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जयशंकर-गुटेरेस की अहम मुलाकात, यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया संकट पर हुआ विचार-विमर्श

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संयुक्त राष्ट्र। भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) मुख्यालय में महासचिव एंटोनियो गुटेरेस से एक महत्वपूर्ण मुलाकात की। यूएन महासभा के उच्च-स्तरीय कार्यक्रमों के समापन के अवसर पर हुई इस बैठक के दौरान दोनों शीर्ष नेताओं ने मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और ग्लोबल साउथ के देशों पर इसके पड़ने वाले प्रभावों को लेकर विस्तार से चर्चा की।

सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

विदेश मंत्री जयशंकर ने अपने आधिकारिक 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर इस मुलाकात की जानकारी देते हुए लिखा कि एंटोनियो गुटेरेस से मिलकर उन्हें बेहद खुशी हुई। उन्होंने बताया कि उनकी यह चर्चा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्षों और उनके नकारात्मक प्रभावों को कम करने की आवश्यकता पर केंद्रित थी।

दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र महासचिव के कार्यालय से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया कि इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच बहुपक्षवाद, भारत-यूएन के आपसी सहयोग और यूक्रेन युद्ध तथा पश्चिम एशिया के हालात जैसे तमाम अहम भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर सार्थक बातचीत हुई। इस दौरान महासचिव गुटेरेस ने वैश्विक मंच पर संयुक्त राष्ट्र के साथ भारत के निरंतर और मजबूत सहयोग की भरपूर सराहना की।

गुटेरेस के कार्यकाल और भारत के योगदान का जिक्र

इससे पहले, शनिवार को यूएन की आम बहस (जनरल डिबेट) को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने विश्व संगठन के प्रमुख के रूप में एंटोनियो गुटेरेस की शानदार सेवाओं की खुले दिल से प्रशंसा की थी। ज्ञात हो कि इस साल दिसंबर में गुटेरेस का कार्यकाल समाप्त होने वाला है। जयशंकर ने कहा था कि बहुपक्षवाद के उद्देश्य के लिए एक दशक की लंबी सेवा और समर्पण के बाद, हम जल्द ही महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को विदाई देंगे। उन्होंने यह भी कहा कि भारत उनके कई महत्वपूर्ण योगदानों, विशेषकर 'मिशन लाइफ' (Mission LiFE) के प्रति उनके व्यक्तिगत समर्थन को बहुत अधिक महत्व देता है।

व्यस्त दौर और कूटनीतिक बैठकें

संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रमुख के रूप में एंटोनियो गुटेरेस के लिए यह अंतिम उच्च-स्तरीय सप्ताह था, क्योंकि उनका दूसरा पांच साल का कार्यकाल दिसंबर 2026 में पूरा हो रहा है। इससे पहले इसी महीने के शुरुआती दिनों में वे ब्रिक्स (BRICS) नेताओं के शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत भी आए थे। एशिया सोसाइटी में हाल ही में हुई एक बातचीत के दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने साझा किया कि इस बेहद व्यस्त सप्ताह के दौरान उन्होंने अपने लगभग 85 से 90 विदेशी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें की हैं।

वेस्टइंडीज के खिलाफ भारत का बड़ा फैसला, टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी

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भारत और वेस्टइंडीज के बीच खेली जा रही तीन मैचों की एकदिवसीय (वनडे) अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट श्रृंखला का दूसरा मुकाबला गुवाहाटी के बरसापारा स्थित एसीए स्टेडियम में खेला जा रहा है। इस अहम मुकाबले में भारतीय टीम के कप्तान शुभमन गिल ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। इस मैच के साथ ही जम्मू-कश्मीर के प्रतिभावान तेज गेंदबाज आकिब नबी ने अपना अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट डेब्यू किया है। विदित हो कि भारतीय टीम इस तीन मैचों की श्रृंखला में पहले से ही 1-0 की बढ़त बनाए हुए है, क्योंकि तिरुवनंतपुरम में खेले गए पहले वनडे मुकाबले में भारत ने वेस्टइंडीज को आठ विकेट के बड़े अंतर से मात दी थी। यदि आज भारतीय टीम गुवाहाटी में जीत दर्ज करने में सफल रहती है, तो वह श्रृंखला पर 2-0 की अजेय बढ़त के साथ कब्जा जमा लेगी।

तेज गेंदबाज आकिब नबी का बहुप्रतीक्षित अंतरराष्ट्रीय डेब्यू

घरेलू क्रिकेट में अपने शानदार प्रदर्शन के दम पर सुर्खियों में आए आकिब नबी को पहली बार भारतीय टीम की आधिकारिक प्लेइंग-11 में शामिल किया गया है। उन्हें नितीश कुमार रेड्डी के स्थान पर टीम में अवसर दिया गया है। आकिब नबी ने हाल ही में रणजी ट्रॉफी का खिताब जीतने वाली जम्मू-कश्मीर की टीम की ओर से खेलते हुए सत्र में कुल 60 विकेट चटकाए थे। इस उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर उन्हें श्रीलंका के विरुद्ध टेस्ट श्रृंखला के लिए भी भारतीय दल में चुना गया था, हालाँकि तब उन्हें मैदान पर उतरकर डेब्यू करने का अवसर नहीं मिला था। अब गुवाहाटी के इस मैदान पर वह भारत के लिए खेलने वाले जम्मू-कश्मीर के कुल तीसरे पुरुष क्रिकेटर बन गए हैं। उनसे पूर्व परवेज रसूल और उमरान मलिक भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

