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78 साल बाद गारपा गांव में हुआ उजाला, दुर्गम वनांचल तक पहुँची बिजली

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रायपुर :  छत्तीसगढ़ के सुदूर वनांचल और कभी नक्सलवाद के साये में रहे क्षेत्रों में अब विकास का नया सूर्याेदय हो रहा है। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नियद नेल्ला नार योजना (आपका अच्छा गाँव) के तहत नारायणपुर जिले के अत्यंत दुर्गम ग्राम गारपा में आजादी के बाद पहली बार बिजली पहुँची है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के संकल्प का ही परिणाम है कि आज इन गाँवों के 48 परिवारों के घरों में पहली बार बिजली का बल्ब रोशन हुआ है।

चुनौतियों पर भारी पड़ी प्रशासनिक दृढ़ता

          नारायणपुर जिला मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच बसे गारपा तक बिजली पहुँचाना एक बड़ी चुनौती थी। इस परियोजना को लगभग 55 लाख रुपये की लागत से धरातल पर उतारा गया।  भौगोलिक विषमताओं और सुरक्षा संबंधी जोखिमों के बावजूद बिजली विभाग की तकनीकी टीम ने मिशन मोड में काम करते हुए समय सीमा के भीतर लाइन विस्तार का कार्य पूर्ण किया।

विकास की मुख्यधारा से जुड़ा गारपा

          विद्युतीकरण से गारपा के ग्रामीणों के जीवन में व्यापक बदलाव आने तय हैं। अब बच्चों को रात में पढ़ाई के लिए ढिबरी या मिट्टी के तेल पर निर्भर नहीं रहना होगा। बिजली आने से टीकाकरण के लिए कोल्ड स्टोरेज और अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार आसान होगा। ग्रामीण अब कुटीर उद्योगों, मोबाइल कनेक्टिविटी और अन्य तकनीकी सुविधाओं से जुड़ सकेंगे।

बदलता नारायणपुर नियद नेल्लनार बना वरदान

        मुख्यमंत्री के नेतृत्व में यह योजना उन क्षेत्रों के लिए वरदान साबित हो रही है, जहाँ नक्सली भय के कारण दशकों से विकास कार्य ठप थे। बिजली पहुंचने से अब गारपा के बच्चों को रात में पढ़ाई करने में आसानी होगी। जिला प्रशासन का लक्ष्य अब अन्य दूरस्थ गांवों में भी प्राथमिकता के साथ बिजली, सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएँ पहुँचाना है।
 

न्यूजीलैंड के विशेषज्ञों ने साझा की शहद प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक तकनीकें

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भोपाल : मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की उत्पादन इकाई लघु वनोपज प्रसंस्करण एवं अनुसंधान केंद्र, बरखेड़ा पठानी, भोपाल में आयोजित ‘वनधन संवाद’ कार्यशाला में न्यूजीलैंड से आए विशेषज्ञों ने शहद संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की आधुनिक तकनीकों पर विस्तृत जानकारी साझा की। कार्यशाला का उद्देश्य वन समितियों और वनधन केंद्रों को शहद संग्रहण, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग एवं मार्केटिंग की उन्नत तकनीकों से जोड़ना तथा मध्यप्रदेश के शहद को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाना है।

कार्यशाला में न्यूजीलैंड के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य श्री ईशान जयवर्धने, श्री बायरन पीटर टेलर एवं सुश्री प्रियम अरोरा ने सहभागिता करते हुए वनधन विकास केंद्रों के प्रतिनिधियों को शहद उत्पादन की उत्कृष्ट पद्धतियों, गुणवत्ता नियंत्रण तथा वैश्विक मानकों के अनुरूप प्रसंस्करण तकनीकों से अवगत कराया। विशेषज्ञों ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए और बताया कि वैज्ञानिक तरीकों एवं आधुनिक प्रबंधन से शहद उत्पादन को अंतर्राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सकता है।

कार्यशाला में मध्यप्रदेश राज्य लघु वनोपज संघ की प्रबंध संचालक श्रीमती कमलिका मोहंता ने वनधन केंद्रों एवं वन समितियों को सशक्त बनाने पर बल देते हुए शहद के ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन और निर्यात को बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों के अनुभवों से प्रदेश के वनधन केंद्रों को नई दिशा मिलेगी।

न्यूजीलैंड से आये प्रतिनिधिमंडल ने एमएफपी पार्क की प्रयोगशाला तथा शहद प्रसंस्करण इकाई का भ्रमण भी किया और वहां संचालित व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। कार्यशाला में ट्रायफेड, एपीडा तथा विश्व बैंक के प्रतिनिधियों सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए वन विभाग के अधिकारियों एवं वनधन केंद्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
 

माता और बहनों का सम्मान सर्वोपरि : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

