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ट्रंप का बड़ा बयान: ‘2-3 हफ्तों में ईरान को तबाह कर देंगे, होर्मुज पर कब्जा करने वालों को तेल मिलेगा’

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Donald trump Statement: इजरायल-ईरान और अमेरिका के बीच शुरू जंग को 34 दिन बीच चुके हैं. इस दौरान ट्रंप ने कई बार युद्ध खत्म करने की बात कही. लेकिन फिर किसी बात का हवाला देते हुए टाल दिया. आज गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने देश में राष्ट्र के नाम संबोधन किया है. जिसमें लोगों को उम्मीद थी कि ट्रंप इस दौरान सीजफायर की घोषणा कर सकते हैं. लेकिन उन्होंने इस दौरान कहा कि अगले 2-3 हफ्तों में ईरान पर ज़ोरदार हमला करेंगे. ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को रोक रखा था. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप ने कहा कि हम हम होर्मुज स्ट्रेट में जाएंगे और इसकी सुरक्षा भी करेंगे. फिलहाल, मिडिल ईस्ट में तनाव की स्थिति बनी हुई है.

ट्रम्प ने कहा, “मेरी पहली प्राथमिकता हमेशा कूटनीति का रास्ता ही रहा है, फिर भी उस शासन ने परमाणु हथियारों की अपनी लगातार खोज जारी रखी और किसी भी समझौते के हर प्रयास को ठुकरा दिया. इसी कारण से, जून में मैंने ‘ऑपरेशन मिडनाइट हैमर’ के तहत ईरान की प्रमुख परमाणु सुविधाओं पर हमला करने का आदेश दिया. इसके बाद भी परमाणु हथियारों की अपनी खोज को छोड़ने का कोई इरादा नहीं बनाया. उन्होंने कहा कि ईरान के पास कुछ ऐसे हथियार थे जिनके बारे में किसी को यकीन ही नहीं था कि वे उनके पास हैं. हमें अभी-अभी इस बारे में पता चला और हमने उन्हें खत्म कर दिया.

कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा

राष्ट्र को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा, “मैं जानकारी देना चाहता हूं कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ अमेरिका की सुरक्षा और आजाद दुनिया की हिफाजत के लिए क्यों जरूरी है. जिस पहले दिन, 2015 में मैंने राष्ट्रपति पद के लिए अपने चुनाव अभियान की घोषणा की थी, उसी दिन मैंने यह कसम खाई थी कि मैं ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दूंगा. यह शासन पिछले 47 सालों से ‘अमेरिका का नाश हो, इजरायल का नाश हो’ के नारे लगाता आ रहा है. ईरान ने अमेरिका और इजरायल के साथ अनगिनत जघन्य अपराध किए.”

ट्रंप ने सैनिकों को दिया धन्यवाद

ट्रम्प ने कहा, “मौजूदा हालात पर चर्चा के दौरान सबसे पहले मैं अपने सैनिकों को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने वेनेज़ुएला देश को कुछ ही मिनटों में अपने कब्जे में लेने का शानदार काम किया. वह हमला तेज, जानलेवा, ज़ोरदार था और पूरी दुनिया में हर किसी ने उसकी तारीफ की. अब हमारे पास दुनिया में कहीं भी सबसे मज़बूत सेना है. हम भारी मात्रा में तेल और गैस के उत्पादन और बिक्री में बहुत अच्छा तालमेल बिठा रहे हैं.”

साउथ अफ्रीका के स्टार बल्लेबाज ने क्रिकेट को कहा अलविदा

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दक्षिण अफ्रीका के अनुभवी बल्लेबाज रसी वान डर डुसेन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने का एलान कर दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब एक दिन पहले यानी बुधवार को ही क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका (CSA) ने उन्हें अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया था। इसके बाद गुरुवार को डुसेन ने सोशल मीडिया पर एक लंबा भावुक पोस्ट साझा कर अपने करियर और सफर को याद किया।

'गर्व और कृतज्ञता के साथ संन्यास ले रहा हूं'

