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Iran-US Tension: अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान का जवाबी हमला, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

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वाशिंगटन। वैश्विक कूटनीति और मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस समय की सबसे बड़ी हलचल सामने आ रही है, जहां एक तरफ शांति की शुरुआत हुई है तो दूसरी तरफ सैन्य टकराव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस्राइल और चरमपंथी संगठन हिजबुल्ला के बीच महीनों से जारी खूनी संघर्ष को थामने के लिए एक प्रारंभिक शांति समझौते की आधिकारिक घोषणा की है। वाशिंगटन में इस्राइली राजदूत येखिएल लीटर और लेबनानी राजदूत नादा हमादेह द्वारा हस्ताक्षरित यह त्रिपक्षीय फ्रेमवर्क लेबनान की संप्रभुता को बहाल करने और नागरिकों की सुरक्षित घर वापसी की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस ऐतिहासिक शांति वार्ता से ईरान और हिजबुल्ला को पूरी तरह अलग रखा गया है। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य में सिंगापुर के एक मालवाहक जहाज पर हुए ड्रोन हमले के बाद खाड़ी में बारूद सुलग उठा है। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (सेंटकॉम) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के मिसाइल-ड्रोन ठिकानों और तटीय रडार साइट्स पर भीषण हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरानी सशस्त्र बलों ने भी आत्मरक्षा का हवाला देते हुए अमेरिका से जुड़े गुप्त ठिकानों पर ताबड़तोड़ पलटवार करने का दावा किया है।

पश्चिम एशिया का नया समीकरण, संप्रभुता की मांग और नेतन्याहू का रुख

इस द्विपक्षीय फ्रेमवर्क समझौते को लेकर इस्राइल और लेबनान के नेतृत्व की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने कहा है कि इस समझौते का मुख्य लक्ष्य देश की संप्रभुता को बहाल करना और सभी लेबनानी क्षेत्रों से इस्राइली सेना की पूर्ण वापसी सुनिश्चित करना है, ताकि युद्ध और शांति का निर्णय केवल वहां की चुनी हुई सरकार के हाथों में रहे। इसके विपरीत, इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस त्रिपक्षीय समझौते को ईरान के क्षेत्रीय प्रभाव के लिए एक बहुत बड़ा झटका बताया है। नेतन्याहू ने साफ लहजे में स्पष्ट कर दिया है कि भले ही यह प्रारंभिक समझौता हो गया हो, लेकिन जब तक लेबनान की सेना हिजबुल्ला का पूरी तरह से निरस्त्रीकरण (हथियार छीनना) नहीं कर देती, तब तक इस्राइली सेना दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक मोर्चों पर मजबूती से डटी रहेगी।

डोनाल्ड ट्रंप की सख्त चेतावनी, सुलेमानी का जिक्र और ईरान का प्रतिशोध

खाड़ी में बढ़े इस ताजा तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद आक्रामक बयान सामने आया है। एक नीति सम्मेलन को संबोधित करते हुए ट्रंप ने दो टूक कहा कि अमेरिका ने एक ऐसी विधिक रूपरेखा तैयार की है जिसके बाद ईरान चाहकर भी कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं कर पाएगा। ईरान द्वारा हाल ही में किए गए संघर्षविराम उल्लंघन और अमेरिकी हमलों पर बोलते हुए ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान ने अपनी हरकतों पर लगाम नहीं लगाई तो उसे इसके बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व ईरानी सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की हत्या को पिछले 100 वर्षों की सबसे युगांतरकारी घटना बताते हुए दावा किया कि सुलेमानी के खौफ से खुद ईरान का शीर्ष नेतृत्व भी डरा हुआ था। दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए खाड़ी देशों से अपील की है कि वे अपनी धरती का इस्तेमाल अमेरिकी सेना की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों के लिए न होने दें।

होर्मुज जल संकट का वीडियो साक्ष्य और कतर हादसे के पीड़ितों की घर वापसी

सैन्य मोर्चे की बात करें तो अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों का एक प्रामाणिक वीडियो फुटेज जारी किया है। अमेरिका का दावा है कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे सिंगापुर के झंडे वाले मालवाहक जहाज 'एम/वी एवर लवली' पर ईरानी ड्रोनों द्वारा हमला किया गया था, जिसमें भारी नुकसान हुआ है और यह हवाई कार्रवाई उसी का प्रत्यक्ष जवाब है। इन भू-राजनीतिक समीकरणों के बीच एक अन्य दुखद घटनाक्रम में, कतर के रास लाफान औद्योगिक क्षेत्र स्थित बरजान गैस आपूर्ति केंद्र में हुए भीषण विस्फोट में जान गंवाने वाले आठ और भारतीय नागरिकों के पार्थिव शरीरों को कानूनी प्रक्रियाओं के बाद सुरक्षित स्वदेश भेज दिया गया है। दोहा स्थित भारतीय दूतावास के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले कुल 13 लोगों में से अब तक 12 भारतीयों के शव भारत लाए जा चुके हैं, जबकि अस्पताल में भर्ती अन्य घायल नागरिकों को कतर सरकार के सहयोग से उचित चिकित्सा सहायता प्रदान की जा रही है।

