Home Blog Page 3

स्ट्रांग रूम की चाबी IAS अफसर ने सौंपी, फिर 40 लाख में पेपर बेचने का आरोप

0

बेंगलुरु | कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) द्वारा आयोजित वेटरनरी ऑफिसर्स (पशु चिकित्सा अधिकारियों) की भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली और प्रश्न-पत्र लीक करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जाँच में खुलासा हुआ है कि राजपत्रित अधिकारी बनने के इस इम्तिहान में प्रश्न-पत्रों को मोटी रिश्वत लेकर बेचा गया था। प्रत्येक उम्मीदवार से प्रश्न-पत्र उपलब्ध कराने के एवज में 80 लाख रुपये की माँग की गई थी, जो बाद में मोलभाव के बाद 30 से 40 लाख रुपये में तय हुआ। इस पूरी साजिश का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह रहा कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी ने स्वयं परीक्षा के स्ट्रांग रूम की 'चाबी' पेपर लीक करने वाले मुख्य सरगना को सौंप दी थी। जिन अभ्यर्थियों ने इसके लिए पैसे चुकाए थे, उन्हें परीक्षा वाले दिन विशेष गाड़ियों में बैठाकर सुरक्षित तरीके से परीक्षा केंद्रों तक पहुँचाया गया था।

ईडी की जाँच और बसवराज कन्नाले की गिरफ्तारी

प्रवर्तन निदेशालय का बेंगलुरु जोनल ऑफिस, KPSC द्वारा कुल 400 पदों पर वेटरनरी ऑफिसर्स की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा में हुई भारी अनियमितताओं की गहन जाँच कर रहा है। यह पूरी जाँच बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई कई प्राथमिकियों (FIRs) के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किए गए हैं।

जाँच के दौरान ED के हाथ ऐसे पुख्ता सबूत लगे हैं जिनसे साबित होता है कि मुख्य आरोपी बसवराज कन्नाले ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर अवैध रूप से पैसे वसूले और उम्मीदवारों को सही उत्तरों वाला लीक प्रश्न-पत्र मुहैया कराकर उनका चयन सुनिश्चित किया। इसी आधार पर बसवराज कन्नाले को 17 सितंबर को गिरफ्तार कर लिया गया था, जिन्हें अदालत ने 14 दिनों की ईडी हिरासत में भेजा था।

लाखों रुपयों की डील और एडवांस भुगतान के तरीके

जाँच में यह बात सामने आई कि बसवराज कन्नाले को गोपनीय प्रश्न-पत्रों तक सीधी पहुँच KPSC के तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक एवं आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के साथ अपनी गहरी नजदीकिय़ों के कारण मिली थी। गंगवार के पास ही परीक्षा की गोपनीय सामग्री की कस्टडी और सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी थी।

कन्नाले ने कई योग्य उम्मीदवारों की पहचान कर उनसे संपर्क किया और चयन का भरोसा दिलाया। प्रत्येक उम्मीदवार से शुरुआत में 80 लाख रुपये माँगे गए थे, जो बाद में 30 से 40 लाख रुपये में तय हुए। इस अवैध रकम का कुछ हिस्सा नकद (कैश) तथा कुछ बैंकिंग चैनलों के माध्यम से एडवांस के तौर पर लिया गया। इसके अतिरिक्त, शेष राशि की गारंटी के रूप में कई उम्मीदवारों से बिना रकम भरे हुए हस्ताक्षर किए हुए चेक और प्रॉमिसरी नोट भी जब्त किए गए हैं, जिन्हें तलाशी के दौरान बरामद किया गया।

रिसॉर्ट में रुकवाकर उत्तर रटवाने की साजिश

जाँच से यह भी खुलासा हुआ है कि अवैध रिश्वत की इस रकम को ठिकाने लगाने के लिए 'ओम लक्ष्मी सौहार्द सहकारी संघ नियमित, बीदर' के बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। चयनित उम्मीदवारों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित एक गुप्त रिसॉर्ट में ले जाया गया, जहाँ उन्हें लीक हुआ प्रश्न-पत्र और उसके सही उत्तर उपलब्ध कराए गए। बसवराज कन्नाले और उसके साथियों की कड़ी देखरेख में उम्मीदवारों को वे उत्तर रटवाए गए। इसके अगले दिन, यानी परीक्षा तिथि पर, कन्नाले द्वारा प्रबंधित विशेष वाहनों से उन अभ्यर्थियों को उनके निर्धारित परीक्षा केंद्रों तक ले जाया गया।

आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की संलिप्तता और गिरफ्तारी

इस घोटाले में तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक और आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार की भूमिका बेहद संदिग्ध पाई गई। उन्हें परीक्षाओं के निष्पक्ष और पारदर्शी संचालन, प्रश्न-पत्रों की छपाई की निगरानी और गोपनीय सामग्री की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। किंतु उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अवैध रिश्वत के बदले परीक्षा से ठीक एक दिन पहले बसवराज कन्नाले को प्रश्न-पत्र लीक करने में पूरी मदद की।

