Home Blog

पूजा घर में कितनी मूर्तियां रखनी चाहिए? मूर्तियों का आकार कितना हो, जानें क्या कहता है ज्योतिष और वास्तु शास्त्र

0

लगभग हर घर में पूजा का एक विशेष स्थान होता है, जहां देवी-देवताओं की आराधना की जाती है. लेकिन कई बार लोग श्रद्धावश पूजा घर में बहुत अधिक मूर्तियां या बड़े आकार की प्रतिमाएं स्थापित कर लेते हैं. ज्योतिष और वास्तु शास्त्र की मान्यताओं के अनुसार, पूजा घर में मूर्तियों की संख्या और उनका आकार भी विशेष महत्व रखता है. बहुत से लोगों को जानकारी ना होने की वजह से कितनी भी मूर्तियां रख लेते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का सही से बैलेंस नहीं बन पाता. माना जाता है कि पूजा घर में सही नियमों का पालन करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पूजा का फल भी शुभ माना जाता है.

पूजा घर में कितनी मूर्तियां रखना उचित माना गया है?
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में देवी-देवताओं की अत्यधिक मूर्तियां रखने के बजाय सीमित संख्या में प्रतिमाएं रखना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि एक ही देवता की कई मूर्तियां या कई शिवलिंग, कई गणेश प्रतिमाएं अथवा एक से अधिक शंख रखने से बचना चाहिए. ऐसा इसलिए क्योंकि प्रत्येक प्रतिमा की नियमित पूजा और सेवा का विधान बताया गया है. अगर किसी कारणवश पुरानी मूर्तियां खंडित हो जाएं या पूजा योग्य ना रहें, तो उन्हें घर में रखने के बजाय धार्मिक परंपरा के अनुसार किसी पवित्र नदी या मंदिर में उचित विधि से विसर्जित या समर्पित करना बेहतर माना जाता है.
मूर्तियों का आकार कितना होना चाहिए?
वास्तु शास्त्र में पूजा घर के लिए छोटी और संतुलित आकार की मूर्तियां अधिक उपयुक्त मानी गई हैं. सामान्यतः 3 से 9 इंच तक की प्रतिमाएं गृह पूजा के लिए शुभ मानी जाती हैं. वहीं बड़े आकार की मूर्तियां मंदिरों या सार्वजनिक पूजा स्थलों के लिए अधिक उपयुक्त मानी जाती हैं. मान्यता है कि बहुत बड़ी मूर्तियों की पूजा के लिए विशेष नियम और नित्य सेवा का पालन आवश्यक होता है. इसलिए सामान्य गृहस्थ जीवन में छोटे आकार की प्रतिमाएं रखना सुविधाजनक और शुभ माना जाता है. पूजा घर में हमेशा एक छोटा और ठोस शिवलिंग ही रखना चाहिए, जिसका आकार अंगूठे के पोर से बड़ा ना हो.
किन बातों का रखें विशेष ध्यान?
वास्तु और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा घर में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए—

    पूजा घर हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें.
    खंडित या टूटी हुई मूर्तियां पूजा स्थान में ना रखें.
    देवी-देवताओं की प्रतिमाओं को आमने-सामने रखने से बचें.
    पूजा करते समय पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करना शुभ माना जाता है.
    पूजा घर में अनावश्यक तस्वीरें, खराब दीपक या अनुपयोगी धार्मिक सामग्री जमा ना होने दें.

ज्योतिष क्या मानता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पूजा घर में सादगी, नियमित पूजा और श्रद्धा सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं. केवल अधिक मूर्तियां रखने से शुभ फल नहीं मिलता, बल्कि श्रद्धा, नियम और सकारात्मक भाव से की गई आराधना को अधिक फलदायी माना गया है. इसलिए पूजा स्थान को शांत, स्वच्छ और सात्विक बनाए रखना आवश्यक माना जाता है.

 

हनुमान जी को बेहद प्रिय हैं ये 5 भोग, मंगलवार को लगाने से दूर होंगे सभी कष्ट, घर में आएगी सुख-समृद्धि!

