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भारत-अमेरिका ऊर्जा सहयोग को मिलेगी रफ्तार? मार्को रुबियो ने दिए अहम संकेत

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वाशिंगटन। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि वाशिंगटन भारत की तेजी से बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति में एक बड़ी और सहयोगी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत की ओर से अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने (डाइवर्सिफिकेशन) की दूरदर्शी रणनीति का पुरजोर समर्थन करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच इस क्षेत्र में बढ़ता समन्वय दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा को एक नया संबल प्रदान करेगा। व्हाइट हाउस में दिए गए एक विशेष साक्षात्कार के दौरान विदेश मंत्री रुबियो ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी के गहरे होते आयामों के बीच, अमेरिका भारतीय बाजारों की घरेलू मांगों को पूरा करने के लिए अत्यंत सुदृढ़ स्थिति में है।

वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता और वेनेजुएला से कच्चे तेल की आपूर्ति

अमेरिकी विदेश मंत्री ने भारत की आयात निर्भरता को सुरक्षित करने के लिए अलग-अलग देशों से आपूर्ति शृंखला बनाए रखने की वकालत की। उन्होंने इस पूरे परिदृश्य को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उन कूटनीतिक कोशिशों से जोड़ा, जिसके तहत पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भू-राजनीतिक तनाव को कम कर वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि सहयोगी राष्ट्रों के लिए बाजार में ईंधन की उपलब्धता बढ़ सके। इसी क्रम में रुबियो ने भारत के लिए कच्चे तेल के एक अन्य बड़े विकल्प के रूप में वेनेजुएला की ओर संकेत किया और बताया कि अमेरिका वहां तेल उत्पादन की क्षमता को पुनर्जीवित करने के लिए बेहद करीब से काम कर रहा है।

भारी कच्चे तेल की रिफाइनिंग क्षमता और साझा रणनीतिक हित

भारत की तकनीकी विशेषज्ञता की सराहना करते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि भारतीय रिफाइनरियों के पास वेनेजुएला के 'हेवी क्रूड' (भारी कच्चे तेल) को प्रोसेस करने की एक विशेष और विश्वस्तरीय क्षमता है, जो दुनिया के बहुत कम देशों के पास उपलब्ध है। इस लिहाज से अमेरिका वेनेजुएला से भारत को होने वाली तेल आपूर्ति के विधिक व तकनीकी रास्तों को और सुगम बनाने की दिशा में काम करेगा। उन्होंने आगे कहा कि ऊर्जा के अतिरिक्त दोनों देशों के बीच अर्थव्यवस्था, मजबूत आपूर्ति शृंखला (सप्लाई चेन), महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स), रक्षा सुरक्षा और समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता जैसे कई ऐसे महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं, जहां दुनिया के सबसे बड़े और सबसे पुराने लोकतंत्र के साझा रणनीतिक हित आपस में गहराई से जुड़े हुए हैं।

प्रवासी भारतीयों का विशेष योगदान और द्विपक्षीय साझेदारी के मजबूत स्तंभ

इस रणनीतिक जुड़ाव को मानवीय दृष्टिकोण से जोड़ते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने वहां रह रहे मजबूत और प्रभावशाली भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान को भी विशेष रूप से सराहा, जो दोनों देशों के बीच एक जीवंत कूटनीतिक सेतु का कार्य कर रहा है। वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत दुनिया का सबसे तेजी से विकसित होता ऊर्जा उपभोक्ता बनकर उभरा है, जिसने अपनी विशाल घरेलू औद्योगिक मांगों को पूरा करने के लिए कच्चे तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) के आयात तंत्र को आधुनिक बनाया है। ऐसे में तेल और गैस के व्यापार के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा तकनीक (क्लीन एनर्जी टेक्नोलॉजी) और असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में हो रहा यह द्विपक्षीय सहयोग आने वाले समय में भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी का सबसे मजबूत स्तंभ साबित होगा।

असम सरकार का बड़ा फैसला, छोटे चाय उत्पादकों को किसान आईडी से मिलेगी नई पहचान

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गुवाहाटी। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने राज्य के कृषि परिदृश्य में एक बड़े और क्रांतिकारी सुधार की घोषणा की है। सरकार के नए निर्णय के अनुसार, अब असम के सभी छोटे चाय उत्पादक भी आधिकारिक 'किसान पंजीकरण पोर्टल' पर अपना ऑनलाइन पंजीकरण करा सकेंगे। इस डिजिटल व्यवस्था के लागू होने से चाय उत्पादक अब एक ही एकीकृत मंच (सिंगल प्लेटफॉर्म) के माध्यम से राज्य और केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी और कृषि केंद्रित योजनाओं का सीधा लाभ उठा सकेंगे। इस नीतिगत बदलाव के तहत पंजीकृत उत्पादकों को एक विशिष्ट 'किसान आईडी' (यूनिक फार्मर आइडेंटिटी कार्ड) आवंटित की जाएगी, जिसकी सहायता से उन्हें रियायती दरों पर उर्वरक (खाद), संस्थागत ऋण (आसान कृषि लोन) और अन्य आधुनिक कृषि सेवाएं सुलभ हो सकेंगी। हालांकि, चाय क्षेत्र प्रशासनिक रूप से पूर्व की भांति उद्योग विभाग के नियंत्रण में ही कार्य करेगा, परंतु इस ऐतिहासिक कदम से छोटे चाय उत्पादकों को कृषि विभाग की सभी सब्सिडी और अनुदानों का दोहरा लाभ मिलना सुनिश्चित हो गया है।