गंगवार को 18 सितंबर को औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर पीएमएलए (PMLA) मामलों की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहाँ से उन्हें भी 14 दिन की ईडी कस्टडी में भेजा गया। जाँच में यह भी पता चला कि इस अवैध कमाई को छिपाने और उसे वैध (सफेद) दिखाने के लिए बैंक ट्रांसफर, सोने के आभूषणों की खरीद, तथा हवाई यात्राओं के नकद भुगतान जैसे विभिन्न माध्यमों से काले धन को ठिकाने लगाया गया था।

तेल अवीव जा रही FZ1081 के रूट को लेकर हुआ भ्रम, सामान्य रास्ते पर बढ़ी फ्लाइट

0

दुबई| दुबई से तेल अवीव (इजराइल) जा रही फ्लाईदुबई एयरलाइंस की एक अन्य उड़ान (एफजेड 1081) को बुधवार को तकनीकी कारणों के चलते वापस दुबई लौटना पड़ा। हालाँकि, विमान के अचानक लौटने की वास्तविक वजह अभी तक आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं की जा सकी है, किंतु प्रारंभिक संकेतों के अनुसार इस घटना का उस अन्य उड़ान से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है जिसमें हाल ही में कथित रूप से 'हाइजैक' (अपहरण) का आपातकालीन अलर्ट जारी किया गया था।

कॉकपिट में पायलटों के बीच हिंसक झड़प और आपातकालीन संकेत

इससे पूर्व, दुबई से तेल अवीव के लिए रवाना हुई फ्लाईदुबई की उड़ान संख्या 'एफजेड 1073' में उस समय हड़कंप मच गया जब हवा में सफर के दौरान विमान के दोनों पायलटों के बीच कथित तौर पर खूनी और हिंसक झड़प हो गई। इस सनसनीखेज घटना के दौरान विमान से दो गंभीर आपातकालीन संकेत (इमरजेंसी कोड्स) प्रसारित किए गए, जिनमें से एक कोड सीधे तौर पर विमान में गैरकानूनी हस्तक्षेप यानी संभावित हाइजैक की ओर इशारा कर रहा था। इस आपात स्थिति के बाद इजराइल सहित संबंधित देशों की सुरक्षा एजेंसियाँ पूरी तरह सतर्क हो गईं और अंततः विमान को सऊदी अरब के तबूक हवाई अड्डे पर सुरक्षित उतार लिया गया। एयरलाइंस ने पुष्टि की है कि सभी यात्री सुरक्षित हैं और मामले की उच्चस्तरीय जाँच की जा रही है।

विमान के भीतर अफरा-तफरी और इस्राइल में हाई-अलर्ट

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस विमान में कुल लगभग 180 यात्री सवार थे, जिनमें 100 से अधिक इजराइली नागरिक शामिल थे। उड़ान के दौरान कॉकपिट के भीतर दोनों पायलटों के बीच अचानक शारीरिक संघर्ष शुरू हो गया। इस दौरान एक पायलट के घायल होने और धारदार हथियार (चाकू) से हमले की खबरें भी सामने आईं। विमान के भीतर चीख-पुकार सुनकर सहमे यात्रियों ने स्थिति को सँभालने और घायल पायलट की सहायता करने में अपनी भूमिका निभाई।

सबसे खतरनाक स्थिति तब उत्पन्न हुई जब विमान अचानक तेजी से नीचे गोता लगाने लगा। फ्लाइट ट्रैकिंग आँकड़ों के मुताबिक, विमान ने बहुत कम समय में ही करीब 15,000 फीट की ऊँचाई गँवा दी। विमान ने सबसे पहले '7700' (सामान्य आपातकाल) कोड प्रसारित किया और इसके कुछ ही मिनटों बाद '7500' कोड भेजा, जो विशेष रूप से विमान के अपहरण या गैरकानूनी हस्तक्षेप को दर्शाता है। इस कोड के मिलते ही इजराइली सुरक्षा तंत्र में भारी हलचल मच गई; वायुसेना ने लड़ाकू विमानों को तत्पर कर दिया और देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ आपात बैठक की। हालाँकि, बाद की जाँच में स्पष्ट हुआ कि विमान का कोई हाइजैक नहीं हुआ था, बल्कि यह पूरा विवाद कॉकपिट के भीतर पायलटों की आपसी झड़प का परिणाम था।