डुसेन ने अपने पोस्ट में लिखा, 'मैं गर्व और गहरी कृतज्ञता के साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा करता हूं। प्रोटियाज जर्सी पहनना एक ऐसी उपलब्धि है, जो आपको परखती भी है और आपको शानदार तरीके से पुरस्कृत भी करती है। अपने देश के लिए खेलना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है।'

परिवार और सफर को किया याद

उन्होंने अपने शुरुआती जीवन को याद करते हुए लिखा, 'चार भाइयों एड्रियन, निको, सीई और मैं, इनके बीच बड़े होते हुए प्रोटियाज बैज हमारे लिए हमेशा सबसे खास रहा। हम इस खेल को जीते थे और इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जाना मेरे लिए गर्व की बात थी। मैं अपने माहौल, साथियों के प्यार और महान बनने की चाह का नतीजा हूं।'

टीम, बोर्ड और साथियों का जताया आभार

डुसेन ने अपने पोस्ट में क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका, कोच, मैनेजमेंट और टीम के साथियों को धन्यवाद दिया। उन्होंने लिखा, 'क्रिकेट दक्षिण अफ्रीका और सभी कोचों-मैनेजर्स का धन्यवाद, जिन्होंने मुझे प्रोटियाज जर्सी पहनने का मौका दिया।' साथ ही डुसेन ने अपने एजेंट और दोस्त का जिक्र करते हुए कहा, 'आपकी वफादारी और समझदारी मेरे पूरे करियर में मेरी दिशा बनी रही।'

पत्नी और फैंस के लिए खास संदेश

डुसेन ने अपनी पत्नी के लिए लिखा, 'आप हर कदम पर मेरे साथ रहीं… मुश्किल और शानदार दोनों पलों में आपने मेरा साथ दिया।' फैंस को धन्यवाद देते हुए उन्होंने कहा, 'सड़कों और मैदानों पर रसी-रसी की आवाज सुनना और भरे स्टेडियम में खेलना एक अलग ही एहसास था, जो हमेशा मेरे साथ रहेगा।'

युवा खिलाड़ियों को दी सलाह

डुसेन ने अगली पीढ़ी को प्रेरित करते हुए लिखा, 'बड़े सपने देखो और उन्हें पाने के लिए सब कुछ दे दो। मैं खुद को कभी दूसरों से ज्यादा खास नहीं मानता, लेकिन मैंने अपने सपनों को जिया। आप भी जी सकते हैं।'

अंतरराष्ट्रीय करियर खत्म, लेकिन क्रिकेट जारी

उन्होंने साफ किया कि वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से दूर जा रहे हैं, लेकिन घरेलू क्रिकेट खेलते रहेंगे और युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देंगे। डुसेन ने लिखा, 'प्रोटियाज के साथ मेरा सफर खत्म हुआ है, लेकिन क्रिकेट के साथ नहीं। मैं लायंस के लिए घरेलू क्रिकेट खेलता रहूंगा और अगली पीढ़ी को सिखाने का काम करूंगा। इसके लिए मैं प्रतिबद्ध हूं।'

रसी वान डर डुसेन का करियर

प्रारूप        मैच    पारियां    रन    औसत    शतक    अर्धशतक
टेस्ट           18      32      905    30.16       0               6
वनडे          71    65    2657    50.13        6              17
T20I          57    53    1406    33.47         0             10
फर्स्ट क्लास 138    234    8546   41.08   17             47
लिस्ट-ए     169    160    6333   46.56    14             38
T20       254    242    7295     36.84        5              45

एक मजबूत करियर का अंत

डुसेन का करियर खासकर वनडे क्रिकेट में शानदार रहा, जहां उन्होंने 50 से ज्यादा की औसत से रन बनाए। वह लंबे समय तक दक्षिण अफ्रीका की बल्लेबाजी की रीढ़ रहे।

पनीर खाने से हो सकती है परेशानी, इन लोगों को रहना चाहिए सावधान

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Side Effect Of Eating Paneer: पनीर भारतीय खाने में एक बेहद लोकप्रिय और पौष्टिक विकल्प है। शादी-ब्याह, त्योहार और घर के अन्य आयोजनों में पनीर के पकवानों की महक और स्वाद हर किसी को लुभाता है। यह प्रोटीन, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो हड्डियों और मांसपेशियों के लिए लाभकारी हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर किसी के लिए पनीर का सेवन सुरक्षित नहीं होता?कुछ लोगों के लिए यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह भी हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, अधिक वसा वाला पनीर हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल और पेट की समस्याओं को बढ़ा सकता है। इसके अलावा, पनीर से एलर्जी वाले लोगों को गंभीर प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है। इस लेख में हम जानेंगे कि पनीर खाने से किन लोगों को सच में सावधान रहना चाहिए और किस प्रकार का पनीर या सेवन सुरक्षित रहता है।
 
1. कौन सुरक्षित रूप से खा सकता है?

