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पूर्व TMC पार्षद पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, वसूली और छेड़छाड़ के आरोप में गिरफ्तारी

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कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति और प्रशासनिक हलकों से इस समय की एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के एक और पूर्व तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्षद को गंभीर आपराधिक मामलों में पुलिस ने दबोच लिया है। गिरफ्तार किए गए नेता की पहचान तारकेश्वर चक्रवर्ती के रूप में हुई है, जो दक्षिण कोलकाता के सर्वे पार्क इलाके के अंतर्गत आने वाले केएमसी के वार्ड संख्या 104 के पूर्व पार्षद होने के साथ-साथ बरो नंबर 11 के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा की गई इस त्वरित विधिक कार्रवाई के तहत शनिवार को उन्हें आधिकारिक तौर पर हिरासत में ले लिया गया। राज्य में हुए हालिया राजनीतिक बदलावों और सत्ता परिवर्तन के बाद से ही पूर्ववर्ती सत्तारूढ़ दल के नेताओं पर कानून का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है, जिससे राजनीतिक गलियारों में खलबली मची हुई है।

दो अलग-अलग एफआईआर और महिला उत्पीड़न के संगीन आरोप

विधिक जांच विवरण के अनुसार, संतोषपुर के कालीकुमार मजूमदार रोड निवासी तारकेश्वर चक्रवर्ती के खिलाफ सर्वे पार्क थाने में दो अलग-अलग प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज हैं। 23 जून 2026 को दर्ज की गई पहली एफआईआर में टीएमसी नेता पर एक महिला के साथ गंभीर छेड़छाड़ और शीलभंग करने का संगीन आरोप लगाया गया है। इसके अतिरिक्त, मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने उनके विरुद्ध गैरकानूनी रूप से सरकारी व निजी कार्यों में बाधा उत्पन्न करने, मारपीट करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, किसी महिला को अपमानित करने के इरादे से बल प्रयोग करने, जान से मारने की धमकी देने, चोरी और अनाधिकृत रूप से किसी के परिसर में घुसने जैसी गंभीर आपराधिक धाराएं जोड़ी हैं।

जबरन वसूली का मुकदमा और रिमांड के लिए अदालत में पेशी

पूर्व पार्षद चक्रवर्ती के खिलाफ दर्ज की गई दूसरी एफआईआर पूरी तरह से वित्तीय गबन और डरा-धमकाकर जबरन वसूली (एक्सटॉर्शन) से जुड़ी हुई है। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों की शिकायतों के आधार पर सर्वे पार्क पुलिस ने इस मामले में गहन छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि सभी आवश्यक दस्तावेजी साक्ष्य जुटाने के बाद शनिवार को ही आरोपी नेता को कोलकाता की संबंधित मुख्य अदालत में पेश किया जा रहा है। लोक अभियोजक और पुलिस की जांच टीम कोर्ट से आरोपी टीएमसी नेता की अधिकतम दिनों की पुलिस रिमांड (हिरासत) की मांग करेगी, ताकि जबरन वसूली के इस पूरे सिंडिकेट और उसमें शामिल अन्य सहयोगियों का पर्दाफाश किया जा सके।

विधानसभा चुनाव में करारी शिकस्त और भंग हुआ नगर निगम बोर्ड

इस प्रशासनिक कार्रवाई की पृष्ठभूमि राज्य में हुए हालिया विधानसभा चुनावों से गहराई से जुड़ी है, जहां तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त के बाद से पार्टी और उसके द्वारा संचालित स्थानीय निकायों में भारी अंतर्विरोध और बिखराव देखने को मिल रहा है। चुनावों के नतीजों के बाद मचे सियासी घमासान के बीच कोलकाता नगर निगम (केएमसी) के बोर्ड को पूरी तरह भंग कर दिया गया था और कोलकाता के तत्कालीन मेयर फिरहाद हकीम को भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। शासन बदलने के बाद से अब तक भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग और अवैध वसूली के मामलों में केएमसी के लगभग 11 पूर्व टीएमसी पार्षदों को कानून के शिकंजे में कसकर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है।

Uddhav Thackeray का नया सियासी नारा, ‘भाजपा-मुक्त राम’ को लेकर BJP पर साधा निशाना

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मुंबई। महाराष्ट्र के राजनीतिक रणक्षेत्र में एक बार फिर हिंदुत्व और अयोध्या का मुद्दा पूरी तरह गरमा गया है। शिवसेना (यूबीटी) के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अयोध्या के ऐतिहासिक राम मंदिर के दान में हुए कथित गबन के मामले को मुख्य हथियार बनाते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर बेहद तीखा और चौतरफा हमला बोला है। एक जनसभा को संबोधित करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने संगीन आरोप लगाया कि भाजपा ने हमेशा करोड़ों सनातनी हिंदुओं की अगाध धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया है और अब चंदा चोरी के आरोपों ने उनके विश्वास को पूरी तरह तोड़ दिया है। उन्होंने घोषणा की कि भगवान राम को किसी एक राजनीतिक दल के चंगुल से मुक्त कराने के लिए उनकी पार्टी जल्द ही देशव्यापी 'भाजपा-मुक्त राम' आंदोलन का शंखनाद करेगी, जिसने राज्य की सियासत में एक नया वैचारिक विवाद खड़ा कर दिया है।

विपक्षी दलों को तोड़ने की नीति और असली बनाम नकली हिंदुत्व की परिभाषा

यवतमाल-वाशिम संसदीय क्षेत्र की इस विशाल आक्रोश रैली में हुंकार भरते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि असली हिंदुत्व वह है जो संपूर्ण मानवता, करुणा और न्याय सिखाता है, परंतु वर्तमान सत्ताधारी दल का हिंदुत्व केवल पवित्र धार्मिक स्थलों को लूटने और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाला छद्म हिंदुत्व है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार को घेरते हुए आरोप लगाया कि जब भी जनता बेरोजगारी, अनियंत्रित महंगाई और त्रस्त किसानों जैसे बुनियादी व जमीनी मुद्दों पर जवाब मांगती है, तब भाजपा मुख्य विमर्श से ध्यान भटकाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों का दुरुपयोग करके विपक्षी राजनीतिक दलों को असंवैधानिक तरीके से तोड़ने का काम शुरू कर देती है। ठाकरे ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस विभाजनकारी राजनीति को कतई स्वीकार नहीं करेगी।

