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सावरकर को भारत रत्न पर विपक्ष का तंज—बोले, उन्हें तो ब्रिटिश रत्न मिलना चाहिए

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डेस्क: वीर सावरकर को भारत रत्न देने पर बहस फिर से शुरू हो गई है, एक कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सावरकर को यह सम्मान देने से भारत रत्न की प्रतिष्ठा बढ़ेगी. मुंबई में RSS के शताब्दी समारोह में की गई इस टिप्पणी से कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. भागवत की इस मांग पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है.

RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा, “सावरकर को भारत रत्न किस आधार पर दिया जाना चाहिए? यह एक बहुत बड़ा सम्मान है. सावरकर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत का प्रचार किया, जिसे बाद में मुस्लिम लीग ने अपनाया. उन्होंने उसी आधार पर अपनी सरकार बनाई और अखंड भारत को टुकड़ों में बांट दिया.”

कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, “सावरकर ने ब्रिटिश सरकार की मदद की थी, जबकि कांग्रेस भारत की आज़ादी के लिए लड़ रही थी. वह एक फासीवादी थे. ऐसे व्यक्ति को भारत रत्न कैसे दिया जा सकता है? मोहन भागवत को ब्रिटिश सरकार से कहना चाहिए कि वे सावरकर को ‘ब्रिटिश रत्न’ दें.”

जिला रैंकिंग से मजबूत हो रही स्कूल शिक्षा में जवाबदेही और सुधार प्रक्रिया

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जयपुर, 9 फरवरी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जनवरी–2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी कर दी गई है। यह रैंकिंग प्रदेश के समस्त जिलों के शैक्षणिक  परिणामों, विद्यालयों के दैनिक संचालन और गवर्नेंस आदि संकेतकों में प्रदर्शन के आकलन के आधार पर जारी की जाती है। ताज़ा रैंकिंग में झुंझुनूं और हनुमानगढ़ शीर्ष जिलों में शामिल रहे हैं, जबकि चूरू ने सराहनीय प्रयास करते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया है।      

रैंकिंग में छात्रों की नियमित उपस्थिति, कक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता, फील्ड विजिट के माध्यम से निगरानी और शैक्षणिक मूल्यांकन में विद्यार्थियों के प्रदर्शन जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया गया है। सीखने के परिणामों पर बढ़ते जोर और उच्च स्तर पर नियमित प्रदर्शन समीक्षाओं के साथ, जिला रैंकिंग स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही, लक्षित सहयोग और निरंतर सुधार लाने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।      

सीखने के परिणामों को विशेष महत्व    
इस वर्ष शैक्षणिक सीखने के परिणामों को औपचारिक रूप से रैंकिंग का हिस्सा बनाया गया है। कॉम्पिटेंसी-बेस्ड असेसमेंट (सीबीए), ओरल रीडिंग फ्लुएंसी (ओआरएफ) असेसमेंट और बोर्ड परीक्षा के नतीजों को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि जिलों का प्रदर्शन न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि शैक्षणिक प्रभाव को भी दर्शा सके।     

डेटा-आधारित होती है समीक्षा:    
एकेडमिक रैंकिंग का उद्देश्य जिलों के प्रदर्शन की नियमित, डेटा-आधारित समीक्षा करना और स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही को मजबूत बनाना है। जिला रैंकिंग और पैरामीटर-वाइज़ स्कोर की हर माह स्कूल शिक्षा विभाग (सीएसई) के सचिव की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की जाती है, जिसमें कमियों की पहचान कर सुधार के लिए स्पष्ट अगले कदम तय किए जाते हैं। ताजा रैंकिंग के अनुसार झुंझुनूं और हनुमानगढ़ ने अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। तीसरे पायदान पर चूरू रहा, जिसने गंगानगर को पीछे छोड़ा। सीकर , भरतपुर  और खैरतल-तिजारा क्रमशः चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रहे। बांसवाड़ा और जैसलमेर सबसे निचले पायदान पर हैं।          