भारतीय कप्तान शुभमन गिल की रणनीति और टॉस का फैसला

टॉस जीतने के पश्चात भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने पिच की स्थिति और टीम की रणनीतिक योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि पिच पर थोड़ी अधिक घास मौजूद है और कुछ स्थानों पर यह सतह पैची (असमान) भी नजर आ रही है, जिसके चलते मैच की शुरुआत में तेज गेंदबाजों को अतिरिक्त उछाल और मदद मिलने की पूरी संभावना है।

पिछले मैच के अनुभव को साझा करते हुए गिल ने कहा, "मुकाबले के शुरुआती 20-25 ओवरों में दबाव झेलने के बाद जिस प्रकार हमने पिछले मैच में शानदार वापसी की थी, वह वाकई सराहनीय था। आज यहाँ मैदान पर काफी उमस और गर्मी का माहौल है, जो हमारे तेज गेंदबाजों के लिए एक कड़ी शारीरिक चुनौती साबित होगी।" क्षेत्ररक्षण (फील्डिंग) पर बात करते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि बीच के ओवरों में फील्डिंग की तीव्रता को और अधिक बेहतर बनाने की गुंजाइश है, और उन्हें पूरी उम्मीद है कि आज का प्रदर्शन और भी उत्कृष्ट रहेगा।

वेस्टइंडीज टीम में चार बड़े बदलाव और कप्तान की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, वेस्टइंडीज क्रिकेट टीम के कप्तान शाई होप ने टॉस के समय जानकारी दी कि उनकी टीम ने अपनी प्लेइंग-11 में कुल चार परिवर्तन किए हैं। पिछले एकदिवसीय मैच में शानदार शतक जड़ने वाले बल्लेबाज जस्टिन ग्रीव्स पिंडली की चोट के कारण इस मैच से बाहर हो गए हैं। उनके अतिरिक्त ज्वेल एंड्रयू, मैथ्यू फोर्ड और गुडाकेश मोती भी इस मुकाबले की अंतिम एकादश का हिस्सा नहीं हैं। इन चारों खिलाड़ियों की जगह शेरफेन रदरफोर्ड, कीमो पॉल, शमर जोसेफ और विटेल लॉज को टीम में जगह दी गई है।

कैरेबियाई कप्तान ने कहा कि यदि वे भी टॉस जीतते तो पहले गेंदबाजी करने का ही निर्णय लेते। उन्होंने माना कि टॉस एक 50-50 का मौका होता है और परिस्थितियों चाहे जैसी भी हों, उनकी टीम को मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना होगा।

दोनों टीमों की आधिकारिक प्लेइंग-11

  • भारत: रोहित शर्मा, शुभमन गिल (कप्तान), विराट कोहली, ऋतुराज गायकवाड़, केएल राहुल (विकेटकीपर), नमन धीर, रवींद्र जडेजा, आकिब नबी, गुरनूर बराड़, कुलदीप यादव, प्रसिद्ध कृष्णा।

  • वेस्टइंडीज: जॉन कैंपबेल, कीसी कार्टी, शाई होप (कप्तान और विकेटकीपर), अमीर जांगू, शेरफेन रदरफोर्ड, रोस्टन चेज, कीमो पॉल, अल्जारी जोसेफ, शमर जोसेफ, जेडन सील्स, विटेल लॉज।

धर्म और जाति पर टिप्पणी को लेकर पूनावाला घिरे, लगाए गए गंभीर आरोप

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मुंबई। रियलिटी शो 'राइज एंड फॉल 2' के सेट पर एक बड़ी घटना सामने आई है, जहां बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला और सोशल मीडिया स्टार सिवेट तोमर के बीच तीखी झड़प और हाथापाई के बाद सिवेट को शो से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इस पूरे विवाद के बाद सिवेट तोमर ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर शहजाद पूनावाला पर कई गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। सिवेट ने मुख्य रूप से यह दावा किया है कि पूनावाला ने अपनी राजनीति और खेल के तहत धर्म का इस्तेमाल प्रोपेगैंडा की तरह किया।

धार्मिक टिप्पणियों और उकसाने का आरोप

वीडियो में सिवेट तोमर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने शहजाद पर कोई हमला नहीं किया था, बल्कि उन्होंने केवल उनका कॉलर पकड़ा था और वे उन्हें समझाने की कोशिश कर रहे थे। सिवेट का दावा है कि अगर वे सचमुच हमला करना चाहते, तो उनके पास 5-6 सेकंड का ऐसा मौका था जब आसपास कोई नहीं था और वे उन्हें पीट सकते थे।

