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जल संरक्षण कार्यों में आमजन की भागीदारी भी सुनिश्चित हो – मुख्य सचिव

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    जयपुर, 9 फरवरी। मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास की अध्यक्षता में सोमवार को सचिवालय में जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि जल संरक्षण  योजनाओं के तहत किए जा रहे कार्यों में आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

     उन्होंने अधिकारियों को आगामी मानसून को ध्यान में रखते हुए प्लांटेशन की समुचित योजना पहले से ही तैयार करने के निर्देश दिये। साथ ही उन्होंने जलागम क्षेत्रों की स्पष्ट सीमांकन प्रक्रिया को भी समय पर पूरा करने तथा सभी स्वीकृत कार्यों को गुणवत्ता के साथ पूरा करने के लिए कहा।

     उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 (जलग्रहण विकास घटक) एवं मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान द्वितीय चरण की प्रगति के बारे में भी जानकारी ली तथा आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किये।    

     उन्होंने कहा कि भूमि एवं जल संरक्षण से जुड़े कार्यों का समयबद्ध क्रियान्वयन किया जाए, जिससे वर्षा आधारित खेती को मजबूती मिले और किसानों की आय बढ़ाने में सहायता मिल सके। मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिए कि परियोजना क्षेत्रों में फसल पैटर्न में आए बदलाव, एक फसली क्षेत्र से दो फसली क्षेत्र में परिवर्तन तथा खेती योग्य भूमि में हुए सुधार का आकलन किया जाए।

     बैठक में राज्य में जलग्रहण विकास के तहत भूमि संरक्षण, जल संचयन और कृषि सुधार से जुड़े विभिन्न कार्यों के संबध में भी चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने कहा कि तालाब, चेकडैम, परकोलेशन टैंक, कंटूर ट्रेंच, टांका, तालाबों का नवीनीकरण तथा अन्य जल संरक्षण संरचनाओं के कार्यों से भूजल स्तर में सुधार होने के साथसाथ खेती और आजीविका के अवसर बढ़ रहे हैं। उन्होंने इन कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन के निर्देश दिये।

विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 (MJSA 2.0) के अंतर्गत गांवों में जल संरक्षण से जुड़े कार्यों के संबंध में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके तहत बड़ी संख्या में गांवों का चयन कर लाखों हेक्टेयर क्षेत्र को उपचारित किया जा रहा है, जिससे सूखे और जल संकट से प्रभावित क्षेत्रों को लाभ मिल रहा है।

बैठक में जलग्रहण विकास एवं भू संरक्षण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

 

परिवार शादी के जश्न में मस्त, इधर चोरों ने खाली घर पाकर कर दिया हाथ साफ

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श्योपुर: कानून व्यवस्था में कसावट लाने के उद्देश्य से एक तरफ श्योपुर एसपी सुधीर कुमार अग्रवाल सभी थाना प्रभारियों गश्त व्यवस्था सहित कई आवश्यक निर्देश दे रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ विजयपुर में दो सूने मकानों पर चोरी की वारदात हो गई. अज्ञात चोरों ने दो सूने मकानों को निशाना बनाया, इन घरों के सदस्य शादी-समारोह में गए हुए थे.पुलिस मामला दर्ज कर अज्ञात चोरों की तलाश में जुट गई है.

 

चोरों ने दो सूने मकानों को बनाया निशाना

बताया जा रहा है कि विजयपुर के बजरंग कॉलोनी में स्थित कांठोन निवासी पिंटू, सिमेंद्र जादौन पूर्व सरपंच और भावना जादौन के मकान में चोरों ने चोरी की घटना को अंजाम दिया है. दोनों परिवार विजयपुर से करीब 35 किलोमीटर दूर सबलगढ़ जिला मुरैना में शादी समारोह में शामिल होने के लिए पहुंचे थे. उधर अज्ञात चोरों ने सूने मकान का फायदा उठाकर चोरी की घटना को अंजाम दे डाला. चोरों ने दोनों घरों से सोने-चांदी के जेवरात और नगदी समेत 15 लाख रुपए की चोरी की है.