भगवान राम पर एकाधिकार का विरोध और 'भाजपा-मुक्त राम' अभियान

उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में तार्किक रुख अपनाते हुए रेखांकित किया कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम संपूर्ण सृष्टि और ब्रह्मांड के हैं, वे किसी एक राजनीतिक संगठन की बपौती या निजी संपत्ति नहीं हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की खातिर दशकों तक प्रभु राम के नाम का राजनीतिकरण किया गया, और अब मंदिर निर्माण के पावन कोष में हुई करोड़ों की वित्तीय हेरफेर के प्रमाण सामने आने के बाद भाजपा की बची-खुची राजनीतिक नैतिकता भी पूरी तरह समाप्त हो चुकी है। कांग्रेस और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर उनकी पार्टी इस महाघोटाले के खिलाफ न सिर्फ विधिक लड़ाई लड़ेगी, बल्कि 'भाजपा-मुक्त राम' अभियान के तहत जन-जन को जागरूक करने के लिए सड़कों पर उतरकर बड़ा जनांदोलन खड़ा करेगी।

चंदा चोरी मामले में अब तक की बरामदगी और कानूनी कार्रवाई की स्थिति

इस राजनीतिक घमासान की पृष्ठभूमि में अगर अयोध्या के मूल मामले के कानूनी पहलुओं को देखें तो श्रद्धालुओं की आस्था की गाढ़ी कमाई के दान में हुए गबन के मामले ने पूरे देश के प्रशासनिक महकमे में खलबली मचा रखी है। इस पूरे वित्तीय धोखाधड़ी कांड में जांच एजेंसियों और पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अब तक गिरफ्तार किए जा चुके सभी आठ मुख्य आरोपियों को अदालत द्वारा शुक्रवार को कड़ी न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। सरकारी वकीलों और विधिक विंग के अनुसार, जांच दल ने अब तक आरोपियों के पास से 79.85 लाख रुपये की नकद व अन्य संपत्तियों की रिकवरी (बरामदगी) सुनिश्चित कर ली है। चूंकि इस मामले की गहन फॉरेंसिक और बैंकिंग तफ्तीश अभी भी निरंतर जारी है, इसलिए आने वाले दिनों में कुछ अन्य बड़े नामों के खुलासे और नए विधिक मोड़ों की प्रबल संभावना जताई जा रही है।

9 साल बाद MDMK ने DMK गठबंधन से तोड़ा नाता, तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा उलटफेर

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चेन्नई। दक्षिण भारत की राजनीति और तमिलनाडु के सत्ता समीकरणों से इस समय की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है, जहां मारुमलार्ची द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एमडीएमके) ने सत्तारूढ़ डीएमके के नेतृत्व वाले धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील गठबंधन (एसपीए) से अपनी राहें पूरी तरह अलग करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस बड़े फैसले के साथ ही दोनों क्षेत्रीय दलों के बीच पिछले 9 वर्षों से चला आ रहा पुराना राजनीतिक साथ भी आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। चेन्नई में आयोजित एमडीएमके की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय संगठनात्मक बैठक में, जिसकी अध्यक्षता स्वयं पार्टी के कद्दावर महासचिव वाइको कर रहे थे, सर्वसम्मति से एक राजनीतिक प्रस्ताव पारित किया गया। इस आधिकारिक प्रस्ताव के जरिए पार्टी ने डीएमके गठबंधन को छोड़ने और भविष्य में एक स्वतंत्र राजनीतिक विकल्प के रूप में आगे बढ़ने की विधिवत घोषणा कर दी है।

विधानसभा चुनाव में पराजय और अभिनेता विजय की पार्टी 'टीवीके' का उभार

यह दूरगामी नीतिगत बदलाव वर्ष 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में डीएमके के नेतृत्व वाले गठबंधन (एसपीए) को मिली करारी शिकस्त और सत्ता विरोधी लहर के बाद सामने आया है। इस ऐतिहासिक चुनाव में दक्षिण भारतीय सिनेमा के सुपरस्टार से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की नवनिर्मित पार्टी ‘तमिलगा वेट्री कझगम’ (टीवीके) अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए राज्य के विधायी इतिहास में सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरकर सामने आई है। एमडीएमके द्वारा पारित प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया कि उनकी पार्टी पूर्व में इस गठबंधन का हिस्सा केवल इसलिए बनी थी और लंबे समय तक टिकी रही, क्योंकि वह तमिलनाडु की धरती पर “सांप्रदायिक और विभाजनकारी राजनीतिक ताकतों” को पैर पसारने से रोकने के लिए वैचारिक और सैद्धांतिक रूप से पूरी तरह प्रतिबद्ध थी।

स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को कमजोर करने का आरोप और 9 साल का सफरनामा

पार्टी के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, 3 दिसंबर 2017 को एक उच्च स्तरीय समिति द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद से ही एमडीएमके निरंतर डीएमके के नेतृत्व वाले मोर्चे का एक वफादार घटक दल रही थी। पारित किए गए इस नए शिकायती प्रस्ताव में कड़े शब्दों में कहा गया है कि हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान, गठबंधन के भीतर एमडीएमके की 32 वर्षों की गौरवशाली और लंबी राजनीतिक यात्रा व सांगठनिक क्षमता के बावजूद, उसकी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और वजूद को जानबूझकर हाशिए पर धकेलने व कमजोर करने की सुनियोजित कोशिशें की गईं। इन तमाम आंतरिक मतभेदों और असहज परिस्थितियों के बावजूद, पार्टी ने गठबंधन धर्म का पालन करते हुए सहयोगियों के साथ मिलकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया था।

एआईएडीएमके को सत्ता सौंपने की कथित कोशिशें और वैचारिक समझौता

चुनाव परिणाम आने के बाद के घटनाक्रमों पर गहरा असंतोष व्यक्त करते हुए, एमडीएमके के शीर्ष नेतृत्व ने सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (एसपीए) के नीति-निर्धारकों पर अपनी घोषित मूल विचारधारा और बुनियादी सिद्धांतों से पूरी तरह समझौता करने का संगीन आरोप लगाया है। प्रस्ताव में खुले तौर पर दावा किया गया है कि यह राजनीतिक गलियारों में किसी से छिपा नहीं है कि किस प्रकार हिंदुत्ववादी ताकतों के साथ परोक्ष साठगांठ करके अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) को सत्ता की चाबी सौंपने की कोशिशें की गईं, जबकि उसने विधानसभा में महज 47 सीटें ही हासिल की थीं। पार्टी ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि इन संदिग्ध कूटनीतिक गतिविधियों के कारण अब इस मोर्चे का खुद को विचारधारा और धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित गठबंधन कहना पूरी तरह बेमानी और खोखला साबित हो चुका है।