जबलपुर में बमबारी से मचा बवाल, शराब ठेकेदार के दफ्तर पर हमला बना चर्चा का विषय

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जबलपुर: संस्कारी धानी जबलपुर में बेखौफ अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हो चुके हैं कि अब वे शहर के सुरक्षित और रिहायशी इलाकों को भी निशाना बनाने से नहीं कतरा रहे हैं। बीती देर रात शहर के एक बेहद पॉश इलाके में उस वक्त सनसनी फैल गई, जब कुछ अज्ञात बदमाशों ने दहशत फैलाने के इरादे से बमबाजी की वारदात को अंजाम दिया। मामला गोरखपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली रतन कॉलोनी का है, जहां संचालित हो रहे प्रसिद्ध शराब ठेकेदार आशीष शिवहरे के मुख्य कार्यालय (ऑफिस) को अपराधियों ने अपनी सनक का निशाना बनाया। आधी रात को हुए इस धमाके की आवाज से पूरी कॉलोनी दहल उठी। सूचना मिलते ही स्थानीय थाना पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। पीड़ित पक्ष की तहरीर पर मामला दर्ज कर लिया गया है।

आधी रात को आए तीन हमलावर, मलबे से मिले देसी बम के अवशेष

घटनाक्रम के अनुसार, रात के करीब 2:00 से 2:30 बजे के बीच जब चारों तरफ सन्नाटा था, तभी एक एक्सेस स्कूटर पर सवार होकर तीन संदिग्ध युवक रतन कॉलोनी में दाखिल हुए। आरोपियों ने सीधे शराब ठेकेदार के दफ्तर के सामने अपनी गाड़ी रोकी और बिना वक्त गंवाए दफ्तर की दीवार को निशाना बनाते हुए एक के बाद एक देसी बम फेंक दिए।

धमाका इतना जोरदार था कि उसकी गूंज दूर तक सुनाई दी और आसपास के लोग सहम गए। वारदात को अंजाम देकर आरोपी तेजी से मौके से फरार हो गए। गोरखपुर थाना पुलिस ने घटनास्थल का बहुत बारीकी से मुआयना किया है और फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाने के लिए जमीन पर बिखरे बम के बारूद और अवशेषों को अपने कब्जे में ले लिया है।

बदमाशों के भागने के रूट को ट्रैक कर रही पुलिस, गश्त बढ़ाई गई

वारदात के बाद मुस्तैद हुई पुलिस ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए चौतरफा घेराबंदी शुरू कर दी है। पुलिस टीम घटना के समय के आधार पर बदमाशों के आने और भागने के संभावित रास्तों (रूट) पर लगे तमाम शासकीय और निजी सीसीटीवी (CCTV) कैमरों के फुटेज को बहुत गहराई से खंगाल रही है।

शराब ठेकेदार के संस्थान में कार्यरत कर्मचारी अशोक मिश्रा ने पुलिसिया पूछताछ में बयान दिया है कि बमबारी करने वाले तीनों युवकों की कद-काठी और हरकतें संदिग्ध थीं, और उनका मुख्य उद्देश्य दफ्तर के भीतर काम करने वाले लोगों में खौफ पैदा करना था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दफ्तर के बाहर लगे कैमरों के अलावा मुख्य चौराहे और तिराहे के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, जिसके आधार पर आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। एहतियात के तौर पर रतन कॉलोनी में पुलिस का पहरा बढ़ा दिया गया है।

रंगदारी (अवैध वसूली) के लिए रची गई थी पूरी साजिश

पुलिस की शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयानों से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि इस पूरी वारदात की पटकथा रंगदारी टैक्स वसूलने के लिए लिखी गई थी। बदमाशों का मकसद किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि दफ्तर पर बम फेंककर कारोबारी पर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाना था, ताकि उनसे आसानी से मोटी रकम वसूली जा सके।

गोरखपुर पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अख्तियार करते हुए स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था को चुनौती देने वाले और शहर की शांति भंग करने वाले किसी भी असामाजिक तत्व को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस का दावा है कि कुछ महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगे हैं और बहुत जल्द ही तीनों आरोपियों को सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।

रविंद्र भाटी किस मुद्दे पर भड़के? बयान से सियासी हलकों में हलचल

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बाड़मेर:

राजस्थान के बाड़मेर में रीको थाना पुलिस द्वारा एक बोलेरो पिकअप का चालान काटना अब एक बड़ा सियासी विवाद बन चुका है। चालान की कॉपी और गाड़ी की तस्वीर सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही हैं, जिसके बाद इस पूरे मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। शिव विधानसभा क्षेत्र के निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने इस पुलिसिया कार्रवाई पर कड़े सवाल खड़े किए हैं और राज्य सरकार के साथ-साथ पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया है।

गाड़ी के शीशे पर लिखे थे नाम, पुलिस ने थमाया चालान

पूरा मामला पिछले दिनों 14 जून का बताया जा रहा है, जब रीको थाना पुलिस ने शिव क्षेत्र के रहने वाले खुशाल (पुत्र चुतराराम) की बोलेरो पिकअप को रोककर उसका चालान काट दिया। दरअसल, इस वाहन के सामने वाले मुख्य शीशे (विंडशील्ड) पर धार्मिक आस्था से जुड़ा 'जय बाबा गरीबनाथ जी' और कुछ अन्य नाम लिखे हुए थे। पुलिस ने इस लिखावट को गाड़ी चलाते समय ड्राइवर के सामने का दृश्य बाधित करने वाला माना और मोटर वाहन अधिनियम (मोटर व्हीकल एक्ट) के नियमों के तहत चालान की कार्रवाई कर दी।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, विधायक भाटी ने सरकार को घेरा