 

विजयपुर सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों को लगा रही पता

घटना रविवार देर रात 1 बजे की बताई जा रही है. हालांकि पुलिस ने दोनों फरियादियों की रिपोर्ट पर चोरी का मामला दर्ज कर लिया है. पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों के माध्यम से जानकारी जुटा रही है. इधर चोरी की घटना की खबर सुनते ही परिवार वालों में दहशत है. मामले में विजयपुर थाना प्रभारी राजन सिंह गुर्जर का कहना है कि "सोमवार को विजयपुर थाना पुलिस को आवेदन प्राप्त हुआ है कि अज्ञात चोरों ने दो सूने घर के ताले तोड़कर चोरी की घटना को अंजाम दिया है. विजयपुर थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है.

 

 

    दोनों फरियादी ने पुलिस को बताया कि सोने चांदी के जेवरात और नगदी चोरी हुई है. पुलिस अब फिंगरप्रिंट सहित सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जांच पड़ताल कर रही है. जल्द से जल्द पुलिस इस घटना का खुलासा करेगी."

    NSG हब पर ग्रुप कमांडर की कार जलाने का मामला, साजिश की आशंका

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    नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के चेन्नई स्थित स्पेशल कंपोजिट ग्रुप, रीजनल हब में 'ग्रुप कमांडर' की कार को आग लगाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। विदित रहे कि एनएसजी के रीजनल हब में कोई बाहरी व्यक्ति प्रवेश नहीं कर सकता। वे कौन लोग हैं, जिन्होंने ग्रुप कमांडर के आवास में घुसकर कार में आग लगा दी, इसकी जांच की जा रही है। हालांकि कार के निकट एक बोतल मिली थी, जिसमें कुछ देर पहले तक पेट्रोल भरा हुआ था। इस मामले में एनएसजी में प्रतिनियुक्ति पर तैनात आर्मी अफसरों ने डीजी बी. श्रीनिवासन 'आईपीएस' को पत्र लिखा है। इससे कहा गया है कि उक्त घटना से एनएसजी जैसे विशेष बल में माहौल खराब हो रहा है। डीजी एनएसजी से मांग की गई है कि इस मामले में निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की जाए। दूसरी तरफ एनएसजी के एक जिम्मेदार अधिकारी का कहना है कि इस केस की जांच चल रही है। एनएसजी की तरफ से कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है। घटना को जानबूझकर तूल देने का प्रयास किया जा रहा है।बता दें कि इस मामले में एफआईआर भी दर्ज की गई है। एफआईआर के मुताबिक, ग्रुप कमांडर के आवास संख्या 27, स्पेशल कंपोजिट ग्रुप, एसयूएनएल रीजनल हब, चेन्नई पर कार जलने की शिकायत मिली थी। अजय खरवार ने 8 नवंबर 2025 को दो बजे आग लगने की सूचना दी थी। पुलिस ने बीएनएस की धारा 324 (4), 326 (बी), 351 (4), 329 (4) के तहत केस दर्ज किया है। सबसे पहले इस मामले में ग्रुप 1 के सूबेदार एडजुटेंट को सूचित किया गया। इसके बाद वे ग्रुप कमांडर के आवास पर पहुंचे। रेंजर 1 लालजी यादव, रेजिमेंट पुलिस नॉन कमीशन ऑफिसर को कॉल किया गया। उनसे फायर ब्रिगेड का इंतजाम करने के लिए कहा गया। इसके बाद लालजी यादव और दूसरे कमांडो भी घटनास्थल पर पहुंच गए। प्रारंभ में कमांडो ने खुद ही आग बुझाने का प्रयास किया गया, लेकिन कुछ देर बाद वहां क्यूआरटी और पानी का टैंकर भी आ गया। सूबेदार मेजर और दूसरे कर्मियों ने देखा कि कार संख्या जेएच 10एजेड 1284 जल रही है।  जली हुई कार से दस फीट की दूरी पर प्लास्टिक की एक खाली बोतल पड़ी हुई थी। बोतन के ढक्कन में एक छेद था। उसमें से पेट्रोल की गंध आ रही थी। मेजर आदित्य प्रकाश वीपी और रेंजर 2 निकेश ने सर्च अभियान शुरु किया। पता चला कि ग्रुप कमांडर के आवास का पिछला गेट खुला हुआ था। गार्डन एरिया में कागज के टुकड़े पड़े हुए थे। कागज पर ग्रुप कमांडर को लेकर अभद्र शब्द लिखे हुए थे। इससे यह मालूम पड़ा कि आग लगने की घटना, महज एक हादसा नहीं था। वह सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई एक वारदात थी। कुछ लोग गैर कानूनी रूप से ग्रुप कमांडर के घर में घुसे और उन्होंने कार में आग लगा दी। एक जनवरी 2026 को 27 'एससीजी' (स्पेशल कंपोजिट ग्रुप), चेन्नई रीजनल हब, एनएसजी के अधिकारियों ने डीजी को पत्र लिखा था। इसमें अधिकारियों ने ग्रुप कमांडर के लिए अपना समर्थन और एकजुटता का प्रदर्शन किया है। इस मामले में कोई सटीक कार्रवाई नहीं हो पा रही। उक्त मामले में कई अधिकारी पहले भी मौखिक और लिखित प्रतिवेदन के तौर पर अपनी बात कह चुके हैं। इससे एनएसजी जैसे बल में माहौल खराब हो रहा है। उन्होंने डीजी एनएसजी से मांग की है कि इस मामले में निष्पक्ष एवं स्वतंत्र जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित की जाए। यह टीम, घटना की तह तक पहुंच सकती है। जांच का नतीजा और उसके अनुरुप कार्रवाई, इसके द्वारा फोर्स में माहौल खराब होने से रोका जा सकता है। एनएसजी जैसे बल में ये सब होना और शीर्ष नेतृत्व का समय रहते मामला न सुलझा पाना, कई सवाल खड़े करता है।कुछ अधिकारियों के मुताबिक, एनएसजी हब, चेन्नई में एक गंभीर समस्या खड़ी हो रही है। हमेशा की तरह, चाहे वह आर्म्ड फोर्सेज हो या एनएसजी, सीनियर लेवल पर समझ की कमी के कारण फैसले लेने में पूरी तरह से रुकावट आ गई है। ऐसा लगता है कि डीजी एनएसजी अभी भी उस लेटर पर चुप बैठे हैं, जो उन्हें भेजा गया था। इस हब के अफसर की कार को कथित तौर पर वहीं के लोगों द्वारा जलाए जाने के वीडियो भी हैं। पुलिस स्टेशन में एफआईआर भी दर्ज की गई है। इस मामले में अन्य रैंक 'ओआर' से जुड़े कार्मिकों द्वारा कोर्ट का रुख किया गया है। ये एनएसजी के लिए ठीक नहीं है। अगर जल्द ही इस समस्या को नहीं सुलझाया गया तो ये फोर्स के लिए ठीक नहीं होगा। 