सिवेट का आरोप है कि शहजाद लगातार उनकी धर्म और जाति पर टिप्पणियां कर रहे थे और उन्हें मानसिक रूप से उकसा रहे थे, जिसकी वजह से वे अपना आपा खो बैठे। यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ था जब सिवेट ने शो के पहले एपिसोड में अभिनेत्री स्वरा भास्कर के 'जौहर' से जुड़े एक बयान पर आपत्ति जताई थी। सिवेट के अनुसार, शुरुआत में शहजाद ने इस मुद्दे पर उनका समर्थन किया था, लेकिन जब वे खुद स्वरा भास्कर के साथ बैठकर मामला सुलझा रहे थे, तब पूनावाला ने जानबूझकर उन्हें उकसाना शुरू कर दिया जिससे तनाव काफी बढ़ गया। उन्होंने यह भी कहा कि स्वरा ने अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांग ली थी, लेकिन शो में इस पर पाबंदी होने के कारण वह हिस्सा प्रसारित नहीं किया गया।

खानपान और पाखंड को लेकर निशाना

शहजाद पूनावाला पर पाखंड का आरोप लगाते हुए सिवेट ने कहा कि जो व्यक्ति दिनभर भगवान हनुमान का नाम जपता है और गले में रुद्राक्ष की माला पहनता है, वह रोज़ उनकी प्लेट में चार बार मटन खाता है। सिवेट के मुताबिक, इस बात को लेकर सह-प्रतियोगी तेज प्रताप ने भी पूनावाला को टोका था। सिवेट ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति अपने जन्म के धर्म के प्रति वफादार नहीं है, वह दूसरों के प्रति क्या वफादार रहेगा। इस घटना के बाद शो के अंदर और बाहर दोनों जगह राजनीतिक हलचल और बहस तेज हो गई है।

निम्रत कौर को पसंद आई ‘धुरंधर’, बोलीं- जिस अंदाज का इंतजार था, उसी तरह दिखी फिल्म

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फिल्म निर्माता आदित्य धर के निर्देशन में बनी चर्चित और ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' को सिनेमाघरों में दर्शकों का अपार स्नेह और प्यार मिला था। इस फिल्म की सफलता की गूँज केवल बॉक्स ऑफिस तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि सिनेमा जगत से जुड़े नामचीन कलाकारों ने भी इसकी जमकर सराहना की। इसी कड़ी में अब प्रतिभाशाली अभिनेत्री निम्रत कौर ने एक साक्षात्कार के दौरान फिल्म की प्रशंसा करते हुए इसके निर्माण और निर्देशन के स्तर को सराहा है।

फिल्म 'धुरंधर' की सफलता और दर्शकों की सोच पर निम्रत कौर के विचार

एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान बातचीत करते हुए अभिनेत्री निम्रत कौर ने कहा कि फिल्म 'धुरंधर' ने दर्शकों के बीच जासूसी (स्पाई) फिल्मों को देखने के नजरिए और सोच को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है। एक्ट्रेस ने अपने विचार साझा करते हुए कहा, "जब कोई रचनात्मक कृति इतनी बेहतरीन और प्रामाणिक शैली में बनाई जाती है कि वह पर्दे पर पूरी तरह से व्यावहारिक (प्रैक्टिकल) और वास्तविक प्रतीत होने लगती है, तो उसका स्तर स्वतः ही बहुत ऊँचा हो जाता है।"

उन्होंने आगे कहा कि कभी-कभार हमारे सामने ऐसी फिल्में आती हैं जिन्हें देखकर पहले ऐसा प्रतीत होता है कि यह कोई सुनी-सुनाई या पुरानी कहानी है, किंतु जब उसे एक बिल्कुल नए और असाधारण अंदाज में पर्दे पर उतारा जाता है, जिसका दर्शक लंबे समय से इंतजार कर रहे होते हैं, तो वह फिल्म हर वर्ग के दर्शकों को पसंद आती है।

'यह कोई सामान्य जासूसी फिल्म नहीं है'

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए निम्रत कौर ने रेखांकित किया कि 'धुरंधर' अपनी बेहतरीन प्रस्तुति (प्रेजेंटेशन) के कारण हिंदी फिल्म उद्योग (बॉलीवुड) में एक शानदार मिसाल और उदाहरण बन गई है। यदि किसी पटकथा को उसकी पूर्ण क्षमता और प्रतिबद्धता के साथ दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाए, तो वह केवल एक साधारण जासूसी फिल्म बनकर नहीं रह जाती, बल्कि वह अपने आप में 'धुरंधर' जैसी उत्कृष्ट कृति बन जाती है।

फिल्म की स्टार कास्ट और बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक कमाई

आपको बता दें कि फिल्म ‘धुरंधर’ की कहानी एक भारतीय खुफिया एजेंट के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक बेहद खतरनाक और गोपनीय मिशन पर निकला होता है। इस फिल्म में रणवीर सिंह, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल, सारा अर्जुन और राकेश बेदी जैसे दिग्गज और लोकप्रिय कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए हैं।