पनीर एक प्रोटीन और कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थ है, इसलिए सामान्य स्वास्थ्य वाले लोगों के लिए इसे खाना बेहद लाभकारी माना जाता है। हड्डियों की मजबूती और मांसपेशियों के विकास के लिए पनीर उपयोगी है। 

  • बच्चों के लिए ये विकास और शारीरिक मजबूती में मदद करता है। 
  • गर्भवती महिलाएं भी पनीर का सेवन सुरक्षित रूप से कर सकती हैं, क्योंकि यह प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन्स का अच्छा स्रोत है। 

खाते समय ध्यान रखें कि सही मात्रा में पनीर खाने से शरीर को ऊर्जा मिलती है, हड्डियों और दांतों की सेहत बेहतर रहती है और मांसपेशियों के निर्माण में मदद मिलती है।

2. कौन पनीर को न खाए?

वैसे तो पनीर खाना लाभदायक है, लेकिन कुछ लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए।

  • जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल स्तर अधिक है, उन्हें पनीर का अधिक सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। 
  • पेट में गैस, एसिडिटी या पाचन संबंधी समस्याएं रखने वाले लोगों को भारी और तैलीय पनीर खाने से बचना चाहिए।
  • डेयरी उत्पादों से एलर्जी वाले व्यक्ति के लिए पनीर गंभीर प्रतिक्रिया का कारण बन सकता है।

ध्यान रखें कि जिन लोगों को ऊपर बताई दिक्कतें हैं, उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि ये पेट में जलन और असहजता पैदा कर सकता है।  अगर पनीर खाने के बाद कोई दिक्कत हो रही है तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।

तो कैसे करें सेवन? 

  • सबसे पहले कम वसा वाला पनीर चुनना फायदेमंद रहता है, क्योंकि ये हृदय और कोलेस्ट्रॉल के लिए बेहतर विकल्प है। 
  • पनीर की मात्रा नियंत्रित रखें, आमतौर पर रोजाना 50–100 ग्राम पर्याप्त होता है।
  • मसालेदार और तैलीय पनीर पकवानों का सेवन कम करना चाहिए, ताकि पेट की समस्या या एसिडिटी से बचा जा सके। 
  • संतुलित मात्रा और सही प्रकार का पनीर खाने से इसका स्वास्थ्य पर लाभकारी प्रभाव बना रहता है।
  • बस रात में पनीर खाने से बचें क्योंकि यह एसिडिटी और अपच कर सकता है। 

ऑटिज्म के शुरुआती लक्षण, जिन्हें नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

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World Autism Awareness Day 2026: हर साल 2 अप्रैल को विश्व ऑटिज्म जागरूकता दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य ऑटिज्म के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को इसके बारे में सही जानकारी देना है। आज भी कई माता-पिता इस बीमारी के शुरुआती संकेतों को समझ नहीं पाते और इसे सामान्य व्यवहार मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे सही समय पर इलाज और सपोर्ट नहीं मिल पाता। हालांकि, अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो बच्चे के विकास में काफी सुधार संभव है।इसी के चलते इस लेख में हम आपको ऑटिज्म क्या है, इसके प्रमुख लक्षण क्या हैं, कब सतर्क होना चाहिए और इससे जुड़ी जरूरी जानकारी विस्तार से बताएंगे, ताकि आप सही समय पर सही कदम उठा सकें।

सबसे पहले जान लें कि ऑटिज्म क्या है?

