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NEET UG 2026 मेरिट लिस्ट जारी, 696 नंबर वाला बना MP का टॉपर

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भोपाल: डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड मेडिकल एजुकेशन, मध्य प्रदेश ने NEET UG 2026 के तहत 85 प्रतिशत स्टेट कोटा की एमबीबीएस (MBBS) और बीडीएस (BDS) सीटों पर प्रवेश के लिए आधिकारिक राज्य मेरिट सूची जारी कर दी है। इस मेरिट लिस्ट में कुल 17,093 नीट-योग्य अभ्यर्थियों को शामिल किया गया है। जारी आंकड़ों के अनुसार, जबलपुर के आर्यमन सोलंकी ने 696 अंक प्राप्त कर पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है, जबकि सार्थक साहू ने दूसरा स्थान प्राप्त किया है।

कैसे डाउनलोड करें एमपी नीट यूजी मेरिट सूची?

योग्य उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके अपनी रैंक लिस्ट देख और डाउनलोड कर सकते हैं:

  1. सबसे पहले DME मध्य प्रदेश की आधिकारिक वेबसाइट dme.mponline.gov.in पर जाएं।

  2. होमपेज पर दिए गए ‘MP State Combined UG Counselling 2026’ सेक्शन पर क्लिक करें।

  3. इसके बाद ‘State Merit List of Registered Candidates 2026’ के लिंक पर क्लिक करें।

  4. ऐसा करते ही मेरिट लिस्ट की पीडीएफ (PDF) फाइल आपकी स्क्रीन पर खुल जाएगी।

  5. इस पीडीएफ में अपना नाम या रोल नंबर खोजकर अपनी रैंक की जांच कर सकते हैं।

विभाग द्वारा जारी इस सूची में उम्मीदवार की स्टेट रैंक, ऑल इंडिया रैंक, रोल नंबर, नाम, जेंडर और NEET UG स्कोर जैसी तमाम महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई हैं। इसी मेरिट लिस्ट के आधार पर क्वालीफाइड छात्र-छात्राएं स्टेट कोटे की सीटों पर दाखिले के पात्र होंगे।

टॉप-10 में शामिल एकमात्र महिला उम्मीदवार

एमपी नीट यूजी 2026 की टॉप-10 मेरिट सूची का विश्लेषण करें तो इसमें सामान्य वर्ग के 7, ओबीसी वर्ग के 2 और एसटी वर्ग का 1 उम्मीदवार शामिल है। इस प्रतिष्ठित सूची में हिलोर अजमेरा ने 655 अंकों के साथ जगह बनाई है, जो कि टॉप-10 में शामिल इकलौती महिला उम्मीदवार हैं और उनकी राज्य रैंक 7 है।

भोपाल में तिरंगे के रंग में रंगा माहौल, आतिफ अकील के नेतृत्व में निकली यात्रा

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भोपाल: स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक भव्य और विशाल तिरंगा यात्रा का आयोजन किया गया। इस 'पैगाम-ए-मोहब्बत' रैली का आयोजन स्थानीय विधायक आतिफ अकील द्वारा किया गया। यह विशाल तिरंगा यात्रा भोपाल टॉकीज चौराहे से शुरू होकर इमामी गेट तक निकाली गई। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि इसमें सभी धर्मों के धर्मगुरुओं ने शिरकत कर देश में सर्वधर्म समभाव और आपसी भाईचारे का संदेश दिया। इस यात्रा में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ-साथ हाल ही में जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से चर्चा में आए जुनैद भी विशेष रूप से शामिल हुए।

बड़ी संख्या में उमड़े लोग, गूंजे देशभक्ति के नारे

राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत इस रैली में आजादी के जश्न के कई रंग देखने को मिले। हाथों में राष्ट्रीय ध्वज थामे हजारों की संख्या में लोग इस यात्रा में शामिल हुए। देश भक्ति गीतों की धुन पर झूमते युवाओं और नागरिकों ने 'भारत माता की जय' के नारे लगाए। इस दौरान यात्रा में विभिन्न आकर्षणों से भरी सुंदर झांकियां भी निकाली गईं, जिसने पूरे शहर का माहौल देशभक्तिमय बना दिया।

'यह पैगाम-ए-मोहब्बत रैली का 33वां वर्ष है' – विधायक आतिफ अकील

रैली के उद्देश्यों और अपनी पारिवारिक परंपरा के बारे में बात करते हुए कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने कहा कि 'पैगाम-ए-मोहब्बत' नाम से निकाली जाने वाली इस रैली का यह 33वां साल है। उन्होंने बताया कि इस अनूठी परंपरा की शुरुआत उनके वालिद (पिता) आरिफ अकील ने की थी, जो देश की गंगा-जमुनी तहजीब को मजबूत करने के लिए समर्पित है।

उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी मिलकर एकता के साथ रहें, जो एक ही थाली में खाना खाने जैसी साझा संस्कृति के प्रतीक हैं। हमारी यह मुहिम है कि भोपाल से शुरू होकर यह मोहब्बत का पैगाम पूरे प्रदेश और देश में फैले। हर साल इस आयोजन में समाज के सभी वर्गों का भरपूर सहयोग मिलता है और इसे पूरे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

फूड लेबलिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, सरकार से पूछा- भारत को विकसित बनाने की दिशा क्या है?

