शिवतांडव स्तोत्र का प्रतिदिन पाठ करने से व्यक्ति को जिस किसी भी सिद्धि की महत्वकांक्षा होती है, भगवान शिव की कृपा से वह आसानी से पूर्ण हो जाती है। इस बारे में एक कथा से जाना जा सकता है। कुबेर व रावण दोनों ऋषि विश्रवा की संतान थे और दोनों सौतेले भाई थे। ऋषि विश्रवा ने सोने की लंका का राज्य कुबेर को दिया था लेकिन किसी कारणवश अपने पिता के कहने पर वे लंका का त्याग कर हिमाचल चले गए। कुबेर के चले जाने के बाद इससे दशानन बहुत प्रसन्न हुआ। वह लंका का राजा बन गया और लंका का राज्य प्राप्त करते ही धीरे-धीरे वह इतना अहंकारी हो गया कि उसने साधुजनों पर अनेक प्रकार के अत्याचार करने शुरू कर दिए।
जब दशानन के इन अत्याचारों की ख़बर कुबेर को लगी तो उन्होंने अपने भाई को समझाने के लिए एक दूत भेजा, जिसने कुबेर के कहे अनुसार दशानन को सत्य पथ पर चलने की सलाह दी। कुबेर की सलाह सुन दशानन को इतना क्रोध आया कि उसने उस दूत को बंदी बना लिया व क्रोध के मारे तुरन्त अपनी तलवार से उसकी हत्या कर दी। कुबरे की सलाह से दशानन इतना क्रोधित हुआ कि दूत की हत्या के साथ ही अपनी सेना लेकर कुबेर की नगरी अलकापुरी को जीतने निकल पड़ा और कुबेर की नगरी को तहस-नहस करने के बाद अपने भाई कुबेर पर गदा का प्रहार कर उसे भी घायल कर दिया लेकिन कुबेर के सेनापतियों ने किसी तरह से कुबेर को नंदनवन पहुँचा दिया। दशानन ने कुबेर की नगरी व उसके पुष्पक विमान पर भी अपना अधिकार कर लिया था, सो एक दिन पुष्पक विमान में सवार होकर शारवन की तरफ चल पड़ा लेकिन एक पर्वत के पास से गुजरते हुए उसके पुष्पक विमान की गति स्वयं ही धीमी हो गई। पुष्पक विमान की ये विशेषता थी कि वह चालक की इच्छानुसार चलता था तथा उसकी गति मन की गति से भी तेज थी, इसलिए जब पुष्पक विमान की गति मंद हो गई तो दशानन को बडा आश्चर्य हुआ। तभी उसकी दृष्टि सामने खडे विशाल और काले शरीर वाले नंदीश्वर पर पडी। नंदीश्वर ने दशानन को चेताया कि-
यहाँ भगवान शंकर क्रीड़ा में मग्न हैं इसलिए तुम लौट जाओ, लेकिन दशानन कुबेर पर विजय पाकर इतना दंभी हो गया था कि वह किसी कि सुनने तक को तैयार नहीं था। उसे उसने कहा कि- कौन है ये शंकर और किस अधिकार से वह यहाँ क्रीड़ा करता है? मैं उस पर्वत का नामो-निशान ही मिटा दूँगा, जिसने मेरे विमान की गति अवरूद्ध की है। इतना कहते हुए उसने पर्वत की नींव पर हाथ लगाकर उसे उठाना चाहा. अचानक इस विघ्न से शंकर भगवान विचलित हुए और वहीं बैठे-बैठे अपने पाँव के अंगूठे से उस पर्वत को दबा दिया ताकि वह स्थिर हो जाए. लेकिन भगवान शंकर के ऐसा करने से दशानन की बाँहें उस पर्वत के नीचे दब गई। फलस्वरूप क्रोध और जबरदस्त पीडा के कारण दशानन ने भीषण चीत्कार कर उठा, जिससे ऐसा लगने लगा कि मानो प्रलय हो जाएगा। तब दशानन के मंत्रियों ने उसे शिव स्तुति करने की सलाह दी ताकि उसका हाथ उस पर्वत से मुक्त हो सके। दशानन ने बिना देरी किए हुए सामवेद में उल्लेखित शिव के सभी स्तोत्रों का गान करना शुरू कर दिया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने दशानन को क्षमा करते हुए उसकी बाँहों को मुक्त किया।
शिवतांडव स्तोत्र से मिलती है सिद्धि
राशिफल 01 अक्टूबर 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
- मेष– धन का वृथा व्यय, मानसिक अशांति, कष्ट मन विक्षुब्ध रहे, विलंब से रुके कार्य हो।
- वृष– चिन्ताग्रस्त होनें से बचें, व्यवसायिक क्षमता अवश्य ही अनुकूल बनेगी।
- मिथुन– तनाव क्लेश, अशांति असमर्थता का वातावरण कष्टप्रद होगा, ध्यान दें।
- कर्क– किसी प्रलोभन से बचें अन्यथा परेशानी में फंस सकते हैं, समय का ध्यान अवश्य दें।
