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सेशेल्स में PM मोदी का भव्य स्वागत, राष्ट्रपति पैट्रिक के साथ पिया नारियल पानी, कछुओं को खिलाईं पत्तियां

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विक्टोरिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक राजनयिक यात्रा पर सेशेल्स पहुंच गए हैं। सेशेल्स इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर वहां के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी ने प्रोटोकॉल से परे जाकर उनका भव्य और ऐतिहासिक स्वागत किया, जिसके बाद प्रधानमंत्री को प्रतिष्ठित 'गार्ड ऑफ ऑनर' दिया गया। हवाई अड्डे पर मौजूद प्रवासी भारतीय समुदाय के नागरिकों ने भी पारंपरिक कच्छी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति के साथ देश के प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से अभिनंदन किया। इसके पश्चात, दोनों देशों के राष्ट्राध्यक्षों ने विक्टोरिया स्थित प्रसिद्ध नेशनल बोटैनिकल गार्डन का भ्रमण किया, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने न केवल एक स्मृति पौधा रोपा, बल्कि वहां के मुख्य आकर्षण माने जाने वाले दुर्लभ प्रजाति के 'एल्डाब्रा जाइंट' कछुओं को अपने हाथों से भोजन भी कराया।

स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती, जोनाथन कछुए का इतिहास और दीर्घायु का वैज्ञानिक रहस्य

यह राजकीय यात्रा वैश्विक स्तर पर इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि २९ जून २०२६ को प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे, जो इस द्वीपीय राष्ट्र की स्वतंत्रता के ५० वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। इस भव्य परेड में भारतीय नौसेना के दो आधुनिक युद्धपोतों के साथ सशस्त्र बलों की एक विशेष टुकड़ी भी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेगी। सेशेल्स के कछुओं की विशेषता को देखें तो यहां पाए जाने वाले एल्डाब्रा जाइंट कछुए अपनी १५० वर्ष की औसत आयु के लिए पूरी दुनिया में विख्यात हैं, जिनमें १९४ वर्षीय 'जोनाथन' को विश्व का सबसे उम्रदराज जीवित स्थलीय जीव माना जाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, कछुओं के इतने लंबे जीवनकाल के पीछे उनकी अत्यंत धीमी चयापचय (धीमी जीवनशैली) प्रणाली है, जिससे उनकी शारीरिक कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी नहीं होतीं, साथ ही उनका अभेद्य और सख्त बाहरी कवच उन्हें प्राकृतिक शत्रुओं व आंतरिक बीमारियों से जीवनभर सुरक्षा प्रदान करता है।

द्विपक्षीय संबंधों के ५० वर्ष, विजन महासागर और नेशनल असेंबली में संबोधन

भारत और सेशेल्स के मध्य आधिकारिक कूटनीतिक संबंधों की स्थापना का यह ५०वां वर्ष है, जिसे रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने सेशेल्स को भारत के 'विजन महासागर' (MAHASAGAR) का एक अपरिहार्य और मजबूत समुद्री साझेदार बताया है। फरवरी २०२६ में राष्ट्रपति हर्मिनी की सफल भारत यात्रा के बाद हो रहे इस दौरे में दोनों राष्ट्रों के बीच हिंद महासागर की सुरक्षा, क्षेत्रीय संप्रभुता और आर्थिक समृद्धि को लेकर कई उच्चस्तरीय समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है। इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली (संसद) को संबोधित करने वाले भारत के इतिहास के पहले प्रधानमंत्री बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित करेंगे। प्रधानमंत्री ने पूर्ण विश्वास जताया है कि इस ऐतिहासिक पहल से न केवल सदियों पुराने लोकतांत्रिक और विधायी मूल्यों को मजबूती मिलेगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में दोनों देशों का आपसी नौसैनिक सहयोग भी एक नए युग में प्रवेश करेगा।

इंदिरा गांधी के दौर की कूटनीति, सामरिक निगरानी और चीन की घेराबंदी का रोडमैप

ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में देखें तो वर्ष १९७६ में सेशेल्स की स्वतंत्रता के समय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वहां का दौरा किया था और भारत ने अपनी नौसेना का पराक्रमी युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी वहां भेजा था। वर्ष १९८१ में उनके दूसरे दौरे के बाद लगभग ३४ वर्षों तक किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की सुध नहीं ली, जिसके बाद २०१५ में प्रधानमंत्री मोदी ने वहां की यात्रा कर इस कूटनीतिक गतिरोध को समाप्त किया था। वर्तमान भू-राजनीतिक परिदृश्य में जब चीन हिंद महासागर के छोटे द्वीपीय देशों में अपना सैन्य प्रभाव बढ़ाने की निरंतर कोशिश कर रहा है, भारत ने सेशेल्स की तटीय सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए उसे दूसरा अत्याधुनिक डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान सौंपने की आधिकारिक घोषणा की है। इसके साथ ही, भारत के सहयोग से निर्मित अत्याधुनिक तटीय निगरानी रडार नेटवर्क का उद्घाटन इस क्षेत्र में जहाजों के आवागमन पर पैनी नजर रखने और भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) की सामरिक नीति को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बेहद निर्णायक और दूरगामी कदम है।

मोबाइल पर लाइव दिखेंगे ट्रांसको के सब स्टेशन, सुरक्षा व्यवस्था हुई स्मार्ट

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जबलपुर। मध्य प्रदेश में बिजली आपूर्ति के मुख्य केंद्रों यानी एक्स्ट्रा हाई टेंशन सबस्टेशनों की सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए एक बड़ा तकनीकी अभियान शुरू किया गया है। राज्य भर के 417 सबस्टेशनों की निगरानी को मजबूत करने के लिए प्रशासन करीब 8.15 करोड़ रुपये के बजट से अत्याधुनिक हाई-परफॉर्मेंस एचडी सीसीटीवी कैमरे स्थापित कर रहा है। सरकार के ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य विद्युत ग्रिड को चोरी की वारदातों और किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के प्रवेश से पूरी तरह सुरक्षित रखना है। इससे पहले भी विभाग ने बिजली लाइनों की देखरेख के लिए ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया था। अब कैमरों के इस नए नेटवर्क से सबस्टेशनों की सुरक्षा में इंसानी पहरे के साथ-साथ तकनीक का एक दोहरा सुरक्षा कवच तैयार हो जाएगा। इससे ट्रांसफॉर्मरों के कीमती सामानों की चोरी थमेगी और आम लोगों को बिना किसी रुकावट के बिजली मिलती रहेगी।

