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निकिता ने बीमारी के बावजूद 12वीं की परीक्षा दी थी

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श्रीगंगानगर। राजस्थान में 12वीं बोर्ड का रिजल्ट मंगलवार (31 मार्च) को घोषित कर दिया गया. वहीं इस बोर्ड परीक्षा में कमाल कर देने वाली श्रीगंगानगर के रावला गांव की निकिता के परिवार के लिए ये दिन भावुक कर देने वाला था. दरअसल, निकिता ने तेज बुखार के दौरान 12वीं बोर्ड के एग्जाम दिए और कुछ दिन बाद तबीयत ज़्यादा बिगड़ने के बाद निकिता ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. वहीं मगंलवार को जब रिजल्ट आया तो निकिता के 93 फीसदी नंबर आए. रिजल्ट आने के बाद तमाम बच्चों के घर खुशी का माहौल था लेकिन निकिता के घर बेटी का रिजल्ट देख परिवार मे मातम का छाया हुआ है. परिवार ने बताया की पेपर देने के कुछ दिन बाद उसकी तबियत खराब हो गई थी, जिसके चलते अधिक डायबटीज होने से निकिता की मौत हो गई. निकिता की मौत रिजल्ट आने से 20 दिन पहले हुई. वह कलेक्टर बनना चाहती थी लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था।

परीक्षा के बाद ज्यादा बीमार हो गई थी निकिता

श्रीगंगानगर  के राजकीय उच्च माध्यमिक विधालय रावला में पढ़ने वाली छात्रा परीक्षा की जंग में तो जीत गई लेकिन जिंदगी की जंग से परीक्षा परिणाम आने से पहले ही हार गई. कक्षा 12वीं की छात्रा निकिता ने इस वर्ष कला वर्ग में 12वीं  की परीक्षा दी थी. परीक्षा होने के बाद निकिता अचानक बीमार हो गई. इसके बाद निकिता के परिजन उसे इलाज के लिए लेकर गए तो डॉक्टर की टीम ने उसे बीकानेर भेज दिया।

पढ़ाई में होनहार थी निकिता

बीकानेर में पीलिया से पीड़ित निकिता ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. वहीं आज जारी हुए परीक्षा परिणाम में निकिता के 93.80% अंक आए हैं. निकिता के परिजनों के भी बेटी के निधन के बाद बुरा हाल है. निकिता के पिता मंगल सिंह व माता चरनजीत कोर ने बताया कि उनकी बेटी पढाई में बहुत ही होनहार थी लेकिन भगवान को कुछ और मंजूर था।

तेज बुखार में दिए पेपर

वहीं निकिता की दो ओर बहने हैं जिसमे एक बहिन बड़ी भिंदर कोर जो कि अपने ननिहाल में बीएसटीसी कर रही है तो उसकी छोटी बहन निशु 10 कक्षा पास की है और छोटा भाई अरमान सिंह है उसमें भी इसी वर्ष कक्षा 8वीं पास की है. और निकिता के माता पिता मजूदरी करते है. निकिता के पिता ने बताया कि निकिता को पेपर देने के दौरान ही तेज बुखार हो गया था और बुखार में ही उसने पेपर दिए।

मध्य प्रदेश में महंगाई की मार, 1 अप्रैल से दूध के दाम 5 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ेंगे

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इंदौर|पश्चिमी एशिया में तनाव का असर जहां पहले डीजल-पेट्रोल और LPG को लेकर था. अब महंगाई की मार घरों की रसोई तक पहुंच गई है. मध्य प्रदेश के कई शहरों में दूध की कीमतों में बढ़ोतरी की जा रही है. इंदौर में दूध की दाम में 3 रुपये प्रति लीटर तक वृद्धि की गई है. इस बढ़ोतरी के बाद शहर में दूध की कीमत 60 से बढ़कर 63 प्रति लीटर हो जाएगी|

कहां कितने रुपये बढ़ेंगे दाम?

  • ईरान-इजरायल-अमेरिका जंग का असर भारत पर पड़ रहा है. यही वजह है कि देश में महंगाई बढ़ गई है.
  • मध्य प्रदेश में दूध के दाम बढ़ने वाले हैं, जिससे घर का बजट बिगड़ने वाला है.
  • इंदौर के पड़ोसी जिले धार में 4 रुपये प्रति लीटर दूध की कीमत बढ़ा दी गई है.
  • एमपी दुग्ध विक्रेता महासंघ के अनुसार इंदौर के साथ-साथ ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, देवास और बड़वाह में 2 से 4 रुपये तक दाम बढ़ाए गए हैं.
  • दूध की बढ़ी हुई कीमतें 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगी.
  • इंदौर दूध विक्रेता संघ के मुताबिक अब तक जिस दूध की कीमत 60 रुपये लीटर है. उसे घर पहुंच सेवा में 63 रुपये प्रति लीटर और डेरी एवं दुकानों से 65 प्रति लीटर तक बेचा जाएगा.

क्यों दाम में वृद्धि की गई?