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नई दिल्ली: देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट ने पैकेट बंद (पैकेज्ड) खाद्य पदार्थों पर 'फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग' (FOPL) के दृश्य स्वरूप और डिजाइन को लेकर केंद्र सरकार को स्पष्ट निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए यह भी सवाल किया कि क्या भारत को हमेशा एक अविकसित देश ही बने रहना चाहिए? शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार के उस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें यह कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय मानकों, विशेष रूप से विकसित देशों के मानदंडों के अनुरूप चलना देश के लिए संभव नहीं है।

फ्रंट-ऑफ-पैकेज लेबलिंग खाद्य पदार्थों के पैकेट के सामने दी जाने वाली एक ऐसी पोषण संबंधी ग्राफिक जानकारी होती है, जिससे उपभोक्ताओं को कोई भी खाने की वस्तु खरीदते समय सही निर्णय लेने और एक स्वस्थ आहार का चुनाव करने में बड़ी मदद मिलती है।

किसने दायर की है यह जनहित याचिका?

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किए। यह याचिका '3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी' नामक एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा दायर की गई है, जिसमें केंद्र, सभी राज्य सरकारों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य रूप से एफओपीएल (FOPL) लागू करें।

पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि नागरिकों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिए एफओपीएल बेहद आवश्यक है। यह विशेष रूप से उन बढ़ते बच्चों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, जो तेजी से जंक फूड के आदी होते जा रहे हैं। अदालत ने पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर चेतावनी वाले स्पष्ट लेबल शुरू करने में हो रही अनावश्यक देरी को लेकर भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को भी तीखी फटकार लगाई। पीठ ने दो टूक कहा कि देश में मोटापे की समस्या अब एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में स्वीकार की जा चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट की केंद्र सरकार को दो टूक

जब अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल बृजेंद्र चाहर ने अदालत में यह दलील दी कि पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन करना बेहद कठिन है, इसलिए एफओपीएल पर अदालत के सुझावों पर विचार करना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है, तो न्यायमूर्ति पारदीवाला ने सख्त लहजे में पूछा, "क्या आप इस अदालत को मजाक समझ रहे हैं?"

चिली, इस्राइल और कनाडा जैसे विभिन्न देशों में पहले से अपनाई जा रही व्यवस्थाओं का हवाला देते हुए पीठ ने कहा, "हम केंद्र के इस रुख को कतई स्वीकार नहीं कर सकते कि वह अंतरराष्ट्रीय या विकसित देशों के मानकों के अनुरूप नहीं चल सकता। क्या भारत को हमेशा अविकसित देश ही बने रहना है? यह एक गंभीर सवाल है जिसे हम केंद्र सरकार के विचार के लिए रख रहे हैं।"

अदालत ने कहा कि दुनिया को इस बात का संदेश मिलना चाहिए कि भारत अपने नागरिकों के समग्र स्वास्थ्य, और खासकर आने वाली पीढ़ी के बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह विषय विशेषज्ञों से सलाह लेकर एफओपीएल के दृश्य स्वरूप पर जल्द से जल्द अंतिम फैसला ले। इस लेबलिंग में रंगीन संकेतक (कलर कोड), व्याख्यात्मक शब्द, अंक, अक्षर, प्रतीक या प्रतिशत जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां शामिल हो सकती हैं।

दो हफ्ते के भीतर सरकार को रिकॉर्ड पर रखना होगा फैसला

पीठ ने चेतावनी भरे लहजे में स्पष्ट किया कि यदि केंद्र सरकार इस दिशा में खुद सकारात्मक कदम उठाती है, तो यह बहुत अच्छा होगा, अन्यथा अदालत इस पर आगे के सख्त निर्देश जारी करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को इस मामले में अपना अंतिम निर्णय आधिकारिक तौर पर रिकॉर्ड पर पेश करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