कॉपर स्ट्रिप चोरी रोकने और ट्रांसफॉर्मर बचाने की कवायद

अक्सर देखा गया है कि सबस्टेशनों से ट्रांसफॉर्मर की कॉपर न्यूट्रल स्ट्रिप चोरी हो जाती है, जिससे न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है बल्कि पूरी बिजली व्यवस्था भी ठप पड़ जाती है। ये स्ट्रिप्स ट्रांसफॉर्मर को सुरक्षित चलाने के लिए बेहद जरूरी होती हैं और इनके गायब होने से ट्रांसफॉर्मर के जलने की नौबत आ जाती है। एक बार यदि बड़ा ट्रांसफॉर्मर खराब हो जाए, तो उसे ठीक करने या बदलने में तीन से चार महीने का समय लग जाता है, जिसका सीधा खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। इसी समस्या से निपटने के लिए लगाए जा रहे ये नए कैमरे 360 डिग्री घूमने की क्षमता, नाइट विजन और मोशन डिटेक्शन (हलचल भांपने की तकनीक) से लैस हैं, जो घने अंधेरे में भी किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत पकड़ लेंगे।

सीधे मोबाइल पर मिलेगी लाइव फीड, शक्तिभवन से होगी मॉनिटरिंग

इस पूरी व्यवस्था को इतना आधुनिक बनाया गया है कि सभी कैमरों का सीधा प्रसारण संबंधित सबस्टेशन के प्रभारियों के मोबाइल फोन पर हर वक्त उपलब्ध रहेगा। इसके साथ ही ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क की मदद से जबलपुर स्थित शक्तिभवन के केंद्रीय नियंत्रण कक्ष (सेंट्रल कंट्रोल रूम) से मध्य प्रदेश के सभी 417 सबस्टेशनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। मुख्यालय से एक क्लिक पर पूरे राज्य की स्थिति दिखने से सुरक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी और गड़बड़ियों पर तुरंत एक्शन लिया जा सकेगा। जबलपुर में इसका सफल ट्रायल किया जा चुका है और अब इसे पूरे प्रदेश में अलग-अलग चरणों में लागू किया जा रहा है ताकि भविष्य की तकनीकी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया जा सके।

आधुनिक तकनीक से मजबूत होगा प्रदेश का बिजली ढांचा

इस बड़े तकनीकी बदलाव के बाद बिजली विभाग किसी भी आपातकालीन स्थिति या तकनीकी खराबी का तुरंत पता लगाने में सक्षम होगा। पहले जहां सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केवल सुरक्षाकर्मियों पर होती थी, वहीं अब इस डिजिटल पहरे से निगरानी का दायरा कई गुना बढ़ गया है। यह नई प्रणाली केवल चोरी रोकने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे सबस्टेशनों के रोजमर्रा के कामकाज में भी बड़ा सुधार आएगा। मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी इस परियोजना के माध्यम से राज्य के उपभोक्ताओं को सुरक्षित और लगातार बिजली देने के अपने वादे को पूरा कर रही है, जो प्रदेश के पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

वैभव सूर्यवंशी की तकनीक और आत्मविश्वास ने किया प्रभावित, पूर्व चयनकर्ता ने की सराहना

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भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व धाकड़ कप्तान और राष्ट्रीय चयन समिति के पूर्व मुख्य अध्यक्ष दिलीप वेंगसरकर ने भारत के उभरते हुए युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी की प्रतिभा की जमकर सराहना की है। वेंगसरकर का मानना है कि इस युवा खब्बू बल्लेबाज के पास गजब का 'हैंड-आई कोआर्डिनेशन' (हाथ और आंख का अद्भुत सामंजस्य) है। वह मैदान के चारों तरफ ऐसे चमत्कारी और अकल्पनीय शॉट्स खेलते हैं, जो उनकी बल्लेबाजी को समकालीन युवा क्रिकेटरों में सबसे अलग और अविश्वसनीय श्रेणी में खड़ा करता है।

मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) की टीम के साथ यूनाइटेड किंगडम (यूके) के दौरे पर गए वेंगसरकर ने एक विशेष साक्षात्कार में उम्मीद जताई कि महज 15 वर्षीय सूर्यवंशी को आगामी भारत के आयरलैंड दौरे और उसके बाद होने वाले इंग्लैंड दौरे पर जब भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण (डेब्यू) का अवसर मिलेगा, वह उस मौके का पूरा फायदा उठाने का दम रखते हैं।

जब भी मौका मिलेगा, दोनों हाथों से लपकेंगे वैभव सूर्यवंशी

दिलीप वेंगसरकर ने युवा खिलाड़ी की काबिलियत पर पूरा भरोसा जताते हुए कहा, "मुझे इस बात को लेकर कोई संशय नहीं है कि वैभव को जल्द ही नीली जर्सी पहनने का अवसर मिलेगा। एक बार जब वह भारतीय टीम के मुख्य एकादश में शामिल हो गए, तो वह इस मौके को दोनों हाथों से भुनाएंगे क्योंकि वह एक असाधारण प्रतिभा के धनी हैं। उनके खेलने की शैली बिल्कुल जुदा है। वह अपने शानदार बैट स्विंग और टाइमिंग के दम पर बड़ी सहजता से गेंद को बाउंड्री लाइन के पार भेजने की क्षमता रखते हैं। फटाफट क्रिकेट (टी20 प्रारूप) में तो उनका हालिया प्रदर्शन अब तक लाजवाब रहा है।"

लंबे प्रारूप (टेस्ट क्रिकेट) को लेकर क्या है वेंगसरकर की राय?

जब पूर्व दिग्गज से यह सवाल किया गया कि क्या सूर्यवंशी के भीतर भारत के लिए पारंपरिक टेस्ट क्रिकेट खेलने की क्षमता और धैर्य है? इस पर वेंगसरकर ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए कहा, "इस विषय पर अभी से कोई अंतिम टिप्पणी करना थोड़ी जल्दबाजी होगी, क्योंकि वर्तमान में हम उन्हें सिर्फ टी20 फॉर्मेट में आक्रामक रुख के साथ खेलते देख रहे हैं। मैंने व्यक्तिगत रूप से उन्हें अभी तक लंबे प्रारूप (प्रथम श्रेणी या टेस्ट) के कड़े इम्तिहान में खेलते नहीं देखा है। हालांकि, मुझे पूरा विश्वास है कि जब भी उन्हें इस प्रारूप के लिए आजमाया जाएगा, वह वहां भी उम्दा प्रदर्शन करेंगे। हमें थोड़ा धैर्य रखना होगा और यह देखना होगा कि वह पांच दिनों के खेल में अपनी पारी को कैसे बुनते हैं, जो कि किसी भी क्रिकेटर के असली कौशल की पहचान होती है।"

युवा ब्रिगेड के लिए मिसाल हैं सचिन तेंदुलकर

वैभव जैसे युवा खिलाड़ियों को जमीनी हकीकत से जुड़े रहने की सीख देते हुए वेंगसरकर ने महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का उदाहरण दिया। उन्होंने पुरानी यादें ताजा करते हुए कहा, "जब मैंने पहली बार सचिन को मैदान पर खेलते देखा था, तो वह अपनी उम्र के बाकी लड़कों की तुलना में मानसिक रूप से कहीं ज्यादा परिपक्व और शांत नजर आते थे। उन्होंने मुंबई के स्कूल टूर्नामेंट्स और घरेलू क्लब क्रिकेट में रनों का अंबार लगाकर खुद को साबित किया था। वह अंतरराष्ट्रीय स्तर की विश्वस्तरीय गेंदबाजी का सामना करने के लिए मानसिक रूप से पूरी तरह तैयार थे, और इसी दृढ़ता को देखकर हमने उन्हें राष्ट्रीय टीम में चुना था। खेल के प्रति उनका समर्पण, कड़ा अनुशासन और अटूट फोकस अद्भुत था। वैभव सहित आज की युवा पीढ़ी को सचिन के उसी शुरुआती दौर के एटीट्यूड को अपना आदर्श बनाना चाहिए।"