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भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश सरकार के लिये माताओं और बहनों का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना मातृ शक्ति के कल्याण के लिये प्रदेश शासन द्वारा संचालित सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है। आज यहाँ पर रक्षाबंधन, भाईदूज और दीवाली सहित सभी त्यौहार एक साथ मनाने का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव नरसिंहपुर जिले के ग्राम मुंगवानी में आयोजित मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 36वीं किस्त के राशि अन्तरण और हितलाभ वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने प्रदेश की 1.25 करोड़ लाड़ली बहनों के खातों में 1835 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 296 करोड़ रुपये लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने के साथ ही उन्हें सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। अब तक योजना में 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि लाड़ली बहनों के खातों में अंतरित की जा चुकी है।

रानी दुर्गावती के पराक्रम के सम्मान में जबलपुर व सिंग्रामपुर में हुईं कैबिनेट बैठकें

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान नरसिंह की यह भूमि रानी दुर्गावती के पराक्रम की साक्षी है। रानी दुर्गावती के सम्मान में प्रदेश सरकार द्वारा जबलपुर और सिंग्रामपुर में कैबिनेट बैठक आयोजित की है। वहीं आदिवासी शहीद भभूत सिंह के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान के सम्मान में भी विशेष कैबिनेट बैठक का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी निरंतर बढ़ रही है। वर्तमान में प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से 6 पर महिला सांसद हैं, जबकि 27 महिला विधायक एवं 5 महिला मंत्री कार्यरत हैं।

कम्प्यूटर एवं सुरक्षा के क्षेत्र में महिलाएं आ रहीं हैं आगे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना के माध्यम से बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने कहा कि कम्प्यूटर और सुरक्षा के क्षेत्र में भी महिलाएं आगे आ रही है। पुलिस विभाग में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। उन्होंने बताया कि 4 लाख से अधिक महिलाएँ स्वरोजगार से जुड़ी हैं। रेडीमेड कपड़ा उद्योग एवं कारखानों में कार्य करने वाली महिलाओं को 5000 रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। साथ ही 34 लाख महिला कृषकों को दुग्ध उत्पादन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने के प्रयास किये जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि 25 गाय या भैंस का पालन करने वाले पशुपालकों को सरकार द्वारा 10 लाख रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है।

उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरसिंहपुर जिला गन्ने की खेती के लिए प्रसिद्ध है और यह शक्कर का कटोरा है। इससे यहां के 20 हजार से अधिक परिवारों को रोजगार मिल रहा है। गाडरवारा की तुअर दाल प्रदेश ही नहीं देश में भी अपनी अलग पहचान बनाए हुए है। नरसिंहपुर जिला सोयाबीन और गेहूं के उत्पादन में भी अग्रणी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार गेहूं, चना, सरसों, मसूर एवं उड़द की समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित कर रही है। उड़द पर 600 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस भी दिया जाएगा। मध्यप्रदेश देश का सबसे अधिक गेहूं खरीदी करने वाला राज्य है। किसानों के हित में 23 मई तक खरीदी की जा रही है। आवश्यकता हुई तो आगे भी खरीदी की अवधि बढ़ाई जाएगी।

मध्यप्रदेश में हो रहा तेजी से विकासात्मक बदलाव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद से देश बदल रहा है और इसके साथ ही मध्यप्रदेश में भी तेजी से बदलाव हो रहा है। सिकलसेल, कुपोषण से लड़ने में प्रदेश सरकार सफल हो रही है। लाड़ली लक्ष्मी योजना से 53 लाख बेटियों की जिंदगी में बदलाव आ रहा है। प्रदेश की 80 लाख बेटियों को शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना में 55 हजार रुपये की राशि दी जा रही है।

सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार का 1.50 लाख रुपये का खर्च देगी सरकार

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री राहत योजना में नरसिंहपुर जिले में बेहतर कार्य हो रहा है। इस योजना में सड़क दुर्घटना में घायलों के उपचार के लिए डेढ़ लाख रुपये तक का सारा खर्च सरकार दे रही है। पहले दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए लोग डरते थे, लेकिन अब उन्हें डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि मानवीय पहल कर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्तियों को सरकार द्वारा 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदाय की जा रही है।

जल की एक-एक बूंद बचाने की अपील

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल गंगा संवर्धन अभियान की चर्चा करते हुए कहा कि जल है, तो जीवन है, जल है तो खेती है और जल है तो समृद्धि है। हमारे धार्मिक अनुष्ठानों में भी जल का विशेष महत्व है। प्रदेश के नगरीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण का अभियान चलाया जा रहा है। इसमें आमजन को सहभागी बनना चाहिए। उन्होंने नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव विकासखंड के ग्राम मेख में एक मालगुजार द्वारा 21 एकड़ जमीन तालाब निर्माण के लिए दान किए जाने की सराहना करते हुए कहा कि यह अनुकरणीय उदाहरण है। परिवार को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जायेगा।