यह प्रशासनिक कार्रवाई उस समय चर्चा में आई जब पीड़ित ने सोशल मीडिया पर गाड़ी और चालान की रसीद साझा कर दी। इसके बाद तुरंत एक्शन लेते हुए विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट लिखी। उन्होंने सीधे तौर पर सवाल उठाया कि राम राज्य में अपने इष्ट देवता का नाम लिखना भी क्या अब अपराध की श्रेणी में आता है? उन्होंने इस पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री कार्यालय और राजस्थान पुलिस के आला अधिकारियों को भी टैग किया। विधायक भाटी ने साफ कहा कि अगर ट्रैफिक नियम लागू करने हैं, तो वे सब पर समान रूप से लागू होने चाहिए और आम जनता की धार्मिक भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पुलिस की सफाई— धार्मिक नाम से आपत्ति नहीं, दृश्यता बाधित होना है वजह

विवाद बढ़ता देख रीको थानाधिकारी चैन प्रकाश ने इस कार्रवाई को लेकर पुलिस का पक्ष सामने रखा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि 14 जून को उपनिरीक्षक लूणदान द्वारा यह चालान काटा गया था। पुलिस का कहना है कि वाहन के मुख्य शीशे पर ऊपर और नीचे काले रंग की काफी चौड़ी पट्टियां चिपकाई गई थीं, जिन पर 'जय बाबा गरीबनाथ जी' के साथ-साथ 'सूरज', 'राहुल' और 'स्वरूप' जैसे कुल पांच नाम लिखे हुए थे। पुलिस के मुताबिक, इतनी बड़ी पट्टियों और नामों की वजह से चालक को सामने का रास्ता देखने में दिक्कत हो रही थी, जो यातायात नियमों के तहत सुरक्षा के लिहाज से गलत है। पुलिस ने साफ किया कि कार्रवाई धार्मिक नाम की वजह से नहीं, बल्कि शीशे पर दृश्यता के नियमों के उल्लंघन के कारण की गई है।

रेलवे कलाकारों की अनोखी पहल, नुक्कड़ नाटक के जरिए बताया नशे का कड़वा सच

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जबलपुर: पश्चिम मध्य रेलवे के जबलपुर रेल मंडल ने सामाजिक सरोकार की दिशा में एक सराहनीय कदम उठाया है। केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत जबलपुर रेल मंडल की सांस्कृतिक अकादमी के प्रतिभावान कलाकारों द्वारा मुख्य रेलवे स्टेशन के परिसर में एक बेहद प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। इस जीवंत और कलात्मक प्रस्तुति के माध्यम से वहां मौजूद सैकड़ों रेल यात्रियों, कुलियों और रेल कर्मचारियों को नशे की लत से होने वाले भयानक कुप्रभावों और पारिवारिक सामाजिक नुकसान के प्रति जागरूक किया गया।

वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में तैयार हुई जनहितैषी रूपरेखा

इस पूरे जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कमल कुमार तलरेजा, वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी वरुण चतुर्वेदी एवं सहायक कार्मिक अधिकारी शची पति नंदन के कुशल मार्गदर्शन और प्रेरणा से किया गया। रेलवे प्रशासन का उद्देश्य स्टेशन जैसे सार्वजनिक और व्यस्ततम स्थल का उपयोग करके समाज के हर वर्ग तक नशे के खिलाफ एक कड़ा और सुस्पष्ट संदेश पहुंचाना था, ताकि लोग इस सामाजिक बुराई से दूरी बना सकें।

कलाकारों के सजीव अभिनय ने बांधा समां, स्टेशन पर जुटी भारी भीड़

स्टेशन परिसर के मुख्य प्लेटफॉर्म पर जब सांस्कृतिक अकादमी के कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति शुरू की, तो देखते ही देखते यात्रियों की भारी भीड़ जमा हो गई। नाटक में शामिल मुख्य कलाकार आत्मानंद श्रीवास्तव, अनिल पाली, रजनीश यादव, ज्ञानेश पसारिए, पूजा बिष्ट, दुर्गेश ठाकुर और मयंक द्विवेदी ने अपने सजीव अभिनय, दमदार संवादों और मर्मस्पर्शी दृश्यों के जरिए समाज में फैल रहे नशे के जाल को बखूबी दर्शाया। कलाकारों ने दिखाया कि कैसे नशा न सिर्फ एक हंसते-खेलते इंसान को बर्बाद करता है, बल्कि पूरे परिवार को लाचारी के दलदल में धकेल देता है।

यात्रियों ने की मुक्त कंठ से सराहना, अधिकारी भी रहे मौजूद

ट्रेन पकड़ने आए और सफर कर रहे तमाम मुसाफिरों ने रेलवे की इस अनूठी पहल और कलाकारों के अभिनय कौशल की तालियां बजाकर जमकर सराहना की। कई यात्रियों का कहना था कि इस तरह के नाटक सीधे आम जनमानस के दिल को छूते हैं और युवाओं को सही राह दिखाने में मददगार साबित होते हैं। इस विशेष और सफल आयोजन के दौरान रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी संजीव सिंह एवं रविंद्र त्रिपाठी भी मुख्य रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