सऊदी अरब के तबूक में सुरक्षित लैंडिंग और व्यापक जाँच

तमाम असाधारण परिस्थितियों के बीच विमान ने अपने गंतव्य तेल अवीव जाने के बजाय सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर एक आपात लैंडिंग की। फ्लाईदुबई प्रबंधन ने बयान जारी कर बताया कि विमान की सुरक्षित लैंडिंग करा ली गई है और सभी यात्री सकुशल हैं। एयरलाइंस की तकनीकी और सुरक्षा टीमें स्थानीय व अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों के साथ मिलकर इस बात की गहराई से जाँच कर रही हैं कि आखिर कॉकपिट के अंदर ऐसा क्या विवाद हुआ था, जिसके कारण विमान की सुरक्षा खतरे में पड़ी और यात्रियों को भारी मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

राहुल गांधी के दौरे को लेकर मंत्री उदय प्रताप का बयान, बोले- 30 साल पीछे चल रही राजनीति

0

भोपाल | मध्य प्रदेश शासन के परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के हालिया बालाघाट दौरे को लेकर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि राहुल गांधी भारतीय राजनीति में लगभग 30 वर्ष विलंब से चल रहे हैं। मंत्री ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी आज जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं, उन विषयों पर उन्हें अपनी युवावस्था और शुरुआती राजनीतिक सफर के दौरान संवेदनशीलता दिखानी चाहिए थी।

राहुल गांधी की कार्यशैली और विलंब पर तंज

कैबिनेट मंत्री उदय प्रताप सिंह ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वे व्यक्तिगत रूप से राहुल गांधी के संदर्भ में कम बोलने का प्रयास करते हैं, किंतु वास्तविकता यह है कि वे हर कदम पर काफी देर से प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सामान्यतः जो राजनीतिक गतिविधियाँ और जनसरोकार के कार्य एक युवा राजनेता द्वारा 25, 26 या 28 वर्ष की आयु में किए जाते हैं, वे तमाम कार्य राहुल गांधी 56-57 वर्ष की आयु में कर रहे हैं।

बालाघाट दौरे और अतीत की घटनाओं पर सवाल

मंत्री ने राहुल गांधी के बालाघाट दौरे की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1999 में बालाघाट क्षेत्र में नक्सलियों द्वारा तत्कालीन सरकार के एक मंत्री की निर्मम हत्या कर दी गई थी। उस दौर में भी राहुल गांधी सक्रिय राजनीति का हिस्सा थे, परंतु तब उन्होंने उस क्षेत्र में जाकर पीड़ित परिवारों के प्रति किसी प्रकार की संवेदना व्यक्त नहीं की थी।

उन्होंने आगे कहा कि जिस समय बालाघाट और उसके आसपास के दूरदराज इलाकों में नक्सलवाद अपने चरम पर था और लगातार खून-खराबे की घटनाएँ हो रही थीं, तब कॉन्ग्रेस नेतृत्व ने कभी सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के पीड़ित परिवारों से मुलाकात करने की सुधि नहीं ली। वर्तमान परिस्थितियों में, जब मौसम और स्वास्थ्य से जुड़ी चुनौतियाँ हैं, राहुल गांधी का अचानक बालाघाट पहुँचना और इस संवेदनशील विषय को केवल राजनीतिक रंग देना पूरी तरह अनुचित है।

नक्सलवाद पर नियंत्रण और सरकार के विकास कार्य

एक पूर्व प्रभारी मंत्री के रूप में अपने अनुभवों को साझा करते हुए उदय प्रताप सिंह ने कहा कि उन्होंने बालाघाट क्षेत्र में आए बदलावों को बहुत करीब से देखा है। उन्होंने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार और राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री के संयुक्त प्रयासों से क्षेत्र में नक्सलवाद पर प्रभावी नियंत्रण पाया गया है।

उन्होंने रेखांकित किया कि नक्सलवाद का दायरा सिमटने के बाद ही दूरदराज के अंचलों तक प्रशासनिक व्यवस्थाएँ सुगम हो सकी हैं, सरकारी अधिकारियों की आवाजाही बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य सड़कों के जरिए शहरों तथा कस्बों से जोड़ा गया है। इसके अलावा, प्रशासन ने 'बैगा जनजाति' जैसे विशेष पिछड़ी जातियों के लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कई ठोस प्रयास किए हैं।

कांग्रेस पार्टी पर माहौल बिगाड़ने का गंभीर आरोप

परिवहन मंत्री ने अंत में कॉन्ग्रेस पार्टी पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वर्तमान में बदलते हुए और विकास की ओर अग्रसर परिवेश में सकारात्मक भूमिका निभाने के बजाय यदि कोई दल राजनीतिक स्वार्थ के लिए माहौल को दूषित करने का प्रयास करता है, तो यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में आरोप लगाया कि राहुल गांधी का यह दौरा मानवीय संवेदनाओं से कोसों दूर है और इसे पूरी तरह से राजनीतिक हितों को साधने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है।

शिवराज ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, विदेश में दिए बयानों को लेकर उठाए सवाल

0

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के आगामी 1 अक्टूबर को मध्य प्रदेश दौरे से ठीक पहले केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन पर और 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। शिवराज ने राहुल गांधी पर विदेश में देश की छवि धूमिल करने और लगातार झूठ व मनगढ़ंत आरोप लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी अपनी गलतियों के लिए माफी मांगने के बजाय सिर्फ कन्फ्यूजन फैला रहे हैं।