0

हिंदू धर्म में मंगलवार का दिन भगवान हनुमान की पूजा के लिए बहुत शुभ माना जाता है. मंगलवार के दिन भक्त पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से बजरंगबली की पूजा करते हैं, हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं और उन्हें प्रिय भोग अर्पित करते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सच्ची श्रद्धा और भक्ति के साथ उनका पसंदीदा भोग चढ़ाने से भगवान हनुमान प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों के जीवन से संकट, भय और नकारात्मकता को दूर करते हैं. लेकिन ये मान्यताएं धार्मिक आस्था और परंपराओं पर आधारित हैं. आइए जानते हैं कि मंगलवार के दिन भगवान हनुमान को कौन-सी 5 चीज़ें अर्पित करना शुभ माना जाता है…

बूंदी या बेसन के लड्डू
बूंदी और बेसन के लड्डू भगवान हनुमान को बहुत प्रिय माने जाते हैं. मंगलवार को उन्हें ताज़े लड्डू चढ़ाने की परंपरा है. पूजा के बाद इस प्रसाद को परिवार के सदस्यों और ज़रूरतमंदों में बांटना भी शुभ माना जाता है.
गुड़ और भुने चने
गुड़ और भुने चने भगवान हनुमान को चढ़ाई जाने वाली सरल लेकिन पसंदीदा चीज़ें मानी जाती हैं. माना जाता है कि इन्हें चढ़ाने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है. यह चढ़ावा सादगी और भक्ति का प्रतीक भी है.

पान का चढ़ावा
कई धार्मिक परंपराओं में भगवान हनुमान को ‘मीठा पान’ चढ़ाने की प्रथा है. ध्यान रखें कि पान में तंबाकू या कोई अन्य नशीली चीज़ न हो. केवल सात्विक चीज़ों का इस्तेमाल करें जैसे कत्था, सौंफ, गुलकंद और इलायची.

केले
केला उन मुख्य फलों में से एक है जो भगवान हनुमान को चढ़ाए जाते हैं. मंगलवार को पके केले चढ़ाना शुभ माना जाता है. पूजा के बाद इन्हें प्रसाद के रूप में खाया जा सकता है.
चूरमा या गेहूं के आटे का चढ़ावा
घी, गुड़ और गेहूं के आटे से बना चूरमा भी कई इलाकों में भगवान हनुमान को चढ़ाया जाता है. यह चढ़ावा भक्ति और समर्पण का प्रतीक है और खास मौकों पर प्रसाद के रूप में बांटा जाता है.
चढ़ावा चढ़ाते समय ध्यान रखने वाली बातें-
-पूजा से पहले स्नान करें और साफ़ कपड़े पहनें.
-चढ़ावा हमेशा साफ़ और ताज़ा होना चाहिए.
-भगवान हनुमान को चमेली का तेल और सिंदूर चढ़ाना भी शुभ माना जाता है.
-चढ़ावा चढ़ाते समय पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का जाप करें.
-पूजा के बाद परिवार और अन्य लोगों में प्रसाद बांटना शुभ माना जाता है.

 

ड्राइंग रूम में सोफा और टीवी की सही दिशा से वास्तु संतुलन, घर में होता है सकारात्मक ऊर्जा का एहसास

0

घर का ड्राइंग रूम केवल मेहमानों के स्वागत की जगह नहीं होता बल्कि यह पूरे परिवार की सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र भी माना जाता है. सनातन परंपरा में वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की प्रत्येक वस्तु का सही स्थान जीवन पर सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. ऐसे में यदि ड्राइंग रूम में रखा सोफा या टीवी गलत दिशा में हो, तो इसे वास्तु दोष का कारण माना जाता है.

अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम के अनुसार, ज्योतिष और वास्तु शास्त्र दोनों का अपना अलग महत्व है. किसी भी घर की सुख-समृद्धि और शांति इस बात पर भी निर्भर करती है कि घर में रखी वस्तुएं वास्तु के अनुरूप हैं या नहीं, घर में प्रवेश करते ही सबसे पहले ड्राइंग रूम दिखाई देता है. इसलिए इस स्थान का संतुलित और व्यवस्थित होना बेहद जरूरी माना जाता है.
दक्षिण एवं पूर्व दिशा में रखें टीवी
पंडित कल्कि राम बताते हैं कि ड्राइंग रूम में सोफा हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना शुभ माना जाता है. इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आने वाले मेहमानों से शुभ समाचार या अच्छे अवसर मिलने की संभावना बढ़ती है. साथ ही परिवार के सदस्यों के बीच सामंजस्य और मानसिक शांति बनी रहती है. वहीं टीवी की दिशा भी वास्तु में महत्वपूर्ण मानी गई है. उनके अनुसार टीवी को दक्षिण या पूर्व दिशा में रखना बेहतर माना जाता है. ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है और परिवार में अनावश्यक विवाद, तनाव और कलह की स्थिति बनने की संभावना घटती है. यदि टीवी को गलत दिशा में रखा जाए तो यह परिवार के वातावरण पर प्रतिकूल असर डाल सकता है.