भारतीय रेलवे की बड़ी उपलब्धि, पहली हाइड्रोजन ट्रेन का ट्रायल पूरा

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सोनीपत। हरियाणा के जींद-सोनीपत रेल मार्ग पर देश की प्रथम पर्यावरण-अनुकूल हरित हाइड्रोजन ट्रेन के नियमित संचालन की संभावनाएं काफी प्रबल हो गई हैं। पुरानी दिल्ली से सोनीपत रेल खंड पर शुक्रवार को इस अत्याधुनिक और स्वदेशी तकनीक से निर्मित ट्रेन का अंतिम चरण का अति-उच्च गति (हाई-स्पीड) परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया। दोपहर से लेकर देर शाम तक चले इस सघन अभियान के दौरान ट्रेन ने गति सीमा को बढ़ाते हुए 85 किलोमीटर से लेकर 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैक पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया। दिल्ली स्थित उत्तर रेलवे मुख्यालय के प्रधान मुख्य अभियंता (प्रिंसिपल चीफ इंजीनियर) की सीधी निगरानी में वरिष्ठ रेल अधिकारियों और विशेषज्ञ तकनीकी विंग ने ट्रेन की इलेक्ट्रिकल वायरिंग, व्हील बैलेंसिंग, आधुनिक सिग्नल प्रणाली और आपातकालीन ब्रेकिंग सिस्टम जैसे अत्यंत कड़े सुरक्षा मानकों की गहनता से जांच की। प्रातः काल 9:10 बजे इस ट्रेन को जींद जंक्शन से दो डीजल इंजनों की सहायता से 75 किमी/घंटा की नियंत्रित गति से दिल्ली ले जाया गया था, जिसके उपरांत दोपहर 12 बजे के बाद इस रैक ने सोनीपत के लिए अपना मुख्य ख्याल रन आरंभ किया। दोपहर 1:25 बजे सोनीपत रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या 3 पर आगमन के बाद ट्रेन को लगभग 29 मिनट के लिए रोका गया ताकि वंदे भारत एक्सप्रेस सहित तीन अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों को प्राथमिकता के आधार पर रास्ता (क्लियरेंस) दिया जा सके और इसके पश्चात ट्रेन ने अप-डाउन ट्रैक पर देर शाम तक कुल चार फेरे लगाए।

चार चरणों में गति का सफल परीक्षण और विवरण

इस अत्याधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन की तकनीकी क्षमता और सुरक्षा मानकों को परखने के लिए रेलवे बोर्ड के निर्देश पर इसकी गति को चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया गया था। पहले दौर के परीक्षण में ट्रेन को 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रैक पर दौड़ाया गया, जबकि दूसरे राउंड में इसकी स्पीड बढ़ाकर 100 किलोमीटर प्रति घंटा की गई। इसके बाद तीसरे चरण के ट्रायल में ट्रेन ने 110 किलोमीटर प्रति घंटे की गति छुई और अंततः चौथे व अंतिम राउंड में इसे 120 किलोमीटर प्रति घंटे की अति-उच्च गति पर सफलतापूर्वक परखा गया। ज्ञात हो कि भारतीय रेल प्रशासन इस महत्वाकांक्षी और शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए पिछले 4 महीनों से निरंतर कड़ा अभ्यास और विभिन्न प्रकार के तकनीकी ट्रायल आयोजित कर रहा है।

तकनीकी विंग की हरी झंडी और बुनियादी ढांचे की समीक्षा

रेलवे के आंतरिक सूत्रों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस लंबी अवधि के परीक्षणों के बाद ट्रेन के इंजन, ईंधन सेल (फ्यूल सेल) और आंतरिक यांत्रिक प्रणालियों से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं को पूरी तरह से दुरुस्त और त्रुटिहीन कर लिया गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य देश में प्रदूषण मुक्त सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है, जिसके लिए जींद और सोनीपत के बीच विशेष बुनियादी ढांचे का विकास किया गया है। तकनीकी विंग ने अपनी अंतिम समीक्षा रिपोर्ट में इस ट्रेन को यात्री सेवाओं के लिए पूरी तरह से सुरक्षित और उपयुक्त पाया है।

नियमित परिचालन की तैयारी और हरी झंडी का इंतजार

इस अंतिम और सफल हाई-स्पीड ट्रायल के संपन्न होने के साथ ही सोनीपत-जींद रेल खंड के दैनिक यात्रियों का लंबा इंतजार अब समाप्त होने की कगार पर है। रेल मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इस ऐतिहासिक ट्रेन सेवा को नियमित रूप से शुरू करने के लिए आगामी कुछ दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से औपचारिक समय मांगा जाएगा। जैसे ही प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से तिथि निर्धारित कर दी जाएगी, वैसे ही देश की इस पहली पर्यावरण-अनुकूल हाइड्रोजन ट्रेन को एक भव्य समारोह में हरी झंडी दिखाकर वाणिज्यिक परिचालन के लिए रवाना कर दिया जाएगा।