'सेव डेमोक्रेसी नहीं, सेव डायनेस्टी मार्च है'

इंडिया गठबंधन की बैठकों और रणनीतियों पर सवाल उठाते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि इन बैठकों का नतीजा "शून्य विजन, सौ प्रतिशत हताशा और चुनाव से पहले ही हार का बहाना" साबित हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब 'सेव डेमोक्रेसी' (लोकतंत्र बचाओ) के नाम पर असल में 'सेव डायनेस्टी' (वंश बचाओ) मार्च करने जैसा है।

शिवराज ने कटाक्ष करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में जब तक बीजेपी की जीत सुनिश्चित नहीं हुई थी, तब तक राहुल गांधी टीएमसी की हार का कारण ममता बनर्जी की गलतियां बता रहे थे और तब उन्हें 'एसआईआर' (SIR) याद नहीं आया था, लेकिन अब वे इस पर बयानबाजी कर रहे हैं। इससे साफ है कि उन्हें खुद नहीं पता कि उन्हें क्या बोलना है और क्या नहीं।

'इंडिया गठबंधन में बिखराव और नेतृत्व पर सवाल'

इंडिया गठबंधन की एकजुटता पर बड़ा सवाल खड़ा करते हुए शिवराज ने कहा कि इस गठबंधन की हालत "दिल के टुकड़े-टुकड़े होने" जैसी हो गई है, जिसका एक टुकड़ा यहां गिरता है तो दूसरा वहां। उन्होंने सवाल उठाया कि बैठक में बड़े चेहरे नदारद क्यों थे:

  • उत्तर प्रदेश के चुनाव नजदीक होने के बावजूद अखिलेश यादव बैठक में क्यों नहीं थे?

  • एमके स्टालिन (DMK) पहले ही कह चुके हैं कि जहां कांग्रेस होगी, वे वहां नहीं बैठेंगे।

  • अरविंद केजरीवाल और उद्धव ठाकरे भी इस बैठक से नदारद रहे।

शिवराज ने दावा किया कि असलियत तो यह है कि इंडिया गठबंधन के दल खुद राहुल गांधी को अपना नेता मानने को तैयार नहीं हैं। यह उनकी खुद को स्थापित करने और री-लॉन्च करने की 50वीं कोशिश है, लेकिन वे बार-बार असफल हो रहे हैं, जबकि कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में राहुल गांधी नेताओं से केवल "मुझ पर भरोसा करो" की गुहार लगा रहे हैं।

'शुद्ध वोटर लिस्ट लोकतंत्र की आत्मा'

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और वोटर लिस्ट से नाम हटाने के विपक्ष के विरोध पर पलटवार करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शुद्ध और पारदर्शी मतदाता सूची ही असल मायनों में "लोकतंत्र की आत्मा" है। उन्होंने कांग्रेस से सीधा सवाल किया कि यदि कोई व्यक्ति जीवित नहीं है, मतदाता सूची में नाम डुप्लीकेट हैं, या जो व्यक्ति देश का नागरिक ही नहीं है, उसका नाम वोटर लिस्ट से काटा जाता है, तो इस पर विपक्ष को क्या आपत्ति हो सकती है? एक पवित्र और निष्पक्ष लोकतंत्र के लिए मतदाता सूची का साफ-सुथरा होना सबसे जरूरी है।

दूसरे वनडे में कैंपबेल का कमाल, शतक लगाकर वेस्टइंडीज के लिए रचा बड़ा रिकॉर्ड

0

भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेले जा रहे दूसरे एकदिवसीय (वनडे) अंतरराष्ट्रीय मुकाबले के दौरान कैरेबियाई टीम के सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल ने अपनी तूफानी बल्लेबाजी से इतिहास रच दिया है। उन्होंने शानदार शतकीय पारी खेलते हुए एक नया रिकॉर्ड अपने नाम किया है। जॉन कैंपबेल अब भारत के खिलाफ वनडे क्रिकेट के इतिहास में वेस्टइंडीज की ओर से सबसे तेज शतक जड़ने वाले बल्लेबाज बन गए हैं। कैंपबेल ने इस मुकाबले में मात्र 65 गेंदों का सामना करते हुए अपना शतक पूरा किया। इसके साथ ही उन्होंने 27 साल पुराना पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिया है; इससे पहले यह रिकॉर्ड वेस्टइंडीज के पूर्व खिलाड़ी रिकार्डो पॉवेल के नाम दर्ज था, जिन्होंने वर्ष 1999 में भारत के विरुद्ध खेलते हुए 72 गेंदों में शतक बनाया था।