रैंकिंग प्रणाली ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत  किया है- शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि जिला रैंकिंग ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है। सीखने के परिणामों को रैंकिंग से जोड़ने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्तर पर निर्णय विद्यार्थियों की वास्तविक प्रगति के आधार पर हों। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि सभी जिलों को समान अवसर, समयबद्ध सहयोग और आवश्यक संसाधन मिलें, ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।

विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल ने कहा कि डेटा-आधारित समीक्षा और सीखने के परिणामों पर फोकस से अब स्कूल शिक्षा प्रणाली में ठोस और स्थायी सुधार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारों के जरिए हर विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।       

जयपुर, 9 फरवरी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जनवरी–2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी कर दी गई है। यह रैंकिंग प्रदेश के समस्त जिलों के शैक्षणिक  परिणामों, विद्यालयों के दैनिक संचालन और गवर्नेंस आदि संकेतकों में प्रदर्शन के आकलन के आधार पर जारी की जाती है। ताज़ा रैंकिंग में झुंझुनूं और हनुमानगढ़ शीर्ष जिलों में शामिल रहे हैं, जबकि चूरू ने सराहनीय प्रयास करते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया है।      

रैंकिंग में छात्रों की नियमित उपस्थिति, कक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता, फील्ड विजिट के माध्यम से निगरानी और शैक्षणिक मूल्यांकन में विद्यार्थियों के प्रदर्शन जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया गया है। सीखने के परिणामों पर बढ़ते जोर और उच्च स्तर पर नियमित प्रदर्शन समीक्षाओं के साथ, जिला रैंकिंग स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही, लक्षित सहयोग और निरंतर सुधार लाने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।      

सीखने के परिणामों को विशेष महत्व    
इस वर्ष शैक्षणिक सीखने के परिणामों को औपचारिक रूप से रैंकिंग का हिस्सा बनाया गया है। कॉम्पिटेंसी-बेस्ड असेसमेंट (सीबीए), ओरल रीडिंग फ्लुएंसी (ओआरएफ) असेसमेंट और बोर्ड परीक्षा के नतीजों को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि जिलों का प्रदर्शन न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि शैक्षणिक प्रभाव को भी दर्शा सके।     

डेटा-आधारित होती है समीक्षा:    
एकेडमिक रैंकिंग का उद्देश्य जिलों के प्रदर्शन की नियमित, डेटा-आधारित समीक्षा करना और स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही को मजबूत बनाना है। जिला रैंकिंग और पैरामीटर-वाइज़ स्कोर की हर माह स्कूल शिक्षा विभाग (सीएसई) के सचिव की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की जाती है, जिसमें कमियों की पहचान कर सुधार के लिए स्पष्ट अगले कदम तय किए जाते हैं। ताजा रैंकिंग के अनुसार झुंझुनूं और हनुमानगढ़ ने अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। तीसरे पायदान पर चूरू रहा, जिसने गंगानगर को पीछे छोड़ा। सीकर , भरतपुर  और खैरतल-तिजारा क्रमशः चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रहे। बांसवाड़ा और जैसलमेर सबसे निचले पायदान पर हैं।          

रैंकिंग प्रणाली ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत  किया है- शिक्षा मंत्री

शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि जिला रैंकिंग ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है। सीखने के परिणामों को रैंकिंग से जोड़ने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्तर पर निर्णय विद्यार्थियों की वास्तविक प्रगति के आधार पर हों। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि सभी जिलों को समान अवसर, समयबद्ध सहयोग और आवश्यक संसाधन मिलें, ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।

विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल ने कहा कि डेटा-आधारित समीक्षा और सीखने के परिणामों पर फोकस से अब स्कूल शिक्षा प्रणाली में ठोस और स्थायी सुधार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारों के जरिए हर विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।       

जीवाजी यूनिवर्सिटी के जूनियर स्टूडेंट्स में दहशत, UGC तक पहुंचे रैगिंग के मामले

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ग्वालियर : जीवाजी विश्वविद्यालय में लगातार रैगिंग की शिकायतें आ रही हैं. विश्वविद्यालय प्रबंधन शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा. दिखावे की कार्रवाई होने से रैगिंग करने वालों में भय समाप्त हो चुका है. मजबूर होकर स्टूडेंट्स अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में शिकायतें करने लगे हैं. पीड़ित छात्रों ने बीते 15 दिन में यूजीसी हेल्पलाइन पर 03 शिकायतें दर्ज कराई हैं.