अदालत ने कहा कि उसके विचार से केंद्र को एफओपीएल से जुड़े बदलावों को लागू करने में कोई कठिनाई नहीं आनी चाहिए, क्योंकि यह पूरा विषय पहले से ही सरकार के संज्ञान में है। इसका मुख्य संकेत देश के आर्थिक सर्वेक्षण में दिए गए सुझावों से भी मिलता है। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि एक संतुलित और पोषक तत्वों से भरपूर आहार बच्चे के मानसिक विकास, शारीरिक वृद्धि और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। इसका प्रभाव केवल व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ता, बल्कि उसके सोचने, कार्य करने और व्यवहार करने के तरीके पर भी गहरा असर डालता है।

याचिका में गैर-संचारी रोगों के बढ़ते खतरे का जिक्र

'3एस एंड आवर हेल्थ सोसाइटी' की जनहित याचिका में देश के भीतर गैर-संचारी रोगों (NCDs) के लगातार बढ़ते खतरनाक बोझ का विशेष रूप से उल्लेख किया गया था। याचिका में बताया गया कि एफओपीएल के जरिए खाद्य पदार्थों में अत्यधिक मात्रा में मौजूद चीनी, नमक और सैचुरेटेड फैट (संतृप्त वसा) की जानकारी को प्रमुखता से दर्शाया जा सकता है। अत्यधिक मात्रा में इन तत्वों का सेवन मधुमेह (डाइबिटीज), मोटापा, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर जैसी गंभीर व जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का मुख्य कारण बनता है।

याचिका में देश भर में जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों में हो रही चिंताजनक बढ़ोतरी पर भी गंभीर चिंता जताई गई। इसमें कहा गया कि गैर-संचारी रोग अब भारत में हर साल 60 लाख से अधिक असमय मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, मधुमेह एक ऐसी मूक बीमारी के रूप में उभर चुकी है जो चुपचाप फैल रही है और लगभग हर चार में से एक भारतीय नागरिक को अपनी चपेट में ले रही है। इस मामले पर अगली सुनवाई अब आगामी 10 सितंबर को निर्धारित की गई है।

बीकानेर में शुरू हुई ई-बस सेवा, सीएम भजनलाल ने पांच बसों को किया रवाना

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बीकानेर: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बीकानेर शहर में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल ई-बसों का संचालन आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने आईजीएनपी भू-जल संसाधन विभाग के बाहर आयोजित कार्यक्रम में पांच इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल समेत कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।

'हरित राजस्थान' की दिशा में ऐतिहासिक कदम

ई-बसों को रवाना करने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह पहल 'हरित राजस्थान' के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार विकास के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है, जिससे प्रदेश में स्वच्छ, सुंदर और प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है।

प्रथम चरण में चलेंगी 75 ई-बसें, एमजीएसयू के पास बना डिपो

नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, शहर में पहले चरण के तहत कुल 75 ई-बसों का संचालन किया जाना है। महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय (एमजीएसयू) के सामने ई-बस डिपो का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। फिलहाल शुरुआती तौर पर पांच ई-बसें बीकानेर पहुंच चुकी हैं, जिन्हें शनिवार को हरी झंडी दिखाई गई।

फिलहाल इन दो रूटों पर होगा संचालन

अधिकारियों के मुताबिक, जिन पांच बसों की शुरुआत की गई है, वे शुरुआती दौर में दो प्रमुख रूटों पर चलेंगी:

  • पहला रूट: गंगा सिंह विश्वविद्यालय से करमीसर तिराहा, गंगानगर सर्कल, म्यूजियम चौराहा, हल्दीराम प्याऊ होते हुए जोधपुर बाईपास तक।

  • दूसरा रूट: एमजीएसयू से करमीसर तिराहा, गंगानगर तिराहा, रोडवेज बस स्टैंड, आरसीपी-आईजीएनपी, पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, आरटीओ तिराहा से खारा औद्योगिक क्षेत्र तक।

नगरीय क्षेत्र में बेहतर परिवहन के लिए प्रशासन ने पहले ही प्राथमिक तौर पर 25 रूटों का चयन कर यात्री किराया भी तय कर दिया है।

डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में हुआ राज्य स्तरीय ध्वजारोहण

इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बीकानेर के डॉ. करणी सिंह स्टेडियम में आयोजित स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय समारोह में राष्ट्रीय ध्वज फहराया और परेड की सलामी ली। ध्वजारोहण के बाद हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा की गई। इस गरिमामयी समारोह में केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल, स्थानीय विधायकों, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, डीजीपी राजीव शर्मा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