वेस्टइंडीज के लिए वनडे का पाँचवाँ सबसे तेज शतक

अपनी इस शतकीय पारी के साथ जॉन कैंपबेल ने वेस्टइंडीज के लिए वनडे फॉर्मेट में पाँचवाँ सबसे संयुक्त रूप से सबसे तेज शतक लगाने का कारनामा किया है। यदि समग्र रूप से बात करें, तो 50 ओवर के इस प्रारूप में कैरेबियाई टीम की ओर से सबसे तेज शतक जड़ने का ऑल-टाइम रिकॉर्ड महान बल्लेबाज ब्रायन लारा के नाम है, जिन्होंने साल 1999 में बांग्लादेश के खिलाफ मात्र 45 गेंदों में ही शतक ठोक दिया था।

मैच का हाल और शानदार शतकीय साझेदारी

टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत शुरुआत में कुछ खास नहीं रही थी और शुरुआती ओवरों में ही कीसी कार्टी 10 गेंदों में 9 रन बनाकर तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा का शिकार बन गए। हालांकि, इसके पश्चात कप्तान शाई होप और सलामी बल्लेबाज जॉन कैंपबेल ने पारी को बेहद मजबूत तरीके से संभाला। दोनों बल्लेबाजों के बीच दूसरे विकेट के लिए मात्र 79 गेंदों में 110 रनों की एक बेहद शानदार और तेज साझेदारी हुई।

अंततः जॉन कैंपबेल 68 गेंदों में 9 चौकों और 5 गगनचुंबी छक्कों की मदद से कुल 101 रनों की ऐतिहासिक पारी खेलकर आउट हुए। उनका स्ट्राइक रेट इस दौरान 148 से अधिक का रहा। उन्हें गेंदबाज गुरनूर बरार ने पवेलियन की राह दिखाई।

टीमों में बदलाव और पिछली पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि पहले वनडे मुकाबले में मिली हार के बाद वेस्टइंडीज की टीम ने अपनी इस मैच की प्लेइंग-11 में कुल चार महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। वहीं, भारतीय टीम भी एक बदलाव के साथ इस मैदान पर उतरी है, जहाँ नितीश कुमार रेड्डी के स्थान पर प्रतिभावान तेज गेंदबाज आकिब नबी को अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू करने का अवसर मिला है। पिछले मुकाबले में भारतीय टीम ने कप्तान शुभमन गिल के नेतृत्व में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए वेस्टइंडीज को आठ विकेट के बड़े अंतर से मात दी थी।

दोनों टीमों की आधिकारिक प्लेइंग-11

  • भारत: रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (विकेटकीपर), नमन धीर, रवींद्र जडेजा, आकिब नबी, गुरनूर बरार, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा।

  • वेस्टइंडीज: जॉन कैंपबेल, कीसी कार्टी, शाई होप (कप्तान और विकेटकीपर), अमीर जांगू, शेरफेन रदरफोर्ड, रोस्टन चेज, कीमो पॉल, अल्जारी जोसेफ, शमर जोसेफ, जेडेन सील्स, विटेल लॉज।

अनुकंपा नियुक्ति से पदोन्नति तक बदल सकते हैं नियम, भर्ती प्रक्रिया में भी संशोधन के संकेत

0

भोपाल। मध्य प्रदेश स्थापना दिवस (1 नवंबर) से ठीक पहले राज्य सरकार कर्मचारियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण और लंबित मामलों पर बड़े नीतिगत निर्णय ले सकती है। शासन स्तर पर अनुकंपा नियुक्ति, पदोन्नति, संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण, सेवा शर्तों और आचरण नियमों में बदलाव से जुड़े प्रस्तावों पर तेजी से मंथन चल रहा है। इसके साथ ही, युवाओं और अभ्यर्थियों के हित में भर्ती प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए समान प्रकृति के पदों पर अलग-अलग परीक्षाओं के बजाय अब एक ही साझा परीक्षा आयोजित करने की व्यवस्था पर भी विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को इस संबंध में जल्द से जल्द ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

अनुकंपा नियुक्ति और संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर मंथन

प्रदेश में लंबे समय से विभिन्न विभागों में अनुकंपा नियुक्तियों के मामले लंबित चले आ रहे हैं। हाल ही में भले ही स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 700 से अधिक अनुकंपा नियुक्तियों के आदेश जारी किए गए हों, लेकिन अन्य विभागों में अभी भी कई मामले अटके हुए हैं।

  • संविदा नीति: संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति और नियमितीकरण को लेकर स्पष्ट नीति की दरकार है। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित वर्ष 2023 की नीति (जिसके तहत 50% पदों पर संविदा कर्मियों को नियमित करने का प्रावधान है) को कई विभागों में पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

  • ऊर्जा विभाग ने लगभग 6 हजार पदों पर विभागीय परीक्षा के जरिए संविदा कर्मियों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू की है, और अब अन्य विभागों में भी इसी तर्ज पर निर्णय लिए जाने की उम्मीद है।