कप्तान के रूप में श्रेयस अय्यर का पूरा समर्थन

टीम इंडिया के टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रारूप में कप्तानी की जिम्मेदारी संभालने वाले श्रेयस अय्यर को लेकर भी पूर्व मुख्य चयनकर्ता ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि श्रेयस आगे रहकर टीम की अगुवाई करना बखूबी जानते हैं। एक बल्लेबाज के तौर पर उनका खुद का शानदार फॉर्म उन्हें मैदान के भीतर और बाहर कप्तानी से जुड़े कड़े और बोल्ड फैसले लेने की अतिरिक्त ताकत देता है। वह रणनीतिक रूप से काफी सोच-समझकर निर्णय लेने वाले कप्तान हैं और भविष्य में भारतीय टीम को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे।

सरफराज खान और देवदत्त पडिक्कल को टेस्ट में मिले लगातार मौके

दिलीप वेंगसरकर का स्पष्ट मानना है कि सरफराज खान और देवदत्त पडिक्कल जैसे मध्यक्रम के प्रतिभावान बल्लेबाजों को टेस्ट क्रिकेट में अपनी जगह पक्की करने के लिए पर्याप्त अवसर दिए जाने चाहिए। उन्होंने याद दिलाते हुए कहा, "कुछ समय पहले धर्मशाला में इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए टेस्ट मुकाबले में इन दोनों युवाओं ने जिस तरह विपरीत परिस्थितियों में बल्लेबाजी की थी, उसने मुझे बेहद प्रभावित किया था। मैच के एक बेहद नाजुक मोड़ पर दोनों ने सूझबूझ भरी साझेदारी कर टीम को संभाला था। सरफराज के पास कमाल की तकनीक और गजब का टेंपरामेंट है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपको अपनी फिटनेस को लेकर हमेशा सतर्क रहना होगा, क्योंकि टीम में प्रतिस्पर्धा बहुत अधिक है और आप अपनी जगह को तय मानकर सुस्त नहीं पड़ सकते।"

हार्दिक पंड्या और रोहित शर्मा के भविष्य पर बड़ा बयान

चोटों से जूझने वाले स्टार ऑलराउंडर हार्दिक पंड्या को लेकर वेंगसरकर ने कहा कि पंड्या एक परिपक्व खिलाड़ी हैं और वे अच्छी तरह जानते हैं कि वर्कलोड को मैनेज करते हुए अपने शरीर से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे निकालना है। यह सब उनकी मैच फिटनेस और मानसिक फोकस पर निर्भर करता है।

वहीं, कप्तान रोहित शर्मा के साल 2027 के वनडे वर्ल्ड कप में खेलने या न खेलने की संभावनाओं पर वेंगसरकर ने कहा, "यह फैसला पूरी तरह से रोहित शर्मा के विवेक पर ही छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय क्रिकेट के लिए जो योगदान दिया है, वह बेमिसाल है। वह पिछले लगभग दो दशकों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खेल रहे हैं। उन्हें अपने शरीर, फॉर्म और भविष्य की प्राथमिकताओं का सबसे बेहतर अंदाजा है, इसलिए इस विषय पर वही सबसे सही फैसला लेंगे।"

अतानु चक्रवर्ती बोले- बाहरी कानूनी जांच की नहीं थी जरूरत, फैसले पर जताई आपत्ति

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मुंबई:देश के सबसे बड़े निजी क्षेत्र के ऋणदाता, एचडीएफसी बैंक में चल रहा कॉर्पोरेट गवर्नेंस (कॉर्पोरेट शासन) का विवाद एक नए और बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। बैंक के पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे की परिस्थितियों को लेकर बैंक प्रबंधन द्वारा कराई गई बाहरी कानूनी जांच की प्रासंगिकता और जरूरत पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने इस पूरी कवायद को पूरी तरह से गैर-जरूरी करार दिया है। पूर्व चेयरमैन के इस कड़े रुख के बाद भारतीय बैंकिंग और वित्तीय जगत में एक बार फिर कॉर्पोरेट गवर्नेंस और बोर्ड के कामकाज के तरीकों को लेकर बहस तेज हो गई है।

जांच की शर्तों और पारदर्शिता की कमी के कारण अतानु चक्रवर्ती ने बनाई दूरी

पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि उन्होंने इस स्वतंत्र जांच प्रक्रिया का हिस्सा बनने से पूरी तरह इनकार कर दिया था। इसके पीछे उनका सबसे मजबूत तर्क यह है कि बैंक प्रबंधन ने जांच का दायरा, उसकी सीमाएं और इसका कानूनी आधार कभी भी उनके साथ साझा नहीं किया था। विश्वसनीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चक्रवर्ती ने इस जांच प्रक्रिया से जुड़ने से पहले बैंक प्रबंधन से कई बार 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (जांच की शर्तें और नियम) की मांग की थी, लेकिन बैंक की ओर से उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। चक्रवर्ती का साफ कहना है कि उन्होंने जो सैद्धांतिक और नैतिक स्टैंड लिया था, उसे सही साबित करने के लिए उन्हें किसी भी बाहरी या विदेशी एजेंसी से किसी प्रकार की मान्यता अथवा क्लीन चिट की कोई जरूरत नहीं है।

दो प्रतिष्ठित लॉ फर्मों की रिपोर्ट में पूर्व चेयरमैन के दावों को आधारहीन बताया

अतानु चक्रवर्ती की यह तीखी प्रतिक्रिया बैंक के उस आधिकारिक बयान के ठीक एक दिन बाद आई है, जिसमें एचडीएफसी बैंक ने स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया था कि दो बाहरी कानूनी फर्मों द्वारा की जा रही जांच अब पूरी हो चुकी है। बैंक ने इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए घरेलू लॉ फर्म वाडिया गांडी एंड कंपनी और अमेरिकी लॉ फर्म विल्सन सोन्सिनी गुडरिच एंड रोसाटी को नियुक्त किया था। इस जांच प्रक्रिया के तहत बैंक के बोर्ड रिकॉर्ड, विभिन्न कमेटियों के दस्तावेज, समकालीन फाइलों और स्वतंत्र निदेशकों सहित सीनियर मैनेजमेंट के साथ बातचीत का बेहद गहन और बारीक परीक्षण किया गया। बैंक का दावा है कि इस विस्तृत जांच में पूर्व चेयरमैन द्वारा मार्च में दिए गए इस्तीफे में उठाई गई चिंताओं या आरोपों को सही ठहराने वाला कोई भी ठोस सबूत नहीं मिला है, और लॉ फर्म्स के निष्कर्ष चक्रवर्ती के दावों से पूरी तरह असंगत पाए गए हैं।