- सिंह– तनाव क्लेश, अशांति, असमर्थता का वातावरण कष्ट प्रद होगा, विचार कर चलें।
- कन्या– विवाद ग्रस्त होंने की संभावना हैं, सोचे हुए कार्य अवश्य ही पूर्ण होगें।
- तुला– कुटुम्ब की समस्याएं सुलझेंगी, कार्यगति में सुधार होगा, ध्यान अवश्य दे।
- वृश्चिक– कार्य कुशलता से संतोष, दैनिक समृद्धि के साधन अवश्य ही बनेंगे।
- धनु– अधिकारियों से संतोष, दैनिक समृद्धि के साधन व्यय करने पर बनेंगे।
- मकर– मान प्रतिष्ठा में आंच आने का समय व भय होगा, तथा रुके कार्य बन जायेगे।
- कुंभ– किसी घटना का शिकार होने से बचें, चोट कष्ट आदि का भय अवश्य ही होगा।
- मीन– स्त्री वर्ग से सुख हर्ष मिलेगा, बिगड़े कार्य बनेंगे, समय का लाभ होगा, ध्यान रखें।
स्वावलंबन की नई सुबह: 100 रुपए की बचत से शुरू हुआ सफर, आटा-दाल चक्की ने शशिकला को बनाया आत्मनिर्भर
रायपुर : "मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है; पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।" आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की यह कहावत छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में पूरी तरह चरितार्थ हो रही है। जीवन में बड़ा बदलाव लाने के लिए हमेशा किसी बड़ी पूंजी की आवश्यकता नहीं होती, बल्कि दृढ़ संकल्प, अनवरत मेहनत और सही मार्गदर्शन से छोटी-सी शुरुआत भी सफलता की एक नई इबारत लिख सकती है। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के बरमकेला विकासखंड अंतर्गत ग्राम बिलाईगढ़ की निवासी श्रीमती शशिकला साहू की कहानी आज प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए प्रेरणा की एक नई किरण बनकर उभरी है। कभी साधारण आर्थिक परिस्थितियों के बीच परिवार की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित रहने वाली शशिकला, आज स्वयं की आटा और दाल चक्की की एक सफल उद्यमी के रूप में स्थापित हो चुकी हैं। 'सेवा संकल्प अभियान' के दौरान सामने आई उनकी यह प्रेरक यात्रा राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और महिला श्रमशक्ति के अनूठे मेल की सुंदर मिसाल पेश करती है।
पति श्री रूपनारायण साहू के साथ पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए शशिकला के मन में लंबे समय से स्वयं की आय का एक स्थायी साधन खड़ा करने की तीव्र इच्छा थी। उनकी इस सोच को धरातल पर उतारने का अवसर तब मिला, जब उन्होंने 11 सितंबर 2018 को गांव के 'दुर्गा स्वयं सहायता समूह' से जुड़कर स्वावलंबन की दिशा में अपना पहला कदम बढ़ाया। इस सफर की शुरुआत बेहद सामान्य थी, जहाँ उन्होंने समूह में हर महीने महज 100 रुपये की छोटी बचत से शुरुआत की। अनुशासन और नियमितता के बल पर जमा की गई यही छोटी-सी राशि आगे चलकर उनके स्वरोजगार की मजबूत बुनियाद बनी।
छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन 'बिहान' से जुड़ने के बाद शशिकला को वित्तीय प्रबंधन के साथ-साथ आजीविका के नए रास्ते तलाशने का दिशा-निर्देश मिला। समूह में उनके अनुशासित योगदान को देखते हुए छह महीने के भीतर बैंक द्वारा समूह को 1 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया। इस आर्थिक संबल ने शशिकला के सपनों को नई उड़ान दी और उन्होंने इस राशि से गांव में ही अपनी पहली आटा चक्की स्थापित की। इससे न केवल ग्रामीणों को अपने ही गांव में गेहूं पिसाने की सुविधा मिलने लगी, बल्कि शशिकला को भी अपने घर-परिवार के पास रहकर ही 150 से 200 रुपये की दैनिक आय होने लगी। इस प्रारंभिक सफलता से मिले आत्मविश्वास ने उनके हौसले को और बढ़ा दिया।