सीपीसीटी (CPCT) की अनिवार्यता पर मिल सकती है राहत

चतुर्थ श्रेणी से तृतीय श्रेणी के पदों पर पदोन्नति के मामले में कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण परीक्षा (CPCT) की अनिवार्यता कर्मचारियों के लिए एक बड़ी बाधा बनी हुई है। कई मामलों में कर्मचारियों को पदोन्नति मिलने के बाद भी सीपीसीटी की शर्त न पूरी कर पाने के कारण पदावनत (Demote) तक किया गया है।

  • नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अंतर्गत हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया था, जहां तय तीन साल में सीपीसीटी पास न कर पाने के कारण एक कर्मचारी की सेवाएं समाप्त कर दी गईं, जिसके बाद कर्मचारी संगठनों ने इस नियम का कड़ा विरोध किया है।

  • इसे देखते हुए सरकार अनुकंपा नियुक्तियों और चतुर्थ से तृतीय श्रेणी की पदोन्नति में सीपीसीटी की अनिवार्यता समाप्त करने या उसमें आवश्यक छूट देने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है।

पदोन्नति के नियमों में ढील और पात्रता अवधि में छूट संभव

पदोन्नति की राह देख रहे कर्मचारियों के लिए भी राहत भरी खबर आ सकती है। वर्तमान नियमों के तहत कई संवर्गों में पदोन्नति के लिए 5 साल की न्यूनतम सेवा अवधि तय है। प्रस्तावित बदलावों के तहत कुछ विशेष परिस्थितियों में इस सेवा अवधि में छूट देकर कर्मचारियों को जल्द पदोन्नति का अवसर दिए जाने पर विचार चल रहा है, जिससे लंबे समय से अटके मामलों का निपटारा हो सकेगा।

भर्ती परीक्षाओं में बार-बार की माथापच्ची से मिलेगी मुक्ति

युवाओं और अभ्यर्थियों के समय व संसाधनों की बचत के लिए सरकार भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने जा रही है। नई व्यवस्था के तहत अब समान प्रकृति के पदों के लिए अलग-अलग परीक्षाएं आयोजित करने के बजाय एक संयुक्त या साझा परीक्षा कराई जा सकती है। इससे न केवल प्रशासनिक कामकाज आसान होगा, बल्कि चयन प्रक्रिया में लगने वाले समय में भी भारी कमी आएगी।

मध्य प्रदेश स्थापना दिवस से पहले आने वाले इन संभावित फैसलों पर प्रदेशभर के लाखों कर्मचारियों और संगठनों की निगाहें टिकी हुई हैं। विभागों की अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन प्रस्तावों पर मुहर लगने की पूरी संभावना है।

चुनाव आयोग के खिलाफ CJP का जेल भरो आंदोलन, दीपक ने बताया कब और कहां से होगी शुरुआत

0

मुंबई। कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि आगामी गांधी जयंती (2 अक्टूबर) के अवसर पर मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क से 'जेल भरो आंदोलन' का आगाज किया जाएगा। उन्होंने मौजूदा चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग का कामकाज देशहित के अनुकूल नहीं है। मुंबई पहुंचने के बाद दीपके ने देश के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों और आम जनता से इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है।

चुनाव आयोग पर तानाशाही का आरोप

अभिजीत दीपके ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि चुनाव आयोग का तानाशाही रवैया देश के लिए एक गंभीर चिंता का विषय बन गया है। उन्होंने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को बचाने और बड़े बदलाव लाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही, चुनावों के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के कथित दुरुपयोग को लेकर एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार द्वारा जताई गई चिंताओं का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता से जुड़ी इन गंभीर शंकाओं को दूर करने के लिए सभी दलों को एकजुट होना होगा।

कब और कहां से होगा आंदोलन का आगाज?

घोषणा के मुताबिक, यह ‘जेल भरो आंदोलन’ राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती यानी 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क से शुरू किया जाएगा। वर्तमान में मतदाता सूची के 'विशेष गहन पुनरीक्षण' (एसआईआर) को लेकर विपक्ष का विरोध लगातार उग्र होता जा रहा है, और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ रही है, ऐसे में इस आंदोलन की घोषणा ने राजनीतिक सरगर्मी को और बढ़ा दिया है।

एमएनएस और यूबीटी का संयुक्त विरोध मार्च

चुनाव आयोग के खिलाफ चल रहे विरोध के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बड़े आंदोलन का ऐलान किया। इसके तहत आगामी 4 अक्टूबर को भायखला से बीएमसी मुख्यालय तक एक विशाल विरोध मार्च निकाला जाएगा, जिसमें चुनाव आयोग की नीतियों के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन किया जाएगा।