CM मोहन यादव का बड़ा ऐलान, भोपाल से शारजाह के बीच जल्द शुरू होगी हवाई सेवा

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भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से जल्द ही शारजाह (यूएई) के लिए सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान सेवा शुरू होने जा रही है। कामकाज, पर्यटन और बिजनेस के सिलसिले में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जाने वाले यात्रियों के लिए यह एक बेहद बड़ी और राहत भरी खबर है। इस नई हवाई सेवा के शुरू होने से दुबई और उसके आसपास के क्षेत्रों में आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर एक भव्य समारोह के दौरान इस बात की आधिकारिक घोषणा की है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने की बड़ी घोषणा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित मुख्य राज्य स्तरीय समारोह में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने ध्वजारोहण किया और शानदार परेड की सलामी ली। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि राजधानी भोपाल से बहुत जल्द शारजाह के लिए सीधी अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट का संचालन शुरू किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस नई उड़ान के शुरू होने से मध्य प्रदेश की ग्लोबल कनेक्टिविटी (अंतरराष्ट्रीय संपर्क) को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही प्रदेश में व्यापार, पर्यटन, उद्योग और अन्य आर्थिक क्षेत्रों के विकास को भी नए पंख लगेंगे।

अक्टूबर महीने से शुरू हो सकती है उड़ान सेवा

शारजाह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को सामान्यतः दुबई के एक प्रमुख और सुविधाजनक विकल्प के रूप में उपयोग किया जाता है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, भोपाल और शारजाह के बीच यह सीधी फ्लाइट आगामी अक्टूबर महीने से शुरू हो सकती है। हालांकि, अभी तक इसका आधिकारिक शेड्यूल (समय सारणी) और किराए का विवरण जारी नहीं किया गया है।

गौरतलब है कि कुछ समय पूर्व ही भोपाल से रीवा, भोपाल से पटना और जबलपुर से कोलकाता के लिए डायरेक्ट फ्लाइट्स का संचालन सफलतापूर्वक शुरू किया गया है, और अब इसी कड़ी में भोपाल से शारजाह के लिए इस अंतरराष्ट्रीय सेवा की सौगात दी गई है।

इस फ्लाइट से यात्रियों को मिलने वाले प्रमुख लाभ

  • सुगम यात्रा: बड़ी संख्या में लोग पर्यटन के लिए दुबई और यूएई जाते हैं, ऐसे में शारजाह के लिए सीधी उड़ान होने से सफर काफी सुगम और कम समय लेने वाला हो जाएगा।

  • वैश्विक संपर्क के नए विकल्प: शारजाह और दुबई से दुनिया के कई अन्य यूरोपीय और अमेरिकी देशों के लिए उड़ानें आसानी से मिल जाती हैं, जिससे यात्रियों को ग्लोबल कनेक्टिविटी के नए विकल्प मिलेंगे।

  • व्यापारियों और कामकाजी लोगों को राहत: कामकाज, नौकरी और बिजनेस के सिलसिले में विदेश यात्रा करने वाले लोगों को इससे बहुत बड़ी सहूलियत मिलेगी।

  • समय और धन की बचत: इस अंतरराष्ट्रीय उड़ान के शुरू हो जाने से भोपाल और आसपास के क्षेत्र के रहवासियों को फ्लाइट पकड़ने के लिए बार-बार मुंबई या नई दिल्ली जैसे महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बचत होगी।

इंडोनेशिया में धरती ने मचाई तबाही, 38 की मौत; हजारों लोग घरों से भागे

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जकार्ता: फिलीपींस के बाद अब इंडोनेशिया में भूकंप का विकराल रूप देखने को मिला है। शनिवार सुबह जब लोग नींद में थे, तब इंडोनेशिया के फ्लोर्स द्वीप के पास जोरदार भूकंप के झटके महसूस किए गए।

झटके इतने शक्तिशाली थे कि इमारतें ढहने लगीं और दहशत में लोग सड़कों पर भागने लगे। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, इस आपदा में अब तक कम से कम 38 लोगों की जान जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि कई दूर-दराज के इलाकों में बचाव दल अभी तक पहुंच नहीं पाए हैं।

नागेकेओ और एंडे जिले में सबसे ज्यादा मुश्किल

इस भूकंप का केंद्र एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में स्थित था, जो नागेकेओ रेजेंसी के सबसे नजदीक है। इस क्षेत्र में संचार व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। स्थानीय पुलिस प्रमुख ने बताया कि कई इमारतें जमींदोज हो गई हैं और शहरों तथा गांवों में बिजली गुल होने के कारण खबरों के आदान-प्रदान में देरी हो रही है, जिससे राहत कार्यों में भी बाधा आ रही है।

कब और कितनी तीव्रता से आया भूकंप?