वास्तुदिशा में रखी चीजें घर को बनाती हैं उर्जावान
हालांकि, वास्तु शास्त्र को पारंपरिक मान्यता के रूप में देखा जाता है. इसका उद्देश्य घर में संतुलित और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना है. यदि आप इन मान्यताओं में विश्वास रखते हैं, तो घर की सजावट या फर्नीचर की व्यवस्था करते समय इन नियमों का ध्यान रख सकते हैं. इसके साथ ही घर की साफ-सफाई, पर्याप्त रोशनी, खुला व हवादार वातावरण और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम व सम्मान भी सुख-समृद्धि के महत्वपूर्ण आधार माने जाते हैं. यदि आपके घर में सोफा या टीवी लंबे समय से किसी अन्य दिशा में रखा है और आप वास्तु के अनुसार बदलाव करना चाहते हैं, तो किसी योग्य वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही परिवर्तन करना बेहतर रहेगा. सही दिशा, संतुलित व्यवस्था और सकारात्मक सोच मिलकर घर के वातावरण को अधिक सुखद और ऊर्जावान बना सकते हैं.

राशिफल 28 जून 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा

0
  • मेष राशि :-  उन्नति सिद्ध, वाहन भय, शरीर कष्ट, प्रयास से सफलता मिल सकती है, ध्यान दें।
  • वृष राशि :- खर्च, सिद्धी, शुभ कार्य, कष्ट, मानसिक कार्य एवं सफलता के योग, ध्यान दें।
  • मिथुन राशि :- राज से हानि, विरोध, अपव्यय, लेखन कार्य में रुकावट अवश्य होगी।
  • कर्क राशि :- संतान कष्ट, आर्थिक कष्ट, खर्च, शुभ व्यय, धार्मिक एवं शुभ कार्यों के योग हैं।  
  • सिंह राशि :- सफलता, हर्ष, भय, विवाद, कुछ प्रसन्नता के योग, पारिवारिक सुख होगा।
  • कन्या राशि :- हानि, अपव्यय का योग, रोग, मातृ कष्ट, शिक्षा जगत में संतोष रहेगा।
  • तुला राशि :- लाभ, संतान सुख, रोगभय, झुंझलाहट, लेखन कार्य सामान्य प्रगतिकारक होगा।  
  • वृश्चिक राशि :- अभीष्ट सिद्धी, स्वजन कार्य सिद्धी, धन लाभ, सामाजिक कार्य व्यावधान के साथ सफल होगा।
  • धनु राशि :- राजभय, स्त्री कष्ट, कार्य सिद्धी, धन लाभ, सामाजिक कार्यों में व्यवधान एवं सफलता।
  • मकर राशि :- विवाद, कष्ट, बाधा, हानि, घरु कष्ट, नौकरी की स्थिति सामान्य अवश्य ही रहेगी।
  • कुंभ राशि :- यश, शुभ कार्य, मुकदमे से लाभ, धार्मिक तथा कुछ अच्छे कार्य भी हो सकते हैं।
  • मीन राशि :- रोगभय, अभीष्ट सिद्धी, अल्प हानि, नौकरी में अनबन बन सकती है, ध्यान दें।

आरसीपी सिंह के बदले तेवर, नीतीश कुमार से मुलाकात के बाद दिए बड़े संकेत

0

पटना। बिहार के राजनीतिक गलियारों में शनिवार को उस समय अचानक हलचल बढ़ गई जब पूर्व केंद्रीय मंत्री आरसीपी सिंह ने सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। एक लंबे अरसे से दोनों बड़े नेताओं के बीच बनी हुई कड़वाहट और दूरी के बाद अचानक हुई इस मुलाकात ने राज्य के सियासी पारे को चढ़ा दिया है। इस बैठक के बाद से ही राजनीतिक हलकों में आरसीपी सिंह की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में दोबारा एंट्री को लेकर चर्चाओं का बाजार बेहद गर्म हो गया है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम और संभावित वापसी पर अभी तक जेडीयू या सरकार की तरफ से कोई भी आधिकारिक टिप्पणी या बयान जारी नहीं किया गया है।

चार साल पुराना गतिरोध टूटने के संकेत

आरसीपी सिंह को किसी समय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सबसे विश्वस्त और करीबी रणनीतिकार माना जाता था। मगर साल 2022 में दोनों नेताओं के आपसी संबंधों में आए बड़े बिखराव के बाद उन्होंने जेडीयू से इस्तीफा दे दिया था। पार्टी से अलग होने के बाद उन्होंने अपनी एक नई राजनीतिक जमीन तलाशने की कोशिश की और इसी सिलसिले में वे 'जन सुराज' अभियान का हिस्सा भी बने, लेकिन वहां भी उनकी पारी बहुत लंबी नहीं चल सकी। अब इतने सालों बाद नीतीश कुमार के साथ उनके दोबारा बैठने से बिहार की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।

