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अश्विन बोले- धोनी को इम्पैक्ट प्लेयर के रूप में नहीं देखना चाहता

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भारतीय टीम के पूर्व गेंदबाज रविचंद्रन अश्विन का मानना है कि आईपीएल 2026 में महेंद्र सिंह धोनी को इम्पैक्ट प्लेयर के तौर पर नहीं खेलना चाहिए। अश्विन का कहना है कि अगर धोनी बतौर इम्पैक्ट खिलाड़ी खेलते हैं, तो उन्हें पूरा सीजन नहीं खेलना चाहिए। 

पिछले सीजन खास नहीं रहा था प्रदर्शन

मालूम हो कि पिछले दो सीजन से धोनी बल्लेबाजी क्रम में काफी नीचे बल्लेबाजी करने आ रहे हैं। आईपीएल 2025 में उनका प्रदर्शन भी कुछ खास नहीं रहा था। 14 मुकाबलों में धोनी 135 के स्ट्राइक रेट से खेलते हुए सिर्फ 196 रन ही बना सके थे। पूरे सीजन में धोनी एक अर्धशतक तक नहीं लगा सके थे। धोनी के इस फैसले की आलोचना भी हुई थी। नियमित कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ के बाहर होने के बाद धोनी पिछले सीजन कप्तानी करते हुए भी नजर आए थे।

अश्विन बोले- हर हाल में प्लेइंग इलेवन में धोनी को होना चाहिए

अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि धोनी को इम्पैक्ट खिलाड़ियों की लिस्ट में होना चाहिए। अगर वह स्क्वॉड में हैं, तो उन्हें हर हाल में खेलना चाहिए। अगर वह ऐसा नहीं चाहते हैं, तो धोनी को पूरा सीजन नहीं खेलना चाहिए। मैं इस बात के पक्ष में नहीं हूं कि धोनी इम्पैक्ट खिलाड़ी के तौर पर खेलें। धोनी को प्लेइंग इलेवन में होना चाहिए। अगर वह नहीं खेलना चाहेंगे, तो वह रिटायर हो जाएंगे। उन्हें खुद पर 100 प्रतिशत भरोसा है कि वह अभी खेल सकते हैं। वह पिछले तीन महीने से अभ्यास कर रहे हैं। वह यह मैसेज दे रहे हैं कि मैं खेलना चाहता हूं। आप कुछ भी सोचिए अगर वह खेलना चाहते हैं, तो कोई भी उनसे जाकर यह नहीं कह सकता है कि आप नहीं खेलेंगे।चेन्नई सुपर किंग्स का प्रदर्शन आईपीएल 2025 में निराशाजनक रहा था। टीम ने टूर्नामेंट का अंत सबसे निचले पायदान पर रहते हुए किया था। चेन्नई 14 में से सिर्फ चार ही मैच जीत सकी थी, जबकि 10 मुकाबलों में टीम को हार झेलनी पड़ी थी। हालांकि, इस सीजन चेन्नई ने युवा खिलाड़ियों पर दांव लगाया है और टीम इस बार बेहतर प्रदर्शन करना चाहेगी।

हाई कोर्ट में प्लास्टिक की गुड़िया बनी गवाह

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रायपुर|छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने मुक बधिर से रेप के आरोपी को उम्रकैद की सजा सुनाई है. इस संवेदनशील मामले में मूक-बधिर दुष्कर्म पीड़िता ने ट्रायल कोर्ट में प्लास्टिक की गुड़िया और इशारों के माध्यम से अपनी आपबीती बताई. पीड़िता न तो बोल सकती थी और न ही सुन सकती थी, इसके बावजूद अदालत ने उसकी गवाही को गंभीरता से लिया|

प्लास्टिक की गुड़िया बनी गवाह, मूक-बधिर पीड़िता ने बताई आपबीती

वहीं इस सुनवाई के दौरान ट्रायल कोर्ट ने दुभाषिए की मदद ली और पीड़िता की गवाही को समझने के लिए प्लास्टिक की गुड़िया का सहारा लिया. पीड़िता ने एक-एक कर घटना का विवरण दिया. गवाही, दुभाषिए की पुष्टि और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 450 और 376 के तहत दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई|