मुख्यमंत्री का बयान और बिचौलियों के शोषण से मुक्ति का रोडमैप

इस युगांतरकारी पहल की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोशल मीडिया के माध्यम से बताया कि असम के लाखों छोटे चाय उत्पादकों के लिए यह एक स्वर्णिम और ऐतिहासिक अवसर है। सरकार ने पहली बार चाय और बागान श्रेणी की कृषि भूमि जोत को औपचारिक रूप से किसान पंजीकरण पोर्टल के दायरे में शामिल किया है। मुख्यमंत्री ने इस व्यवस्था को पूरी तरह परिवर्तनकारी बताते हुए रेखांकित किया कि नई किसान पहचान प्रणाली के माध्यम से उत्पादकों को उनकी जोत के आकार के अनुरूप समय पर और आवश्यकता आधारित उर्वरकों की आपूर्ति की जाएगी। इसके अतिरिक्त, यह पारदर्शी डिजिटल इकोसिस्टम बैंकिंग प्रक्रियाओं को सुगम बनाकर संस्थागत ऋण तक पहुंच बढ़ाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और हरी पत्तियां बेचने वाले इन सीधे-सादे उत्पादकों के शोषण में बिचौलियों व दलालों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो जाएगी।

असम चाय की वैश्विक पहचान और छोटे उत्पादकों का बढ़ता योगदान

राज्य के कृषि मंत्री पीयूष हजारिका ने इस निर्णय का पुरजोर स्वागत करते हुए कहा कि इस नीतिगत फैसले से उन छोटे चाय उत्पादकों को एक बहुत बड़ा और जरूरी संबल मिलेगा, जो वर्तमान में असम के कुल वार्षिक चाय उत्पादन में लगभग 50% (आधा) का विशाल योगदान दे रहे हैं। कृषि मंत्री ने अपनी पोस्ट में इस बात पर विशेष बल दिया कि कई पीढ़ियों से असम के इन छोटे चाय उत्पादक किसानों ने अपनी हाड़-तोड़ मेहनत, अद्वितीय कौशल और अटूट समर्पण के बल पर ही 'असम चाय' (Assam Tea) के ब्रांड और उसकी वैश्विक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया है। ऐसे में यह डिजिटल एकीकरण उनके अधिकारों और आर्थिक उत्थान की दिशा में सरकार का एक कृतज्ञ प्रयास है।

डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र और भारतीय चाय बोर्ड के आधिकारिक आंकड़े

कृषि मंत्री हजारिका ने आगे स्पष्ट किया कि विभाग का आगामी मुख्य लक्ष्य राज्य के अंतिम छोर पर स्थित प्रत्येक पात्र छोटे चाय उत्पादक को इस नए डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र (डिजिटल इकोसिस्टम) के साथ सहजता और त्रुटिहीन तरीके से जोड़ना है, ताकि वे बिना किसी प्रशासनिक बाधा के सरकारी वित्तीय सहायता का पूर्ण दोहन कर सकें। इस क्षेत्र की विशालता का अंदाजा भारतीय चाय बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों से लगाया जा सकता है, जिसके अनुसार 31 मार्च 2025 तक असम राज्य में कुल 1,33,864 छोटे चाय उत्पादक सक्रिय रूप से पंजीकृत थे, जो सामूहिक रूप से लगभग 1,26,107.64 हेक्टेयर की विस्तृत भूमि पर चाय की गुणवत्तापूर्ण खेती कर रहे हैं।

तालाब में डूबने से चचेरे भाइयों की मौत, एक ही परिवार के दो चिराग बुझने से मातम

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बूंदी:जिले के नैनवां क्षेत्र में शनिवार को एक बेहद हृदयविदारक हादसा सामने आया, जहां एक फार्म पॉन्ड (खेत तालाब) में नहाने उतरे दो चचेरे भाइयों की डूबने से मौत हो गई। दोनों किशोर अपने परिवार के साथ एक रिश्तेदार के घर आयोजित सामाजिक कार्यक्रम (रसोई) में शामिल होने आए थे। इस दुखद घटना के बाद जिस घर में कुछ देर पहले तक खुशियां और हंसी-मजाक का माहौल था, वहां पलभर में चीख-पुकार मच गई। हादसे की खबर मिलते ही प्रभावित दोनों गांवों में गहरा शोक व्याप्त हो गया है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

नहाते समय गहरे पानी में जाने से हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, करवर थाना इलाके के फटूकड़ा गांव के रहने वाले 16 वर्षीय अंकित और 18 वर्षीय किरोड़ी अपने माता-पिता व परिजनों के साथ बीजलबा गांव में एक पारिवारिक आयोजन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। शनिवार सुबह के समय दोनों भाई अपने एक अन्य रिश्तेदार के बेटे के साथ गांव में ही बने एक फार्म पॉन्ड पर नहाने के लिए चले गए। नहाने के दौरान दोनों किशोरों को पानी की गहराई का अंदाजा नहीं रहा और वे गहरे पानी की तरफ बढ़ गए। तैरना न आने के कारण दोनों पानी में डूबने लगे और खुद को बचाने के लिए संघर्ष करने लगे। किनारे पर मौजूद तीसरे किशोर ने जब उन्हें डूबते देखा, तो वह घबरा गया और तुरंत दौड़कर गांव पहुंचा और परिजनों को पूरी बात बताई।

अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें

घटना की भनक लगते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण और बदहवास परिजन मौके की तरफ दौड़े। स्थानीय लोगों ने बिना वक्त गंवाए पानी में छलांग लगाई और काफी मशक्कत के बाद दोनों भाइयों को अचेत अवस्था में बाहर निकाला। आनन-फानन में 108 एम्बुलेंस की मदद से दोनों को नैनवां उप जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। अस्पताल में तैनात चिकित्सकों ने स्वास्थ्य जांच के बाद दोनों को मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही नैनवां थाना पुलिस की टीम अस्पताल और मौका-ए-वारदात पर पहुंची। पुलिस ने कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर शवों को मोर्चरी में रखवा दिया है। वहीं, तहसीलदार रामराय मीणा ने भी अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और घटना की जानकारी ली।