'हम तो जेडीयू में हैं' वाले बयान ने चौंकाया

मुलाकात खत्म होने के बाद जब आरसीपी सिंह मीडिया के सामने आए, तो उन्होंने मुस्कुराते हुए एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि "हम तो जेडीयू में हैई हैं, ऐसा मानकर चलिए न… थोड़ा इंतजार कीजिए और सब कुछ समय-काल पर छोड़ दीजिए।" राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह बयान साफ तौर पर पुरानी पार्टी में उनकी वापसी का एक मजबूत इशारा है, भले ही उन्होंने अभी तक औपचारिक रूप से जेडीयू की सदस्यता लेने का एलान नहीं किया हो।

कुर्मी वोट बैंक और सामाजिक समीकरणों पर असर

राजनीति के जानकारों की मानें तो बिहार के सामाजिक ताने-बाने में कुर्मी समाज हमेशा से जेडीयू का एक बेहद मजबूत और पारंपरिक वोट बैंक रहा है। ऐसे में आरसीपी सिंह जैसे अपनी जाति के प्रभावशाली और कद्दावर चेहरे की मुख्यधारा में वापसी से जेडीयू अपने पुराने सामाजिक समीकरण को और ज्यादा धार दे सकती है। इस रणनीतिक मुलाकात को आने वाले चुनावों के मद्देनजर पार्टी को अंदरूनी रूप से मजबूत करने की कवायद के तौर पर भी देखा जा रहा है।

बिहार के शहरी विकास को मिलेगी नई रफ्तार, गयाजी में विश्व बैंक ने किया निरीक्षण

0

गयाजी। बिहार अर्बन ट्रांसफार्मेशन प्रोग्राम (बीयूटीपी) के तहत गयाजी और बोधगया के विकास को नई रफ्तार देने के लिए विश्व बैंक के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने यहां का दौरा किया। टीम ने क्षेत्र में चल रही और भविष्य में शुरू होने वाली विभिन्न शहरी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का बारीकी से स्थलीय निरीक्षण किया। जिला सर्किट हाउस पहुंचने पर इस विशेष डेलिगेशन का नगर आयुक्त सह अपर समाहर्ता आदित्य कुमार पीयूष द्वारा गर्मजोशी से स्वागत किया गया। इसके बाद आयोजित एक विशेष प्रेजेंटेशन सत्र में अधिकारियों ने वैश्विक टीम को गयाजी शहर में चल रही विकास योजनाओं की मौजूदा स्थिति और प्रगति से विस्तार से रूबरू कराया।

शहर की सुंदरता, सीवरेज नेटवर्क और पैदल यात्रियों के लिए खास योजना

इस बैठक के दौरान शहर को सुंदर बनाने, कचरा और स्वच्छता प्रबंधन को बेहतर करने के साथ-साथ जमीन के भीतर जल निकासी और सीवरेज नेटवर्क के दायरे को बढ़ाने पर गहन चर्चा हुई। प्रशासन ने आम नागरिकों को मिलने वाली सुविधाओं को मजबूत करने और शहर के मुख्य बाजारों व प्रमुख चौराहों को पैदल चलने वाले लोगों के अनुकूल (पेडेस्ट्रियन फ्रेंडली) बनाने की भावी योजनाओं का पूरा खाका विश्व बैंक की टीम के सामने रखा।

इंडोर स्टेडियम का आधुनिकीकरण और नए वेंडिंग ज़ोन की तैयारी

विश्व बैंक की टीम ने अपना फील्ड दौरा इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम से शुरू किया, जहां इस मैदान को सभी आधुनिक सुविधाओं से लैस एक भव्य खेल परिसर के रूप में बदलने की संभावनाओं को तलाशा गया। इसके बाद टीम ने शहर के नवनिर्मित विरासत स्तंभ (हेरिटेज पिलर) की खूबसूरती को देखा और मिर्जा गालिब गोलंबर के पास बनने वाले प्रस्तावित वेंडिंग ज़ोन की जमीन का मुआयना किया। इस वेंडिंग ज़ोन के लिए टेंडर की प्रक्रिया को पहले ही पूरा कर लिया गया है, जिससे जल्द ही दुकानदारों को व्यवस्थित जगह मिल सकेगी।

विष्णुपद कॉरिडोर और घाटों के विकास की समीक्षा

दौरे के अंतिम चरण में प्रतिनिधिमंडल ने प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर परिसर का रुख किया। वहां टीम ने महत्वाकांक्षी विष्णुपद कॉरिडोर विकास परियोजना की जमीनी प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों और विशेषज्ञों के इस दल ने मंदिर परिसर के साथ-साथ उससे जुड़े तमाम नदी घाटों का पैदल घूमकर निरीक्षण किया, ताकि इस पूरे धार्मिक स्थल को श्रद्धालुओं के लिए और अधिक सुगम और भव्य रूप दिया जा सके। विश्व बैंक के इस दौरे से गयाजी के अंतरराष्ट्रीय स्तर के विकास को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