जिले की धरोहरों पर केंद्रित कैलेंडर का विमोचन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नरसिंहपुर जिले की ऐतिहासिक धार्मिक एवं पुरातात्विक धरोहरों पर आधारित कलेंडर का विमोचन किया। कैलेंडर में बरमान घाट, मृगनाथ तपोवन आश्रम, दादा दूल्हादेव महाराज, नरसिंह मंदिर, चौगान का किला, बरहेटा की पुरातात्विक धरोहर, गरूण मंदिर, बिनेकी टोला के शैल चित्र, मां राजराजेश्वरी त्रिपुरसुंदरी मंदिर, पीतल नगरी चीचली, गुरू गुफा अमोदा शंकर घाट को शामिल किया गया है।

40 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में 296 करोड़ 34 लाख रुपये की लागत के 40 विकास कार्यों का लोकार्पण व भूमि-पूजन किया। इसमें 215 करोड़ 65 लाख रुपये की लागत के 17 कार्यों का भूमि-पूजन एवं 80 करोड़ 68 लाख रुपये लागत के 23 कार्यों का लोकार्पण के कार्य शामिल है।

मुंगवानी में बनेगा कॉलेज, शेढ़ नदी पर बनेगा पुल

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधानसभा क्षेत्र गोटेगांव के ग्राम मुंगवानी में कॉलेज खोलने की घोषणा की। उन्होंने बेलखेड़ी- बरहटा- मुंगवानी मार्ग के शेढ़ नदी पर पुल निर्माण, नरसिंहपुर में इंडोर आउडोर स्टेडियम का उन्नयन के साथ ही हॉकी के लिए एस्ट्रोटर्फ मैदान और ग्राम बुढ़ैना में बांध निर्माण की घोषणा की।

पेट्रोल-डीजल का अनावश्यक उपयोग न करने की अपील

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई अपील अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से ईधन के न्यूनतम उपयोग का आहवान किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब उनके काफिले में गाड़ियों की संख्या 13 से घटाकर कर 8 कर दी गई है। देश के विदेशी मुद्रा भंडार बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदें। रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करें, जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा दे और प्राकृतिक खेती को अपनाएं।

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने कहा कि आज का दिन प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिये उत्सव और सम्मान का दिन है। प्रदेश सरकार महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिये लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना जैसी पहल ने प्रदेश की महिलाओं और बेटियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है।

पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कहा कि प्रदेश सरकार गांव, गरीब, किसान, श्रमिक और मातृशक्ति के कल्याण के संकल्प के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने प्रदेश की करोड़ों महिलाओं के जीवन में आर्थिक आत्मविश्वास पैदा किया है और महिलाओं को परिवार तथा समाज में नई पहचान मिली है।

सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने कहा कि मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना जैसी महिलाओं के लिए कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन कर मध्यप्रदेश ने पूरे देश के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार महिला सशक्तिकरण, किसानों के उत्थान और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखकर निरंतर कार्य कर रही है।

सांसद चौधरी दर्शन सिंह ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार किसान, युवाओं, महिलाओं और गरीबों के समग्र कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। विभिन्न जनहितकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के प्रत्येक वर्ग को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। किसानों को आधुनिक कृषि सुविधाएं, युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने तथा गरीब परिवारों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।

विभिन्न योजनाओं में किया हितलाभ वितरण, प्रतिभाओं को किया सम्मानित

कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा शासकीय योजनाओं एवं जनकल्याणकारी गतिविधियों पर आधारित प्रदर्शनी लगाई गई, जिसने आगंतुकों और उपस्थित जनसमूह का विशेष ध्यान आकर्षित किया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभागों के नवाचारों और प्रयासों की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जिले की नवाचारी पहल “अभ्युदय निःशुल्क कोचिंग” के माध्यम से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को दी जा रही शैक्षणिक सहायता को प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कृषि विभाग द्वारा प्रदर्शित समेकित नरवाई प्रबंधन प्रणाली के मॉडल का अवलोकन कर अधिकारियों से चर्चा की तथा किसानों के हित में इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

प्रदर्शनी में गन्ने के अवशेषों से निर्मित पर्यावरण अनुकूल प्लाईवुड, पारंपरिक पीतल के बर्तन तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं द्वारा तैयार किए गए सजावटी एवं उपयोगी उत्पाद भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन उत्पादों का अवलोकन कर स्व-सहायता समूहों की महिलाओं के कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को हितलाभों का वितरण किया। उन्होंने पात्र हितग्राहियों को स्वीकृति-पत्र एवं आर्थिक सहायता प्रदान कर शासन की योजनाओं का लाभ आमजन तक पहुंचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक बोर्ड परीक्षाओं की प्रावीण्य सूची में स्थान प्राप्त करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रशस्ति-पत्र एवं टैबलेट प्रदान कर सम्मानित किया। साथ ही वॉलीबॉल एवं क्रिकेट प्रतियोगिताओं में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को ट्रैक सूट भेंट कर प्रोत्साहित किया गया।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं को सीसीएल राशि सहित विभिन्न हितलाभ वितरित किए गए। राहवीर योजना अंतर्गत सड़क दुर्घटनाओं के दौरान घायलों को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाने वाले राहगीरों को भी सम्मानित किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यक्रम में 51 लाड़ली बहनों ने कलश यात्रा के माध्यम से अगवानी की। उन्होंने इन बहनों को साड़ी भेंट कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित लाड़ली बहनों पर पुष्प-वर्षा कर उनका आत्मीय अभिनंदन किया। कार्यक्रम का शुभारंभ कन्या-पूजन व दीप प्रज्ज्वलित कर किया।