    तिरुपति लड्डू विवाद में नया मोड़, साधु परिषद अध्यक्ष का बड़ा आरोप

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    तिरुपति लड्डू को लेकर विवाद जारी है। इसी बीच आंध्र प्रदेश साधु परिषद के अध्यक्ष श्रीनिवासानंद सरस्वती ने सोमवार को आरोप लगाया कि तिरूपति के लड्डू पर सीबीआई की रिपोर्ट में घी में मिलावट की पुष्टि हुई है। उन्होंने दावा किया कि 20 करोड़ रुपये के लड्डू में मिलावट की गई थी।

    लड्डू खाने के बाद श्रद्धालु बीमार पड़ सकते हैं

    उन्होंने आरोप लगाया कि एक खाद्य माफिया पवित्र लड्डू  में मिलावट करने में शामिल है। इसके साथ ही  कहा कि रसायन युक्त लड्डू खाने के बाद श्रद्धालु बीमार पड़ सकते हैं। उन्होंने एक विज्ञप्ति में कहा, "सीबीआई ने एक रिपोर्ट दी है, जिसमें पुष्टि की गई है कि तिरुपति के लड्डू में मिलावट थी। सीबीआई ने निष्कर्ष निकाला है कि 20 करोड़ रुपये के लड्डू में मिलावट की गई थी।" लड्डू में मिलावट के मामले में सीबीआई की रिपोर्ट के आधार पर सरकार से कार्रवाई की मांग करते हुए उन्होंने चेतावनी दी कि कुकर्म करने वाले भगवान वेंकटेश्वर के दंड से बच नहीं सकते।इस से पहले आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने शुक्रवार को तिरुपति लड्डू में मिलावट को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) की पिछली सरकार के कार्यकाल में तिरुपति लड्डू बनाने के लिए उपयोग किया गया घी शौचालय को साफ करने में इस्तेमाल होने वाले रसायन से बना था। नायडू ने कहा कि रसायनों से युक्त मिलावटी घी का इस्तेमाल पांच साल तक लड्डू बनाने में किया गया। उन्होंने कहा कि दो प्रकार के रसायन होते हैं, जिनमें से कुछ वनस्पति मूल के होते हैं, जो महंगे होते हैं। उन्होंने बताया कि पशु वसा की कीमत कम होती है। 

