वाली घटनाएं सामने आई हैं। इन दोनों ही स्थानों पर आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान ध्वजारोहण के वक्त राष्ट्रीय ध्वज पोल से अचानक छूटकर नीचे आ गिरा। इस गंभीर घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिससे राष्ट्रीय पर्व के आयोजनों की तैयारियों और जमीनी प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।

राष्ट्रीय ध्वज के मान-सम्मान से जुड़ी इस प्रकार की अक्षम्य चूक ने न केवल वहां मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और नागरिकों को हक्का-बक्का कर दिया, बल्कि स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही पर भी गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।

पहली घटना: करौली के त्रिलोक चंद माथुर स्टेडियम की

करौली जिला मुख्यालय पर स्थित ऐतिहासिक त्रिलोक चंद माथुर स्टेडियम में जिला स्तरीय मुख्य स्वतंत्रता दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया जा रहा था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, जब जिला कलेक्टर अक्षय गोदारा राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए मंच पर पहुंचे और रस्सी खींची, तो तकनीकी या व्यवस्थागत चूक के कारण तिरंगा पोल पर टिकने के बजाय नीचे आ गिरा। इस अप्रत्याशित घटना से समारोह में कुछ समय के लिए असहज स्थिति पैदा हो गई।

आजादी के पर्व पर देवास में खास आयोजन, विजयवर्गीय ने फहराया तिरंगा; प्रतिभाओं का सम्मान

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देवास: मध्य प्रदेश के देवास शहर में देश का 80वां स्वतंत्रता दिवस बेहद गरिमामयी और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस भव्य जिला स्तरीय समारोह में नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने विधिवत रूप से राष्ट्रीय ध्वज फहराकर तिरंगे को सलामी दी। इस राष्ट्रीय अवसर पर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक (SP) सहित बड़ी संख्या में स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, शासकीय कर्मचारी और आम नागरिक मौजूद रहे।

आकर्षक परेड और मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन

ध्वजारोहण के उपरांत पुलिस बल, होमगार्ड और विभिन्न टुकड़ियों ने बेहद अनुशासित और आकर्षक परेड प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि को गार्ड ऑफ ऑनर (सलामी) दिया। परेड के उत्कृष्ट अनुशासन और कदमताल ने वहां मौजूद सभी दर्शकों का दिल जीत लिया। इसके पश्चात, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से प्रदेश के मुख्यमंत्री के संदेश का वाचन किया और जनता को सरकार की नीतियों से अवगत कराया।

अपने संबोधन में मंत्री विजयवर्गीय ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों और राज्य की निरंतर प्रगति का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमारा प्रदेश कृषि, रोजगार, उद्योग और बुनियादी ढांचे जैसे विभिन्न क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। सरकार का यह निरंतर प्रयास है कि विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुंचे और मध्य प्रदेश को विकास के नए व ऊंचे आयामों तक पहुंचाया जाए।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने मोहा मन और मिला सम्मान

समारोह के दौरान देशभक्ति और सांस्कृतिक छटा का एक अनूठा संगम देखने को मिला। विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं द्वारा देशप्रेम से ओतप्रोत रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। बच्चों के इन शानदार कार्यक्रमों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया, जिससे पूरा वातावरण पूरी तरह राष्ट्रप्रेम के रंग में सराबोर हो गया।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में अपने-अपने क्षेत्रों में उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य करने वाले पुलिसकर्मियों तथा विभिन्न विभागों के शासकीय कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार प्रदान किए गए। इस पूरे स्वतंत्रता दिवस समारोह में देशभक्ति, अनुशासन और अभूतपूर्व उत्साह का माहौल बना रहा।

एक बाइक पर सवार थे चार युवक, अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर; मौके पर मौत