ओड़िया सिनेमा को बड़ा झटका, मशहूर सिनेमैटोग्राफर दिलीप राय का 72 वर्ष की उम्र में निधन

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भुवनेश्वर:ओड़िया फिल्म इंडस्ट्री (ओलिवुड) से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। सिनेमा जगत के दिग्गज और जाने-माने सिनेमैटोग्राफर दिलीप राय अब हमारे बीच नहीं रहे। 72 वर्ष की आयु में उन्होंने भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में शुक्रवार की देर रात अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरी ओड़िया फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। वे अपने पीछे अपनी पत्नी और तीन बेटियों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

ब्रेन स्ट्रोक के बाद चल रहा था इलाज

पारिवारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ दिनों पहले दिलीप राय को अचानक दिल का दौरा (हृदयाघात) पड़ा था, जिसके बाद उन्हें ब्रेन स्ट्रोक भी हो गया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें तुरंत भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शनिवार को कटक और भुवनेश्वर से जुड़े फिल्म उद्योग के तमाम कलाकारों और करीबियों की मौजूदगी में पुरी के पवित्र स्वर्गद्वार में उनका पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार संपन्न किया गया।

कटक से शुरू हुआ सफर और बेंगलुरु से ली फिल्म मेकिंग की शिक्षा

दिलीप राय का जन्म 27 जुलाई 1954 को कटक में हुआ था और उन्हें बचपन से ही कला के प्रति गहरा लगाव था। साल 1980 के दशक में ओड़िया सिनेमा के प्रख्यात निर्देशक मनमोहन महापात्र की प्रेरणा और उनके मार्गदर्शन में दिलीप राय ने कैमरा और सिनेमैटोग्राफी की दुनिया में कदम रखा था। अपनी इस कला को और निखारने के लिए उन्होंने बेंगलुरु स्थित प्रतिष्ठित फिल्म संस्थान से सिनेमैटोग्राफी का प्रोफेशनल कोर्स पूरा किया, जिसके बाद उन्होंने ओड़िया सिनेमा को कई बेहतरीन और यादगार फिल्में दीं। उनके विजुअल्स और कैमरे के काम को इंडस्ट्री में हमेशा याद रखा जाएगा।

BJP सांसद मेधा कुलकर्णी का दावा, ‘ब्राह्मण होने की वजह से मुझे आगे बैठने से रोका गया’

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मुंबई। महाराष्ट्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के भीतर एक नया आंतरिक गतिरोध और गंभीर विवाद उजागर हुआ है। भाजपा की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने अपनी ही पार्टी के स्थानीय विधायक अभिमन्यु पवार पर सनसनीखेज आरोप मढ़े हैं। कुलकर्णी का दावा है कि पुणे शहर में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह के दौरान उन्हें महज उनकी ब्राह्मण पहचान के कारण मुख्य मंच की अग्रिम पंक्ति (पहली लाइन) में बैठने से दुर्भावनापूर्ण तरीके से रोका गया। दूसरी ओर, आरोपित विधायक अभिमन्यु पवार ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस पूरे घटनाक्रम को मात्र एक प्रशासनिक गलतफहमी का नतीजा करार दिया है।

मराठा मेधावी छात्र सम्मान समारोह और प्रोटोकॉल पर रार

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह पूरा विवाद पुणे में आयोजित उस गौरव समारोह के दौरान उत्पन्न हुआ, जिसमें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) सहित अन्य कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करने वाले मराठा समुदाय के मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया जा रहा था। इस विशेष कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। सांसद मेधा कुलकर्णी का तर्क है कि आयोजन में कई कैबिनेट मंत्रियों की अनुपस्थिति के चलते, तय शासकीय प्रोटोकॉल और वरिष्ठता के नियमों के अनुसार पहली पंक्ति की सोफा सीट पर बैठना उनका वैधानिक अधिकार था।

जातिगत टिप्पणी और सिटिंग अरेंजमेंट को लेकर तीखी बहस

सांसद मेधा कुलकर्णी ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया कि कार्यक्रम स्थल पर कोई अन्य सांसद मौजूद नहीं था, जिसके कारण वहां तैनात प्रोटोकॉल अधिकारियों का भी यही मत था कि उन्हें अग्रिम पंक्ति में स्थान दिया जाए। कुलकर्णी ने आरोप लगाया कि विधायक अभिमन्यु पवार स्वयं अग्रिम दीर्घा में बैठना चाहते थे और जब ड्यूटी पर मौजूद अधिकारियों ने स्थापित नियमों का हवाला दिया, तो पवार ने कथित तौर पर वहां जाति का मुद्दा उठा दिया। सांसद का दावा है कि विधायक ने अधिकारियों से कहा कि चूंकि यह आयोजन विशेष रूप से मराठा समाज के युवाओं के लिए है, इसलिए यदि एक ब्राह्मण चेहरा पहली पंक्ति में बैठेगा तो समाज में अनावश्यक विवाद पैदा हो सकता है।