  • दुग्ध संघ का कहना है कि पशु आहार की कीमतों में वृद्धि हुई है, इस वजह से दूध की कीमतों को बढ़ाना पड़ा.
  • संघ द्वारा कहा गया है कि आगे भी पशु आहार जैसे खली, चारा और भूसे के दाम बढ़ते हैं तो भविष्य में दाम पर फिर विचार किया जाएगा.
  • इसके साथ ही दुग्ध विक्रेता संघ ने प्रशासन से मांग की है कि डेरियों को PNG गैस प्राथमिकता से उपलब्ध कराई जाए.

अंबिकापुर से दिल्ली और कोलकाता के लिए सीधी उड़ानें शुरू

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अंबिकापुर|छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में मां महामाया एयरपोर्ट से दिल्ली और कोलकाता के लिए सीधी हवाई सेवा सोमवार को शुरू हो गई। यह सरगुजा संभाग के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे क्षेत्र में हवाई कनेक्टिविटी की पुरानी मांग पूरी हुई है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने रायपुर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए इन उड़ानों का वर्चुअली उद्घाटन किया, जबकि दरिमा स्थित मां महामाया एयरपोर्ट पर स्थानीय सांसद चिंतामणि ने फ्लाइट को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस नई सेवा से अंबिकापुर और आसपास के लोगों में काफी उत्साह है, जो अब देश के दो बड़े महानगरों से सीधे जुड़ गए हैं।अंबिकापुर का दरिमा एयरपोर्ट कोई नया हवाई अड्डा नहीं है। इसका निर्माण सबसे पहले 1950 में हुआ था, जो क्षेत्र के इतिहास का एक हिस्सा है। समय के साथ, इस एयरपोर्ट को लगातार अपग्रेड किया गया है। खासकर, साल 2021 में इसे आधुनिक सुविधाओं से लैस करते हुए इस तरह विकसित किया गया कि यहां 72 सीटों वाले विमान भी आसानी से उड़ान भर सकें और उतर सकें। यह क्षमता विस्तार सरगुजा क्षेत्र को हवाई नक्शे पर लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था, जिसका लाभ अब इन सीधी उड़ानों के रूप में मिल रहा है।

अंबिकापुर से दिल्ली-कोलकाता के लिए कितना रहेगा किराया?

नई शुरू हुई फ्लाइट सेवाओं के तहत, अंबिकापुर से दिल्ली के लिए हफ्ते में दो उड़ानें और कोलकाता के लिए भी हफ्ते में दो उड़ानें उपलब्ध होंगी। इन दोनों रूट की एक खास बात यह है कि बिलासपुर में एक स्टॉप भी होगा, जिससे बिलासपुर के यात्रियों को भी इन उड़ानों का लाभ मिल सकेगा। किराए की बात करें तो अंबिकापुर से दिल्ली की फ्लाइट का किराया लगभग 6500 रुपए रखा गया है, जबकि कोलकाता के लिए यह करीब 6000 रुपए होगा। कोलकाता के लिए सीधी उड़ानें 2 अप्रैल से शुरू होंगी और यह हर गुरुवार और शनिवार को संचालित की जाएंगी।

इस नई सुविधा के शुरू होने से अंबिकापुर और पूरे सरगुजा संभाग के लोगों में काफी उत्साह है। यह इलाका मुख्य रूप से आदिवासी बहुल है और यहां के लोग लंबे समय से बेहतर हवाई कनेक्टिविटी की मांग कर रहे थे। लोगों का कहना है कि अब उन्हें लंबी और थकाऊ सड़क यात्राओं से राहत मिलेगी। इससे उनका समय बचेगा और शारीरिक थकान भी कम होगी। हवाई संपर्क बढ़ने से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी खुलने की उम्मीद है, जिससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

फ्लाइट के टाइम टेबल की जानकारी

फ्लाइट के टाइम टेबल की विस्तृत जानकारी भी जारी की गई है। सोमवार को दिल्ली से फ्लाइट सुबह 7:50 बजे रवाना होगी और 10:25 बजे बिलासपुर पहुंचेगी। वहां से यह 11:40 बजे अंबिकापुर पहुंचेगी। वापसी में, यह फ्लाइट दोपहर 12:05 बजे अंबिकापुर से उड़ान भरकर करीब 2:35 बजे दिल्ली पहुंच जाएगी। बुधवार को भी इसी तरह का शेड्यूल रहेगा, हालांकि रूट में थोड़ा बदलाव होगा। बुधवार को उड़ान दिल्ली से सुबह 7:50 बजे रवाना होकर अंबिकापुर सुबह 10:25 बजे पहुंचेगी, फिर सुबह 10:50 बजे बिलासपुर के लिए उड़ान भरेगी और अंत में दोपहर 2:50 बजे दिल्ली वापस आ जाएगी।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मौके पर राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को लेकर भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अंबिकापुर से कोलकाता के अलावा आने वाले समय में उत्तर प्रदेश के दो प्रमुख धार्मिक स्थलों अयोध्या और वाराणसी के लिए भी सीधी फ्लाइट सेवा शुरू करने की योजना है। सीएम साय ने बताया कि राज्य सरकार जगदलपुर, रायगढ़ और अन्य छोटे शहरों के एयरपोर्ट को भी और विकसित करने पर काम कर रही है, ताकि पूरे छत्तीसगढ़ में एक बेहतर और मजबूत हवाई नेटवर्क तैयार हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि रायपुर हवाई अड्डे पर जल्द ही एक कार्गो हवाई अड्डा भी बनेगा, जिसके लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं। यह कदम राज्य में माल ढुलाई और व्यापार को बढ़ावा देने में अहम साबित होगा।