सुरक्षा के इंतजाम होते तो टल सकता था हादसा

इस असमय हादसे ने एक ही झटके में फटूकड़ा और बीजलबा गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है। अस्पताल परिसर में मौजूद परिजनों की चीखें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। इस हादसे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में इस बात का मलाल है कि क्षेत्र में बने इन फार्म पॉन्ड्स के आसपास सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। लोगों का कहना है कि अगर इन गहरे तालाबों के चारों तरफ तारबंदी, बैरिकेडिंग या गहरे पानी की चेतावनी देने वाले बोर्ड लगाए गए होते, तो शायद इन बच्चों की जान बच सकती थी। फिलहाल पुलिस ने मर्ग दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

उज्जैन महाकाल में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत, दो प्रवेश द्वारों से होंगे दर्शन

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उज्जैन:श्रावण मास के दौरान विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकालेश्वर के दर्शन के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए इस बार उज्जैन प्रशासन ने बेहद खास और भव्य तैयारियां की हैं। हर साल उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए इस बार महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर में भक्तों को प्रवेश देने के लिए दो अलग-अलग रास्तों की व्यवस्था की गई है। इसके तहत श्रद्धालुओं को एक एंट्री पहले की तरह 'श्री महाकाल महालोक' से मिलेगी, जबकि दूसरा नया मुख्य गेट 'हरसिद्धि चौराहा' से तैयार किया गया है। प्रशासन की इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि पूरी भीड़ एक ही जगह पर इकट्ठा नहीं होगी और भक्तों की आवाजाही बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से चलती रहेगी।

वीकेंड पर 7 लाख श्रद्धालुओं का अनुमान, 40 मिनट में मिलेंगे दर्शन

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस पवित्र महीने के दौरान सामान्य दिनों में प्रतिदिन 3 से 4 लाख और शनिवार-रविवार (वीकेंड) के दिनों में यह संख्या 5 से 7 लाख श्रद्धालुओं तक पहुंच सकती है। इसी भारी आमद को ध्यान में रखते हुए रास्तों को पहले से ही पूरी तरह व्यवस्थित और चौड़ा कर दिया गया है। मंदिर प्रशासन का दावा है कि इन नए बदलावों के बाद अब श्रद्धालुओं को कतार में लगने के बाद महज 40 मिनट के भीतर बाबा महाकाल के दर्शन मिल सकेंगे, जो कि पहले के सालों में काफी ज्यादा समय लेता था। इससे न केवल सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद होगी, बल्कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को भी बिना किसी परेशानी के दर्शन करने में आसानी होगी।

विक्रम टीले के पास बनीं अत्याधुनिक सुविधाएं, श्रद्धालुओं का बंटेगा दबाव

श्रावण और भाद्रपद मास के दौरान भीड़ नियंत्रण को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए पूरे रूट पर भक्तों की सहूलियत के लिए कई इंतजाम किए गए हैं। विक्रम टीले के आसपास के क्षेत्र में लड्डू प्रसाद काउंटर, शीघ्र दर्शन (वीआईपी) टिकट काउंटर, पूछताछ केंद्र और खोया-पाया केंद्र जैसी महत्वपूर्ण सुविधाएं स्थापित की गई हैं। हरसिद्धि चौराहा से एंट्री शुरू होने के कारण भक्तों का फ्लो दोनों तरफ बराबर बंटा रहेगा। प्रशासन का पूरा फोकस इस बात पर है कि किसी भी एक गेट या मार्ग पर अचानक दबाव न बने। इस बार का मैनेजमेंट मॉडल इस तरह तैयार किया गया है कि श्रद्धा और सुरक्षा का बेहतरीन तालमेल देखने को मिले।

3 अगस्त से शुरू होंगी सवारियां, भस्म आरती के समय में भी हुआ बड़ा बदलाव

श्रावण मास में महाकालेश्वर मंदिर की सबसे प्रमुख और भव्य पहचान भगवान महाकाल की शाही सवारी होती है। इस बार 3 अगस्त से शुरू होकर 7 सितंबर तक कुल 6 सवारियां निकाली जाएंगी, जिनमें से अंतिम सवारी अपने पूरे राजसी वैभव और स्वरूप में निकलेगी। हर सोमवार को निकलने वाली इस सवारी को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों लोग उज्जैन की सड़कों पर उमड़ते हैं। इसके साथ ही, श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए भस्म आरती के समय में भी बड़ा बदलाव किया गया है। श्रावण के दौरान हर रविवार को रात ढाई (2:30) बजे ही मंदिर के पट खोल दिए जाएंगे, जबकि सप्ताह के बाकी दिनों में तड़के तीन (3:00) बजे पट खुलेंगे। आम दिनों में यह समय सुबह 4 बजे का होता है, लेकिन समय से पहले पट खुलने से ज्यादा से ज्यादा भक्तों को भस्म आरती और दर्शन का लाभ मिल सकेगा।

जगन्नाथपुर जलाशय बचाने की कवायद तेज, SECL को भेजा गया आपत्ति पत्र

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सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के अंतर्गत आने वाले प्रतापपुर विकासखंड में स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथपुर जलाशय के अस्तित्व पर अब कोयला उत्खनन (माइनिंग) के कारण गंभीर संकट मंडराने लगा है। जलाशय को बचाने और इसके संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए अब सरकारी महकमा भी आगे आया है। जल संसाधन विभाग ने इस विषय की संवेदनशीलता को देखते हुए साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के महाप्रबंधक (जीएम) को एक आधिकारिक और कड़ा पत्र प्रेषित किया है। विभाग ने सार्वजनिक हित को ध्यान में रखते हुए इस सिंचाई परियोजना की सुरक्षा और मजबूती की गारंटी देने की मांग कोल कंपनी से की है।