    भारत ने सेशेल्स के लिए खोला खजाना, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को मिलेगी नई रफ्तार

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    भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदार देश सेशेल्स के साथ आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों को एक नई ऊंचाई दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच सोमवार को नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता में विकास से जुड़ी साझेदारी को केंद्र में रखा गया। इस दौरान दोनों नेताओं ने 'सेशेल' विजन को अपनाया, जिसका मकसद स्थिरता, आर्थिक विकास और सुरक्षा को बढ़ावा देना है। भारत ने सेशेल्स की विकास से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज की भी घोषणा की है, जो वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और पब्लिक हाउसिंग सेक्टर को मजबूती देगा। सेशेल विजन और विशेष आर्थिक पैकेज इस उच्च स्तरीय बैठक का सबसे अहम दस्तावेज रहा। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, इस विजन के तहत भारत ने सेशेल्स के लिए एक विशेष आर्थिक पैकेज का एलान किया है। यह फंड मुख्य रूप से पब्लिक हाउसिंग, मोबिलिटी, इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षमता निर्माण और समुद्री सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति हर्मिनी ने इस बात पर जोर दिया कि यह साझेदारी केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल साउथ के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को भी दर्शाती है।

    ब्लू इकोनॉमी से लेकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक समझौते 

    हैदराबाद हाउस में हुई इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने कई अहम समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान किया। इनमें स्वास्थ्य, डिजिटल सहयोग, मौसम विज्ञान, संस्कृति, महासागर विज्ञान, खाद्य सुरक्षा और गवर्नेंस जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों नेताओं ने ब्लू इकोनॉमी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण सेक्टर्स में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। सेशेल्स की अर्थव्यवस्था के लिए पर्यटन और समुद्री संसाधन बेहद अहम हैं, ऐसे में भारत का सहयोग वहां की अर्थव्यवस्था को विविधता प्रदान करने में मदद करेगा।

    विजन 'सागर' और रणनीतिक महत्व

    बैठक में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद रहे। सेशेल्स हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के 'विजन सागर' का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। राष्ट्रपति हर्मिनी के साथ बैठक के बाद विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि एक समुद्री पड़ोसी के रूप में, सेशेल्स का समर्थन इस क्षेत्र की आर्थिक समृद्धि और सुरक्षा के लिए बेहद मूल्यवान है। समुद्री सुरक्षा पर हुई चर्चा इस बात का संकेत है कि भारत हिंद महासागर में अपनी रणनीतिक पकड़ को और मजबूत करना चाहता है।

    मुंबई और चेन्नई में निवेश पर चर्चा

    राष्ट्रपति हर्मिनी का यह दौरा केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि पूरी तरह से बिजनेस सेंट्रिक भी रहा है। दिल्ली पहुंचने से पहले उन्होंने चेन्नई और मुंबई में समय बिताया, जहां उन्होंने गवर्नेंस, इंडस्ट्री और कोस्टल मैनेजमेंट से जुड़े प्रमुख स्टेकहोल्डर्स के साथ मुलाकात की। पिछले साल अक्तूबर में पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है, जो पांच दिनों तक चलेगा। रविवार को दिल्ली पहुंचने पर उनका औपचारिक स्वागत किया गया था और सोमवार को उन्होंने राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।