Autism Spectrum Disorder एक ऐसी न्यूरोलॉजिकल स्थिति है, जो बच्चों के दिमाग के विकास को प्रभावित करती है। इसके कारण बच्चे के व्यवहार, बोलने की क्षमता और दूसरों के साथ जुड़ने के तरीके में अंतर देखने को मिलता है। हर बच्चे में इसके लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं, इसलिए इसे “स्पेक्ट्रम” कहा जाता है। 

ऑटिज्म के लक्षण क्या हैं?

ये एक जटिल न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति है, जिसमें हर बच्चे के लक्षण अलग-अलग हो सकते हैं। नीचे दिए गए संकेतों को थोड़ा विस्तार से समझना जरूरी है ताकि समय रहते पहचान हो सके।

 1. सामाजिक व्यवहार में बदलाव 

  • ऑटिज्म से प्रभावित बच्चे सामाजिक रूप से जुड़ने में कठिनाई महसूस करते हैं।
  •  वे अक्सर आंखों में आंखें डालकर बात नहीं करते, जिससे लगता है कि वे सामने वाले को नजरअंदाज कर रहे हैं।
  •  माता-पिता या परिवार के सदस्यों के साथ भी भावनात्मक जुड़ाव कम दिख सकता है।
  •  दूसरे बच्चों के साथ खेलना या दोस्त बनाना मुश्किल होता है।
  •  कई बार वे अपने नाम पर भी प्रतिक्रिया नहीं देते, जिससे सुनने की समस्या का भ्रम हो सकता है।

2.  कम्युनिकेशन प्रॉब्लम 

भाषा और संवाद से जुड़ी दिक्कतें ऑटिज्म का मुख्य संकेत हैं।

  •  बच्चा देर से बोलना शुरू करता है या बिल्कुल नहीं बोलता।
  • कुछ बच्चे शब्द बोलते हैं, लेकिन उनका सही इस्तेमाल नहीं कर पाते।
  • इकोलालिया” (एक ही शब्द/वाक्य को बार-बार दोहराना) आम है।
  • इशारों, जैसे हाथ हिलाना, इशारा करना या सिर हिलाना—इनका भी सही उपयोग नहीं कर पाते।

3. व्यवहारिक संकेत

ऑटिज्म में दोहराव वाले व्यवहार आम होते हैं।

  • बच्चा एक ही गतिविधि को बार-बार करता है, जैसे खिलौनों को एक लाइन में लगाना।
  • अचानक रूटीन बदलने पर गुस्सा या बेचैनी दिखाता है।
  • हाथ हिलाना, गोल-गोल घूमना या शरीर को झुलाना जैसे व्यवहार दिख सकते हैं।
  • किसी खास चीज़ या विषय में अत्यधिक रुचि भी देखी जाती है।

कब देना चाहिए ध्यान?

अगर बच्चा 2–3 साल की उम्र तक:

  • बोलना शुरू नहीं करता
  • नाम पुकारने पर प्रतिक्रिया नहीं देता
  • इशारों या चेहरे के भाव से संवाद नहीं करता
  • दूसरों के साथ खेलना पसंद नहीं करता

 क्या करें?

  • स्पीच थेरेपी, ऑक्यूपेशनल थेरेपी और बिहेवियर थेरेपी काफी मददगार होती हैं।
  • बच्चे की जरूरत के अनुसार सीखने का तरीका अपनाएं।
  • धैर्य, समझ और नियमित सपोर्ट बेहद जरूरी है।

हमेशा याद रखें कि ऑटिज्म कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक अलग तरह का विकास है। सही समय पर पहचान, सही थेरेपी और परिवार का सहयोग बच्चे को बेहतर जीवन जीने में मदद कर सकता है। जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है।

पति को जहर देकर किया हमला, बेहोश होने पर मुंह में कपड़ा ठूंसा और कैंची से हमला, पत्नी गिरफ्तार

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MP News: मध्‍य प्रदेश के मंदसौर शामगढ़ थाने के ग्राम बिश्निया में एक ऐसा हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है. मामला चारित्र शंका को लेकर हुए एक विवाद का है, जहां पत्नी ने पति को खाने में जहर मिलकार जान से मारने की कोशिश की है. खाना खाने के बाद पति की हालत बिगड़ गई और वह बेहोश होकर गिर गया, पति काे नीचे गिरा हुआ देखकर भी पत्नी का गुस्‍सा शांत नहीं हुआ और उसने बेहोश पति पर कैंची से हमला कर दिया.