इस अवसर परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती ज्योति काकोड़िया, तेंदूखेड़ा विधायक विश्वनाथ सिंह पटेल, विधायक सिवनी दिनेश राय, पूर्व राज्यमंत्री जालम सिंह पटेल, जनप्रतिनिधि, नागरिक और बड़ी संख्या में लाड़ली बहने मौजूद रहीं।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव की प्रमुख घोषणाएं

नरसिंहपुर के मुंगवानी में महाविद्यालय खोला जाएगा।

शेढ़ नदी पर 24 करोड़ की लागत से 250 मीटर लंबा पुल बनेगा।

नरसिंहपुर के हॉकी स्टेडियम में एस्ट्रो टर्फ बिछाई जाएगी।

सिंचाई सुविधा बढ़ाने के लिए बुडेना बांध के लिए परीक्षण करवाया जाएगा।
 

BJP प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने नीतू परमार को दिलाई पार्टी की सदस्यता

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-क्षेत्र के विकास व जनसेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने भाजपा में शामिल हुईं परमार
– भाजपा एक परिवार, सभी कार्यकर्ता मिलकर संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे

बैतूल/भोपाल, 13/05/2026। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक श्री हेमंत खण्डेलवाल ने बुधवार को बैतूल में बैतूल जिले की मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू परमार एवं उनके पति श्री प्रहलाद सिंह परमार को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलाई। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री खण्डेलवाल ने पार्टी का अंगवस्त्र पहनाकर उनका स्वागत किया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू परमार ने भारतीय जनता पार्टी की रीति-नीति एवं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा किए जा रहे विकास व जनकल्याण के कार्यों से प्रभावित होकर भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। उन्होंने कहा कि भाजपा संगठन एक परिवार है। हम सभी कार्यकर्ता परिवार भाव से मिलकर संगठन के कार्यों को आगे बढ़ाएंगे और सरकार के कार्यों को जनता तक पहुंचाएंगे। 

जनता की सेवा करने वालों के लिए कांग्रेस में कोई स्थान नहीं

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष श्री हेमंत खण्डेलवाल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी एक परिवार है, यहां सभी का स्वागत है। सभी कार्यकर्ता परिवार भाव के साथ जनता की सेवा और संगठन के कार्यों को बुलंदियों तक पहुंचाते हैं। कांग्रेस पार्टी में जनता की सेवा करने वाले कार्यकर्ताओं के लिए कोई स्थान नहीं है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है। देश और प्रदेश की जनता लगातार भाजपा पर भरोसा कर रही है। भाजपा संगठन साफ सुधरी राजनीति करने वालों को काम करने के लिए अनुकूलता प्रदान करना और मौका देने का कार्य करता है।  

भाजपा मेरा परिवार, मैं इसकी सदस्य- श्रीमती नीतू सिंह परमार

भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद मुलताई नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती नीतू परमार ने कहा कि मैं पहले भी भाजपा की सदस्य रही हूं। वर्षों तक भाजपा संगठन में एक सामान्य कार्यकर्ता की तरह रहकर कार्य किया है। भाजपा मेरा परिवार है और मैं इसकी सदस्य हूं। मुलताई नगर पालिका क्षेत्र में रहने वाली देवतुल्य जनता की सेवा और अधिक प्रभावी रूप से कर सकूं, इसलिए भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है।इस अवसर पर जिला अध्यक्ष श्री सुधाकर पंवार, विधायक श्री चंद्रशेखर देशमुख, जिला मंत्री श्रीमती वर्षा गढ़ेकर उपस्थित रहीं।
 

CBSE का बड़ा अपडेट! 12वीं सप्लीमेंट्री परीक्षा जुलाई में होगी आयोजित

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नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने कक्षा 12वीं के प्रतीक्षित परिणाम घोषित कर दिए हैं। इस वर्ष बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन 17 फरवरी से 10 अप्रैल तक देश-विदेश के विभिन्न केंद्रों पर किया गया था, जबकि स्पोर्ट्स कोटे के छात्रों के लिए विशेष परीक्षाएं 11 से 13 अप्रैल के बीच संपन्न हुईं। 13 मई को जारी नतीजों के साथ ही लाखों छात्रों का इंतजार खत्म हो गया है।