 

आर्यभट्ट हॉस्टल में हफ्ते में दूसरी बार रैगिंग

भोजन को लेकर मारपीट, छात्र ने यूजीसी में की शिकायत 7 फरवरी 2026 को जीवाजी यूनिवर्सिटी के आर्यभट्ट हॉस्टल में छात्र से रैगिंग की शिकायत यूजीसी के पास पहुंची. पीड़ित छात्र ने आरोप लगाया "वह जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिस्सा लेने गया था, जहां भोजन के दौरान रोटी लेने को लेकर आर्यभट्ट हॉस्टल में हो रहने वाले फार्मेसी के 8 छात्रों ने उसके साथ मारपीट की और धमकी दी कि अगर वह हॉस्टल में उनके हिसाब से नहीं रहा तो जान से मार देंगे."

 

कुलसचिव और कुलगुरु ने किया हॉस्टल का दौरा

ये घटना भी तब हुई जब रैगिंग को लेकर आर्यभट्ट हॉस्टल से पहले की दो शिकायते सामने आ चुकी थीं. कुलसचिव ने प्रॉक्टोरिक्ल बोर्ड और एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्यों के साथ हॉस्टल का निरीक्षण कर छात्रों को इस तरह की गतिविधियां ना करने और ऐसी घटना की जानकारी देने की हिदायत दी. हालांकि इसके बाद फिर घटना हो गई. रैगिंग की नई घटना पर जांच बैठा दी गई है. वहीं रविवार को कुलगुरु प्रो. राजकीमार आर्य ने भी आर्यभट्ट और कैप्टन रूपसिंह हॉस्टल का निरीक्षण कर छात्रों से बातचीत कर समझाइश दी.

 

छात्र से मारपीट मामले में 3 लोगों को सजा

हफ़्ते भर पहले आर्यभट्ट हॉस्टल में लॉ के सीनियर स्टूडेंट के साथ फार्मेसी के करीब 8 जूनियर छात्रों ने बेरहमी से मारपीट की थी, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था. इस मामले में की गई रैगिंग की शिकायत पर जांच पूरी हो चुकी है. साथ ही विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 3 छात्रों को सजा भी सुनाई है.

 

रैगिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी

जीवाजी विश्व विद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विमलेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया "रैगिंग की शिकायतों पर चल रही जांच में प्रॉक्टोरल बोर्ड के सामने जो तथ्य सामने आए हैं, उसमें प्रभावी कार्रवाई की जा रही है. शिकायत के एक मामले में आरोपी छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उनके एक इंटरनल एग्जाम (आंतरिक परीक्षा) से वंचित कर दिया है, जिससे उनके परीक्षा परिणामों पर सीधे तौर पर असर पड़ेगा. अभी जांच जारी है. आगे जो तथ्य सामने आयेंगे, उनके आधार पर सजा पर विचार किया जाएगा.

 

पैरेंट्स को बुलाएंगे विश्वविद्यालय

पीआरओ राठौड़ का कहना है "जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु का कहना है और छात्रों को भी समझाइश होती है कि कोई ऐसा कम ना करें जिससे आपके भविष्य पर असर आए. इसलिए अगर छोटी से सजा में छात्र संभल जाते हैं तो बेहतर है. इन छात्रों के माता-पिता को भी विश्वविद्यालय बुलाया जाएगा और भविष्य में दोबारा ऐसी शिकायत आती है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी."

 

    जबलपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, फॉर्च्यूनर कार ने बाइक सवार युवक को कुचला

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    जबलपुर| जिले के ओमती थाना अंतर्गत नौदरा ब्रिज में एक बार फिर हिट एंड रन का मामला सामने आया है, जिसमें एक रईसजादा फॉर्च्यूनर कार से बाइक सवार युवक को कुचल कर मौके से फरार हो गया. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर पुलिस और एंबुलेंस को बुलवाया, जिसके बाद युवक को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया गया. अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर ने युवक को मृत घोषित कर दिया.