हाई कोर्ट ने बरकरार रखी सजा

आरोपी ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी और पीड़िता की गवाही की वैधता पर सवाल उठाए. इस पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई. डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए सजा को बरकरार रखा और स्पष्ट किया कि मूक-बधिर गवाह की गवाही भी वैध होती है|

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा मामला साल 2020 का है. जहां बालोद जिले के अर्जुंदा थाना क्षेत्र में एक जन्म से मूक-बधिर युवती से जुड़ा है, जिसके साथ उसके ही रिश्तेदार ने उस समय दुष्कर्म किया, जब वह घर में अकेली थी. आरोपी ने उसकी असहायता का फायदा उठाया. घटना के बाद जब परिजन घर लौटे, तो पीड़िता ने इशारों में पूरी घटना बताई और आरोपी की पहचान की. इसके बाद मां की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया|

1 अप्रैल से बढ़ जाएंगे एलपीजी सिलेंडर के दाम या आम आदमी को मिलेगी राहत? जानें

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भोपाल|मिडिल ईस्ट जंग की वजह से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर को लेकर हर जगह पर मारा मारी देखने को मिल रही है. हाल ही में जंग शुरू होने के बाद ही सरकार ने भी एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ा दी थी. जिसमें कमर्शियल सिलेंडर में करीब 150 और घरेलू गैस सिलेंडर में 60 रुपए की बढ़ोत्तरी की है. गैस संकट के बीच एक बार फिर सबके मन में एक सवाल पैदा हो रहा है कि क्या 1 अप्रैल से एलपीजी के दाम बढ़ जाएंगे?

हर साल 1 अप्रैल से कई नियम बदल जाते हैं. एलपीजी के दाम भी अपडेट होंगे. यानी एलपीजी की कीमत में उतार-चढ़ाव होगा. हालांकि, सरकार ने अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है कि एलपीजी के दाम बढ़ेंगे या नहीं. लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए रेट में कटौती की उम्मीद काफी कम है. क्योंकि मिडिल ईस्ट की वजह से तेल और गैस की कीमतें आसमान छू रही हैं. कई देशों में ईंधन की कीमतों में बढ़ोत्तरी की गई है|

कैसे तय होती है एलपीजी की कीमत

एलपीजी की कीमत कई फैक्टरों के आधार पर तय होती है. जैसे वैश्विक बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति, कच्चे तेल की कीमत, डॉलर का उतार-चढ़ाव, सब्सिडी, टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन और डिस्ट्रीब्यूशन लागत भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं. अगर इनमें से किसी पर भी उतार-चढ़ाव बना रहे तो एलपीजी की कीमतें घट-बढ़ सकती हैं|

1 अप्रैल को क्या हो सकती है कीमत?

इन दिनों मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति बनी हुई है. जंग की वजह से ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, जहां से तेल और गैस निकलता था. उस रास्ते को ही बंद कर दिया है. जिसका असर दुनियाभर के देशों में देखने को मिल रहा है. तेल-गैस की कीमतें भी काफी तेजी से बढ़ी हैं. एलपीजी में भी 11 से 13 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. ऐसे में अगर कुछ और दिनों तक जंग जारी रही, तो एलपीजी की कीमतें बढ़ सकती हैं. यानी कहा जा सकता है कि 1 अप्रैल को एलपीजी गैस की कीमत बढ़ाने के लिए भले ही तेल कंपनियों ने कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की हो, लेकिन जिस प्रकार से दुनियाभर में कीमतें बढ़ रही हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत में भी कीमतों पर इजाफा हो सकता है|