मां महामाया एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 अक्टूबर 2024 को किया था। यह एयरपोर्ट लगभग 365 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला है और इसके विकास पर करीब 80 करोड़ रुपए की लागत आई है। इस एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं की शुरुआत सरगुजा क्षेत्र के विकास को नई रफ्तार देने की उम्मीद है। यह न केवल लोगों को आवागमन में सुविधा देगा, बल्कि क्षेत्र में निवेश और पर्यटन को भी आकर्षित करेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।

बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट पर रात में उड़ान संचालन शुरू

छत्तीसगढ़ में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। रविवार को मुख्यमंत्री साय ने बिलासपुर के बिलासा देवी केवट एयरपोर्ट पर नाइट फ्लाइट ऑपरेशन की भी शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने खुद बिलासपुर से रायपुर तक की पहली नाइट फ्लाइट में सफर किया। यह सुविधा बिलासपुर के लिए काफी अहम है, क्योंकि डीजीसीए ने 6 फरवरी को ही इस एयरपोर्ट को रात में उड़ान भरने और उतरने की अनुमति दी थी। रात में उड़ानों का संचालन शुरू होने से हवाई सेवाओं की उपलब्धता और बढ़ गई है।

मुख्यमंत्री साय ने बताया कि नाइट फ्लाइट शुरू होने से अब आपातकालीन और मेडिकल सेवाएं भी रात में आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी, जो पहले एक बड़ी चुनौती थी। इसके अलावा, नाइट फ्लाइट ऑपरेशन से व्यापार, निवेश और पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा। रात भर हवाई कनेक्टिविटी उपलब्ध होने से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी, निवेशक आकर्षित होंगे और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि यात्री अब दिन या रात किसी भी समय यात्रा कर सकेंगे। यह छत्तीसगढ़ के आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एक सकारात्मक कदम है।

पश्चिम बंगाल चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए टेनिस दिग्गज लिएंडर पेस

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नई दिल्ली. भारतीय टेनिस (Indian Tennis) के दिग्गज खिलाड़ी लिएंडर पेस (Leander Paes ) ने भाजपा (BJP) का दामन थाम लिया है। पश्चिम बंगाल (West Bengal) विधानसभा चुनाव (assembly elections) से पहले उनका यह कदम राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा का विषय बन गया है। पेस, जो भारत के सबसे सफल टेनिस खिलाड़ियों में गिने जाते हैं। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और भाजपा नेता सुकांता मजुमादर भी मौजूद रहे। पेस का पार्टी में शामिल होना पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। फिलहाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल गर्म होता जा रहा है और सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं।

किरण रिजिजू ने लिएंडर को लेकर क्या कहा?
इस मौके पर रिजिजू ने कहा, ‘लिएंडर पेस का भाजपा परिवार में शामिल होना ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 वर्षों में खेल और खिलाड़ियों को लगातार बढ़ावा दिया है।’ वहीं लिएंडर ने इसे अपने जीवन का सबसे खास दिन बताया। उन्होंने कहा, ‘यह मेरे जीवन का बहुत बड़ा दिन है। मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह जी और नितिन नबीन जी का धन्यवाद करना चाहता हूं। यह मेरे लिए खेल और युवाओं की सेवा करने का बड़ा अवसर है।’

‘अब युवाओं के लिए काम करूंगा’
लिएंडर पेस ने भारत के लिए ओलंपिक पदक और कई ग्रैंड स्लैम जीते हैं और अब राजनीति के मैदान में अपनी नई पारी खेलने जा रहे हैं। उनका भाजपा से जुड़ना यह दिखाता है कि पार्टी खेल जगत के बड़े चेहरों को अपने साथ जोड़कर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है। पेस ने अपने करियर को याद करते हुए कहा कि अब वह नई जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा, ‘मैंने 40 साल देश के लिए खेला है, अब समय है युवाओं की सेवा करने का।’ लिएंडर पेस ने केंद्र सरकार की खेल योजनाओं की भी सराहना की। उन्होंने कहा, ‘खेलो इंडिया मूवमेंट और टॉप्स स्कीम बहुत शानदार पहल हैं। मैंने देखा है कि किरेन रिजिजू जी ने टोक्यो ओलंपिक में खिलाड़ियों के प्रदर्शन के लिए कितनी मेहनत की। प्रधानमंत्री जी ने उन्हें जो रोल दिया था, उसे बखूबी निभाया।’

बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर बोले पेस
पेस ने बंगाल में खेल सुविधाओं की कमी पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा, ‘ भारत दुनिया का सबसे युवा देश है। हमें अगले 20-25 वर्षों में स्पोर्ट्स एजुकेशन पर ध्यान देना चाहिए। 1986 में पश्चिम बंगाल में खेल का ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं था। आज भी बंगाल में इंडोर टेनिस कोर्ट की कमी है। बंगाल, तमिलनाडु और बिहार बेहतर कर सकते हैं, लेकिन हमें युवाओं को खेल शिक्षा के जरिए प्रेरित और सशक्त बनाने पर ध्यान देना होगा। मेरा सपना है कि भारत में महिला सशक्तिकरण के लिए बराबरी के अवसर वाली स्कॉलरशिप प्रोग्राम शुरू किया जाए।’