पति की हालत नाजुक

परिजनों और आस-पास रहने वाले लोगों ने सूचना मिलने के बाद पति को गंभीर हालात में अस्‍पताल पहुंचाया. हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने उसे कोटा रेफर कर दिया. मामले में शामगढ़ पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए 24 घंटे में आरोपी पत्नी को उसके मायके पगारिया से गिरफ्तार कर लिया है. बुधवार के दिन उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया.

मामले में शामगढ़ पुलिस ने बताया कि सूरतसिंह पुत्र तोफानसिंह सौंधिया राजपुत निवासी बिश्निया की शादी तीन साल पहले झालावाड़ जिले के गांव पगारिया की निवासी मनीषा से से हुई थी.

साथ लेकर आई थी जहरीला पदार्थ

जानकारी के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद से ही पति-पत्नी के बीच घरेलू विवाद होने लगे थे. एक साल से मनीषा अपने मायके में रह रही थी. वह पति सूरत के साथ नहीं रहना चाहती थी. उसका कहना था कि सूरत उसके चरित्र पर शंका करता था. इसको लेकर ही दोनों के बीच विवाद होता रहता था. मनीषा अभी भी अपने मायके में ही रह रही थी.

30 मार्च को सूरतसिंह और उसके पिता तौफानसिंह पगारिया जाकर मनीषा को अपने घर लेकर आ गए. इस दौरान मनीषा ने अपने घर से धतूरे के बीज और कुछ जहरीलें पदार्थ साथ रख लिए थे. मनीषा अपने पति सूरत के साथ नहीं रहना चा‍हती थी, इसलिए उसने मंगलवार रात को सूरत के खाने में जहरीला पदार्थ मिलाया और पति को खिला दिया, जिसके बाद वह बेहाेश हो गया.

घायल होने पर कोटा किया रेफर

बेहोश सूरत सिंह के मुंह में रुमाल ठूंसा गया, फिर उसके दोनों हाथ पीछे बांधे और कैंची से जानलेवा हमला कर दिया. बेहोश सूरत के सीने, पीठ, पेट, कंधे और गाल पर गंभीर चोट देखने को मिली. इस दौरान सूरत की चीख पुकार सुनकर परिजन और आस-पास के लोग इकठ्ठा हो गए और उसे तुरंत उपचार के लिए अस्‍पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्‍टरों ने उसे कोटा रेफर कर दिया.

सावधान! ये संकेत हो सकते हैं ब्रेस्ट कैंसर के, समय पर पहचान जरूरी

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Symptoms of Breast Cancer:ब्रेस्ट महिलाओं में होने वाली सबसे आम और गंभीर बीमारियों में से एक है, लेकिन इसके शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। बदलती लाइफस्टाइल, हार्मोनल बदलाव और जागरूकता की कमी इसके मामलों को बढ़ा रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं अपने शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को गंभीरता से लें। कई बार महिलाएं अपनी त्वचा में दिखने वाले इन बदलावों को सामान्य समझकर टाल देती हैं, जो आगे चलकर बड़ी समस्या बन सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि शुरुआती स्टेज में इस बीमारी के संकेत बहुत हल्के होते हैं, इसलिए जागरूकता की कमी के कारण समय पर पहचान नहीं हो पाती।अगर समय रहते इसके लक्षणों को पहचान लिया जाए, तो इसका इलाज संभव है और मरीज पूरी तरह स्वस्थ भी हो सकती है। इस लेख में हम आपको ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों के बारे में विस्तार से बताएंगे।

1. ब्रेस्ट में गांठ

  • ब्रेस्ट या अंडरआर्म में किसी तरह की कठोर गांठ महसूस होना इस बीमारी का सबसे सामान्य संकेत माना जाता है। 
  • यह गांठ कई बार दर्द रहित होती है, इसलिए महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। 
  • हालांकि हर गांठ कैंसर नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली गांठ की जांच जरूरी है।