डूबान क्षेत्र की भूमि आवंटन पर सरकारी विभाग ने उठाए सवाल, बांध टूटने की आशंका

जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) की ओर से जारी किए गए इस पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि एसईसीएल की 'महान-3 कोयला खदान' के आगामी विस्तार कार्य के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा जलाशय क्षेत्र की लगभग चार हेक्टेयर से अधिक की महत्वपूर्ण भूमि कोल कंपनी को आवंटित कर दी गई है।

विभागीय अधिकारियों ने तकनीकी आकलन के आधार पर यह गंभीर आशंका जताई है कि यदि इस जलाशय के डूबान (कैचमेंट) क्षेत्र या उसके अत्यंत समीप हैवी ब्लास्टिंग और गहरे उत्खनन का कार्य किया जाता है, तो इससे बांध के मूल ढांचे (स्ट्रक्चर) को अपूरणीय क्षति पहुंच सकती है। मिट्टी खिसकने या दरारें आने से पूरा जलाशय जमींदोज हो सकता है, जिससे एक बड़ा पर्यावरणीय और ढांचागत संकट खड़ा हो जाएगा।

सैकड़ों किसानों की आजीविका दांव पर, लंबे समय से जारी है जन आंदोलन

गौरतलब है कि जगन्नाथपुर जलाशय प्रतापपुर और आसपास के ग्रामीण अंचलों की कृषि व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इस जलाशय के पानी से क्षेत्र के सैकड़ों आदिवासी और स्थानीय किसानों की हजारों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई होती है। ऐसे में यदि जलाशय के पानी के स्रोत या उसकी क्षमता को कोई भी नुकसान पहुंचता है, तो इसका सीधा और घातक असर क्षेत्र के किसानों की आजीविका और रबी व खरीफ की फसलों पर पड़ेगा।

यही वजह है कि इस जलाशय को बचाने के लिए स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों की नाराजगी लंबे समय से सुलग रही है। क्षेत्र के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता राकेश मित्तल के नेतृत्व में स्थानीय लोग जल सत्याग्रह, धरना-प्रदर्शन और क्रमिक भूख हड़ताल जैसे कई कड़े चरणों में अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। आंदोलनकारियों का साफ कहना है कि किसी भी औद्योगिक मुनाफे या कोयला उत्खनन की कीमत पर क्षेत्र के प्राकृतिक जल स्रोतों, जंगलों और पर्यावरण का विनाश कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा।

प्रतापपुर क्षेत्र में नई खदानों के खिलाफ भी बढ़ा जन आक्रोश

इलाके में केवल जगन्नाथपुर जलाशय ही नहीं, बल्कि एसईसीएल की कुछ अन्य आगामी माइंस को लेकर भी ग्रामीण लामबंद हो रहे हैं। प्रतापपुर बेल्ट में प्रस्तावित 'खड़गवाकला कोल माइंस परियोजना' और 'झींगापारा कोल माइंस परियोजना' को लेकर भी स्थानीय ग्राम सभाओं और ग्रामीणों द्वारा लगातार उग्र विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रभावित गांवों के निवासियों का तर्क है कि इन नई कोयला खदानों के शुरू होने से क्षेत्र का भूजल स्तर (वॉटर टेबल) काफी नीचे गिर जाएगा, हवा-पानी प्रदूषित होंगे और उपजाऊ खेती पूरी तरह से बंजर भूमि में तब्दील हो जाएगी, जिससे स्थानीय आबादी विस्थापन के कगार पर पहुंच जाएगी।

प्रशासनिक पत्र के बाद गरमाया सियासी और सामाजिक माहौल, पुनर्विचार की मांग

अब जब इस पूरे मामले में जल संसाधन विभाग का यह आंतरिक और आधिकारिक पत्राचार सार्वजनिक हुआ है, तब से जगन्नाथपुर जलाशय की सुरक्षा का यह मुद्दा पूरे जिले में एक बार फिर से गरमा गया है। इस सरकारी आपत्ति के बाद आंदोलनकारियों और प्रभावित किसानों को एक बड़ा नैतिक बल मिला है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने राज्य सरकार और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से यह पुरजोर मांग की है कि आम जनता की भावनाओं और कृषि को प्राथमिकता देते हुए इस खनन परियोजना की समीक्षा की जाए और जलाशय की सुरक्षा के लिए इस आवंटन को तत्काल रद्द या परिवर्तित किया जाए।

सबरीमाला सोना गायब मामले में बड़ा अपडेट, जांच एजेंसियों ने तेज की कार्रवाई

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कोच्चि। केरल के सुप्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर से बहुमूल्य सोना गायब होने के संवेदनशील मामले में कानूनी तफ्तीश अब अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें खोलने में जुटी विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने मुख्य आरोपी उन्नीकृष्णन पोट्टी को तलब कर पुलिस मुख्यालय में आठ घंटे से भी अधिक समय तक सघन पूछताछ की। प्रशासनिक अधिकारियों के संकेत के अनुसार, एसआईटी आगामी सप्ताह के भीतर माननीय अदालत के समक्ष अपनी अंतिम रिपोर्ट (चार्जशीट) प्रस्तुत कर सकती है। इस बड़े घटनाक्रम के समानांतर, केरल उच्च न्यायालय ने एक अन्य महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कोट्टायम स्थित ऐतिहासिक एट्टुमानूर महादेव मंदिर की विश्वप्रसिद्ध 'एझारापोनाना' (साढ़े सात स्वर्ण हाथी) की प्रतिमाओं में प्रयुक्त सोने की शुद्धता, गुणवत्ता और मौलिकता की विस्तृत जांच कराने के कड़े निर्देश दिए हैं।