मार्च में हुए अचानक इस्तीफे ने बैंकिंग क्षेत्र में मचाई थी हलचल

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि इस साल 17 मार्च को अतानु चक्रवर्ती के अचानक दिए गए इस्तीफे से जुड़ी है, जिसने देश के बैंकिंग सेक्टर में इस साल की सबसे बड़ी गवर्नेंस बहस को जन्म दिया था। अपने संक्षिप्त त्यागपत्र में उन्होंने स्पष्ट तौर पर लिखा था कि पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर हुए कुछ नीतिगत घटनाक्रम और प्रथाएं उनके व्यक्तिगत मूल्यों तथा नैतिक मानकों के बिल्कुल खिलाफ थीं। हालांकि उन्होंने अपने पत्र में किसी विशेष घटना या उदाहरण का जिक्र नहीं किया था, लेकिन देश के इतने बड़े बैंक के मुखिया द्वारा नैतिक मानकों पर सवाल उठाने से निवेशकों और बाजार में गहरी चिंता फैल गई थी, जिसके बाद बोर्ड को अपनी साख बचाने के लिए इस बाहरी कानूनी जांच का सहारा लेना पड़ा था।

नेतृत्व परिवर्तन और निवेशकों के भरोसे को बहाल करने की चुनौती

यह पूरा घटनाक्रम एचडीएफसी बैंक के लिए एक बेहद नाजुक और चुनौतीपूर्ण समय पर सामने आया है, क्योंकि बैंक इस समय अपने शीर्ष नेतृत्व में होने वाले कई प्रमुख बदलावों पर नियामक मंजूरियों का इंतजार कर रहा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बैंक के मौजूदा मैनेजिंग डायरेक्टर और चीफ एग्जीक्यूटिव शशिधर जगदीशन की पुनर्नियुक्ति का मामला है। पूर्व चेयरमैन के इस्तीफे के बाद कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर उठे सवालों ने इस साल निवेशकों के सेंटिमेंट पर भारी दबाव डाला था, जिससे बैंक के शेयरों पर भी असर देखा गया। बैंक का बोर्ड अपने उत्तराधिकार के एजेंडे को आगे बढ़ाने से पहले एक स्वतंत्र मूल्यांकन रिपोर्ट चाहता था ताकि बाजार के संदेह को दूर किया जा सके। अब बैंक ने जांच पूरी होने की घोषणा करते हुए गवर्नेंस के उच्च मानकों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है, जो आने वाले समय में निवेशकों का भरोसा दोबारा जीतने में बेहद अहम साबित हो सकती है।

IPO से पहले Silver Consumer Electricals को ₹150 करोड़ की फंडिंग, विस्तार को मिलेगी रफ्तार

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राजकोट:गुजरात की जानी-मानी कंपनी सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड अपने आगामी इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (आईपीओ) से ठीक पहले बाजार में बड़ा दांव खेलने में कामयाब रही है। कंपनी ने अपने प्री-आईपीओ राउंड के तहत लगभग 150 करोड़ रुपये का बड़ा फंड जुटाया है। यह फंड प्रमोटर ग्रुप के एक सदस्य द्वारा अपनी आंशिक हिस्सेदारी बेचने के जरिए जुटाया गया है। कंपनी से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, प्रमोटर ग्रुप के सदस्य धर्मशीभाई मोहनभाई बेडिया ने एक सेकेंडरी सेल के माध्यम से जाने-माने निवेशक रियाज सुतरवाला को 73 लाख 15 हजार 288 इक्विटी शेयर ट्रांसफर किए हैं। यह पूरा सौदा 205.05 रुपये प्रति इक्विटी शेयर की तय कीमत पर पूरा हुआ है, जिससे इसकी कुल वैल्यू 150 करोड़ रुपये बैठती है। इस रणनीतिक खरीद के बाद अब कंपनी की प्री-ऑफर इक्विटी शेयर कैपिटल में रियाज सुतरवाला की कुल हिस्सेदारी 2.59 प्रतिशत हो गई है।

सेबी से मिल चुकी है हरी झंडी, 1400 करोड़ रुपये जुटाने का है लक्ष्य

सिल्वर कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल्स ने बाजार नियामक सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (सेबी) के पास पिछले साल अगस्त में अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) जमा कराया था, जिसे नवंबर 2025 में सेबी की तरफ से अंतिम मंजूरी भी मिल चुकी है। जब यह ड्राफ्ट दाखिल किया गया था, तब धर्मशीभाई मोहनभाई बेडिया के पास कंपनी की 7.86 प्रतिशत और उनके बेटे विनीत धर्मशीभाई बेडिया के पास 48.99 प्रतिशत की सबसे बड़ी हिस्सेदारी थी। अब कंपनी इस आईपीओ के जरिए बाजार से करीब 1,400 करोड़ रुपये तक जुटाने की तैयारी में है। इस प्रस्तावित इश्यू के तहत कंपनी 1,000 करोड़ रुपये मूल्य के बिल्कुल नए इक्विटी शेयर जारी करेगी, जबकि प्रमोटर विनीत धर्मशीभाई बेडिया की ओर से 400 करोड़ रुपये तक का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) लाया जाएगा, जिसके जरिए वे अपनी कुछ हिस्सेदारी जनता के लिए पेश करेंगे।

पंप से लेकर इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स तक, 17 देशों में फैला है कारोबार

गुजरात के राजकोट मुख्यालय वाली यह कंपनी मुख्य रूप से 'सिल्वर' और 'बेडिया' नाम के दो बड़े और स्थापित ब्रांड्स के जरिए अपना बिजनेस चलाती है। कंपनी अपने 'सिल्वर' ब्रांड के तहत कृषि और उद्योगों के लिए काम आने वाले पंप, हैवी मोटर और खेती के आधुनिक उपकरण तैयार करती है। वहीं दूसरी तरफ, 'बेडिया' ब्रांड के अंतर्गत घरों में इस्तेमाल होने वाले पंखे, कंसील्ड लाइटें, रूम हीटर, मिक्सर ग्राइंडर और अन्य कंज्यूमर इलेक्ट्रिकल प्रोडक्ट्स का निर्माण किया जाता है। कंपनी अपने विशाल इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग प्लांट के दम पर घरेलू, कृषि और औद्योगिक क्षेत्र की जरूरतों को पूरा कर रही है। इस आईपीओ से मिलने वाली नई रकम का इस्तेमाल कंपनी अपने मौजूदा कर्ज के बोझ को कम करने और सामान्य कॉर्पोरेट कामकाज को आगे बढ़ाने के लिए करेगी। वर्तमान में कंपनी का नेटवर्क भारत के बाहर 17 से ज्यादा देशों में फैला हुआ है, जहां ये अपने प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करते हैं। सामाजिक जिम्मेदारी के स्तर पर भी कंपनी की भूमिका बड़ी है, क्योंकि इसके कुल कार्यबल में 700 से अधिक महिला कर्मचारी शामिल हैं।