पेट्रोल-डीजल एक्साइज ड्यूटी में कटौती से मिली राहत

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रायपुर|मिडिल ईस्ट में चल रहे तनाव के बीच केंद्र सरकार ने डीजल को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त करने और पेट्रोल पर 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती करते हुए एक्साइज ड्यूटी को मात्र 3 रुपए प्रति लीटर करने का फैसला लिया है. CM विष्णु देव साय ने इस फैसले का स्वागत करते हुए प्रदेश की जनता की ओर से PM नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है|

CM साय ने जताया PM मोदी का आभार

CM विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया में किए अपने पोस्ट में कहा डीजल को एक्साइज ड्यूटी से मुक्त कर देना और पेट्रोल पर भी 10 रुपये की कटौती कर एक्‍साइज ड्यूटी को मात्र 3 रुपये प्रति लीटर कर देने का केंद्र सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है. यह देश के 140 करोड़ नागरिकों को सीधे राहत पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण कदम है|

इस निर्णय से देश के प्रत्येक परिवार, किसान, श्रमिक एवं मध्यमवर्ग को व्यापक राहत मिलेगी। इससे इस ग्लोबल संकट के बीच भी उपभोक्ताओं पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा. इस चुनौतीपूर्ण दौर में भी देशवासियों के हित को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया यह निर्णय प्रधानमंत्री जी की संवेदनशीलता, दूरदर्शिता और जनसेवा के प्रति उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है. इस जनहितकारी निर्णय के लिए छत्तीसगढ़ की समस्त जनता की ओर से माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार|

सरकार ने डीजल-पेट्रोल के एक्साइज ड्यूटी में की कटौती

ईरान और इजरायल जंग के बीच वैश्विक बाजार में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी घटाकर आम जनता को बड़ी राहत दी है. इससे तेल कंपनियों और लोगों की जेब का बोझ कम होगा. मिडिल ईस्ट जंग की वजह से कच्चे तेल (पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधन बनाने में में उपयोग होने वाला कच्चा माल) की आधी आपूर्ति काफी बाधित हुई है, लेकिन देश ने अगले 60 दिन के लिए अन्य स्रोतों से पर्याप्त कच्चे तेल की आपूर्ति सुरक्षित कर ली है|

10 रुपए तक हो सकता है सस्ता!

पेट्रोल-डीजल पर यह राहत केंद्र सरकार ने दी है. हालांकि राज्य सरकारों का वैट लागू रहेगा. एक्साइज ड्यूटी कम होने के बाद पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम करीब 10 रुपए तक सस्ता होने की संभावना है. फिलहाल, अभी सरकार ने एक्साइड ड्यूटी हटाई है. अब तेल कंपनियां कीमत कटौती पर फैसला करेंगी|