स्थानीय समयानुसार सुबह 5:58 बजे आए इस भूकंप की तीव्रता 7.7 मापी गई, जिसकी गहराई महज 10 किलोमीटर थी। इसके आधे घंटे के भीतर 5.9, 5.6 और 6.1 तीव्रता के तीन और तेज झटके आए, जिससे लोगों में भारी दहशत फैल गई।

सुनामी का खतरा और राहत कार्य

इस बीच, मौसम विभाग ने तटीय इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी कर दी थी और लोगों को समुद्र व नदी किनारों से दूर ऊंचे स्थानों पर जाने को कहा गया। हालांकि बाद में यह चेतावनी हटा ली गई, लेकिन लोग अब भी डर के साए में हैं।

नागेकेओ में करीब दो हजार लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर चले गए हैं। कई घर, गोदाम और सरकारी इमारतें क्षतिग्रस्त हुई हैं। बिजली और सड़कों की बदहाली के बीच स्थानीय प्रशासन और राहत टीमें युद्धस्तर पर स्थिति को संभालने में जुटी हैं।

‘वंदे मातरम’ को लेकर BJP का कांग्रेस पर निशाना, राहुल-सोनिया को लेकर कही बड़ी बात

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नई दिल्ली: आज 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर लाल किले समेत देश भर के विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रमों में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला, जहां पहली बार राष्ट्रगान से ठीक पहले 'वंदे मातरम' का गायन किया गया। हालांकि, इस नए प्रोटोकॉल और नियमों के बीच राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक सरगर्मी भी काफी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कांग्रेस नेतृत्व पर गंभीर निशाना साधा है।

वंदे मातरम के दौरान असहज दिखने का आरोप

भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर कांग्रेस मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराए जाने के अवसर का एक वीडियो क्लिप पोस्ट किया है। इस वीडियो में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ-साथ वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी नजर आ रहे हैं। भाजपा का मुख्य दावा यह है कि जब कार्यक्रम के दौरान 'वंदे मातरम' गाया जा रहा था, तब सोनिया गांधी और राहुल गांधी काफी असहज मुद्रा में दिखाई दिए।

भाजपा ने अपने पोस्ट में तीखा सवाल पूछते हुए लिखा है, "सोनिया गांधी को वंदे मातरम की शुरुआती पंक्तियां गाए जाने के कुछ ही समय बाद असहजता महसूस होने लगी और उन्होंने कथित तौर पर गीत को रोकने का इशारा किया। वहीं, राहुल गांधी भी पूरे गायन के दौरान और राष्ट्रगीत समाप्त होने के बाद तक काफी परेशान नजर आए। यह कांग्रेस की पुरानी और दबी हुई दुविधा को दर्शाता है। आखिर गांधी परिवार को भारत की मूल सांस्कृतिक चेतना, हमारी सभ्यतागत विरासत और राष्ट्रभाव के साथ इतनी अधिक असहजता क्यों महसूस होती है?"

वंदे मातरम का ऐतिहासिक सफर और महत्व

  • रचना और अपनाना: प्रसिद्ध लेखक बंकिम चंद्र चटर्जी ने वर्ष 1875 में 'वंदे मातरम' की रचना की थी। इसके बाद, वर्ष 1950 में संविधान सभा द्वारा इसे भारत के 'राष्ट्रीय गीत' के रूप में आधिकारिक तौर पर अपनाया गया।

  • पहला गायन: नोबेल पुरस्कार विजेता गुरुदेव रविंद्रनाथ टैगोर ने वर्ष 1896 में कोलकाता में आयोजित कांग्रेस अधिवेशन में इसे सबसे पहले स्वर दिया था। इसके पश्चात, वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के बाद शुरू हुए स्वतंत्रता संग्राम में 'वंदे मातरम' अंग्रेजों के खिलाफ देशवासियों के लिए प्रतिरोध और विरोध का सबसे बड़ा नारा बन गया था।

वंदे मातरम से जुड़ा पुराना ऐतिहासिक विवाद

इतिहास पर नजर डालें तो राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के शुरुआती दो छंदों में भारत माता की प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली, जल, अन्न और ममतामयी मां के रूप में उसकी स्तुति की गई है। हालांकि, इसके बाद के छंदों में हिंदू पौराणिक देवी-देवताओं (जैसे मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती) के स्वरूपों का जिक्र आता है। इसी हिस्से को लेकर अतीत में विवाद उत्पन्न हुआ था, जिसके बाद कुछ मुस्लिम नेताओं और संगठनों ने इस पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

जब 1930 के दशक में देश के भीतर धर्म आधारित राजनीति ने जोर पकड़ना शुरू किया, तब वंदे मातरम को लेकर विरोध के स्वर उठने लगे। इस बढ़ते विवाद को शांत करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने बीच का रास्ता निकालते हुए केवल इसके शुरुआती दो छंदों को ही गाने का निर्णय लिया। इसके बाद, वर्ष 1937 के फैजाबाद अधिवेशन में कांग्रेस ने यह औपचारिक फैसला लिया कि देश भर के राष्ट्रीय आयोजनों में केवल वंदे मातरम के दो ही छंद गाए जाएंगे।