बंगाल चुनाव से पहले बड़ा संदेश
भाजपा को उम्मीद है कि पेस की लोकप्रियता से खासकर युवा और खेल प्रेमी वोटर्स पर सकारात्मक असर पड़ेगा। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि पेस चुनाव लड़ेंगे या नहीं, लेकिन यह तय माना जा रहा है कि वह चुनाव प्रचार में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनकी छवि और अनुभव पार्टी के लिए एक मजबूत चेहरा साबित हो सकते हैं।

लिएंडर के पिता का पिछले साल हुआ था निधन
लिएंडर पेस का जन्म 17 जून 1973 को कोलकाता में हुआ था। उनके दिवंगत पिता वेस पेस ने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था और उनकी मां जेनिफर पेस ने 1980 एशियन बास्केटबॉल टीम की अगुआई कर अपना लोहा मनवाया था। लिएंडर के पिता वेस पेस का पिछले साल ही 80 साल की उम्र में निधन हुआ था।

अटलांटा ओलंपिक में लिएंडर ने जीता था कांस्य
लिएंडर ने 1996 में अटलांटा ओलंपिक में पुरुष टेनिस के एकल वर्ग में ब्राजील के फर्नांडो मेलिगेनी को मात देकर कांस्य पदक अपने नाम किया था। साथ ही वह केडी जाधव के बाद पहले भारतीय खिलाड़ी बने, जिन्होंने व्यक्तिगत ओलंपिक मेडल जीता। उनकी सफलताओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने उन्हें 1996-97 में खेल रत्न अवॉर्ड से सम्मानित किया था। इसके अलावा वह 1990 में अर्जुन अवॉर्ड, 2001 में पद्म श्री अवॉर्ड और जनवरी 2014 में पद्म भूषण अवॉर्ड से भी नवाजे जा चुके हैं।

पुरुष और मिक्स्ड डबल्स के महारथी हैं लिएंडर
वैसे तो पेस ने पुरुष एकल में कोई ग्रैंडस्लैम नहीं जीता, लेकिन पुरुष युगल में उनके नाम आठ ग्रैंडस्लैम ट्रॉफीज हैं। लिएंडर ने 2012 में एकमात्र ऑस्ट्रेलियन ओपन का खिताब जीता था। इसके अलावा वह 1999, 2001 और 2009 में फ्रेंच ओपन, 1999 में विंबलडन और 2006, 2009 और 2013 में यूएस ओपन का खिताब भी जीत चुके हैं। वह मिक्स्ड डबल्स में 10 ग्रैंडस्लैम खिताब जीत चुके हैं। इनमें तीन ऑस्ट्रेलियन ओपन खिताब (2003, 2010, 2015), एक फ्रेंच ओपन खिताब (2016), चार विंबलडन खिताब (1999, 2003, 2010 और 2015) और दो यूएस ओपन खिताब (2008 और 2015) शामिल हैं।

Indian National Congress ने झुग्गी बस्ती हटाने के प्रस्ताव का विरोध किया

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भोपाल। कांग्रेस ने आज भोपाल के गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र स्थित स्टेट लेबर कॉलोनी की झुग्गी बस्ती को तोड़ने की प्रस्तावित कार्रवाई के विरोध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से सैकड़ों गरीब परिवारों को बेघर करने वाली इस कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से रोकने का आग्रह किया है। इसी के साथ उन्होंने चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो कांग्रेस आंदोलन करेगी। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की सचिव दीप्ति सिंह, महिला कांग्रेस की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष विभा पटेल, वरिष्ठ नेता जेपी धनोपिया, पूर्व कोषाध्यक्ष गोविंद गोयल, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना सहित कई नेता शामिल थे।

कांग्रेस ने झुग्गी बस्ती तोड़ने के प्रस्ताव के खिलाफ दिया ज्ञापन 

कांग्रेस ने कहा है कि भोपाल में गोविंदपुरा लेबर कॉलोनी की झुग्गी बस्ती को तोड़ने की कार्रवाई तत्काल रोकी जाए। इसे लेकर कलेक्टर को आज ज्ञापन सौंपा गया। इस ज्ञापन में बताया गया कि लेबर कॉलोनी में निवासरत परिवार वर्ष 1982 से यहां रह रहे हैं। 29 मार्च को नगर निगम का अमला पुलिस बल के साथ बुलडोजर लेकर बस्ती को तोड़ने पहुंचा लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण कार्रवाई टल गई। इसके बाद प्रशासन ने रहवासियों को दो दिन में घर खाली करने की चेतावनी जारी की। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि बस्तीवासियों के पास वैध पट्टे हैं और वे नियमित रूप से कर एवं बिजली बिल का भुगतान करते हैं। ऐसे में उन्हें जबरन हटाना अन्यायपूर्ण और अमानवीय होगा।