परिणाम का विश्लेषण: 85.20% छात्र हुए सफल

इस वर्ष सीबीएसई 12वीं का कुल उत्तीर्ण प्रतिशत 85.20% दर्ज किया गया है। आंकड़ों के अनुसार, कुल 17,80,365 छात्रों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 17,68,968 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। सफल होने वाले छात्रों की संख्या 15,07,109 रही। हालांकि, इस बार कंपार्टमेंट श्रेणी में आने वाले छात्रों की संख्या में वृद्धि देखी गई है। कुल 1,68,380 (9.26%) छात्रों को कंपार्टमेंट श्रेणी में रखा गया है, जो पिछले वर्ष (7.63%) की तुलना में अधिक है।

मेरिट लिस्ट पर बोर्ड का रुख

अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को रोकने के उद्देश्य से सीबीएसई ने इस बार भी आधिकारिक मेरिट लिस्ट जारी नहीं की है। साथ ही, छात्रों को प्रथम, द्वितीय या तृतीय श्रेणी (Division) भी प्रदान नहीं की गई है। हालांकि, बोर्ड उन शीर्ष 0.1 प्रतिशत छात्रों को 'मेरिट सर्टिफिकेट' प्रदान करेगा, जिन्होंने विभिन्न विषयों में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए हैं। ये सर्टिफिकेट 'डिजिलॉकर' के माध्यम से प्राप्त किए जा सकेंगे।

पुनर्मूल्यांकन (Revaluation) की सुविधा

जो छात्र अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं, उनके लिए बोर्ड 18 मई 2026 से पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू करेगा। सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन 'डिजिटल मोड' में किया गया है, जिससे गणना (Totalling) की गलतियों की संभावना न्यूनतम है। फिर भी, पुनर्मूल्यांकन की पारंपरिक सुविधा छात्रों के लिए उपलब्ध रहेगी, जिसका विस्तृत नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जाएगा।

सप्लीमेंट्री परीक्षा: 15 जुलाई को होगा आयोजन

बोर्ड ने सप्लीमेंट्री (पूरक) परीक्षाओं का शेड्यूल भी साझा कर दिया है। यह परीक्षाएं 15 जुलाई 2026 को आयोजित की जाएंगी। इसके लिए एलओसी (LOC) जमा करने की प्रक्रिया 2 जून 2026 से शुरू होगी।

कौन हो सकता है शामिल?

  • वे छात्र जिन्हें 2026 की परीक्षा में 'कंपार्टमेंट' श्रेणी में रखा गया है।

  • वे छात्र जो किसी एक विषय में अपना प्रदर्शन (Performance) सुधारना चाहते हैं।

  • वर्ष 2025 के वे उम्मीदवार जिन्हें कंपार्टमेंट मिली थी, उनके लिए यह प्रदर्शन सुधारने का अंतिम अवसर होगा।

छात्रों को सलाह दी गई है कि वे नवीनतम अपडेट और विस्तृत जानकारी के लिए नियमित रूप से बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट www.cbse.gov.in देखते रहें।

रिजल्ट 2026: अजमेर रीजन 86.78%, कुछ छात्रों में खुशी, कुछ में मायूसी

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अजमेर। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा कक्षा 12वीं की वार्षिक परीक्षा 2026 के परिणामों की आधिकारिक घोषणा कर दी गई है। शिक्षा जगत के इतिहास में यह पहला अवसर है जब बोर्ड ने 10वीं के नतीजों के बाद 12वीं का परिणाम सार्वजनिक किया है, जबकि इससे पहले 15 अप्रैल को 10वीं का रिजल्ट जारी किया जा चुका था। परिणाम सामने आते ही छात्र-छात्राओं और उनके संरक्षकों के बीच कहीं खुशी तो कहीं भविष्य की चिंता का मिला-जुला असर दिखाई दे रहा है। गौरतलब है कि इस बार मूल्यांकन की नई तकनीकों और सख्त नियमों के कारण परिणामों के प्रतिशत में पिछले वर्षों के मुकाबले कुछ बदलाव दर्ज किए गए हैं।

अजमेर रीजन के नतीजों में दर्ज की गई गिरावट

इस वर्ष सीबीएसई के अजमेर रीजन का समग्र सफलता प्रतिशत 86.78 रहा है जो कि बीते वर्ष की तुलना में काफी कम माना जा रहा है। पिछले साल यानी 2025 में इस क्षेत्र का परिणाम 90.40 प्रतिशत दर्ज किया गया था, जिसका अर्थ है कि इस बार सफलता की दर में लगभग 3.62 प्रतिशत की कमी आई है। विशेषज्ञों का यह विश्लेषण है कि बोर्ड द्वारा अपनाई गई कड़ाई और कॉपियों की जांच के मानकों में किए गए बदलावों ने इस गिरावट में बड़ी भूमिका निभाई है।