आदित्य धर के निर्देशन में बनी फिल्म ‘धुरंधर’ और इसके बहुप्रतीक्षित दूसरे भाग ‘धुरंधर: द रिवेंज’ ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। फिल्म के पहले भाग ने अपनी रिलीज के महज 31 दिनों के भीतर 1,253 करोड़ रुपये से अधिक का ऐतिहासिक कारोबार किया था। वहीं, इसके दूसरे भाग ‘धुरंधर द रिवेंज’ ने भी बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 1,720.68 करोड़ रुपये का भारी-भरकम ग्रॉस कलेक्शन दर्ज किया था।

राजा वड़िंग के हटने से पंजाब कांग्रेस पर क्या असर पड़ेगा? चुनाव से पहले जानिए पूरा गणित

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चंडीगढ़। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी के भीतर बड़े संगठनात्मक फेरबदल की सुगबुगाहट तेज हो गई है। पार्टी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के बीच अंदरूनी कलह और गुटबाजी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि चन्नी गुट लगातार राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने की मांग कर रहा है, जिसके बाद अब राजनीतिक परिस्थितियों को भांपते हुए पार्टी हाईकमान वड़िंग की जगह किसी नए चेहरे को कमान सौंपने का मन बना रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संवेदनशील मुद्दे पर हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता सचिन पायलट के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक उच्चस्तरीय बैठक भी हो चुकी है।

वड़िंग के हटने से क्या हो सकता है कांग्रेस को नुकसान?

गौरतलब है कि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा था, जहां पार्टी महज 18 सीटों पर सिमट गई थी, जो अब तक का उसका सबसे खराब प्रदर्शन था। चुनाव से ठीक पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह को हटाकर चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन यह दांव उल्टा पड़ गया और चन्नी खुद अपनी दोनों सीटों पर चुनाव हार गए थे।

हालांकि, इसके विपरीत अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग के नेतृत्व में पार्टी ने लोकसभा चुनावों में शानदार वापसी करते हुए 7 सीटों पर दमदार जीत दर्ज की थी। ऐसे में यदि हाईकमान वड़िंग को पद से हटाता है, तो इसके कई दूरगामी और नकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं:

  • संगठन में अस्थिरता: प्रदेश अध्यक्ष बदलने से केवल शीर्ष नेतृत्व नहीं बदलेगा, बल्कि जिला और ब्लॉक स्तर तक के संगठन में उथल-पुथल मच जाएगी। वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल में सक्रिय रहे नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए नई कार्यशैली और व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाना एक बड़ी चुनौती होगी।

  • गुटबाजी का और अधिक बढ़ना: पार्टी के भीतर मौजूदा कलह मुख्य रूप से वड़िंग और चन्नी गुट के बीच है। केवल वड़िंग को हटाने से अंतर्कलह समाप्त नहीं होगी, बल्कि इससे नाराजगी और बढ़ सकती है, जिसका सीधा नुकसान आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को उठाना पड़ सकता है।

2022 की गलतियों से सबक का संकट

आपको बता दें कि साल 2022 के चुनाव में भी कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू के बीच की खुलकर सामने आई आपसी कलह ने पार्टी की नैया डुबोई थी। उस समय डैमेज कंट्रोल के तहत हाईकमान ने दलित चेहरा के रूप में चरणजीत सिंह चन्नी को आगे किया था, लेकिन गुटबाजी के चलते पार्टी जीत हासिल नहीं कर पाई थी। अब एक बार फिर वही पुरानी गलतियां और आपसी खींचतान पार्टी के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।

पंजाब में नशे के खिलाफ बड़ा अभियान, अमित शाह ने 2029 तक का लक्ष्य तय किया

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चंडीगढ़। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पंजाब के जालंधर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक बड़ा और कड़ा राजनीतिक ऐलान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पंजाब में भाजपा का आगामी चुनाव कई अन्य मुद्दों जैसे किसानों, इंडस्ट्री, कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा के बावजूद केवल और केवल 'नशा मुक्त पंजाब' के मुख्य एजेंडे पर ही लड़ा जाएगा।

अमित शाह का बड़ा ऐलान: 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब होगा नशा मुक्त

जालंधर के मंच से गृह मंत्री ने पंजाब की माताओं, बहनों और युवाओं से सीधा वादा करते हुए कहा कि यदि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनती है, तो आने वाले समय में कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने घोषणा की कि 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब को 'चिट्टे' (नशीले पदार्थों) के व्यापार से पूरी तरह मुक्त कर दिया जाएगा। शाह ने कहा कि जालंधर आना उनके लिए सौभाग्य की बात है, लेकिन नशा मुक्ति के संकल्प के साथ यहां आना उनके लिए परम सौभाग्य का विषय है।