व्यवसाय की बढ़ती मांग को देखते हुए शशिकला ने अपने काम का विस्तार करने का फैसला किया और बैंक से दूसरी बार ऋण लेकर दाल और गेहूं पिसाई के लिए अलग-अलग आधुनिक मशीनें लगाईं। इस विस्तार से उनकी सेवाओं का दायरा बढ़ा और आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। आज वे इस प्रसंस्करण इकाई के जरिए प्रतिदिन 200 से 300 रुपये तक कमा रही हैं, जिससे उनकी मासिक आय लगभग 9 हजार रुपये तक पहुँच गई है। जो सफर महज 100 रुपये की मासिक बचत से शुरू हुआ था, वह आज एक समृद्ध स्वरोजगार का रूप ले चुका है।
अपनी इस उपलब्धि पर खुशी जाहिर करते हुए श्रीमती शशिकला साहू भावुक होकर कहती हैं कि बिहान योजना ने उनके जीवन को एक नई दिशा और पहचान दी है। इससे उन्हें आर्थिक संबल तो मिला ही है, साथ ही समाज में सिर उठाकर जीने का आत्मविश्वास भी हासिल हुआ है। आज वे अपने परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में बराबरी की भागीदार हैं और इसके लिए वे बिहान योजना तथा छत्तीसगढ़ सरकार का हृदय से आभार व्यक्त करती हैं। सारंगढ़-बिलाईगढ़ के दूरस्थ अंचल से उभरी शशिकला साहू की यह कहानी यह सिद्ध करती है कि जब योजना से मिला अवसर मेहनत और संकल्प से जुड़ता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव आता है। आज शशिकला न केवल खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि पूरे गांव की महिलाओं के लिए स्वावलंबन का एक चमकता हुआ प्रतीक बन चुकी हैं।
सेवा की कहानी : हुनर को मिला संबल, पीएम विश्वकर्मा योजना से बढ़ी नरेश की आजीविका
रायपुर : मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी जिले के विकासखंड मानपुर के ग्राम सरोली निवासी नरेश कुमार चक्रधारी पारंपरिक रूप से मिट्टी के बर्तन, मूर्तियां एवं त्योहारों के अवसर पर मिट्टी के दीये बनाने का कार्य करते हैं। उनके पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने और आजीविका को मजबूत करने में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना उनके लिए उपयोगी साबित हुई है।
योजना के अंतर्गत नरेश कुमार ने रसमड़ा सेंटर से प्रशिक्षण प्राप्त किया, जिससे उन्हें अपने पारंपरिक कार्य को बेहतर तरीके से करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन मिला। प्रशिक्षण के बाद शासन द्वारा उन्हें योजना के अंतर्गत विद्युत चाक प्रदान किया गया। विद्युत चाक मिलने से मिट्टी के बर्तन, मूर्तियां एवं दीये बनाने के कार्य में गति आई है तथा कम समय में अधिक कार्य कर पाना संभव हुआ है। नरेश कुमार बताते हैं कि विद्युत चाक मिलने के बाद उनके काम में सुविधा और तेजी आई है, जिससे वे अधिक मात्रा में मिट्टी के बर्तन एवं अन्य सामग्री तैयार कर पा रहे हैं। शासन की योजना का लाभ मिलने से उनकी आजीविका को नया सहारा मिला है और आर्थिक स्थिति में भी सुधार आया है।
पीएम विश्वकर्मा योजना के माध्यम से नरेश कुमार को मिला प्रशिक्षण और विद्युत चाक सेवा, सुशासन एवं जनकल्याण की भावना का सार्थक उदाहरण है। यह पहल उनके पारंपरिक कौशल को मजबूत करने के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रही है।
नरेश कुमार ने अपने पारंपरिक हुनर को आगे बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण एवं विद्युत चाक का लाभ मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि शासन की इस पहल से उनके काम में सुविधा और तेजी आई है तथा अपने हुनर को आगे बढ़ाने का नया अवसर मिला है।
मध्यप्रदेश में सीएसआर का नया रोडमैप, जरूरत के मुताबिक होगा निवेश, परिणाम पर रहेगी नजर : मंत्री भूरिया