    क्या है पूरा मामला?

    जानकारी के अनुसार, बाइक सवार युवक पीयूष अपनी बाइक से घर जा रहा था, तभी रसल चौक से तैयब अली की तरफ जा रही फॉर्च्यूनर कार के चालक ने उसे साइड से जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही युवक सड़क पर गिर गया, लेकिन कार चालक रईस जादे ने कार रोक कर मदद करने की बजाय रफ्तार बढ़ा दी और वहां से भाग निकला. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने युवक को बचाने के लिए एंबुलेंस से उसे अस्पताल भी भेजा लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थी

    पुलिस चालक की तलाश में जुटी

    शहर के बीचों बीच हुई हिट एंड रन की इस घटना के बाद एक बार फिर शहर में यातायात व्यवस्था और वाहनों की रफ्तार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए टक्कर मारने वाली फॉर्च्यूनर कार और उसके चालक की तलाश शुरू कर दी है.

    भभूत समझकर चूहा मार दवा खा गई छात्रा, इलाज के दौरान तोड़ा दाम, 10 फरवरी से थे एग्जाम

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    भोपाल: राजधानी भोपाल के देहात थाना क्षेत्र ईटखेड़ी इलाके में एक ऐसा मामला सामने आया है, जहां 12वीं की छात्रा की अचानक मौत हो गई. बताया जा रहा है कि छात्रा चूहा मारने की दवा गलती से खा ली थी. मौके पर पहुंची पुलिस ने छात्रा का शव पोस्टमार्टम कराने के बाद परिवार को सौंप दिया है. रिपोर्ट आने के बाद पुलिस जांच की बात कह रही है.

     

    भभूत समझकर चूहा मार दवा खा गई छात्रा

    भोपाल के ईटखेड़ी थाना क्षेत्र में रहने वाली एक छात्रा की चूहा मार दवा खाने से मौत हो गई. थाना प्रभारी आशीष सप्रे ने बताया की "12वीं की छात्रा नहाने के बाद पूजा करने गई थी, जहां पूजा-पाठ करने के बाद उसने चूहा मार दवा को भभूत समझकर खा लिया. कुछ देर में जब छात्रा की तबीयत बिगड़ी तो परिजन उसे लेकर भानपुर के प्राइवेट अस्पताल पहुंचे. जहां इलाज के बाद उसे छुट्‌टी दे दी गई. घर लौटने के बाद युवती की तबीयत दोबारा बिगड़ गई. इस बार उसे हमीदिया अस्पतला में भर्ती कराया गया.12वीं क्लास में थी छात्रा

    जहां इलाज के दौरान सोमवार सुबह छात्रा की मौत हो गई. जबकि घटना 26 जनवरी की थी. पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है." वही जांच अधिकारी एसके वाजपेयी ने बताया कि "17 वर्षीय वैष्णवी सेनलांबाखेड़ा की रहने वाली थी. वह प्राइवेट स्कूल से 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही थी. 26 जनवरी को घर में बने मंदिर में पूजा के बाद वैष्णवी की मां ने चूहा मार दवा रख दी थी, क्योंकि मंदिर में चूहे हो रहे थे. कुछ देर बाद छात्रा ने यहीं पूजा की और भभूत समझकर पाउडरनुमा चूहामार दवा को खा लिया.

     

     

      दोबारा तबीयत बिगड़ने पर हमीदिया में कराया था भर्ती

      इसके बाद छात्रा कोचिंग चली गई, तबीयत बिड़ने पर घर लौटी तो उल्टियां होने लगी. मां ने पूछा तो छात्रा ने बताया कि उसने मंदिर में रखी भभूत को खाया था, तब मां ने बताया कि वह भभूत नहीं चूहा मार दवा थी. इसके बाद छात्रा को भानपुर के निजी अस्पताल में लेकर गए. जहां इलाज के बाद उसे डिस्चार्ज दे दिया गया. कुछ दिन में तबीयत दोबारा बिगड़ी तो युवती को तीन दिन पहले हमीदिया अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. एसके वाजपेयी ने कहा कि पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है. छात्रा की 10 फरवरी से परीक्षा शुरू होने वाली थी."