प्रशासन से की ये मांगें

कलेक्टर को दिए गए ज्ञापन में कांग्रेस ने मांग की है कि गोविंदपुरा क्षेत्र में लेबर कॉलोनी की झुग्गी बस्ती को तोड़ने की प्रस्तावित कार्रवाई तत्काल प्रभाव से रोकी जाए। सड़क निर्माण और विकास कार्य के लिए वैकल्पिक मार्ग का परीक्षण कर बस्ती को सुरक्षित रखा जाए। बिना वैध प्रक्रिया और पूर्व सूचना किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि बस्ती में रहने वालों को किसी भी प्रकार की धमकी या प्रताड़ना न दी जाए। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने भरोसा जताया है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता के साथ विचार कर न्यायपूर्ण निर्णय लेगा। मांगें न मानने पर कांग्रेस ने आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

परीक्षा विवाद: कबीरधाम समेत तीन जिलों में पेपर एक जैसा, शिक्षक संगठनों में हड़कंप

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कबीरधाम|कक्षा पहली से चौथी, छठी व सातवीं की वार्षिक परीक्षाएं 30 मार्च से शुरू हो गई हैं। इस वर्ष की परीक्षाएं खास हो गई हैं क्योंकि कबीरधाम, धमतरी व दुर्ग जिलों में प्रश्न पत्र एक जैसे मिले हैं। कक्षा चौथी के हिंदी, छठी के गणित व सातवीं के हिंदी के प्रश्न पत्र हूबहू समान पाए गए हैं।इन प्रश्न पत्रों में निर्देश, प्रश्न क्रमांक और अन्य सभी जानकारी एक जैसी है। केवल तीन कक्षाओं का मिलान किया गया, संभवतः पहली से तीसरी कक्षा के प्रश्न पत्र भी समान हो सकते हैं। इन तीनों जिलों की परीक्षाएं 30 मार्च से एक साथ प्रारंभ हुई हैं। छग टीचर्स एसोसिएशन ने इस पर सवाल उठाया है। संघ का कहना है कि जब हर जिले में अलग प्रश्न पत्र निर्माण समिति है, तो ये एक जैसे कैसे हो सकते हैं। एसोसिएशन ने इसकी उच्च स्तरीय जांच और जिम्मेदारों पर उचित कार्रवाई की मांग की है। संघ के जिलाध्यक्ष रमेश कुमार चन्द्रवंशी ने इसे लोक शिक्षण संचालनालय के निर्देशों का खुला उल्लंघन बताया है।लोक शिक्षण संचालनालय छग ने 3 फरवरी 2026 को पत्र जारी कर निर्देश दिए थे। इसमें समस्त जिला शिक्षा अधिकारी को जिला स्तर पर समितियां गठित करने को कहा गया था। इनमें संचालन समिति, प्रश्न पत्र निर्माण समिति और संशोधन समिति शामिल थीं। प्रश्न पत्र निर्माण समिति को रूपरेखा के आधार पर तीन प्रश्न पत्रों के समूह तैयार करने थे। संशोधन समिति द्वारा इन प्रश्न पत्रों का संशोधन किया जाना था।जिला स्तरीय संचालन समिति की अनुशंसा पर जिला शिक्षा अधिकारी को प्रश्न पत्र मुद्रित कराने थे। जब प्रत्येक जिले को अपने प्रश्न पत्र मुद्रित कराने हैं, तो तीन जिलों के प्रश्न पत्र एक जैसे कैसे हो सकते हैं। यह स्पष्ट है कि कबीरधाम, धमतरी व दुर्ग में से किन्हीं दो जिलों ने अपने प्रश्न पत्र मुद्रित नहीं कराए। उन्होंने दूसरे जिले के प्रश्न पत्र को ही मुद्रित कर लिया, जो निर्देशों का खुला उल्लंघन है।

अवैध रिश्ते से जन्मी संतान को भी पेंशन का अधिकार, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

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पहली पत्नी को कानूनी हकदार मानते हुए भी बेटी के अधिकार को दी मान्यता, फैसला बन सकता है नजीर

कोलकाता। कोलकत्ता हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है, कि अवैध रिश्ते से जन्मी संतान को भी पेंशन का अधिकार मिल सकता है। अदालत का यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक अहम नजीर बन सकता है। यह मामला पूर्वी रेलवे में कार्यरत एक गेटमैन से जुड़ा था, जिसने अपनी पहली पत्नी को बिना तलाक दिए दूसरी शादी कर ली थी। रिटायरमेंट के बाद उसने अपनी सर्विस और पेंशन बुक में पहली पत्नी और बेटे के बजाय दूसरी पत्नी और उससे जन्मी बेटी का नाम दर्ज करा दिया। 
पहली पत्नी ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया। महिला का कहना था कि उसे मिर्गी की बीमारी के चलते पति ने छोड़ दिया और बिना जानकारी दिए दूसरी शादी कर ली। उसने यह भी आरोप लगाया कि 2012 के बाद से उसे कोई गुजारा भत्ता नहीं मिला, जबकि पहले उसे हर महीने 1000 रुपये देने का आदेश था। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह स्पष्ट हुआ कि दंपति के बीच कानूनी रूप से तलाक नहीं हुआ था। ऐसे में जस्टिस कृष्ण राव ने कहा कि पहली पत्नी ही कानूनी रूप से पेंशन की हकदार है। 
हालांकि अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि दूसरी शादी भले ही हिंदू विवाह अधिनियम के तहत वैध नहीं मानी जा सकती, लेकिन उस संबंध से जन्मी संतान के अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने आदेश दिया कि दूसरी पत्नी से जन्मी 15 वर्षीय बेटी का नाम भी सर्विस और पेंशन रिकॉर्ड में शामिल किया जाए। अदालत ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए यह सुनिश्चित किया कि पहली पत्नी के अधिकार सुरक्षित रहें, साथ ही निर्दोष संतान को उसके अधिकारों से वंचित न किया जाए। इस फैसले को सामाजिक न्याय और संवेदनशीलता के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
 