2. ब्रेस्ट के आकार में बदलाव

  • अगर अचानक एक ब्रेस्ट का आकार बदलने लगे या उसमें सूजन, भारीपन या असमानता महसूस हो, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। 
  • यह अंदरूनी बदलाव का संकेत हो सकता है।
  • ऐसा होने पर तत्काल डॉक्टर से संपर्क करें।

3. त्वचा में बदलाव

  • ब्रेस्ट की त्वचा पर गड्ढे पड़ना, लालिमा आना या त्वचा का मोटा होना भी चेतावनी संकेत हो सकते हैं। 
  • कुछ मामलों में त्वचा संतरे के छिलके जैसी दिखने लगती है, जो एक गंभीर लक्षण माना जाता है।

4. निप्पल में बदलाव

  • निप्पल का अंदर की ओर धंसना या उससे खून या किसी तरह का तरल निकलना असामान्य स्थिति है। 
  • ये संक्रमण भी हो सकता है, लेकिन कई बार यह कैंसर का शुरुआती संकेत भी होता है, इसलिए तुरंत जांच जरूरी है।

5. दर्द होना 

  • ब्रेस्ट में लगातार दर्द, जलन या असहजता महसूस होना, खासकर एक ही जगह पर, सामान्य नहीं माना जाता। 
  • हालांकि हर दर्द कैंसर का संकेत नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक बना रहने वाला दर्द नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

इन सभी लक्षणों का समय पर ध्यान रखना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।

रोज कच्चा प्याज खाते हैं? इन लोगों को तुरंत बंद कर देना चाहिए

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Onion Salad is Good or Bad: कच्चा प्याज भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है। सलाद के रूप में इसे खाने के साथ बड़े चाव से खाया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर किसी के लिए कच्चा प्याज फायदेमंद नहीं होता? कुछ लोगों के लिए ये सेहत से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ा सकता है।दरअसल, वैसे तो प्याज  में कई पोषक तत्व होते हैं, लेकिन इसकी तासीर और कुछ तत्व ऐसे होते हैं जो खास परिस्थितियों में नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसी के चलते इस लेख में हम आपको बताएंगे कि किन लोगों को कच्चा प्याज खाने से बचना चाहिए, इसके क्या नुकसान हो सकते हैं, ताकि आप अपनी सेहत का बेहतर ख्याल रख सकें।
 
पाचन संबंधी समस्याओं वाले लोग

  • जिन लोगों को पहले से गैस, अपच या पेट फूलने की समस्या रहती है, उनके लिए कच्चा प्याज परेशानी बढ़ा सकता है।
  •  इसमें मौजूद कुछ तत्व पेट में गैस बनाते हैं, जिससे भारीपन, पेट दर्द और असहजता महसूस हो सकती है। 
  • ऐसे लोगों को कच्चा प्याज सीमित मात्रा में या बिल्कुल नहीं खाना चाहिए।

 एसिडिटी के मरीज

  • कच्चा प्याज पेट में एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है।
  •  इससे सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
  •  जिन लोगों को एसिड की समस्या होती है, उन्हें कच्चा प्याज खाने से बचना चाहिए।

एलर्जी वाले लोग

  • कुछ लोगों को प्याज से एलर्जी हो सकती है। 
  • कच्चा प्याज खाने के बाद त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते, सूजन या सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 
  • अगर ऐसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत इसका सेवन बंद कर देना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

 ब्लड प्रेशर और दवा लेने वाले लोग

  • प्याज में ऐसे गुण होते हैं जो खून को पतला करने में मदद करते हैं। 
  • ये सामान्य स्थिति में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन जो लोग पहले से ब्लड थिनर दवाएं ले रहे हैं, उनके लिए यह जोखिम भरा हो सकता है। 
  • इससे ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है, इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना अधिक मात्रा में सेवन नहीं करना चाहिए।

सर्जरी से पहले या बाद में

  • अगर किसी व्यक्ति की सर्जरी होने वाली है या हाल ही में हुई है, तो कच्चा प्याज खाने से बचना चाहिए। 
  • यह खून को पतला कर सकता है, जिससे ऑपरेशन के दौरान या बाद में ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। 
  • आमतौर पर डॉक्टर सर्जरी से कुछ दिन पहले और बाद में ऐसी चीजों से परहेज करने की सलाह देते हैं।