CM हेल्पलाइन पर शिकायत पड़ते ही हरकत में आया प्रशासन, 6 वाहन किए जब्त

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गौरेला: छत्तीसगढ़ सरकार के मंशानुरूप प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को रोकने और अवैध उत्खनन व खनिजों के अवैध परिवहन के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (जीपीएम) जिले में एक बड़ी कार्रवाई की गई है। जिला प्रशासन और खनिज विभाग की संयुक्त उड़नदस्ता टीम ने संयुक्त रूप से जाल बिछाकर अवैध माइनिंग और परिवहन में संलिप्त कुल छह भारी वाहनों को रंगे हाथों पकड़कर जब्त कर लिया है। यह पूरी दंडात्मक कार्रवाई जिला कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन के कड़े और सीधे दिशा-निर्देशों के बाद जिला खनिज उड़नदस्ता दल द्वारा विभिन्न संवेदनशील इलाकों में अचानक दबिश देकर की गई।

मुरूम और मिट्टी की माइनिंग कर रही थीं जेसीबी, रेत का हो रहा था अवैध परिवहन

विभागीय सूत्रों से प्राप्त विस्तृत विवरण के अनुसार, खनिज विभाग को पिछले कुछ समय से देवराजपारा-सधवानी और बंधी-बचरवार के ग्रामीण अंचलों में बड़े पैमाने पर मुरूम और मिट्टी के अवैध उत्खनन की लगातार सूचनाएं मिल रही थीं। सूचना की तस्दीक के लिए जब उड़नदस्ता दल ने देवराजपारा-सधवानी क्षेत्र में औचक निरीक्षण किया, तो वहां बिना किसी वैध रॉयल्टी और अनुमति के अवैध उत्खनन में लगी दो जेसीबी (JCB) मशीनें पाई गईं।

इसके तुरंत बाद टीम ने बंधी-बचरवार क्षेत्र में छापा मारकर वहां से भी एक अन्य जेसीबी मशीन को अवैध माइनिंग करते हुए जब्त किया। इसी कार्रवाई के दौरान दल को सिलपहरी क्षेत्र में अवैध रेत के परिवहन की भी गुप्त सूचना मिली, जिस पर त्वरित एक्शन लेते हुए अधिकारियों ने रेत से लदे तीन ट्रैक्टरों को भी रोककर उनके दस्तावेज मांगे। वैध कागजात और रॉयल्टी पर्ची न होने के कारण तीनों ट्रैक्टरों को भी तत्काल अभिरक्षा में ले लिया गया। सभी छह जब्त वाहनों को सुरक्षा के लिहाज से अमरपुर स्थित पुलिस लाइन परिसर में खड़ा कराया गया है।

सधवानी के ग्रामीणों ने सीएम हेल्पलाइन 1076 पर की थी शिकायत, तुरंत हुआ एक्शन

प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी त्वरित कार्रवाई की पृष्ठभूमि सधवानी गांव के जागरूक ग्रामीणों की सजगता से जुड़ी है। ग्रामीणों ने क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध उत्खनन से परेशान होकर मुख्यमंत्री जनशिकायत हेल्पलाइन नंबर 1076 के साथ-साथ सीधे कलेक्टर कार्यालय में साक्ष्यों के साथ लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

मामले की संवेदनशीलता और पर्यावरण को हो रहे नुकसान को देखते हुए कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने इसे अत्यंत गंभीरता से लिया और खनिज विभाग को चौबीस घंटे के भीतर जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की समयसीमा तय कर दी थी। इसी के बाद हरकत में आए उड़नदस्ता दल ने मौके पर पहुंचकर इस बड़ी जब्ती को अंजाम दिया।

प्राकृतिक संपदा और राजस्व की सुरक्षा सर्वोपरि, बर्दाश्त नहीं होगी कोताही: कलेक्टर

इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कलेक्टर डॉ. संतोष देवांगन ने दोटूक शब्दों में कहा कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले की सीमाओं के भीतर किसी भी प्रकार के अवैध उत्खनन, खनिजों के अवैध परिवहन या उनके अवैध भंडारण (स्टॉक) को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारियों (एसडीएम), तहसीलदारों और खनिज विभाग के अमले को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित गश्त और सतत निगरानी रखें। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि जहां भी अवैध गतिविधियों की शिकायत मिले, वहां बिना किसी दबाव के तत्काल छापामार कार्रवाई की जाए ताकि राज्य की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण हो सके और शासन के वैध राजस्व को होने वाली क्षति को पूरी तरह रोका जा सके।

माइनिंग एक्ट के तहत दर्ज हुआ केस, इन अधिकारियों की रही मुख्य भूमिका

जिला खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि जब्त किए गए सभी छह वाहनों के स्वामियों और चालकों के खिलाफ 'खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम' की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत कड़ा मामला दर्ज कर लिया गया है। नियमानुसार, अवैध उत्खनन और परिवहन की श्रेणी में आने वाले इन वाहनों को शासन द्वारा निर्धारित भारी अर्थदंड (जुर्माना) और अन्य वैधानिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही कोर्ट के आदेश पर छोड़ा जाएगा।

इस पूरी घेराबंदी और सफल छापामार कार्रवाई को अंजाम देने में सहायक खनिज अधिकारी आदित्य मानकर, खनिज निरीक्षक सुजीत कंवर, खनिज सिपाही शिवकुमार लहरे, नगर सैनिक सतीश साहू तथा जिला खनिज उड़नदस्ता दल के अन्य सुरक्षाकर्मियों व सदस्यों की अत्यंत सक्रिय और सराहनीय भूमिका रही। इस कार्रवाई से पूरे जिले के खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

बांग्लादेश पर जिनपिंग का बड़ा बयान, तारिक से मुलाकात के बाद भारत पर साधा निशाना

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बीजिंग। दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बांग्लादेश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आश्वस्त किया है कि बीजिंग 'बाहरी ताकतों के हस्तक्षेप को खारिज करने' और अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता व स्वतंत्रता की रक्षा करने में ढाका का पूरी तरह समर्थन करेगा। प्रधानमंत्री तारिक रहमान की राजकीय चीन यात्रा के दौरान आया यह बयान बेहद रणनीतिक माना जा रहा है। यद्यपि इस आधिकारिक वार्ता में सीधे तौर पर किसी भी देश का नाम नहीं लिया गया, परंतु कूटनीतिक गलियारों में इसे स्पष्ट रूप से भारत की ओर एक परोक्ष संकेत के रूप में देखा जा रहा है। ज्ञात हो कि बांग्लादेश के दक्षिणपंथी संगठन और वर्तमान सत्ताधारी दल पूर्ववर्ती शेख हसीना सरकार के समय से ही भारत पर उनके आंतरिक मामलों में अत्यधिक दखल देने का आरोप लगाते रहे हैं। ऐसे में फरवरी 2026 में पदभार ग्रहण करने वाले तारिक रहमान और चीनी राष्ट्रपति के बीच शुक्रवार को हुई यह उच्चस्तरीय मुलाकात ढाका में भारत के पारंपरिक प्रभाव को संतुलित करने की चीन की एक बड़ी कूटनीतिक चाल मानी जा रही है, जिससे इस क्षेत्र में दोनों महाशक्तियों के बीच रस्साकशी और तेज होने के आसार हैं।