सबरीमाला स्वर्ण घोटाला और मुख्य सूत्रधार पर कसता शिकंजा

पूरी घटना की कड़ियों को जोड़ें तो यह विवाद मुख्य रूप से वर्ष 2019 से जुड़ा हुआ है, जब सबरीमाला मंदिर के श्रीकोविल (गर्भगृह) की स्वर्णमंडित चौखटों और द्वारपालक प्रतिमाओं की सोने की परतों को दोबारा चमकाने व मरम्मत के लिए चेन्नई की एक निजी फर्म को भेजा गया था। इस पूरी प्रक्रिया के मुख्य प्रायोजक उन्नीकृष्णन पोट्टी थे, जिन पर एसआईटी को पुख्ता संदेह है कि उन्होंने इसी रिनोवेशन (मरम्मत) की आड़ में इन पवित्र कलाकृतियों से भारी मात्रा में असली सोना गायब कर दिया। इसी आपराधिक साजिश के तहत पोट्टी को मुख्य आरोपी बनाते हुए पूर्व में गिरफ्तार भी किया गया था, और करीब तीन महीने से अधिक समय तक सलाखों के पीछे रहने के बाद वर्तमान में वे वैधानिक जमानत पर बाहर हैं, जिन पर अब आरोपपत्र दाखिल होने जा रहा है।

एट्टुमानूर मंदिर के अष्ट-धातु और स्वर्ण हाथियों की जांच का अदालती फरमान

सबरीमाला मामले की तपिश के बीच, केरल हाईकोर्ट ने एट्टुमानूर महादेव मंदिर की उन पौराणिक अमूल्य धरोहरों की जांच का जिम्मा त्रावणकोर देवस्वम बोर्ड के मुख्य सतर्कता एवं सुरक्षा अधिकारी को सौंपा है, जिन्हें 'एझारापोनाना' कहा जाता है। इन धरोहरों में सात बड़े और एक छोटे आकार के स्वर्ण निर्मित हाथी शामिल हैं, जिन्हें अत्यंत पवित्र मानकर केवल वार्षिक उत्सव के दौरान ही आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ बाहर निकाला जाता है। न्यायमूर्ति ने सतर्कता विभाग को निर्देश दिया है कि वे मंदिर के सभी प्राचीन अभिलेखों, स्टॉक रजिस्टरों और इन हाथियों के शरीरों पर मढ़े सोने का भौतिक व तकनीकी मूल्यांकन कर अपनी तथ्यात्मक रिपोर्ट शीघ्र अति शीघ्र अदालत को सौंपें।

श्रद्धालुओं के गंभीर आरोप, प्रशासन की सफाई और भावी कानूनी मोड़

इस नई न्यायिक जांच की शुरुआत मंदिर के ही एक स्थानीय भक्त ए. जी. प्रसाद कुमार द्वारा दर्ज कराई गई उस आधिकारिक शिकायत के बाद हुई है, जिसमें दावा किया गया था कि हाल ही में हुए जीर्णोद्धार कार्य के दौरान इन हाथियों की मूल स्वर्ण परतों को चुपके से हटाकर वहां घटिया तांबे या कम मूल्य की मिश्रित धातुओं का लेप चढ़ा दिया गया है। यद्यपि सहायक देवस्वम आयुक्त और स्थानीय मंदिर प्रबंधन ने अपनी आंतरिक रिपोर्टों में किसी भी प्रकार के भ्रष्टाचार या हेरफेर की बात को सिरे से खारिज कर दिया है, फिर भी हाईकोर्ट ने जनभावनाओं और धार्मिक शुद्धता को सर्वोपरि रखते हुए एक निष्पक्ष व स्वतंत्र जांच का विकल्प चुना है। अब इन दोनों ऐतिहासिक मंदिरों की अंतिम जांच रिपोर्टों पर पूरे राज्य के श्रद्धालुओं और मंदिर प्रशासकों की नजरें टिकी हुई हैं।

IND vs IRE: जिम्बाब्वे के बाद आयरलैंड ने भी किया कमाल, टीम इंडिया के साथ बना खास संयोग

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टी20 विश्व कप 2026 की चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम करने के करीब साढ़े तीन महीने बाद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इस सबसे छोटे और सबसे आक्रामक प्रारूप में दोबारा कदम रखने वाली भारतीय क्रिकेट टीम को अपने पहले ही मुकाबले में बेहद शर्मनाक और करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। मेजबान आयरलैंड ने खेल के हर मोर्चे पर बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए एक बड़ा उलटफेर किया और लगातार दो बार की टी20 विश्व चैंपियन टीम इंडिया को 34 रनों के बड़े अंतर से मात दे दी। बेलफास्ट के मैदान पर मिली इस अप्रत्याशित हार ने जहां दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को हतप्रभ कर दिया है, वहीं भारतीय क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को पलटें तो टीम इंडिया ने बिल्कुल अपना साल 2024 वाला पुराना पैटर्न ही दोहराया है। अब खेल जगत में यह बहस छिड़ गई है कि क्या विश्व चैंपियन बनने के बाद मिलने वाला यह शुरुआती झटका टीम के भविष्य के लिए कोई शुभ संकेत है या फिर गंभीर खतरे की घंटी?