अल्ट्रासाउंड जांच में महिला के गर्भ में दो बच्चों की पुष्टि हुई थी

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इंदौर। इंदौर के ESIC अस्पताल से प्रेगनेंसी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है. यहां पर एक महिला ने तीन बच्चों को जन्म दिया. इससे भी ज्यादा हैरान कर देने वाली ये है कि जब डॉक्टर ने डिलीवरी से पहले अल्ट्रासाउंड किया था तब रिपोर्ट में दो बच्चे ही दिख रहे थे. लेकिन जब महिला ने तीन बच्चों को जन्म दिया तो डॉक्टर भी हैरान रह गए।

मेडिकल फील्ड के रेयर केसेस में से एक

हॉस्पिटल के डॉक्टरों का मानना है कि ऐसे केस मेडिकल फील्ड के रेयर केसेस में से एक होते हैं. महिला ने 1 बेटा और 2 बेटियों को जन्म दिया है. अधिकारी ने बताया कि कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के चिकित्सा महाविद्यालय से जुड़े अस्पताल में 27 वर्षीय महिला ने दो लड़कियों और एक लड़के को रविवार (29 मार्च) को सामान्य तरीके से जन्म दिया. इस प्रसव के बाद जच्चा व तीनों नवजात शिशु स्वस्थ हैं।

जन्म के तुरंत बाद से ही की जा रही है देखभाल

महाविद्यालय की सहायक प्रोफेसर डॉ. रुचि जोशी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, कि प्रसव के तय समय से पहले पैदा हुए तीनों बच्चों का वजन 1.70 किलोग्राम से 1.90 किलोग्राम के बीच हैं, इनता ही नहीं जन्म के तुरंत बाद से इन बच्चों को विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है. उन्होंने आगे बताया कि इंदौर के पास स्थित पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र की रहने वाली महिला दूसरी बार मां बनी है और उसकी एक बेटी पहले से है।

जोखिम भरी थी डिलीवरी, लेकिन सब कुछ सही रहा

डॉक्टरों का कहना है कि डिलीवरी जोखिम भरा जरूर था लेकिन डॉक्टर की सतरकता ने प्रसव आसानी से हो पाया. डॉक्टर ने आगे बताया कि तीन बच्चों की डिलीवरी थोड़ी कॉम्पलेक्स होती है. साथ ही यहां तो रिपोर्ट और रियलिटी में भी अंतर देखने को मिला है. डॉक्टर ने हिम्मत रखते हुए स्थिति को कंट्रोल किया और मॉनीटर किया. अभी जच्चा बच्चा चारों स्वस्थ हैं।
 

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन: बाबा विश्वनाथ की नगरी में सीएम मोहन यादव, मंदिर परिसर में की बैठक

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भोपालमध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव 31 मार्च को वाराणसी पहुंचे। उनकी यह यात्रा मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच सहयोग को मजबूत करने और विकास की नई इबारत लिखने के उद्देश्य से हुई। वाराणसी पहुंचने पर उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नन्दी’ ने उनका स्वागत किया। इस अवसर पर सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री राकेश सचान, खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश यादव सहित वाराणसी के जनप्रतिनिधि और जिला अधिकारी भी मौजूद थे। सीएम डॉ. यादव ने आते ही बाबा काशी विश्वनाथ के दर्शन किए और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का भ्रमण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में भीड़ प्रबंधन, तीर्थयात्री प्रबंधन प्रणाली और इंफ्रास्ट्रक्चर का बारीकी से अवलोकन किया। उन्होंने क्राउड फ्लो डिजाइन और मंदिर प्रबंधन से जुड़ी विशेष प्रस्तुतियां भी देखीं। मंदिर परिसर में उन्होंने अधिकारियों के साथ एक बैठक की, जिसमें मंदिर के सफल संचालन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां ली गईं। यह पूरा अवलोकन इस विचार के साथ किया गया कि किस तरह उत्तर प्रदेश के अनुभवों का लाभ मध्यप्रदेश अपने धार्मिक आयोजनों में ले सके। इस प्रवास का मुख्य उद्देश्य दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ाना है। डॉ. मोहन यादव ने मां गंगा के कई तटों का भी अवलोकन किया और गंगा की पूजा-अर्चना कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालुओं से संवाद भी किया। मुख्यमंत्री ने मीडिया से बात करते हुए काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के प्रबंधन की खूब सराहना की। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी और यहां के निवासियों ने इस निर्णय को स्वीकार कर इसमें बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने पूरे विश्व की भगवान शंकर पर आस्था का भी जिक्र किया।