नया सरकारी प्रोटोकॉल और गृह मंत्रालय के निर्देश

मौजूदा वर्ष 2026 में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय गीत के गायन और उसके प्रोटोकॉल को लेकर नए और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन नए नियमों के तहत अब यह अनिवार्य कर दिया गया है कि सभी आधिकारिक राष्ट्रीय कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले 'वंदे मातरम' का गायन किया जाएगा।

इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि कार्यक्रमों में राष्ट्रगान से पहले राष्ट्रगीत के रूप में 'वंदे मातरम' गाया जाएगा। साथ ही, जनवरी 2026 की संशोधित सरकारी गाइडलाइन के मुताबिक अब इस राष्ट्रीय गीत के सभी छह छंदों का पूरा गायन करना अनिवार्य है, जिसकी कुल निर्धारित अवधि 3 मिनट और 10 सेकंड है।

सरकारी स्कूलों को लेकर CJP का बड़ा कदम, ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था पर उठाए जाएंगे सवाल

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हिंगोली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में स्थित अपने पैतृक गांव से 'स्कूल ठीक करो' नामक एक महत्वपूर्ण अभियान की शुरुआत करने की तैयारी कर ली है। उन्होंने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सत्ता में चाहे कोई भी राजनीतिक दल क्यों न रहा हो, हमेशा से ही सरकारी स्कूलों की घोर अनदेखी की जाती रही है। दीपके के अनुसार, देश के आम बच्चों को आज भी समान अवसर नहीं मिल पा रहे हैं, और गांवों के सरकारी स्कूलों की खस्ताहाल स्थिति को सुधारने के लिए अब जनता को खुलकर सवाल पूछने होंगे।

सरकारी स्कूलों की बदहाली और राजनीतिक दलों पर निशाना

स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव जाने से ठीक पहले, अभिजीत दीपके ने सरकारी शिक्षण संस्थानों की दयनीय स्थिति को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पिछले कई दशकों में सरकारी स्कूलों के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और वहां दी जाने वाली शिक्षा के स्तर को ऊपर उठाने के लिए किसी भी सरकार ने पर्याप्त और ठोस प्रयास नहीं किए हैं।

उन्होंने आगे कहा, "अब आम जनता को यह बात अच्छी तरह समझ में आ चुकी है कि उन्हें पढ़ाई, लिखाई और बेहतर शिक्षा के मुद्दों पर खुलकर बात करनी चाहिए। यह वर्तमान समय की सबसे बड़ी और अहम जरूरत है। राज्य में भले ही किसी भी दल की सरकार रही हो, लेकिन ग्रामीण स्कूलों के विकास के लिए किसी ने ईमानदारी से काम नहीं किया। अब समय आ गया है कि हम सवाल पूछकर इन व्यवस्थाओं को सुधारें।"

तिरंगा रैली के बैनरों और खर्च पर उठाए गंभीर सवाल

इससे पहले, शुक्रवार को छत्रपति संभाजीनगर शहर में मुख्यमंत्री की मौजूदगी में निकाली गई एक विशाल तिरंगा रैली के दौरान शहर में जगह-जगह लगाए गए भारी-भरकम और महंगे बैनरों के वित्तीय स्रोतों पर भी दीपके ने तीखे सवाल खड़े किए।

उन्होंने कहा, "राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगा रैली का आयोजन करना और देशप्रेम दिखाना एक अच्छी बात है, लेकिन इस रैली के प्रचार के लिए हर 40 से 50 फीट की दूरी पर जो बड़े-बड़े बैनर और होर्डिंग लगाए गए, उस पर खर्च हुआ बेहिसाब पैसा कहां से आया? यदि यही सारा पैसा ग्रामीण इलाकों के बदहाल स्कूलों और वहां पढ़ने वाले गरीब छात्रों की भलाई पर खर्च किया जाता, तो यह समाज के लिए अधिक हितकारी होता। नेताओं को अब यह सोचना होगा कि वे आने वाली पीढ़ी और छात्रों का भविष्य संवारना चाहते हैं या केवल दिखावा करना चाहते हैं।"