    गुजरात–स्टारलिंक एलओआई साइन, सुदूर इलाकों में बढ़ेगी डिजिटल कनेक्टिविटी

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    गुजरात| सरकार ने लन मस्क की स्पेस एक्स की सब्सिडियरी स्टारलिंक सैटेलाइट कम्युनिकेशन्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ आपसी सहयोग के आशय पत्र (एलओआई) का विनिमय किया है। इस समझौते के बाद राज्य के ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों को डिजिटली कनेक्ट किया जा सकेगा। इससे सुदूरवर्ती, दूरदराजी तथा कम टेलीकॉम सुविधा और नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्रों में हाईस्पीड सैटेलाइट आधारित इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई जाएगी।इस एलओआई अंतर्गत पायलट प्रोजेक्ट में कॉमन सर्विस सेंटर्स (सीएससी), ई-गवर्नेंस सुविधाओं, सरकारी विद्यालयों, जिला आपदा प्रबंधन नियंत्रण कक्ष, पोर्ट्स, वन्यजीव अभयारण्यों के क्षेत्रों को जोड़ने की योजना है। यह एलओआई नर्मदा तथा दाहोद जैसे जिलों सभी जिलों में डिजिटल इन्क्लूजन के लिए महत्वपूर्ण कदम बनेगा। इससे पुलिस आउटपोस्ट्स, आपदा प्रबंधन केन्द्रों, वन्यजीव मॉनिटरिंग तथा कृषि अनुसंधान केन्द्रों के लिए मजबूत कनेक्टिविटी द्वारा सिक्योरिटी तथा स्टेबिलिटी बढ़ने के साथ रिलायेबल डिजिटल सर्विस डिलीवरी भी सुनिश्चित होगी।इसके साथ ही राज्य के स्कूलों में शिक्षा के लिए स्मार्ट कनेक्टिविटी तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी) में स्वास्थ्य सुख-सुविधा की सेवाएं और टेली-मेडिसीन सुविधाएं आसानी से एवं तेजी से उपलब्ध होंगी। विभिन्न सरकारी एजेंसियों, विभागों, विद्यालयों और डिजास्टर रिस्पॉन्स टीम्स की कैपिसिटी बिल्डिंग के लिए भविष्य में संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल तथा उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी की उपस्थिति में सोमवार को गांधीनगर में यह एलओआई विनिमय समारोह आयोजित किया गया। राज्य सरकार की ओर से उद्योग आयुक्त पी. स्वरूप तथा स्टारलिंक की ओर से स्टारलिंक इंडिया के हेड प्रभाकर जयकुमार ने इस एलओआई का परस्पर आदान-प्रदान किया।

    सावरकर को भारत रत्न पर विपक्ष का तंज—बोले, उन्हें तो ब्रिटिश रत्न मिलना चाहिए

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    डेस्क: वीर सावरकर को भारत रत्न देने पर बहस फिर से शुरू हो गई है, एक कार्यक्रम में RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सावरकर को यह सम्मान देने से भारत रत्न की प्रतिष्ठा बढ़ेगी. मुंबई में RSS के शताब्दी समारोह में की गई इस टिप्पणी से कांग्रेस और बीजेपी के बीच तीखी राजनीतिक बहस शुरू हो गई है. भागवत की इस मांग पर विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जाहिर की है.

    RSS प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा, “सावरकर को भारत रत्न किस आधार पर दिया जाना चाहिए? यह एक बहुत बड़ा सम्मान है. सावरकर पहले व्यक्ति थे जिन्होंने दो-राष्ट्र सिद्धांत का प्रचार किया, जिसे बाद में मुस्लिम लीग ने अपनाया. उन्होंने उसी आधार पर अपनी सरकार बनाई और अखंड भारत को टुकड़ों में बांट दिया.”

    कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, “सावरकर ने ब्रिटिश सरकार की मदद की थी, जबकि कांग्रेस भारत की आज़ादी के लिए लड़ रही थी. वह एक फासीवादी थे. ऐसे व्यक्ति को भारत रत्न कैसे दिया जा सकता है? मोहन भागवत को ब्रिटिश सरकार से कहना चाहिए कि वे सावरकर को ‘ब्रिटिश रत्न’ दें.”