अभिषेक बनर्जी का बड़ा दावा, बोले- बंगाल में ज्यादा हो रही चुनावी अनियमितताएं

0

नई दिल्ली | ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद अभिषेक बनर्जी ने देश के चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़ी कथित अनियमितताओं पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अब तक देश में केवल विपक्षी राजनीतिक दल ही चुनाव प्रक्रिया और व्यवस्था में गड़बड़ी के आरोप लगाते रहे हैं, परंतु अब स्वयं चुनाव आयोग के भीतर से भी दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियाँ और असहमति सामने आ चुकी हैं, जो बेहद गंभीर मामला है।

चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और बंगाल की स्थिति पर बयान

अभिषेक बनर्जी ने अपनी बात रखते हुए कहा कि आयोग के दो अन्य आयुक्तों द्वारा उठाई गई आपत्तियों से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे इन आरोपों में कुछ न कुछ सच्चाई अवश्य है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा समय में चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी अनियमितताएँ देश के कई हिस्सों में देखने को मिल रही हैं, किंतु पश्चिम बंगाल राज्य के संदर्भ में यह स्थिति और भी अधिक गंभीर व चिंताजनक है।

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग के फैसले

उल्लेखनीय है कि अभिषेक बनर्जी की यह टिप्पणी ऐसे समय में सामने आई है जब निर्वाचन आयोग में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कुछ प्रमुख निर्णयों को लेकर दो चुनाव आयुक्तों की असहमति और आपत्तियों की खबरें सार्वजनिक हुई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग द्वारा लिए गए कुछ फैसलों पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।

इसी क्रम में राजधानी दिल्ली में 'इंडिया' गठबंधन की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं के बीच गहन विचार-विमर्श किया गया। गठबंधन के सभी नेता इन तमाम संवेदनशील विषयों पर आगे की संयुक्त राजनीतिक रणनीति तय करने में जुटे हुए हैं। हालांकि, चुनाव आयोग के सूत्रों की ओर से पहले ही इन सभी रिपोर्टों को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया जा चुका है कि एसआईआर (SIR) समेत आयोग के सभी निर्णय पूर्ण सहमति से लिए गए हैं।

गठबंधन की बैठक में प्रमुख मुद्दों पर बनी आम सहमति

दूसरी ओर, 'इंडिया' गठबंधन की इस बैठक के संपन्न होने के बाद राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी – शरदचंद्र पवार (NCP-SP) के प्रमुख नेता पीसी चाको ने मीडिया से मुखातिब होते हुए जानकारी दी कि बैठक में शामिल हुए तमाम विपक्षी दलों के बीच कुल छह प्रमुख मुद्दों पर पूरी तरह से एकमत सहमति बनी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन्हीं चिन्हित बिंदुओं को आधार बनाकर गठबंधन आगामी दिनों में अपनी संयुक्त रूपरेखा और रणनीति को आगे बढ़ाएगा।

हरे-लाल रंग को लेकर अखिलेश का बयान, बोले- मिलकर सपा का झंडा बन जाएंगे

0

लखनऊ | समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी राज्य मुख्यालय पर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने प्रदेश की वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने एक वीडियो प्रदर्शित करते हुए कहा कि जब हरा और लाल रंग आपस में मिलते हैं, तो वह समाजवादी पार्टी का झंडा बनाते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हरा रंग हरियाली का प्रतीक है और लाल रंग क्रांति का, तथा ये दोनों मिलकर आने वाले समय में प्रदेश की सत्ता को बदल देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार किसानों के हित के लिए कुछ नहीं कर रही है और अन्नदाताओं से केवल चुनावों के समय वोट बटोरे जाते हैं।

चुनावी प्रक्रिया में वोट चोरी और धांधली का गंभीर आरोप

अखिलेश यादव ने प्रेस वार्ता में कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि देश और प्रदेश के चुनावों में वोट चोरी और बेईमानी का खेल लंबे समय से चल रहा है। उन्होंने वर्ष 2022 के विधानसभा चुनावों का हवाला देते हुए दावा किया कि उस दौरान समाजवादी पार्टी के समर्थकों और मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से कटवा दिए गए थे।

उन्होंने कहा कि अब जब इस प्रकार की धांधली और वोट चोरी की खबरें मुख्यधारा के समाचार पत्रों में प्रकाशित होने लगी हैं, तब आम जनता को यह समझ आ रहा है कि चुनावी प्रणाली में किस हद तक घोटाले हो रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नोएडा क्षेत्र में वर्तमान में भी फर्जी मतदाता कार्ड और फर्जी वोट बनाने का कार्य जारी है।

न्यायपालिका से स्वतः संज्ञान लेने की अपील और 2027 के लिए हुंकार

सपा अध्यक्ष ने मांग करते हुए कहा कि चुनावों में वोट चोरी और फर्जीवाड़े की जिस प्रकार की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, उस पर संज्ञान लेते हुए देश की माननीय अदालतों को स्वतः संज्ञान (सुमो मोटो) लेना चाहिए और पश्चिम बंगाल तथा बिहार जैसे राज्यों में दोबारा चुनाव करवाए जाने चाहिए।