गुजरात का दबदबा और राजस्थान की पिछड़ती स्थिति

हाल ही में अजमेर रीजन से पृथक किए गए गुजरात रीजन ने इस बार अपनी शैक्षणिक उत्कृष्टता का लोहा मनवाते हुए देशभर में सातवां स्थान हासिल किया है। इसके विपरीत राजस्थान के प्रदर्शन में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया और वह इस बार भी पड़ोसी राज्य गुजरात से पीछे रह गया है। यह स्थिति केवल 12वीं में ही नहीं बल्कि इससे पहले घोषित हुए 10वीं के नतीजों में भी देखी गई थी, जहां गुजरात ने बाजी मार ली थी और राजस्थान के शिक्षा जगत को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है।

डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और आगामी चुनौतियां

बोर्ड ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस बार 'ऑन स्क्रीन मार्किंग सिस्टम' का उपयोग किया था, जिसके तहत उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल जांच की गई। इस नई तकनीक के कार्यान्वयन के कारण इस बार परिणाम तैयार करने में 52 दिन का समय लगा, जबकि पिछले वर्ष यह प्रक्रिया मात्र 49 दिनों में पूर्ण कर ली गई थी। परिणाम के बाद अब बोर्ड जल्द ही उन विद्यार्थियों के लिए पुनर्मूल्यांकन और पूरक परीक्षाओं की समय सारणी जारी करेगा जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं हैं या किसी विषय में उत्तीर्ण नहीं हो पाए हैं।

लॉ स्टूडेंट्स अटेंडेंस नियम विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, होगा अहम फैसला

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नई दिल्ली: देश के लॉ कॉलेजों में छात्रों की अनिवार्य उपस्थिति (अटेंडेंस) को लेकर जारी कानूनी बहस अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर पहुँच गई है। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी है, जिसमें अटेंडेंस नियमों में ढील देने की बात कही गई थी।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: "कॉलेज केवल रहने की जगह न बनें"

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और विजय बिश्नोई की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, "यदि कक्षाओं में उपस्थिति को लेकर नियमों में सख्ती नहीं बरती गई, तो लॉ कॉलेज महज रहने और खाने (बोर्डिंग और लॉजिंग) की जगह बनकर रह जाएंगे।" हालांकि, अदालत ने फिलहाल हाईकोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

क्या था दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला?

3 नवंबर को दिए अपने ऐतिहासिक फैसले में दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि किसी भी छात्र को केवल कम अटेंडेंस के आधार पर परीक्षा में बैठने से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट का मानना था कि अटेंडेंस के अत्यधिक कड़े नियम छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डालते हैं। अदालत ने सुझाव दिया था कि अनिवार्य उपस्थिति की सीमाओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

सुसांत रोहिल्ला आत्महत्या मामले से जुड़ी है जड़ें

यह पूरा विवाद साल 2016 में हुए एक दुखद वाकये से उपजा है। लॉ छात्र सुसांत रोहिल्ला ने कम अटेंडेंस के कारण परीक्षा से रोके जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालयों में 'शिकायत निवारण समिति' (GRC) के गठन का निर्देश दिया था, ताकि भविष्य में किसी छात्र को इस तरह के मानसिक दबाव का सामना न करना पड़े।

BCI को नियमों पर पुनर्विचार के निर्देश

हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को निर्देशित किया था कि वह 3 वर्षीय और 5 वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रमों के लिए उपस्थिति के मानकों की समीक्षा करे। अदालत ने यह भी कहा था कि मूट कोर्ट, सेमिनार, डिबेट और कोर्ट विजिट जैसी शैक्षणिक गतिविधियों को भी कुल उपस्थिति का हिस्सा माना जाना चाहिए।

अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि भविष्य में कानूनी शिक्षा का ढांचा अनुशासन और मानसिक स्वास्थ्य के बीच कैसे तालमेल बिठाएगा।

मासूम की जीवनरेखा: 5 माह के शिशु को एयर एम्बुलेंस ने सुरक्षित पहुंचाया

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उज्जैन। मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव सनोरिया सुमराखेड़ा के पांच महीने के मासूम यथार्थ की जिंदगी बचाने के लिए शासन और प्रशासन ने एकजुट होकर एक मिसाल पेश की है। जन्मजात हृदय रोग जैसी गंभीर चुनौती से जूझ रहे इस नन्हे बालक को उज्जैन से इंदौर और फिर वहां से हवाई मार्ग के जरिए बेंगलुरु के नारायणा अस्पताल तक सफलतापूर्वक पहुंचाया गया। इस पूरे घटनाक्रम में राज्य सरकार की पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा और आयुष्मान निरामय योजना उस संकटग्रस्त परिवार के लिए संजीवनी बनकर उभरीं, जो अपने इकलौते चिराग की नाजुक हालत को देख पूरी तरह असहाय महसूस कर रहा था।