अटूट दोस्ताना संबंध और रणनीतिक वार्ता तंत्र पर चीनी प्रतिबद्धता

द्विपक्षीय बैठक के उपरांत चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने विश्वास जताते हुए कहा कि वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियां चाहे कितनी भी परिवर्तनशील क्यों न हों, बांग्लादेश के साथ अपने मैत्रीपूर्ण संबंधों को प्रगाढ़ करने की नीति पर चीन हमेशा अडिग रहेगा। उन्होंने चीन को बांग्लादेश का एक अत्यंत विश्वसनीय मित्र, उत्तरदायी पड़ोसी और मजबूत साझेदार के रूप में परिभाषित किया। इस यात्रा के समापन पर जारी किए गए साझा राजनयिक बयान के अनुसार, दोनों राष्ट्र अपने-अपने विदेश मंत्रियों के स्तर पर एक नया रणनीतिक वार्ता तंत्र स्थापित करने तथा भविष्य में '2+2' (विदेश और रक्षा मंत्री स्तर की) वार्ता की संभावनाएं तलाशने पर सहमत हुए हैं। इसके प्रत्युत्तर में बांग्लादेश ने बीजिंग की 'वन-चाइना पॉलिसी' (एक चीन नीति) के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया, जिसके तहत ताइवान को मुख्य भूमि चीन का अभिन्न अंग माना जाता है।

तीस्ता नदी जल प्रबंधन परियोजना में चीन की तकनीकी व वित्तीय भागीदारी

इस महत्वपूर्ण यात्रा का सबसे ठोस और रणनीतिक परिणाम तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना में चीन द्वारा बड़े सहयोग का आधिकारिक वादा है। साझा घोषणापत्र के विधिक विवरण के अनुसार, चीन और बांग्लादेश एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन, हाइड्रोलॉजिकल पूर्वानुमान (बाढ़ की अग्रिम चेतावनी), आपदा न्यूनीकरण, नदी की ड्रेजिंग (गाद सफाई) और संबंधित आधुनिक जल तकनीकों को साझा करने के क्षेत्रों में अपने तकनीकी सहयोग को और अधिक गहरा करेंगे। चीनी पक्ष ने तीस्ता परियोजना के लिए वित्तीय व ढांचागत सहायता प्रदान करने की घोषणा की है, और दोनों देशों के नदी विशेषज्ञों को इस परियोजना के व्यवहार्यता अध्ययन (फीजिबिलिटी स्टडी) तथा संबंधित तकनीकी कार्यों में गति लाने के विशेष निर्देश दिए गए हैं।

त्रिपक्षीय आर्थिक गलियारे का प्रस्ताव और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी का नया रोडमैप

क्षेत्रीय व्यापार और कनेक्टिविटी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने के लिए राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बांग्लादेश, म्यांमार और चीन को आपस में जोड़ने वाले एक विशाल आर्थिक गलियारे (इकोनॉमिक कॉरिडोर) के निर्माण का रणनीतिक प्रस्ताव भी दुनिया के सामने रखा है। बीजिंग द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, चीनी सरकार इस पूरे क्षेत्र में व्यापारिक सुगमता और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 'चीन-म्यांमार-बांग्लादेश इकोनॉमिक कॉरिडोर' के विकास को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस त्रिपक्षीय गलियारे के निर्माण से न केवल चीन की पहुंच बंगाल की खाड़ी के रणनीतिक मुहाने तक और सुगम हो जाएगी, बल्कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया के व्यापारिक समीकरणों को भी पूरी तरह बदलने की क्षमता रखता है।

‘कितनी गड़बड़ है’, TET पेपर लीक मामले में ओवैसी ने सरकार पर उठाए गंभीर सवाल

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मुंबई। महाराष्ट्र में 'पेपर लीक' की गंभीर आशंका को देखते हुए रविवार को आयोजित होने वाली शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को तात्कालिक प्रभाव से टाल दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, ठाणे जिले के भिवंडी क्षेत्र में पुलिस द्वारा की गई एक गुप्त छापेमारी के दौरान कुछ संदिग्धों के पास से कुछ ऐसे प्रश्न पत्र बरामद हुए, जिनके सवाल मूल प्रश्न पत्र से काफी हद तक मेल खा रहे थे। इस सुरक्षा चूक के सामने आने के बाद राज्य परीक्षा परिषद ने एहतियातन परीक्षा को स्थगित करने का कड़ा कदम उठाया है। इस फैसले के बाद राज्य का सियासी तापमान अचानक बढ़ गया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस घटनाक्रम को लेकर सत्ताधारी गठबंधन पर तीखा हमला बोला है। ओवैसी ने इसे शासन की प्रशासनिक विफलता करार देते हुए कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण प्रदेश के हजारों होनहार युवाओं को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है।

विपक्षी दलों के तीखे तेवर और ओवैसी का प्रशासनिक विफलता पर प्रहार

एआईएमआईएम के मुखिया असदुद्दीन ओवैसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राज्य की कानून-व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि भाजपा के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार अन्य गैर-जरूरी मुद्दों पर कार्रवाई करने में तो अत्यधिक सक्रियता दिखाती है, परंतु युवाओं के भविष्य से जुड़ी टीईटी जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा के पेपर लीक को रोकने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस सामूहिक विफलता और हजारों परीक्षार्थियों की परेशानी के लिए आखिर किसे जवाबदेह ठहराया जाएगा। दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य अंबादास दानवे ने भी सरकार को घेरते हुए कहा कि महाराष्ट्र पहले भी राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में हुई अनियमितताओं का मुख्य केंद्र रहा था, जिसके बावजूद मौजूदा प्रशासन ने कोई सबक नहीं सीखा और टीईटी जैसी अपेक्षाकृत छोटी परीक्षा को भी निष्पक्ष व सुरक्षित तरीके से कराने में असफल रहा।

भिवंडी पुलिस की त्वरित कार्रवाई और परीक्षा स्थगन का आधिकारिक निर्णय

विधिक विवरण के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य परीक्षा परिषद ने 28 जून 2026 को निर्धारित की गई शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) 2026 को पूरी तरह स्थगित कर दिया है। यह नीतिगत निर्णय तब लिया गया जब भिवंडी पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में की गई छापेमारी के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों के पास मिले लीक सवाल हूबहू मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र से मेल खाते पाए गए। पुलिस ने इस संबंध में मामला दर्ज कर गहन जांच आरंभ कर दी है। राज्य परीक्षा परिषद के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे महाराष्ट्र में इस परीक्षा के सफल संचालन के लिए 1,028 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे और हालिया नीट परीक्षा के विवादों को देखते हुए सुरक्षा के कड़े प्रबंध भी किए गए थे, लेकिन शुचिता बनाए रखने के लिए परीक्षा को टालना ही एकमात्र विकल्प था।