आम आदमी पार्टी की सरकार पर तीखा हमला

नशा मुक्ति के मुद्दे पर राज्य की मौजूदा सरकार को घेरते हुए अमित शाह ने कहा कि आज पंजाब में यह स्थिति क्यों पैदा हुई, इसका कारण यह है कि यहां की आम आदमी पार्टी की सरकार ने 'चिट्टे' के अवैध व्यापार को खुलेआम चलने की छूट दी हुई है। उन्होंने कहा कि इसी नाकामी के खिलाफ भाजपा अब आर-पार की लड़ाई लड़ेगी।

देश के लिए पंजाब का अतुलनीय योगदान

पंजाब की ऐतिहासिक और देशभक्ति की मिसाल देते हुए गृह मंत्री ने कहा कि यह प्रदेश देश भर में मुख्य रूप से दो बड़ी वजहों से जाना जाता है:

  • अन्नदाता की भूमिका: देश में जब भी खाद्यान्न या खाने-पीने की जरूरत पड़ी है, पंजाब के मेहनतकश किसानों ने हमेशा अपने श्रम से देश के गोदामों को भरा है, और आज भी भर रहे हैं।

  • बलिदान और सुरक्षा: चाहे देश की आजादी की लड़ाई का दौर हो या आजादी के बाद का समय, जब भी देश की सुरक्षा की बात आई है, पंजाब के वीर हमेशा सबसे आगे रहे हैं। पंजाबियों के अद्वितीय बलिदान से ही हमें स्वतंत्रता मिली और सीमाओं की रक्षा के लिए भी पंजाब ने देश में सबसे अधिक कुर्बानियां दी हैं।

दिग्गज नेताओं की मौजूदगी

इस कार्यक्रम के दौरान मंच पर भाजपा के प्रदेश प्रधान केवल सिंह ढिल्लों, वरिष्ठ नेता सुनील जाखड़ और रवनीत सिंह बिट्टू समेत पार्टी के कई अन्य प्रमुख गणमान्य नेता उपस्थित रहे। अमित शाह ने अपने संबोधन की शुरुआत पारंपरिक रूप से ‘सत श्री अकाल’ और ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ की।

उड़द-बाजरा और तुअर की बढ़ी बुवाई, मक्का-सोयाबीन का घटा रकबा; जानें महंगाई का कनेक्शन

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नई दिल्ली| देश भर में इस बार खरीफ सीजन की फसलों के बुवाई क्षेत्र (रकबे) में आए उतार-चढ़ाव का सीधा और व्यापक असर आने वाले महीनों में आम आदमी की रसोई और खुदरा बाजारों पर पड़ना तय माना जा रहा है। केंद्रीय कृषि मंत्रालय की हालिया राष्ट्रीय रबी कॉन्फ्रेंस में सामने आए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस साल जहाँ मक्का, सोयाबीन, धान, कपास और गन्ने जैसी प्रमुख व्यावसायिक एवं खाद्य फसलों के रकबे में खासी गिरावट दर्ज की गई है, वहीं कुछ चुनिंदा दलहन और मोटे अनाजों के दायरे में संतोषजनक बढ़ोतरी भी देखने को मिली है। फसल उत्पादन के आधिकारिक आँकड़े और इस सीजन का पहला अग्रिम अनुमान अक्टूबर के मध्य तक आने की संभावना जताई जा रही है, किंतु शुरुआती कृषि रुझानों ने बाजार में हलचल तेज कर दी है।

प्रमुख फसलों के रकबे में गिरावट और इसके संभावित प्रभाव

इस खरीफ सीजन के दौरान कई अहम फसलों के बुवाई क्षेत्र में पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है:

  • धान: धान का रकबा 438.19 लाख हेक्टेयर से घटकर 421.82 लाख हेक्टेयर पर आ गया है, यानी इसमें 16.37 लाख हेक्टेयर की बड़ी कमी आई है। इससे देश के कुल चावल उत्पादन पर असर पड़ना तय है। पूर्व की एक रिपोर्ट में देश में करीब एक करोड़ टन कम चावल पैदा होने की आशंका जताई गई थी, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों और खाद्य निर्यात दोनों पर पड़ सकता है।

  • मक्का: मक्का का रकबा 94.08 लाख हेक्टेयर से घटकर 91.09 लाख हेक्टेयर (2.99 लाख हेक्टेयर की कमी) रह गया है। मक्का का उपयोग केवल मानवीय उपभोग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पोल्ट्री (मुर्गी पालन) और स्टार्च उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है, जिससे इसके दाम बढ़ने की आशंका है।

  • सोयाबीन: इसका रकबा 122.98 लाख हेक्टेयर से घटकर 121.82 लाख हेक्टेयर (1.16 लाख हेक्टेयर की कमी) दर्ज किया गया है। इससे घरेलू स्तर पर खाद्य तेलों के उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। हालाँकि, सरकार द्वारा हाल ही में खाद्य तेलों पर आयात शुल्क घटाए जाने से आयात के माध्यम से बाजार की आपूर्ति को संतुलित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

  • कपास एवं गन्ना: कपास का रकबा 109.87 से घटकर 109.17 लाख हेक्टेयर (0.69 लाख हेक्टेयर कम) तथा गन्ने का रकबा 58.87 से घटकर 58.47 लाख हेक्टेयर (0.40 लाख हेक्टेयर कम) रह गया है। कपास उत्पादन घटने से वस्त्र (टेक्सटाइल) उद्योग की लागत में इजाफा हो सकता है।