धार्मिक पर्यटन और लघु उद्योगों पर विशेष फोकस
मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने अपनी चर्चा में धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ लघु उद्योगों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने उत्तर प्रदेश के ‘ओडीओपी’ (वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट) योजना की सफलता की तारीफ की और कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उनकी टीम का इसमें बड़ा योगदान है। डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार भी इस दिशा में बड़ा काम कर रही है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य इस बात पर चर्चा करेंगे कि उनके बीच क्या बेहतर सहयोग हो सकता है। जिस तरह उत्तर प्रदेश में बनारसी साड़ी की अपनी एक समृद्ध विरासत है, उसी तरह मध्यप्रदेश में चंदेरी और महेश्वरी साड़ियों सहित अन्य लघु उद्योगों पर काम हो रहा है। इस सहयोग से दोनों राज्यों की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।

सिंहस्थ कुंभ की तैयारी के लिए वाराणसी मॉडल का अध्ययन
सीएम डॉ. मोहन यादव ने बताया कि उनका वाराणसी दौरा सिंहस्थ कुंभ के लिए योजना बनाने और जानकारी जुटाने के उद्देश्य से भी है। उन्होंने कहा कि जिस तरह बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर में भीड़ का प्रबंधन किया जा रहा है, वैसा ही कुशल प्रबंधन हम उज्जैन में होने वाले सिंहस्थ में भी चाहते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में महाकाल लोक के बनने के बाद पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसी तरह काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद यहां भी सकारात्मक परिवर्तन आया है। डॉ. यादव ने कहा कि सभी लोगों को साथ मिलाकर विकास की नई इबारत लिखी जा रही है। उन्होंने घोषणा की कि बाबा महाकाल और काशी विश्वनाथ से जुड़ी योजनाओं और जानकारियों का आदान-प्रदान करने के लिए मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। यह प्रयास जनता को बेहतर से बेहतर दर्शन सुविधा प्रदान करने के लिए है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि सभी राज्यों में बेहतर धार्मिक पर्यटन की व्यवस्था होनी चाहिए, जिससे लोगों की जिंदगी में बदलाव आए। उन्होंने हाल ही में संपन्न हुए प्रयागराज कुंभ और उज्जैन में आगामी सिंहस्थ का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों आयोजनों में सुगमता और बेहतर व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए उन्होंने विशेष प्रेजेंटेशन भी देखा। मध्यप्रदेश सरकार इस बात का गहन अध्ययन कर रही है कि भविष्य में तीर्थयात्रियों के लिए और क्या बेहतर सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं। यह अध्ययन धार्मिक आयोजनों के सफल और सुरक्षित संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।

युवाओं को रोजगार और गरीबों की जिंदगी बेहतर करना उद्देश्य
सीएम डॉ. यादव ने अपनी वाराणसी यात्रा का एक और महत्वपूर्ण कारण बताया। उनका उद्देश्य दोनों राज्यों के युवाओं को रोजगार दिलाना, गरीबों की जिंदगी को बेहतर बनाना, उत्पादों की सही कीमत सुनिश्चित करना और अंततः राज्य व देश की समृद्धि को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि इसके लिए लघु उद्योगों के बीच कैसा समन्वय बनाया जाए, इसका भी अध्ययन किया जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार इसके लिए एक रोड शो का आयोजन भी करने वाली है, जिससे लघु उद्योगों को बढ़ावा मिल सके। सांस्कृतिक मोर्चे पर भी दोनों राज्यों के बीच सहयोग दिख रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर शोध कार्य चल रहा है, और सरकार इसके लिए फैलोशिप भी दे रही है। इसी कड़ी में सम्राट विक्रमादित्य के विराट व्यक्तित्व पर आधारित एक महानाट्य का मंचन 3 से 5 अप्रैल तक बाबा विश्वनाथ धाम में किया जाएगा। इस भव्य महानाट्य में लगभग 400 कलाकार भाग लेंगे, जिससे कला और संस्कृति को पुनर्जीवित किया जा सकेगा। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि अब राज्यों के बीच कटुता का समय समाप्त हो गया है और सौहार्द का माहौल है। मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश पहले से ही केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और सौर ऊर्जा परियोजनाओं पर मिलकर काम कर रहे हैं, जो अंतर्राज्यीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है।