पारदर्शिता की प्राथमिकता और आगामी विधिक प्रक्रिया का रोडमैप

प्रशासनिक विंग का कहना है कि राज्य में शिक्षक पात्रता परीक्षा को बिना किसी त्रुटि, पूरी पारदर्शिता और पूर्ण निष्पक्षता के साथ आयोजित करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या पेपर लीक की लेशमात्र आशंका को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता था, इसलिए जनहित और छात्रहित में परीक्षा को फिलहाल निलंबित रखा गया है। पुलिस प्रशासन और खुफिया विंग इस रैकेट की जड़ों तक पहुंचने के लिए कड़ियों को जोड़ रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता कहां से भंग हुई थी। परीक्षा परिषद ने परीक्षार्थियों को आश्वस्त किया है कि स्थिति की समीक्षा और सुरक्षा मानकों को अभेद्य बनाने के बाद नई समय सारणी (एग्जाम शेड्यूल) की घोषणा शीघ्र ही आधिकारिक पोर्टल पर कर दी जाएगी।

IND vs IRE: आयरलैंड ने पहली बार भारत को T20 में हराया, बना ऐतिहासिक रिकॉर्ड

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भारतीय क्रिकेट टीम के नवनियुक्त कार्यवाहक कप्तान श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में नए युग की शुरुआत वैसी नहीं रही जैसी उम्मीद की जा रही थी। दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय श्रृंखला के पहले बेहद रोमांचक मुकाबले में मेजबान आयरलैंड ने पासा पलटते हुए विश्व विजेता भारत को 34 रनों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त देकर क्रिकेट जगत को स्तब्ध कर दिया। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में यह पहला मौका है जब आयरिश टीम ने किसी भी प्रारूप (Format) में टीम इंडिया के खिलाफ जीत का स्वाद चखा है। इस ऐतिहासिक और सनसनीखेज जीत के साथ ही मेजबान टीम ने इस संक्षिप्त श्रृंखला में 1-0 की अजेय बढ़त बना ली है। मैच में टॉस जीतकर पहले फील्डिंग करने का भारतीय टीम का फैसला शुरुआत में सही साबित होता दिख रहा था, लेकिन आयरलैंड के मध्यक्रम ने शानदार वापसी करते हुए 20 ओवरों में 9 विकेट खोकर 182 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया, जिसके जवाब में भारतीय बल्लेबाजी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई और पूरी टीम 18.5 ओवरों में महज 148 रनों पर सिमट गई।

शुरुआती झटकों के बाद टकर और डेलानी का पलटवार, हर्षित राणा की गेंदबाजी रही शानदार

पहले बल्लेबाजी के लिए आमंत्रित किए जाने के बाद आयरलैंड की शुरुआत बेहद आक्रामक रही, लेकिन भारतीय तेज गेंदबाजों ने जल्द ही मैच का रुख अपनी तरफ मोड़ लिया। युवा सनसनी हर्षित राणा और अनुभवी अर्शदीप सिंह ने अपनी धारदार गेंदबाजी के दम पर मेजबान टीम के शीर्ष क्रम को ध्वस्त करते हुए केवल 32 रनों के कुल योग पर 3 बड़े विकेट चटकाकर आयरलैंड को पूरी तरह बैकफुट पर धकेल दिया था।

इसके बाद क्रीज पर उतरे आयरिश कप्तान लॉर्कन टकर और खतरनाक बल्लेबाज गैरेथ डेलानी ने मोर्चा संभाला। दोनों बल्लेबाजों ने भारतीय स्पिनर्स और तेज गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए एक बड़ी और सूझबूझ भरी साझेदारी की। कप्तान टकर ने मोर्चे से अगुवाई करते हुए 36 गेंदों में 5 चौकों और 2 गगनचुंबी छक्कों की मदद से 50 रनों की बेहतरीन अर्धशतकीय पारी खेली। वहीं, दूसरे छोर पर डेलानी ने 31 गेंदों में 49 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली, हालांकि वे अपने अर्धशतक से महज एक रन से चूक गए। पारी के अंतिम क्षणों में जॉर्ज डॉकरेल ने सिर्फ 10 गेंदों में 19 रनों का विस्फोटक योगदान देकर टीम के स्कोर को 182 तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। भारत की तरफ से हर्षित राणा सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए, जिन्होंने अपने 4 ओवर के कोटे में 24 रन देकर 3 विकेट झटके, जबकि अर्शदीप सिंह और अक्षर पटेल के खाते में 2-2 विकेट आए।

अभिषेक शर्मा का रिकॉर्डतोड़ अर्धशतक बेकार, शिवम दुबे ने रचा इतिहास

जीत के लिए 183 रनों के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम ने तेज शुरुआत तो की, लेकिन उनके विकेट ताश के पत्तों की तरह गिरते रहे। इन-फॉर्म बल्लेबाज संजू सैमसन, ईशान किशन और खुद कप्तान श्रेयस अय्यर सस्ते में पवेलियन लौट गए, जिससे टीम गहरे संकट में आ गई। संकट की इस घड़ी में सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा ने अकेले दम पर संघर्ष जारी रखा और विरोधी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाते हुए महज 19 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। उन्होंने 20 गेंदों में 50 रनों की अपनी तूफानी पारी के दौरान एक बड़ा कीर्तिमान भी अपने नाम कर लिया। वे अब आयरलैंड के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय में तीसरा सबसे तेज अर्धशतक जड़ने वाले दुनिया के बल्लेबाज बन गए हैं। इस सूची में उनसे आगे सिर्फ स्टीफन मायबर्ग (17 गेंद) और लिटन दास (18 गेंद) हैं, जबकि फिल सॉल्ट ने भी यह मुकाम 20 गेंदों में हासिल किया था।

अभिषेक शर्मा के आउट होते ही भारतीय मध्यक्रम पूरी तरह ताश के पत्तों की तरह ढह गया। तिलक वर्मा, शिवम दुबे और निचला क्रम कोई भी बड़ी या उपयोगी साझेदारी करने में नाकाम रहा, जिसके चलते पूरी टीम 148 रनों पर ऑलआउट हो गई। हालांकि, इस निराशाजनक हार के बीच ऑलराउंडर शिवम दुबे ने एक बड़ा व्यक्तिगत मील का पत्थर हासिल किया। वह गेंदों का सामना करने के लिहाज से भारत के लिए सबसे तेज 1000 टी20 अंतरराष्ट्रीय रन बनाने वाले तीसरे सबसे तेज भारतीय बल्लेबाज बन गए हैं। उन्होंने यह उपलब्धि केवल 648 गेंदों में हासिल की। इस एलीट लिस्ट में अभिषेक शर्मा (528 गेंद) पहले और स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव (573 गेंद) दूसरे स्थान पर काबिज हैं। आयरलैंड की ओर से मैट हॉलार्ड ने बेहतरीन स्पेल डालते हुए 3 विकेट झटके, जबकि अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेल रहे भारतीय मूल के जय मूंद्रा ने 2 विकेट लेकर भारत की कमर तोड़ दी।