दालों और मोटे अनाजों के मोर्चे पर राहत भरी खबरें

एक तरफ जहाँ कई खाद्यान्न फसलों का रकबा घटा है, वहीं दूसरी तरफ दालों और पौष्टिक मोटे अनाजों के क्षेत्र में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है:

  • उड़द: उड़द की बुवाई 22.46 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 25.15 लाख हेक्टेयर हो गई है, जिसमें लगभग 11.9% यानी 2.68 लाख हेक्टेयर की शानदार बढ़ोतरी हुई है।

  • तुअर (अरहर): इसका दायरा 44.93 से बढ़कर 45.66 लाख हेक्टेयर (0.72 लाख हेक्टेयर की वृद्धि) पर पहुँच गया है।

  • बाजरा और सूरजमुखी: बाजरे का रकबा 62.87 से बढ़कर 64.86 लाख हेक्टेयर (1.99 लाख हेक्टेयर की वृद्धि) हो गया है, जिससे मोटे अनाजों की उपलब्धता मजबूत होगी। इसके अलावा, सूरजमुखी का रकबा 0.64 लाख हेक्टेयर से लगभग दोगुना होकर 1.25 लाख हेक्टेयर पर पहुँच गया है, जो खाद्य तेल बाजार के लिए एक शुभ संकेत है।

अग्रिम अनुमान आने में क्यों हो रही है देरी?

सामान्य परिस्थितियों में खरीफ फसलों का पहला अग्रिम अनुमान सितंबर माह के अंतिम सप्ताह तक जारी कर दिया जाता है, किंतु इस बार इसमें मामूली विलंब हो रहा है। इसके मुख्य कारण के रूप में यह बात सामने आई है कि महाराष्ट्र सहित लगभग 10 राज्यों ने अभी तक अपने अंतिम फसल अनुमान केंद्रीय कृषि मंत्रालय को प्रेषित नहीं किए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मंत्रालय ने संबंधित सभी राज्यों को एक सप्ताह का अल्टीमेटम दिया है, ताकि अक्टूबर के मध्य तक पूर्णत: सटीक और प्रामाणिक आँकड़े देश के सामने रखे जा सकें। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते आयात और सरकारी बफर स्टॉक के जरिए आपूर्ति के इन समीकरणों को नहीं संभाला गया, तो आने वाले दिनों में आम उपभोग की कई वस्तुएँ और अधिक महँगी हो सकती हैं।

महिला स्टाफ को हटाने के विवाद के बाद एफिल टॉवर के प्रमुख छोड़ेंगे पद

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पेरिस। विश्व प्रसिद्ध एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पैट्रिक ब्रांको रुइवो अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। यह बड़ा कदम एक हिंदू धार्मिक समूह के दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों की जगह पुरुष सहयोगियों को तैनात किए जाने के बाद उपजे भारी विवाद और विरोध प्रदर्शन के परिणामस्वरूप उठाया गया है।

एसईटीई कंपनी का आधिकारिक बयान

एफिल टावर का संचालन करने वाली कंपनी 'एसईटीई' (SETE) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर जानकारी दी है कि साल 2018 से इस प्रतिष्ठित स्मारक के महानिदेशक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे पैट्रिक ब्रांको रुइवो इस साल के अंत में अपने पद से हट जाएंगे। कंपनी द्वारा कराई गई एक आंतरिक जांच में यह बात सामने आई है कि उक्त वीआईपी यात्रा के आयोजन के दौरान गंभीर परिचालन संबंधी खामियां और कमियां थीं, जिसके चलते महिला कर्मचारियों को अस्वीकार्य तरीके से उनके काम से हटाया गया था।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) समूह से जुड़े लगभग 100 लोगों के एक प्रतिनिधिमंडल द्वारा इस महीने की शुरुआत में किए गए एफिल टावर के दौरे से जुड़ा है। आरोप है कि इस दौरे के दौरान महिला कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह पुरुष सहकर्मियों को तैनात किया गया था।

हिंदू प्रतिनिधिमंडल की मांग और कर्मचारियों का विरोध

घटना के समय एसईटीई ने स्पष्ट किया था कि हिंदू प्रतिनिधिमंडल की ओर से यह अनुरोध किया गया था कि यात्रा का आयोजन इस प्रकार किया जाए जिससे महिलाओं के साथ बातचीत या संपर्क सीमित रखा जा सके।

कर्मचारी संघ के एक प्रतिनिधि ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि महिला कर्मचारियों को उनका कार्यस्थल छोड़ने का निर्देश दिया गया, जिससे उन्हें भारी अपमान महसूस हुआ। स्मारक के कर्मचारियों के मुताबिक, महिला कर्मियों को यह भी निर्देश दिए गए थे कि वे प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी के दौरान कुछ खास क्षेत्रों से न गुजरें और न ही उन्हें पार करें। इस भेदभावपूर्ण रवैये से नाराज कर्मचारियों ने तुरंत हड़ताल कर दी, जिसके चलते कुछ समय के लिए टावर को बंद करना पड़ा था।