भोपाल : मध्यप्रदेश में कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) को सरकारी विकास प्राथमिकताओं से जोड़कर शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक विकास के क्षेत्रों में अधिक प्रभावी परिणाम हासिल करने की दिशा में सरकार ने कॉरपोरेट जगत के साथ साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया है। सीएसआर कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने कहा कि सीएसआर केवल गतिविधियां पूरी करने या निर्धारित लक्ष्य हासिल करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य समुदायों को मजबूत करना और लोगों के जीवन में स्थायी बदलाव लाना होना चाहिए।
मंत्री भूरिया ने कहा कि मध्यप्रदेश जैसे विविधताओं वाले राज्य में सीएसआर निवेश के लिए एक जैसी कार्ययोजना के बजाय स्थानीय जरूरतों और परिस्थितियों के अनुरूप मॉडल विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं और कॉरपोरेट संस्थानों की विशेषज्ञता एवं संसाधनों के बीच बेहतर तालमेल से ऐसे परिणाम हासिल किए जा सकते हैं, जिन्हें लंबे समय तक कायम रखा जा सके। उन्होंने सीएसआर साझेदारियों में स्पष्ट प्राथमिकताओं, जरूरतों की पहचान, प्रभावी मॉनिटरिंग और परिणामों के मापन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सीएसआर पोर्टल के साथ मध्यप्रदेश का पंखुड़ी पोर्टल भी सरकार की विकास आवश्यकताओं और संभावित सीएसआर साझेदारों के बीच सेतु का काम कर सकता है। इन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों की जरूरतों, निवेश की संभावनाओं और उपलब्ध अवसरों की जानकारी साझा कर सरकार, कॉरपोरेट, विकास एजेंसियों और अन्य संस्थाओं के बीच अधिक व्यवस्थित साझेदारी विकसित की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि मजबूत सरकारी-सीएसआर सहयोग से विकास के प्रयासों को अतिरिक्त गति देने के साथ उनकी पहुंच और प्रभाव को भी बढ़ाया जा सकता है।
मध्यप्रदेश में 1195 करोड़ से अधिक का सीएसआर निवेश, प्राथमिकताओं से जोड़ने पर जोर
मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम (MPIDC) के प्रबंध संचालक श्री चंद्रमौली शुक्ला ने सीएसआर के कानूनी और संस्थागत ढांचे की जानकारी देते हुए कहा कि कंपनी अधिनियम, 2013 के बाद पात्र कंपनियों के लिए सीएसआर एक संस्थागत व्यवस्था के रूप में सामने आया है। निर्धारित पात्रता पूरी करने वाली कंपनियों को पिछले तीन वित्तीय वर्षों के औसत शुद्ध लाभ का कम से कम दो प्रतिशत सीएसआर गतिविधियों पर व्यय करना होता है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 1,195.34 करोड़ रुपये सीएसआर पर खर्च किए गए। हालांकि, इस निवेश में जेंडर इक्विटी और महिला सशक्तिकरण से जुड़े क्षेत्रों की हिस्सेदारी करीब दो प्रतिशत ही है। उन्होंने इसे भविष्य में अधिक सक्रिय सीएसआर भागीदारी की संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में रेखांकित किया।
श्री शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में सीएसआर को अधिक प्रभावी बनाने के लिए राज्य और जिला स्तर पर जरूरतों की बेहतर मैपिंग, सरकार की प्राथमिकताओं के साथ सीएसआर कंपनियों की रुचि का मिलान और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय को मजबूत करना होगा। उन्होंने सीएसआर पोर्टल को और सुदृढ़ करने, सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों और अन्य साझेदारों के बीच सहयोग बढ़ाने तथा ऐसी परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई, जिनके परिणाम स्पष्ट रूप से मापे जा सकें और जिन्हें लंबे समय तक संचालित किया जा सके।
उन्होंने मध्यप्रदेश सीएसआर फैसिलिटेशन गाइडलाइनस 2017 का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य में सरकार की भूमिका सुविधा प्रदाता और समन्वयक की है। सीएसआर के प्रभाव को बढ़ाने के लिए सरकारी तंत्र, कंपनियों, विकास संस्थाओं, सिविल सोसायटी और अन्य हितधारकों के बीच साझेदारी को अधिक संरचित स्वरूप देना समय की आवश्यकता है।