विधायक पवार की सफाई और आंतरिक मतभेदों की गूंज

इन तीखे आरोपों पर अपनी त्वरित प्रतिक्रिया देते हुए विधायक अभिमन्यु पवार ने कहा कि उनके बयान को पूरी तरह तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। पवार के मुताबिक, उन्होंने केवल इतना सुझाव दिया था कि अण्णासाहेब पाटिल आर्थिक मागास विकास महामंडल के अध्यक्ष नरेंद्र पाटिल को पहली पंक्ति में आसीन किया जाए, जबकि बाकी के सभी सांसदों और विधायकों को सम्मानपूर्वक दूसरी पंक्ति में बैठना चाहिए। उन्होंने बल देकर कहा कि इस पूरी बातचीत में जाति सूचक या भेदभाव जैसी कोई बात ही नहीं थी और वहां उपस्थित अनेक गणमान्य लोग इसके गवाह हैं। बहरहाल, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने अभी तक इस पारिवारिक कलह पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन इस सार्वजनिक विवाद ने सूबे की राजनीति में जातीय संवेदनशीलता की बहस को हवा दे दी है।

PM मोदी का नया ‘मास्टर प्लान’? नीतीश कुमार को लेकर सियासी अटकलें

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पटना। बिहार की सियासत में एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में आ गए हैं। सियासी गलियारों में यह चर्चा पुरजोर है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित कैबिनेट विस्तार में नीतीश कुमार का नाम मंत्रियों की सूची में सबसे आगे चल रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने के पीछे भाजपा उत्तर प्रदेश के कुर्मी वोट बैंक को साधने की रणनीति बना रही है। हालांकि, इसके समानांतर एक दूसरी थ्योरी यह भी चल रही है कि इस कदम के जरिए नीतीश कुमार को बिहार की सक्रिय राजनीति से दूर करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि राज्य की सत्ता पर उनकी पकड़ को शिथिल किया जा सके।

मुख्यमंत्री पद का त्याग और केंद्रीय मंत्री के रूप में कद का आकलन

बिहार के राजनीतिक हलकों में यह यक्ष प्रश्न तैर रहा है कि यदि नीतीश कुमार केंद्र में मंत्री पद की भारी-भरकम जिम्मेदारी संभालने में सक्षम हैं, तो उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री का पद क्यों छोड़ा। विदित हो कि कुछ समय पहले उनके स्वास्थ्य, सार्वजनिक भाषणों और कार्यक्रमों के दौरान उनके आचरण को लेकर कई तरह के सवाल उठे थे, जिसके बाद राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की कमान संभाली। राजनीतिक विश्लेषकों का तर्क है कि जब भी नीतीश कुमार के भविष्य के राजनीतिक पुनर्वास की बात होती थी, तो उनके कद के अनुरूप उपराष्ट्रपति, राष्ट्रपति या एनडीए संयोजक जैसे बड़े पदों की चर्चा की जाती थी। ऐसे में उन्हें महज एक केंद्रीय मंत्री बनाना उनके लंबे राजनीतिक योगदान का प्रमोशन तो कतई नहीं कहा जा सकता।

दिल्ली का स्थायी ठिकाना और बिहार यात्रा पर संशय के बादल

चर्चाओं के अनुसार, यदि नीतीश कुमार केंद्रीय मंत्री बनते हैं तो उनका कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत हो जाएगा और परिणाम-आधारित कार्यशैली के कारण उन्हें देश के अन्य राज्यों को भी पर्याप्त समय देना होगा। ऐसी स्थिति में केवल बिहार उनकी इकलौती प्राथमिकता नहीं रह जाएगा। सबसे बड़ा संकट उनके उस वादे पर मंडरा रहा है जो उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ते समय अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और सूबे की जनता से किया था। जदयू का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने घोषणा की थी कि वे जल्द ही जमीनी हकीकत जानने के लिए बिहार की यात्रा पर निकलेंगे। परंतु, केंद्र की राजनीति में सक्रिय होने के बाद उनके इस जनसंवाद और विकास कार्यों की व्यक्तिगत मॉनिटरिंग वाली योजना पर पूरी तरह ग्रहण लग सकता है।

सक्रिय राजनीति से दूर रखने और सांगठनिक पिंजरे की कूटनीति

राजनैतिक विश्लेषकों का एक धड़ा इस पूरे घटनाक्रम को नीतीश कुमार के खिलाफ एक सोची-समझी सांगठनिक रणनीति के तौर पर देख रहा है। विश्लेषकों के अनुसार, जदयू और उसके सहयोगी दल के भीतर ही एक ऐसा गुट सक्रिय है जो नीतीश कुमार को बिहार की मुख्य राजनीति से बेदखल कर दिल्ली स्थानांतरित करना चाहता है, ताकि राज्य में भाजपा को अपने पैर पसारने का खुला मैदान मिल सके। ठीक ऐसा ही कुछ निशांत कुमार के साथ भी देखने को मिला था, जिन्हें पार्टी संगठन को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी देने के बजाय स्वास्थ्य मंत्रालय के विभागीय कार्यों में उलझा दिया गया। जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार को दिल्ली की जिम्मेदारी सौंपना और निशांत कुमार को विभाग में व्यस्त रखना, दरअसल डूबती हुई पार्टी को बचाने की कवायद नहीं बल्कि दोनों कद्दावर नेताओं को 'मंत्री पद' के पिंजरे में कैद कर बिहार की सियासत से दूर रखने की एक सोची-समझी बिसात है।

केतन मर्डर केस में नया खुलासा, क्रिकेट के मैदान से शुरू हुई थी चेतन और सिया की कहानी