अय्यर की कप्तानी की खराब शुरुआत, वैभव सूर्यवंशी को अभी भी मौके का इंतजार

श्रेयस अय्यर के लिए भारत के नियमित टी20 कप्तान के रूप में यह सफर बेहद निराशाजनक रहा। वे न केवल कप्तानी के मोर्चे पर रणनीतिक रूप से विफल दिखे, बल्कि बल्ले से भी टीम को संकट से उबारने में नाकाम रहे। दूसरी ओर, मैच से पहले सुर्खियों में रहे 15 वर्षीय युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी के अंतरराष्ट्रीय पदार्पण (डेब्यू) का इंतजार इस मुकाबले में भी खत्म नहीं हो सका, क्योंकि टीम प्रबंधन ने उन्हें अंतिम ग्यारह (Playing-11) में शामिल न करके बेंच पर ही बैठाए रखने का फैसला किया, जिसकी खेल समीक्षकों द्वारा काफी आलोचना भी की जा रही है। अब देखना होगा कि अगले करो या मरो वाले मैच में टीम इंडिया किस रणनीति के साथ वापसी करती है।

राम मंदिर विवाद पर प्रियांक खरगे का सवाल, PM मोदी से ‘मन की बात’ को लेकर की टिप्पणी

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बेंगलुरु। अयोध्या के भव्य राम मंदिर निर्माण और उससे जुड़े वित्तीय प्रबंधन में कथित अनियमितताओं व चंदा चोरी के आरोपों को लेकर देश का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। इस विषय पर विपक्षी दल लगातार केंद्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को कठघरे में खड़ा कर रहे हैं। इसी क्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पुत्र और कर्नाटक सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रियांक खरगे ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के शीर्ष नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। शनिवार (27 जून 2026) को संवाददाताओं से मुखातिब होते हुए प्रियांक खरगे ने 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन की एकजुटता का हवाला देते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली पर निशाना साधा।

प्रधानमंत्री के 'मन की बात' और मुख्यमंत्री योगी के बयानों पर खरगे का पलटवार

कांग्रेस नेता प्रियांक खरगे ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सवाल किया कि जब राम मंदिर का भव्य उद्घाटन और प्राण प्रतिष्ठा का मुख्य अनुष्ठान स्वयं प्रधानमंत्री ने किया था, तो इस कथित घोटाले के सामने आने के बाद अब वे इस संवेदनशील मुद्दे पर 'मन की बात' कब करेंगे और उनकी आवाज अब तक मौन क्यों है। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयानों पर पलटवार करते हुए खरगे ने कहा कि मुख्यमंत्री कहते हैं कि राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, परंतु असल में यह खिलवाड़ किसके संरक्षण में हुआ। उन्होंने साफ लहजे में पूछा कि क्या इस वित्तीय गबन में कांग्रेस या समाजवादी पार्टी का कोई नेता शामिल है, सच तो यह है कि सत्ताधारी दल से जुड़े लोग ही इस पूरे मामले में संलिप्त पाए जा रहे हैं।

धार्मिक आस्था के संरक्षण में विफलता और सियासत का आरोप

भाजपा को चौतरफा घेरते हुए कर्नाटक के मंत्री ने कहा कि सत्तासीन दल देश के करोड़ों नागरिकों की अगाध आस्था और उनकी गाढ़ी कमाई के दान की रक्षा करने में पूरी तरह विफल साबित हुआ है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे पिछले दो सप्ताह से लगातार इस विषय को उठा रहे हैं कि कुछ तत्वों ने मर्यादा पुरुषोत्तम के नाम पर केवल लूट-खसोट मचाने का काम किया है। खरगे ने आरोप लगाया कि जो लोग सदैव धर्म और आस्था की आड़ में अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते आए हैं, उनसे देश और समाज के हित में किसी भी पारदर्शी या नैतिक कार्य की उम्मीद करना बेमानी है।

ट्रस्टियों का सामूहिक इस्तीफा और अब तक हुई विधिक गिरफ्तारियां

इस बीच, राम मंदिर से जुड़े इस कथित चंदा चोरी मामले की गूंज पूरे देश के सामाजिक और राजनीतिक हलकों में बेहद जोरों से सुनाई दे रही है। विवाद के गहराते ही चौतरफा दबाव के बीच प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर भी त्वरित कार्रवाइयां अमल में लाई जा रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए इस मामले में अब तक 8 मुख्य संदिग्धों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा जा चुका है। इसके अतिरिक्त, इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ महासचिव चंपत राय और प्रमुख ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने भी अपने-अपने पदों से आधिकारिक रूप से त्यागपत्र दे दिया है।

सिंहस्थ 2028 को भव्य बनाने की तैयारी, CM मोहन यादव ने बताईं नई सुविधाएं

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उज्जैन:धार्मिक नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महापर्व को ऐतिहासिक और भव्य बनाने के लिए प्रदेश सरकार ने अभी से अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार, 27 जून को उज्जैन में आयोजित ‘सिंहस्थ 2016 का अनुभव, सिंहस्थ 2028 का संकल्प’ नामक एक बेहद महत्वपूर्ण कार्यशाला का विधिवत शुभारंभ किया। इस विशेष मंथन कार्यक्रम में देश और प्रदेश के उन वरिष्ठ अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था, जिन्हें पिछले कुंभ मेलों के आयोजन का व्यापक प्रशासनिक अनुभव है। कार्यशाला के दौरान अधिकारियों ने कुंभ प्रबंधन को लेकर अपने पुराने अनुभव और महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए, वहीं मुख्यमंत्री ने भी आयोजन को लेकर सरकार के विजन को सामने रखा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस बार श्रद्धालुओं को विश्वस्तरीय सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी और इसके लिए पड़ोसी राज्यों के साथ भी बेहतर तालमेल बिठाया जाएगा।

उज्जैन का गौरवशाली इतिहास और बदलता दौर

कार्यशाला को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महाकाल की इस पावन नगरी से जुड़ना हर किसी के लिए सौभाग्य की बात है, जिसके इतिहास के साक्षी बनने की कामना स्वयं देवता भी करते हैं। उन्होंने देश में बदलते सांस्कृतिक और धार्मिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में अब वह दौर बीत चुका है जब लोग केवल बड़े त्योहारों का इंतजार करते थे। अब देश में साल के बारह महीने आनंद और उत्सव का माहौल रहता है, जिससे धार्मिक पर्यटन के प्रति लोगों का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। उज्जैन समेत देश के कई प्रमुख धार्मिक स्थल आज पूरी दुनिया के श्रद्धालुओं को अपनी ओर खींच रहे हैं। सरकार की मंशा भी ऐसे बुनियादी और स्थाई विकास कार्य करने की है, जिसके दूरगामी परिणाम सामने आएं।