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बोकारो: झारखंड के बोकारो जिले के पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र अंतर्गत सिधावनी गांव के पास बोकारो-पुरुलिया राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-32) पर शुक्रवार की देर रात करीब 11 बजे एक भीषण सड़क दुर्घटना हो गई। एक तेज रफ्तार अज्ञात वाहन की चपेट में आने से एक ही मोटरसाइकिल पर सवार चार युवकों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

इस भीषण हादसे में जान गंवाने वाले चारों युवकों की पहचान पिंड्राजोरा थाना क्षेत्र के आमाडीह गांव के रूप में हुई है, जिनकी उम्र और विवरण इस प्रकार हैं:

  • बुलेट प्रमाणिक (17 वर्ष), पुत्र हरि प्रमाणिक

  • आनंद महतो (15 वर्ष), पुत्र परमेश्वर महतो

  • डाक्टर महतो (17 वर्ष), पुत्र शक्तिपद महतो

  • धना महतो (18 वर्ष), पुत्र बुद्धेश्वर महतो

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें

घटना की सूचना मिलते ही पिंड्राजोरा थाने की पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची और चारों युवकों को गंभीर हालत में इलाज के लिए बोकारो स्थित सदर अस्पताल पहुंचाया। हालांकि, अस्पताल के चिकित्सकों ने परीक्षण के बाद चारों को मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक दुर्घटना की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, वहां कोहराम मच गया और मातम पसर गया।

मनसा पूजा मनाने घर लौटा था एक युवक

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतकों में शामिल धना महतो बाहर रहकर कहीं नौकरी करता था और हाल ही में मनसा पूजा मनाने के लिए शुक्रवार को ही अपने घर वापस लौटा था। शुक्रवार की शाम को ही ये चारों युवक एक ही मोटरसाइकिल पर सवार होकर पश्चिम बंगाल की ओर खान-पान के लिए निकले थे।

रात को जब वे वापस लौट रहे थे, तभी सिधावनी गांव के पास किसी अज्ञात और तेज रफ्तार वाहन ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि चारों के सिर में गंभीर चोटें आईं और उन्होंने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया। पुलिस मामले की जांच कर अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी है।

NEET UG 2026 मेरिट लिस्ट जारी, 696 नंबर वाला बना MP का टॉपर

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भोपाल: डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड मेडिकल एजुकेशन, मध्य प्रदेश ने NEET UG 2026 के तहत 85 प्रतिशत स्टेट कोटा की एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) सीटों पर प्रवेश के लिए आधिकारिक राज्य मेरिट सूची जारी कर दी है। इस मेरिट लिस्ट में कुल 17,093 नीट-योग्य अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है। जारी आंकड़ों के अनुसार, जबलपुर के आर्यमन सोलंकी ने 696 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि सार्थक साहू ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

कैसे डाउनलोड करें एमपी नीट यूजी मेरिट सूची?

योग्य उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके अपनी रैंक लिस्ट देख और डाउनलोड कर सकते हैं:

  1. सबसे पहले DME मध्य प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट dme.mponline.gov.in पर जाएं।

  2. होमपेज पर दिए गए ‘MP State Combined UG Counselling 2026’ सेक्शन पर क्लिक करें।

  3. इसके बाद ‘State Merit List of Registered Candidates 2026’ के लिंक पर क्लिक करें।

  4. ऐसा करते ही मेरिट लिस्ट की पीडीएफ (PDF) फाइल आपकी स्क्रीन पर खुल जाएगी।

  5. इस पीडीएफ में अपना नाम या रोल नंबर खोजकर अपनी रैंक की जांच कर सकते हैं।

विभाग द्वारा जारी इस सूची में उम्मीदवार की स्टेट रैंक, ऑल इंडिया रैंक, रोल नंबर, नाम, जेंडर और NEET UG स्कोर जैसी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। इसी मेरिट लिस्ट के आधार पर क्वालीफाइड छात्र-छात्राएं स्टेट कोटे की सीटों पर दाखिले के पात्र होंगे।