    जिला रैंकिंग से मजबूत हो रही स्कूल शिक्षा में जवाबदेही और सुधार प्रक्रिया

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    जयपुर, 9 फरवरी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जनवरी–2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी कर दी गई है। यह रैंकिंग प्रदेश के समस्त जिलों के शैक्षणिक  परिणामों, विद्यालयों के दैनिक संचालन और गवर्नेंस आदि संकेतकों में प्रदर्शन के आकलन के आधार पर जारी की जाती है। ताज़ा रैंकिंग में झुंझुनूं और हनुमानगढ़ शीर्ष जिलों में शामिल रहे हैं, जबकि चूरू ने सराहनीय प्रयास करते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया है।      

    रैंकिंग में छात्रों की नियमित उपस्थिति, कक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता, फील्ड विजिट के माध्यम से निगरानी और शैक्षणिक मूल्यांकन में विद्यार्थियों के प्रदर्शन जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया गया है। सीखने के परिणामों पर बढ़ते जोर और उच्च स्तर पर नियमित प्रदर्शन समीक्षाओं के साथ, जिला रैंकिंग स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही, लक्षित सहयोग और निरंतर सुधार लाने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।      

    सीखने के परिणामों को विशेष महत्व    
    इस वर्ष शैक्षणिक सीखने के परिणामों को औपचारिक रूप से रैंकिंग का हिस्सा बनाया गया है। कॉम्पिटेंसी-बेस्ड असेसमेंट (सीबीए), ओरल रीडिंग फ्लुएंसी (ओआरएफ) असेसमेंट और बोर्ड परीक्षा के नतीजों को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि जिलों का प्रदर्शन न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि शैक्षणिक प्रभाव को भी दर्शा सके।     

    डेटा-आधारित होती है समीक्षा:    
    एकेडमिक रैंकिंग का उद्देश्य जिलों के प्रदर्शन की नियमित, डेटा-आधारित समीक्षा करना और स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही को मजबूत बनाना है। जिला रैंकिंग और पैरामीटर-वाइज़ स्कोर की हर माह स्कूल शिक्षा विभाग (सीएसई) के सचिव की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की जाती है, जिसमें कमियों की पहचान कर सुधार के लिए स्पष्ट अगले कदम तय किए जाते हैं। ताजा रैंकिंग के अनुसार झुंझुनूं और हनुमानगढ़ ने अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। तीसरे पायदान पर चूरू रहा, जिसने गंगानगर को पीछे छोड़ा। सीकर , भरतपुर  और खैरतल-तिजारा क्रमशः चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रहे। बांसवाड़ा और जैसलमेर सबसे निचले पायदान पर हैं।          

    रैंकिंग प्रणाली ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत  किया है- शिक्षा मंत्री

    शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि जिला रैंकिंग ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है। सीखने के परिणामों को रैंकिंग से जोड़ने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्तर पर निर्णय विद्यार्थियों की वास्तविक प्रगति के आधार पर हों। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि सभी जिलों को समान अवसर, समयबद्ध सहयोग और आवश्यक संसाधन मिलें, ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।

    विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल ने कहा कि डेटा-आधारित समीक्षा और सीखने के परिणामों पर फोकस से अब स्कूल शिक्षा प्रणाली में ठोस और स्थायी सुधार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारों के जरिए हर विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।       

    जयपुर, 9 फरवरी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जनवरी–2026 की जिला एकेडमिक रैंकिंग जारी कर दी गई है। यह रैंकिंग प्रदेश के समस्त जिलों के शैक्षणिक  परिणामों, विद्यालयों के दैनिक संचालन और गवर्नेंस आदि संकेतकों में प्रदर्शन के आकलन के आधार पर जारी की जाती है। ताज़ा रैंकिंग में झुंझुनूं और हनुमानगढ़ शीर्ष जिलों में शामिल रहे हैं, जबकि चूरू ने सराहनीय प्रयास करते हुए तीसरे स्थान पर कब्जा जमाया है।      

    रैंकिंग में छात्रों की नियमित उपस्थिति, कक्षा में शिक्षण की गुणवत्ता, फील्ड विजिट के माध्यम से निगरानी और शैक्षणिक मूल्यांकन में विद्यार्थियों के प्रदर्शन जैसे प्रमुख मानकों को शामिल किया गया है। सीखने के परिणामों पर बढ़ते जोर और उच्च स्तर पर नियमित प्रदर्शन समीक्षाओं के साथ, जिला रैंकिंग स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही, लक्षित सहयोग और निरंतर सुधार लाने का एक प्रभावी माध्यम बन रही है।      