पहले जिम्बाब्वे और अब आयरलैंड ने तोड़ा विश्व विजेताओं का गुरूर

क्रिकेट इतिहास गवाह है कि विश्व विजेता बनने के तुरंत बाद भारतीय टीम जब भी किसी अपेक्षाकृत कमजोर मानी जाने वाली टीम के खिलाफ द्विपक्षीय सीरीज के पहले मैच में उतरती है, तो उसे अति-आत्मविश्वास का खामियाजा भुगतना पड़ता है। ठीक दो साल पहले, यानी साल 2024 में भी रोहित शर्मा के नेतृत्व में टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीतने के बाद जब भारतीय टीम नए कप्तान शुभमन गिल की अगुवाई में जिम्बाब्वे के दौरे पर गई थी, तब भी उसे पहले ही टी20 मैच में 13 रनों से एक बेहद चौंकाने वाली हार का सामना करना पड़ा था। हालांकि, उस समय मैदान पर उतरी टीम में नियमित सीनियर खिलाड़ी शामिल नहीं थे।

ठीक वैसा ही चौंकाने वाला नजारा इस बार भी देखने को मिला है, जहां हाल ही में 9 मार्च को सूर्यकुमार यादव की कप्तानी में दोबारा टी20 विश्व कप का सिकंदर बनने के बाद, इस बार श्रेयस अय्यर के नेतृत्व में मैदान पर उतरी स्टार-स्टडेड टीम इंडिया को आयरलैंड के अनुशासित खेल के आगे घुटने टेकने पड़ गए।

आयरलैंड के खिलाफ 19 साल पुराना अजेय रिकॉर्ड हुआ जमींदोज

यह हार भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों के लिए इसलिए भी ज्यादा चुभने वाली और ऐतिहासिक है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय टी20 क्रिकेट के इतिहास में आयरलैंड के खिलाफ भारत की यह अब तक की पहली शिकस्त है। साल 2007 में इन दोनों टीमों के बीच खेले गए पहले टी20 मुकाबले से लेकर इस मैच से पहले तक, दोनों के बीच कुल 11 आमने-सामने के मैच हुए थे और सभी 11 मैचों में भारत का पलड़ा हमेशा शत-प्रतिशत भारी रहा था। लेकिन अब इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही आयरलैंड अंतरराष्ट्रीय टी20 फॉर्मेट में टीम इंडिया को हराने वाली दुनिया की 11वीं टीम बन गई है, जिसने भारतीय क्रिकेट के अजेय रथ को रोक दिया है।

क्या वाकई यह शुरुआती झटका टीम इंडिया के लिए कोई शुभ संकेत है?

क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि अक्सर बड़ी खिताबी जीतों और लंबे समय के आराम (ब्रेक) के बाद जब टीम इंडिया नए नेतृत्व, नई रणनीतियों और नए समीकरणों के साथ मैदान पर उतरती है, तो उसे लय पकड़ने में थोड़ा समय लगता है और ऐसा शुरुआती झटका लगना स्वाभाविक है। दो साल पहले 2024 में जब भारत पहला मैच जिम्बाब्वे से हारा था, तो उस हार ने भारतीय टीम के लगातार चले आ रहे 12 मैचों के विजय रथ को रोका था। लेकिन उस करारी शिकस्त के बाद टीम इंडिया ने जिस तरह से पलटवार करते हुए जबरदस्त वापसी की थी, उसने यह साबित किया था कि शुरुआती झटका टीम को आत्ममुग्धता से बाहर निकालता है और अपनी कमियों को समय रहते सुधारने का एक बड़ा मौका देता है।

यदि हम साल 2028 में होने वाले अगले टी20 विश्व कप के रोडमैप के नजरिए से देखें, तो इस तरह की हार टीम इंडिया के थिंक-टैंक के लिए एक बड़ा सबक साबित हो सकती है। बड़े आईसीसी टूर्नामेंट्स से काफी पहले मिलने वाली ये शुरुआती चुनौतियां टीम के बैटिंग ऑर्डर, डेथ ओवर बॉलिंग और स्पिन डिपार्टमेंट की कमजोरियों को साफ तौर पर उजागर कर देती हैं। इतिहास गवाह है कि भारतीय टीम ने हमेशा बड़े झटकों से सीख लेकर ही खुद को तराशा है, इसलिए भविष्य के बड़े टूर्नामेंट्स की लंबी तैयारियों के लिहाज से इसे एक कड़ा लेकिन शुभ संकेत माना जा सकता है।

लेकिन इस बार की चुनौती दो साल पहले से कहीं ज्यादा गंभीर और चिंताजनक है

भले ही इतिहास खुद को हूबहू दोहराता हुआ दिख रहा हो, लेकिन दो साल पहले (2024) जिम्बाब्वे में मिली हार और इस बार आयरलैंड के हाथों मिली शिकस्त के बीच कुछ ऐसे बुनियादी और तकनीकी फर्क हैं, जो भारतीय टीम मैनेजमेंट की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं और इस स्थिति को बेहद गंभीर बनाते हैं:-

  • बेहद संक्षिप्त और कम मैचों की सीरीज: साल 2024 में जिम्बाब्वे के खिलाफ भारत को 5 मैचों की एक लंबी द्विपक्षीय सीरीज खेलनी थी, जिसके कारण पहले मैच की हार के बाद भी टीम इंडिया के पास वापसी करने और प्रयोग आजमाने का पूरा मौका था, और भारत ने शानदार वापसी करते हुए वह सीरीज 4-1 से जीती थी। मगर इस बार आयरलैंड के इस दौरे पर केवल 2 ही मैचों की टी20 सीरीज निर्धारित है। पहला मैच गंवाने के बाद अब भारतीय टीम के सामने सीरीज जीतने का मौका तो हाथ से निकल ही चुका है, बल्कि अब अगले मैच में सीरीज को सिर्फ ड्रॉ कराने की एक बेहद कड़ी और सम्मान बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है।