अभिजीत दीपके का राष्ट्रव्यापी अभियान और बुनियादी सवाल

बता दें कि अभिजीत दीपके ने कुछ समय पूर्व ही देश के गांवों में सरकारी शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर बदलने के लिए एक राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की थी। उन्होंने देश के सभी अभिभावकों और माता-पिता से अपील की है कि वे अपने नजदीकी स्कूलों में जाकर वहां मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं का खुद ऑडिट करें। इसके अलावा, उन्होंने गांवों के सरपंचों से भी आगे आकर सरकारी स्कूलों की कायापलट करने की नैतिक जिम्मेदारी उठाने का आग्रह किया है।

उन्होंने सरकार से सवाल पूछते हुए कहा था, "हमने देश की नई संसद बना ली है, नया प्रधानमंत्री आवास बना लिया है, लेकिन विडंबना यह है कि हम अपने गांवों में बच्चों के लिए नए और आधुनिक सरकारी स्कूल क्यों नहीं खड़े कर पाए? क्या हम देश के गरीब किसानों और मजदूरों के बच्चों को इस महान देश का भविष्य नहीं मानते?" दीपके ने अफसोस जताया कि आज भी ग्रामीण इलाकों के मासूम बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने के लिए कई-कई किलोमीटर की लंबी दूरी पैदल तय करनी पड़ती है, और कई स्कूलों में तो पीने का शुद्ध पानी तथा शौचालय जैसी बेहद बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।

40 हजार जमा कर 10% मासिक मुनाफे का लालच, निवेशकों को लगा करोड़ों का चूना

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जबलपुर: मध्य प्रदेश के जबलपुर शहर से धोखाधड़ी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां शातिर ठगों ने निवेशकों को हर महीने 10 प्रतिशत भारी-भरकम ब्याज और मूलधन वापस लौटाने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। गढ़ा क्षेत्र के 50 से अधिक पीड़ित निवेशक अपनी शिकायत लेकर मदनमहल थाने पहुंचे। आरोप है कि शाही नाका निवासी कपड़ा व्यापारी गुरमीत और उसके चाचा कुलजीत भाटिया ने 'लॉन्ग एशिया' (Long Asia) नामक एक फर्जी निवेश योजना के जरिए लोगों से बड़ी मात्रा में रकम ऐंठी है। फिलहाल, स्थानीय पुलिस ने इस मामले की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है।

संपर्क कर दिया था डॉलर में कमाई का झांसा

शाही नाका क्षेत्र के रहने वाले पीड़ित विजय मिश्रा के मुताबिक, करीब 8 महीने पहले आरोपी गुरमीत ने उनसे संपर्क किया था और बताया कि शहर में 'लॉन्ग एशिया' नाम से एक बड़ी कंपनी संचालित हो रही है। उसने झांसा दिया कि इस कंपनी में पैसे निवेश करने पर निवेशकों का मूलधन पूरी तरह सुरक्षित रहता है और इसके बदले हर महीने 10 प्रतिशत तक का भारी ब्याज मिलता है। योजना के तहत यह भी प्रचारित किया गया कि इस कंपनी में पैसा लगाने से कमाई अमेरिकी डॉलर में होगी। मोटा मुनाफा कमाने के लालच में आकर धीरे-धीरे शहर के कई लोगों ने इसमें अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा लगाना शुरू कर दिया।

शुरुआत में भरोसा जीतकर फंसाया जाल में

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, विजय मिश्रा समेत कई अन्य लोगों ने शुरुआत में इस योजना में 40-40 हजार रुपये की आईडी बनाकर निवेश किया था। शुरुआती दो महीनों तक निवेशकों को नियमित रूप से 10 प्रतिशत ब्याज का भुगतान मिलता भी रहा, जिससे निवेशकों का कंपनी पर भरोसा पूरी तरह गहरा गया।

भरोसा बढ़ने के बाद लोगों ने इसमें और अधिक बड़ी रकम निवेश करनी शुरू कर दी। पीड़ित विजय का दावा है कि उन्होंने अकेले ही इस योजना में अब तक करीब 1 लाख 84 हजार रुपये जमा कर दिए हैं, लेकिन पिछले आठ महीनों से न तो उनका मूलधन वापस मिला है और न ही कोई ब्याज मिला है।

करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है ठगी की कुल रकम

पीड़ितों का आरोप है कि जब उन्होंने अपनी जमा राशि वापस मांगी, तो आरोपी उन्हें टालमटोल करते रहे और जल्द ही भुगतान करने का झूठा भरोसा देते रहे। यहां तक कि उन्हें यह भी झांसा दिया गया कि निवेशकों की 25 प्रतिशत राशि आ चुकी है और बहुत जल्द पूरा पैसा उनके खातों में ट्रांसफर कर दिया जाएगा।

पीड़ितों के साथ थाने पहुंचे अधिवक्ता आशीष सिंह ने पुलिस को बताया कि इस ठगी का दायरा बहुत बड़ा है और विभिन्न लोगों से जमा की गई कुल रकम अब बढ़कर करोड़ों रुपये तक पहुंच चुकी है।