      पश्चिम बंगाल में बीजेपी का बड़ा दांव, महिलाओं को ₹2500 देने का वादा!

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      भाजपा पश्चिम बंगाल में महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए लाडली योजना की तर्ज पर बड़ा वादा कर सकती है। पार्टी विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में बंगाल की हर महिला मतदाता को हर महीने 2500 रूपये के नकद आर्थिक भुगतान करने की घोषणा कर सकती है। बिहार चुनाव में इसी तरह के वादे ने कमाल कर दिया था और भाजपा-जेडीयू गठबंधन बड़े बहुमत से सरकार बचाने में सफल रहा था। बंगाल में भी इसी तरह का मॉडल पेश कर पार्टी बढ़त हासिल करने की कोशिश करेगी। इसके अलावा पश्चिम बंगाल की एक लाख महिला मतदाताओं को  लखपति दीदी बनाने, ड्रोन दीदी रोजगार से जोड़ने और गरीब महिलाओं को प्रधानमंत्री आवास योजना सुविधा देने की घोषणा कर सकती है। भारतीय जनता पार्टी इस समय पश्चिम बंगाल में मतदाताओं से चुनाव संकल्प पत्र (घोषणा पत्र) तैयार करने के लिए सुझाव ले रही है।  फरवरी महीने के अंत में पार्टी अपना संकल्प पत्र जनता के सामने रख सकती है। इस संकल्प पत्र में ऐसी बड़े वादे किए जाने की संभावना है जो राज्य की चुनावी बिसात पर भाजपा को मजबूत बनाने का काम कर सकते हैं। महिला मतदाता भाजपा की विशेष समर्थक वर्ग के रूप में उभरी हैं। बिहार विधानसभा चुनाव में उन सीटों पर जहां महिला मतदाताओं का वोट प्रतिशत अधिक था, उनमें से सबसे ज्यादा सीटें एनडीए गठबंधन ने ही जीता है।  इसी प्रकार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, हरियाणा, राजस्थान और गुजरात के विधानसभा चुनाव में भी महिला मतदाताओं ने भाजपा को बढ़-चढ़कर वोट किया था। यह रुझान 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी बना रहा। यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों में महिलाओं के प्रति विशेष रुझान वाली योजनाओं का असर देखा जाता है। 

      ममता ने भी खेला दांव

      पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी महिलाओं के बीच बहुत लोकप्रिय रही हैं। राज्य में महिला मतदाताओं का वोट तृणमूल कांग्रेस को जाता रहा है। ममता बनर्जी ने भी महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए विशेष योजनाओं की घोषणा की है। 5 फरवरी को पेश राज्य के बजट में उन्होंने महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाई है। लक्ष्मी भंडार योजना के अंतर्गत महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता में ₹500 प्रति महीने की बढ़ोतरी की गई है। इसके अलावा सामान्य वर्ग एससी एसटी वर्ग की महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता में भी ₹500 प्रति माह की बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने आशा महिलाओं को मिलने वाले वेतन में भी बढ़ोतरी की है। इन योजनाओं के माध्यम से पश्चिम बंगाल सरकार लगभग 2.5 करोड़ महिलाओं को आर्थिक सहायता पहुंचाएगी। आने वाले समय में तृणमूल कांग्रेस भी अपना चुनावी घोषणा पत्र जारी करेगी। माना जा रहा है कि बिहार चुनाव से सबक लेते हुए ममता बनर्जी भी अपने इस वोट बैंक को बचाने के लिए बड़ा दांव खेलने की कोशिश कर सकती हैं। 

      'एनडीए जीतेगी चुनाव' 