IPL मालिकों की बेटियां बनीं पावर और ग्लैमर का चेहरा

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आईपीएल सिर्फ क्रिकेट नहीं है, अब यह पैसा, पावर, ब्रांड और ग्लैमर का सबसे बड़ा मंच बन गया है। हालांकि, 18 सीजन बीत जाने के बाद एक बात तो साफ हो गई है कि अब सिर्फ फ्रेंचाइजी मालिक ही नहीं, बल्कि उनकी बेटियां भी पैस-पावर और ग्लैमर की दुनिया में अपनी मजबूत और अलग पहचान बना रही हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं क्योंकि अनन्या बिड़ला इन दिनों सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा ट्रेंड कर रही हैं। उनके परिवार की कंपनी आदित्य बिड़ला ग्रुप ने कंसोर्टियम यानी कुछ अलग कंपनियों के साथ मिलकर रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु फ्रेंचाइजी 16000+ करोड़ रुपये में खरीद ली। इसी के साथ आरसीबी आईपीएल इतिहास की सबसे महंगी टीम बन गई।हालांकि, इसके बाद कुमार मंगलम बिड़ला और आरसीबी के नए चेयरमैन और कुमार मंगलम के बेटे आर्यमान बिड़ला चर्चा में हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा अनन्या बिड़ला की हो रही है। फैंस आरसीबी टीम की इस नई मालकिन की रील्स खूब शेयर कर रहे हैं और पैपराजी भी अनन्या के फोटोज शेयर करने का मौका नहीं छोड़ रहे। फ्रेंचाइजी मालिकों के बेटियों में सिर्फ अनन्या ही नहीं, इस लिस्ट में ईशा अंबानी, काव्या मारन, सुहाना खान और जाह्नवी मेहता भी शामिल हैं। जब भी ये किसी पब्लिक फंक्शन में या किसी गेदरिंग में जाती हैं, सुर्खियों में बन ही जाती हैं।भारत के सबसे शक्तिशाली बिजनेस और एंटरटेनमेंट परिवार से आने वाली बेटियां अब सिर्फ स्टेडियम में स्टैंड्स में नजर आने वाले चेहरे भर नहीं रह गई हैं, इनमें से कुछ बड़ी कंपनियां संभाल रही हैं, कुछ क्रिकेट फ्रेंचाइजी का चेहरा बन चुकी हैं, तो कुछ धीरे-धीरे उन पारिवारिक साम्राज्यों में अपनी जगह बना रही हैं, जो खेल से कहीं आगे तक फैले हुए हैं।निजी संपत्ति की बात करें तो (पूरे परिवार की कुल संपत्ति नहीं), अनन्या बिड़ला इस सूची में सबसे ऊपर नजर आती हैं। उनके बाद ईशा अंबानी और काव्या मारन का स्थान है, जबकि सुहाना खान और जान्हवी मेहता इस सूची में अभी अपनी पैठ बना रही हैं और अभी अपने करियर को आगे बढ़ाने के दौर में हैं। हालांकि, यहां एक अहम बात ध्यान रखने वाली है कि ये सभी आंकड़े मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित अनुमान हैं, न कि आधिकारिक या ऑडिटेड घोषणाएं। खासकर जाह्नवी मेहता के मामले में उनकी व्यक्तिगत संपत्ति का कोई स्पष्ट और विश्वसनीय सार्वजनिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। आइए इन सबके बारे में एक-एक कर जानते हैं…

अनन्या बिड़ला: विरासत नहीं, खुद की बनाई पहचान

अनन्या बिड़ला इस लिस्ट में सबसे ऊपर इसलिए हैं क्योंकि उनकी कहानी सिर्फ पारिवारिक दौलत तक सीमित नहीं है। आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला की बेटी होने के बावजूद उन्होंने खुद का बिजनेस खड़ा किया। सिर्फ 17 साल की उम्र में शुरू की गई उनकी कंपनी स्वतंत्र माइक्रोफिन आज देश की बड़ी माइक्रोफाइनेंस कंपनियों में शामिल हैं। 2025 में इसमें हजारों करोड़ का निवेश भी आया। उनकी व्यक्तिगत नेटवर्थ करीब 1700+ करोड़ रुपये के आसपास मानी जाती है। इसके अलावा, आरसीबी जैसी बड़ी आईपीएल फ्रेंचाइजी से उनका जुड़ाव उन्हें क्रिकेट के पावर सर्कल में और मजबूत बनाता है। इतना ही नहीं, उनका जुड़ाव गुजरात टाइटंस टीम से भी है। बिड़ला स्टेट्स गुजरात टाइटंस टीम का प्रिंसिपल पार्टनर भी है और इसका प्रतिनिधित्व अनन्या ही करती दिखी हैं।

ईशा अंबानी: बिजनेस पावर की असली ताकत

अगर अनन्या बिड़ला आंत्रिप्रेन्योरशिप की मिसाल हैं, तो ईशा अंबानी कॉर्पोरेट पावर का चेहरा हैं। रिलायंस रिटेल, जियो, रिलायंस फाउंडेशन में उनकी अहम भूमिका है। येल और स्टैनफोर्ड जैसी यूनिवर्सिटी से पढ़ाई करने वाली ईशा आईपीएल की सबसे ताकतवर महिलाओं में गिनी जाती हैं। उनकी व्यक्तिगत संपत्ति करीब 800 करोड़ रुपये बताई जाती है, लेकिन असली ताकत उनके पीछे खड़े रिलायंस साम्राज्य की है। मुंबई इंडियंस की सफलता में यह आर्थिक मजबूती साफ झलकती है।