दिग्गज निवेशकों और पांड्या ब्रदर्स का लगा है बड़ा पैसा

इस कंपनी की वित्तीय मजबूती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसमें देश के कई बड़े दिग्गजों का पैसा लगा हुआ है। अगस्त 2025 के आंकड़ों के मुताबिक, मशहूर एंजेल इनवेस्टर और प्लूटस वेल्थ मैनेजमेंट के मैनेजिंग पार्टनर अर्पित खंडेलवाल इसके सबसे बड़े शेयरहोल्डर रहे हैं, जिनकी कंपनी में 26.79 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी और उन्होंने जनवरी 2023 से ही इसमें निवेश शुरू कर दिया था। इनके अलावा, भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी हार्दिक पांड्या और उनके भाई क्रुणाल पांड्या ने भी इस कंपनी पर बड़ा भरोसा जताया है। क्रुणाल पांड्या के पास कंपनी के 1.1 प्रतिशत शेयर हैं, जबकि हार्दिक पांड्या की इसमें 0.017 प्रतिशत की हिस्सेदारी है और वे वर्तमान में इस कंपनी के मुख्य ब्रांड एंबेसडर भी हैं। साथ ही, शेयर बाजार की दिग्गज निवेशक मधु केला की पत्नी माधुरी मधुसूदन केला की भी इसमें 0.62 प्रतिशत की हिस्सेदारी रही है। इस मेगा आईपीओ को पूरी तरह सफल बनाने और मैनेज करने के लिए मोतीलाल ओसवाल इनवेस्टमेंट एडवाइजर्स, आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज, जेएम फाइनेंशियल और चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स को लीड मर्चेंट बैंकर के रूप में नियुक्त किया गया है, जो इस पूरे इश्यू की कमान संभालेंगे।

16 लोगों की मौत के मामले में पूर्व मेयर पर शिकंजे की मांग, सियासत तेज

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी के तारातला इलाके में स्थित ट्रांसपोर्ट डिपो रोड पर एक विशाल गोदाम के अचानक मलबे में तब्दील हो जाने से १६ निर्दोष लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस भीषण हादसे के बाद कोलकाता नगर निगम के पूर्व मेयर और उनके करीबी सहयोगियों पर कानूनी शिकंजा कसता नजर आ रहा है। प्राप्त विवरण के अनुसार, भारतीय जनता मजदूर सेल (बीजेएमसी) ने महानगर के पूर्व मेयर फिरहाद हकीम, पूर्व पार्षद अनवर खान और शम्स इकबाल के विरुद्ध आपराधिक मुकदमा (एफआईआर) दर्ज करने की लिखित मांग करते हुए पुलिस प्रशासन को एक आधिकारिक शिकायती पत्र सौंपा है। पुलिस के एक आला अधिकारी ने बताया कि इन तीनों रसूखदार नेताओं पर शहर में हो रहे अनधिकृत व अवैध निर्माणों को कथित रूप से प्रश्रय देने और नियमों को ताक पर रखकर अनुमति देने का संगीन आरोप है, जिसके कारण हाल के दिनों में कई पुरानी व नई इमारतों तथा गोदामों के जमींदोज होने की घटनाएं लगातार सामने आई हैं। इस संबंध में बीजेएमसी की दक्षिण कोलकाता इकाई ने गुरुवार को तारातला थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है।

अनधिकृत निर्माण, आपराधिक साजिश के आरोप और पुलिस का पक्ष

मजदूर संगठन ने अपनी लिखित शिकायत में यह गंभीर आरोप लगाया है कि कोलकाता पोर्ट (गोदी) क्षेत्र में व्यावसायिक इमारतों और भारी गोदामों के बार-बार ढहने की ये जानलेवा घटनाएं किसी सामान्य दुर्घटना का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह बेलगाम अवैध निर्माण, प्रशासनिक मशीनरी की घोर लापरवाही और एक गहरी आपराधिक साजिश का प्रत्यक्ष परिणाम हैं। संगठन ने पूर्व मेयर हकीम के साथ-साथ वार्ड संख्या ८० के पूर्व पार्षद अनवर खान और वार्ड संख्या १३४ के पूर्व पार्षद शम्स इकबाल की इस पूरे तंत्र में संदिग्ध भूमिका की उच्चस्तरीय व विस्तृत जांच कराने की पुरजोर वकालत की है। दूसरी ओर, कोलकाता पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने शिकायत पत्र प्राप्त होने की पुष्टि तो की है, परंतु विधिक स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि केवल आवेदन मिलने मात्र से स्वतः प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज नहीं हो जाती। पुलिस वर्तमान में शिकायत के सभी तकनीकी पहलुओं और आरोपों की सत्यता का बारीक मूल्यांकन कर रही है, जिसके बाद ही विधिक प्रक्रिया के तहत आगामी दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। इस शिकायती पत्र की प्रतिलिपियां देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्रालयों को भी प्रेषित की गई हैं।

फिरहाद हकीम का राजनीतिक रसूख, ऐतिहासिक रिकॉर्ड और वर्तमान स्थिति

कथित विवादों के केंद्र में आए फिरहाद हकीम को राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद और कद्दावर सिपहसालारों में गिना जाता है। वर्ष २०२६ के हालिया विधानसभा चुनावों में जहां एक ओर एंटी-इंकंबेंसी (सत्ता विरोधी लहर) के चलते तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई शीर्ष मंत्रियों और दिग्गजों को करारी पराजय का सामना करना पड़ा था, वहीं हकीम विपरीत परिस्थितियों में भी अपनी पारंपरिक 'कोलकाता पोर्ट' विधानसभा सीट को सुरक्षित रखने और दोबारा विधायक बनने में सफल रहे थे। राज्य में टीएमसी के शासनकाल के दौरान वे वर्ष २०१८ से निरंतर कोलकाता के प्रथम नागरिक यानी मेयर के पद पर आसीन रहे और प्रांतीय कैबिनेट में कई मलाईदार मंत्रालयों का कार्यभार भी संभाला। दिसंबर २०१८ में सोभनदेब चट्टोपाध्याय के त्यागपत्र के बाद जब हकीम ने इस प्रतिष्ठित पद की शपथ ली थी, तब उन्होंने १५० वर्ष से भी अधिक प्राचीन कोलकाता नगर निगम के इतिहास में पहले मुस्लिम मेयर बनने का एक ऐतिहासिक गौरव भी अपने नाम दर्ज किया था।