    सीखने के परिणामों को विशेष महत्व    
    इस वर्ष शैक्षणिक सीखने के परिणामों को औपचारिक रूप से रैंकिंग का हिस्सा बनाया गया है। कॉम्पिटेंसी-बेस्ड असेसमेंट (सीबीए), ओरल रीडिंग फ्लुएंसी (ओआरएफ) असेसमेंट और बोर्ड परीक्षा के नतीजों को विशेष महत्व दिया गया है, ताकि जिलों का प्रदर्शन न केवल प्रशासनिक दक्षता बल्कि शैक्षणिक प्रभाव को भी दर्शा सके।     

    डेटा-आधारित होती है समीक्षा:    
    एकेडमिक रैंकिंग का उद्देश्य जिलों के प्रदर्शन की नियमित, डेटा-आधारित समीक्षा करना और स्कूल शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही को मजबूत बनाना है। जिला रैंकिंग और पैरामीटर-वाइज़ स्कोर की हर माह स्कूल शिक्षा विभाग (सीएसई) के सचिव की अध्यक्षता में होने वाली समीक्षा बैठकों में गहन समीक्षा की जाती है, जिसमें कमियों की पहचान कर सुधार के लिए स्पष्ट अगले कदम तय किए जाते हैं। ताजा रैंकिंग के अनुसार झुंझुनूं और हनुमानगढ़ ने अपना शीर्ष स्थान बनाए रखा है। तीसरे पायदान पर चूरू रहा, जिसने गंगानगर को पीछे छोड़ा। सीकर , भरतपुर  और खैरतल-तिजारा क्रमशः चौथे, पांचवें और छठे स्थान पर रहे। बांसवाड़ा और जैसलमेर सबसे निचले पायदान पर हैं।          

    रैंकिंग प्रणाली ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत  किया है- शिक्षा मंत्री

    शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि जिला रैंकिंग ने स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत किया है। सीखने के परिणामों को रैंकिंग से जोड़ने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर स्तर पर निर्णय विद्यार्थियों की वास्तविक प्रगति के आधार पर हों। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि सभी जिलों को समान अवसर, समयबद्ध सहयोग और आवश्यक संसाधन मिलें, ताकि प्रदेश का कोई भी बच्चा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे।

    विभाग के शासन सचिव श्री कृष्ण कुणाल ने कहा कि डेटा-आधारित समीक्षा और सीखने के परिणामों पर फोकस से अब स्कूल शिक्षा प्रणाली में ठोस और स्थायी सुधार दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में तकनीक, शिक्षक प्रशिक्षण और नवाचारों के जरिए हर विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना हमारी प्राथमिकता है।       

    जीवाजी यूनिवर्सिटी के जूनियर स्टूडेंट्स में दहशत, UGC तक पहुंचे रैगिंग के मामले

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    ग्वालियर : जीवाजी विश्वविद्यालय में लगातार रैगिंग की शिकायतें आ रही हैं. विश्वविद्यालय प्रबंधन शिकायतों को गंभीरता से नहीं ले रहा. दिखावे की कार्रवाई होने से रैगिंग करने वालों में भय समाप्त हो चुका है. मजबूर होकर स्टूडेंट्स अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) में शिकायतें करने लगे हैं. पीड़ित छात्रों ने बीते 15 दिन में यूजीसी हेल्पलाइन पर 03 शिकायतें दर्ज कराई हैं.

     

    आर्यभट्ट हॉस्टल में हफ्ते में दूसरी बार रैगिंग

    भोजन को लेकर मारपीट, छात्र ने यूजीसी में की शिकायत 7 फरवरी 2026 को जीवाजी यूनिवर्सिटी के आर्यभट्ट हॉस्टल में छात्र से रैगिंग की शिकायत यूजीसी के पास पहुंची. पीड़ित छात्र ने आरोप लगाया "वह जीवाजी विश्वविद्यालय के गालव सभागार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में हिस्सा लेने गया था, जहां भोजन के दौरान रोटी लेने को लेकर आर्यभट्ट हॉस्टल में हो रहने वाले फार्मेसी के 8 छात्रों ने उसके साथ मारपीट की और धमकी दी कि अगर वह हॉस्टल में उनके हिसाब से नहीं रहा तो जान से मार देंगे."