मुख्यमंत्री ने सुनाया स्काउट गाइड के दिनों का रोचक संस्मरण

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम के दौरान अपने छात्र जीवन और युवा दिनों के कुंभ से जुड़े बेहद दिलचस्प संस्मरण भी सुनाए। उन्होंने बताया कि अस्सी के दशक में जब उज्जैन में कुंभ का आयोजन हुआ था, तब वह एक स्काउट गाइड सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इसके बाद साल 1992 के कुंभ मेले के दौरान उन्हें सिंहस्थ समिति में शामिल होने का अवसर मिला। उस दौर का एक मजेदार वाकया साझा करते हुए उन्होंने बताया कि एक बार जब वह समिति के काम से दफ्तर जा रहे थे, तो एक बुजुर्ग कार्यालय सहायक ने उन्हें दरवाजे पर ही रोक दिया और भीतर जाने से मना कर दिया। जब उन्होंने अपना नाम मोहन यादव बताया तो सहायक ने कहा कि वह मोहन यादव को जानते हैं और उनके बच्चे तुम्हारे जितने बड़े होंगे। बाद में जब असलियत सामने आई तो सब मुस्कुरा उठे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस किस्से को साझा करने का मकसद यह है कि पहले स्थानीय लोगों को इस आयोजन से गहराई से जोड़ा जाता था, और अब भी सरकार केवल उज्जैन ही नहीं बल्कि पूरे देश के अनुभवी लोगों को इस महाअभियान से जोड़कर उनके अनुभवों का लाभ उठाएगी।

आवास और क्षिप्रा नदी की चुनौतियों से निपटने का मास्टरप्लान

वक्त के साथ बदलते दौर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने माना कि पहले के मुकाबले अब चुनौतियां काफी बदल चुकी हैं। पुराने समय में उज्जैन में बमुश्किल एक-दो नामी होटल होते थे, लेकिन आज इतनी बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को ठहराना प्रशासन के लिए एक बड़ी परीक्षा है। इस दबाव को कम करने के लिए शहर के हर मुख्य मार्ग को चौड़ा किया जा रहा है ताकि यातायात सुचारू रहे। इसके साथ ही, सबसे बड़ी चुनौती पवित्र क्षिप्रा नदी की धारा और उसके पक्के घाटों को लेकर थी, क्योंकि मिट्टी के कटाव के कारण नदी का बहाव बदल जाता था, लेकिन अब घाटों को पूरी तरह पक्का कर इस समस्या का स्थाई समाधान निकाल लिया गया है। इस बार धर्मशालाओं के आवंटन में पारदर्शिता बरती जाएगी और रेलवे स्टेशन पर चल रहे आधुनिक बदलावों का भी सिंहस्थ में आने वाले यात्रियों को सीधा लाभ मिलेगा।

क्षिप्रा नदी पर बनेंगे 22 नए पुल, अधोसंरचना विकास पर बनी शॉर्ट फिल्म

आगामी सिंहस्थ 2028 के पैमाने को समझाते हुए मुख्यमंत्री ने एक बड़ी जानकारी साझा की कि इस बार के महापर्व में करीब 40 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने का अनुमान है। आठ से दस लाख की आबादी वाले इस शहर के लिए यह एक बहुत बड़ा आयोजन होगा, जिसमें मुख्य पर्वों और शाही स्नान के दिनों में ही लगभग 4 करोड़ श्रद्धालु एक साथ अमृत स्नान करेंगे। इस भारी भीड़ के सुगम आवागमन के लिए क्षिप्रा नदी पर 22 नए पुलों का निर्माण किया जाएगा। कार्यशाला के दौरान उज्जैन में चल रहे और भविष्य में होने वाले तमाम विकास कार्यों (इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट) पर आधारित एक विशेष लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि सभी के सहयोग और सटीक रणनीति से साल 2028 का सिंहस्थ अब तक का सबसे भव्य और अलौकिक आयोजन साबित होगा।

भारत की प्लेइंग-11 पर सबकी नजर, क्या वैभव सूर्यवंशी को मिलेगा बड़ा मौका?

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धीमी और उछाल भरी अनपेक्षित पिच, डेथ ओवरों की गेंदबाजी में रणनीतिक चूक और आखिरी के दो ओवरों में अत्यधिक रन लुटाना— यही वो मुख्य वजहें रहीं जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट में भारतीय टीम का लगातार 12 सीरीज या टूर्नामेंट जीतने का ऐतिहासिक विजय रथ थम गया है। हालांकि, इस झटके के बावजूद मेन इन ब्लू के पास लगातार 16 द्विपक्षीय टी20 सीरीज या टूर्नामेंट में अजेय (न हारने) रहने के अपने एक और विशाल कीर्तिमान को सुरक्षित रखने का अंतिम मौका बचा हुआ है। भारत और आयरलैंड के बीच रविवार को इस लघु सीरीज का दूसरा और निर्णायक मुकाबला खेला जाएगा। भारतीय टीम फिलहाल सीरीज में 0-1 से पिछड़ रही है, ऐसे में उसकी पूरी कोशिश पलटवार करते हुए सीरीज को 1-1 की बराबरी पर समाप्त करने की होगी।

मुख्य कोच गंभीर के कार्यकाल पर दबाव, हार के तुरंत बाद आयोजित हुआ नेट सेशन

भारतीय टीम के नवनियुक्त मुख्य कोच गौतम गंभीर के लिए यह मुकाबला निजी तौर पर भी बेहद महत्वपूर्ण है। हाल ही में उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम को अपनी सरजमीं पर पहली बार टेस्ट सीरीज में क्लीन स्वीप जैसी करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था, जिसने घरेलू मैदानों पर पिछले 12 वर्षों से चले आ रहे भारत के दबदबे को तोड़ दिया था। गंभीर अपने कोचिंग करियर की शुरुआत में ही सीमित ओवरों के क्रिकेट में आयरलैंड जैसी छोटी टीम के खिलाफ सीरीज हारने का एक और बड़ा दाग अपने दामन पर नहीं देखना चाहेंगे। यही कारण है कि दोनों मुकाबलों के बीच महज 24 घंटे से थोड़ा अधिक का फासला होने के बावजूद, गंभीर ने खिलाड़ियों को आराम देने के बजाय मैदान पर एक कड़ा वैकल्पिक नेट सत्र (प्रैक्टिस सेशन) आयोजित करने का फैसला किया, जहां खिलाड़ियों ने अपनी कमियों को दूर करने के लिए घंटों पसीना बहाया।