61 लाख से अधिक बच्चों के पोषण में सीएसआर की भागीदारी का बड़ा अवसर
महिला एवं बाल विकास आयुक्त श्री संदीप जी. आर. ने सीएसआर को बाल पोषण और शुरुआती बाल विकास से जोड़ते हुए कहा कि बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्ष उसके संपूर्ण विकास की बुनियाद तय करते हैं। विशेष रूप से जीवन के पहले छह वर्ष और शुरुआती 1000 दिन पोषण, वृद्धि और विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इस अवधि में समय पर किए गए हस्तक्षेपों का प्रभाव आगे के जीवन पर पड़ता है। उन्होंने बाल विकास के लिए निरंतर देखभाल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इसके लिए सरकार के साथ समाज और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है।
आयुक्त ने बताया कि मध्यप्रदेश में लगभग 97,882 आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से 61 लाख से अधिक संवेदनशील एवं जरूरतमंद बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सीएसआर के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं को बेहतर बनाने तथा स्थानीय जरूरतों के अनुरूप नवाचारों को बढ़ावा देने की पर्याप्त संभावनाएं हैं।
श्री संदीप ने स्थानीय संसाधनों पर आधारित पोषण समाधानों का उदाहरण देते हुए ‘रंगीन रोटी’ जैसी पहल का उल्लेख किया। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पौष्टिक सामग्री, जैसे सहजन की पत्तियों या मिलेट्स को रोजमर्रा के भोजन में शामिल कर ऐसे पोषण मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जो स्थानीय खान-पान की आदतों के अनुरूप होने के साथ व्यवहारिक भी हों। उन्होंने कहा कि इस तरह के स्थानीय और नवाचारी समाधान समुदायों की भागीदारी बढ़ाने के साथ पोषण परिणामों को भी बेहतर कर सकते हैं। उन्होंने सीएसआर की संभावनाओं को रेखांकित करते हुए बताया कि मध्यप्रदेश देश की आबादी में लगभग छह प्रतिशत हिस्सेदारी रखता है, लेकिन राष्ट्रीय सीएसआर व्यय में राज्य की हिस्सेदारी करीब 1.44 प्रतिशत है। ऐसे में राज्य में सीएसआर निवेश बढ़ाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने श्योपुर में ब्रिटानिया फाउंडेशन और विदिशा में अमेरिकन इंडिया फाउंडेशन (AIF) जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसी साझेदारियां सरकारी प्रयासों को पूरक समर्थन प्रदान कर सकती हैं।
जरूरत और निवेश के बीच बनेगा सीधा संबंध
कॉन्क्लेव में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सीएसआर को केवल गतिविधि आधारित व्यय के बजाय स्पष्ट और मापनीय परिणामों से जोड़ा जाए। राज्य और जिलों की वास्तविक जरूरतों की पहचान कर उन्हें सीएसआर संस्थाओं की रुचि, क्षमता और विशेषज्ञता से जोड़ने, परियोजनाओं की निगरानी करने तथा सफल मॉडलों को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति बनी।
सत्र में सरकारी विभागों, कॉरपोरेट संस्थानों, विकास एजेंसियों, गैर-सरकारी संगठनों और अन्य हितधारकों के बीच समन्वित साझेदारी को आवश्यक बताया गया। साथ ही इस बात पर बल दिया गया कि सीएसआर परियोजनाएं स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप हों, उनके परिणाम मापे जा सकें और सफल पहल को मौजूदा सरकारी व्यवस्थाओं के साथ जोड़कर दीर्घकालिक रूप से विस्तार दिया जा सके।
मुख्य सचिव बर्णवाल से मिलीं बाल अधिकार आयोग की अध्यक्ष डॉ. शर्मा