काव्या मारन: आईपीएल की सबसे चर्चित चेहरा

काव्या मारन आईपीएल की सबसे ज्यादा दिखने वाली अरबपति बेटी हैं। ऑक्शन टेबल से लेकर मैच के दौरान उनके रिएक्शन तक, काव्या मारन हर जगह नजर आती हैं। सनराइजर्स हैदराबाद की पहचान में उनका चेहरा अहम बन चुका है। उनकी नेटवर्थ करीब 400 करोड़ रुपये मानी जाती है। बिजनेस के साथ-साथ उनका स्टाइल और लाइफस्टाइल भी अक्सर चर्चा में रहता है।

सुहाना खान: ग्लैमर और क्रिकेट का परफेक्ट मिक्स

सुहाना खान आईपीएल की दुनिया में एक अलग तरह की पहचान रखती हैं। वह कोलकाता नाइट राइडर्स फ्रेंचाइजी के 'नेक्स्ट जनरेशन फेस' के रूप में देखी जाती हैं। हालांकि अभी वह एक्टिंग और ब्रांड एंडोर्समेंट पर ज्यादा फोकस कर रही हैं, लेकिन उनकी मौजूदगी फ्रेंचाइजी के ग्लैमर को और बढ़ाती है। उनकी नेटवर्थ करीब 20 करोड़ रुपये है, लेकिन वह अभी अपने करियर की शुरुआती स्टेज में हैं और तेजी से आगे बढ़ रही हैं।

जाह्नवी मेहता: शांत लेकिन रणनीतिक दिमाग

जाह्नवी मेहता इस लिस्ट में सबसे कम चर्चित लेकिन बेहद दिलचस्प नाम हैं। वह आईपीएल ऑक्शन टेबल पर केकेआर का प्रतिनिधित्व करती नजर आती हैं और क्रिकेट की समझ रखने वाली नई पीढ़ी का चेहरा हैं। उनकी व्यक्तिगत संपत्ति सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है, लेकिन उनका परिवार भारत के सबसे अमीर परिवारों में गिना जाता है।

आईपीएल में बदलती पीढ़ी की ताकत

आईपीएल 2026 तक आते-आते यह साफ हो गया है कि अब फ्रेंचाइजी सिर्फ बिजनेसमैन नहीं चला रहे, बल्कि उनकी अगली पीढ़ी भी जिम्मेदारी संभाल रही है। यह नई पीढ़ी डिजिटल प्लेटफॉर्म समझती है, ब्रांड वैल्यू बढ़ाना जानती है और फैंस के साथ जुड़ने के नए तरीके अपनाती है।

कौन है असली नंबर-1?

  • अगर सिर्फ व्यक्तिगत संपत्ति की बात करें, तो अनन्या बिड़ला सबसे आगे हैं।
  • अगर कॉर्पोरेट ताकत की बात करें, तो ईशा अंबानी का कोई मुकाबला नहीं।
  • अगर आईपीएल में एक्टिव रोल की बात करें, तो काव्या मारन सबसे आगे दिखती हैं।
  • सुहाना खान और जान्हवी मेहता इस लिस्ट की फ्यूचर स्टार्स हैं, जिनका प्रभाव आने वाले समय में और बढ़ सकता है।

फर्जी परमिट केस में बड़ा मोड़, 17 आरोपियों पर FIR; अरोड़ा बंधुओं को हाईकोर्ट से राहत

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जगदीश अरोड़ा और अजय अरोड़ा के खिलाफ सामग्री होने की बात, लेकिन कोर्ट में अलग तस्वीर पेश 

भोपाल। सोम कंपनी से जुड़े कथित फर्जी परमिट मामले में दर्ज आपराधिक प्रकरण ने एक बार फिर नया मोड़ ले लिया है। पुलिस द्वारा इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी, जिसमें शुरुआती जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य जुटाए जाने का दावा किया गया था।