टॉप-10 में शामिल एकमात्र महिला उम्मीदवार

एमपी नीट यूजी 2026 की टॉप-10 मेरिट सूची का विश्लेषण करें तो इसमें सामान्य वर्ग के 7, ओबीसी वर्ग के 2 और एसटी वर्ग का 1 उम्मीदवार शामिल है। इस प्रतिष्ठित सूची में हिलोर अजमेरा ने 655 अंकों के साथ जगह बनाई है, जो कि टॉप-10 में शामिल इकलौती महिला उम्मीदवार हैं और उनकी राज्य रैंक 7 है।

भोपाल में तिरंगे के रंग में रंगा माहौल, आतिफ अकील के नेतृत्व में निकली यात्रा

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भोपाल: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक भव्य और विशाल तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। इस 'पैगाम-ए-मोहब्बत' रैली का आयोजन स्थानीय विधायक आतिफ अकील द्वारा किया गया। यह विशाल तिरंगा यात्रा भोपाल टॉकीज चौराहे से शुरू होकर इमामी गेट तक निकाली गई। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें सभी धर्मों के धर्मगुरुओं ने शिरकत कर देश में सर्वधर्म समभाव और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। इस यात्रा में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ-साथ हाल ही में जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से चर्चा में आए जुनैद भी विशेष रूप से शामिल हुए।

बड़ी संख्या में उमड़े लोग, गूंजे देशभक्ति के नारे

राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत इस रैली में आजादी के जश्न के कई रंग देखने को मिले। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे हजारों की संख्या में लोग इस यात्रा में शामिल हुए। देश भक्ति गीतों की धुन पर झूमते युवाओं और नागरिकों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। इस दौरान यात्रा में विभिन्न आकर्षणों से भरी सुंदर झांकियां भी निकाली गईं, जिसने पूरे शहर का माहौल देशभक्तिमय बना दिया।

'यह पैगाम-ए-मोहब्बत रैली का 33वां वर्ष है' – विधायक आतिफ अकील

रैली के उद्देश्यों और अपनी पारिवारिक परंपरा के बारे में बात करते हुए कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि 'पैगाम-ए-मोहब्बत' नाम से निकाली जाने वाली इस रैली का यह 33वां साल है। उन्होंने बताया कि इस अनूठी परंपरा की शुरुआत उनके वालिद (पिता) आरिफ अकील ने की थी, जो देश की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने के लिए समर्पित है।

उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी मिलकर एकता के साथ रहें, जो एक ही थाली में खाना खाने जैसी साझा संस्कृति के प्रतीक हैं। हमारी यह मुहिम है कि भोपाल से शुरू होकर यह मोहब्बत का पैगाम पूरे प्रदेश और देश में फैले। हर साल इस आयोजन में समाज के सभी वर्गों का भरपूर सहयोग मिलता है और इसे पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

फूड लेबलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, सरकार से पूछा- भारत को विकसित बनाने की दिशा क्या है?

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नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ने पैकेट बंद (पैकेज्ड) खाद्य पदार्थों पर 'फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग' (FOPL) के दृश्य स्वरूप और डिजाइन को लेकर केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए यह भी सवाल किया कि क्या भारत को हमेशा एक अविकसित देश ही बने रहना चाहिए? शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेष रूप से विकसित देशों के मानदंडों के अनुरूप चलना देश के लिए संभव नहीं है।

फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग खाद्य पदार्थों के पैकेट के सामने दी जाने वाली एक ऐसी पोषण संबंधी ग्राफिक जानकारी होती है, जिससे उपभोक्ताओं को कोई भी खाने की वस्तु खरीदते समय सही निर्णय लेने और एक स्वस्थ आहार का चुनाव करने में बड़ी मदद मिलती है।

किसने दायर की है यह जनहित याचिका?