दिग्गज राजनेताओं की कड़ी निंदा

इस घटना ने फ्रांस के राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल ला दिया और देश के बड़े राजनेताओं ने इसकी कड़ी निंदा की।

  • फ्रांस की नेशनल असेंबली की अध्यक्ष याएल ब्रौन-पिवेट ने कड़े शब्दों में कहा, "मैं इस बात से पूरी तरह इनकार करती हूं कि विदेशी आगंतुकों की अनुचित मांगों को पूरा करने के लिए महिलाओं को पीछे हटने पर मजबूर किया जाए।"

  • पेरिस के समाजवादी मेयर इमैनुएल ग्रेगोइरे ने इस पूरे घटनाक्रम को 'बेतुका, अन्यायपूर्ण और अस्वीकार्य' करार दिया और इस मामले में दो अलग-अलग स्वतंत्र जांच के आदेश दिए।

1.58 करोड़ लाभार्थियों पर संकट, छह महीने से राशन नहीं लेने वालों की होगी छंटनी

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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पिछले छह महीनों से राशन कार्ड का उपयोग न करने वाले 1.58 करोड़ लाभार्थियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है। पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के डेटाबेस को पूरी तरह दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के लिए अक्टूबर से ऐसे 'साइलेंट' राशन कार्डों पर मिलने वाला राशन कुछ समय के लिए बंद किया जा रहा है।

डेटाबेस सुधार और 1.58 करोड़ कार्डों पर असर

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी खाद्यान्न का लाभ केवल पात्र और असली लाभार्थियों तक ही पहुंचे। डुप्लीकेट, मृत, स्थानांतरित या अयोग्य लोगों के कारण होने वाली खाद्यान्न की बर्बादी को रोकने के लिए PDS डेटाबेस की यह सफाई की जा रही है। संशोधित 'टारगेटेड पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (कंट्रोल) ऑर्डर' के तहत ऐसे निष्क्रिय कार्डों को अस्थायी रूप से ब्लॉक किया जाएगा।

सत्यापन के लिए मिलेगा तीन महीने का समय

अधिकारियों के अनुसार, इन लाभार्थियों के नाम तुरंत डेटाबेस से नहीं हटाए जाएंगे। उन्हें अपनी पात्रता साबित करने के लिए तीन महीने का समय दिया जाएगा। इस अवधि के दौरान संबंधित उपभोक्ता अपनी ई-केवाईसी (e-KYC) और फील्ड वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी करवा सकते हैं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके राशन कार्ड और खाद्यान्न वितरण को दोबारा सुचारू रूप से चालू कर दिया जाएगा।

पहले भी बड़े पैमाने पर हुई है कार्रवाई

खाद्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सरकार डिजिटाइजेशन, आधार सीडिंग और ई-केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं का उपयोग करके पहले भी व्यवस्था में सुधार कर चुकी है। नवंबर 2024 में मंत्रालय ने जानकारी दी थी कि इन अभियानों के माध्यम से सिस्टम से लगभग 5.8 करोड़ अयोग्य या फर्जी राशन कार्ड हटाए जा चुके हैं।

 

10 लोगों की जान लेने वाले हाथी को जंगल से हटाने की तैयारी, DFO ने मांगी अनुमति

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अंबिकापुर| छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ महीनों से एक आक्रामक जंगली हाथी के आतंक ने स्थानीय लोगों को दो दशक पुराने उन खौफनाक दिनों की याद दिला दी है, जब क्षेत्र में नक्सलियों के भय के कारण लोग शाम ढलते ही अपने घरों में दुबक जाते थे। सरगुजा संभाग के बलरामपुर और सूरजपुर जिलों के जंगलों में अकेले विचरण कर रहे इस हाथी ने अब तक लगभग 10 निर्दोष लोगों को कुचलकर मौत के घाट उतार दिया है।

इस भयंकर वन्यजीव संघर्ष और ग्रामीणों में लगातार सुलगते आक्रोश को देखते हुए स्थानीय वन मंडल अधिकारी (DFO) ने राज्य शासन को पत्र भेजकर इस खतरनाक हाथी को ट्रेंकुलाइज कर सुरक्षित रेस्क्यू सेंटर में भेजने की मांग की है। वन विभाग का मानना है कि यदि इस समस्या का त्वरित समाधान नहीं किया गया, तो एक तरफ जहाँ लगातार आम नागरिकों की जान जा रही है, वहीं दूसरी तरफ आक्रोशित ग्रामीणजंस करंट या अन्य तरीकों से हाथी को नुकसान पहुँचा सकते हैं।