बचाव अभियान, घायलों की स्थिति और एसआईटी की त्वरित गिरफ्तारियां

दुर्घटनास्थल की जमीनी स्थिति को देखें तो तारातला के ढहे हुए गोदाम के विशाल मलबे के नीचे दबे संभावित जीवित लोगों या शवों को निकालने के लिए विभिन्न आपदा प्रबंधन विंग और रेस्क्यू टीमें बुधवार दोपहर से ही युद्धस्तर पर लगातार सघन तलाशी अभियान चला रही हैं। इस वीभत्स औद्योगिक हादसे में अब तक आधिकारिक रूप से कम से कम १६ मजदूरों की जान जा चुकी है, जबकि लगभग १७ अन्य गंभीर रूप से घायल अवस्था में सरकारी एसएसकेएम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष कर रहे हैं। कानूनी कार्रवाई के तहत पुलिस ने अब तक घटिया निर्माण कार्य से सीधे जुड़े ५ ठेकेदारों व इंजीनियरों सहित पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (ओएसडी) कालीचरण बंद्योपाध्याय को गिरफ्तार कर विधिक कस्टडी में ले लिया है। मामले की संवेदनशीलता और जन-आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार के कड़े आदेश पर कोलकाता पुलिस मुख्यालय ने एक उच्चस्तरीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जो इस पूरे प्रशासनिक और आपराधिक नेक्सस की जड़ों तक पहुंचने के लिए चौबीसों घंटे साक्ष्य जुटाने में व्यस्त है।

श्रीलंका की दमदार वापसी, स्कॉटलैंड को 3 विकेट से हराकर दर्ज की यादगार जीत

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महिला टी20 विश्व कप 2026 के ग्रुप-2 के बेहद सांसे रोक देने वाले एक बेहद कड़े मुकाबले में श्रीलंका की महिला क्रिकेट टीम ने स्कॉटलैंड को अंतिम ओवर के रोमांच में 3 विकेट से पराजित कर दिया। जीत के लिए मिले 152 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंकाई टीम ने 19.5 ओवरों में 7 विकेट खोकर 154 रन बनाए और जीत अपने पाले में कर ली। इस धमाकेदार जीत के साथ ही श्रीलंका ने न सिर्फ सेमीफाइनल की अपनी उम्मीदों को जिंदा रखा है, बल्कि महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में पहली बार किसी एक सीजन में तीन मुकाबले जीतने का एक नया रिकॉर्ड भी अपने नाम दर्ज करा लिया है। मैच में दबाव के क्षणों में 21 गेंदों पर 21 रनों की सूझबूझ भरी और संकटमोचक पारी खेलने वाली निलाक्षिका सिल्वा को उनकी शानदार बल्लेबाजी के लिए 'प्लेयर ऑफ द मैच' के पुरस्कार से नवाजा गया।

स्कॉटलैंड की मजबूत बल्लेबाजी: सारा ब्राइस की आतिशी पारी से खड़ा किया चुनौतीपूर्ण स्कोर

मुकाबले में टॉस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी स्कॉटलैंड की टीम ने निर्धारित 20 ओवरों के खेल में 6 विकेट के नुकसान पर 151 रनों का एक मजबूत और चुनौतीपूर्ण स्कोर बोर्ड पर लगाया। शुरुआत में संभलकर खेलने के बाद स्कॉटिश कप्तान कैथरीन ब्राइस और सलामी बल्लेबाज डार्सी कार्टर ने पारी के स्कोर को गति दी। कार्टर के पवेलियन लौटने के बाद मैदान पर उतरीं सारा ब्राइस ने श्रीलंकाई गेंदबाजों की जमकर खबर ली। उन्होंने महज 33 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 47 रनों की आक्रामक पारी खेली और पारी की अंतिम गेंद पर शानदार चौका जड़कर अपनी टीम को 150 के पार पहुंचाया। श्रीलंका की तरफ से गेंदबाजी में कविशा दिलहारी, मिथाली अयोध्या और सुगंदिका कुमारी ने सटीक लाइन-लेंथ से गेंदबाजी करते हुए महत्वपूर्ण सफलताएं हासिल कीं।

कप्तान चामरी अट्टापट्टू का पावरप्ले में तूफान, श्रीलंका को मिली आक्रामक शुरुआत

चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी श्रीलंकाई टीम को उनकी स्टार कप्तान और सलामी बल्लेबाज चामरी अट्टापट्टू ने विस्फोटक शुरुआत दी। अट्टापट्टू ने स्कॉटलैंड के गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त करते हुए मात्र 16 गेंदों में 206 से ऊपर के स्ट्राइक रेट से 33 रन ठोक दिए, जिसमें 6 बेहतरीन चौके और 1 गगनचुंबी छक्का शामिल रहा। उनकी इस आतिशी बल्लेबाजी की बदौलत श्रीलंका ने शुरुआती 6 ओवरों (पावरप्ले) में 2 विकेट पर 65 रन जोड़े, जो इस पूरे विश्व कप टूर्नामेंट में श्रीलंका का अब तक का सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर भी रहा। हालांकि, कप्तान अट्टापट्टू के आउट होते ही स्कॉटलैंड की गेंदबाजों ने मैच में जोरदार वापसी की और नियमित अंतराल पर विकेट चटकाकर श्रीलंका को बैकफुट पर धकेल दिया।

अंतिम ओवर का हाई-वोल्टेज ड्रामा: चोटिल गेंदबाज और श्रीलंका की खिताबी जीत

मैच के हाफ-वे मार्क यानी 10 ओवरों की समाप्ति पर श्रीलंका का स्कोर 4 विकेट पर 81 रन था, लेकिन स्कॉटलैंड ने अपनी कसी हुई फील्डिंग और कसी गेंदबाजी के दम पर मैच को पूरी तरह फंसा दिया था। 15 ओवर के बाद श्रीलंका की टीम 6 विकेट पर 118 रन बनाकर संघर्ष कर रही थी और मैच किसी भी तरफ पलट सकता था। आखिरी 6 गेंदों पर श्रीलंका को जीत के लिए कुछ रनों की दरकार थी, लेकिन तभी मैदान पर एक अप्रत्याशित मोड़ आया। स्कॉटलैंड की प्रमुख तेज गेंदबाज रेचल स्लेटर पैर में क्रैम्प्स (मांसपेशियों में खिंचाव) के कारण अपना ओवर पूरा नहीं कर सकीं और उन्हें मैदान से बाहर जाना पड़ा।

उनकी जगह बची हुई गेंदे फेंकने आईं कामचलाऊ गेंदबाज चटर्जी का फायदा उठाते हुए श्रीलंका की अनुभवी खिलाड़ी सुगंदिका कुमारी ने शॉर्ट थर्ड मैन के पास से एक बेहद खूबसूरत चौका बटोरकर अपनी टीम को 1 गेंद शेष रहते एक यादगार और रोमांचक जीत दिला दी।

श्रीलंकाई टीम के नाम दर्ज हुए दो बड़े ऐतिहासिक रिकॉर्ड

स्कॉटलैंड के खिलाफ मिली इस रोमांचक जीत ने श्रीलंकाई महिला क्रिकेट के इतिहास में एक नया सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है:

  • टी20 विश्व कप का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन: श्रीलंका ने महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में पहली बार किसी एक संस्करण के भीतर 3 मैचों में जीत हासिल करने का कीर्तिमान स्थापित किया है।