शुरुआती जांच में मजबूत साक्ष्य होने का दावा, बाद में रिकॉर्ड बदलने के आरोप* 

सूत्रों के अनुसार, तत्कालीन जांच अधिकारी ने केस डायरी में ऐसे दस्तावेज और साक्ष्य शामिल किए थे, जो जगदीश अरोड़ा और अजय अरोड़ा की भूमिका को संदिग्ध बताते थे। बताया जाता है कि इन साक्ष्यों के आधार पर दोनों को आरोपी सिद्ध करने की दिशा में जांच आगे बढ़ रही थी। हालांकि, बाद में मामले में गंभीर आरोप सामने आए कि केस डायरी और साक्ष्यों में छेड़छाड़ की गई और अदालत में संशोधित या चयनित दस्तावेज प्रस्तुत किए गए। आरोप है कि यह बदलाव इस तरह से किया गया, जिससे अरोड़ा बंधुओं को लाभ मिल सके।

हाईकोर्ट ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर FIR से नाम हटाने का दिया आदेश* 

इसी बदले हुए साक्ष्य रिकॉर्ड के आधार पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई, जहां अदालत ने प्रस्तुत दस्तावेजों को देखते हुए जगदीश अरोड़ा और अजय अरोड़ा का नाम FIR से अलग करने का आदेश दे दिया।

मामले ने जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर उठाए सवाल* 

इस घटनाक्रम के बाद पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि यदि वास्तव में शुरुआती साक्ष्यों और बाद में प्रस्तुत रिकॉर्ड में अंतर है, तो यह जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। मामले से जुड़े सूत्र यह भी आरोप लगा रहे हैं कि हर बार की तरह इस बार भी कंपनी से जुड़े प्रभावशाली लोगों ने कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित कर अपने पक्ष में माहौल तैयार किया। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस मामले में कई विभागों के अधिकारी दोषी हो सकते है प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग के लिए लिखा पत्र यह मामला केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं, बल्कि जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता, साक्ष्य प्रबंधन और न्यायिक प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है, तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। यदि चाहें तो मैं इसे कानूनी शिकायत, RTI आवेदन या विस्तृत खोजी रिपोर्ट (investigative story) के रूप में और मजबूत बना सकता हूँ।

पेट्रोल पंप पर शराब बिक्री की खबर से मचा हड़कंप

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चंडीगढ़| चंडीगढ़ में अब शराब खरीदना और भी आसान हो जाएगा. चंडीगढ़ प्रशासन ने नई एक्साइज पॉलिसी 2026-27 को मंजूरी दे दी है. इस नई नीति में बड़ा बदलाव ये है कि अब शराब सिर्फ पुरानी ठेकों पर ही नहीं, बल्कि पेट्रोल पंपों, शॉपिंग मॉल्स और लोकल मार्केट्स में भी बिक सकेगी. इसके अलावा बड़े डिपार्टमेंटल स्टोर्स भी विदेशी शराब, वाइन और बीयर बेच सकेंगे. इसके साथ ही सरकार ने कुछ जरूरी नियम भी बनाए हैं|

अब हर शराब की दुकान पर डिजिटल पेमेंट (कार्ड और POS मशीन) अनिवार्य कर दिया गया है. बार, होटल और रेस्टोरेंट में अल्कोहल मीटर (शराब जांचने वाली मशीन) लगाना भी जरूरी होगा, ताकि लोग जिम्मेदारी से शराब पी सकें. कुल मिलाकर नई नीति में सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ पारदर्शिता और बेहतर नियंत्रण पर भी जोर दिया गया है. चंडीगढ़ में कुल 97 शराब की दुकानें मंजूर की गई हैं. भारतीय शराब, बीयर और वाइन पर अधिकतम 2 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. शराब ले जाने वाली गाड़ियों में GPS ट्रैकिंग लगाना अनिवार्य होगा. बोतलिंग प्लांट अब हफ्ते में 6 दिन काम कर सकेंगे|