एक पिता, तीन अफसर! रेलवे कर्मचारी के घर से निकले बैंक मैनेजर, SBI अधिकारी और राजस्व अधिकारी

0

गया: बिहार के गया जिले के अंतर्गत आने वाले शहमीर तकिया इलाके में रहने वाला अजय कुमार गुप्ता का परिवार इन दिनों समूचे क्षेत्र में अद्वितीय प्रेरणा, कड़े अनुशासन और पारिवारिक एकजुटता की एक अनूठी मिसाल बनकर उभरा है। रेलवे मेल सर्विस (आरएमएस) के पद से गरिमामय सेवानिवृत्ति प्राप्त करने वाले अजय कुमार गुप्ता के तीनों बच्चों ने देश के प्रतिष्ठित सरकारी क्षेत्रों में उच्च पदों पर चयनित होकर अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

इसी कड़ी में परिवार के सबसे छोटे सुपुत्र कुमार अमन ने हाल ही में घोषित हुए 70वीं बीपीएससी (बिहार लोक सेवा आयोग) के परीक्षा परिणामों में शानदार सफलता अर्जित करते हुए 'राजस्व अधिकारी' (रेवेन्यू ऑफिसर) का गौरवशाली पद हासिल किया है, जिससे इस परिवार की ख्याति और दोगुनी हो गई है।

तीनों भाई-बहन प्रतिष्ठित पदों पर आसीन, गया से लेकर गुजरात तक जमाई धाक

अजय कुमार गुप्ता के घर में सरकारी नौकरियों की यह त्रिवेणी किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनके सबसे बड़े बेटे कुमार अभिषेक वर्तमान में गया जिले के ही वजीरगंज स्थित बैंक ऑफ इंडिया (BOI) की शाखा में बतौर असिस्टेंट ब्रांच मैनेजर (सहायक शाखा प्रबंधक) के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

वहीं, उनकी इकलौती बेटी भी बैंकिंग सेक्टर में अपनी योग्यता साबित करते हुए गुजरात में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के अंतर्गत जूनियर एसोसिएट के महत्वपूर्ण पद पर पूरी निष्ठा से कार्यरत हैं। अब सबसे छोटे बेटे कुमार अमन के बिहार प्रशासनिक सेवा में अधिकारी बनने की खबर से पूरे मोहल्ले और रिश्तेदारों में जश्न का माहौल है।

आईआईटी रुड़की से बीटेक का सफर, वर्तमान में कोलकाता एयरपोर्ट पर संभाल रहे कमान

शुरुआत से ही मेधावी रहे कुमार अमन की शैक्षणिक यात्रा बेहद शानदार रही है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा गया से ही पूरी की, जिसके बाद वे देश की सबसे कठिन इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा (राजस्थान) चले गए। अपनी कुशाग्र बुद्धि के बल पर उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) में दाखिला पा लिया।

वहां से इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक कॉर्पोरेट यानी निजी क्षेत्र की नामी कंपनी में नौकरी भी की। इसके बाद उनका चयन विमानन क्षेत्र में हो गया और वर्तमान में वे कोलकाता अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बेहद जिम्मेदारी वाले पद 'एयर ट्रैफिक कंट्रोल' (ATC) ऑफिसर के रूप में देश सेवा कर रहे हैं। इस बड़ी जिम्मेदारी को निभाते हुए भी उनका झुकाव सिविल सर्विसेज की तरफ रहा और उन्होंने नौकरी के साथ अपनी पढ़ाई जारी रखकर बीपीएससी की परीक्षा भी पहले ही प्रयास में निकाल ली।

कठिन ड्यूटी के बाद रोजाना 2 से 3 घंटे की नियमित पढ़ाई ने दिलाया मुकाम

अपनी इस शानदार सफलता की रणनीति साझा करते हुए नवनियुक्त राजस्व अधिकारी कुमार अमन ने बताया कि एक एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की नौकरी मानसिक रूप से बेहद तनावपूर्ण और बड़ी जवाबदेही वाली होती है, जहां जरा सी चूक की कोई गुंजाइश नहीं होती। ऐसी व्यस्त और शिफ्ट वाली ड्यूटी के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