      भाजपा नेता एसएन सिंह ने अमर उजाला से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरी दुनिया में महिलाओं का कल्याण करने के मामले में एक विश्वसनीय नेता के तौर पर लंबे समय से स्थापित हैं, जबकि पश्चिम बंगाल की जनता ने देखा है कि ममता बनर्जी सरकार केवल तुष्टिकरण करके चुनाव जीतने की कोशिश करती रही है। इस बार के बजट में भी उन्होंने विकास की बजाय तुष्टिकरण पर ध्यान दिया है। अब वे विधानसभा चुनाव में कोई भी बड़ा वादा कर लें, ममता दीदी चुनाव नहीं जीत पाएंगी क्योंकि पश्चिम बंगाल की जनता समझ गई है कि तृणमूल कांग्रेस के सत्ता में रहने का मतलब केवल घूसखोरी और भ्रष्टाचार है।उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता अब भाजपा और एनडीए की पारदर्शी स्वच्छ और जनता के लिए काम करने वाली सरकार चाहती है। उन्होंने कहा कि एनडीए इस बार पश्चिम बंगाल चुनाव भारी बहुमत से जीतेगी और जनता को ममता बनर्जी के कुशासन से मुक्ति मिलेगी। 

      आतंकवाद पर भारत को मिला वैश्विक समर्थन, PM मोदी बोले—देश का संदेश बिल्कुल साफ

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      नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने रविवार को कहा कि आतंकवाद (Terrorism) के मुद्दे पर भारत (Indore) का संदेश बिल्कुल स्पष्ट है। भारत इस मुद्दे पर न तो दोहरे मापदंड अपनाता है और न ही किसी तरह का समझौता करता है। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम (Malaysian Prime Minister Anwar Ibrahim) के साथ बैठक के बाद उन्होंने यह बात कही। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने सीमापार आतंकवाद की कड़ी निंदा की।

      दोनों ने आतंकवाद के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ अपनाने और इससे निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर प्रयासों पर जोर दिया। दोनों ने आतंक के वित्तपोषण पर अंकुश लगाने और नई तकनीकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति जताई।

      मलेशिया दौरे के आखिरी दिन विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गजों से मुलाकात के बाद PM मोदी ने कहा, भारत और मलेशिया के बीच विशेष संबंध हैं और दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष आतंकवाद और खुफिया क्षेत्र में सहयोग एवं समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तालमेल मजबूत करेंगे। साथ ही रक्षा सहयोग को भी और व्यापक बनाया जाएगा। PM मोदी ने कहा कि AI और डिजिटल तकनीक के साथ सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाया जाएगा।

      PM मोदी ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा कि यह क्षेत्र दुनिया की विकास धुरी के रूप में उभर रहा है और भारत आसियान देशों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मलेशियाई प्रधानमंत्री इब्राहिम ने कहा कि भारत और मलेशिया व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी और रक्षा सहयोग को लगातार विस्तार दे रहे हैं। उन्होंने वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में भारत की तेज प्रगति की सराहना की।

      उद्योगपतियों से मुलाकात की
      PM मोदी ने मलेशिया के चार प्रमुख उद्योगपतियों से मुलाकात कर भारतीय अर्थव्यवस्था में उनकी बढ़ती दिलचस्पी की सराहना की। प्रधानमंत्री ने भारत और मलेशिया के बीच बढ़ते कारोबारी रिश्तों को सकारात्मक बताया और कहा कि भारतीय विकास यात्रा में मलेशियाई कंपनियों की भागीदारी महत्वपूर्ण है। प्रधानमंत्री ने पेट्रोनास के प्रमुख तेंगकु मोहम्मद तौफिक, बरजाया कॉरपोरेशन के संस्थापक विंसेंट टैन, खजानाह नेशनल के प्रबंध निदेशक अमीरुल फैसल वान जाहिर और फिसन इलेक्ट्रॉनिक्स के संस्थापक पुआ खेन सेंग से अलग-अलग मुलाकात की।

      भारतीय मूल के नेताओं से मिले
      PM मोदी ने भारतीय मूल के मंत्रियों, सांसदों, सीनेटरों से मुलाकात की और भारत-मलेशिया संबंध मजबूत करने में उनकी भूमिका की सराहना की। PM मोदी ने कहा कि इन नेताओं का भारत से भावनात्मक जुड़ाव स्पष्ट दिखता है और सार्वजनिक जीवन में उनकी उपलब्धियां गर्व की बात हैं। उन्होंने कहा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की भागीदारी भारत-मलेशिया मित्रता के समर्थन को दर्शाती है।