इन सभी स्थितियों में सावधानी बरतना जरूरी है, ताकि कच्चा प्याज खाने से होने वाले संभावित नुकसान से बचा जा सके।

नीतीश कुमार 13 अप्रैल को CM पद से इस्तीफा दे सकते हैं, राज्यसभा सदस्य बनने की तारीख भी सामने

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पटना. बिहार (Bihar) के मुख्यमंत्री (CM) नीतीश कुमार (Nitish Kumar) 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य (Member of Rajya Sabha) के रूप में शपथ लेंगे। इसके लिए वह संभवतः 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली के लिए रवाना होंगे। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार अपनी राज्यसभा सदस्यता की शपथ 10 अप्रैल को ग्रहण करेंगे। इसके लिए नीतीश कुमार 8 या 9 अप्रैल को दिल्ली जाएंगे। बता दें कि शपथ ग्रहण (Swearing-in Ceremony) के बाद नीतीश कुमार अपने मुख्यमंत्री पद से 13 अप्रैल के बाद इस्तीफा दे सकते हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। नीतीश कुमार 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उनके इस्तीफे की चर्चा तेज हो गई थी।

चारों सदनों में सदस्य बने नीतीश कुमार
नीतीश कुमार उन नेताओं में शामिल हैं जो चारों सदनों के सदस्य बने हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कहा था कि उनकी इच्छा राज्यसभा सदस्य बनने की थी इसलिए उन्होंने यह निर्णय लिया। नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधायक बने, 1989 में नौवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए और 2006 से विधान परिषद के सदस्य रहे। अब वे पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में अपनी नई पारी शुरू करेंगे।

केंद्र और राज्य में निभाए अहम पद
नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री और कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाले, जहां उन्होंने रेलवे में सुधार किए। 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। मुख्यमंत्री रहते उन्होंने कई चर्चित योजनाएं लागू कीं, जैसे शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण।

मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा का आदेश
मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद भी नीतीश कुमार को जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी। गृह विभाग की विशेष शाखा ने आदेश जारी किया है। आदेश में कहा गया है कि उन्हें बिहार स्पेशल सिक्योरिटी एक्ट-2000 के तहत सुरक्षा मिलेगी। नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद निकट भविष्य में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देंगे और राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। सुरक्षा की समीक्षा के बाद उन्हें जेड प्लस श्रेणी की सुरक्षा प्रदान करने का निर्णय लिया गया है।

जग्गी हत्याकांड में Amit Jogi को बड़ा झटका, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

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रायपुर|छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड मामले में आज हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है. जिसमें अमित जोगी को 3 हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है. यह फैसला हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सनाया है. मामले में सीबीआई ने 11000 पन्ने की जांच रिपोर्ट पेश की थी, जिसमें जोगी के खिलाफ भी चार्ज लगा है. हालांकि कोर्ट ने पहले इस केस में अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन इस केस को दोबारा ओपन किया गया|

दरअसल, साल 2003 में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जिससे पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी. इस मामले में 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जबकि अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था|

2003 में हुआ था जग्गी हत्याकांड

बता दें कि 4 जून, 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिसमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे. वहीं 28 लोगों को सजा मिली थी, जबकि अमित जोगी को बरी कर दिया गया था. इसके बाद रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर जोगी के पक्ष में स्टे लगा था. बाद में SC ने केस को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेज दिया|

कौन थे रामावतार जग्गी?

रामावतार जग्गी, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे. जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था|

बिना सुनवाई के अवसर दिए दोषी करार दिया – अमित जोगी

वहीं हाई कोर्ट का फैसला सामने आने के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया अकांउट X पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि- आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया. बिना सुनवाई का अवसर दिए. मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया|

2 अप्रैल 2011: भारत बना विश्व चैंपियन, 28 साल का इंतजार खत्म

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दो अप्रैल, 2011 का दिन भारतीय क्रिकेट इतिहास में हमेशा के लिए यादगार बन चुका है। इसी दिन एमएस धोनी की कप्तानी में टीम इंडिया ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में श्रीलंका को छह विकेट से हराकर आईसीसी वनडे विश्व कप पर कब्जा जमाया था। यह जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि भारत ने 28 साल बाद विश्व कप खिताब जीता और करोड़ों क्रिकेट प्रशंसकों का सपना पूरा हुआ। महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर ने भी 2011 वर्ल्ड कप जीत की 15वीं सालगिरह पर उस ऐतिहासिक पल को याद करते हुए भावुक संदेश साझा किया।