वे रोजाना दफ्तर से लौटने के बाद अपनी थकान को दरकिनार कर पूरी एकाग्रता के साथ दो से तीन घंटे नियमित रूप से किताबों के साथ बिताते थे। समय प्रबंधन (टाइम मैनेजमेंट) की इसी कला और सीमित समय के शत-प्रतिशत सही उपयोग के दम पर उन्होंने बीपीएससी जैसी कठिन और स्तरीय परीक्षा में यह स्वर्णिम सफलता अर्जित की है।

सामूहिक पढ़ाई और पारिवारिक टीमवर्क बना सफलता की असली कुंजी

कुमार अमन के बड़े भाई कुमार अभिषेक ने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया कि उनके घर में शुरू से ही पढ़ाई का एक बेहद सकारात्मक माहौल था। तीनों भाई-बहन कभी अलग-अलग होकर नहीं, बल्कि हमेशा एक टीम की तरह मिलकर पढ़ाई करते थे। स्कूल और कॉलेज के दिनों में यदि किसी को भी किसी विषय या थ्योरी को समझने में कोई कठिनाई आती थी, तो तीनों एक साथ बैठकर गहन चर्चा करते थे और मिलकर उसका हल निकालते थे।

बचपन का यही टीमवर्क, आपसी सहयोग और घर का सख्त अनुशासन आज उन तीनों को जीवन के अलग-अलग मोर्चों पर शीर्ष सरकारी अधिकारी बनाने में सबसे बड़ा मददगार साबित हुआ है।

माता-पिता के त्याग और संस्कारों का सुखद परिणाम

इस गौरवमयी उपलब्धि पर भावुक होते हुए पिता अजय कुमार गुप्ता ने बताया कि उन्होंने अपने दोनों बेटों को गया के क्रेन मेमोरियल स्कूल से और बेटी को डीएवी कैंट एरिया स्कूल से उच्च संस्कारयुक्त शिक्षा दिलाई। उन्होंने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी अर्धांगिनी अनीता गुप्ता को दिया, जिन्होंने अजय कुमार की नौकरी के व्यस्त समय के बीच बच्चों की पढ़ाई, उनके खान-पान और उत्तम परवरिश की पूरी कमान अकेले अपने हाथों में संभाली थी। आज पूरा गुप्ता परिवार बच्चों की इस त्रिकोणीय सफलता को अपनी बरसों की तपस्या, माता-पिता के त्याग और सनातनी संस्कारों का सबसे मीठा परिणाम मान रहा है।

दरभंगा के कंसी चौक के पास सरसों तेल से भरे ट्रक में लगी भीषण आग

0

दरभंगा। जिले के सिमरी थाना क्षेत्र के अंतर्गत कंसी चौक के पास नेशनल हाईवे-27 (NH-27) पर शनिवार तड़के एक भीषण सड़क हादसा हो गया। भोर के वक्त सरसों के तेल से भरा एक तेज रफ्तार ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क के किनारे खड़ी एक मोटरसाइकिल से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि इसके तुरंत बाद ट्रक के भीतर शॉर्ट सर्किट हो गया, जिसने कुछ ही पलों में विकराल आग का रूप ले लिया। देखते ही देखते आग ने पूरे वाहन को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे ट्रक में रखा भारी मात्रा में सरसों का तेल, चालक का मोबाइल फोन और सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज पूरी तरह जलकर राख हो गए।

समय रहते कूदने से बची जान

हाईवे पर आग की लपटें इतनी तेज थीं कि दूर-दूर तक काले धुएं का गुबार दिखाई देने लगा। इस भयानक हादसे के बीच राहत की बात यह रही कि ट्रक के चालक और खलासी ने समझदारी दिखाई और जैसे ही आग भड़की, वे दोनों समय रहते चलते वाहन से नीचे कूद गए। इस त्वरित फैसले की वजह से दोनों की जान बाल-बाल बच गई और एक बड़ा जानी नुकसान होने से टल गया।

राजस्थान से पूर्णिया जा रहा था माल

इस संबंध में जानकारी देते हुए ट्रक के चालक संजय कुमार ने बताया कि वह मूल रूप से राजस्थान के चूरू जिले के हरिमवास थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले माधऊ गांव के रहने वाले हैं। वह ट्रक में सरसों का तेल लादकर राजस्थान से पूर्णिया की तरफ जा रहे थे, तभी सिमरी क्षेत्र में अचानक संतुलन बिगड़ने से यह हादसा हो गया। पुलिस और प्रशासन को घटना की सूचना दे दी गई है, जिसके बाद हाईवे पर सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सामान्य करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