इतिहास रचने की दहलीज पर आयरलैंड, घरेलू परिस्थितियों का मिला जबरदस्त फायदा

दूसरी ओर, भारत जैसी दो बार की विश्व चैंपियन टीम के खिलाफ अपने क्रिकेट इतिहास की पहली अंतरराष्ट्रीय जीत का जश्न मना रही मेजबान आयरिश टीम के हौसले सातवें आसमान पर हैं। आयरलैंड की टीम अब इस सुनहरे मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती और उसका सपना भारत को सीरीज में हराकर इतिहास रचना है। यदि आयरिश टीम रविवार को यह मुकाबला जीतने में सफल रहती है, तो साल 2022 की शुरुआत में वेस्टइंडीज को उनके घर में वनडे सीरीज में 2-1 से मात देने के बाद द्विपक्षीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में यह उनकी अब तक की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक सीरीज जीत मानी जाएगी।

दिलचस्प आंकड़ा यह भी है कि दो साल पहले वेस्टइंडीज को धूल चटाने वाली आयरिश टीम के केवल चार अनुभवी खिलाड़ी ही शुक्रवार को भारत के खिलाफ मैदान पर उतरे थे, जिससे साफ है कि उनकी युवा ब्रिगेड भी बेहद खतरनाक है। घरेलू पिचों और मौसम की बेहतर समझ आयरलैंड के लिए पहले मैच में टर्निंग प्वाइंट साबित हुई थी। वहीं, टी20 की मौजूदा विश्व चैंपियन भारतीय टीम अपनी साख बचाने के इरादे से मैदान पर उतरेगी और यह साबित करना चाहेगी कि पहले मैच की हार महज एक खराब दिन का नतीजा थी।

गेंदबाजी रणनीति में आमूलचूल बदलाव की जरूरत, वाशिंगटन सुंदर पर लटकी तलवार

भारतीय टीम मैनेजमेंट अगले मुकाबले में अपने गेंदबाजी आक्रमण में बड़े और कड़े सुधार के इरादे से रणनीति तैयार कर रहा है। हालांकि, पिछले मैच में भारतीय गेंदबाजों ने शुरुआत बेहद आक्रामक की थी और महज 30 रनों के कुल योग पर आयरलैंड के तीन शीर्ष बल्लेबाजों को पवेलियन भेज दिया था, लेकिन मध्यक्रम के ओवरों में वे इस दबाव को बरकरार रखने में नाकाम रहे। चूंकि दूसरे मैच में भी बेलफास्ट की पिच का मिजाज समान रहने की उम्मीद है, इसलिए गेंदबाजों को अपनी लाइन-लेंथ में कड़ा अनुशासन दिखाना होगा।

आयरलैंड की टीम में बाएं हाथ के बल्लेबाजों (Left-Handers) की कमी को देखते हुए और भारत के शीर्ष 5 बल्लेबाजों में कोई जगह खाली न होने के कारण ऑलराउंडर वाशिंगटन सुंदर का प्लेइंग इलेवन में चयन पहले से ही एक बड़ा जोखिम माना जा रहा था। हालांकि उन्होंने घरेलू क्रिकेट में गुजरात टाइटंस के लिए नंबर चार पर बल्लेबाजी करते हुए शानदार रन बनाए हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वे इस लय को नहीं भुना पाए। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आक्रामक बल्लेबाज सूर्यांश शेडगे को मध्यक्रम को मजबूती देने के लिए वाशिंगटन सुंदर की जगह अंतिम एकादश में शामिल किया जा सकता है।

कप्तान श्रेयस अय्यर के फैसलों की तीखी आलोचना, कप्तानी की अग्निपरीक्षा

पहले मैच में मिली अप्रत्याशित हार के बाद कार्यवाहक कप्तान श्रेयस अय्यर के ऑन-फील्ड फैसलों, टीम चयन और गेंदबाजों के रोटेशन की रणनीति पर खेल विशेषज्ञों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मैच के सबसे नाजुक मोड़ यानी 16वें ओवर में, जब क्रीज पर दो सेट दाएं हाथ के बल्लेबाज मौजूद थे और तेज गेंदबाजों का ओवर बचा हुआ था, तब अय्यर ने पहली बार गेंद ऑफ स्पिनर वाशिंगटन सुंदर को सौंप दी। यह कप्तान का एक आत्मघाती फैसला साबित हुआ और इसी ओवर में आयरिश बल्लेबाजों ने लंबे शॉट्स खेलकर मैच का रुख पूरी तरह अपनी ओर मोड़ लिया। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि रविवार को होने वाले नॉकआउट जैसे इस मुकाबले में कप्तान अय्यर अपनी पुरानी रणनीतिक गलतियों से सीखकर किस तरह की कप्तानी करते हैं।

15 वर्षीय सनसनी वैभव सूर्यवंशी के डेब्यू की मांग तेज

भारतीय टीम ने पहले मुकाबले की प्लेइंग इलेवन में 15 साल के युवा बल्लेबाजी सनसनी वैभव सूर्यवंशी को शामिल न करके सबको हैरान किया था। इतने प्रतिभाशाली खिलाड़ी को बेंच पर बैठाने को लेकर सोशल मीडिया और क्रिकेट जगत में टीम मैनेजमेंट की काफी आलोचना भी हुई थी। अब जब भारतीय टीम को पहले मैच में हार का सामना करना पड़ा है, तो एक बार फिर वैभव सूर्यवंशी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू का मौका देने की मांग ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, क्रिकेट पंडितों का मानना है कि इस बात की संभावना बेहद कम है कि रविवार के करो या मरो वाले मुकाबले में वैभव को डेब्यू का चांस मिले, क्योंकि भारतीय टीम प्रबंधन आमतौर पर एक हार के बाद अपने स्थापित शीर्ष क्रम (Top Order) में तुरंत बदलाव करने से बचता है। इसका सीधा मतलब यह है कि युवा वैभव को अंतरराष्ट्रीय कैप पहनने के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है।

इस महामुकाबले के लिए दोनों टीमों की संभावित प्लेइंग-11 इस प्रकार है:

भारतीय टीम: संजू सैमसन (विकेटकीपर), अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, सूर्यांश शेडगे/वाशिंगटन सुंदर, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा और प्रिंस यादव।

आयरलैंड की टीम: टिम टेक्टर, रॉय एडायर, हैरी टेक्टर, लोर्कन टकर (कप्तान और विकेटकीपर), बेन कैलिट्ज, गारेथ डेलानी, जॉर्ज डॉकरेल, मैथ्यू हम्फ्रे, मैट होलार्ड, लियाम मैकार्थी और जय मूंदड़ा।

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