      भारत-मलेशिया को जोड़ती है तमिल
      PM मोदी ने कहा, भारत और मलेशिया तमिल भाषा के प्रति साझा लगाव से जुड़े हुए हैं। मलेशिया में तमिल की मजबूत मौजूदगी शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में साफ दिखाई देती है। मलेशिया में भारतीय मूल के करीब 30 लाख लोग रहते हैं, जो दुनिया में दूसरी सबसे बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी है। इनमें बड़ी संख्या तमिल मूल के लोगों की है।

      आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक से मिले
      PM मोदी आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिक जयराज राजा राव से भी मिले। उन्होंने उनके साहस, विरासत और बलिदान के लिए देशवासियों की ओर से आभार व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आजाद हिंद फौज के वीरों का साहस भारत की नियति को आकार देने में अहम रहा। राव से मिलना बहुत विशेष रहा और उनके अनुभव बेहद प्रेरणादायक हैं।

      ‘इब्राहिम भी एमजीआर के बड़े प्रशंसक’
      PM मोदी ने कहा कि उनके मलेशियाई समकक्ष अनवर इब्राहिम भी तमिल अभिनेता और पूर्व मुख्यमंत्री एमजीआर के बड़े प्रशंसक हैं। उन्होंने यह टिप्पणी तब की जब इब्राहिम द्वारा आयोजित लंच के दौरान एमजीआर की फिल्म नालै नमथे का गीत प्रस्तुत किया गया। एमजीआर यानी मरुथुर गोपालन रामचंद्रन प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक और निर्माता रहे हैं। उन्होंने तमिलनाडु में एआईएडीएमके की स्थापना की और बाद में राज्य के मुख्यमंत्री बने। 1975 में रिलीज हुई नालै नमथे उनकी लोकप्रिय फिल्मों में शामिल है।

      सुप्रीम कोर्ट में चैतन्य बघेल की जमानत पर घमासान, अगले हफ्ते होगी सुनवाई

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      छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट एक हफ्ते बाद सुनवाई करेगा। छत्तीसगढ़ सरकार ने कथित शराब घोटाला मामले मे चैतन्य बघेल को दी गई जमानत को चुनौती दी है। चैतन्य, पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल के बेटे हैं। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की बेंच के सामने छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी पेश हुए। उन्होंने बेंच को बताया कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद मामले का एक भी अहम गवाह सामने नहीं आ रहा है।प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी इससे जुड़े धनशोधन मामले में चैतन्य बघेल की जमानत को अलग से चुनौती दी है। बेंच ने कहा कि इस मामले की सुनवाई एक हफ्ते बाद की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं सौम्या चौरसिया की एक अलग याचिका पर भी सुनवाई की। सौम्या चौरसिया को कथित शराब घोटाले के मामले में ईडी ने पिछले साल दिसंबर में गिरफ्तार किया था।सौम्या चौरसिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही अन्य मामलों में उन्हें जमानत दे चुका है। अब उन्होंने फिर से नई प्राथमिकी दर्ज की और दिसंबर में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यह छठी बार है जब उन्हें गिरफ्तार किया गया है। इस पर बेंच ने सौम्या चौरसिया से कहा कि वह जमानत के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का रुख करें।

      शादी के कार्ड पर सांसद हनुमान बेनीवाल की फोटो, मुख्य अतिथि बताने पर मचा बवाल

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      नागौर|राजनीतिक पार्टियों के समर्थक अपने नेता के प्रचार के लिए अक्सर एक से एक नया तरीका अपनाते हैं। कभी उनके लिए लोगों से उलझ जाते हैं तो कभी उनके नाम का टैटू शरीर पर बनवा लेते हैं। लेकिन नागौर में एक व्यक्ति ने अपने शादी में नागौर के सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल की फोटो शादी के कार्ड पर छपवा दिया है। शादी के कार्ड में यह भी लिखा कि शादी के कार्यक्रम में हनुमान बेनिवाल बतौर मुख्य अतिथि शामिल होंगे। 

      'जो तूफानों में पलते हैं, वही दुनिया बदलते हैं'

      नागौर जिले के रायधनु गांव में लेगा परिवार द्वारा छपवाए गए शादी के निमंत्रण पत्र पर सांसद हनुमान बेनीवाल की तस्वीर के साथ लिखा गया है. 'जो तूफानों में पलते हैं, वही दुनिया बदलते हैं।' यह शादी कार्ड जसनाथ प्रिंटिंग पॉइंट, कृषि मंडी चौराया, नागौर द्वारा डिजाइन किया गया है। कार्ड की अनोखी डिजाइन और उस पर नेता की तस्वीर ने इसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया है।

      क्या कह रहे राजनीतिक विश्लेषक?

      राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम हनुमान बेनीवाल की जमीनी पकड़ और आमजन के बीच उनके मजबूत जुड़ाव को दर्शाता है। समर्थकों के बीच बेनीवाल को लेकर जो भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिल रहा है, वह अब राजनीतिक समर्थन से आगे बढ़कर सामाजिक पहचान का रूप लेता नजर आ रहा है।
       

      MP में निगम-मंडलों में नियुक्ति टालकर सरकार ने बचाए 25 करोड़ रुपये

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      भोपाल।  मध्य प्रदेश में निगम-मंडल, आयोग, बोर्ड और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों पार्टी के दिग्गज नेता दो साल से भले ही इंतजार कर रहे हों लेकिन इन संस्थाओं के कामकाज पर कोई फर्क नहीं पड़ा. इस दौरान दर्जा प्राप्त मंत्री व राज्यमंत्रियों के वेतन भत्ते, आवास, वाहन और स्टाफ आदि पर होने वाला करीब 25 करोड़ रुपये का खर्च भी बचे हैं।

      घाटे में चल रही कई संस्थाएं

      घाटे में चल रहे कई निगम-मंडल सरकारी खजाने पर सफेद हाथी ही साबित हो रहे हैं. ऊपर से इस तरह के खर्चों से उनकी आर्थिक बदहाली ही बढ़ रही है. प्रदेश में नियुक्तियों के लिए कुल संस्थाओं की संख्या 62 है. कुछ संस्थाओं में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष तैनात भी हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की कमान संभालने के 4 महीने बाद (फरवरी 2024)46 दर्जा मंत्रियों की नियुक्तियां निरस्त कर दी थीं. इसके बाद से सियासी नियुक्तियों के लिए नेता दिल्ली की परिक्रमा में जुटे हैं।

      ये हैं सुविधाएं और खर्च

      दर्जा प्राप्त मंत्री-राज्यमंत्रियों का वेतन-भत्ता, आवास, वाहन व मेडिकल सहित अन्य सुविधाओं पर औसतन 10-12 लाख रुपए सालाना खर्च पड़ता है. वहीं, बोर्ड सदस्यों को मीटिंग व प्रवास के लिए भत्ते की पात्रता है.अध्यक्ष-उपाध्यक्षों के लिए मानदेय व प्रीमियम-मीडियम सेगमेंट की गाड़ी किराया 50-60 हजार रुपए प्रतिमाह, भृत्य, माली, सहायक, ड्राइवर दो-ढाई हजार किमी यात्रा का ईंधन. यदि पीएसओ लेते हैं तो उसका व्यय अलग।

      घाटे-फायदे वालीं संस्थाएं

      बीज एवं फार्म विकास, लघु उद्योग, स्टेट सिविल सप्लाई कार्पोरेशन, पशु पालन कुक्कुट और स्टेट इलेक्ट्रानिक विकास सहित कई निगम मंडल घाटे में चल रहे है. खनिज और वन विकास निगम फायदे में हैं. प्राधिकरणों में योजनाओं के हिसाब से लाभ-हानि का हिसाब है. बीडीए फिलहाल फायदे में चल रहा है. सरकारी खजाने पर भार 50 संस्थाओं में अध्यक्ष-उपाध्यक्षों का खर्च जोड़ें तो दो साल में सरकार के खजाने पर करीब 24-25 रुपए खर्च होता जो बच गया. नियुक्तियों का मामला लगातार टलता जा रहा है. इस मुद्दे पर सत्ता-संगठन के प्रमुख नेता हाईकमान के साथ भी कई मर्तबा बैठकें कर चुके हैं।

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