भोपाल : मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा ने बुधवार को भेंट कर प्रदेश में बाल संरक्षण से जुड़े विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। मुलाकात के दौरान बच्चों के अधिकारों के संरक्षण, उनकी शिकायतों के त्वरित निराकरण और विद्यालयों में बच्चों के लिए बेहतर एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ।
डॉ. शर्मा ने मुख्य सचिव के समक्ष विद्यालयों में शौचालयों की स्थिति, माहवारी स्वच्छता प्रबंधन, बालिका गरिमा सूचकांक, स्पॉन्सरशिप तथा बाल संरक्षण से संबंधित विषयों को प्रमुखता से रखा। उन्होंने बताया कि बच्चों, विशेषकर बालिकाओं की गरिमा, सुरक्षा और आवश्यक सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए विभागीय स्तर पर प्रभावी समन्वय जरूरी है।
बैठक में आयोग द्वारा प्रदेश स्तर पर बच्चों की शिकायतों के निराकरण के लिए शिविर आयोजित करने के संबंध में भी चर्चा हुई। ऐसे शिविरों के माध्यम से बच्चों और उनके अभिभावकों की समस्याओं को स्थानीय स्तर पर सुनकर उनके त्वरित समाधान की दिशा में कार्रवाई किए जाने पर विचार किया गया।
आयोग की अध्यक्ष ने बाल संरक्षण से जुड़े विषयों पर शासन और आयोग के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर भी चर्चा की। बैठक में बच्चों के अधिकारों की रक्षा तथा उनके लिए सुरक्षित, सम्मानजनक और अनुकूल वातावरण विकसित करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाने पर जोर दिया गया।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की पहल पर भरदा में जलभराव की समस्या का त्वरित समाधान
रायपुर : दुर्ग जिले के ग्राम भरदा में विगत 26 सितंबर को अतिवृष्टि और जलभराव से उत्पन्न गंभीर स्थिति का जायजा लेने पहुंचे कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव की त्वरित पहल से ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है। राहत शिविर में प्रभावित परिवारों से भेंट के दौरान ग्रामीणों और किसानों द्वारा की गई मांग पर संज्ञान लेते हुए, जिला प्रशासन ने 12.87 लाख रूपए की लागत से पक्की निकासी नाली निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है।
आवंटन कुल 12.87 लाख रूपए के इस निर्माण कार्य में 2.56 लाख रूपए मजदूरी मद के लिए और 10.31 लाख रूपए सामग्री मद के लिए आवंटित किए गए हैं। यह कार्य वीबी-जी रामजी (विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन की गारंटी) योजना के तहत कराया जाएगा। यह निकासी नाली पुरुषोत्तम निषाद के घर से केशव ठाकुर के घर तक बनाई जाएगी, जिससे बारिश के दौरान मार्ग पर होने वाले जलजमाव से स्थायी रूप से मुक्ति मिलेगी।
स्थानीय स्तर पर रोजगार और सुविधाएं
जिला पंचायत दुर्ग के सीईओ ने जानकारी दी कि इस योजना के तहत विकास कार्यों को स्थानीय मूलभूत आवश्यकताओं से जोड़ा जा रहा है। इसके तहत मांग करने वाले पात्र ग्रामीणों को 15 दिवस के भीतर 300 रूपए प्रतिदिन की निर्धारित मजदूरी दर पर रोजगार भी उपलब्ध कराया जाएगा। नाली निर्माण की त्वरित स्वीकृति और फसल क्षति के तत्काल सर्वेक्षण के निर्देशों पर ग्रामवासियों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, कलेक्टर और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।
सेवा की कहानी : सक्षम योजना से हिमांशी वर्मा को मिली नई पहचान, पार्लर एवं बुटीक व्यवसाय से बनीं आत्मनिर्भर
रायपुर : आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली दुर्ग जिले के ग्राम नवागांव (पुरदा) निवासी हिमांशी वर्मा ने अपनी मेहनत, लगन और शासन की सक्षम योजना से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है। कभी आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण अपना व्यवसाय शुरू करने में कठिनाइयों का सामना करने वाली हिमांशी आज पार्लर एवं बुटीक का संचालन कर अपने सपनों को साकार करने में जुटी हैं।