बंगाल चुनाव: भवानीपुर बनी हॉट सीट, बीजेपी ने तैयार किया चक्रव्यूह

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी-बीजेपी के कड़ा मुकाबला है। इस बीच सीएम ममता बनर्जी की भवानीपुर सीट ही सबसे हॉट सीट मानी जा रही है। बीजेपी ने ऐसा चक्रव्यूह रचा है कि इस सीट पर ममता बुरी तरह घिरती नजर आ रही हैं। हालांकि यह उनकी पारंपरिक सीट है और वह यहां से कई बार जीत चुकी हैं, लेकिन इस बार के चुनाव में परिस्थितियां कुछ अलग नजर आ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण कोलकाता की इस सीट पर बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी मैदान में हैं। टीएमसी अपने संगठनात्मक ताकत और भावनात्मक जुड़ाव के सहारे इस गढ़ को बचाने की कोशिश कर रही है। यह मुकाबला 2021 के विधानसभा चुनाव की याद दिलाता है, जब ममता बनर्जी ने अपने पूर्व सहयोगी और अब बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके गृह क्षेत्र नंदीग्राम में चुनाव लड़ा था। उस समय ममता हार गई थीं, हालांकि बीजेपी को पूरे राज्य में हार का सामना करना पड़ा था। बाद में ममता ने भवानीपुर उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचीं। अब मैदान बदला है, नतीजा भी बदलेगा या नहीं, यह तो वक्त ही बताएगा।
रिपोर्ट के मुताबिक टीएमसी भवानीपुर में ‘घर की बेटी’ का भावनात्मक प्रचार कर रही हैं। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बक्शी की अध्यक्षता में हुई रणनीति बैठक में काउंसलरों को निर्देश दिया गया कि वे स्लोगन को घर-घर पहुंचाएं। संदेश साफ है- भवानीपुर सिर्फ सीएम चुन नहीं रहा, बल्कि अपनी बेटी के साथ खड़ा हो रहा है। पार्टी ने आक्रामकता के बजाय भावनात्मक, जुड़ाव और विकास कार्यों पर फोकस करने का फैसला किया है। काउंसलरों को घर-घर जाकर पर्चे बांटने और ममता बनर्जी के विकास कार्यों को हाइलाइट करने को कहा गया है। पूरे क्षेत्र में फोटो कॉर्नर सेट किए गए हैं, जहां लोग ममता बनर्जी के लाइफ-साइज कटआउट के साथ फोटो खिंचवा सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक वॉर्ड 73 के मुक्तदल मोड़ पर पहला ऐसा बूथ है, जहां ममता रहती हैं। यहां अपील की गई है- ममता बनर्जी के साथ खड़े होइए, फोटो खींचिए, बंगाल के लिए बोलिए। एक वरिष्ठ टीएमसी नेता ने कहा कि हम इस चुनाव को आक्रामकता से नहीं, बल्कि भावनात्मक, कनेक्ट और ममताजी के भवानीपुर में किए गए काम को लेकर लड़ रहे हैं।
वहीं बीजेपी का मानना है कि जमीन बदली है। भवानीपुर को ‘मिनी इंडिया’ कहा जाता है, जहां बंगाली भद्रलोक, मारवाड़ी-गुजराती व्यापारी, सिख-जैन परिवार और अच्छी-खासी मुस्लिम आबादी है। करीब 42 फीसदी मतदाता बंगाली हिंदू, 34 फीसदी गैर-बंगाली हिंदू और 24 फीसदी मुस्लिम हैं। बीजेपी ने महीनों से बूथ-बूथ और समुदाय-समुदाय स्तर पर मैपिंग की है। पार्टी के मुताबिक यहां कायस्थ 26.2 फीसदी, मुस्लिम 24.5 फीसदी, पूर्वी भारतीय प्रवासी समुदाय 14.9 फीसदी, मारवाड़ी 10.4 फीसदी और ब्राह्मण 7.6 फीसदी हैं। भवानीपुर की लड़ाई एक नारे से नहीं लड़ी जा सकती। इसे बूथ दर बूथ और समुदाय दर समुदाय लड़ना होगा।
इसी रणनीति के तहत सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में भवानीपुर से गुजरने वाली राम नवमी शोभायात्रा में हिस्सा लिया यानी ठीक ममता बनर्जी के घर के पास। अधिकारी ने कहा कि राज्य अब राम राज्य चाहता है। लोग तुष्टिकरण की राजनीति से थक चुके हैं। वे अच्छे शासन चाहते हैं।
राजनीतिक विश्लेषक बिस्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं कि बीजेपी हिंदू वोटों को बंगाली और गैर-बंगाली समुदायों में काटते हुए एकजुट करने की कोशिश कर रही है और साथ ही ममता को अल्पसंख्यक राजनीति पर घेर रही है। चुनावी रोल की विशेष गहन समीक्षा ने मुकाबले में नया आयाम जोड़ दिया है। 
2014 और 2019 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने भवानीपुर में अपनी उपस्थिति दर्ज की थी। 2014 में तो बीजेपी ने ममता के वॉर्ड 73 में भी जीत हासिल की थी। 2024 लोकसभा चुनाव में भवानीपुर सेगमेंट में टीएमसी की बढ़त महज 8,297 वोट रह गई, जबकि 2021 उपचुनाव में यह 58,832 थी। आठ वॉर्डों में से पांच में बीजेपी आगे रही, टीएमसी सिर्फ तीन में। ये आंकड़े बताते हैं कि भवानीपुर अब अजेय नहीं रहा। टीएमसी के लिए यह याद दिलाता है कि ममता बनर्जी की सबसे सुरक्षित सीट को अब सबसे मजबूत बचाव की जरूरत है। 2026 के विधानसभा चुनाव में भवानीपुर में 29 अप्रैल को मतदान होगा। यह मुकाबला न सिर्फ व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता का है, बल्कि टीएमसी की भावनात्मक राजनीति और बीजेपी की जातीय-सामाजिक इंजीनियरिंग के बीच विचारधारा की लड़ाई भी है।
 

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