पुलिस की प्रारंभिक जांच जारी

पुलिस के शुरुआती अनुसंधानों में यह बात सामने आई है कि शेयर ट्रेडिंग और ऑनलाइन निवेश के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करवाई गई है। निवेशकों का पैसा हड़पने और रकम लौटाने से साफ इनकार किए जाने के गंभीर आरोपों की पुलिस बारीकी से जांच कर रही है। आरोपियों की संलिप्तता के पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं, जिसके आधार पर जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

लुत्फी गैंग पर पुलिस का बड़ा शिकंजा, जयपुर से मोहम्मद रज्जाक गिरफ्तार; 8 आरोपी अब भी फरार

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भीलवाड़ा: दुबई में भारतीय मूल के व्यापारी मुकेश टेलर के अपहरण और रंगदारी के चर्चित मामले में भीलवाड़ा की सुभाषनगर थाना पुलिस ने एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने दुबई की जेल में बंद भारत के भगोड़े अपराधी फजले रउफ उर्फ 'लुत्फी' गैंग के एक अहम गुर्गे को जयपुर से धर दबोचा है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रज्जाक मोहम्मद उर्फ रियाज (निवासी मोहम्मदी कॉलोनी) के रूप में हुई है। पुलिस अधीक्षक सागर राणा ने इस शातिर बदमाश पर 25 हजार रुपए का इनाम घोषित कर रखा था।

दुबई में वारदात के बाद भारत भाग आया था आरोपी

पुलिस अनुसंधान के अनुसार, आरोपी रज्जाक 1 जुलाई को दुबई में भारतीय व्यापारी के अपहरण की सनसनीखेज वारदात को अंजाम देने के बाद, भीलवाड़ा के गांधीनगर निवासी मोइन खान के साथ फरार होकर भारत लौट आया था। इस मामले में सहयोगी मोइन को पुलिस पहले ही पिछले महीने उदयपुर से गिरफ्तार कर चुकी है।

इसके अलावा, मोइन को शरण देने के आरोप में बदनोर निवासी वसीम मोहम्मद और भीलवाड़ा में पीड़ित व्यापारी के परिजनों को धमकाकर रंगदारी वसूलने के मामले में शास्त्रीनगर निवासी योगेश मूंदड़ा की भी पूर्व में गिरफ्तारी हो चुकी है। वहीं, मुख्य सरगना लुत्फी की पत्नी और गैंग की सह-सरगना फहीम फातिमा की तलाश में पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है।

उच्च न्यायालय ने खारिज की अग्रिम जमानत याचिकाएं

सुभाषनगर थाना प्रभारी कैलाश कुमार विश्नोई ने जानकारी दी कि राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस प्रकरण में वांछित तीन अन्य गुर्गों—इमरान उर्फ चुन्नूलाला, जिशान खान और रियाज हसन उर्फ राजू पठान की अग्रिम जमानत याचिकाओं को शुक्रवार को खारिज कर दिया है। इससे पहले जेल में बंद योगेश मूंदड़ा और वसीम मोहम्मद की जमानत याचिकाएं भी अदालत द्वारा ठुकरा दी गई थीं।

8 अन्य फरार अपराधियों की तलाश जारी

पुलिस ने शिकंजा कसते हुए कई अन्य हार्डकोर और वांछित अपराधियों की सूची जारी की है, जिन पर इनाम घोषित कर लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया है:

  • जाविद उर्फ बादशाह: अहमदाबाद के चर्चित राधिका जिमखाना हत्याकांड का सजायाफ्ता और पैरोल से फरार अपराधी।

  • इमरान उर्फ चुन्नी लाला व जिशान खान: प्रतापगढ़ के वरिष्ठ अधिवक्ता जे. जोशी हत्याकांड के सजायाफ्ता और पैरोल से फरार हार्डकोर क्रिमिनल।

  • अन्य वांछित आरोपी: नीलम खोईवाल (दादाबाड़ी, भीलवाड़ा), जितेन्द्र कुमार उर्फ जीतू माली (सुमेरपुर, पाली), मोहम्मद आदिल शेख (मांडल, भीलवाड़ा) और नीतू महेश (अजमेर)।

जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी नीलम खोईवाल और आदिल शेख के खिलाफ यूएई के वीजा नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से दुबई भागने का एक अलग मामला भी दर्ज है। पुलिस प्रशासन द्वारा दुबई की जेल में बंद लुत्फी सहित चार प्रमुख भगोड़ों को प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) के जरिए जल्द से जल्द भारत लाने के कड़े प्रयास किए जा रहे हैं।

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