नन्हे यथार्थ की जान पर मंडराता संकट और असाध्य बीमारी

महिदपुर तहसील के निवासी दीपक सिंह राणावत के घर जब यथार्थ का जन्म हुआ, तो खुशियों का ठिकाना नहीं था, लेकिन जल्द ही डॉक्टरों ने यह खुलासा कर परिवार को स्तब्ध कर दिया कि बच्चा दिल की गंभीर और जटिल बीमारी के साथ पैदा हुआ है। स्थानीय स्तर पर किए गए उपचार के बावजूद जब स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ, तो विशेषज्ञों ने स्पष्ट कर दिया कि मासूम की जान बचाने के लिए अविलंब बड़े केंद्र में सर्जरी करना अनिवार्य है। समय की कमी और बच्चे की अत्यंत नाजुक स्थिति को देखते हुए उसे तत्काल दक्षिण भारत के विशेषज्ञ अस्पताल में स्थानांतरित करना एक बड़ी चुनौती थी, क्योंकि सड़क मार्ग से इतना लंबा सफर तय करना बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकता था।

एयर एम्बुलेंस सेवा और प्रशासनिक तत्परता का समन्वय

जैसे ही यह संवेदनशील मामला जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के संज्ञान में आया, सरकारी मशीनरी ने बिना समय गंवाए सक्रियता दिखाई और पीएम श्री एयर एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से यथार्थ को एयरलिफ्ट करने की योजना बनाई। उज्जैन से एम्बुलेंस द्वारा इंदौर लाने के उपरांत उसे विशेष चिकित्सकीय उपकरणों से सुसज्जित हवाई एम्बुलेंस में बेंगलुरु रवाना किया गया, जहां विशेषज्ञों की एक टीम निरंतर उसकी निगरानी कर रही थी। इस पूरे ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों ने न केवल तकनीकी बाधाओं को दूर किया बल्कि यह भी सुनिश्चित किया कि सफर के हर पल में मासूम को उच्च स्तरीय मेडिकल सहायता मिलती रहे, जिससे एक असंभव लगने वाला कार्य समय रहते संपन्न हो सका।

आयुष्मान योजना का कवच और इलाज की नई उम्मीद

लाखों रुपये के इलाज और परिवहन के भारी खर्च से डरे हुए परिवार के लिए आयुष्मान निरामय योजना एक बड़े वित्तीय संबल के रूप में सामने आई है, जिसने सर्जरी के खर्च का बोझ अपने कंधों पर ले लिया है। हालांकि प्रक्रिया के दौरान आयुष्मान कार्ड से जुड़ी कुछ तकनीकी समस्याएं भी उत्पन्न हुईं, लेकिन प्रशासन की संवेदनशीलता के कारण उन्हें तुरंत सुलझा लिया गया ताकि रेफरल और भर्ती की प्रक्रिया में कोई विलंब न हो। वर्तमान में यथार्थ बेंगलुरु के प्रतिष्ठित अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में है और उसका परिवार अब इस उम्मीद के साथ सुरक्षित महसूस कर रहा है कि सरकारी योजनाओं और दुआओं के असर से उनका बेटा जल्द ही स्वस्थ होकर वापस अपने गांव लौटेगा।

27% आरक्षण पर हाई कोर्ट सुनवाई, न्यायिक प्रक्रिया 15 मई तक चलेगी

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जबलपुर। मध्यप्रदेश में पिछले सात वर्षों से कानूनी पेचीदगियों में उलझे 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के संवेदनशील मामले पर जबलपुर हाईकोर्ट ने अंतिम सुनवाई की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। माननीय न्यायालय ने आगामी 15 मई तक इस प्रकरण पर प्रतिदिन नियमित रूप से अंतिम दलीलें सुनने का निर्णय लिया है, ताकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित तीन माह की समय सीमा के भीतर इस पर अंतिम फैसला सुनाया जा सके। सुनवाई के पहले दिन मुख्य रूप से उन पक्षों के तर्कों को सुना गया जो आरक्षण की सीमा बढ़ाए जाने का विरोध कर रहे हैं, जिन्होंने शीर्ष अदालत द्वारा पूर्व में निर्धारित 50 प्रतिशत की अधिकतम सीमा का हवाला देते हुए अपनी बात रखी।

अदालती कार्यवाही और कानूनी तर्कों का दौर

हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव कुमार सचदेवा की खंडपीठ इस महत्वपूर्ण विषय पर कल दोपहर 3 बजे से पुनः सुनवाई जारी रखेगी। पहले दिन की कार्यवाही के दौरान विरोध पक्ष की ओर से यह दलील दी गई कि आरक्षण का दायरा बढ़ाना सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों का उल्लंघन हो सकता है। न्यायालय अब लगातार इस मामले के हर कानूनी पहलू को परख रहा है ताकि वर्षों से लंबित इस विवाद का तार्किक और संवैधानिक समाधान निकाला जा सके। चूंकि इस फैसले का सीधा असर प्रदेश की हजारों सरकारी भर्तियों और युवाओं के भविष्य पर पड़ने वाला है, इसलिए अदालत इस बार बेहद त्वरित गति से दलीलें सुनकर फैसले की ओर बढ़ रही है।