उन्होंने पूरे आत्मविश्वास के साथ कहा कि समाजवादी पार्टी ने वर्ष 2024 के आम चुनावों में भाजपा को पटखनी दी है और आने वाले वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इस पार्टी का पूरी तरह से सफाया कर दिया जाएगा। अखिलेश यादव ने केंद्र और राज्य सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा केवल गिने-चुने पूंजीपतियों और देश के बड़े उद्योगपतियों के लिए कार्य करती है, और यह मूल रूप से 'धन्नासेठों' की पार्टी बनकर रह गई है।

एशियन गेम्स 2026: भारत का सेमीफाइनल मुकाबला श्रीलंका से, फाइनल के लिए होगी जंग

0

श्रेयस अय्यर की कप्तानी में भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम ने एशियन गेम्स 2026 के सेमीफाइनल में शानदार तरीके से प्रवेश कर लिया है। जानकारी के अनुसार, भारत और अफगानिस्तान के बीच खेला जाने वाला क्वार्टर फाइनल मुकाबला भारी बारिश के कारण रद्द (धुल) गया था। प्रतियोगिता के नियमों और बेहतर टी20 रैंकिंग के आधार पर टीम इंडिया सीधे सेमीफाइनल में पहुँचने में सफल रही है। अब भारतीय टीम आगामी एक अक्टूबर को अपना दूसरा सेमीफाइनल मुकाबला खेलने मैदान पर उतरेगी, जहाँ उसका मुकाबला श्रीलंका की टीम से होगा।

पिछली बार बांग्लादेश को हराकर तय किया था फाइनल का सफर

गौरतलब है कि क्रिकेट खेल को एशियन गेम्स के इतिहास में चौथी बार शामिल किया गया है, हालाँकि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अब तक केवल दूसरी बार ही इस महाद्वीपीय टूर्नामेंट में अपनी आधिकारिक भारतीय टीम भेजी है। इससे पूर्व एशियन गेम्स 2023 में भारतीय टीम ने पहली बार इस प्रतियोगिता में भाग लिया था। उस दौरान सेमीफाइनल मुकाबले में टीम इंडिया का सामना बांग्लादेश की टीम से हुआ था। ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी में खेलते हुए भारतीय टीम ने बेहद शानदार प्रदर्शन का परिचय दिया था और पहले सेमीफाइनल मैच में बांग्लादेश को 9 विकेट के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी थी।

गेंदबाजों का उत्कृष्ट प्रदर्शन और बांग्लादेश की पारी

उस मुकाबले में टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी बांग्लादेश की टीम भारतीय गेंदबाजों के आगे संघर्ष करती नजर आई और निर्धारित 20 ओवरों में 9 विकेट के नुकसान पर मात्र 96 रन ही स्कोरबोर्ड पर जोड़ सकी थी। भारतीय गेंदबाजी क्रम की बात करें तो स्पिनर साई किशोर ने अपनी फिरकी का जादू बिखेरते हुए अपने कोटे के 4 ओवरों में महज 12 रन खर्च करके 3 महत्वपूर्ण विकेट झटके थे, जबकि ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर ने भी किफायती गेंदबाजी करते हुए 15 रन देकर 2 विकेट अपने नाम किए थे। बांग्लादेश द्वारा दिए गए 97 रनों के मामूली लक्ष्य का पीछा करने उतरी टीम इंडिया ने महज 9.2 ओवरों में ही मात्र 1 विकेट के नुकसान पर आसानी से लक्ष्य हासिल कर लिया था।

स्वर्ण पदक बचाने की चुनौती और पिछली जीत की यादें

भारतीय पारी के दौरान बल्लेबाज तिलक वर्मा ने अपनी धमाकेदार बैटिंग का मुज़ाहिरा करते हुए मात्र 26 गेंदों में 55 रनों की नाबाद और आक्रामक अर्धशतकीय पारी खेली थी। उनका साथ देते हुए कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ भी 26 गेंदों में 40 रन बनाकर नाबाद पव लौटे थे। तिलक और ऋतुराज के बीच दूसरे विकेट के लिए मात्र 52 गेंदों में 97 रनों की ऐतिहासिक और अटूट साझेदारी हुई थी, जिसने भारतीय टीम को बेहद आसानी से फाइनल का टिकट दिला दिया था।

इसके बाद पिछले संस्करण के फाइनल में भारत की भिड़ंत अफगानिस्तान के साथ हुई थी, जहाँ मैच के दौरान बारिश का खलल पड़ने के कारण खेल पूरा नहीं हो सका था और बेहतर रैंकिंग के नियम के तहत टीम इंडिया स्वर्ण पदक (गोल्ड मेडल) अपने नाम करने में सफल रही थी। इस बार भी भारतीय टीम अपने उसी विजयी अभियान और स्वर्ण पदक को बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी।

Join Whatsapp Group
Join Our Whatsapp Group