हिमांशी के मन में हमेशा से स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनने की इच्छा थी, लेकिन सीमित आर्थिक संसाधन उनके रास्ते में बाधा बन रहे थे। इसी दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ममता शर्मा के माध्यम से उन्हें सक्षम योजना की जानकारी मिली। उन्होंने योजना के अंतर्गत आवेदन किया, जिसके बाद उन्हें 80 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। योजना से मिली इस सहायता का उपयोग हिमांशी ने अपने पार्लर एवं बुटीक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में किया। लगभग एक वर्ष पहले शुरू किया गया उनका यह व्यवसाय अब धीरे-धीरे अपनी पहचान बना रहा है।
वर्तमान में उनके पास प्रतिदिन लगभग 5 से 7 ग्राहक आते हैं। इससे उन्हें प्रतिदिन करीब 250 से 300 रुपये तक की आय हो रही है।
हिमांशी अपने व्यवसाय का संचालन स्वयं कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने में भी योगदान दे रही हैं। उनके लिए सक्षम योजना से मिली सहायता केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी बनी है। हिमांशी वर्मा कहती हैं कि सक्षम योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर दिया है। आज उनका अपना व्यवसाय है और वे अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रही हैं। सक्षम योजना स्वरोजगार का अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही आत्मविश्वास और नई उम्मीद का माध्यम बनी है।
पुलिस मुख्यालय परिवार द्वारा 2 सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दी गई भावभीनी विदाई
भोपाल : पुलिस मुख्यालय की दो शाखाओं से माह सितंबर में सेवानिवृत्त 2 कर्मचारियों को पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने बुधवार को भावभीनी विदाई दी। पुलिस महानिदेशक ने दोनों सेवानिवृत कर्मचारियों को पौधे एवं स्मृति चिन्ह भेंट किए और उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। सेवानिवृत्त कर्मचारियों को उनके विभिन्न स्वत्व (क्लेम) भुगतान के आदेश भी प्रदान किए गये।
नवीन पुलिस मुख्यालय भवन कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित विदाई समारोह में विशेष पुलिस महानिदेशक अनिल कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक सोलोमन यश कुमार मिंज सहित अन्य पुलिस अधिकारी, कर्मचारी एवं सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिजन उपस्थित थे।
पुलिस मुख्यालय से सेवानिवृत्त सूबेदार (एम) कल्याण शाखा श्रीमती पल्लवी काटे तथा कार्यवाहक प्रधान आरक्षक महिला सुरक्षा शाखा श्रीमती रंजना श्रीवास्तव को पुलिस मुख्यालय परिवार ने बुधवार को भावभीनी विदाई दी।
सहायक पुलिस महानिरीक्षक श्रीमती अंशुमान अग्रवाल ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों के कार्यकाल की जानकारी दी। विदाई समारोह में मौजूद अधिकारियों ने सेवानिवृत कर्मचारियों की मेहनत और लगन की सराहना की।
मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधों के विरुद्ध बड़ी सफलता