हक की मांग को लेकर ओबीसी उम्मीदवारों का बड़ा प्रदर्शन

न्यायालय में चल रही सुनवाई के बीच जबलपुर की सड़कों पर ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों का भारी आक्रोश और दर्द भी देखने को मिला। प्रदेश के लगभग 50 जिलों से आए सैकड़ों उम्मीदवारों ने एक विशाल रैली निकालकर अपनी मांगों को बुलंद किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर चिलचिलाती धूप में शामिल हुईं। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी हाईकोर्ट परिसर स्थित महाधिवक्ता कार्यालय पहुंचकर अपनी बात रखना चाहते थे, हालांकि सुरक्षा कारणों से उन्हें रोक दिया गया। इन युवाओं का मुख्य रूप से यही कहना है कि 13 प्रतिशत आरक्षण को होल्ड पर रखने से उनका करियर अधर में लटका हुआ है, अतः सरकार की ओर से कोर्ट में पुख्ता पैरवी की जानी चाहिए।

साल 2019 से जारी कानूनी विवाद की पृष्ठभूमि

मध्यप्रदेश में आरक्षण का यह विवाद साल 2019 में तब शुरू हुआ था जब तत्कालीन सरकार ने ओबीसी कोटे को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का निर्णय लिया था। इस फैसले को तुरंत हाईकोर्ट में चुनौती दी गई, जिसके बाद बढ़े हुए आरक्षण के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी गई थी। यह लंबी कानूनी लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंची, लेकिन अंततः देश की सबसे बड़ी अदालत ने इस मामले को वापस मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को सौंपते हुए एक निश्चित समय सीमा के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। अब सबकी निगाहें 15 मई तक चलने वाली इस निरंतर सुनवाई पर टिकी हैं, जो प्रदेश की राजनीति और सामाजिक दिशा तय करने में निर्णायक साबित होगी।

खरीफ की 14 फसलों पर बढ़ी MSP, किसानों को मोदी कैबिनेट का बड़ा तोहफा

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नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आज हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) की बैठक में देश की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को गति देने वाले कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। सरकार ने न केवल किसानों की आय बढ़ाने के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भारी बढ़ोतरी की है, बल्कि ऊर्जा आत्मनिर्भरता और परिवहन क्षेत्र के लिए भी अरबों रुपये के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है।

1. किसानों की बल्ले-बल्ले: खरीफ फसलों की MSP में भारी वृद्धि

अन्नदाताओं को उनकी उपज का लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए विपणन सत्र 2026-27 के लिए 14 खरीफ फसलों के MSP को बढ़ा दिया गया है।

  • सबसे बड़ी बढ़ोतरी: सूरजमुखी के बीजों में ₹622 प्रति क्विंटल की सबसे अधिक वृद्धि की गई है।

  • अन्य फसलें: कपास के दाम में ₹557, नाइजरसीड में ₹515 और तिल के दाम में ₹500 प्रति क्विंटल का इजाफा किया गया है। सरकार का यह कदम कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।

2. ऊर्जा क्षेत्र में क्रांति: ₹37,500 करोड़ की कोयला गैसीकरण योजना

भारत के पास अगले 200 वर्षों के लिए पर्याप्त कोयला भंडार है। इस प्राकृतिक संपदा का अधिकतम लाभ उठाने के लिए कैबिनेट ने 37,500 करोड़ रुपये की कोयला गैसीकरण योजना को मंजूरी दी है।

  • लक्ष्य: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस तकनीक से कोयले को गैस में बदला जाएगा, जिसका उपयोग उर्वरक, बिजली उत्पादन और रसायनों के निर्माण में होगा।

  • महत्व: इससे भारत गैस आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकेगा और ऊर्जा के क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर' बनेगा।

3. रेल और कनेक्टिविटी: देश की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड लाइन

रेलवे क्षेत्र के लिए एक क्रांतिकारी फैसला लेते हुए ₹20,667 करोड़ की लागत वाली अहमदाबाद (सरखेज)-धोलेरा दोहरी लाइन परियोजना को मंजूरी दी गई है।

  • खासियत: यह भारत की पहली अर्ध-उच्च गति (Semi High-Speed) रेल परियोजना होगी, जिसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया जाएगा।

  • कनेक्टिविटी: यह लाइन अहमदाबाद को धोलेरा एसआईआर, नए हवाई अड्डे और लोथल राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर से जोड़ेगी, जिससे यात्रियों के समय की भारी बचत होगी।

4. नागपुर हवाई अड्डे का होगा कायाकल्प

विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने नागपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आधुनिकीकरण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इसे सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत अपग्रेड किया जाएगा। एक निजी भागीदार को दीर्घकालिक लाइसेंस के आधार पर हवाई अड्डे के संचालन और बुनियादी ढांचे को विश्व स्तरीय बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

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