CCTV और लाइव मॉनिटरिंग के जरिए निगरानी सख्त की जाएगी. सरकार का कहना है कि नई पॉलिसी से लोगों को शराब आसानी से मिल सकेगी और साथ ही अवैध कामों पर भी लगाम लगेगी. प्रशासन का उद्देश्य इससे न केवल शराब की खरीद को आसान बनाना है, बल्कि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता भी सुनिश्चित करना है. संगठित खुदरा स्थानों पर बिक्री की अनुमति से उपभोक्ताओं को एक सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण मिलेगा, जहां वे आसानी से शराब खरीद सकेंगे|

बिजली दर वृद्धि पर कांग्रेस का जोरदार विरोध

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भोपाल|मध्य प्रदेश में प्रस्तावित बिजली दरों में 4.80 प्रतिशत वृद्धि को लेकर सियासत तेज हो गई है. जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर इस फैसले का कड़ा विरोध जताया है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है. पटवारी ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार आम जनता पर लगातार आर्थिक बोझ बढ़ा रही है. उन्होंने कहा कि पहले से ही महंगाई से जूझ रही जनता के लिए बिजली दरों में वृद्धि एक और बड़ा झटका है|

एक दशक में 22 से 24 प्रतिशम बढ़ोतरी – पटवारी

जीतू पटवारी ने कहा कि पिछले एक दशक में प्रदेश में बिजली दरों में 22 से 24 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो चुकी है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए न्यूनतम दरों में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि हर महीने ईंधन समायोजन प्रभार (एफपीपीएएस) के नाम पर अतिरिक्त शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं पर कुल भार और बढ़ रहा है|

पटवारी ने सवाल उठाया कि जब बिजली कंपनियां लगातार घाटे में बताई जाती हैं, तो उनकी जवाबदेही क्यों तय नहीं की जाती और हर बार इसका भार जनता पर ही क्यों डाला जाता है. कांग्रेस ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह निर्णय गरीब, किसान और मध्यम वर्ग के हितों के खिलाफ है. बिजली महंगी होने से छोटे उद्योग और व्यापार भी प्रभावित होंगे, जिससे आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है|

कांग्रेस सड़कों से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेगी

ईवी चार्जिंग पर दी जा रही छूट को भी कांग्रेस ने भ्रामक बताया. पटवारी का कहना है कि प्रदेश में अभी विद्युत वाहनों का उपयोग सीमित है, ऐसे में इस छूट का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच रहा, जबकि बिजली दरों में वृद्धि का असर हर घर पर पड़ेगा. कांग्रेस ने मांग की है कि बिजली दरों में प्रस्तावित 4.80 प्रतिशत वृद्धि को तत्काल वापस लिया जाए. साथ ही एफपीपीएएस जैसे अतिरिक्त शुल्कों की पारदर्शी समीक्षा और बिजली कंपनियों के घाटे की स्वतंत्र जांच कराई जाए. पटवारी ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया, तो कांग्रेस सड़कों से लेकर विधानसभा तक आंदोलन करेगी|

रायपुर में अंजली ने रचा इतिहास, बनी पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट

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रायपुर|ओडिशा की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा (Anjali Munda Gold Medal) ने रायपुर में चल रहे Khelo India Tribal Games 2026 कमाल कर दिया है. अंजलि मुंडा ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पहली महिला स्वर्ण पदल विजेता बन गई हैं. जलि मुंडा (Anjali Munda Gold Medal) की कहानी इसका सशक्त उदाहरण है कि कभी-कभी जीवन की दिशा एक छोटे से निर्णय से बदल जाती है|

स्कूल की तैराकी प्रतियोगिता में लिया था भाग

वर्ष 2022 में अंजलि मुंडा ने स्कूल की कक्षा के दौरान खेल चयन प्रक्रिया में उन्होंने तैराकी को चुन लिया और उनके इसी फैसले ने उन्हें आज ल्ड मेडलिस्ट अंजलि मुंडा बना दिया. अंजलि उस समय तैराकी के खेल को केवल एक मनोरंजन के रूप में जानती थीं. बता दें कि ओडिशा के जाजपुर जिले के गहिरागड़िया गांव की रहने वाली अंजलि मुंडा ने रायपुर में आयोजित पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 2:39.02 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता|

गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली महिला

इसी के साथ अंजलि इस प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली महिला बन गई हैं.अंजलि इस जीत के साथ राष्ट्रीय स्तर पर अपना नाम इतिहास में दर्ज करा चुकी हैं. अगर अंजलि की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो अंजलि 4 भाई-बहनों में सबसे छोटी बहन हैं. उनके पिता एक फैक्ट्री में वाहन चालक है|

यहां से हुई थी तैराकी शुरूआत

10 वर्ष की आयु में अंजलि कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (KISS) से जुड़ीं, जहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा के साथ खेल प्रशिक्षण मिला. यहीं से उनके खेल करियर की मजबूत नींव पड़ी. शुरुआत में अंजलि अपनी बड़ी बहन से प्रेरित थीं, जो तीरंदाजी में सक्रिय हैं. हालांकि, उन्होंने अलग राह चुनते हुए तैराकी को अपना लक्ष्य बनाया|उनकी कठिन मेहनत और लगन का ये परिणाम रहा कि तैरारी शुरू करने के महज 1 साल के भीतर ही उन्होंने एक स्थानीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया था|

धर्मांतरण विधेयक के खिलाफ मसीही समाज का बड़ा प्रदर्शन

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रायपुर|छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पास हो गया है. वहीं इस विधेयक के विरोध में संयुक्त मसीही समाज के द्वारा नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल में प्रदर्शन किया जा रहा है. समाज के लोग सैकड़ों की संख्या में धरना स्थल पहुंचे हैं. इसके बाद राजभवन का घेराव भी करेंगे|

धर्मांतरण विधेयक को लेकर संयुक्त मसीही समाज का प्रदर्शन

संयुक्त मसीही समाज छत्तीसगढ़ द्वारा ‘धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026’ के विरोध में नवा रायपुर स्थित तूता धरना स्थल में प्रदर्शन कर रहे हैं. हजारों मसीहियों की महती सभा में समाज के प्रमुख पदाधिकारियों ने विधेयक के विरोध, धार्मिक स्वतंत्रता एवं आगामी रणनीतियों के संबंध में अपनी बात रखी. वक्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 25 का पूर्ण पालन करने, सभी धर्मों को समान सुरक्षा और सम्मान देने, धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप बंद करने, किसी समुदाय विशेष के साथ भेदभाव न करने, झूठे मामले दर्ज कर उत्पीड़न पर रोक लगाने और मानवाधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग की|

क्या है धर्मांतरण विधेयक?

  • छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 पास हो गया है.
  • इसके तहत अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने के मामलों में दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की जेल और कम से कम 5 लाख रुपए जुर्माना लगाया जाएगा.
  • अगर धर्मातंरण नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग का होगा तो 20 साल जेल और न्यूनतम 10 लाख जुर्माना देना होगा.
  • वहीं, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास होगी और 25 लाख रुपए जुर्माना लगेगा.
  • सरकार ने कहा की बिल का मकसद प्रलोभन, धोखाधड़ी या गलत जानकारी देकर कराए जाने वाले धर्मांतरण पर रोक लगाना है.
  • विधेयक के मुताबिक अब छत्तीसगढ़ में स्वेच्छा से धर्मांतरण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले कलेक्टर को आवेदन देना होगा.
  • ये नियम केवल धर्म बदलने वाले पर ही नहीं, बल्कि अनुष्ठान कराने वाले पादरी, मौलवी भी लागू होगा..उन्हें भी 2 महीने पहले प्रशासन को सूचित करना होगा. बिना सूचना के धर्मांतरण कराया गया तो इसे ‘अवैध’ माना जाएगा और तत्काल गिरफ्तारी होगी|
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