भोपाल : मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध लगातार कार्यवाही की जा रही है। इसी क्रम में मंदसौर पुलिस ने साइबर ठगी के एक संगठित अंतरराज्यीय नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए मुख्य सरगना सहित 6 आरोपियों को गिरफ्तार करने में महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त की है। तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की गई इस कार्रवाई में सामने आया कि गिरोह देश के अलग-अलग हिस्सों से मेट्रिमोनियल साइट्स के माध्यम से लोगों को विश्वास में लेकर ठगी करता था। प्रारंभिक जांच में गिरोह द्वारा 11 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी और 150 से अधिक साइबर घटनाओं को अंजाम दिए जाने की जानकारी सामने आई है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 22 एंड्रॉयड मोबाइल फोन, 30 मोबाइल सिम एवं 5 एटीएम कार्ड जब्त किए हैं। विभिन्न बैंक खातों में जमा 8 लाख रुपये से अधिक की राशि को फ्रीज कराया है।
जिले के शामगढ़ निवासी पीड़िता मेट्रिमोनियल वेबसाइट पर अपना प्रोफाइल अपडेट करने के बाद साइबर ठगों के संपर्क में आई थी। आरोपी ने स्वयं को NRI बताकर पीड़िता से शादी करने का विश्वास दिलाया। नकली फोटो और कथित परिजनों के माध्यम से व्हाट्सएप पर बातचीत कर पीड़िता का विश्वास हासिल किया गया। इसके बाद विदेश से गिफ्ट भेजने, गिफ्ट कस्टम में पकड़े जाने तथा कस्टम ड्यूटी एवं प्रोसेसिंग फीस के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में राशि जमा कराई गई। इस तरह पीड़िता से 7 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई। शिकायत मिलने पर थाना शामगढ़ में प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की गई।
पुलिस अधीक्षक मंदसौर विनोद कुमार मीना के निर्देशन में प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम गठित की गई। टीम ने लगभग दो माह तक तकनीकी साक्ष्यों का गहन विश्लेषण किया और साइबर ठगी से जुड़े डिजिटल एवं बैंकिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ा।
लगातार किए गए तकनीकी विश्लेषण से आरोपियों की जानकारी प्राप्त होने के बाद पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से राजस्थान के जयपुर में दबिश देकर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पूछताछ एवं विवेचना में सामने आए तथ्यों के आधार पर गिरोह के एक अन्य सदस्य एवं मुख्य सरगना को बिहार के अरवल जिले से गिरफ्तार किया गया।
150 से अधिक म्यूल बैंक खाते और सिम के जरिए चल रहा था नेटवर्क
जांच में सामने आया कि साइबर ठगी का यह नेटवर्क अलग-अलग स्तर पर काम कर रहा था। गिरोह द्वारा 150 से अधिक म्यूल बैंक अकाउंट एवं म्यूल मोबाइल सिम का उपयोग किया गया। अधिकांश मोबाइल सिम आगरा, फिरोजाबाद, दिल्ली एवं बिहार से प्राप्त की गई थीं, जबकि कुछ सिम एवं बैंक खाते भोपाल से भी प्राप्त कर उपयोग किए गए।
गिरोह के सदस्य अलग-अलग राज्यों में ठगी की रकम निकालते थे। निश्चित समय अंतराल के बाद वह अपने स्थान बदल लेते थे। बैंक खाते फ्रीज होने पर संबंधित मोबाइल फोन, सिम, पासबुक एवं एटीएम आदि नष्ट कर दिए जाते थे और अगली ठगी के लिए नए मोबाइल, सिम एवं बैंक खातों का उपयोग किया जाता था।
गिरोह का एक मुख्य व्यक्ति विभिन्न बैंक खातों में जमा राशि की जानकारी रखता था और सदस्यों को राशि निकालने तथा निर्धारित खातों में जमा करने के निर्देश देता था।
मध्यप्रदेश पुलिस आमजन से अपील करती है कि अनजान व्यक्तियों द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। मेट्रिमोनियल साइट, ऑनलाइन ट्रेडिंग, निवेश, गिफ्ट अथवा किसी अन्य आकर्षक प्रस्ताव के माध्यम से किए जा रहे संपर्क में सावधानी बरतें। किसी भी व्यक्ति के साथ ओटीपी, पिन, पासवर्ड एवं अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें। साइबर फ्रॉड होने पर तत्काल साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर सूचना दें अथवा cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।