AIIMS भोपाल ने रचा इतिहास, विश्व यूनिवर्सिटी रैंकिंग में हासिल किया दूसरा स्थान

0

भोपाल: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) भोपाल ने चिकित्सा अनुसंधान (मेडिकल रिसर्च) और विज्ञान के क्षेत्र में एक अभूतपूर्व और गौरवान्वित करने वाली वैश्विक उपलब्धि अपने नाम की है। प्रतिष्ठित वैश्विक संस्था 'एडी साइंटिफिक इंडेक्स वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2026' की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में वर्ष 2025 से 2026 के बीच पूरे भारत में सबसे तीव्र गति से प्रगति करने वाले शीर्ष 10 संभ्रांत संस्थानों में एम्स भोपाल को देश भर में दूसरा (2nd) स्थान प्राप्त हुआ है। संस्थान ने अपनी उत्कृष्ट शोध प्रणाली के दम पर वैश्विक पायदान पर 1,235 स्थानों की एक लंबी और ऐतिहासिक छलांग लगाई है, जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संस्थान की साख को बेहद मजबूत किया है।

इंडेक्स में चमके एम्स भोपाल के 183 वैज्ञानिक, अनुसंधान और उद्धरणों में एशिया स्तर पर जमाई धाक

एडी साइंटिफिक इंडेक्स द्वारा जारी विस्तृत आंकड़ों के मुताबिक, एम्स भोपाल के कुल 183 मूर्धन्य वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को इस प्रतिष्ठित वैश्विक सूची में जगह दी गई है। संस्थान के शोध स्तर की गुणवत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इनमें से 2 शीर्ष वैज्ञानिक दुनिया के टॉप 10 प्रतिशत वैज्ञानिकों में शुमार हैं। इसके अतिरिक्त, 31 वैज्ञानिक शीर्ष 30 प्रतिशत में, 66 वैज्ञानिक शीर्ष 50 प्रतिशत में और 139 वैज्ञानिक दुनिया के शीर्ष 70 प्रतिशत शोधकर्ताओं की विशिष्ट सूची में अपना स्थान बनाने में सफल रहे हैं।

कुल वैज्ञानिक उद्धरणों (साइटेशन्स) के संचयी आधार पर एम्स भोपाल की वैश्विक रैंकिंग 3,591वीं है, जबकि पूरे एशिया महाद्वीप में संस्थान 1,358वें और भारत के सभी वैज्ञानिक संस्थानों में 290वें स्थान पर काबिज है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि शुद्ध 'खोज आधारित रैंकिंग' (इन्वेंशन एंड डिस्कवरी ओरिएंटेड इंडेक्स) में एम्स भोपाल ने समूचे भारत में प्रथम स्थान (Rank 1) प्राप्त कर देश के अग्रणी चिकित्सा संस्थानों को पीछे छोड़ दिया है।

आम मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ, विकसित होंगी अत्याधुनिक उपचार पद्धतियां

चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, एम्स भोपाल की यह अकादमिक और वैज्ञानिक सफलता केवल कागजों या प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा और दूरगामी लाभ अस्पताल में आने वाले आम और गंभीर मरीजों को मिलेगा। उच्च स्तरीय शोध के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र में नई और कम खर्चीली उपचार पद्धतियां विकसित होंगी। इससे जटिल बीमारियों की प्रारंभिक स्तर पर ही सटीक पहचान (डायग्नोसिस) करना और उनका लक्षित इलाज करना कहीं अधिक प्रभावी और सुलभ हो जाएगा। साथ ही, दुनिया की सबसे आधुनिक चिकित्सा तकनीकों का सीधा लाभ क्षेत्रीय और गरीब मरीजों तक आसानी से पहुंच सकेगा।

समर्पित टीम, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों की सामूहिक लगन का मीठा फल: प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर

संस्थान की इस स्वर्णिम सफलता पर गहरा हर्ष व्यक्त करते हुए एम्स भोपाल के कार्यपालक निदेशक (एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर) एवं सीईओ प्रो. (डॉ.) माधवानन्द कर ने कहा कि यह ऐतिहासिक गौरव संस्थान के समर्पित वैज्ञानिकों, वरिष्ठ शिक्षकों, युवा शोधकर्ताओं और मेधावी विद्यार्थियों के दिन-रात के कड़े परिश्रम, अटूट प्रतिबद्धता और सामूहिक प्रयास का ही सुखद परिणाम है।

उन्होंने संस्थान के विजन को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि एम्स भोपाल का मुख्य उद्देश्य केवल अकादमिक शोध करना नहीं, बल्कि ऐसे व्यावहारिक अनुसंधान को बढ़ावा देना है जिसका उपयोग सीधे तौर पर मरीजों के क्लीनिकल इलाज में किया जा सके और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को इसका लाभ मिले। यह वैश्विक सम्मान भविष्य में संस्थान को और अधिक उच्च स्तरीय एवं मानवतावादी अनुसंधान करने के लिए एक नई ऊर्जा और प्रेरणा देगा।