  • सबसे सफल रन चेज: 152 रनों का पीछा कर मिली यह जीत महिला टी20 विश्व कप के इतिहास में रनों के लिहाज से श्रीलंका की अब तक की सबसे बड़ी और सबसे सफल रन चेज (सफलतापूर्वक लक्ष्य का पीछा) भी बन गई है।

गोलीकांड की सच्चाई आई सामने, अपने ही हथियार से रची थी साजिश

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पाली:शहर के व्यस्त नवलखा रोड पर मोहर्रम की रात को एक युवक को गोली लगने के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। पुलिस की गहन तफ्तीश में यह साफ हो गया है कि युवक पर किसी बाहरी व्यक्ति ने हमला या फायरिंग नहीं की थी, बल्कि उसके खुद के पास मौजूद अवैध देसी कट्टे का ट्रिगर अचानक गलती से दब गया था। इस वजह से गोली सीधे उसकी जांघ में जा धंसी। अवैध हथियार रखने के जुर्म और पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए घायल युवक ने मौके पर ही साजिश रची और अज्ञात हमलावर द्वारा गोली मारे जाने की झूठी कहानी गढ़ दी। हालांकि, कोतवाली थाना प्रभारी रविंद्र सिंह खींची के नेतृत्व में मुस्तैद पुलिस टीम ने महज दूसरे ही दिन इस फर्जी कहानी की परतें खोलकर रख दीं।

भीड़ में अज्ञात शख्स द्वारा गोली मारने का रचा था ड्रामा

मामले की विस्तृत जानकारी के अनुसार, इंद्रा कॉलोनी के रहने वाले 21 वर्षीय नदीम, पुत्र शौकत अली को गुरुवार की रात करीब 10 बजे लहुलूहान हालत में बांगड़ अस्पताल लाया गया था, जहां डॉक्टरों को एक्सरे जांच में उसकी जांघ के भीतर एक जिंदा कारतूस (गोली) फंसी हुई मिली। अस्पताल पहुंची पुलिस की शुरुआती पूछताछ में नदीम लगातार यही बयान देता रहा कि वह नवलखा रोड पर मोहर्रम के जुलूस की भीड़ में खड़ा था, तभी अचानक किसी अज्ञात शख्स ने उस पर गोली चला दी। थाना प्रभारी रविंद्र सिंह खींची को युवक के बयानों और घटनास्थल के हालातों को देखकर शुरू से ही इस कहानी पर गहरा संदेह था। जब पुलिस ने बारीकी से घायल युवक के कपड़ों और उसकी जांघ पर बने जख्म के निशानों का वैज्ञानिक निरीक्षण किया, तो यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि गोली किसी दूर खड़े व्यक्ति ने नहीं, बल्कि बेहद नजदीक यानी 'पॉइंट ब्लैंक रेंज' से चली थी।

डर के मारे दोस्त को छुपाने दिया कट्टा, पुलिस ने दबोचा

कड़ाई से की गई जांच और कड़ियों को जोड़ने पर असली सच्चाई सामने आ गई। दरअसल, नदीम भीड़ के बीच अपने पास एक अवैध देसी कट्टा छिपाकर घूम रहा था, जिसे संभालते वक्त अचानक ट्रिगर पर दबाव बढ़ गया और गोली चल गई। गोली लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ा। गैर-कानूनी हथियार के साथ पकड़े जाने के डर से उसने तुरंत सूझबूझ दिखाई और अपने पास मौजूद कट्टे को अपने दोस्त फरदीन के हवाले कर दिया। इसके बाद वह खुद को बेकसूर बताते हुए अस्पताल पहुंच गया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इंद्रा कॉलोनी निवासी 19 वर्षीय फरदीन, पुत्र मोहम्मद इस्माइल को घेराबंदी करके गिरफ्तार कर लिया है। फरदीन वारदात के तुरंत बाद उस अवैध हथियार को छिपाने के इरादे से मौके से फरार हो गया था, जिसे पुलिस ने उसके कब्जे से बरामद कर लिया है।

दोनों युवकों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज

कोतवाली पुलिस ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए दोनों युवकों के खिलाफ अवैध हथियार रखने, उसे छिपाने, पुलिस को गुमराह करने और फर्जी सूचना देने के आरोप में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इन युवकों के पास यह अवैध देसी कट्टा कहां से आया था और इसके पीछे किसी बड़े अंतरराज्यीय हथियार तस्कर गिरोह का हाथ तो नहीं है। मोहर्रम जैसे संवेदनशील मौके पर इस तरह हथियार लेकर घूमने की घटना के बाद पुलिस ने क्षेत्र में गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक कड़ा कर दिया है।

सेशेल्स दौरे पर PM मोदी, जानिए भारत-सेशेल्स रिश्तों की अहमियत और रणनीतिक मायने

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विक्टोरिया। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन दिवसीय आधिकारिक कूटनीतिक यात्रा पर हिंद महासागर के रणनीतिक देश सेशेल्स पहुंच गए हैं। हवाई अड्डे पर आगमन के दौरान राजनयिक शिष्टाचार (प्रोटोकॉल) को किनारे रखते हुए सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ पैट्रिक हर्मिनी ने स्वयं उपस्थित होकर प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से आत्मीय स्वागत किया। इस अभूतपूर्व और भव्य स्वागत के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री साझेदार और दीर्घकालिक विश्वसनीय मित्र है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस ऐतिहासिक राजकीय यात्रा का मुख्य ध्येय दोनों राष्ट्रों के पारस्परिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और आपसी सहयोग के माध्यम से दोनों देशों की जनता के लिए प्रगति के नए मार्ग प्रशस्त करना है।

राष्ट्रीय दिवस का स्वर्ण जयंती समारोह और नेशनल असेंबली में ऐतिहासिक संबोधन

इस रणनीतिक यात्रा के मुख्य एजेंडे के तहत प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस के पावन अवसर पर आयोजित होने वाले भव्य स्वर्ण जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होंगे। यह अवसर इसलिए भी अत्यंत विशिष्ट है क्योंकि यह वर्ष भारत और सेशेल्स के मध्य आधिकारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना की 50वीं वर्षगांठ का भी प्रतीक है। अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी सेशेल्स की नेशनल असेंबली (संसद) को भी संबोधित करेंगे, और यह गौरवपूर्ण उपलब्धि हासिल करने वाले वे भारत के इतिहास के सर्वप्रथम प्रधानमंत्री बनेंगे। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली द्विपक्षीय वार्ता का मुख्य फोकस 'विजन महासागर' (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) तथा 'ग्लोबल साउथ' के साझा हितों को वैश्विक मंचों पर मजबूती से आगे बढ़ाना है।