सचिन का भावुक कर देने वाला संदेश

सचिन ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए उस रात के जज्बातों को शब्दों में पिरोया, जिसने करोड़ों भारतीयों के दिलों में हमेशा के लिए जगह बना ली। सचिन ने अपने संदेश में लिखा, 'पहली गेंद हमेशा दिल की धड़कन बढ़ा देती है… और उस रात, ये कभी रुकी ही नहीं। 15 साल बाद भी वो एहसास हमारे साथ है। हम सभी एक युवा टीम के रूप में बड़े हुए, एक ही सपना लेकर kf भारत के लिए वर्ल्ड कप जिताना है। इस सफर का हिस्सा रहे हर खिलाड़ी और हर फैन का धन्यवाद… आपने इसे खास बना दिया। जय हिंद!'

2011: जब पूरा हुआ सपना

सचिन के लिए यह जीत बेहद खास थी, क्योंकि अपने आखिरी वर्ल्ड कप में उन्होंने ट्रॉफी उठाने का सपना पूरा किया। वह टूर्नामेंट में भारत के सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज भी रहे। फाइनल मुकाबले में श्रीलंका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। उनकी शुरुआत भले ही धीमी रही, लेकिन अनुभवी बल्लेबाज महेला जयवर्धने ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 88 गेंदों में नाबाद 103 रन बनाए। उनके अलावा कप्तान कुमार संगाकारा ने 48 रन का योगदान दिया, जिसकी बदौलत श्रीलंका ने निर्धारित 50 ओवरों में छग विकेट के नुकसान पर 274 रन बनाए।

भारत ने इस तरह किया लक्ष्य का पीछा

लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने जल्दी ही अपने दोनों ओपनर खो दिए। ऐसे मुश्किल समय में विराट कोहली और गौतम गंभीर ने पारी को संभाला। कोहली ने 35 रन बनाकर टीम को स्थिरता दी, जबकि गंभीर ने 97 रन की शानदार पारी खेलकर जीत की मजबूत नींव रखी। इसके बाद कप्तान धोनी ने खुद को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजते हुए जिम्मेदारी संभाली और मैच को अंत तक लेकर गए। उन्होंने 79 गेंदों में नाबाद 91 रन बनाए और अंत में विजयी छक्का लगाकर भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनका यह छक्का आज भी भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित और यादगार पलों में गिना जाता है।

धोनी बने थे प्लेयर ऑफ द मैच

इस मैच में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए धोनी को ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। वहीं पूरे टूर्नामेंट में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन करने वाले युवराज सिंह को ‘प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार मिला। युवराज ने टूर्नामेंट में 362 रन बनाने के साथ-साथ 15 विकेट भी लिए थे और भारत की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। भारत की यह दूसरी विश्व कप जीत थी। इससे पहले टीम ने 1983 में कपिल देव की कप्तानी में वेस्टइंडीज को हराकर पहली बार विश्व कप जीता था। इसके बाद 2003 में सौरव गांगुली की कप्तानी में टीम फाइनल तक पहुंची, लेकिन रिकी पोंटिंग की अगुवाई वाली ऑस्ट्रेलिया से हार गई।

भारत चार बार फाइनल में पहुंचा

कुल मिलाकर भारत अब तक चार बार वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुका है, जिसमें उसे दो बार सफलता मिली है। 2 अप्रैल 2011 की यह जीत भारतीय क्रिकेट के इतिहास में गर्व, जुनून और संघर्ष का प्रतीक बनकर हमेशा याद रखी जाएगी। हाल के वर्षों में भी भारत फाइनल तक पहुंचा। 2023 में रोहित शर्मा की कप्तानी में टीम ने शानदार प्रदर्शन किया, लेकिन फाइनल में पैट कमिंस की कप्तानी वाली ऑस्ट्रेलिया ने भारत को हराकर खिताब अपने नाम कर लिया।

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