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। यह याचिका '3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी' नामक एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिसमें केंद्र, सभी राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य रूप से एफओपीएल (FOPL) लागू करें।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए एफओपीएल बेहद आवश्यक है। यह विशेष रूप से उन बढ़ते बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो तेजी से जंक फूड के आदी होते जा रहे हैं। अदालत ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी वाले स्पष्ट लेबल शुरू करने में हो रही अनावश्यक देरी को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को भी तीखी फटकार लगाई। पीठ ने दो टूक कहा कि देश में मोटापे की समस्या अब एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में स्वीकार की जा चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार को दो टूक

जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बृजेंद्र चाहर ने अदालत में यह दलील दी कि पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना बेहद कठिन है, इसलिए एफओपीएल पर अदालत के सुझावों पर विचार करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला ने सख्त लहजे में पूछा, "क्या आप इस अदालत को मजाक समझ रहे हैं?"

चिली, इस्राइल और कनाडा जैसे विभिन्न देशों में पहले से अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए पीठ ने कहा, "हम केंद्र के इस रुख को कतई स्वीकार नहीं कर सकते कि वह अंतरराष्ट्रीय या विकसित देशों के मानकों के अनुरूप नहीं चल सकता। क्या भारत को हमेशा अविकसित देश ही बने रहना है? यह एक गंभीर सवाल है जिसे हम केंद्र सरकार के विचार के लिए रख रहे हैं।"

अदालत ने कहा कि दुनिया को इस बात का संदेश मिलना चाहिए कि भारत अपने नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य, और खासकर आने वाली पीढ़ी के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह विषय विशेषज्ञों से सलाह लेकर एफओपीएल के दृश्य स्वरूप पर जल्द से जल्द अंतिम फैसला ले। इस लेबलिंग में रंगीन संकेतक (कलर कोड), व्याख्यात्मक शब्द, अंक, अक्षर, प्रतीक या प्रतिशत जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हो सकती हैं।

दो हफ्ते के भीतर सरकार को रिकॉर्ड पर रखना होगा फैसला

पीठ ने चेतावनी भरे लहजे में स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार इस दिशा में खुद सकारात्मक कदम उठाती है, तो यह बहुत अच्छा होगा, अन्यथा अदालत इस पर आगे के सख्त निर्देश जारी करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस मामले में अपना अंतिम निर्णय आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

अदालत ने कहा कि उसके विचार से केंद्र को एफओपीएल से जुड़े बदलावों को लागू करने में कोई कठिनाई नहीं आनी चाहिए, क्योंकि यह पूरा विषय पहले से ही सरकार के संज्ञान में है। इसका मुख्य संकेत देश के आर्थिक सर्वेक्षण में दिए गए सुझावों से भी मिलता है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि एक संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार बच्चे के मानसिक विकास, शारीरिक वृद्धि और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता, बल्कि उसके सोचने, कार्य करने और व्यवहार करने के तरीके पर भी गहरा असर डालता है।

याचिका में गैर-संचारी रोगों के बढ़ते खतरे का जिक्र

'3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी' की जनहित याचिका में देश के भीतर गैर-संचारी रोगों (NCDs) के लगातार बढ़ते खतरनाक बोझ का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। याचिका में बताया गया कि एफओपीएल के जरिए खाद्य पदार्थों में अत्यधिक मात्रा में मौजूद चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट (संतृप्त वसा) की जानकारी को प्रमुखता से दर्शाया जा सकता है। अत्यधिक मात्रा में इन तत्वों का सेवन मधुमेह (डाइबिटीज), मोटापा, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी गंभीर व जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का मुख्य कारण बनता है।

याचिका में देश भर में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में हो रही चिंताजनक बढ़ोतरी पर भी गंभीर चिंता जताई गई। इसमें कहा गया कि गैर-संचारी रोग अब भारत में हर साल 60 लाख से अधिक असमय मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, मधुमेह एक ऐसी मूक बीमारी के रूप में उभर चुकी है जो चुपचाप फैल रही है और लगभग हर चार में से एक भारतीय नागरिक को अपनी चपेट में ले रही है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब आगामी 10 सितंबर को निर्धारित की गई है।

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