  • सीनियर और स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी: जिम्बाब्वे के खिलाफ मिली उस पुरानी हार के वक्त टीम के लगभग सभी सीनियर और मुख्य खिलाड़ियों को पूरी तरह आराम दिया गया था और मैदान पर एक बिल्कुल युवा और अनुभवहीन बेंच स्ट्रेंथ खेल रही थी। लेकिन इसके विपरीत, इस बार आयरलैंड के खिलाफ खेलने उतरी टीम इंडिया में परमानेंट कप्तान के साथ-साथ ज्यादातर वही धुरंधर और मुख्य खिलाड़ी शामिल हैं जो अभी हाल ही में वर्ल्ड चैंपियन बनी मुख्य टीम का हिस्सा रहे हैं। ऐसे स्टार खिलाड़ियों की मौजूदगी के बावजूद 34 रनों की यह एकतरफा हार भारतीय बल्लेबाजी और गेंदबाजी के मध्यक्रम के खोखलेपन को दर्शाती है, जिसे अगले मैच से पहले ठीक करना अनिवार्य होगा।

Amarnath Yatra Security: LoC पार कर भारत में घुसा पाकिस्तानी नागरिक गिरफ्तार, एजेंसियां सतर्क

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पुंछ। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर मुस्तैद सुरक्षाबलों ने घुसपैठ की एक संदिग्ध कोशिश को नाकाम करते हुए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के एक नागरिक को दबोच लिया है। देश की विभिन्न खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां पकड़े गए व्यक्ति को गुप्त स्थान पर ले जाकर कड़ाई से पूछताछ कर रही हैं, ताकि भारतीय क्षेत्र में दाखिल होने के उसके वास्तविक इरादों और स्थानीय स्तर पर जुड़े संभावित संपर्कों का पर्दाफाश किया जा सके। यह महत्वपूर्ण कामयाबी ऐसे समय में मिली है जब आगामी वार्षिक अमरनाथ यात्रा और श्री माता वैष्णो देवी यात्रा के मद्देनजर पूरे जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा तंत्र को पहले से ही अत्यधिक संवेदनशील और हाई अलर्ट पर रखा गया है। आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पहचान रफीक के पुत्र मोहम्मद सज्जाद के रूप में हुई है, जो पीओके के पोलास इलाके का रहने वाला बताया जा रहा है। सीमा पर नियमित गश्त और आधुनिक तकनीकी निगरानी के दौरान चौकस जवानों ने उसकी संदिग्ध हरकतों को भांप लिया और उसे सरहद पार करते ही घेर लिया। फिलहाल तफ्तीश इस बिंदु पर केंद्रित है कि वह अनजाने में रास्ता भटककर इधर आया है या किसी बड़ी साजिश के तहत भारतीय सीमा में घुसने का प्रयास कर रहा था।

तीर्थयात्राओं को लेकर कटड़ा में उच्चस्तरीय संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक

इस संवेदनशील घटनाक्रम के बीच, केंद्र शासित प्रदेश में शुरू होने जा रही श्री अमरनाथ जी और श्री माता वैष्णो देवी जी की पवित्र यात्राओं को पूरी तरह सुरक्षित और शांतिपूर्ण संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया गया है। इसी सिलसिले में उधमपुर-रियासी रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक शिव कुमार शर्मा की अध्यक्षता में कटड़ा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय संयुक्त सुरक्षा समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस विशेष रणनीतिक बैठक में केंद्र और राज्य की प्रमुख सुरक्षा एजेंसियों जैसे भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), सीआईडी, रेलवे व ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड के शीर्ष नीति निर्धारकों और सैन्य कमांडरों ने शिरकत की।

चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी से नजर और होटलों का सघन भौतिक सत्यापन

सुरक्षा बैठक के दौरान आधार शिविर कटड़ा शहर, संपूर्ण यात्रा मार्ग, पवित्र भवन क्षेत्र और त्रिकुटा पहाड़ियों की वर्तमान सुरक्षा तैयारियों का बेहद बारीकी से आकलन किया गया। पुलिस उपमहानिरीक्षक ने आधुनिक सीसीटीवी निगरानी प्रणालियों की क्रियाशीलता, कमांडो दस्ते की रणनीतिक तैनाती, त्वरित आपातकालीन प्रतिक्रिया (इमरजेंसी रिस्पॉन्स) व्यवस्था और विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच आपसी समन्वय को और अधिक पुख्ता करने पर विशेष बल दिया। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन और पुलिस को कटड़ा तथा आसपास के सभी होटलों, लॉज, गेस्ट हाउस, होमस्टे और अन्य व्यावसायिक ठहरने के स्थानों का नियमित रूप से औचक निरीक्षण और वहां रुकने वाले लोगों का कड़ा भौतिक सत्यापन करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं ताकि कोई भी संदिग्ध तत्व अपनी पहचान छिपाकर वहां पनाह न ले सके।

सुरक्षित वातावरण और खुफिया सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान पर जोर

वर्ष 2026 की इस पावन तीर्थयात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जहां एक ओर प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए श्रद्धालुओं को निशुल्क कपड़े के थैले वितरित करने का निर्णय लिया गया है, वहीं दूसरी ओर सुरक्षा के मोर्चे पर भी कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जा रही है। वरिष्ठ सैन्य और पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यात्रा अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की राष्ट्रविरोधी या आतंकी चुनौती से निपटने के लिए सभी ग्राउंड इनपुट और खुफिया जानकारियों का रीयल-टाइम (त्वरित) आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जा रहा है। शासन का मुख्य ध्येय देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को भयमुक्त और पूर्णतः सुरक्षित आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करना है, जिसके लिए सीमाओं से लेकर मुख्य मार्गों तक रणनीतिक घेराबंदी बढ़ा दी गई है।