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पुणे। महाराष्ट्र के पुणे के चर्चित कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिसिया तफ्तीश में अब यह साफ हो गया है कि मुख्य आरोपी चेतन चौधरी और मुख्य संदेही गोयल परिवार के बीच पहली कड़ी कैसे जुड़ी थी। पुलिस के आधिकारिक दावों के अनुसार, क्रिकेट के खेल में गहरी और साझा रुचि होने के कारण आरोपी चेतन चौधरी और मृत कारोबारी की मंगेतर सिया के भाई साहिल के बीच घनिष्ठता बढ़ी थी। इसी दोस्ती का फायदा उठाकर साहिल के माध्यम से चेतन की मुलाकात सिया से हुई थी। दूसरी ओर, लोहागढ़ किले में हुई इस संदिग्ध मौत की कड़ियों को जोड़ने में जुटे जांच अधिकारियों ने शुक्रवार को साहिल से करीब 10 घंटे तक कड़ी पूछताछ की, जिसमें उसने स्वीकार किया कि वह सिया और चेतन के गुप्त संबंधों से पिछले कई महीनों से वाकिफ था और केतन से सगाई होने के बाद उसने अपनी बहन से इस रिश्ते को तत्काल खत्म करने की मिन्नतें भी की थीं।

क्रिकेट पिच से शुरू हुआ था संपर्क और परिजनों की भूमिका की जांच

मामले की तह तक जाने में जुटे जांचकर्ताओं के मुताबिक, सिया के भाई साहिल और आरोपी चेतन की पहली मुलाकात वर्ष 2024 में एक स्थानीय क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि दोनों अक्सर साथ में क्रिकेट खेला करते थे, जिसका फायदा उठाकर चेतन ने बेहद चालाकी से साहिल के जरिए उसकी बहन सिया तक अपनी पहुंच बनाई। खेल के मैदान से शुरू हुआ यह साधारण सा परिचय धीरे-धीरे प्रगाढ़ दोस्ती में बदल गया और चेतन का गोयल परिवार के घर पर आना-जाना शुरू हो गया। लंबी पूछताछ के दौरान पुलिस मुख्य रूप से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि साहिल को दोनों के इस प्रेम प्रसंग की भनक असल में कब लगी थी और क्या घर के अन्य वरिष्ठ सदस्यों को भी इस समानांतर रिश्ते की पूरी जानकारी थी।

हजारों कॉल्स, बाली का प्री-वेडिंग प्लान और विग को लेकर उपजा विवाद

चौंकाने वाली बात यह है कि जब एक तरफ केतन अग्रवाल और सिया की शादी की रस्में तथा तैयारियां पूरे शबाब पर थीं, तब भी सिया और चेतन लगातार एक-दूसरे के संपर्क में बने हुए थे। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि सिया एक आदर्श मंगेतर की तरह शादी के आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही थी, केतन के परिजनों से आत्मीयता से मिल रही थी और उसने केतन के साथ बाली (इंडोनेशिया) में एक भव्य प्री-वेडिंग फोटोशूट की पूरी रूपरेखा भी तैयार कर ली थी। हालांकि, इसी दौरान बैकग्राउंड में जनवरी से जून के बीच सिया और चेतन ने आपस में 2,000 से अधिक बार फोन पर बात की, जिसका कुल समय लगभग 238 घंटे दर्ज किया गया है। इसके अलावा, पुलिस सूत्रों ने बताया कि सिया अंदरखाने केतन से विवाह के लिए बिल्कुल राजी नहीं थी, क्योंकि उसे पता चला था कि केतन के सिर पर बाल कम हैं और वह विग का इस्तेमाल करता है, जबकि केतन के परिवार का तर्क है कि उन्होंने गोयल परिवार को पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि केतन बालों का एक छोटा सा पैच लगाता है।

लोहागढ़ किले का खौफनाक घटनाक्रम और संदिग्ध हत्या की थ्योरी

इस पूरे रहस्यमयी हत्याकांड की शुरुआत 18 जून को हुई थी, जब पुणे की एक प्रतिष्ठित रियल एस्टेट कंपनी के निदेशक केतन अग्रवाल की ऐतिहासिक लोहागढ़ किले की पहाड़ी से नीचे गिरने के कारण दर्दनाक मौत हो गई थी। पुलिस प्राथमिक साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर इसे एक सोची-समझी साजिश और हत्या का मामला मानकर आगे बढ़ रही है। इस अपराध में संलिप्तता के आरोप में केतन की मंगेतर सिया और उसके प्रेमी चेतन चौधरी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और दोनों वर्तमान में सख्त पुलिस रिमांड पर हैं। अब जांच एजेंसियां इस कूटनीतिक कत्ल के पीछे छिपे उन सभी चेहरों और चेतावनी के संकेतों की तलाश कर रही हैं, जिन्हें शायद घटना से पहले परिवार के किसी सदस्य ने भांप लिया था लेकिन नजरअंदाज कर दिया।

राजस्थान के जय मूंदड़ा ने आयरलैंड के लिए किया कमाल, डेब्यू की पहली ही गेंद पर झटका विकेट