तोर पर आक्रामक हो चुका है अकेला जंगली हाथी

सरगुजा संभाग के विभिन्न वन क्षेत्रों में घूम रहा यह अकेला हाथी अब बेहद आक्रामक रुख अपना चुका है। स्थिति यह है कि इसे देखते ही वन विभाग के मैदानी कर्मचारियों के भी होश उड़ जाते हैं, क्योंकि यह सामने आते ही सीधा हमला कर रहा है। सूरजपुर, बलरामपुर और सरगुजा जिलों के अंतर्गत आने वाले कई गाँवों में इस हाथी ने अब तक 10 लोगों की जान ले ली है।

हाल ही में, गत 29 सितंबर की शाम करीब 6:00 बजे बलरामपुर जिले के राजपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत 'परसवर कला' में इस हाथी ने एक स्थानीय ग्रामीण को उस वक्त कुचलकर मार डाला, जब वह अपने घर से मात्र 500 मीटर की दूरी पर स्थित दूसरे मोहल्ले में अपनी बेटी के घर जा रहा था। इस दौरान मृतक की पत्नी भी पीछे-पीछे आ रही थी, जिन्होंने बमुश्किल भागकर अपनी जान बचाई। आसपास मौजूद अन्य ग्रामीण भी जान बचाकर इधर-उधर भागे, तब जाकर उनकी रक्षा हो सकी।

कई परिवारों को उजाड़ चुका है यह खूंखार हाथी

पिछले कुछ महीनों के भीतर परसवर कला, शिवपुर, रेवतपुर और कल्याणपुर जैसे तमाम गाँवों में इस हाथी ने कई लोगों को मौत की नींद सुला दिया है। इस भयानक दहशत के कारण किसानों और ग्रामीणों का अपने खेतों, मवेशियों को चराने जंगलों की ओर जाना पूरी तरह से ठप हो गया है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग फिलहाल अपने मैदानी अमले और 'हाथी मित्रों' के भरोसे किसी तरह हाथियों की निगरानी करने का प्रयास कर रहा है, परंतु इसके बावजूद लगातार हो रही मौतों से त्रस्त ग्रामीण अब इस हाथी को तुरंत पकड़कर क्षेत्र से दूर ले जाने की पुरजोर माँग कर रहे हैं।

इसके अलावा, हालिया घटनाओं के क्रम में पिछले 24 घंटों के भीतर सरगुजा संभाग में हाथियों द्वारा कुचले जाने के कारण दो और लोगों की जान चली गई है। एक अन्य घटना में सूरजपुर जिले के चंदोरा थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले दरहोरा गाँव में 'प्रमोद राजवाड़े' नामक युवक को एक हाथी ने धान के खेत में अचानक घेरकर कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

हाथी को ट्रेंकुलाइज करने की जटिल और सुरक्षित प्रक्रिया (प्रोटोकॉल)

ग्रामीणों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन विभाग इस आक्रामक हाथी को ट्रेंकुलाइज (बेहोश या शांत) करने की योजना बना रहा है। वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, किसी जंगली हाथी को ट्रेंकुलाइज करना एक अत्यधिक तकनीकी, जोखिम भरा और केवल प्रशिक्षित विशेषज्ञों द्वारा किया जाने वाला कार्य है। वन्यजीव संरक्षण कानूनों के तहत बिना सरकारी अनुमति और प्रमाणित वन्यजीव पशु चिकित्सक (Veterinarian) के ऐसा करना पूरी तरह से गैरकानूनी और घातक हो सकता है।

इस पूरी प्रामाणिक बचाव प्रक्रिया (रेस्क्यू प्रोटोकॉल) के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:

  • विशेषज्ञ टीम का गठन: इसमें मुख्य वन्यजीव पशु चिकित्सक, वरिष्ठ वन अधिकारी, कुशल शार्पशूटर और हाथियों को संभालने में माहिर अनुभवी महावत शामिल होते हैं।

  • कुमकी हाथियों की सहायता: अक्सर ऐसे जंगली और उग्र हाथी को काबू में करने या घेरने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित 'कुमकी' हाथियों की मदद ली जाती है।

  • सुरक्षा एवं भीड़ नियंत्रण: स्थानीय पुलिस और प्रशासन के सहयोग से घटनास्थल के आसपास कड़ा पहरा और भीड़ नियंत्रण सुनिश्चित किया जाता है।

  • उचित दवा और खुराक का निर्धारण: हाथी के शारीरिक आकार, उम्र और उसकी मानसिक स्थिति (जैसे गुस्से या मस्ट की स्थिति) के आधार पर शामक (Sedatives) दवाओं की सटीक मात्रा तय की जाती है। इसमें आमतौर पर 'जाइलाजीन' (Xylazine) या 'इटोर्फिन' (Etorphine) जैसी शक्तिशाली दवाओं का उपयोग किया जाता है।

  • डार्टिंग प्रक्रिया और निगरानी: विशेष रूप से डिज़ाइन की गई प्रोजेक्टर गन (डार्ट गन) के जरिए हाथी के शरीर के भारी माँसपेशियों वाले हिस्से पर निशाना साधा जाता है। दवा का असर होने में आमतौर पर 8 से 15 मिनट का समय लगता है, जिसके बाद विशेषज्ञ दल लगातार उसकी निगरानी करता है।

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