भारतीय सैन्य दल की भागीदारी और पश्चिमी हिंद महासागर में रणनीतिक अवस्थिति

इस ऐतिहासिक स्वर्ण जयंती उत्सव की भव्यता को बढ़ाने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों की एक विशेष टुकड़ी और भारतीय नौसेना के दो अत्याधुनिक युद्धपोत भी सेशेल्स के तट पर पहुंच चुके हैं। भौगोलिक दृष्टिकोण से देखें तो सेशेल्स पश्चिमी हिंद महासागर में लगभग 455 वर्ग किलोमीटर के दायरे में बिखरे 115 सुरम्य द्वीपों पर आधारित एक समृद्ध देश है, जिसकी राजधानी माहे द्वीप पर स्थित विक्टोरिया शहर है। मेडागास्कर के उत्तर-पूर्व और मुख्य भूमि अफ्रीका से करीब 1,600 किलोमीटर दूर स्थित यह द्वीपीय राष्ट्र अपनी प्राचीन सफेद रेत, बेजोड़ मूंगा चट्टानों (कोरल रीफ) और दुर्लभ जैविक विविधता के लिए पूरी दुनिया के पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र माना जाता है।

चीन की घेराबंदी, ब्लू इकोनॉमी और समुद्री सुरक्षा में साझा रक्षा सहयोग

हिंद महासागर क्षेत्र में चीन के बढ़ते सैन्य और आर्थिक प्रभाव को संतुलित करने के नजरिए से सेशेल्स की भौगोलिक स्थिति भारत के लिए अत्यधिक सामरिक महत्व रखती है। दोनों देशों के रक्षा बल समुद्री व्यापारिक मार्गों की रक्षा करने, समुद्री डकैती (पायरेसी) को रोकने, अवैध शिकार पर अंकुश लगाने और आतंकवाद के सफाए के लिए निरंतर संयुक्त गश्त और खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान करते हैं। इसी सुदृढ़ रक्षा साझेदारी के तहत भारत ने पूर्व में सेशेल्स के कोस्ट गार्ड को शक्तिशाली नौसैनिक जहाज और डोर्नियर निगरानी विमान उपहार स्वरूप सौंपे हैं। इसके अतिरिक्त, सेशेल्स का विशाल विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) समुद्री संसाधनों के दोहन और 'ब्लू इकोनॉमी' को बढ़ावा देने के लिए भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे वहां रह रही लगभग 11% भारतीय मूल की आबादी का मजबूत सामाजिक समर्थन प्राप्त है।

आर्थिक संकट में घिरा पाकिस्तान, कर्ज 81.9 ट्रिलियन रुपये के पार; कैसे निकलेगा देश?

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इस्लामाबाद। पड़ोसी देश पाकिस्तान इस समय अपने संपूर्ण इतिहास के सबसे गंभीर और रिकॉर्डतोड़ कर्ज संकट के जाल में फंस गया है। बेहद नाजुक आर्थिक परिस्थितियों और वित्तीय कुप्रबंधन से जूझ रहे पाकिस्तान पर कुल संचयी कर्ज का बोझ बढ़कर ८१.९३ ट्रिलियन (लाख करोड़) रुपये के अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच गया है। इस भयावह स्थिति का मुख्य कारण अप्रैल २०२६ के दौरान सरकार द्वारा लिया गया भारी-भरकम कर्ज है। आधिकारिक वित्तीय आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान की केंद्र सरकार का कुल कर्ज केवल अप्रैल के महीने में ही १.४ ट्रिलियन रुपये बढ़ गया, जिसने पुराने सभी रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए। यह तीव्र उछाल देश की खोखली हो चुकी आर्थिक व्यवस्था, बढ़ते राजकोषीय दबाव और अपने दैनिक प्रशासनिक खर्चों व सरकारी दायित्वों को पूरा करने के लिए केवल बाहरी व आंतरिक उधारी पर टिकी रहने की विवशता को साफ तौर पर उजागर करता है।

चालू वित्त वर्ष में बेकाबू उधारी और घरेलू-विदेशी कर्ज का विश्लेषण

आर्थिक विश्लेषकों और वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, कर्ज के ये ताजा आंकड़े पाकिस्तानी सरकारी खजाने की उस स्थायी संरचनात्मक कमजोरी को दर्शाते हैं, जिसके कारण पूरा देश इस समय वेंटिलेटर पर चल रहा है। चालू वित्त वर्ष के शुरुआती १० महीनों के भीतर ही केंद्र सरकार के ऋण में ४ ट्रिलियन रुपये से अधिक की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इस कुल बढ़ोतरी का सूक्ष्म विश्लेषण करें तो इसमें से घरेलू स्रोतों से लिया गया कर्ज ३.६ ट्रिलियन रुपये से ज्यादा था, जबकि विदेशी संस्थाओं से लिया गया ऋण ४०० बिलियन (अरब) रुपये से अधिक बढ़ा है। बजट घाटे को पाटने और पुराने अंतरराष्ट्रीय ऋणों की किस्तों को चुकाने के लिए शहबाज शरीफ सरकार पूरी तरह से नई उधारी पर निर्भर हो चुकी है, जिसके दुष्परिणामों को लेकर वैश्विक वित्तीय विशेषज्ञ लगातार इस्लामाबाद को सचेत कर रहे हैं।

कर्ज का दुष्चक्र, चेतावनियों की अनदेखी और विकास कार्यों पर ताला

पाकिस्तान की लगातार आती रही सरकारों की इसी अदूरदर्शी नीति के कारण देश में एक ऐसा आत्मघाती आर्थिक चक्र बन चुका है, जिसे अब उलटना या नियंत्रित करना लगभग असंभव नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, नीति-निर्माताओं और अर्थशास्त्रियों द्वारा राजस्व वसूली में आ रही भारी गिरावट और लगातार बढ़ते राजकोषीय घाटे को लेकर बार-बार रेड अलर्ट जारी करने के बावजूद कर्ज का यह पहाड़ बड़ा होता जा रहा है। इसका सबसे घातक और व्यापक असर देश के सामाजिक ताने-बाने पर पड़ रहा है, क्योंकि बजट का एक बहुत बड़ा और मुख्य हिस्सा देश की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) और लोक कल्याणकारी योजनाओं में निवेश होने के बजाय केवल पुराने कर्ज का ब्याज और किस्तें चुकाने में ही स्वाहा हो रहा है।

पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और संकट से उबरने के कड़े विकल्प

इस पहले से ही बदतर स्थिति के बीच, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तीव्र भू-राजनीतिक और सैन्य तनाव ने पाकिस्तान के लिए एक नया संकट खड़ा कर दिया है। इस वैश्विक उथल-पुथल के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में लगी आग ने पाकिस्तान के आयात बिल को अत्यधिक बढ़ा दिया है, जिससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार और विदेशी खातों पर असहनीय दबाव आ गया है। इस गहरे दलदल से बाहर निकलने के लिए आर्थिक विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि यदि पाकिस्तान को अपने अस्तित्व को बचाना है, तो उसे तत्काल प्रभाव से कड़े संरचनात्मक सुधार लागू करने होंगे, कर चोरी रोककर मजबूत राजस्व सृजन करना होगा और सरकारी फिजूलखर्ची व सार्वजनिक खर्चों पर कठोरता से अंकुश लगाना होगा। यदि कर्ज बढ़ने के इन बुनियादी कारणों का समय रहते स्थायी इलाज नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में पाकिस्तान पूरी तरह से दिवालिया होने की कगार पर पहुंच जाएगा।

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