कार हादसे ने खोली तस्करी की पोल, गाड़ी से मिली शराब की खेप

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गोपालगंज:बिहार के गोपालगंज जिले में भोरे-कटेया मुख्य मार्ग पर शनिवार के तड़के सुबह एक बेहद अजीबोगरीब सड़क हादसा सामने आया है। यहाँ उत्तर प्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली एक बेहद तेज़ रफ़्तार कार अचानक अनियंत्रित हो गई और भोरे थाना इलाके में हीरो एजेंसी के समीप सड़क किनारे एक बड़े पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी ज़ोरदार और भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। हालांकि, इस पूरे वाकये में सबसे गनीमत की बात यह रही कि दुर्घटना में किसी भी व्यक्ति के हताहत होने या गंभीर रूप से घायल होने की कोई खबर नहीं मिली है।

कार के भीतर दिखा 'मधुशाला' का नज़ारा, ग्रामीणों में मची लूटने की होड़

स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक, सुबह-सुबह जब लोग अपने घरों से बाहर निकले तो उन्होंने सड़क किनारे क्षतिग्रस्त हालत में इस लग्जरी कार को देखा। जब कुछ लोग मदद के इरादे से गाड़ी के करीब पहुंचे, तो कार के अंदर का नजारा देखकर दंग रह गए। कार के भीतर भारी मात्रा में विदेशी शराब की बोतलें ठंस-ठंस कर भरी हुई थीं। जैसे ही यह बात गांव में फैली, मौके पर देखते ही देखते लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्थानीय पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले ही वहां अफरा-तफरी मच गई और कई लोग कार के शीशे तोड़कर शराब की बोतलें निकाल-निकाल कर अपने घरों की तरफ भागने लगे।

पुलिस ने क्षतिग्रस्त गाड़ी को किया ज़ब्त, यूपी से जुड़े तस्करों के नेटवर्क की जांच शुरू

हादसे और उसके बाद मची लूटपाट की भनक लगते ही भोरे थाना पुलिस तुरंत दलबल के साथ मौके पर पहुंच गई। हालांकि, पुलिस की भनक लगते ही कार सवार कथित तस्कर और शराब लूट रहे अधिकांश लोग वहां से नौ दो ग्यारह हो चुके थे। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए दुर्घटनाग्रस्त कार को अपने कब्जे में लेकर थाने पहुंचा दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर के जरिए उसके असली मालिक का पता लगाया जा रहा है। साथ ही पुलिस इस बात की भी गहनता से तफ्तीश कर रही है कि शराब की यह बड़ी खेप उत्तर प्रदेश के किस इलाके से लाई जा रही थी और बिहार के भीतर इसे किस सिंडिकेट तक पहुंचाया जाना था।

जग्गी वासुदेव फिर बने चर्चा का केंद्र, स्वागत के बीच नेताओं के तीखे बयान

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पटना:बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की नेता रोहिणी आचार्या ने सोशल मीडिया के जरिए सूबे की एनडीए सरकार, मुख्यमंत्री और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव पर बेहद तीखा हमला बोला है। रोहिणी आचार्या ने राजधानी पटना में बने एशिया के सबसे बड़े श्मशान घाट के प्रबंधन को लेकर सरकार को आड़े हाथों लिया और आरोप लगाया कि सरकार अब मोक्ष धामों का भी 'आध्यात्मिक आउटसोर्सिंग' यानी निजीकरण करने में जुट गई है।

'आइए ना हमरा बिहार में'— महंगे अंतिम संस्कार को लेकर कसा तंज

रोहिणी आचार्या ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर सरकार की नीतियों को घेरते हुए लिखा कि "आइए ना हमरा बिहार में! करवाइए महंगा अंतिम संस्कार जग्गी के प्यार में!" उन्होंने आरोप लगाया कि महज 1 रुपये के टोकन अमाउंट पर देश के सबसे घनी आबादी वाले राज्य बिहार में करोड़ों की सरकारी ज़मीन उद्योगपतियों और चहेतों में बांटी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस तरह की नीतियों का आधार बिहार का विकास करना है या फिर परदे के पीछे अधिकारियों और मंत्रियों को मिलने वाले उपहार हैं। रोहिणी ने इस पूरी व्यवस्था को 'जमीन बंदरबांट योजना' करार दिया।

क्या मोक्ष धाम भी अब सरकार के नियंत्रण से बाहर हैं?

पटना के श्मशान घाट के आधुनिक प्रबंधन को बाहरी हाथों में सौंपने पर आपत्ति जताते हुए आरजेडी नेता ने कहा कि अब बिहार के श्मशान घाट भी निजी हाथों में जाने के दौर से गुजर रहे हैं। ऐसा लगता है कि मौजूदा सरकार को अपने खुद के विभागों और व्यवस्थाओं से ज्यादा भरोसा बाहरी बाबाओं और कॉर्पोरेट तंत्र पर है। उन्होंने जनता की तरफ से सवाल पूछते हुए कहा कि क्या सरकार द्वारा दी जाने वाली बुनियादी जन-सुविधाएं अब सिर्फ निजी हाथों में ट्रांसफर करने के लिए ही बची हैं और क्या अब अंतिम संस्कार के स्थल भी इस राजनीति का हिस्सा बन चुके हैं।

'जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो' के नए मॉडल पर उठाए सवाल

रोहिणी आचार्या ने सरकार की इस कार्यशैली को कटघरे में खड़ा करते हुए तंज कसा कि सरकार को आधिकारिक तौर पर अपना नया मंत्र घोषित कर देना चाहिए, जो है— 'जिम्मेदारी कम करो, हस्तांतरण ज़्यादा करो'। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को हलफनामे के माध्यम से जनता को बताना चाहिए कि यह शासन का कौन सा नया मॉडल है, जिसमें श्मशान घाट का प्रबंधन भी ब्रांडेड बाबाओं के भरोसे छोड़ दिया गया है। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार अपनी मूल जिम्मेदारियों का अंतिम संस्कार करके धीरे-धीरे सब कुछ दूसरों के हवाले सौंप रही है।

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