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भारत और आयरलैंड के बीच खेले गए टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबले में जहां एक तरफ आयरिश टीम ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, वहीं दूसरी तरफ इस मैच में एक ऐसा सितारा चमका जिसका दिल भारतीय है लेकिन जर्सी आयरलैंड की थी। भारतीय मूल के 29 वर्षीय तेज गेंदबाज जय मूंदड़ा ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपने पदार्पण (डेब्यू) मैच में ही अपनी घातक गेंदबाजी से तहलका मचा दिया। मूल रूप से राजस्थान में जन्मे इस खिलाड़ी ने अपने करियर के पहले ही इंटरनेशनल मैच में वह कारनामा कर दिखाया, जिसका सपना हर गेंदबाज देखता है। जय मूंदड़ा ने मैच में अपनी पहली ही अंतरराष्ट्रीय गेंद पर भारत के स्टार बल्लेबाज संजू सैमसन के स्टंप्स बिखेर कर उन्हें क्लीन बोल्ड कर दिया।

टोंक से डबलिन का सफर: उच्च शिक्षा के लिए छोड़ा था देश, ऐसे मिली टीम में जगह

जय मूंदड़ा के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर बनने की कहानी बेहद दिलचस्प और प्रेरणादायक है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के समीप स्थित एक छोटे से शहर टोंक में जन्मे जय ने साल 2021 में एक समय क्रिकेट की दुनिया से दूरी बना ली थी। वे इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन विषय में अपनी मास्टर डिग्री (एमटेक) की पढ़ाई पूरी करने के लिए आयरलैंड चले गए थे।

आयरलैंड पहुंचने के बाद शिक्षा के साथ-साथ उनका क्रिकेट के प्रति प्रेम फिर से जागा और उन्होंने वहां के स्थानीय लेनस्टर क्रिकेट क्लब (डबलिन) के लिए खेलना शुरू कर दिया। साल 2023 में वे आयरिश सीनियर कप जीतने वाली चैंपियन टीम के मुख्य सदस्य रहे। इसके बाद वे घरेलू क्रिकेट में लगातार 'लेनस्टर लाइटनिंग' के लिए शानदार प्रदर्शन करते रहे। जय मूंदड़ा को आयरलैंड की राष्ट्रीय टीम में शामिल होने का मौका तब मिला, जब उनके मुख्य तेज गेंदबाज जोश लिटिल चोटिल होकर सीरीज से बाहर हो गए।

डेब्यू मैच को जिंदगी भर संजोकर रखेंगे जय, शिवम दुबे को भी बनाया शिकार

जय मूंदड़ा ने इस मिले हुए सुनहरे मौके को दोनों हाथों से लपका और भारत के मजबूत बैटिंग लाइनअप के खिलाफ अपने कोटे के ओवरों में महज 26 रन खर्च करके 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। पहली गेंद पर संजू सैमसन को आउट करने के बाद उन्होंने खतरनाक बल्लेबाज शिवम दुबे को भी पवेलियन की राह दिखाई। आयरलैंड की इस ऐतिहासिक जीत में उनकी किफायती और आक्रामक गेंदबाजी का योगदान निर्णायक रहा।

मैच के बाद भावुक होते हुए जय मूंदड़ा ने कहा, "यह मंच मेरे, मेरे परिवार और मेरे साथी खिलाड़ियों के लिए बहुत बड़ा था। मैदान पर सभी मेरा हौसला बढ़ा रहे थे। मैंने बस खुद को शांत रखने और अपनी लाइन-लेंथ पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश की, क्योंकि इसी सादगी ने मुझे आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। भारत जैसी दिग्गज टीम के खिलाफ पहली ही गेंद पर विकेट मिलना किसी सपने के सच होने जैसा है। हालांकि मैं शुरुआती सफलता के बाद ज्यादा भावुक नहीं होना चाहता था, क्योंकि मैच में तब 9 विकेट और लेने बाकी थे। इस पल को मैं जीवन भर संजोकर रखूंगा।"

मां की ममता: भारत की हार से निराश, लेकिन बेटे की सफलता पर गर्व से चौड़ा हुआ सीना

जय मूंदड़ा के इस शानदार प्रदर्शन के बाद राजस्थान में रह रहे उनके परिवार में जश्न का माहौल है। जय की मां विद्या मूंदड़ा ने एक बातचीत में अपने मिले-जुले जज्बात जाहिर करते हुए कहा, "एक भारतीय होने के नाते मुझे इस बात का दुख जरूर है कि हमारी भारतीय टीम मैच हार गई, लेकिन एक मां के तौर पर मेरे बेटे ने मैदान पर जो कमाल किया, उससे उसने हमारे परिवार, राजस्थान और पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। हमें उस पर बेहद नाज है।"

उन्होंने जय के बचपन के दिनों को याद करते हुए बताया, "बचपन में जो भी उसे खेलता देखता था, यही कहता था कि इसे बड़ा क्रिकेटर बनना चाहिए। हालांकि, 10वीं कक्षा के बाद उसके पिता की इच्छा थी कि वह पहले अपनी उच्च शिक्षा (डिग्री) पूरी करे और फिर खेल पर ध्यान दे। जय ने अपने पिता के सपने का सम्मान करते हुए पहले अपनी पढ़ाई पूरी की और उसके बाद एक क्रिकेट अकादमी ज्वाइन कर अपने जुनून को आगे बढ़ाया, जिसका सुखद परिणाम आज पूरी दुनिया के सामने है।"

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