सेशेल्स में PM मोदी का भव्य स्वागत, राष्ट्रपति पैट्रिक के साथ पिया नारियल पानी, कछुओं को खिलाईं पत्तियां

0

विक्टोरिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक राजनयिक यात्रा पर सेशेल्स पहुंच गए हैं। सेशेल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वहां के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने प्रोटोकॉल से परे जाकर उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री को प्रतिष्ठित 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। हवाई अड्डे पर मौजूद प्रवासी भारतीय समुदाय के नागरिकों ने भी पारंपरिक कच्छी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति के साथ देश के प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इसके पश्चात, दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने विक्टोरिया स्थित प्रसिद्ध नेशनल बोटैनिकल गार्डन का भ्रमण किया, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल एक स्मृति पौधा रोपा, बल्कि वहां के मुख्य आकर्षण माने जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के 'एल्डाब्रा जाइंट' कछुओं को अपने हाथों से भोजन भी कराया।

स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती, जोनाथन कछुए का इतिहास और दीर्घायु का वैज्ञानिक रहस्य

यह राजकीय यात्रा वैश्विक स्तर पर इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि २९ जून २०२६ को प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, जो इस द्वीपीय राष्ट्र की स्वतंत्रता के ५० वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस भव्य परेड में भारतीय नौसेना के दो आधुनिक युद्धपोतों के साथ सशस्त्र बलों की एक विशेष टुकड़ी भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगी। सेशेल्स के कछुओं की विशेषता को देखें तो यहां पाए जाने वाले एल्डाब्रा जाइंट कछुए अपनी १५० वर्ष की औसत आयु के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैं, जिनमें १९४ वर्षीय 'जोनाथन' को विश्व का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जीव माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कछुओं के इतने लंबे जीवनकाल के पीछे उनकी अत्यंत धीमी चयापचय (धीमी जीवनशैली) प्रणाली है, जिससे उनकी शारीरिक कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी नहीं होतीं, साथ ही उनका अभेद्य और सख्त बाहरी कवच उन्हें प्राकृतिक शत्रुओं व आंतरिक बीमारियों से जीवनभर सुरक्षा प्रदान करता है।

द्विपक्षीय संबंधों के ५० वर्ष, विजन महासागर और नेशनल असेंबली में संबोधन

भारत और सेशेल्स के मध्य आधिकारिक कूटनीतिक संबंधों की स्थापना का यह ५०वां वर्ष है, जिसे रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने सेशेल्स को भारत के 'विजन महासागर' (MAHASAGAR) का एक अपरिहार्य और मजबूत समुद्री साझेदार बताया है। फरवरी २०२६ में राष्ट्रपति हर्मिनी की सफल भारत यात्रा के बाद हो रहे इस दौरे में दोनों राष्ट्रों के बीच हिंद महासागर की सुरक्षा, क्षेत्रीय संप्रभुता और आर्थिक समृद्धि को लेकर कई उच्चस्तरीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली (संसद) को संबोधित करने वाले भारत के इतिहास के पहले प्रधानमंत्री बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। प्रधानमंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया है कि इस ऐतिहासिक पहल से न केवल सदियों पुराने लोकतांत्रिक और विधायी मूल्यों को मजबूती मिलेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों का आपसी नौसैनिक सहयोग भी एक नए युग में प्रवेश करेगा।

इंदिरा गांधी के दौर की कूटनीति, सामरिक निगरानी और चीन की घेराबंदी का रोडमैप

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो वर्ष १९७६ में सेशेल्स की स्वतंत्रता के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वहां का दौरा किया था और भारत ने अपनी नौसेना का पराक्रमी युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी वहां भेजा था। वर्ष १९८१ में उनके दूसरे दौरे के बाद लगभग ३४ वर्षों तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की सुध नहीं ली, जिसके बाद २०१५ में प्रधानमंत्री मोदी ने वहां की यात्रा कर इस कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त किया था। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में जब चीन हिंद महासागर के छोटे द्वीपीय देशों में अपना सैन्य प्रभाव बढ़ाने की निरंतर कोशिश कर रहा है, भारत ने सेशेल्स की तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए उसे दूसरा अत्याधुनिक डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान सौंपने की आधिकारिक घोषणा की है। इसके साथ ही, भारत के सहयोग से निर्मित अत्याधुनिक तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन इस क्षेत्र में जहाजों के आवागमन पर पैनी नजर रखने और भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) की सामरिक नीति को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बेहद निर्णायक और दूरगामी कदम है।

Join Whatsapp Group
Join Our Whatsapp Group