     

    कुलसचिव और कुलगुरु ने किया हॉस्टल का दौरा

    ये घटना भी तब हुई जब रैगिंग को लेकर आर्यभट्ट हॉस्टल से पहले की दो शिकायते सामने आ चुकी थीं. कुलसचिव ने प्रॉक्टोरिक्ल बोर्ड और एंटी रैगिंग कमेटी के सदस्यों के साथ हॉस्टल का निरीक्षण कर छात्रों को इस तरह की गतिविधियां ना करने और ऐसी घटना की जानकारी देने की हिदायत दी. हालांकि इसके बाद फिर घटना हो गई. रैगिंग की नई घटना पर जांच बैठा दी गई है. वहीं रविवार को कुलगुरु प्रो. राजकीमार आर्य ने भी आर्यभट्ट और कैप्टन रूपसिंह हॉस्टल का निरीक्षण कर छात्रों से बातचीत कर समझाइश दी.

     

    छात्र से मारपीट मामले में 3 लोगों को सजा

    हफ़्ते भर पहले आर्यभट्ट हॉस्टल में लॉ के सीनियर स्टूडेंट के साथ फार्मेसी के करीब 8 जूनियर छात्रों ने बेरहमी से मारपीट की थी, जिसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया था. इस मामले में की गई रैगिंग की शिकायत पर जांच पूरी हो चुकी है. साथ ही विश्वविद्यालय प्रबंधन ने 3 छात्रों को सजा भी सुनाई है.

     

    रैगिंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी

    जीवाजी विश्व विद्यालय के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. विमलेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया "रैगिंग की शिकायतों पर चल रही जांच में प्रॉक्टोरल बोर्ड के सामने जो तथ्य सामने आए हैं, उसमें प्रभावी कार्रवाई की जा रही है. शिकायत के एक मामले में आरोपी छात्रों को विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा उनके एक इंटरनल एग्जाम (आंतरिक परीक्षा) से वंचित कर दिया है, जिससे उनके परीक्षा परिणामों पर सीधे तौर पर असर पड़ेगा. अभी जांच जारी है. आगे जो तथ्य सामने आयेंगे, उनके आधार पर सजा पर विचार किया जाएगा.

     

    पैरेंट्स को बुलाएंगे विश्वविद्यालय

    पीआरओ राठौड़ का कहना है "जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु का कहना है और छात्रों को भी समझाइश होती है कि कोई ऐसा कम ना करें जिससे आपके भविष्य पर असर आए. इसलिए अगर छोटी से सजा में छात्र संभल जाते हैं तो बेहतर है. इन छात्रों के माता-पिता को भी विश्वविद्यालय बुलाया जाएगा और भविष्य में दोबारा ऐसी शिकायत आती है तो कठोर कार्रवाई की जाएगी."

     

      जबलपुर में दर्दनाक सड़क हादसा, फॉर्च्यूनर कार ने बाइक सवार युवक को कुचला

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      जबलपुर| जिले के ओमती थाना अंतर्गत नौदरा ब्रिज में एक बार फिर हिट एंड रन का मामला सामने आया है, जिसमें एक रईसजादा फॉर्च्यूनर कार से बाइक सवार युवक को कुचल कर मौके से फरार हो गया. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर पुलिस और एंबुलेंस को बुलवाया, जिसके बाद युवक को उपचार के लिए अस्पताल भिजवाया गया. अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टर ने युवक को मृत घोषित कर दिया.

      क्या है पूरा मामला?

      जानकारी के अनुसार, बाइक सवार युवक पीयूष अपनी बाइक से घर जा रहा था, तभी रसल चौक से तैयब अली की तरफ जा रही फॉर्च्यूनर कार के चालक ने उसे साइड से जोरदार टक्कर मार दी. टक्कर लगते ही युवक सड़क पर गिर गया, लेकिन कार चालक रईस जादे ने कार रोक कर मदद करने की बजाय रफ्तार बढ़ा दी और वहां से भाग निकला. इस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने युवक को बचाने के लिए एंबुलेंस से उसे अस्पताल भी भेजा लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थी

      पुलिस चालक की तलाश में जुटी

      शहर के बीचों बीच हुई हिट एंड रन की इस घटना के बाद एक बार फिर शहर में यातायात व्यवस्था और वाहनों की रफ्तार को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है. पुलिस ने मामला दर्ज करते हुए टक्कर मारने वाली फॉर्च्यूनर कार और उसके चालक की तलाश शुरू कर दी है.

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